मीडिया सेंटर मीडिया सेंटर

तीसरे स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (पीसीए)-इंडिया सम्मेलन में विदेश सचिव की टिप्पणियाँ

नवम्बर 21, 2020

माननीय न्यायमूर्ति एसए बोबडे, भारत के मुख्य न्यायाधीश,
माननीय न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा,
न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी, न्यायाधीश, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय,
महामहिम ह्यूगो सिबलेज़, महासचिव, स्थायी मध्यस्थता न्यायालय,
श्री फली नरीमन, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पीसीए-इंडिया सम्मेलन समिति के अध्यक्ष,
नीदरलैंड में भारत के राजदूत, श्री वेणु राजामनी,
पीसीए-इंडिया कमेटी के सदस्यगण,

देवियों एवं सज्जनों।

मैं आज तीसरे स्थायी मध्यस्थता न्यायालय-इंडिया सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होकर सम्मानित महसूस कर रहा हूँ।

2. मुझे इस बात की भी अत्यंत खुशी है कि भारतीय और वैश्विक कानूनी बिरादरी के इतने प्रतिष्ठित सदस्यों ने पीसीए सम्मेलन के इस तीसरे संस्करण में भाग लेने के लिए समय निकाला है। आपकी महान उपस्थिति आज के कार्यक्रम के महत्व तथा पीसीए के साथ भारत और भारतीय कानूनी बिरादरी की गहन साझेदारी का प्रमाण है।

3. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक सदस्य के रूप में, भारत कानून के शासन को सुनिश्चित करने को लेकर दृढ़ रहा है, और अंतरराष्ट्रीय विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता एवं इस तरह के अन्य तरीकों का उपयोग करने का इसका एक लंबा इतिहास रहा है।

4. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय जैसे संस्थानों ने इस संबंध में हमारी सहायता की है, और विवादों के सभ्य एवं सैद्धांतिक समाधान के ज़रिये राष्ट्रों के बीच शांति को सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

5. अपनी स्थापना के बाद से ही, पीसीए ने कई राजनीतिक महत्त्व के एवं दिलचस्प मामलों को संभाला है। यह एक प्रमुख संस्थान और राज्यों, राज्य संस्थाओं, अंतर-सरकारी संगठनों तथा निजी संस्थाओं से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए पहली पसंद बन चुका है। जिन वैकल्पिक विवाद समाधान सेवाओं को पीसीए प्रदान करता है और जिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को यह संभालता है, उनका क्षेत्र व्यापक है। वास्तव में, अपनी विशेषज्ञता और इतने वर्षों के अनुभव से समृद्ध पीसीए इससे कहीं ज्यादा हमें प्रदान कर सकता है।

6. पीसीए 121 वर्ष से अधिक पुराना है और सबसे प्राचीन मध्यस्थ संस्थान है। भारत 1950 में पीसीए का सदस्य बना। यद्यपि, भारतीय गणराज्य पीसीए से अपेक्षाकृत युवा है, फिर भी, भारत में मध्यस्थता कानून को पीसीए के अस्तित्व से करीब सवा सौ साल पहले से देखा जा सकता है; जब 1772 के बंगाल अधिनियम कानून के माध्यम से मध्यस्थता के लिए कानून अस्तित्व में था। हालांकि, वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र के माध्यम से विवादों के निपटारे की परंपरा और भी पुरानी है, और इसकी चर्चा भारत में प्राचीन ग्रंथों और धर्मग्रंथों में भी की गई है, जहां मतभेदों को दोनों पक्षों द्वारा चुने गए मध्यस्थों के द्वारा सुलझाया जाता था।

7. एक शांतिपूर्ण और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय कानूनी क्रम के एक मजबूत प्रस्तावक के रूप में, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करने के लिए पीसीए और इसके अधिदेश का समर्थन करता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना हमारी कूटनीति और वास्तव में हमारे विश्व दृष्टिकोण के केंद्र में है।

8. कई अवसरों पर, भारत ने खुद ही पीसीए की सेवाओं का लाभ उठाया है और ऐसा करना जारी रखे हुए है और इसे संभवतः पीसीए के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में से एक के रूप में जाना जा सकता है। भारत ने मध्यस्थता, सुलह और विशेषज्ञ निर्धारण के माध्यम से अपने पड़ोसियों के साथ कुछ विवादों को हल करने का प्रयास किया है, राज्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल किया है, और इस संबंध में पीसीए की सेवाओं का लाभ उठाया है। इसके उदाहरणों में शामिल हैं, सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के साथ किशनगंगा पंचाट; बांग्लादेश के साथ समुद्री सीमा परिसीमन; और इतालवी मरीन केस।

