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17 वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद सचिव (पूर्व) द्वारा विशेष मीडिया ब्रीफिंग की प्रतिलिपि (नवंबर 12, 2020)

नवम्बर 13, 2020

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मित्रों! नमस्कार और गुड इवनिंग। अभी-अभी समाप्त हुए 17 वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद विशेष वार्ता में आपका स्वागत है। हमारे साथ मंत्रालय में सचिव (पूर्व), श्रीमती रीवा गांगुली दासहैं, उनके साथ, अतिरिक्त सचिव (भारत-प्रशांत), श्रीमती रीनत संधू हैं। मैं सचिव को, उनकी प्रारंभिक टिप्पणी के लिए आमंत्रित करता हूँ, जिसके बाद हम आपके प्रश्नों को लेंगे। मैडम,कृपया आप आएँ।

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): गुड इवनिंग मित्रों। आज, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने,वियतनाम के प्रधान मंत्रीगुयेन जुआन फुक के निमंत्रण पर 17 वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में भाग लिया।वियतनाम आसियान का वर्तमान अध्यक्ष है। इस शिखर सम्मेलन में सभी दस आसियान सदस्य राज्यों के नेताओं ने भागीदारी की और यह ऑनलाइन आयोजित हुआ था।

आसियान-भारत का जुड़ाव पिछले कुछ वर्षों में एक गहरी, मजबूत और बहुआयामी साझेदारी के रूप में विकसित हुआ है। आसियान और भारत 2002 में शिखर सम्मेलन-स्तर के भागीदार बने, और 2012 में रणनीतिक साझेदार।हमारी साझेदारी का विस्तार रक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-विरोध, वाणिज्य, दूरसंचार, कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण के मुद्दों, पर्यटन, आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई संवाद तंत्रों द्वारा कवर किया गया है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि वार्षिक आसियान-भारत शिखर सम्मेलन भारत और आसियान के लिए उच्चतम स्तर पर जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।17 वाँ आसियान-भारत शिखर सम्मेलन, आठवाँ शिखर सम्मेलन है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने भाग लिया है। उन्होंने पिछले साल नवंबर में बैंकॉक में 16 वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।

आज के शिखर सम्मेलन में बोलते हुएप्रधान मंत्री ने भारत की ईस्ट एक्ट पालिसी,जो हमारी विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है, में आसियान की केंद्रीयता को रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि एक सामंजस्यपूर्ण, उत्तरदायी और समृद्ध आसियान भारत के इंडो-पैसिफिक परिप्रेक्ष्य का केंद्र है और क्षेत्र में सभी की सुरक्षा और विकास (एसएजीएआर- सागर) के लिए योगदान देता है।

प्रधान मंत्री ने भारत के भारत-प्रशांत महासागरीय पहल और इंडो-पैसिफिक पर आसियान दृष्टिकोण के बीच अभिसरण को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया ताकि एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने आसियान देशों को, हमारे महासागरीय पहल के विभिन्न स्तंभों पर अगुवाई करने के लिए आमंत्रित किया।

कोविड-19 पर, प्रधानमंत्री ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में, मजबूत आसियान-भारत संबंधों का लाभ उठाने पर जोर दिया। उन्होंने महामारी से लड़ने के लिए आसियान की पहल का स्वागत किया और कोविड-19 आसियान रिस्पांस फण्ड में 1 मिलियन अमरीकी डालर का योगदान देने की घोषणा की। उन्होंने स्वस्थ और समग्र जीवन शैली के स्रोत के रूप में पारंपरिक दवाओं के क्षेत्र में सहयोग और नियमित आदान-प्रदान के महत्व को रेखांकित किया।

प्रधान मंत्री ने आसियान और भारत के बीच अधिक से अधिक भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी के महत्व को रेखांकित किया और आसियान कनेक्टिविटी का समर्थन करने के लिए 1 बिलियन अमरीकी डालर की क्रेडिट लाइन की भारत की पेशकश को फिर से दोहराया। डिजिटल कनेक्टिविटी पर, उन्होंने आसियान-भारत हैकथॉन के आयोजन का उल्लेख किया।

