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कोविड-19 के कारण ईरान में फंसे भारतीयों पर लोकसभा में विदेश मंत्री का बयान (12 मार्च, 2020)

मार्च 13, 2020

डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर: महोदय, मैं कोरोना वायरस की स्थिति के परिणामस्वरूप ईरान में फंसे भारतीयों से संबंधित हाल के कुछ घटनाक्रमों से इस सदन को अवगत करा रहा हूं। ... (व्यवधान) इससे पहले कि मैं ईरान की स्थिति पर आऊं, कृपया मुझे कोरोना वायरस के संबंध में बड़े वैश्विक परिदृश्य और इस चुनौती का सामना करने के हमारे दृष्टिकोण का वर्णन करने की अनुमति दें।

जैसा कि सभी माननीय सदस्य जानते हैं, कोरोना वायरस का वैश्विक प्रसार अब वास्तविक और गंभीर है। कल डब्ल्यूएचओ ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। एक ऐसे देश के रूप में जिसके नागरिक दुनिया भर में फैले हुए हैं, यह अत्यंत चिंता का विषय है। साथ ही, यह नितांत आवश्यक है कि हम जिम्मेदारी से और संयम से प्रतिक्रिया करें । हम जो कहें और जो करें, वह समस्याओं का समाधान करने के लिए हो, दहशत न फैलाए। यह स्वाभाविक है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में स्थिति की गंभीरता के अलग अलग हालात होंगे। एक सरकार के रूप में, हम उनकी तात्कालिकता और गंभीरता के संदर्भ में उनका आकलन करेंगे, और तदनुसार प्रतिक्रिया करेंगे ।

जैसा कि सदन ने नोट किया होगा कि जहाँ भी विशिष्ट हस्तक्षेप की आवश्यकता है जैसे कि चीन में वुहान का मामला हो, जापान में डायमंड प्रिंसेस के चालक दल हो या अब ईरान में तीर्थयात्रियों का मामला, हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे। लेकिन ये असाधारण स्थितियां हैं जिनके लिए असाधारण समाधान की आवश्यकता होती है। इस समय, यात्रा की, अपने आप में सिफारिश नहीं की जा सकती क्योंकि यह केवल जोखिमों को बढ़ाती है। जहां समुदायों में काफी चिंता हैं, हमें उन्हें आश्वस्त करना चाहिए और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त सावधानियों और प्रक्रियाओं के पालन को प्रोत्साहित करना चाहिए। खतरे की अत्यधिक भावना उन लोगों के लिए केवल नुकसानदेह होगी जो वास्तव में जरूरतमंद हैं।

अब मैं ईरान के मुद्दे पर आता हूं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईरान के विभिन्न प्रांतों में 6,000 से अधिक भारतीय नागरिक हैं। इनमें मुख्य रूप से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र राज्य के 1,100 तीर्थयात्री; मुख्य रूप से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से लगभग 300 छात्र; तमिलनाडु, केरल और गुजरात राज्यों से लगभग 1,000 मछुआरे; और अन्य जो अपनी आजीविका और धार्मिक अध्ययन के लिए लंबी-अवधि के वीजा पर ईरान में रहते हैं।

जैसे ही सरकार को ईरान में कोरोना वायरस के मामलों में तेज वृद्धि के बारे में जानकारी प्राप्त होना शुरू हुईं थी, एहतियात के तौर पर. भारत और ईरान के बीच सीधी उड़ानों को 27 फरवरी से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था। यात्रा से बचने के लिए सलाह जारी की गई थी और लौटने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाने लगी। यह एक लगातार जारी प्रक्रिया है।

तेहरान में हमारा दूतावास और बांदर अब्बास और ज़ाहिदान में वाणिज्य दूतावास स्वाभाविक रूप से ईरान में भारतीय नागरिकों तक तुरंत पहुंच रहे हैं और उनकी कुशलता सुनिश्चित कर रहे हैं।

हमारे नागरिकों को उचित सावधानी बरतने के लिए एक सलाह जारी की गई थी भारतीय मिशन के आपातकालीन संपर्क विवरण प्रदर्शित किए गए। दूतावास और वाणिज्य दूतावास के अधिकारी भारतीय नागरिकों को आश्वस्त कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे अच्छे स्वास्थ्य में हैं और उनके पास पर्याप्त रसद हैं। मैं इसका उल्लेख एक समग्र दृष्टिकोण के रूप में कर रहा हूं, लेकिन मछुआरों के समुदाय के लिए विशेष संदर्भ के साथ, जिनके कल्याण के बारे में कई माननीय सदस्यों द्वारा मुझ से पूछा गया है

