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कोविड के बाद के बदलते परिदृश्य में व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाने विषय पर आयोजित इंडिया ई-बिज़ एक्सपो 2020 में भारतीय वाणिज्य मंडल (आईसीसी) के सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) का मुख्य भाषण

नवम्बर 21, 2020

सबसे पहले मैं कोविड के बाद के बदलते परिदृश्य में व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाने के विषय पर मुझे अपनी बात रखने का अवसर देने हेतु धन्यवाद देता हूं। इस मंच पर आज गहरी आर्थिक भागीदारी के प्रयास कर रहे मेरे सहयोगियों, बेलारूस, रोमानिया और उज्बेकिस्तान में हमारे राजदूतों को देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं विशेष रुप से बहुपक्षीय और संस्थानों के विशेषज्ञों को उनके योगदान हेतु धन्यवाद देता हूं। इस संगोष्ठी और वर्चुअल प्रदर्शनी के आयोजन हेतु मैं भारतीय वाणिज्य मंडल (आईसीसी) को बधाई देता हूं। तेजी से बदलती दुनिया में आगे का रास्ता तलाशने के लिए यह चर्चा आयोजित की जा रही है।

कोविद दुनिया भर में सभी स्तरों पर आने वाला एक अभूतपूर्व व्यवधान था। यह न केवल स्वास्थ्य संकट है, बल्कि इससे सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां भी सामने आईं। इसकी वजह से विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्था में गिरावट आई, सामाजिक संपर्क खत्म हो गया और लोगों में डर पैदा हुआ। वैश्विक समुदाय के लिए कोरोना वायरस के खिलाफ एकजुट होकर प्रयास करना आवश्यक था। कोविड को सीमित रखने हेतु नए सामाजिक मानदंडों की जरुरत और महामारी से निपटने के लिए टीकों व उपचार की खोज को देखते हुए एकजुट प्रयास की आवश्यकता और अधिक प्रबल हो गई। भारत ने दुनिया भर के 150 से अधिक देशों की मदद की। इसके अलावा, भारत जिस तरह से कोविड से निपटा, वह काफी प्रभावशाली था। हमने एक मजबूत स्वास्थ्य संरचना और प्रोटोकॉल बनाया और वायरस के फैलने को धीमा किया; हमारे यहां अधिक संख्या में लोग स्वस्थ हुए और मृत्यु दर भी कम रही।

हमने अन्य देशों में फंसे नागरिकों के प्रत्यावर्तन हेतु दोतरफा सहयोग किया। हमने 1 लाख से अधिक विदेशी नागरिकों को उनके देश लौटने में सुविधा प्रदान की। वंदे भारत मिशन, सबसे बड़ा प्रत्यावर्तन मिशन था, जिसके तहत दुसरे देशों में फंसे 30 लाख नागरिकों को वापस लाया गया, जो दुनिया भर के भागीदारों से सक्रिय सहयोग के कारण ही संभव हो सका। भारत ने कई देशों को कोविड में मानवीय सहायता पहुंचाने वाले के पहले देश के रुप में आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति प्रदान की एवं चिकित्सा टीमों को तैनात किया। हजारों भारतीय स्वास्थ्यकर्मी कोविड की चुनौतियों से निपटने में मदद के लिए विदेश भेजे गए। हमने कोविड में शोध और परीक्षण में सहयोग को मजबूत किया। सबसे बड़े उत्पादक होने के नाते वैक्सीन की मंजूरी मिलते ही हम भारत से वैक्सीन की उपलब्धता हेतु तैयार हैं।

लेकिन कोविड से यह सीख मिली है कि हमें यह मानते करते हुए कि कोरोनावायरस पूरी तरह से समाप्त नहीं हो सकता, अपने संबंधों को नये सिरे से विकसित करना होगा। कोविड के इस नए दौर में, क्योंकि कोविड अभी कुछ समय तक पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकता है, सामाजिक जुड़ाव, संस्थागत आदान-प्रदान और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिलेंगे। हमें सोशल डिस्टेंशिंग, इंटरनेट आधारित वर्चुअल बैठकें और वर्क फ्रॉम होम जैसी नई चीजें देखने को मिलेंगी। आर्थिक स्तर पर, नये संबंध पुराने व्यवसाय के पुनरुत्थान पर निर्भर करेंगे, नवोन्मेष व समानताओं की मांग बढ़ेगी और नए बिजनेस मॉडल की तलाश की जायेगी। व्यापार के अग्रणी होने के नाते आप सभी हमारी आर्थिक भागीदारी को आकार देंगे। विकास के मुख्य अवसर निम्न में निहित होंगे:

