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कंबोडिया साम्राज्य के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान भारत-कंबोडियाकासंयुक्त वक्तव्य (27 जनवरी, 2018)

जनवरी 27, 2018

  • भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण परकंबोडिया साम्राज्य के प्रधानमंत्रीसमदेक अक्का मोहा सेना पडी टेको हुन24 से 27 जनवरी 2018 के दौरान भारत की अपनी राजकीय यात्रा पर आएथे।कंबोडिया के प्रधानमंत्री के साथ मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों तथा व्यावसायिक समुदाय के प्रतिनिधियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस यात्रा पर आया था।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने इस यात्रा के दौरान27 जनवरी,2018 कोकंबोडिया के प्रधानमंत्री कास्वागत किया और राष्ट्रपति भवन में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने राजघाट का दौरा किया और महात्मा गांधी कीसमाधिपर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।उन्होंने भारत के राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंदऔर उप-राष्ट्रपतिमहामहिमश्री एम. वेंकैया नायडूसे भेंट की।उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता आयोजित की, प्रधानमंत्रीने उनके सम्मान में एक भोज का आयोजन किया।विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने कंबोडिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की।
  • इससे पहले, अन्य आसियान नेताओं के साथ-साथ समदेक प्रधानमंत्री हुन सेन ने 25 जनवरी को आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन में भाग लिया और 26 जनवरी को सम्मानित अतिथि के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए।कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने एक व्यावसायिक बैठक में भी भाग लिया और मुख्य भाषण दिया।इसके अतिरिक्तउन्होंने नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ई-गवर्नेंस केंद्र का दौरा किया।
  • कंबोडिया और भारत के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता, 27 जनवरी को उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध और दोस्ती को दर्शाने वाले सौहार्द एवं मैत्रीपूर्ण वातावरण में आयोजित की गई।दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंध हैं और जिनकी जड़ें बहुआयामी क्षेत्रों और लोगों के आपसी संपर्क के साथ इतिहास की गहराई में समाहित हैं।दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया, जिसमें क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में द्विपक्षीय संबंधों तथा सहयोग को और मजबूत बनाने एवंएक समान लक्ष्य के लिए मिलकर काम करने का निश्चय किया गया।

    आर्थिक संबंध

  • दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार के महत्व को स्वीकार किया और कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण हैं।दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा और संरचना दोनों को बढ़ाने और विविधता लाने कीउल्लेखनीय क्षमता विद्यमान है।द्विपक्षीय व्यापार और निवेश का भी विस्तार होना चाहिए,यह व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और बढ़ाने के लिए काम करेगा।इसके लिए, दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि व्यापारिकगोष्ठियों और निर्यात संवर्धन संगठनों को नियमित रूप से एक दूसरे के देशों में होने वाले व्यापारिककार्यक्रमों में भाग लेने और अधिक आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों को सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और बागवानी, बुनियादी ढांचे और छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के क्षेत्र में सहयोग के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया।भारत के प्रधानमंत्री ने कंबोडिया के प्रधानमंत्री के कम्बोडिया के युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने के सुझाव का स्वागत किया।भारत के प्रधानमंत्री ने इस के लिए, कम्बोडिया में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने में भारत सरकार के समर्थन का आश्वासन दिया।
  • दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय निवेश संधि परजल्दीही हस्ताक्षर करने पर सहमति व्यक्त की।

    संपर्क(कनेक्टिविटी)

  • दोनों नेताओं ने भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसे क्षेत्रीय संपर्क के प्रयासों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और इस राजमार्ग को कंबोडिया तक और उसके आगे विस्तारितकरने की संभावना का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की।दोनों नेताओं ने निकट भविष्य में संबंधित देशों की नामित एयरलाइनों द्वारा संचालित सेवाएं आरंभ करने पर सहमति व्यक्त की और दोनों देशों के बीच पर्यटन से संबंधित लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने और एयर ट्रैफिक अधिकारों तथा नागरिक उड्डयन व्यवस्था के विस्तार का समर्थन किया।

