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भारत और बांग्लादेश के बीच संयुक्त परामर्श आयोग की छठी बैठक पर संयुक्त वक्तव्य

सितम्बर 29, 2020

भारत और बांग्लादेश के बीच संयुक्त परामर्श आयोग (जेसीससी) की छठी बैठक 29 सितंबर, 2020 को आयोजित की गई। हालांकि, यह ढाका बैठक में आयोजित की जानी थी, क्योंकि कोविड-19 की वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए बैठक का आयोजन वर्चुअल रुप से किया गया। संयुक्त परामर्श आयोग की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. ए. के. अब्दुल मोमेन तथा भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने संयुक्‍त रूप से की।

2. दोनों मंत्रियों ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना एवं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति पर संतोष ज़ाहिर किया। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों की विस्‍तार से समीक्षा की तथा फरवरी 2019 में नई दिल्ली में आयोजित पांचवी जेसीसी बैठक एवं अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली की यात्रा के दौरान लिए गए विभिन्न निर्णयों के कार्यान्वयन की दिशा में हुई प्रगति पर अपना संतोष व्यक्त किया।

3. कोविड-19 महामारी के दुनिया भर के देशों द्वारा सामना की जा रही चुनौतियां को देखते हुए उन्होंने इस दौरान दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने के तरीके पर संतुष्टि ज़ाहिर की। बांग्लादेश से सड़क व जलमार्ग के माध्यम से कोलकाता से उत्तर पूर्व भारत तक कार्गो का परीक्षण के तौर पर पहला आवागमन, अंतर्देशीय जल पारगमन एवं व्यापार पर आधारित प्रोटोकॉल के दूसरे परिशिष्ट पर हस्ताक्षर तथा कंटेनर व पार्सल ट्रेनों समेत रेल मार्ग का उपयोग करके भारत से माल का निर्यात, वो पहल हैं जो कोविड-19 के की वजह से आने वाली बाधाओं के बावजूद दोनों देशों के बीच साझा समझ को दर्शाती है। इस संबंध में, विदेश मंत्री ने एक ऐसी स्थिति बनाने हेतु, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक हो, क्षेत्र में कनेक्टिविटी को मजबूत करने में भारत का समर्थन करने की बांग्लादेश की प्रतिबद्धता को दोहराया।

4. कोविड-19 के टीकों की आपूर्ति को प्राथमिकता देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, विदेश मंत्री ने भारत की 'पड़ोसी पहले' की नीति में बांग्लादेश के महत्व पर जोर दिया। इस संदर्भ में, मंत्रियों ने अपने अधिकारियों को बांग्लादेश में चरण-III के परीक्षण, टीके के वितरण, सह-उत्पादन व वितरण से जुड़ी आवश्यक जानकारियों के आदान-प्रदान में तेजी लाने के निर्देश दिए।

5. दोनों पक्षों ने दिसंबर 2020 में वर्चुअल रुप से आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री स्तरीय शिखर सम्मेलन का स्वागत किया। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मार्च 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा को कोविड-19 के अचानक शुरु होने के कारण स्थगित करना पड़ा था, दोनों पक्षों में आशा व्यक्त की कि इस यात्रा का आयोजन फिर से ऐसी तरीख को किया जा सकता है, जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ समारोह की शुरुआत साथ ही बांग्लादेश तथा भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना से मेल खाती हो।

6. दोनों मंत्रियों ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर बांग्लादेश सरकार द्वारा जारी एक स्मारक डाक टिकट का संयुक्त रूप से अनावरण किया। विदेश मंत्री ने 16 दिसंबर 2020 को बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के जन्म शताब्दी के अवसर पर भारत द्वारा एक स्मारक डाक टिकट जारी करने की घोषणा की। दोनों देशों ने संयुक्त रूप से मुक्ति संग्राम की स्वर्ण जयंती और भारत, बांग्लादेश तथा अपने संबंधित मिशनों के माध्यम से चुनिंदा तीसरे देशों में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की पचासवीं वर्षगांठ मनाने का फैसला किया। दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों पर चर्चा की, जिसमें ढाका एवं नई दिल्ली / कोलकाता में 16 दिसंबर को होने वाली औपचारिक सैन्य परेड; 1971 के भारतीय युद्ध के सेवानिवृत्त सैनिक को सम्मानित करने; स्वाधीनोटा शोरोनी के उद्घाटन के माध्यम से ऐतिहासिक मुजीबनगर-कोलकाता सड़क का पुनरुद्धार और मुजीबनगर में स्थायी अप्रवासन चेक पोस्ट की स्थापना; दोनों देशों के सीमा रक्षक बलों के सहयोग से मैत्री मेला या मिलन मेला का आयोजन; बांग्लादेश एवं भारत के विभिन्न शहरों में लोगं, बुद्धिजीवियों और 1971 के युद्ध के सेवानिवृत्त सैनिकों की भागीदारी के साथ साल भर चलने वाले सेमिनार; और साथ ही 50 वर्षों की जीत व मित्रता पर एक वेबसाइट लॉन्च करना, जिसपर 1971 की जीत की प्रासंगिकता के दस्तावेज सार्वजनिक पहुंच हेतु उपलब्ध होंगे, शामिल है। दोनों पड़ोसी देश बांग्लादेश और भारत में तथा अन्य स्थानों पर बंगबंधु-बापू डिजिटल संग्रहालय को स्थापित करने पर सहमत हुए। दोनों मंत्रियों ने अपने संबंधित मंत्रालयों को इन विशिष्ट कार्यक्रमों पर समन्वय हेतु एक संयुक्त समिति बनाने का निर्देश दिया।