9. भारत ने निवेश संधियों के तहत मामलों के संचालन में पीसीए की सेवाओं का भी उपयोग किया है। हमारी द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) के नए मॉडल में पीसीए के महासचिव को नियुक्ति प्राधिकारी (बीआईटी के तहत मध्यस्थता के लिए), और पीसीए को मध्यस्थता के लिए पसंदीदा संस्थान के रूप में रखा गया है।

10. दुनिया भर के राज्यों द्वारा पीसीए में दिखाया गया भरोसा और विश्वास, भारत के लिए 2008 में पीसीए के साथ होस्ट कंट्री एग्रीमेंट में शामिल होने के लिए महत्वपूर्ण कारक था। इस होस्ट कंट्री एग्रीमेंट के माध्यम से, भारत और पीसीए ने एक कानूनी ढांचा स्थापित किया है, जिसके तहत भविष्य में पीसीए-प्रशासित कार्यवाही भारत में आयोजित की जा सकती है। विवाद समाधान की कार्यवाही पीसीए द्वारा प्रशासित की जा सकती है, चाहे वे 1899 या 1907 अंतरराष्ट्रीय के पैसिफिक निपटान कन्वेंशन में विवादों के लिए निर्धारित हों या पीसीए की प्रक्रिया के किसी वैकल्पिक नियम, के अनुसार संचालित हों अथवा नहीं, और इस प्रकार यह विवाद के पक्षकारों को अधिकतम प्रक्रियात्मक स्वायत्तता की गारंटी देता है।

11. पीसीए और भारत के बीच सहयोग का होना यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि अधिनिर्णायक, पीसीए कर्मचारी और कार्यवाही के अन्य भागीदार (जैसे वकील, एजेंट और गवाह) अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम हों। सितंबर 2008 में हुआ भारत और पीसीए के बीच होस्ट कंट्री एग्रीमेंट , विवाद के पक्षकारों को- भारत के भीतर और पड़ोस दोनों में- भारत के क्षेत्र में पीसीए प्रशासित कार्यवाही के लचीलेपन और दक्षता का पूरा लाभ उठाने का मौका देता है। हम इसे आगे बढ़ाना और भारत को अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के लिए एक पसंदीदा स्थान के रूप में देखना चाहते हैं।

12. कानून के शासन, न्यायिक परंपराओं और कानूनी प्रतिभा के भंडार के साथ, भारत दुनिया के इस हिस्से में कानूनी सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तैयार है। हमारे पास एक अच्छी तरह से स्थापित और विश्वसनीय कानूनप्रणाली है जो उच्च गुणवत्ता का न्यायशास्त्र प्रदान करती है और इसकी संस्थागत स्वतंत्रता और स्थिरता के लिए इसकी सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाती है। हमारे पास कुशल और प्रतिभाशाली कानूनी पेशेवरों एवं अन्य सुविधाओं का प्रचुर संसाधन मौजूद है जो मध्यस्थता के लिए सुरक्षित वैश्विक केंद्र के रूप में भारत के विकास के लिए अनुकूल हैं।

13. भारत विवाद समाधान क्षेत्र का समर्थन करने और इस उप-महाद्वीप को अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने अपने मध्यस्थता कानून की लगातार समीक्षा की है और इसका आधुनिकीकरण किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे कानून अपडेट रहें और मध्यस्थता के उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करें। यह हमारी प्रणालियों को अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जो कि एक वैश्विक भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप ही है।

14. इस संबंध में, हम पीसीए के साथ अपने संबंधों को और विकसित करना चाहेंगे। यह भारत को पीसीए के तत्वावधान में आयोजित मध्यस्थता कार्यवाही की मेजबानी करने में और सक्षम बनाएगा। मुझे विश्वास है कि भारत और पीसीए के बीच यह सहयोग बेहद सफल होगा, और मैं एक उत्पादक और फलदायी संबंध के लिए तत्पर हूं।

15. इन शब्दों के साथ, मैं इस सम्मेलन की सफलता की कामना करता हूं। इसमें कोई शक नहीं कि, ऐसे प्रतिष्ठित कानूनी जानकारों के साथ बैठक से राज्य-राज्य मध्यस्थता, निवेशक-राज्य मध्यस्थता और अनुबंध मध्यस्थता की समकालीन समस्याओं के समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।

16. मैं आपको सम्मेलन के आगामी सत्रों के विवेचन में शामिल होने के लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

नई दिल्ली
नवम्बर 21, 2020

*****

Comments
टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code