    रक्षा और सुरक्षा

  • दोनों नेताओं ने जहाज यात्राओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों सहित द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया।उनमें वरिष्ठ स्तर के रक्षा कर्मियों, क्षमता निर्माण परियोजनाओं आदि के आदान-प्रदान सहित रक्षा संबंधों को और बढ़ाने के लिए सहमति हुई।
  • दोनों पक्षों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में गहरी रूचि व्यक्त की, जिसमें स्थायी समुद्री विकास और समुद्री और तटीय पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा, डकैती विरोधी सहयोग, शांति बनाए रखने और भारत-प्रशांत क्षेत्रमें समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने स्वीकार किया कि शांति और समुद्री सुरक्षा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।इस दिशा में, वे अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेषकर 1982 यूएनसीएलओएस के आधार पर नौवहन और ऊपरी उड़ानोंकी पूर्ण स्वतंत्रता और समुद्री मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं।
  • दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद एक मानव-निर्मितअभिशाप है और वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।उन्होंने स्पष्ट रूप से इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के कृत्यों के लिए कोई औचित्य नहीं हो सकता और स्वीकार किया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूहों के साथ संबद्ध नहीं होना चाहिए।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद को खत्म करने के लिए संयुक्त और ठोस वैश्विक प्रयासकरने काआह्वान किया।उन्होंने आतंकवाद कासामना करने के लिए सभी देशों से एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने कोकहा, जिसमें संगठित अपराधों, धन-शोधन, सामूहिक विनाश के हथियारों की आपूर्ति, नशीली दवाओं की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों सहित आतंकवाद के वित्तपोषण के स्रोतों को अवरुद्ध करना; आतंकवादी ठिकानों को खत्म करना, और आतंकवादी संस्थाओं द्वारा सोशल मीडिया और सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों सहित इंटरनेट के दुरुपयोग का प्रतिवाद करना और आतंकवादियों केकट्टरतावाद फैलाने, भर्ती औरगतिविधियों का मुकाबला शामिल होना चाहिए।
  • आतंकवाद से लड़ने के लिए अपनी एकजुटता और संकल्प की पुष्टि करते हुए, दोनों नेताओं ने पुष्टि की कि आतंकवादी कृत्यों के लिए प्रतिबद्ध और आतंकवाद के लिएउत्पीड़न, आयोजन और सहयोग करने वालों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।उन्होंने आतंकवाद से लड़ने में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय और महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और यह स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद-प्रतिरोध रणनीति का एक अद्वितीय वैश्विक साधन है जो आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ाएगा।उन्होंने विश्वव्यापी आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का त्वरित और प्रभावी कार्यान्वयन करने के लिएकहा।इस संबंध में, उन्होंने आतंकवाद का मुकाबला करने, आतंकवादी नेटवर्क और आतंकवादी कृत्यों के वित्तपोषण पर रोक लगाने और आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रयमुहैया कराने से इनकार करने तथा व्यापक समझ और नये वैश्विक संकल्प और रणनीति बनाने एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने कीसहमति दी और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद (सीसीआईटी) पर समझौते कोजल्द अपनाने का आह्वानकिया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सभी राज्यों कोआतंकवादी नेटवर्कों के वित्तपोषण और अपने क्षेत्रों में सुरक्षित आश्रय प्रदान करने तथा वहां से आतंकवादी कार्यों को संचालित करने से रोकने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
  • दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद का राज्य की नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।उन्होंने सभी आतंकवादी समूहों द्वारा की जाने वाली हिंसा की निंदा की और सभी राष्ट्रों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के अंतर्गत सभी आतंकवादी समूहों कोनामितकरने के लिए कहा।
  • दोनों नेताओं ने तस्करी के पीड़ितों की रोकथाम, बचाव, वापसी, पुनर्निर्देशन और पुन:एकीकरण के लिए एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ सभी प्रकार की मानव तस्करी का मुकाबला करने में अपने सहयोग की पुष्टि की।इसके अलावा दोनों देशों मेंअपराधों के खिलाफ कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आपराधिक मामलों पर आपसी कानूनी सहायता पर एक द्विपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर करने के महत्व को स्वीकार किया।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने कंबोडिया द्वारातीन वर्षों, अर्थात्2015 से 2017 तक लगातार भारतीय जहाजों की सद्भावना यात्रा की मेजबानी की सराहना की।

    संस्कृति, शिक्षा, और लोगों से लोगों के एक्सचेंजों

  • दोनों नेताओं ने लोगों के आपसी संपर्क, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देकरलोगों कोआपसी संपर्क बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • दोनों नेताओं ने दोनों देशों के लोगों के बीच विविध सांस्कृतिक आदान-प्रदानों को बढ़ावा देने के द्वारा दोनों देशों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की और 2018-2022 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यकारी कार्यक्रम पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया।
  • दोनों पक्ष पुरातत्व, संरक्षण और संग्रहालयों के क्षेत्रों में दोनों देशों के सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और पुन: जोड़ने के लिए आगे सहयोग करने पर सहमत हुए।इस संबंध में, भारत के प्रधानमंत्री ने परेह विहार में भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण कार्य करने में भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए ता प्रोहम मंदिर में किएजा रहे पुनर्निर्माण के काम पर संतोष व्यक्त किया।

    विकास सहयोग

  • कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने मेकांग गंगा सहयोग पहल के अंतर्गत त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं के माध्यम से, मंदिरों के पुनर्निर्माण और संरक्षण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, छात्रवृत्ति योजना के साथ-साथ कंबोडिया मेंसामाजिक विकास के वित्त पोषण के लिए भारत द्वारा ऋण श्रृंखलाएं और अनुदान प्रदान की सराहना की।

    क्षेत्रीय सहयोग

  • दोनों नेताओं ने आसियान-भारत सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। उप-क्षेत्रीय ढांचे के महत्व को रेखांकित करने के लिए, प्रधानमंत्री का मानना है कि मेकांग-भारत आर्थिक गलियारे का विकास आसियान के लिए सहायकहोगा।