ईरान में भारतीयों की बड़ी संख्या को देखते हुए, यह स्वाभाविक था कि हम उनके रहने के स्थान और जोखिम को ध्यान में रखते हुए, उनकी क्रमवार वापसी के लिए प्रयास करें। प्रारंभिक ध्यान तीर्थयात्रियों तक पहुँचने का है। उनमें से कई कोम में हैं, जहां कोरोनावायरस का असर काफी मजबूत है। उनके निवास की प्रकृति भी संसर्ग के जोखिम को बढ़ाती है। आयु भी एक कारक है जिसे ध्यान में रखा गया था। जैसा कि वर्तमान में उनकी सलामती पर ध्यान दिया जा रहा है, हम अब भारतीय छात्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनमें से कई चिकित्सा का अध्ययन कर रहे हैं और इस कठिन परिस्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों से पूरी तरह अवगत हैं। दूतावास, एक समूह के रूप में उनके साथ नियमित संपर्क में है। हमारी जानकारी यह है कि अधिकांश मछुआरे जिस क्षेत्र में स्थित हैं, वह क्षेत्र इतनी गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुआ है। ये कारक आने वाले दिनों में हमारे दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करेंगे।

पिछले कुछ दिनों से, सरकार फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्रीकृत प्रयास कर रही है। कोविड-19 के संक्रमण के पैमाने और ईरान के स्वयं के संसाधनों पर इसके दबाव को देखते हुए, छह भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों की एक टीम की ईरान में प्रतिनियुक्ति की गई है ताकि वहां परीक्षण और नमूने की सुविधा स्थापित की जा सके। 7 मार्च को भारत में 108 नमूनों का पहला बैच प्राप्त हुआ था। इनका परीक्षण किया गया और 58 भारतीय तीर्थयात्रियों (25 पुरुष, 31 महिलाएं और 2 बच्चे), जिनके परीक्षण की रिपोर्टें नकारात्मक थी, को 10 मार्च को विशेष आईएएफ सी-17 उड़ान से प्रत्यावर्तित किया गया था । हमें इस उड़ान से 529 और भारतीयों के नमूने भी मिले हैं, जिनका पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में परीक्षण किया गया है। अब तक, उनमें से 299 के परिक्षण की रिपोर्ट नकारात्मक है। कुछ और नतीजों का इंतजार है। हम तेहरान में और अधिक नमूने एकत्र करना जारी रख रहे हैं और हमारा प्रयास उचित परीक्षण और स्क्रीनिंग के बाद अपने नागरिकों की जल्द से जल्द संभव वापसी सुनिश्चित करना है। हम ईरान के अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं ताकि वे शीघ्र वापसी की सुविधा के लिए कुछ सीमित वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन कर सकें। ईरानी अधिकारियों के सहयोग से हमारा दूतावास उन लोगों की चिकित्सीय देखभाल और निगरानी की व्यवस्था कर रहा है जिनकी परिक्षण रिपोर्ट पॉजिटिव है।

हमारे दूतावास के कर्मचारी और मेडिकल टीम जल्द से जल्द वापसी के उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए कठिन परिस्थितियों में चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। ईरान में सार्वजनिक स्वास्थ्य कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों के होने के कारण सदन उनके परिचालन दबावों की सराहना करेगा। परिवहन, आवास और अन्य रसद की व्यवस्था करना आसान नहीं है। ईरानी तंत्र बहुत तनाव में है लेकिन हम इन परिस्थितियों में उनके सहयोग की सराहना करते हैं।

माननीय सभापति महोदय, मैंने हाल ही मैं श्रीनगर की यात्रा की है । मैं, स्वयं वहाँ कुछ ऐसे छात्रों के माता-पिता से मिलने गया, जो ईरान में हैं। इस समय की उनकी चिंता पूरी तरह से समझ आती है। मैंने उनके साथ जमीनी स्थिति को विस्तार से साझा किया और उनसे इसे समझने की कोशिश करने के लिए कहा। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके बच्चों की जल्द से जल्द संभव वापसी करेगी। मैं सदन को बताना चाहूंगा कि इन छात्रों के नमूने लेना आज से शुरू हो गया है।

बांदर अब्बास में हमारे वाणिज्य दूतावास भारतीय मछुआरों के संपर्क में हैं, जो असालौह, चिरुइह और किश शहर सहित ईरान के दक्षिणी प्रांतों में हैं। उनमें से कुछ के पास गए है और अन्यों के पास जल्द ही जाएँगे। उन्हें आवश्यक आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उनके बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे सभी अच्छे स्वास्थ्य में हैं। मैं सदन को विश्वास दिलाता हूं कि हम निरंतर उनकी देखभाल और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते रहेंगे ।

सदन निश्चित रूप से उन कुछ अन्य प्रयासों की सराहना करेगा, जो राष्ट्र ने कोविड -19 के संबंध में किया है। वैश्विक कोरोनावायरस स्थिति की निरंतर आधार पर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों के एक समूह और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह द्वारा निगरानी की जा रही है। मेरे मंत्री सहकर्मी ने देश में वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने और रोकने के लिए सदन को पहले ही अवगत कराया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं समय-समय पर स्थिति की समीक्षा की है। हम नियमित रूप से प्रासंगिक देशों की स्थिति दर्शाते हुए यात्रा सलाह और वीजा दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं ।