व्यापार और निवेश पर, आसियान-इंडिया माल व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की संवीक्षा लंबे समय से लंबित है। प्रधान मंत्री ने समझौते की शीघ्र संवीक्षा का आह्वान किया। उन्होंने कोविड के बाद के आर्थिक सुधार के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और लचीलेपन के महत्व को रेखांकित किया।

उनकी ओर से, आसियान नेताओं ने भारत के बारे में एक दीर्घकालिक मित्र और शक्तिशाली भागीदार के रूप में बात की। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में भारत के योगदान को स्वीकार किया और आसियान केंद्रीयता के लिए भारत के समर्थन का स्वागत किया। आईआईटी में पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम और सीएलएमवी देशों में सॉफ्टवेयर विकास और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने सहित भारत की क्षमता निर्माण पहलों की सराहना की गई।

आसियान नेताओं ने क्षेत्र में डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी बढ़ाने में भारत की भूमिका का स्वागत किया।इस संदर्भ में जकार्ता स्थित थिंक टैंक, इकोनॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर आसियान एंड ईस्ट एशिया (ईआरआईए) द्वारा भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के पूर्व की ओर विस्तार पर रिपोर्ट को, क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में नोट किया गया था।

आसियान नेताओं ने इंडो-पैसिफिक पर आसियान दृष्टिकोण और भारत के इंडो-पैसिफिक महासागरीय पहल के बीच अभिसरण को रेखांकित किया। नेताओं ने 2021-2025 के लिए नई आसियान-भारत कार्य योजना को अपनाने का स्वागत किया।

चर्चाओं में दक्षिण चीन सागर और आतंकवाद सहित आम हित और चिंता के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे भी शामिल थे। दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस के पालन को बनाए रखने सहित इस क्षेत्र में एक नियम-आधारित आदेश को बढ़ावा देने के महत्व को नोट किया। नेताओं ने दक्षिण चीन सागर में विशेष रूप से नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता में शांति, स्थिरता, बचाव और सुरक्षा को बनाए रखने और बढ़ावा देने के महत्व की पुष्टि की।

कुल मिलाकर यह आसियान नेताओं के साथ एक उपयोगी आदान-प्रदान था और शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों के बीच अभिसरण लाने में सफल रहा। आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी, साझे भौगोलिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों की मजबूत नींव पर खड़ी है। शिखर सम्मेलन इस रिश्ते को और मजबूत करेगा।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद मैडम। अब हम प्रश्नों को लेते हैं जो हमें प्राप्त हुए हैं। हमें प्रश्नों का एक सेट मिला है। हमने इसे थीम के अनुसार एक साथ रखा है। सवालों का पहला सेट इंडो-पैसिफिक पर है। सुमन शर्मा जानना चाहती हैं - "अपनी अपनी व्यक्तिगत इंडो-पैसिफिक नीति के साथ आने वाले इतने सारे देशों में, जर्मनी और फ्रांस ने यूरोपीय संघ का नेतृत्व किया है, लेकिन भारत ने हमेशा क्षेत्र में आसियान की केंद्रीयता का समर्थन किया है। तो क्या आसियान-भारत द्वारा एक संयुक्त इंडो-पैसिफिक पहल होगी, जो अन्य छोटे समूहों को एक साथ एक छत्र समूह के तहत अन्य राष्ट्रों को भी मिलाकर होगी? ” रक्षक न्यूज के रंजीत कुमार कहते हैं - "भारत और आसियान का इंडो-पैसिफिक पर समान दृष्टिकोण है। क्या दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सहयोग को गहरा करने के लिए नए उपायों पर चर्चा की है?"द प्रिंट से नैनीमा - "क्या आसियान क्षेत्र अपनी खुद की इंडो-पैसिफिक रणनीति बनाने के लिए तैयार है, ऐसी जिसका अर्थ चीन को अलग करना होगा?" मैडम क्या आप सवालों के इस पहले सेट का जवाब देना चाहेंगी?