    बहुउद्देशीय सहयोग

  • संयुक्त राष्ट्र को अधिक लोकतांत्रिक, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और इसके प्रमुख अंगों में चल रहे सुधार के प्रति दोनों नेताओं ने अपने मजबूत समर्थन को दोहराया, ताकि यह समकालीन दुनिया की असंख्य चुनौतियों से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सके।उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शुरुआती सुधार के महत्व पर बल दिया ताकि यह एक अधिक जवाबदेह, प्रतिनिधित्व पूर्ण और प्रभावी ढंग से समकालीन वास्तविकताओं और कार्यों को दर्शाए।कंबोडियाई पक्ष ने सुधार और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया।भारतीय पक्ष ने 2019 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद के सदस्य के रूप में कंबोडिया की उम्मीदवारी के लिए अपना समर्थन दोहराया।
  • दोनों नेताओं ने सशक्त विकास के 2030 केएजेंडे को अपनाने का स्वागत किया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंनेइस बात पर सहमतिजताई कि एसडीजी की उपलब्धि के लिए वैश्विक भागीदारी महत्वपूर्ण है। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने अदीस अबाबा एक्शन एजेंडे और विकसित देशों द्वारा आधिकारिक विकास सहायता की पूर्ति के महत्व को याद किया।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने कंबोडिया के अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि (आईएसए) में शामिल होने के फैसले का स्वागत किया।दोनों नेताओं ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे सहयोग की संभावना तलाशने पर सहमति व्यक्त की। भारत ने आईएसए के संस्थापना सम्मेलन में भाग लेने के लिए कंबोडिया को निमंत्रण भी दिया,यह11 मार्च, 2018 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने कम्बोडिया सरकार की प्राथमिकता के क्षेत्रों में विकास भागीदारी जारी रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की।इस दिशा में भारत हर साल कंबोडिया में कार्यान्वित की जाने वाली त्वरित प्रभावपरियोजनाओं (क्यूआईपी) की संख्या 5से बढ़ा कर 10कर देगा।भारत कंबोडिया में आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने में भी मदद करेगा।दोनों पक्ष कंबोडिया में ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के लिए भारत द्वारा 200लाख अमेरिकी डॉलर के रियायती ऋण पर सहमत हुए और निकट भविष्य में इसपर हस्ताक्षर करने की दिशा में काम करने के लिए सहमतिदी।भारत सरकार ने कंबोडिया में स्वास्थ्य (सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना) और संपर्क (सड़क, रेल और डिजिटल) जैसे क्षेत्रों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त ऋण की पेशकश की।
  • भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ई-गवर्नेंस केंद्र की यात्रा के बाद कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने कृषि के क्षेत्र में भारत के आईटी अनुप्रयोगों की प्रशंसा की।भारत के प्रधानमंत्री ने कृषि से संबंधित आईटी अनुप्रयोगों में कंबोडिया की सहायता करने की भारत की इच्छा को व्यक्त किया, जिसमें किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार की स्थापना शामिल है।
  • प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद, दोनों प्रधान मंत्री समझौतों के आदान-प्रदान केसाक्षी बने, अर्थात्:

    क. मानव तस्करी की रोकथाम पर समझौता ज्ञापन
    ख. आपराधिक मामले में परस्पर कानूनी सहायता के लिए संधि
    ग. सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम
    घ. जल संसाधन विकास परियोजना के लिए 36.92 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋणका समझौता

  • कंबोडिया के प्रधान मंत्री ने क्षमता निर्माण को बढ़ाने,परियोजना विकास निधि के उपयोग द्वारा तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करने, सीएलएमवी देशों में त्वरित प्रभाव परियोजना (क्यूआईपी), छात्रवृत्ति और प्रशिक्षणयोजना, अन्य अनुदानों के उपयोग और एलओसी परियोजनाओं के साथ-साथ आसियान एकता कार्य योजना III के माध्यम से, क्षमता निर्माण को बढ़ाने और आसियान सदस्य-राज्यों के भीतर और उनके बीचके विकास के अंतराल को कम करने में भारत के निरंतर समर्थन का स्वागत किया।उन्होंने आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन में भारत के सीएलएमवी देशों में डिजिटल ग्रामबनाने के द्वाराग्रामीण संपर्क पर एक प्रायोगिकपरियोजनाआरंभ करने के भारत केप्रस्ताव का भी स्वागत किया। इस संदर्भ में, उन्होंने कम्बोडिया के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत के सहयोग की अत्यधिक सराहना की।
  • कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने अपनी राजकीययात्रा के दौरान उनके और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के हार्दिक स्वागत और आतिथ्य केलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों को प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन के सफल समापन पर बधाई दीऔर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों के दौरान की गई महत्वपूर्ण पहलों और नीतियों में भारत के लोगों को बड़ी सफलता मिलने की कामना की।
  • समदेक प्रधानमंत्री हुन सेन ने प्रधानमंत्री मोदी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर कंबोडिया आने के लिएआमंत्रितकिया।प्रधानमंत्री मोदी ने इस आमंत्रण के लिए अपनी प्रशंसा व्यक्त की और दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को और अधिक तीव्र करने के लिए भविष्य में अपने सहयोगी के देश मेंजाने काआश्वासन दिया।
नई दिल्ली
27जनवरी, 2018




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