कई मामलों में पूरी सख्ती से एहतियाती कदम उठाने में भारत आगे रहा है।

महोदय, सदन को यह भी जानकारी होनी चाहिए कि कोरोनेवायरस के आगे प्रसार के मद्देनजर सरकार ने कल अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के संबंध में और कड़े कदम उठाने का फैसला किया। इसका कारण स्पष्ट है। अब तक के सभी मामले उन लोगों से सीधे तौर पर मिले हैं जिनका यात्रा का इतिहास है। ऐसा करने में, हम बहुत स्पष्ट हैं कि यह सुनिश्चित करने के लिए जो कुछ भी हमें करना होगा, हम करेंगे कि कोरोनावायरस का प्रसार प्रतिबंधित हो और भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित हो।

मैं ऐसे कुछ उपायों के बारे में बताता हूँ जिन्हें कल की बैठक में मंत्रियों के समूह ने मंजूरी दी है। ये 13 मार्च को 12:00 बजे (जीएमटी) से प्रस्थान के बंदरगाहों पर लागू होंगे। इन उपायों में शामिल हैं: एक, सभी मौजूदा वीजा, राजनयिक, आधिकारिक, संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, रोजगार, परियोजना वीजा, को छोड़कर, 15 अप्रैल, 2020 तक निलंबित; दो, ओसीआई कार्ड धारकों को दी जाने वाली वीजा मुक्त यात्रा सुविधा को भी 15 अप्रैल, 2020 तक रोक के रखा गया है; और तीन, 15 फरवरी के बाद चीन, इटली, ईरान, कोरिया गणराज्य, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी से आने वाले या जिन्होंने इन देशों की यात्रा की हो, ऐसे सभी यात्रियों, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, को न्यूनतम 14 दिनों की अवधि के लिए संगरोध किया जाएगा। यह भी तय किया गया कि जो भी विदेशी नागरिक किन्ही अनिवार्य कारणों से भारत की यात्रा करने का इरादा रखते हैं, वे निकटतम भारतीय मिशन से संपर्क कर सकते हैं। भारतीय नागरिकों को दृढ़ता से विदेशों की सभी गैर-आवश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है। उनके लौटने पर, उन्हें न्यूनतम 14 दिनों के लिए संगरोध किया जा सकता है। भूमि सीमाओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय यातायात, मजबूत स्क्रीनिंग सुविधाओं के साथ नामित चौकियों तक सीमित रहेगा। इन्हें गृह मंत्रालय द्वारा अलग से अधिसूचित किया जाएगा।

महोदय, इटली की स्थिति अब बड़ी चिंता का कारण बन रही है। इस संबंध में पहले से ही उठाए गए कदमों को मैं माननीय सदस्यों के साथ साझा करना चाहूंगा। यह निर्णय लिया गया है कि इटली में मुख्य रूप से छात्रों और अनुकंपा के मामलों के परीक्षण के लिए व्यवस्था की जाए और परीक्षण के लिए नमूने एकत्र किए जाएँ। भारत से एक मेडिकल टीम वहां भेजी जा रही है। परीक्षण किए गए लोगों में जिनकी रिपोर्ट नकारात्मक है, उन्हें यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी और भारत आने पर उन्हें 14 दिनों के लिए संगरोध किया जाएगा। यूरोप में चुनौती प्रतिदिन बढ़ रही है और हम उसी के अनुसार प्रतिक्रिया करेंगे। हमने विदेश मंत्रालय में एक वरिष्ठ अधिकारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी कोरोनावायरस प्रतिक्रिया का समन्वय करने के लिए नियुक्त किया है। सहायता के अनुरोधों पर, जो कि स्वाभाविक है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से तेजी से बढ़ेंगे, शीघ कार्रवाई करने के लिए एक नोडल कार्यालय स्थापित किया जा रहा है। कुछ दबाव या कुछ असामान्य स्थितियां आएंगी ही और हम इसे जानते हैं और हम इसका समाधान करेंगे । नोडल कार्यालय का विवरण बहुत जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।

माननीय सभापति महोदय, मुझे विश्वास है कि इस सदन के माननीय सदस्य हमारी चिकित्सा टीम, भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों, भारतीय वायु सेना दल के कर्मचारियों, एयर इंडिया के कर्मचारियों और भारत के उन सभी लोगों के गहन प्रयासों की सराहना करेंगे, जो अथक और निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि ईरान और दूसरे देशों में हमारे लोग सुरक्षित हैं, और शीघ्र लौट सकते हैं। कोरोनावायरस चुनौती के लिए हमारी तरफ से एक केंद्रित और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होगी और हम सदन को घटनाक्रम की प्रगति से अवगत कराते रहेंगे ।

अंत में, मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि सरकार दुनिया के किसी भी हिस्से में हमारे नागरिकों के कल्याण और साथ-साथ हमारी मातृभूमि की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह हमारी विदेश नीति की कसौटी रही है।

(समाप्त)

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