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तीसरी भारत-अमेरिका 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता पर संयुक्त वक्तव्य

अक्तूबर 27, 2020

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने तीसरी वार्षिक भारत-अमेरिका 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता हेतु अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो तथा रक्षा सचिव डॉ. मार्क टी. एस्पर का नई दिल्ली पहुंचने पर स्वागत किया। दोनों देशों के मंत्रियों ने फरवरी 2020 में राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान भारत तथा अमेरिका के संबंधों को व्यापक वैश्विक सामरिक भागीदारी की दिशा में आगे बढ़ाने का स्वागत किया। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत बनाने, आपसी विश्वास व मित्रता को सुदृढ़ करने, लोकतंत्र के प्रति साझा वचनबद्धता, रणनीतिक हितों के समावेश तथा दोनों देशों के नागरिकों की मजबूत भागीदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

भारत तथा अमेरिका के बीच सात दशकों से भी अधिक समय से चली आ रही राजनयिक संबंधों की सराहना करते हुए, मंत्रियों ने भारत-अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के पूर्ण विकास हेतु 2 + 2 ढांचे के तहत सहयोग का विस्तार करने की इच्छा दर्शाई।

कोविड-19 महामारी के दौरान सहयोग

मंत्रियों ने कोविड-19 महामारी के कारण आने वाली चुनौतियों का सामना करने में भारत तथा अमेरिका के बीच अच्छे सहयोग की सराहना की। उन्होंने टीके के विकास, चिकित्सीय साधनों, निदान, वेंटिलेटर एवं अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के लिए सहयोग को मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया। यह बात को ध्यान में रखते हुए कि शोध एवं विकास में हमारे द्विपक्षीय संबंध और टीके एवं चिकित्सीय साधनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हमारी साझा क्षमताओं के अनुरुप हैं, मंत्रियों ने संयुक्त रूप से उच्च गुणवत्ता वाली, सुरक्षित, प्रभावी व सस्ती कोविड-19 वैक्सीन और उपचार को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की इच्छा जताई। भारत ने यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) द्वारा इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी को उपलब्ध कराये गए 200 वेंटिलेटरों के लिए अमेरिका की सराहना की, जबकि अमेरिकी पक्ष ने इस चुनौतीपूर्ण समय में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), आवश्यक दवाओं, और चिकित्सीय साधनों के निर्यात के लिए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। मंत्रियों ने स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों और महामारी, रोकथाम, निदान तथा संचारी व गैर-संचारी रोगों के उपचार, और जैव चिकित्सा शोध और नवोन्मेष सहित स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की अन्य घटक एजेंसियों और विभागों सहित भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (एचएचएस) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर विचार विमर्श किया। मंत्रियों ने कोविड-19 और अन्य उभरते खतरों सहित संक्रामक रोगों पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से सहयोग करते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआच) और यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज़ (एनआईएडी / एनआईएच) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर भी विचार-विमर्श किया। मंत्रियों ने कोविड-19 और अन्य उभरते खतरों सहित संक्रामक रोगों पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से सहयोग करते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआच) और यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज़ (एनआईएडी / एनआईएच) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने शोध पर केंद्रित फिजीशियन वैज्ञानिकों की संख्या को बढ़ाने में मदद करने हेतु प्रारंभिक और मध्य-करियर के भारतीय एवं अमेरिकी वैज्ञानिकों के लिए नैदानिक शोध अध्येतावृत्ति हेतु आवेदन के आगामी निर्णय का स्वागत किया, जिससे नैदानिक अभ्यास उन्नत होगा तथा दोनों देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के महत्व को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने भारत-अमेरिका स्वास्थ्य वार्ता जल्द से जल्द आयोजित करने पर सहमति जताई।

मंत्रियों ने आपूर्ति श्रृंखला को आसान बनाने तथा मौजूदा प्रतिमानों के विकल्पों की तलाश करने के प्रयासों की पुनः पुष्टि की, जिनमें महामारी के दौरान अधिक तनाव आ गया है और इससे महत्वपूर्ण कमजोरियां सामने आई हैं। मंत्रियों ने भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका समेत विश्व स्तर पर आर्थिक सुधारों का समर्थन करने का आह्वान किया, जो महामारी से पहले से कहीं अधिक लचीली हो।