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): हाँ जरूर। जैसा कि यह विषय मेरे द्वारा दिए गए प्रारंभिक वक्तव्य में पहले से ही कवर किया गया है। भारत और आसियान, भारत-प्रशांत के विशाल समुद्री क्षेत्र को साझा करते हैं और आसियान इस समुद्री क्षेत्र के केंद्र में है।इंडो-पैसिफिक के लिए, आसियान दृष्टिकोण में व्यक्त किए गए इंडो-पैसिफिक के हमारे विचारों और हमारी इंडो-पैसिफिक महासागरों की पहलों के बीच बहुत अभिसरण और तालमेल है। हम आसियान भारत-प्रशांत में शांति, सुरक्षा और सतत विकास को बनाए रखने और इस क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए इस अभिसरण का निर्माण करना चाहते हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: सवालों का दूसरा सेट क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारीपर है।योमिउरी शिंबुन से तौकीर - "आरसीईपीमें 15 देशों ने रविवार को एक शिखर सम्मेलन में लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमति व्यक्त की। रिपोर्टों में कहा गया है कि कई देशों ने भारत से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और आरसीईपी में शामिल होने के लिए संपर्क किया है। क्या भारत निकट भविष्य में आरसीईपीमें वापस आएगा? ”द वायर से देविरुपा - "क्या आसियान और भारतीय अधिकारियों ने आकलन अभ्यासशुरू किया है जो सामानों पर एफटीए के लिए समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत माना जाता है?क्या वास्तविक समीक्षा इस वर्ष के अंत से पहले शुरू होगी, जैसा कि भारत ने अनुरोध किया है?" ट्रिब्यून से संदीप दीक्षित - "रविवार को समझौता करने की उनकी योजना के मद्देनजर क्या आरसीईपी भागीदारों को शामिल करने की योजना है?" बिजनेस वर्ल्ड से मनीषा झा - "आरसीईपीपर चर्चा की गई और आसियान शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर करने की उम्मीद की गई, क्या आरसीईपी पर भारत का कोई संदेश था? क्या भारत आधिकारिक तौर पर आरसीईपी से किसी भी संवाद से पीछे हट गया है?” मैडम, क्या आप इन पर प्रतिक्रिया देना चाहेंगी?

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): हाँ।आरसीईपी पर, हमारी पोजीशन सर्वविदित है। जहाँ तक भारत का संबंध है,हम आरसीईपीमें शामिल नहीं हुए क्योंकि यह भारत के बकाया मुद्दों और चिंताओं को संबोधित नहीं करता है। हालाँकि, हम आसियान के साथ अपने व्यापार संबंधों को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: अब हमारे पास प्रश्नों का एक सेट आपूर्ति श्रृंखला पर है। विऑनसे सिद्धांत जानना चाहते हैं - "वैकल्पिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए आसियान कितना उत्सुक है?" इंडिया वर्सिस डिसइनफार्मेशन से शंकर - "क्या भारत आसियान को आपूर्ति श्रृंखला तंत्र के गठन के एक हिस्से के रूप में मानता है?आसियान-भारत आभासी बैठक के दौरान, क्या रक्षा और रणनीति से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई थी? कृपया हमें बताएँ।"

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): कोविड-19 महामारी ने मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता का प्रदर्शन किया है।इसने आपूर्ति श्रृंखला को लचीला और वैश्विक केंद्र का एजेंडा बनाया है, जिसमें आसियान भी शामिल है। इस पर हमारी प्रतिक्रिया माननीय प्रधान मंत्री द्वारा व्यक्त किए गए आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में परिलक्षित होती है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अभिन्न अंग बनाने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने की परिकल्पना करता है।इसी तरह, आसियानने कोविड-19 द्वारा प्रस्तुत की गईं अभूतपूर्व चुनौतियों के समाधान में सहयोग बढ़ाने के लिए आसियानके व्यापक सुधार ढाँचे को भी जारी किया है। इसे ध्यान में रखते हुए, आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण और लचीलापन भी आज आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान चर्चा का विषय था और नेताओं ने भारत-आसियान व्यापार संबंधों को मजबूत करने और कोविड के बाद के आर्थिक सुधार के लिए एक साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: इसके बाद मैडम एक प्रश्न विऑन से सिद्धांत से है - "बातचीत में चीन की आक्रामकता पर कितनी बात हुई थी? भारत और वियतनाम, जो कि आसियान का मेजबान है, दोनों ही इससे प्रभावित हुए हैं?" मैं, इसी से सम्बंधित बिजनेस वर्ल्ड से मनीष झा का एक और प्रश्न लूँगा - "क्या दक्षिण चीन सागर के संबंध में, ज्यादातर चीन द्वारा शुरू की गई लगातार झड़पों के मद्देनजर यूएनसीएलओएस की शुचिता पर कोई चर्चा हुई।

