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भारत-लक्जमबर्ग वर्चुअल शिखर सम्‍मेलन (19 नवंबर 2020) के बाद संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू) द्वारा विशेष ब्रीफिंग

नवम्बर 20, 2020

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मित्रों! नमस्कार और सुसंध्या। हाल ही में संपन्‍न भारत-लक्जमबर्ग वर्चुअल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन पर इस विशेष वर्चुअल ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। मेरे साथ संयुक्‍त सचिव (यूरोप पश्चिम)श्री संदीप चक्रवर्ती हैं जो अपनी शुरूआती टिप्पणियां करेंगे और फिर हम आपके सवालों को लेंगे। संदीप आप को सौंपता हूँ।

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू): धन्यवाद अनुराग। नमस्कार। सुसंध्या। हमने अभी हाल ही में भारत और लक्जमबर्ग के बीच वर्चुअल शिखर सम्मेलन संपन्‍न किया।यह दोनों नेताओं के बीच पहली बार वर्चुअल शिखर सम्‍मेलन था। लक्जमबर्ग और भारत के प्रधानमंत्रियों के बीच इस तरह की आखिरी औपचारिक बातचीत लगभग 20 साल पहले हुई थी, जब लक्जमबर्ग के तत्कालीन प्रधानमंत्री जीन-क्लाउड जंकर ने भारत का दौरा किया था। पूर्व में हमारे प्रधानमंत्रियों की कई मौकों पर मुलाकात हुई थी, लेकिन यह पहली औपचारिक संरचित बैठक थी। यह बैठक अपने द्विपक्षीय संबंध पर रचनात्मक जुड़ाव और विशेष रूप से लक्जमबर्ग की अर्थव्यवस्था और हमारी जरूरतों को मजबूती देने पर केंद्रित थी। यह वित्तीय क्षेत्र पर केंद्रित थी, यह फिनटेक पर, हरित वित्तपोषण पर, और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों परकेंद्रित थी। उन्होंने लोगों से लोगों के बीच संबंधों पर भी चर्चा की। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर भी काफी चर्चा हुई। जैसा कि आप सभी जानते हैं, लक्जमबर्ग यूरोपीय संघ का संस्थापक सदस्य है और इस संदर्भ में दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ के व्यापार समझौतों और निवेश समझौतों पर आगे बढ़ने सहित भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों को और मजबूत बनाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बहुपक्षीय सहयोग और प्रभावी और सुधरी हुई बहुपक्षीयता हासिल करने पर भी चर्चा हुई। आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने प्रभावी और सुधरी हुई बहुपक्षीयता की दिशा में काम करने पर प्रतिबद्धता साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद से वैश्विक समुदाय द्वारा सामना की जा रही चुनौती और इसे सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में समाप्त करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। जलवायु परिवर्तन पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ और प्रधानमंत्री बेट्टेल ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में लक्जमबर्ग के शामिल होने की मंशा से अवगत कराया। प्रधानमंत्री मोदी ने लक्जमबर्ग को आपदा लचीली अवसंरचना के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। कोविड की स्थिति, वैक्सीन के विकास और साथ ही वैक्सीन की डिलीवरी के लिए अवसंरचना पर भी काफी चर्चा हुई और इस बात पर भी काफी चर्चा हुई कि दोनों देश महामारी से लड़ने में और साथ ही महामारी के बाद रिकवरी में भी कैसे सहयोग कर सकते हैं। शिखर सम्मेलन के साथ तीन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। एक लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और भारतीय स्टेट बैंक के बीच और इंडिया इंटरनेशनल स्टॉक एक्सचेंज के साथ और तीसरा समझौता लक्स इनोवेशन और इन्वेस्ट इंडिया के बीच था। इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों पक्ष नियमित विदेश कार्यालय परामर्श आरंभ करेंगे। प्रधानमंत्री बेट्टेल ने प्रधानमंत्री मोदी को लक्जमबर्ग आने का न्योता दिया और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री बेट्टेल को भारत आने का न्योता दिया। अनुराग यह मेरी शुरूआती टिप्पणियां हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद संदीप। सवालों पर आगे बढ़ते हुए, मैं डब्‍ल्‍यूआईओएन से सिद्धांत के एक सवाल के साथ शुरूआत करूंगा-"वह भारत-यूरोपीय संघ एफटीए पर कुछ भी जानना चाहते हैं, क्‍या इसकी चर्चा हुई थी?"

