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13वीं भारत-इजराइल गोष्‍ठी में सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) का संबोधन

नवम्बर 23, 2020

13वीं भारत-इजरायल गोष्‍ठी में निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद। यह एक महत्वपूर्ण ट्रैक II वार्ता है, जिसमें विभिन्न हितधारक शामिल हैं। हम जीवंत लोकतंत्रों की अभिव्यक्ति के रूप में इस गोष्ठी से उभरने वाले विचारों को बहुत महत्व देते हैं, जिनका हम प्रतिनिधित्व करते हैं। सह-अध्यक्ष जमशेद गोदरेज और स्टेनली बर्गमैन की टिप्पणियों ने माहौल बना दिया है। मेरे सहयोगी इजराइल के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक अंबअलोनउशपिज़, जो भारत से भली-भांति वाकिफ हैं, ने प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से बताया है। मैं उस क्षेत्र, जिसे हम पश्चिम एशिया और खाड़ी कहते हैं, के साथ अपने जुड़ाव और इजराइल के साथ अपने विशेष और अनूठे संबंधों के कुछ तत्वों को प्रतिबिंबित करना चाहता हूँ।

2. इस क्षेत्र के साथ हमारे संबंध सभ्यतागत हैं। व्यापक रूप से यह माना जाता है कि दो सहस्राब्‍दी पूर्व, इस क्षेत्र से लोग व्यापारिक पवनों की अगुवाई में जहाजों पर भारत के दक्षिणी तटों पर पहुंचे थे। सीरियाई यहूदियों का एक समुदाय अभी भी मौजूद है। दो सहस्राब्दी पहले, उनके भाई-बहन फिर से हमारे तटों पर पहुँचे, जो सीरियाई ईसाइयों का एक समुदाय था। कुछ शताब्दियों बाद, इसी क्षेत्र से अन्य भाई-बहन आए जो भारत में इस्लाम ले आए। हमारे देश में यहूदी उपासनागृह, चर्च और मस्जिदों का उत्कर्ष हुआ, उनके रीति-रिवाजों ने संस्कृतियों और विचारधाराओं के स्‍वांगीकरण और व्यापार और लोगों के आदान-प्रदान के माध्यम से हमारे जीवन को समृद्ध किया। यह संबंध गहरा, पीढ़ियों में विकसित और पारस्परिक रूप से लाभप्रद था।

3. आज, हम इस क्षेत्र को अपना विस्तारित पड़ोस कहते हैं, जो सांस्कृतिक स्नेह और नीतिगत प्राथमिकता का संकेत है। हमने हाल के दशकों में इस क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंधों में अभूतपूर्व सकारात्मक बल देखा है। हमने इज़राइल सहित कई रणनीतिक सहभागिताएं बनाईं हैं। यह क्षेत्र हमारे आर्थिक और सुरक्षा हितों में केंद्रीय है और भूमंडलीकृत दुनिया और सुधरी हुई बहुपक्षीयता में हमारी भूमिका के लिए महत्वपूर्ण है। हमारी साझा दृष्टि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता, आर्थिक संवृद्धि और विकास प्राथमिकताओं से सुसंगत जुड़ाव, संसाधनों और प्रौद्योगिकियों में सहयोग और सुधरी हुई और जिम्मेदार बहुपक्षीय प्रणाली के प्रयासों की आशा करती है। ये भविष्योन्मुख रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

4. संबंधों के कुछ महत्वपूर्ण तत्वों की समीक्षा करना उपयोगी होगा।

- पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के साथ व्यापार का परिमाण 170 बिलियन डॉलर है, जिससे यह एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार बन जाता है। यह टोकरी समय के साथ विविध हुई है, हालांकि अभी भी अधिकांश व्यापार हाइड्रोकार्बन का होता है।

