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भारत-मध्य एशिया वार्ता की दूसरी बैठक के बाद संयुक्त वक्तव्य

अक्तूबर 28, 2020

भारत-मध्य एशिया वार्ता की दूसरी बैठक 28 अक्टूबर 2020 को भारत के विदेश मंत्री की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित की गई। इस बैठक में कजाकिस्तान गणराज्य, ताजिकिस्तान गणराज्य, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ किर्गिज गणराज्य के पहले उप विदेश मंत्री ने भाग लिया। बैठक में, इस्लामी गणराज्य अफगानिस्तान के कार्यकारी विदेश मंत्री भी विशेष आमंत्रित के तौर पर शामिल हुए।

मंत्रियों ने राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक एवं वाणिज्यिक, विकास साझेदारी, मानवीय एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में में भारत तथा मध्य एशियाई देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने हेतु एक मंच की स्थापना के साथ-साथ आपसी हित के क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान और संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय मंचों ढांचे के तहत सहयोग बढ़ाने के संदर्भ में समरकंद (उज्बेकिस्तान) में 13 जनवरी 2019 को आयोजित भारत-मध्य एशिया वार्ता की पहली बैठक का आकलन किया। उन्होंने अपने देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सभ्यतागत जुड़ाव के साथ-साथ पारंपरिक रूप से लोगों से लोगों के जुड़ाव के आधार पर भारत और मध्य एशिया के बीच एक व्यापक तथा स्थायी साझेदारी बनाने का आह्वान किया।

सभी मंत्रियों ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत तथा मध्य एशियाई देशों के स्वच्छता एवं एपिडेमियोलॉजिकल सेवाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कजाकिस्तान, किर्गिज़ गणराज्य, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के मंत्रियों ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपने-अपने देशों को भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई मानवीय चिकित्सा सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।

मध्य एशियाई देशों के मंत्रियों ने कनेक्टिविटी, ऊर्जा, आईटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि जैसे क्षेत्रों में प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर लाइन ऑफ क्रेडिट के भारत के प्रावधान का स्वागत किया। उन्होंने इस क्षेत्र के देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु उच्च-प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (एचआईसीडीपी) के कार्यान्वयन के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने के भारत के प्रस्ताव का भी स्वागत किया।

मंत्रियों ने भारत तथा मध्य एशियाई देशों के व्यापार में संबंधों को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापार तथा आर्थिक सहयोग को मजबुत करने हेतु ठोस प्रयास करने की आवश्यकता पर बद दिया। इस संदर्भ में, मंत्रियों ने 6 फरवरी 2020 को नई दिल्ली में भारत-मध्य एशिया व्यापार परिषद (आईसीएबीसी) की शुरुआत का स्वागत किया, जिसमें भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ, कजाकिस्तान का अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य मंडल, किर्गिज़ गणराज्य का वाणिज्य एवं उद्योग मंडल, ताजिकिस्तान गणराज्य का वाणिज्य एवं उद्योग मंडल, तुर्कमेनिस्तान का वाणिज्य एवं उद्योग मंडल और उज्बेकिस्तान गणराज्य का वाणिज्य एवं उद्योग मंडल शामिल हैं।

मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-मध्य एशिया वार्ता के तहत बी2बी निकाय के रूप में, आईसीएबीसी को भारत तथा मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार संबंधों को बढ़ावा देना चाहिए, कराधान, व्यापार नियमों की अधिक समझ की सुविधा देनी चाहिए और विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम उद्यम के क्षेत्र में उद्यम, व्यापार एवं निवेश को प्रोत्साहित करना चाहिए।