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): आज शिखर सम्मेलन में, दक्षिण चीन सागर सहित आम हित और चिंता के सभी क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई। भारत और आसियान दोनों दक्षिण चीन सागर में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने और बढ़ावा देने के महत्व पर सहमत हुए।उन्होंने दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन और ओवर फ्लाइट की स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हुए और निर्बाध वैध वाणिज्य सुनिश्चित करते हुए, 1982 के यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून को बनाए रखने के महत्व की पुनः पुष्टि की।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: विऑन से सिद्धांत का एक और सवाल है - "सामान्य सांस्कृतिक विरासत के नवीकरण पर कुछ बात हुई। उनका कहना है कि भारत इस क्षेत्र के कई हिस्सों में पगोडा के संरक्षण में मदद कर रहा है।" इसलिए उनका सवाल है कि हमने आम सांस्कृतिक विरासत के नवाचार के लिए क्या कदम उठाए हैं।

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): देखिए, जैसा कि आप जानते हैं भारत-आसियान क्षेत्र में एक दूसरे के साथ बहुत लंबे और ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध हैं। वास्तव में, हमारे एक दूसरे के साथ सभ्यतागत संबंध हैं। आसियान क्षेत्र में दोनों क्षेत्रों के बहुत महत्व के कई पुरातात्विक स्थल हैं।भारत आसियान देशों, विशेष रूप से कंबोडिया, लाओ पीडीआर, वियतनाम और म्यांमार में कई ऐसे विरासत स्थलों की बहाली और संरक्षण में लगा हुआ है, जिसके लिए समुदाय के भीतर बहुत व्यापक सराहना हुई है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: गौतम लाहिड़ी से एक सवाल है - "क्या शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई थी?"

श्रीमती रीवा गांगुली दास, सचिव (पूर्व): जैसा कि मैंने अपने प्रारंभिक बयान में उल्लेख किया है, भारत और आसियान के बीच अधिक से अधिक संपर्क बढ़ाना भारत-आसियान संबंध के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। हम भौतिक, आर्थिक, राजनीतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी सहित बहुत व्यापक अर्थों में इस क्षेत्र के साथ कनेक्टिविटी की कल्पना करते हैं।इस संदर्भ में, नेताओं ने दो सड़क क्षेत्रों के बीच भौतिक संपर्क को मजबूत करने पर चर्चा की और उस अध्ययन का उल्लेख किया जिसका मैंने कंबोडिया, लाओ पीडीआर और वियतनाम के लिए त्रिपक्षीय राजमार्ग के पूर्ववर्ती विस्तार पर अपने प्रारंभिक वक्तव्य में उल्लेख किया है,जो अध्ययन जकार्ता स्थित थिंक टैंक, आसियान के लिए आर्थिक और अनुसंधान संस्थान(ईआरआईए) द्वारा किया गया था।ईआरआईए की रिपोर्ट, जिसे शिखर सम्मेलन में नोट किया गया था, के कार्यान्वयन के लिए जाँच की जा रही है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मेरे पास और कोई प्रश्न नहीं है। धन्यवाद मैडम। हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद और यह विशेष वार्ता यहाँ समाप्त होती है। हम अपनी साप्ताहिक वार्ता बहुत जल्द फिर से शुरू करेंगे। धन्यवाद।

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