मंत्रियों ने महामारी के दौरान दोनों देशों के फंसे भारतीय तथा अमेरिकी नागरिकों के प्रत्यावर्तन हेतु उठाये गए कदमों की सराहना की।

इंडो-पैसिफिक और वैश्विक नेतृत्व हेतु साझा दृष्टिकोण

मंत्रियों ने शांतिपूर्ण, स्थिर, सुरक्षित, मुक्त, खुला, समावेशी और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर निर्मित हो, जो आसियान की केंद्रीयता पर टिका हो, कानून द्वारा प्रशासित हो, अवसंरचनात्मक निवेश टिकाऊ एवं पारदर्शी हो, नेविगेशन तथा ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता हो, जिसमें संप्रभुता के प्रति आपसी सम्मान तथा विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाता हो। इस क्षेत्र के सभी हितधारकों के आर्थिक व सुरक्षा से जुड़े हितों को सुदृढ़ रखने की आवश्यकता को दर्शाते हुए, सभी मंत्रियों ने समान विचारधारा वाले देशों के बीच इंडो-पैसिफिक पर बढ़ते तालमेल का स्वागत किया। उन्होंने दोबारा इस बात पुष्टि की कि भारत-अमेरिका का करीबी सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा एवं समृद्धि को बढ़ावा देने में साझा हितों को मजबुती प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार दक्षिण चीन सागर में अपनाई गई आचार संहिता का किसी भी राष्ट्र के उचित अधिकारों तथा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

मंत्रियों ने हाल ही में 6 अक्टूबर, 2020 को टोक्यो में आयोजित दूसरे आयोजित द्वितीय भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान- संयुक्त राज्य अमेरिका मंत्रिस्तरीय बैठक का स्वागत किया। उन्होंने ससाझा हित के क्षेत्रीय मुद्दों साथ ही साथ समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, क्षेत्रीय संपर्क, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा आतंकवाद का मुकाबला करने पर जारी सहयोग पर भी विचारों के आदान-प्रदान की सराहना की। मंत्रियों ने इन परामर्श का अब वार्षिक रूप से आयोजन होने का भी स्वागत किया। उन्होंने साझेदार देशों के विकास संगठनों के बीच बातचीत शुरू करने सहित अन्य गतिविधियों को बढ़ाकर क्वाड सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

मंत्रियों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सतत, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना के विकास पर अपना समर्थन जताया। उन्होंने इस क्षेत्र में साझा परियोजनाओं को शुरू करने हेतु यूएसएआईडी तथा भारत के विकास साझेदारी प्रशासन (डीपीए) के बीच सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए। मंत्रियों ने इस वर्ष भारत में अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त सहयोग (डीएफसी) का स्‍थायी कार्यालय खोलने का स्वागत किया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिये गठबंधन (सीडीआरआई) के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया, प्रमुख तंत्र के रूप में काम करेगा। उधारकर्ताओं और लेनदारों के लिए जिम्मेदार, पारदर्शी और स्थायी वित्तपोषण प्रथाओं को सुनिश्चित करके विकासशील तथा कम आय वाले देशों में संप्रभु ऋण के निर्माण को शामिल करने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए दोनों देशों के मंत्री ब्लू डॉट नेटवर्क के तहत सहयोग करने के तरीके तलाशने के लिए तत्पर दिखे। उन्होंने 28-29 अक्टूबर, 2020 को आयोजित होने वाले दूसरे इंडो-पैसिफिक बिजनेस फोरम (आईपीबीएफ) को लेकर भी तत्परता दिखाई।

शांति सुनिश्चित करने हेतु सहयोग को स्थाई बनाने के लिए दोनों देशों के मंत्रियों ने इंडो-पैसिफिक में साझेदार देशों के साथ संयुक्त क्षमता निर्माण के प्रयासों को बढ़ाने तथा बहुपक्षीय शांति स्थापना प्रशिक्षण अभ्यास में भाग लेने का निर्णय लिया।

