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24 नवंबर 2020 को आयोजित ‘अफगानिस्तान सम्मेलन 2020’ में विदेश मंत्री का संबोधन

नवम्बर 24, 2020

महानुभावों,

देवियों एवं सज्जनों,


अपनी बात की शुरुआत मैं इस सम्मेलन के सह अध्यक्षों को धन्यवाद देकर करना चाहूँगा जिन्होंने इस मुश्किल समय में भी इस कार्यक्रम का आयोजन किया है।मैं यहां मौजूद सभी नेताओं को एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और प्रगतिशील अफगानिस्तान के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैं इस मौके पर उन सभी लोगों के प्रति भी अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूँ जिन्होंने हाल ही में काबुल विश्वविद्यालय में हुए हमले में अपने परिजनों को खोया है।

2. सबसे निकटवर्ती पड़ोसियों के रूप में, भारत और अफगानिस्तान एक प्राकृतिक ऐतिहासिक संबंध को साझा करते हैं। हमारी रणनीतिक साझेदारी और अफगानिस्तान के विकास के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता इन समयसिद्ध साझेदारी को दर्शाती है।

3. अफगानिस्तान के लिए 3बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के हमारे विकास पोर्टफोलियो का उद्देश्य अफगान नागरिकों की क्षमता और संभावनाओं के निर्माण के साथ-साथ वहां के शासन और सार्वजनिक सेवा में सुधार के लिए उनके संस्थानों का विकास करना भी है। अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में फैली हमारी 400 से अधिक परियोजनाओं से आज अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं है।

4. वर्तमान में चल रहे विकास कार्यक्रम पांच स्तंभों पर केंद्रित हैं: (क) बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं; (ख) मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण; (ग) मानवीय सहायता; (घ) उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाएं; और (च) वायु एवं भूमि संपर्क के माध्यम से व्यापार और निवेश को बढ़ाना।

5. पूर्ण हो चुकी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल हैं- डेलराम से जरंज (ईरानी सीमा पर) तक 218 किलोमीटर सड़क का निर्माण जो ईरान से अफगानिस्तान के लिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करता है; भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध; और अफगानी लोकतंत्र के प्रतीक अफगान संसद भवन का निर्माण जिसका उद्घाटन 2015 में हुआ था।

6. 65,000 से अधिक अफगान विद्यार्थियों ने विभिन्न छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के तहत भारत में शिक्षा प्राप्त की है और जब मैं यह कह रहा हूँ, तब वर्तमान में 15,000 छात्र भारत में पढ़ रहे हैं। भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए युवा अफगान महिलाओं को अब तक 3000 छात्रवृत्ति दी जा चुकी हैं। बुनियादी शिक्षा से परे, हमने अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया है। अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में मदद की हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के साथ यह संख्या हर साल बढ़ती जाएगी।

7. अफगानिस्तान की प्रगति में उसका भूमीबद्ध भूगोल बाधक है और हमें इसका समाधान करने की आवश्यकता है। चाबहार बंदरगाह के माध्यम से, हमने अफगानिस्तान को एक वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान की है जिसने कोविड महामारी के दौरान 75,000 टन गेहूं के परिवहन में मदद की है। हम कोविड-19 चुनौती का सामना करने के लिए 20 टन से अधिक जीवन रक्षक दवाएं और अन्य उपकरण भेजने में भी सक्षम थे।

8. मुझे आज अफगानिस्तान के साथ शतूत बांध बनाने के लिए समझौते की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जो काबुल शहर के 2 मिलियन निवासियों को सुरक्षित पेयजल प्रदान करेगा। यह 202 किलोमीटर की 2009 की फुल-ए-खुमरी ट्रांसमिशन लाइन पर है जिसके माध्यम से हमने शहर को बिजली प्रदान की। भारत अफगानिस्तान में उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजना के चौथे चरण को भी लॉन्च करेगा, जिसके अंतर्गत 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लगभग 150 प्रोजेक्ट शामिल हैं।

9. भारत ने अफगानिस्तान में शांति और विकास में भारी निवेश किया है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि पिछले दो दशकों के लाभ को संरक्षित किया जाएगा और अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के हितों को सुनिश्चित किया जाएगा।

10. अफगानिस्तान में हिंसा का बढ़ता स्तर गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। जब हम अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं, भारत तत्काल और व्यापक युद्ध विराम का आह्वान करता है। हम यह भी मानते हैं कि शांति प्रक्रिया अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित होनी चाहिए।

महानुभावों,

11. एक महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में, भारत एक शांतिपूर्ण, समृद्ध, संप्रभु, लोकतांत्रिक और एकजुट अफगानिस्तान के निर्माण की दिशा में काम करने के लिए अफगानिस्तान के लोगों और विश्व समुदाय के साथ हाथ मिलाकर चलने के लिए तत्पर है।

नई दिल्ली
नवम्बर 24, 2020

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