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अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी फोरम पर वर्चुअल विचार-विमर्श के दौरान विदेश सचिव की टिप्पणी (19 नवंबर, 2020)

नवम्बर 19, 2020

डॉ. मुकेश अघी, अध्यक्ष और सीईओ, अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ);
यूएसआईएसपीएफ ग्लोबल बोर्ड के सदस्य;
यूएसआईएसपीएफ के भारतीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य; तथा
उद्योग के अन्य प्रतिभागियों

मैं अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी फोरम को अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ इस वर्चुअल विचार-विमर्श हेतु आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद देता हूं। तीन साल पहले इसकी स्थापना के बाद से, यूएसआईएसपीएफ ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाने, विशेष रूप से हमारे आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2. साझा मूल्यों वाले दो परिपक्व, बहुलवादी और जीवंत लोकतंत्र के रूप में, भारत और अमेरिका 21वीं सदी में स्थिरता, शांति और समृद्धि हेतु स्वाभाविक भागीदार हैं। भारत-अमेरिका के बीच की साझेदारी आपसी विश्वास और दोस्ती, लोकतंत्र की साझा प्रतिबद्धता पर टिकी हुई है, और रणनीतिक हितों तथा दोनों देशों के नागरिकों के बीच मजबूत संबंधों में भी नज़र आती है। मैंने खुद विगत कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के रणनीतिक दृष्टिकोण में विकास का अनुभव किया है। हमने विशेष रूप से सामरिक व रक्षा सहयोग, ऊर्जा, आर्थिक क्षेत्रों और लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव में आपसी सहयोग में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इस साल फरवरी में वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुए विकास से हमारे द्विपक्षीय संबंधों कितने गहरे हैं, इसका पता चलता है।

3. भारत और अमेरिका ने एकजुटता दिखाते हुए आसियान के केन्द्रीय सहयोग के माध्यम से स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक बनाए रखने के महत्व को दोहराया है। हमारा उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सभी साझेदार देशों की सुरक्षा और आर्थिक हितों को बढ़ाना है। पिछले महीने टोक्यो में आयोजित क्वाड मिनिस्ट्रियल मीटिंग में, क्वाड भागीदारों ने कोविड-19 का मुकाबला करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सरल बनना हेतु अच्छे तरीकों व उपायों को साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

4. तीसरी भारत-यूएस 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता पिछले महीने कोविड-19 महामारी, दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय तथा वैश्विक विकास में सुझार करने हेतु किये जा रहे प्रयासों के संबंध में आयोजित की गई। कोविड-19 पर समन्वित प्रतिक्रिया और आर्थिक सुधार की दिशा में किये जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने टीके, थेरप्यूटिक्स, वेंटिलेटर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरण बनाने और साथ मिलकर उच्च गुणवत्ता वाली, सुरक्षित, प्रभावी व सस्ती कोविड-19 वैक्सीन तक पहुंच हेतु अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने आपूर्ति श्रृंखला को सरल बनाने और उन तरीकों और साधनों का विकल्प तलाशने का भी संकल्प लिया, जिनपर महामारी के दौरान अधिक दवाब आया है और इसमें महत्वपूर्ण कमजोरियां सामने आई हैं। दोनों देशों ने वैश्विक आर्थिक सुधार में सहयोग करने और पहले से कहीं अधिक लचीलापन अपनाते हुए महामारी से उभरने में सहयोग का आह्वान किया। इस संबंध में, उन्होंने कोविड-19 महामारी के बीच द्विपक्षीय भारत-अमेरिका व्यापार के कायाकल्प और इसके विस्तार के प्रयासों का स्वागत किया।

5. भारत अगले साल जनवरी में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता ग्रहण करने वाला है, जिसके बाद हमारा प्रयास होगा कि हम अमेरिका सहित अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक समाधान की दिशा में काम करें। कोविड के बाद की दुनिया में, सुधारित बहुपक्षवाद इस तरह की बड़ी चुनौतियों का सामना करने और अच्छा परिणाम पाने में काफी अहम होगा।