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू): जैसा कि आप जानते हैं, लक्जमबर्ग यूरोपीय संघ का संस्थापक सदस्य है और यूरोपीय संघ के भीतर विशेष भूमिका निभाता है और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ सभी बातचीत में यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते पर चर्चा की जाती है। जैसा कि आप जानते हैं कि 15 जुलाई को आयोजित 15वें शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं, यूरोपीय नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी ने एक उच्चस्तरीय तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई थी। अभी कुछ समय से हमारा यूरोपीय संघ में व्यापार आयुक्त नहीं था।अब हमारा एक नया व्यापार आयुक्त है। उन्होंने हमारे माननीय सीआईएम को लिखा है और जल्द ही उच्च स्तरीय तंत्र की बैठक आयोजित करने पर विचार-विमर्श चल रहा है। वास्तव में आज भारत-यूरोपीय संघ व्यापार पर उप-आयोग की बैठक हुई और बात आगे बढ़ी है। और जैसे ही बैठक की तारीखों पर चर्चा होगी यह तंत्र भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और निवेश समझौते पर बातचीत या चर्चा शुरू करने का कार्य करेगा।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: अगला सवाल द ट्रिब्यून से संदीप दीक्षित का है- "क्या लक्जमबर्ग से ऋण स्टॉक निवेश उठाने की योजना है?"

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू):
लक्जमबर्ग के संदर्भ में यह एक बहुत ही प्रासंगिक प्रश्न है, क्योंकि लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और लक्जमबर्ग स्थित फंड भारत में तीसरे सबसे बड़े निवेशक हैं। जहाँ तक मुझे पता है, लक्जमबर्ग से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश कुल 3 लाख करोड़ से अधिक है और अमेरिका और मॉरीशस के बाद लक्जमबर्ग भारत में सबसे बड़ा पोर्टफोलियो निवेशक है। उन्होंने ग्रीन एक्सचेंज की भी स्थापना की है और लक्जमबर्ग में बहुत ही अभिनव वित्तपोषण तंत्र भी उपलब्ध है। प्रधानमंत्री बेट्टेल ने इसका विस्तार से उल्लेख किया और प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे भारतीय कंपनियों को लक्जमबर्ग में पर्यावरण अनुकूल या हरित परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित करें और जो बात मैं भी कहना चाहता हूँ वह यह है कि कई भारतीय कंपनियों ने उठाया है। लक्जमबर्ग में पहले "मसाला बांड" उठाए गए थे, कई भारतीय कंपनियों के पास लक्जमबर्ग में जीडीआर है और यह आंकड़ा बारह से तेरह बिलियन डॉलर से अधिक का है और कई भारतीय कंपनियां लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं। इसलिए यह भारत और लक्जमबर्ग के बीच बहुत ही जीवंत और गतिशील वित्तीय क्षेत्रक का संबंध है। हम बहुत जल्द ही लक्जमबर्ग वित्तीय नियामकों यानी सीआइएसएफ और सेबी के बीच एक समझौता करने जा रहे हैं और जैसा कि आप जानते हैं, आईएनएक्स और लक्जमबर्ग एक्सचेंज के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआहै। इसलिए, मुझे लगता है कि भारत और लक्जमबर्ग के बीच अधिक से अधिक वित्तीय क्षेत्रक सहयोग की संभावना बहुत अच्छी है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:डब्‍ल्‍यूआईओएन से सिद्धांत का एक और सवाल है-"हम यूरोप, यूरोपीय संघ, डेनमार्क, इटली, अब लक्जमबर्ग के साथ कई वर्चुअल शिखर सम्मेलन कर रहे हैं। वास्‍तव में, छह वर्चुअल शिखर सम्‍मेलन में से चार यूरोपीय नेताओं के साथ हैं।नई दिल्ली द्वारा यूरोप के लिए आउटरीच का कोई विशिष्ट कारण? और न्यूज़18 से नीरज का भी ऐसा ही सवाल है-"प्रधानमंत्री ने कुल 6 वर्चुअल द्विपक्षीय सम्‍मेलन में 4 यूरोपिय नेताओं के साथ किए हैं। यूरोप पर फोकस का मकसद क्‍या है? क्या कोरोना बाद की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री का फोकस यूरोप पर है? (हिंदी में पूछा गया सवाल )