पहला, आत्मनिर्भर भारत, जो मेक इन इंडिया - मेक इन वर्ल्ड को बढ़ावा देकर भारत की 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की योजना को एक विजन देता है। ऐसा वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ हमारे एकीकरण के माध्यम से होगा। अवसंरचना और विनिर्माण क्षेत्र में संयुक्त उद्यमों, आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने और संप्रभु धन निधि का दोहन करने पर बल दिया जायेगा। भविष्य में उन्मुख उद्यमशीलता सहयोग हेतु नवोन्मेष और स्टार्ट-अप पर अलग तरीके ध्यान दिया जायेगा। आईटी, ई-कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य में देश के स्टार्ट-अप्स की सफलता हेतु उच्च विकास और आर्थिक संबंधों का लाभ उठाया जा सकता है।

दूसरा, विशेष रूप से आईसीटी, कंसल्टेंसी, फिन-टेक, लॉजिस्टिक्स, एडुटेक, हेल्थटेक, बायोटेक और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में नई उभरती हुई प्रौद्योगिकी में काफी अधिक संभावनाएं हैं। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी और भविष्य में विकास में भी वृद्धि होगी। इसके अलावा, औद्योगिक क्रांति 4.0 पर सहयोग भविष्य में सतत विकास को प्रोत्साहित करेगा और प्रौद्योगिकी में बदलाव से हम दुनिया से कदम से कदम मिलाते हुए आगे बढ़ सकेंगे। कुछ मायनों में, हमें अपनी आर्थिक सहभागिता के कुछ हिस्से को प्रौद्योगिकी सहयोग, आर एंड डी और उच्च पूंजी-गहन परियोजनाओं पर अधिक ध्यान देते हुए साझेदारी को "बढ़ाने" की आवश्यकता है, जिससे भविष्य उन्मुख विकास को गति मिलती है।

तीसरा, उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग, विशेष रूप से रक्षा और अंतरिक्ष में, जिसमें आगे बढ़ने की क्षमता है। हमारा कई अन्य देशों के साथ इन दोनों क्षेत्रों में सहयोग समझौता है। इन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी की वजह से सहयोग की संभावना बहुत अधिक है। रक्षा के क्षेत्र में, हम उपकरण और आयुध निर्यात के साथ-साथ मेक इन इंडिया के तहत सहयोग को बढ़ा सकते हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में, जिसमें हम विश्व में अग्रणी हैं, उपग्रहों पर प्रशिक्षण, निर्माण एवं प्रक्षेपण, उपग्रह डेटा का उपयोग करने की क्षमता है।

चौथा, भारत को कम प्रतिस्पर्धा वाले बाजारों में उद्यम करना चाहिए, जिससे अधिक लाभ मिल सकता है। व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान हेतु भारतीय व्यापार का मुख्य ध्यान अपेक्षाकृत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर है। जबकि इनमें और अधिक विस्तार किया जा सकता है, अन्य देशों तथा नए बाजारों में भी अधिक क्षमता है। इस प्रयास में सबसे जरूरी उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखलाओं में समय पर इनपुट प्रदान करना और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत होना है। इसी तरह, कौशल को बढ़ाकर और नए कौशल सिखाकर हमारी श्रम पूंजी में सुधार करना जरूरी है। इससे पहले अलावा, नए बाज़ारों और नए कौशल में भी हमारी उपस्थिति बढ़ेगी, जो प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव और आर्थिक परिवर्तनों के कारण उभरे हैं। पेशेवरों और श्रमिकों के प्रवासन से विदेशी रोजगार और आवक प्रेषण के माध्यम से हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

पांचवां, भारत और हमारे बढ़ते भागीदारों के बीच उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान ने गहरी समझ विकसित हुई और सहयोग को बढ़ावा मिला है। व्यवसायिक समुदाय के लिए यह एक-दूसरे के देशों की प्राथमिकताओं तथा विकास योजनाओं के आधार पर गहरी साझेदारी विकसित करने का उपयुक्त समय है। व्यावसायिक घराने अधिक विश्वसनीयता तथा पारदर्शिता की आवश्यकता वाली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की बदलती प्रकृति के अवसर का उठाकर अपने आर्थिक संबंधों को गहरा करने हेतु कोविड के बाद की स्थितियों का लाभ उठा सकते हैं। परिचालन में विकास के साथ, जिसके लिए हाल ही में घोषित किए गए कई नए कार्यक्रमों तथा प्रोत्साहनों का लाभ उठाया जा सकता है, भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र वैश्विक बाजारों में प्रगति कर सकता है।

हम अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार और बदलाव के लिए प्रयास कर रहे हैं, विदेशी भागीदारों के साथ मजबूत राजनीतिक समझ विकसित हुई है और लोगों के बीच पारंपरिक सद्भावना से इसे और अधिक मजबुती मिली है। यह हमारे आर्थिक जुड़ाव की प्रकृति और इसके स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का "सबसे उपयुक्त अवसर" है। इस प्रयास को आगे बढ़ाने हेतु आईसीसी के नेतृत्व में बंगाल में उद्यमियों की भागीदारी देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता होगी।

धन्यवाद।

नई दिल्ली
नवंबर 21, 2020

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