6. एक अन्य वैश्विक चुनौती जलवायु परिवर्तन से निपटना है। भारत न केवल पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी इस लड़ाई में इन प्रतिबद्धताओं से भी अधिक प्रयास कर रहा है। हमारी विकास से जुड़ी चुनौतियों और ऊर्जा की सीमित उपलब्धता के बावजूद, हम नवीकरणीय ऊर्जा, गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा तथा ग्रीन कवर को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस संबंध में हमारे प्रधानमंत्री ने पिछले महीने इंडिया एनर्जी फोरम के उद्घाटन के दौरान कहा था, "भारत हमेशा विश्व की भलाई को ध्यान में रखते हुए काम करेगा।" और, उनकी इसी बात को ध्यान में रखते हुए, हम 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने और 2030 तक इसे 450 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। हम गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 40% संचयी विद्युत ऊर्जा स्थापित क्षमता हासिल करने और 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर की खराब जमीन को बहाल करने हेतु भी प्रतिबद्ध हैं। वैश्विक स्तर पर आगे कदम बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) और आपदा प्रतिरोधी संरचना हेतु गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी बहुपक्षीय साझेदारी वाली पहल भी शुरू की है।

7. कोविड-19 महामारी से उभर रही चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत ने सरकार और समाज दोनों स्तरों पर जबरदस्त प्रयास किये हैं। 1.6 मिलियन आइसोलेशन बेड के साथ 17,000 से अधिक कोविड समर्पित सुविधाएं स्थापित की गई हैं। रोजाना एक मिलियन से अधिक लोगों का टेस्ट किया जा रहा है। हमारे देश में मृत्यु दर 1.5% है, जो अन्य देशों की तुलना में कम है। हर 10 संक्रमित लोगों में से 9 लोग ठीक हो रहे हैं। कुछ हफ्तों पहले हर रोज लगभग 100,000 मामले आते थे, जो अब घटकर हर रोज 50,000 हो गये हैं। हालांकि, हम अभी भी सतर्कता बरत रहे हैं और अपने अनुभवों के आधार पर आवश्यकता अनुसार नई-नई रणनीति तैयार करना जारी रखा है। बड़ी संख्या में कॉटेक्ट ट्रेसिंग हेतु डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। संकट के इस समय में राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग प्राप्त हो रहा है, जो हमारे बीच सामंजस्य, उद्देश्य और लचीलापन को दिखाता है। केवल छह महीने में, हमने पीपीई, टेस्टिंग किट, दवाइयों आदि की उत्पादन क्षमता को काफी अधिक बढ़ाया है, जिसे हम दूसरे देशों को भी उपलब्ध करा रहे हैं। महामारी की शुरुआत में देश में एक भी पीपीई निर्माता नहीं था; आज 100 से अधिक पीपीई निर्माता मौजूद हैं। एन-95 मास्क केवल दो कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे थे; आज हम अन्य देशों को भेजने और वैश्विक आपूर्ति हेतु पर्याप्त मास्ट बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि आजादी के बाद से महामारी शुरू होने तक, हमारे देश के सभी सरकारी अस्पतालों में सिर्फ 15-16 हजार वेंटिलेटर थे, जो काम करने की स्थिति में थे, जबकि, अब हम इन अस्पतालों में 50000 वेंटिलेटर बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस संकट ने भारत में नवोन्मेष एवं उद्यम को बढ़ावा दिया है और हम अब भारत व दुनिया के लिए लागत प्रभावी लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले महत्वपूर्ण स्वास्थ्य उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं।

8. हम कोविड का टीका बनाने और इसका परीक्षण कर रहे हैं, और अपने कुछ सहयोगी देशों में तीसरे चरण के परीक्षण पर विचार कर रहे हैं। हम टीके के विकास के क्षेत्र में शोध में सहयोग हेतु भी तैयार हैं। इच्छा के अनुसार, हम कुछ देशों में टीकों के संयुक्त उत्पादन भी करने जा सकते हैं। हमने 8 पड़ोसी देशों के लगभग 90 प्रतिभागियों के लिए नैदानिक परीक्षण और नैदानिक प्रथाओं में क्षमता विकसित करने हेतु ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किए हैं। मांग के आधार पर, हम इस तरह के और प्रशिक्षण आयोजित कर सकते हैं। वैक्सीन की सप्लाई के लिए कई देश हमसे संपर्क कर रहे हैं। मैं अपने प्रधानमंत्री की उस प्रतिबद्धता को फिर से दोहराना चाहूंगा कि भारत की वैक्सीन उत्पादन तथा वितरण क्षमता का इस्तेमाल इस संकट से लड़ने में मानवता की मदद करने हेतु किया जाएगा। भारत टीकों के वितरण हेतु अपनी कोल्ड चेन और भंडारण क्षमता बढ़ाने के इच्छुक देशों की मदद भी करेगा।