दोनों देशों के मंत्रियों ने अफगानिस्तान को स्वायत्त, शांतिपूर्ण, एकजुट, लोकतांत्रिक, समावेशी, स्थिर एवं सुरक्षित देश के रूप में खड़ा करने की साझा सोच को लेकर चर्चा की। लंबी अवधि में अफगानिस्तान का विकास सतत रहे इसके लिए इसकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने हेतु उन्होंने अफगानिस्तान के लिए व्यापार लिंकेज और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी अवसंरचना के निर्माण के लिए भारत द्वारा मुहौया कराई गई विकास सहायता तथा प्रयासों की सराहना की।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को 2021-2022 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की गैर-स्थायी सदस्यता मिलने पर बधाई दी। दोनों देशों के मंत्रियों ने यूएनएससी तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में घनिष्ठ समन्वय में साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अमेरिका ने सुधार के बाद के यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता और साथ ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के शुरुआती प्रवेश के प्रति अपने मजबूत समर्थन की भी पुष्टि की।

रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी में विकास

अमेरिका-भारत रक्षा ढांचा समझौते की 15वीं वर्षगांठ के संदर्भ में दोनों देशों के मंत्रियों ने इसे भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापक, लचीला, और बहुआयामी प्रमुख रक्षा साझेदारी (एमडीपी) मानते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता (बीईसीए) पर हस्ताक्षर करने के महत्वपूर्ण कदम की सराहना की। उन्होंने अपने-अपने देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सूचना को साझा करने तथा समुद्री क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने का भी स्वागत किया और संयुक्त-सेवा तथा सेवा-से-सेवा स्तरों पर मौजूदा रक्षा सूचना-साझाकरण का विकास करने तथा दोनों देशों के लिए लाभकारी सहयोग के संभावित नए क्षेत्रों की तलाश करने पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों देशों के मंत्रियों ने द्विपक्षीय रक्षा परामर्श व सहयोग को मजबुत बनाने तथा समुचे क्षेत्र में अन्य भागीदारों के साथ सहकारी क्षमता निर्माण के प्रयासों को बढ़ाने करने के अवसरों की तलाश करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने सुरक्षा के साझा हितों को बढ़ाने के लिए अभ्यास तथा सम्मेलनों में अधिक से अधिक भागीदारी के साथ-साथ भारतीय सेना और अमेरिकी मध्य कमान तथा अफ्रीका कमान के बीच सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। अमेरिका ने सूचना संलयन केंद्र - हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) की स्थापना में भारत के नेतृत्व की सराहना की। दोनों देशों के मंत्रियों ने आईएफसी-आईओआर में अमेरिकी नौसेना से एक संपर्क अधिकारी की तैनाती और एनएवीसीईएनटी, बहरीन में भारतीय संपर्क अधिकारी की तैनाती का स्वागत किया तथा अतिरिक्त संपर्क अधिकारियों को नियुक्त करने के इरादे को दोहराया।

दोनों देशों के मंत्रियों ने अपनी संबंधित नौसेनाओं, थल सेनाओं और वायु सेनाओं के साथ-साथ संबंधित विदेश एवं रक्षा मंत्रालयों के बीच सुरक्षित वीडियो टेलीकांफ्रेंस क्षमताओं को शामिल करते हुए सुरक्षित संचार की क्षमता को बढ़ाने समेत लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट (लेमोआ) और संचार, संगतता व सुरक्षा समझौते (सीओएमसीएएसए) के कार्यान्वयन पर संतोष ज़ाहिर किया। मंत्रियों ने इस साल के अंत में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान सहित द्विपक्षीय सेनाओं से सेनाओं के जुड़ाव की समीक्षा करने हेतु सैन्य सहयोग समूह (एमसीजी) के गठन का स्वागत किया। उन्होंने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष बलों के बीच जुड़ाव हेतु तत्परता दर्शायी।