मंत्रियों ने भारत तथा मध्य एशियाई देशों के बीच उद्योग एवं व्यापार के साथ-साथ लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने हेतु कनेक्टिविटी के महत्व पर बल दिया। मंत्रियों ने अपने संबंधित देशों की पारगमन एवं परिवहन क्षमता को विकसित करने, क्षेत्र के लॉजिस्टिक नेटवर्क में सुधार लाने और क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परिवहन गलियारों के निर्माण हेतु साझा पहलों को बढ़ावा देने में रुचि दिखाई। इस संबंध में, मध्य एशियाई देशों के मंत्रियों ने ईरान में चाबहार बंदरगाह की अवसंरचना के आधुनिकीकरण हेतु भारत के प्रयासों की सराहना की, जो मध्य तथा दक्षिण एशिया के बाजारों के बीच व्यापार एवं परिवहन संचार की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है।

सभी देशों के मंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्‍वरूपों एवं अभिव्‍यक्‍तियों की कड़ी निंदा की और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों, नेटवर्क, अवसंरचना और फंडिंग के माध्यमों को नष्ट करके इस खतरे का मुकाबला करने पर समान भावनाओं को साझा किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक देश की आवश्यकता पर प्रकाश डाला कि उनके क्षेत्र का उपयोग अन्य देशों पर आतंकवादी हमले शुरू करने के लिए नहीं किया जा रहा है।

सभी देशों के मंत्रियों ने भारत-मध्य एशिया वार्ता में अफगानिस्तान की भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने अफगान-स्वामित्व वाले, अफगान-नीत तथा अफगान-नियंत्रित शांति प्रक्रियाओं के आधार पर अफगान संघर्ष के निपटारे की बात भी कही। वार्ता के दौरान मंत्रियों ने अवसंरचना, ऊर्जा, पारगमन एवं परिवहन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से, अफगानिस्तान के विकास तथा आर्थिक रुप से पुनर्निर्माण हेतु आपसी सहयोग को मजबूत करने की रुचि व्यक्त की। उन्होंने विगत 19 वर्षों में अफगानिस्तान द्वारा किए गए सामाजिक-आर्थिक विकास तथा राजनीतिक लाभ को संरक्षित करने पर भी बल दिया। मंत्रियों ने अफगानिस्तान को एक एकजुट, संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने पर अपना समर्थन दर्शाया।

मंत्रियों ने अफगानिस्तान की भागीदारी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षिक तथा शोध परियोजनाओं के कार्यान्वयन में संयुक्त पहल शुरु करने पर चर्चा की और अंतर्राष्ट्रीय युवा मंचों, त्योहारों, प्रतियोगिताओं, वैज्ञानिक सम्मेलनों, प्रदर्शनियों व अन्य संयुक्त कार्यक्रमों में अफगान की भागीदारी को बढ़ावा देने की इच्छा जताई।

मंत्रियों ने भारत तथा मध्य एशियाई देशों के बीच मानवीय, सांस्कृतिक, शैक्षिक व पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग के महत्व पर चर्चा की। इस दौरान, पर्यटकों की आवक में वृद्धि करने, सभी जगहों पर पर्यटन मार्ग बनाने, वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने तथा पर्यटन अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। इस बात पर ध्यान देते हुए भारत तथा मध्य एशियाई देशों के छात्र बड़ी संख्या में एक-दूसरे के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं, मंत्रियों ने उनके सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया।

मध्य एशियाई देशों के मंत्रियों ने अप्रैल 2019 में मध्य एशियाई मीडिया प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी, जुलाई 2019 में नई दिल्ली में सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में मध्य एशियाई राजनयिकों के प्रशिक्षण, और दिसंबर 2019 में नई दिल्ली में मध्य एशिया पर विशेष ध्यान देने के साथ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) द्वारा आयोजित किए जाने वाले वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव के लिए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया।

मध्य एशियाई देशों के मंत्रियों ने भारत-मध्य एशिया वार्ता की दूसरी बैठक के आयोजन हेतु भारत के विदेश मंत्री का आभार व्यक्त किया। इस दौरान, मंत्रियों ने भारत तथा बाकी एशियाई एशियाई देशों में बारी-बारी से उनकी रुचि के अनुसार अफगानिस्तान की भागीदारी के साथ भारत-मध्य एशिया वार्ता की वार्षिक बैठकें जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

नई दिल्ली
अक्टूबर 28, 2020

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