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कोविड-19 के कारण ईरान में फंसे भारतीयों पर लोकसभा में विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया (12 मार्च, 2020)

मार्च 13, 2020

डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर: महोदय, मैं विभिन्न माननीय सदस्यों द्वारा की गई टिप्पणियों का संक्षेप में जवाब दूंगा।

सबसे पहले मैं श्री टी. आर. बालू द्वारा ईरान में फंसे हुए मछुआरों और उनके लिए क्या व्यवस्थाएं हैं, इस सवाल का जवाब दूंगा। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि, अभी हमारे समक्ष किसी भी मछुआरों के कोरोनावायरस से संक्रमित होने का कोई भी मामला नहीं आया है, लेकिन उन्हें भोजन और अन्य चीजें प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। हमारा वाणिज्य दूतावास उनके संपर्क में है और उनके साथ संपर्क बना रहेगा। हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और हम उनके तथा अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए एक नोडल केंद्र स्थापित कर रहे हैं।

श्री एंटनी ने कोच्चि में स्क्रीनिंग न होने का मुद्दा उठाया। मेरा ऐसा मानना नहीं है। मेरा मानना यह है कि सभी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग स्थापित की गई है। हमने तब से इसे कड़ा कर दिया है और मैं आपको मंत्रियों के समूह की ओर से आश्वासन दे सकता हूं कि इस मुद्दे को हमारे एजेंडे में प्रमुखता दी जा रही है। श्री प्रेमचंद्रन ने फिर से परीक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने हवाई अड्डों पर फंसे लोगों का भी जिक्र किया। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम आज हवाई अड्डों पर फंसे लोगों की मदद कर रहे हैं। हम लोगों में घबराहट पैदा होने की भावना को रोक रहे हैं। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारत ने प्रतिबंध नहीं लगाया है। भारत ने कहा है कि अगर कुछ देशों के लोग जो यहां आ रहे हैं, तो उन्हें क्वारंटाइन से गुजरना पड़ेगा - कुछ मामलों में क्वारंटाइन अनिवार्य है और कुछ मामलों में क्वारंटाइन विवेकाधीन है - और जो भारतीय नागरिक वापस आ रहे हैं, जाहिर है उन्हें भी वापस क्वारंटाइन की स्थिति में रखा जाएंगा, अगर ऐसा आवश्यक हो।

प्रो. सौगात रे ने इस मुद्दे को फिर से उठाते हुए कहा कि हम नए वीजा जारी नहीं कर रहे हैं। हमने इस मामले में जो किया है, वह यह है। हमने कुछ देशों के वीजा की कुछ श्रेणियों को खत्म कर दिया है, जहां कोरोनोवायरस के मामले ज्यादा है। हमारा देश एकमात्र ऐसा देश नहीं है जिसने ऐसा किया है। बहुत सारे अन्य देश भी हैं जिन्होंने ऐसा किया है। लेकिन, हमने यह कदम जल्द उठा लिया था। उन्होंने पूछा कि कोरिया, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में क्या हो रहा है। हमने वुहान, और ईरान या इटली में जिस तरह की संकट की स्थिति हमने देखी है, वह हमारे यहां नहीं है। इसलिए, हमें प्राथमिकता देनी होगी। हमें यह देखना होगा कि समस्या कहां अधिक गंभीर है और किस तरह के लोग प्रभावित हैं। उदाहरण के लिए, तीर्थयात्री प्रभावित होते हैं क्योंकि वे उन परिस्थितियों में रहते हैं जहां बीमारी का प्रसार अधिक होना संभव है; छात्र प्रभावित होते हैं क्योंकि छात्रावास बंद हो जाते हैं। हमें यह देखना होगा कि हमें कहां ध्यान देना चाहिए और कहां संसाधन दिए जाने चाहिए। मुझे लगता है, वे इस बात को समझते हैं। मैं सभी माननीय सदस्यों से भी इस बात को समझने का आग्रह करूंगा।

श्री हसनैन मसूदी ने ईरान में हमारी प्रतिक्रिया के समय का मुद्दा उठाया। मैं आपके माध्यम से, माननीय सदस्यों के साथ साझा करना चाहूंगा कि ईरान में बहुत मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि उनकी खुद की प्रणाली गंभीर दबाव में है, अस्पताल दबाव में हैं, और परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। हमने सबसे पहले ईरान में सबकी मदद करने की कोशिश की। जब हमें महसूस हुआ कि ऐसा नहीं हो रहा है, तो हमें अपनी मेडिकल टीम भेजनी होगी। हमें वास्तव में कोम में एक क्लिनिक स्थापित करना था। हमें यहां तक कि तेहरान में भी शिफ्ट होना पड़ा और लोगों से कहा कि वह कोम से तेहरान जाएं क्योंकि वहां हमारी आवश्यकता थी। इसलिए, लोगों की स्थिति को लेकर हमारे बीच संवेदनशीलता की कमी नहीं है, लेकिन कृपया यह समझने का प्रयास करें कि ईरान में बहुत कठिन स्थिति है और हम इस पर काम कर रहे हैं। 58 लोग वापस आ गए हैं। मुझे उम्मीद है, हो सकता है, जल्द ही 200 से अधिक अन्य वापस आ जाएंगे और यह संख्या बढ़ती ही रहेगी।