7. दोनों पक्षों ने भारतीय फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल के निर्देशन में बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान पर बनने वाली बायोपिक की प्रगति पर भी चर्चा की। इसके साथ ही, उन्होंने लिबरेशन वॉर डॉक्यूमेंट्री पर काम शुरू करने पर भी जोर दिया, जिसके संबंध में बांग्लादेश की ओर से बताया गया कि बांग्लादेश से निर्देशक को चुनने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। 8. दोनों मंत्रियों ने ढाका में बीएसएफ और बीजीबी के बीच हाल ही में संपन्न 50वीं महानिदेशक स्तरीय वार्ता (डीजीएलटी) में सीमा प्रबंधन और सुरक्षा पर भी चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (सीबीएमपी) के प्रभावी कार्यान्वयन को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सीमा पर होने वाली नागरिकों की मौत चिंता प्रमुख का विषय है तथा संबंधित सीमा बलों से सीमा पर ऐसी कोई भी घटनाओं न हो इसके लिए समन्वित उपायों को अपनाने का अनुरोध किया। सीमा के आस-पास रहने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय सीमा का सम्मान करने के संबंध में शिक्षित करने के महत्व पर बल दिया गया। भारत की ओर से 150 गज के भीतरी सीमा के साथ अतिसंवेदनशील निशान के एक पंक्ति की बाड़ लगाने का भी अनुरोध किया, जो सीमा पर होने वाले अपराधों को रोकने में मदद करेगा।

9. दोनों मंत्रियों ने कहा कि भारत तथा बांग्लादेश अभी दक्षिण एशिया की शीर्ष दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने समेत व्यापार व निवेश के पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास के लिए और अधिक उपाय किए जा सकते हैं। बांग्लादेश की ओर से भारत में साफ्टा के तहत बांग्लादेशी उत्पादों की कर मुक्त पहुंच प्रदान करने हेतु भारत सरकार की सराहना की गई, जिसके कारण भारत में बांग्लादेशी निर्यात 2018-19 में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निशान को पार कर सकता है, जिससे भारत एशिया में ऐसी उपलब्धि वाला दूसरा देश बन गया है, हालांकि व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि बांग्लादेश के लिए साफ्टा के तहत दी जाने वाली छूट का बेहतर उपयोग करने हेतु, दोनों पक्षों को पर्याप्त व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।

10. इस संदर्भ में, दोनों मंत्रियों ने व्यापार की सुविधा के महत्वपूर्ण घटक के रूप में मानकों के सामंजस्य एवं प्रमाण-पत्रों की पारस्परिक मान्यता की आवश्यकता पर भी ध्यान दिया। भारत की ओर से परीक्षण प्रमाण-पत्रों की सतत स्वीकृति हेतु बांग्लादेश प्रमाणपत्र एवं परीक्षण संस्थान की मान्यता को नवीनीकृत करने का बांग्लादेश को दिया गया अपना सुझाव दोहराया गया।

11. दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने अधिकारियों को आपूर्ति श्रृंखलाओं में किसी प्रकार का अवरोध न आये, इससे बचने के लिए साथ मिलकर काम करने के लिए कहा, विशेष रूप से कोविड की वर्तमान स्थिति के बाद। उन्होंने चार ट्रांस-बॉर्डर रेलवे कनेक्शनों के साथ-साथ अंतर्देशीय और तटीय जलमार्गों के उपयोग को अनुकूलित करते हुए भूमि बंदरगाहों के माध्यम से दोतरफा व्यापार फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने महामारी के दौरान दोनों तरफ यात्रियों की कुछ श्रेणियों की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 'हवाई यात्रा बबल' की उड़ानें शुरू करने पर सहमति व्यक्त की। बांग्लादेश पक्ष ने भारतीय पक्ष से अनुरोध किया कि वे जल्द से जल्द भूमि बंदरगाहों के माध्यम से नियमित यात्रा फिर से शुरू करें।