मंत्रियों ने नवंबर 2020 में बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में होने वाले अमेरिका-भारत-जापान मालाबार नौसेना अभ्यास में रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के शामिल होने का स्वागत किया। अमेरिका तथा भारत के बीच सामुद्रिक सहयोग को मजबुत करने तथा नौसैन्य सहयोग में बढ़ती विशेषज्ञता पर प्रकाश डालते हुए, मंत्रियों ने दोनों देशों की नौसेनाओं द्वारा किए गए पैसेज अभ्यास का स्वागत किया। उन्होंने 2021 में त्रि-सेवा एम्फीबियस टाइगर ट्राइंफ एचएडीआर अभ्यास और युद्ध अभ्यास एवं वज्र प्रहार के अगले संस्करण के आयोजन पर भी तत्परता दिखाई। अमेरिका ने 2023 में इंडो-पैसिफिक सेना प्रमुख सम्मेलन (आईपीएसीसी), इंडो-पैसिफिक सेना प्रबंधन संगोष्ठी (आईपीएएमएस) और वरिष्ठ अधीनस्थ सैन्य पदाधिकारी फोरम (एसईएलएफ) में भारत की सह-मेजबानी का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने अपने संबंधित रक्षा उद्योगों को विकासित करने हेतु मिलकर काम करने का फैसला किया। मुख्य रक्षा मंचों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत के योगदान व रक्षा नवाचार के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए, मंत्रियों ने रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) के महत्व को दोहराया, और डीटीटीआई के तहत परियोजनाओं को फास्ट ट्रैक करने की मंशा जताई। उन्होंने संयुक्त परियोजनाओं की पहचान एवं विकास हेतु 10 वीं डीटीटीआई बैठक में कई विशेष डीटीटीआई परियोजनाओं के साथ-साथ डीटीटीआई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग को मजबूत करने हेतु आशय-पत्र (एसओआई) पर किए गए हस्ताक्षर पर संतोष ज़ाहिर किया। भारत ने फरवरी 2021 में आगामी एयरो-इंडिया में अमेरिकी सरकार एवं रक्षा उद्योग की भागीदारी के प्रति अपनी तत्परता दर्शायी।

रक्षा नवोन्मेष में सहयोग के महत्व को जरुरी मानते हुए, दोनों देशों के मंत्रियों ने भारतीय रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ-आईडीईएक्स) और यू.एस. डिफेंस इनोवेशन यूनाइटेड (डीआईयू) के बीच जुलाई 2020 में होने वाली उद्घाटन बैठक का स्वागत किया। उन्होंने इस वर्ष के औपचारिक औद्योगिक सुरक्षा अनुबंध (आईएसए) शिखर सम्मेलन को लेकर भी अपनी उत्सुकता दिखाई, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग और मजबूत होंगे।

द्विपक्षीय भारत-अमेरिका सहयोग को मजबूत बनाना

दोनों पक्षों ने कोविड-19 महामारी के दौरान द्विपक्षीय भारत-अमेरिकी व्यापार में बदलाव और इसे विकसित करने के प्रयासों का स्वागत किया। इस संबंध में, उन्होंने यूनाइट्स स्टेट्स ट्रेड प्रतिनिधियों तथा भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बीच बाजार पहुंच में सुधार करने, व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने तथा व्यापार के माहौल में सुधार करने हेतु चल रही वार्ता पर भी चर्चा की।

दोनों देशों के मंत्रियों ने तेल व गैस, बिजली एवं ऊर्जा दक्षता, नवीकरण तथा सतत विकास को कवर करते हुए सामरिक ऊर्जा भागीदारी (एसईपी) के चार स्तंभों के तहत उठाये गए महत्वपूर्ण कदमों पर संतोष ज़ाहिर किया। उन्होंने भारत-अमेरिका गैस टास्क फोर्स के तहत हुई प्रगति एवं उद्योग के नेतृत्व वाली परियोजनाओं की शुरूआत की भी सराहना की। उन्होंने 17 जुलाई, 2020 को आयोजित एसईपी की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान इन सभी स्तंभों के तहत तैयारी की गईं नई प्राथमिकताओं तथा रोडमैप की घोषणा का स्वागत किया। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से, मंत्रियों ने इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया।

ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के संदर्भ में दोनों पक्षों ने भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कंपनी (डब्ल्यूईसी) के बीच कोतवाड़ा में छह परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए प्रोजेक्ट डिवीजन ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी प्रिंसिपल्स का स्वागत किया तथा रिस्पॉन्सिबिलिटी के विस्तृत डिवीजन के प्रति तत्परता दिखाई जो तकनीकी-व्यावसायिक प्रस्ताव का मार्ग प्रशस्त करेगा। दोनों पक्षों ने भारत के वैश्विक नाभिकीय ऊर्जा साझेदारी केंद्र (जीसीएनईपी) के साथ सहयोग हेतु भारत सरकार एवं संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच समझौता ज्ञापन में विस्तार किये जाने का भी स्वागत किया।

मंत्रियों ने 9-10 सितंबर, 2020 को आयोजित 'भारत अमेरिका आतंकवाद निरोधी संयुक्त कार्य समूह' की 17वीं बैठक और 'इंडिया-यूएस डेजिग्नेशन डायलॉग' के तीसरे सत्र की आभासी बैठक का स्वागत किया। उन्होंने टेररिस्ट प्रॉक्सी के इस्तेमाल तथा सीमा पार के सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने अल-कायदा, आईएसआईएस / दायेश, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) तथा हिज्ब-उल-मुजाहिदीन सहित सभी आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर बल दिया। मंत्रियों ने पाकिस्तान से कहा कि वह त्वरित, स्थायी एवं अपरिवर्तनीय कार्रवाई करे ताकि सुनिश्चित हो सके कि उसके नियंत्रण वाले क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी हमले करने में नहीं हो और इस तरह के हमले करने वालों पर तेजी से कार्रवाई करे जिनमें 26/11 मुंबई, उरी और पठानकोट हमले के साजिशकर्ता शामिल हैं। मंत्रियों ने विशेष रूप से भारत में हाल ही के विधायी परिवर्तनों के संदर्भ में, आतंकवादी समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों पर सूचना के आदान-प्रदान को लेकर भी प्रतिबद्धता जताई, साथ ही आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण एवं संचालन पर लगाम लगाने, कट्टरपंथ तथा आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट के उपयोग का मुकाबला करने, आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही, और उनपर मुकदमा चलाने, उनके पुनर्वास, और आतंकवादियों व परिवार के सदस्यों के पुनःएकीकरण के संबंध में भी कदम उठाने का संकल्प लिया।

दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य बहुपक्षीय मंचों पर जारी सहयोग को बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) को जल्द से जल्द अपनाने पर अपना समर्थन दोहराया, जिससे वैश्विक सहयोग आगे बढ़ेगा तथा इस संदेश को मजबुत करेगा कि किसी भी कारण या स्थिति से आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता।

राष्ट्रपति ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान एक नए इंडिया-अमेरिका काउंटर-नारकोटिक्स वर्किंग ग्रुप की स्थापना की घोषणा के मद्देनजर, मंत्रियों ने भारतीय और अमेरिकी ड्रग्स एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने हेतु 2021 में एक वैयक्तिक बैठक के साथ इस वर्ष के अंत तक इस तरह की पहली आभासी बैठक के प्रस्ताव का स्वागत किया। मंत्रियों ने होमलैंड सिक्योरिटी डायलॉग को फिर से शुरु करने के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग तथा भारत के गृह मंत्रालय के प्रयासों का स्वागत किया।

दोनों देशों मंत्रियों ने 1 अक्टूबर, 2020 को भारत-अमेरिका सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वर्किंग ग्रुप की वर्चुअल बैठक के आयोजन का स्वागत किया। उन्होंने खुले, विश्वसनीय और सुरक्षित इंटरनेट के साथ-साथ इंटरनेट गवर्नेंस के बहु-हितधारक मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने रणनीतिक सामग्री तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की खुली, सुरक्षित तथा लचीली आपूर्ति और 5जी नेटवर्क सहित उभरते आईसीटी प्रौद्योगिकियों की तैनाती से जुड़े जोखिम का मुक्त रूप से मूल्यांकन करने हेतु अपने उद्योग एवं शिक्षाविदों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