- पिछले दो दशकों में 7 बिलियन डॉलर का संचयी एफडीआई प्रवाह हमारे वैश्विक एफडीआई का 2% रहा है। लेकिन यह सॉवरेन वेल्‍थ फंडों और पोर्टफोलियो निवेश के साथ हाल के वर्षों में बढ़ा है; इसके अलावा, भारतीय कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश में रुचि रखती हैं।

- यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी तेल ब्लॉकों, शोधनशालाओं, रणनीतिक तेल भंडारों आदि में हिस्सेदारी के अलावा भारत के तेल और गैस आयात में क्रमश: 53% और 41% हिस्‍सेदारी है।

- भारत इस क्षेत्र से 60% उर्वरक और कच्चा माल मंगाता है, और बदले में इसने अपने आपको खाड़ी के लिए खाद्य निर्यात का विश्वसनीय स्रोत बनाया है, जिससे खाद्य सुरक्षा इस सहभागिता का एक तत्व बन जाती है।

- 9 मिलियन से अधिक भारतीय प्रवासियों की उपस्थिति भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण बनाती है, जिन्‍होंने विप्रेषण में लगभग $48 बिलियन डॉलर घर भेजा है। भारतीय कामगार पसंदीदा प्रवासियों के रूप में उभरे हैं और खाड़ी राज्यों के विकास में उनके योगदान को मान्यता दी गई है।

5. निस्‍संदेह, इस क्षेत्र ने काफी संघर्ष देखा है। पूरे क्षेत्र में प्रगति और विकास के बावजूद, आर्थिक विकास से कई वंचित रहे हैं और धार्मिक कट्टरता व चरमपंथ ने हिंसा और आतंकवाद के प्रसार में भूमिका निभाई है। कभी-कभी विफल राज्यों और बाह्य एजेंसियों से समर्थन का लाभ उठाते हुए गैर-राज्य कर्ताओं के विकास ने इस परिदृश्य को जटिल बना दिया है। विचारधारा में संयम लाने के लिए सुधारों; समाज में सहिष्णुता और बहुलवाद को पुनर्जीवित करने; और सभी के लिए शांति, विकास और स्थिरता के लिए स्थितियों का निर्माण करने की आवश्यकता है। आतंकवादियों की महत्वाकांक्षाओं को विफल करने के लिए राज्यों के बीच घनिष्ठ सुरक्षा समन्वय और सहयोग है। भारत ने अहस्तक्षेप और पक्षपात न करने की सैद्धांतिक नीति बनाए रखी है, शांतिपूर्ण बातचीत से निपटारे की सलाह दी है और सभी देशों के साथ संबंध बनाए रखा है।

6. हम अरब राज्यों और इज़राइल के बीच हालिया मेल-जोल का स्वागत करते हैं जिससे संबंधों को सामान्य बनाने का मार्ग प्रशस्‍त हुआ है। इससे इस क्षेत्र के उज्जवल भविष्य की संभावनाओं में सुधार आ सकता है। आदर्श भविष्य लोगों की विधिसम्‍मत आकांक्षाओं को साकार करने पर टिका है। हमने प्राय: कहा है कि पक्षकारों के बीच सीधी बातचीत दोनों पक्षों के बीच शांतिपूर्ण और सुरक्षित सह-अस्तित्व के लिए समाधान प्रदान कर सकती है और साथ ही साथ-साथ रहने वाले दोनों राज्यों के नागरिकों को शांति और समृद्धि भी प्रदान कर सकती है।

7. जैसा कि हम जानते हैं, भारत-इजरायल का संबंध इतिहास में ओत-प्रोत, रंग-बिरंगा संबंध रहा है। जब से हमने पूर्ण राजनयिक संबंधों को स्थापित किया है, तब से लगभग तीन दशकों में दुरारोह प्रक्षेप पथ असाधारण से कुछ कम नहीं रहा है। 2017 में रणनीतिक साझेदारी की स्थापना महज आशय की घोषणा नहीं थी बल्कि संबंधों के सच्चे और विशेष चरित्र का उल्‍लेख थी। आज, हम सहयोग की नई संभावनाओं की खोज शुरू कर रहे हैं।