12. दोनों देशों के बीच जूट क्षेत्र पर परस्पर निर्भरता को देखते हुए, बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री से बांग्लादेश से भारत में आने वाले जूट उत्पादों के निर्यात एवं कुछ अन्य वस्तुओं के निर्यातों पर लगने वाले एंटी-डंपिंग / छल-रोधी शुल्क के लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान करने का आग्रह किया। भारत की ओर से यह दोहराया गया कि एंटी-डंपिंग संबंधी जांच अर्ध-न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से व्यापार उपचार महानिदेशालय द्वारा की जाती है और औपचारिक आवेदन दर्ज होने के बाद इसको सरल करने का आश्वासन दिया। दोनों पक्षों ने कर से जुड़े के विभिन्न पहलुओं पर गौर करने हेतु जल्द से जल्द एक परामर्श वार्ता आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।

13. विदेश मंत्री ने भारत से अनुरोध किया कि वो भारत सरकार द्वारा अपनी निर्यात नीति में किये जाने वाले किसी भी प्रकार के बदलाव के संबंध में अग्रिम रुप से सूचित कर दें, जिससे भारत द्वारा बांग्लादेश को किया जाने वाला आवश्यक वस्तुओं का निर्यात प्रभावित होता हो, क्योंकि इस तरह के निर्यात बांग्लादेश के घरेलू बाजार को प्रभावित करने के महत्वपूर्ण कारक हैं। भारतीय पक्ष ने इस अनुरोध पर ध्यान दिया।

14. बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने भारत की ओर से भारत की एफडीआई नीति के तहत अपने देश के निवेशकों के लिए एक समान व्यवहार का विस्तार करने का अनुरोध किया ताकि वे स्वचालित मार्ग के तहत निवेश कर सकें। भारतीय पक्ष ने बांग्लादेश से निवेश का स्वागत किया। अनुमोदन प्राप्त होने में देरी का सामना कर रहे निवेश प्रस्तावों के संदर्भ में, भारतीय पक्ष ने ऐसे प्रस्तावों की शीघ्र निपटारा करने का आश्वासन दिया। बांग्लादेश ने भारत के शीर्ष निवेशकों को अपने यहां निवेश करने हेतु आमंत्रित किया। भारत के विदेश मंत्री ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से, संभावित निवेशकों को बांग्लादेश में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने का आश्वासन दिया।

15. दोनों मंत्रियों ने भारत एवं बांग्लादेश के बीच हुए तीन लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) समझौतों के तहत की जाने वाली परियोजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा की। बांग्लादेशी पक्ष ने भारत को एशिया में बांग्लादेश के सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय आर्थिक तथा विकास भागीदारों में से एक बताते हुए धन्यवाद दिया। इन परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन हो, इसके लिए दोनों पक्षों ने ढाका में बांग्लादेश की ओर से सचिव, आर्थिक संबंध प्रभाग एवं भारत के उच्चायुक्त की अध्यक्षता में एक 'उच्च स्तरीय निगरानी समिति' बनाने का फैसला किया, जो एलओसी परियोजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा करेगी।

16. दोनों पक्षों ने बिजली तथा ऊर्जा क्षेत्रों में सकारात्मक सहयोग पर विचार किया। भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन, मैत्री सुपर थर्मल पावर परियोजना तथा अन्य परियोजनाओं सहित परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर सहमति बनी।

17. दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण सहित रक्षा सहयोग में हो रहे विकास पर संतुष्टि ज़ाहिर की। उन्होंने वार्षिक रक्षा वार्ता की अगली बैठक नवंबर में आयोजित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट के शीघ्र कार्यान्वयन का अनुरोध किया।

18. दोनों मंत्रियों ने तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे के लिए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने छह अन्य संयुक्त नदियों मनु, मुहुरी, खोवाई, गुमटी, धारला और दुधकुमार के पानी के बंटवारे पर अंतरिम समझौते के ढांचे के जल्द समापन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। इस संबंध में, दोनों मंत्रियों ने साझा नदियों से जुड़े मुद्दों को हल करने में संयुक्त नदी आयोग तंत्र के सकारात्मक योगदान का आह्वान किया और संबंधित अधिकारियों से दोनों देशों के बीच मंत्री स्तरीय जेआरसी बैठक बुलाने पर विचार करने का आग्रह किया।