दोस्तों,

9. महामारी के कारण होने वाले आर्थिक व्यवधान से निपटने हेतु सरकार ने भारत में निवेश के माहौल में सुधार के लिए कई कदम उठाये हैं, और देश को इस क्षेत्र का कम लागत वाला विनिर्माण गंतव्य बनाने का प्रयास किया है। व्यापार करने में आसानी, श्रम कानूनों को सरल करके और पूंजी की आसानी से उपलब्धता के साथ भारत में आज अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

10. रिकॉर्ड उच्च एफडीआई प्रवाह भारत की निवेशकों के अनुकूल देश के रूप में बढ़ती छवि को इंगित करता है। इस साल, महामारी के बावजूद, देश में अप्रैल-अगस्त में एफडीआई का स्तर 35.73 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है। यह पिछले साल की तुलना में 13% अधिक है, जो एक नया रिकॉर्ड है।

11. सरकार ने भारत में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु पीएलआई योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य कोर घटकों को विकसित करने की देश की क्षमता को बढ़ाकर तथा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए उद्योग को सक्षम माहौल देकर इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण (ईएसडीएम) में भारत को एक वैश्विक केंद्र बनाना है। पिछले सप्ताह, सरकार ने भारत की विनिर्माण क्षमता तथा निर्यात बढ़ाने हेतु 10 प्रमुख क्षेत्रों में प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (पीएलआई) योजना शुरू की है, जिसमें शामिल हैं - एडवांस केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक / टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, ऑटोमोबाइल व ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स , टेलीकाम व नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स, वस्त्र उत्पाद: एमएमएफ सेगमेंट तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स, खाद्य उत्पाद, उच्च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल, व्हाइट गुड्स (एसी एवं एलईडी) और विशेषता स्टील।

12. भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले एमएसएमई क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर कई नीतिगत बदलाव किये हैं। इस क्षेत्र में अधिक से अधिक एफडीआई को आकर्षित करने के लिए एमएसएमई की परिभाषा को बदलते हुए सूक्ष्म इकाइयों के लिए निवेश सीमा को 25 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रूपये, लघु उद्यमों के लिए निवेश सीमा को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रूपये और मध्यम उद्यमों के लिए निवेश सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रूपये कर दी गई हैं। विनिर्माण और सेवा एमएसएमई के बीच अंतर को भी हटा दिया गया है। महामारी के प्रभाव को देखते हुए, एमएसएमई सहित सभी व्यवसायों को तीन लाख करोड़ रुपये तक के संपार्श्विक-मुक्त स्वचालित ऋण प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, एमएसएमई को अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने हेतु एक कॉर्पस कोष की स्थापना की गई है।

13. इस हफ्ते की शुरुआत में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में शहरीकरण के अवसरों और हमारे शहरी केंद्रों का कायाकल्प करने और टिकाऊ गतिशीलता, प्रौद्योगिकी, सस्ते आवास और नियामक सुधारों के माध्यम से उन्हें सरल बनाने हेतु उठाये गए कदमों पर प्रकाश डाला।

14. हमारा मानना है कि अमेरिका लचीली अर्थव्यवस्था बनाने में भारत का एक स्वाभाविक साझेदार है। हम आज ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अमेरिका में नये प्रशासन की शुरुआत हो रही है। हमारे द्विपक्षीय संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता अमेरिका में भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने पर साथ काम करने हेतु अमेरिका में मजबूत दो तरफा सहयोग है। हम अपने साझा लाभ और आर्थिक विकास हेतु इस रिश्ते को और मजबूत बनाने के लिए नए अमेरिकी प्रशासन के साथ काम करने हेतु तत्पर हैं।

15. मुझे पूरा विश्वास है कि भारत-अमेरिका संबंध पहले से और अधिक मजबूत होंगे; मुझे विश्वास है कि आप सभी मेरी इस बात से सहमत होंगे। मैं भारत-अमेरिका साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयासों के लिए एक बार फिर से यूएसआईएसपीएफ को धन्यवाद देता हूं और भविष्य के प्रयासों में उनको सफलता मिले, इसकी कामना करता हूं।

धन्यवाद।

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