मंत्रियों ने 15 सितंबर, 2020 को आयोजित वार्षिक भारत-अमेरिका साइबर वार्ता तथा 17 सितंबर, 2020 को पहली भारत-अमेरिका रक्षा साइबर वार्ता के आयोजन का भी स्वागत किया।

अंतरिक्ष विज्ञान एवं उपग्रह अनुप्रयोग में अपने-अपने देशों के गर्वशाली रिकॉर्ड को याद करते हुए, मंत्रियों ने 2022 तक प्रक्षेपित किये जाने वाले नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) उपग्रह सहित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना की। मंत्रियों ने अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता सूचना को भी साझा करने पर बल दिया जिससे सुरक्षित एवं स्थायी अंतरिक्ष वातावरण तैयार करने के प्रयासों को गति दी जा सके। उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिक्ष वार्ता को जारी रखने की इच्छा जताई और साथ ही संभावित अंतरिक्ष रक्षा सहयोग के क्षेत्रों पर भी चर्चा की।

मंत्रियों ने हिंद महासागर में क्षेत्रीय तथा वैश्विक मौसम की उत्पत्ति की बेहतर समझ विकसित करने और मौसम विज्ञान, समुद्र विज्ञान और वर्तमान समुद्री संसाधनों के प्रबंधन में शोध के सामान्य लक्ष्यों को आगे बढ़ाने हेतु पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन के बीच भू-अवलोकन एवं भू-विज्ञान में तकनीकी सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों देशों के मंत्रियों ने भारत के डाक विभाग तथा यूनाइटेड स्टेट्स पोस्टल सर्विस के बीच हुए समझौते का स्वागत किया, जिससे पोस्टल सिपमेंट से संबंधित सीमा शुल्क आंकड़ों के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान की सुविधा मिलेगी। उन्होंने भारत के केन्‍द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद्, आयुष मंत्रालय और अमेरिका के कैंसर पूरक एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यालय, स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के बीच आशय-पत्र (एलओआई) पर हुए हस्ताक्षर की सराहना की।

दोनों देशों के लोगों के बीच का गहरा जुड़ाव बनाना

हमारे संबंधित विधानसभाओं के बीच संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए, मंत्रियों ने भारत-अमेरिकी संसदीय आदान-प्रदान के शुरु करने का स्वागत किया।

भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों की उद्यमशीलता की भावना की सराहना करते हुए, जिससे दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभान्वित हुए हैं, मंत्रियों ने समग्र द्विपक्षीय संबंधों तथा आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में लोगों से लोगों के जुड़ाव की भूमिका को महत्वपूर्ण माना। दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने हेतु भारत-अमेरिका के कांसुलर संवाद की अगली पुनरावृत्ति पर तत्परता दिखाई और वीजा, विवाह, गोद लेने और बच्चे की हिरासत से संबंधित पारिवारिक मुद्दों सहित आपसी चिंता के मुद्दों पर चर्चा की।

दोनों देशों के मंत्रियों ने अमेरिका में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या का स्वागत किया और शैक्षिक संबंधों, उद्यमशीलता तथा वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका को स्वीकार किया। इस संदर्भ में, मंत्रियों ने भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का स्वागत किया जो दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। मंत्रियों ने भारत-अमेरिका शैक्षिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया।

दोनों देशों के बीच उत्कृष्ट शिक्षाविदों और पेशेवरों के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने में मंत्रियों ने वर्षों में फुलब्राइट-नेहरू कार्यक्रम के बहुमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने इस वर्ष कार्यक्रम की 70वीं वर्षगांठ मनाई।

दोनों पक्षों ने बढ़ती भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए दोनों सरकारों के अधिकारियों को 12 महीने के पारस्परिक अस्थायी ड्यूटी वीजा जारी करने का स्वागत किया।

संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से वर्ष 2021 में अगली भारत-अमेरिका 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता की मेजबानी हेतु तत्परता दिखाई गई।

नई दिल्ली
अक्टूबर 27, 2020

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