19. विदेश मंत्री ने बांग्लादेश की ऊपरी सुरमा-कुशियारा परियोजना के कार्यान्वयन हेतु भारतीय पक्ष से सहयोग करने का अनुरोध किया। भारतीय पक्ष ने कहा कि इस संबंध में व्यवहार्यता रिपोर्ट की जांच की जा रही थी।

20. विदेश मंत्री ने इस बात पर ध्यान दिखाते हुए कि बांग्लादेश 2001 से भारतीय मछुआरों को सीओसी मान्यता दे रहा है, भारतीय पक्ष से बांग्लादेशी मझुआरों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ काम्पिटन्सी (सीओसी) की पारस्परिक मान्यता को स्वीकार करने का अनुरोध किया। भारतीय पक्ष ने यह बताया कि बांग्लादेश के मछुआरों को सर्टिफिकेट ऑफ काम्पिटन्सी की मान्यता अंतरराष्ट्रीय कन्वेन्शन के अनुसार और दोनों पक्षों के हित में होगी।

21. दोनों विदेश मंत्रियों ने अपने अधिकारियों से दोनों देशों के बीच अगली कांसुलर वार्ता जल्द आयोजित करने के लिए कहा। बांग्लादेश ने जल्द से जल्द ढाका में अगले कांसुलर वार्ता की मेजबानी करने का अपना प्रस्ताव दोहराया।

22. बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी सरकार प्रासंगिक दस्तावेज देकर इस महामारी के दौरान बांग्लादेश जाने वाले भारतीय नागरिकों को वीजा और यात्रा की मंजूरी जारी कर रही है। उन्होंने भारतीय पक्ष से तत्काल उपचार की आवश्यकता वाले रोगियों, भारत के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र तथा व्यवसाय करने वाले लोगों समेत बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा जारी करने पर विचार करने का अनुरोध किया। भारतीय पक्ष ने अवगत कराया कि एयर बबल के शुरु होते ही ये सभी समस्याएं स्वतः ही सुव्यवस्थित हो जाएंगी। बांग्लादेश की ओर से भारत से सड़क मार्गों से भारत आने वाले बांग्लादेशियों की यात्रा को आसान बनाने के अनुरोध को भी दोहराया गया।

23. यह मानते हुए कि आतंकवाद वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है, दोनों पक्षों ने इसके सभी रूपों तथा अभिव्यक्तियों में खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

24. दोनों पक्षों ने शीघ्र ही आयोजित होने वाली गृह सचिव स्तर की वार्ता पर विचार-विमर्श किया।

25. भारत के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने वोट के माध्यम से भारत का समर्थन करने हेतु बांग्लादेश को धन्यवाद दिया। दोनों देश जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने, एसडीजी के लक्ष्य को प्राप्त करने तथा प्रवासियों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए। दोनों मंत्रियों ने म्यांमार के रखाइन राज्य से जबरन विस्थापित किये गए लोगों की सुरक्षित, शीघ्र तथा स्थायी वापसी के महत्व को दोहराया, जिन्हें अभी बांग्लादेश द्वारा आश्रय दिया जा रहा है। इस संबंध में, बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक समस्या का जल्द समाधान नहीं किया हो जाता, तब तक ऐसी संभावनाएं हैं कि कट्टरपंथ क्षेत्र में आर्थिक विकास, शांति एवं स्थिरता को बाधित कर सकता है, और उन्होंने भारत से इस संकट का समाधान करने का अनुरोध किया।

26. दोनों मंत्रियों ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप के बाद क्षेत्रीय तथा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए, दो क्षेत्रीय संगठनों, यानि सार्क एवं बिम्सटेक के संसाधनों का लाभ उठाना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। भारत ने बांग्लादेश को सार्क कोविड आपातकालीन कोष में किए गए योगदान के लिए धन्यवाद दिया। बांग्लादेश ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आईओआरए के तहत सहयोग को मजबूत करने में भारत के समर्थन का अनुरोध किया। वर्ष 2021 में इस संघ का अध्यक्ष बनने केमद्देनजर बांग्लादेश ने भी आईओआरए में सक्रिय भूमिका निभाने का आश्वासन दिया।

27. दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर सकारात्मक मीडिया रिपोर्टिंग के महत्व को रेखांकित किया और इस संबंध में अपने-अपने संबंधित मीडिया समुदायों से अधिक जिम्मेदारी पूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान करने पर अपनी सहमति व्यक्त की।

28. दोनों पक्षों ने राजनयिक माध्यम से दोनों देशों के लिए सुविधाजनक तय तारीख पर नई दिल्ली में संयुक्त परामर्श आयोग की अगली बैठक आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।

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