श्री थॉमस चाझिकादन ने भी हवाई अड्डों का मुद्दा उठाया, जिसका मैंने जवाब दे दिया है।

श्री असदुद्दीन ओवैसी ने मशाल में फंसे लोगों का मुद्दा उठाया। फिलहाल, हमारी एक मेडिकल टीम तेहरान में काम कर रही है।

हम लोगों से परीक्षण के लिए तेहरान आने हेतु कह रहे हैं। अगर कोई समस्या है, तो हम मशहद में लोगों तक पहुंचने का उपाय ढूंढ लेंगे। हम उन्हें वहां ऐसे नहीं छोड़ेंगे। मैं आपको इसका आश्वासन दे सकता हूं।

श्री हबी ईडन जी ने वायरोलॉजी परीक्षण केंद्रों का मुद्दा उठाया। डॉ. हर्षवर्धन जी यहां हैं। यथोचित रूप से, वह इसका उत्तर देंगे। मुझे अपनी प्रतिक्रिया पूरी करने दें। हम परीक्षण के लिए अधिक प्रयोगशालाएं स्थापित कर रहे हैं। ऐसी प्रयोगशालाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन मैं चाहूंगा कि मेरे सहयोगी इस प्रश्न का जवाब दें।

श्री मेहताब जी ने परीक्षण केंद्रों के बारे में भी यही सवाल पूछा। इस सवाल का जवाब वह देंगे।

जो लोग आ रहे हैं, उन पर की ट्रैकिंग का मुद्दा एक बहुत ही वैध मुद्दा है। मैं सदस्यों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि बहुत ही विस्तृत ट्रैकिंग प्रक्रिया चल रही है। वास्तव में, मंत्रियों के समूह ने प्रत्येक रोगी को देखा है, जिनका टेस्ट पॉजिटिव आया है और सैकड़ों लोगों को ट्रैक किया गया है जो उस रोगी के संपर्क में आए हैं। ऐसा नहीं है कि हम केवल क्वारंटाइन कर रहे हैं। इसकी बहुत ही विस्तृत ट्रैकिंग प्रक्रिया है और इसका कारण यह है कि हम इसे उस सीमा तक रखने में सक्षम हैं जो हमारे पास है।

वसंतकुमार जी ने मछुआरों का मुद्दा उठाया जो द्वीप में फंसे हुए हैं। मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम सुनिश्चित करेंगे कि उनकी देखभाल की जाए। हम नियमित रूप से उनके संपर्क में हैं। इसके लिए प्रावधान किए जाएंगे।

भगवंत मान जी ने पंजाब के 30 छात्रों का मुद्दा उठाया जो इटली के हवाई अड्डे पर फंसे हुए हैं। मुझे पता है कि माननीय सदस्य अपने क्षेत्र के छात्रों को लेकर चिंतित हैं। मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि सिर्फ 30 छात्र नहीं हैं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से कई छात्र हैं, जो वहां फंसे हुए हैं। मुझे उन सभी को वापस लाने में मदद करने का एक तरीका खोजना है। हम इसपर काम कर रहे हैं। कृपया समझने की कोशिश करें कि, हम केवल उन्हें ही वापस ला सकते हैं जिनका परीक्षण हो चुका हो। उनका परीक्षण किया जाना है और उनका परीक्षण करने के लिए हमने आज नमूना लेना शुरू कर दिया है। हम इस गंभीर महामारी की स्थिति में ऐसे लोगों को वापस नहीं ला सकते, जिनका परीक्षण नहीं किया गया हो, क्योंकि मुझे इस देश की सुरक्षा की भी चिंता है।

कनिमोझी जी ने हेल्पलाइन स्थापित करने और हम क्वारंटाइन कहां करेंगे, इसके बारे में पूछा था। हम हेल्पलाइन स्थापित करेंगे। हमने बड़ी संख्या में संभावित क्वारंटाइन केंद्रों की पहचान की है। अब तक, अधिकांश क्वारंटाइन का काम मानेसर और इसके आस पास हो रहा है, लेकिन अगर क्वारंटाइन की संख्या में वृद्धि होती है, तो हमने पहले ही विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया है। हमने क्वारंटाइन के लिए एक बहुत बड़ी आकस्मिक योजना तैयार कर ली है। मुझे लगता है, डॉ. हर्षवर्धन जी इसका बेहतर उत्तर दे सकेंगे।

अंत में, सऊदी अरब के बारे में अधीर रंजन जी के सवाल के संबंध में, मैं यह कहना चाहूंगा कि जो कुछ भी हो रहा है, उसके प्रति हम बहुत संवेदनशील हैं, खासकर हमारे लोगों के साथ जो खाड़ी में बहुत कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। अब तक, खाड़ी में ऐसे मामले बहुत सीमित हैं, लेकिन हम सावधान हैं क्योंकि हम सदस्य की चिंता से पूरी तरह से सहमत हैं कि यदि स्थिति वहां बदतर हो जाती है, तो उन्हें वापस लाना अपनी पहली प्राथमिकता होगी। इसलिए, हम इसपर पूरा ध्यान रख रहे है। मैं अपने सहयोगी से अन्य मुद्दों पर जवाब देने का अनुरोध करता हूं।

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