8. मैं बस कुछ का उल्लेख करना चाहता हूँ, जिनमें बहुत अधिक संभाव्‍यता और समकालीन प्रासंगिकता है: उच्च प्रौद्योगिकी, नवाचार, पानी और ऊर्जा।

- सर्वव्‍यापी कोविड महामारी के अभूतपूर्व व्यवधान के साथ, भारत और इज़राइल ने रैपिड टेस्ट किट विकसित करने के लिए हाथ मिलाया और वैक्सीन अनुसंधान पर सहयोग किया। मेक इन इंडिया के तहत रक्षा में उच्च तकनीकी सहयोग की गुंजाइश बढ़ी है और साइबर अपराधों का मुकाबला करने के लिए सहयोग अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि हम आतंकवादियों के खतरे का सामना कर रहे हैं। एक ऐसे युग में जहां प्रौद्योगिकी का बोलबाला है, भारत-इज़राइल परियोजनाएं न केवल द्विपक्षीय रूप से बल्कि विश्व स्तर पर नए बाजार प्राप्‍त करने में रास्‍ता दिखा सकती हैं।

- इज़राइल को स्टार्ट-अप राष्ट्र के रूप में जाना जाता है। इसी तरह स्टार्ट-अप इंडिया पहल निवेशकों, उद्यमियों और नवोन्मेषकों को एक साथ लाने के लिए अनुकूल माहौल बना रही है। गुजरात में आईक्रिएट सेंटर और $40 मिलियन डॉलर का संयुक्‍त आई4एफ (भारत-इजरायल औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी नवाचार निधि) इस क्षेत्र में गठजोड़ तंत्र हैं; और अभी बहुत कुछ किया जा सकता है।

- पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन, अगला सीमांत है। विशेष रूप से शुष्क क्षेत्रों में पानी तक पहुँच ने चुनौतियां पेश कीं हैं। इज़रायल जल संरक्षण और शुष्क भूमि कृषि तकनीकों में अपने क्षेत्र में अग्रणी अनुसंधान में सबसे आगे रहा है। यह द्विपक्षीय सहयोग का एक रणनीतिक क्षेत्र है। हमारे प्रयासों का उद्देश्य जल संरक्षण और विलवणीकरण में आपकी अग्रणी प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना है ताकि जामनगर, चेन्नई और बुंदेलखंड की प्यासी भूमि तक पानी लाया जा सके, इस क्षेत्र में पारंपरिक स्वदेशी जल पद्धतियों को पुनर्जीवित किया जा सके और प्रौद्योगिकी पर आधारित नवीन कृषि विधियों को प्रोत्साहित किया जा सके। भारत-इजरायल कृषि परियोजना और भारत में हाल ही में कृषि सुधार और कानून इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

- अंत में, ऊर्जा। संवृद्धि और विकास ऊर्जा की माँग करते हैं। पूर्वी भूमध्य सागर में विशाल इजरायली भंडारों से गैस निर्यात के लिए अनुबंध, भारत में तेल और गैस भंडारों की खोज, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के लिए प्रौद्योगिकियां और सहयोग विकसित करना आगे की राह हो सकता है। जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन प्रयासों में भागीदारी हमारे समाजों के लिए बहुत लाभदायक होगी।

9. अंत में, हम दुनिया और उसमें अपने स्‍थान को आकार देने के लिए लोकतंत्र और बहुलवाद की ताकत का लाभ उठाएंगे। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के साथ, हम "अधिक उन्‍नत" दृष्टिकोण के साथ अपने मजबूत पारंपरिक संबंधों को बढ़ाना चाहते हैं, जो भविष्योन्‍मुख कार्य योजना में प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का आलिंगन करता है जो कि न केवल संबंध मजबूत करता है बल्कि उन्हें फिर से तैयार करता है और उन्हें बदलते समय के लिए प्रासंगिक बनाता है।

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