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नारी शक्ति अभियान कार्यक्रम में विदेश मंत्री की टिप्पणी

मार्च 06, 2020

मेरे सहकर्मी मंत्रीगण,
स्मृति ईरानी जी,
मुरलीधरन जी,
देबश्री चौधरी जी,
भारत सरकार के सचिवगण,
राजदूत, उच्चायुक्त, सहकर्मीगण।


1. 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व इस कार्यक्रम के लिए आज दोपहर को आप सभी के साथ जुड़ना बहुत ही खुशी की बात है। इसलिए, सबसे पहले मैं मुख्य संबोधन के लिए सहमति प्रदान करने के लिए महिला और बाल विकास मंत्री, श्रीमती स्मृति ईरानी का धन्यवाद करता हूं। साथ ही साथ मैं राज्य मंत्री मुरलीधरन जी और देबश्री चौधरी जी का भी आभार प्रकट करता हूँ तथा हमारे उन सभी सचिवों की भी प्रशंसा करता हूँ जिन्होंने इस आयोजन को संभव बनाया है। और, ज़ाहिर है, आप सभी की भी, क्योंकि आपकी उपस्थिति आज इस विषय में आपकी रुचि को प्रदर्शित करती है।

2. कूटनीति की दुनिया के इंसान के रूप में, हम सभी जानते हैं कि राष्ट्रों का प्रभाव अंतिम रूप से घर में उनकी ताकत पर निर्भर करता है। इसलिए, यहां तक कि जब आप विदेशों में भारत की ऊर्जा और गतिविधियों का आकलन करते हैं, तो मुझे यकीन है कि आपके दिमाग का एक हिस्सा हमारे समाज में होने वाले बदलावों को भी देख रहा होता है। और जो बिना किसी अतिशयोक्ति के, हाल के वर्षों में परिवर्तनकारी रहे हैं। चाहे वह बैंक खातों, शौचालयों, गैस कनेक्शनों या स्कूल में दाखिलों की अधिकाधिक संख्या हो या वास्तव में बड़ी संख्या में ऐसे जन जागरूकता अभियान हों जिनमें से कुछ ने विकास का उल्लेख अब जाकर किया है, तथा जिन्होंने हमारी सोच को प्रभावित किया है, कि यह देश कुछ साल पहले वाले देश से बहुत अलग है।

3. जैसे कि अगर किसी को विदेश में भारत के बारे में समझाने का काम दिया गया है, तो मैं अक्सर इस बात को चिह्नित करता हूं कि हाल के वर्षों में उच्च प्रोफ़ाइल अपने घर के बारे में अधिक आकांक्षाओं और इनकी प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय आत्मविश्वास से परिलक्षित होता है। न्यू इंडिया की मानसिकता समावेशी विकास और गहन सुधार वाली है जो एक साथ मिलकर दीर्घकालिक बदलाव लाएंगे। यह प्रौद्योगिकी के अधिक दोहन, विशेष रूप से डिजिटलीकरण की शक्ति पर केंद्रित है। यह स्मार्ट शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए भी उतना ही समर्पित है जितना कि ग्रामीण क्षेत्र की बेहतरी के लिए। विविध क्षेत्रों में आधुनिक बुनियादी ढाँचा बनाने की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट है। और यह सब जलवायु परिवर्तन की चुनौती को संबोधित करते हुए किया जाना चाहिए। शासन को लेकर दृष्टिकोण समग्र है और दीर्घकालिक समस्याओं- चाहे वे जिस क्षेत्र में भी हों- को टालने के बजाय उनका समाधान किया जा रहा है। तो यह वास्तव में बड़े विचारों, साहसिक उपायों और मजबूत कार्यान्वयन का युग है।

4. अब, इस प्रयास का ह्रदय भारत के संसाधन आधार पर केंद्रित है- और इस देश के मामले में वह मानव संसाधन है। सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति आज हमारे राष्ट्रीय विकास का एक प्रमुख उद्देश्य है। अगर हम पिछले कुछ दशकों में तेजी से विकसित हुए अन्य समाजों को देखते हैं, तो हमारे मानव विकास सूचकांकों में सुधार का महत्व स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। यह, निश्चित रूप से, हमारी व्यापक राष्ट्रीय शक्ति के पैमाने और गुणवत्ता को निर्धारित करेगा। लेकिन उतनी ही महत्वपूर्ण बात ये भी है, कि इसके परिणामस्वरूप हमारी प्रतिभा के विस्तार का दुनिया के लिए एक गहरा महत्व है। यह ज्ञान अर्थव्यवस्था के विकास और डिजिटल नवाचार की गति में बड़ा अंतर ला सकता है। और जाहिर है, हमारी संख्या को देखते हुए, एसडीजी में भारत की सफलता दुनिया की सफलता के लिए मूल शर्त है।

5. पहले पाँच एसडीजी लक्ष्य गरीबी उन्मूलन, भूख उन्मूलन, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लैंगिक समानता हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पहले चार लक्ष्य बहुत हद तक पांचवें लक्ष्य की प्राप्ति पर निर्भर करते हैं। वास्तव में, केवल चार ही नहीं, बल्कि स्वच्छ जल और स्वच्छता, स्वच्छ ऊर्जा, सभ्य कार्य और आर्थिक विकास या उद्योग और नवाचार के लक्ष्य सभी महत्वपूर्ण रूप से महिलाओं के योगदान से निर्धारित होते हैं। आधे आसमान को अपनी मुट्ठी में करने वाली महिलाओं को लेकर की गई बातें, चाहे वे कुछ भी हों, उनकी सामाजिक केंद्रीयता को कम करके आंकती है। यह अहसास आज लैंगिक समानता और महिला शक्ति के क्षेत्र में हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाता है। यह सन्देश कि महिलाएं आज एक नए भारत की अगुवाई कर रही हैं, केवल एक नारा नहीं है। यह इस सरकार का एक मौलिक और कार्रवाई योग्य विश्वास है। और इसे संभव बनाने के प्रयासों का नेतृत्व मंत्री स्मृति ईरानी कर रही हैं, जिन्हें मैं अब अपना मुख्य संबोधन देने के लिए आमंत्रित करूंगा।

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