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू): हाँ, मुझे लगता है कि यह सवाल बहुत महत्‍वपूर्ण है और बहुत अच्‍छा है कि यूरोप के नेताओं के साथ ये शिखर वार्ताएं हो रही हैं और इस महीने यूरोप पश्चिम संभाग की तरफ से यहदूसरी शिखर वार्ता रही है। पहले इटली के साथ 6 नवंबर को थी और आप ठीक कह रहे हैंकि पहले डेनमार्क के साथ भी हुई है।

इसके कई करण हैं, एक तो कोविड के दौरान भारत और यूरोपीय देशों के बीच में काफी सहयोग की स्थिति थी और वहाँ से भी सहयोग आया। भारत ने भी बहुत देशों को सहयोग पहुँचाया, चाहे वो दवाइयां हों, चाहे वो पीपीई हो, इसी कोविड के दौरान भी दोनो यूरोप के देशों में और भारत के बीच में काफी अदान-प्रदान रहा है, और भारतीय मूल के लोग भी वहाँ हैं और सबसे बड़ी बात ये भी है कि 15 जुलाई को यूरोपीय संघ के साथ शिखर वार्ता हुई और उसके फलस्‍वरूप और उसके अनुवर्तन में भी यूरोपीय देश भारत की तरफ देखरहे हैं और स्वाभाविक है कि कोविड आर्थिक सुधार के लिए जब हम लचीली आपूर्ति श्रृंखला की बात कर रहे हैं, फिर आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण की बात कर रहे हैं, यूरोपीय देश भारत की तरफ देख रहे हैं, नई निगाह से देख रहे हैं, काफी उत्‍सुकता के साथ देख रहे हैं, और हमारे लिए भी जब हम आत्‍मनिर्भर भारत के बारे में बात करते हैंतो यूरोपीय निवेशकों को हम आमंत्रित कर रहे हैं, अभी हाल ही में 10 क्षेत्र में उत्पादकता से जुड़े प्रोत्साहनों की योजना जो घोषित की गई है, उसमें यूरोपीय देशों कीभी बहुत रूचि है, तो स्वाभाविक है कि यूरोप जो विश्‍व में एक सकल निवेशक रहा है वो भारत की तरफ देखेगा और इसके चलते इतनी सारी जो वार्ताएं हो रहीं है यूरोप के साथ, यह मुझे लगता है कि स्वाभाविक है और आगे भी चलकरऐसी चीजें होती रहेंगी। (हिंदी में जवाब दिया)

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: "अंतरिक्ष के संदर्भ में, मुख्य ध्यान क्या था? क्या हम देखेंगे कि भारत लक्जमबर्ग के उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है। यह सिद्धांत का सवाल है।

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू):हाँ सिद्धांत, वास्तव में लान्चिंग क्‍यों, देखिए, भारत ने पिछले हफ्ते जो पीएसएलवी3 का प्रक्षेपण किया था, उसमें चार तो लक्जमबर्ग के सैटेलाइट थे, तो लक्जमबर्ग एक बहुत बड़ा सैटेलाइट हब है, उनकी जो वहाँ पीक सोसायटी है एसईएस वो भारत में काफी भारतीय कंपनियों के साथ, इसरो के साथ, काफी अच्‍छे तरीके से काम कर रही है। बहुत सारे जो ये पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रह है, और जो वायुयानों में उपग्रह संचार होता है वो लक्जमबर्ग डिश कंपनी के उपग्रहों के माध्यम से होता है, तो उसमें इसरो का बहुत महत्‍वपूर्ण योगदान है, और हम लोग है इस वक्‍त तक इसरों और लक्‍जमबर्ग अंतरिक्ष संगठन के बीच समझौते की भी बात कर रहे हैं, तो आशा है कि वो जल्दी उसको हम ला पाएंगे , तो अंतरिक्ष में और सहयोग की बहुत बहुत संभावनाएं हैं और हो भी रही हैं। (हिंदी में जवाब दिया)

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: सिद्धांत का एक और सवाल- "रुपे कार्ड अंतरराष्ट्रीय हो गया है, इस क्षेत्र के कई देश अब इसका स्वागत कर रहे हैं। अगला लक्जमबर्ग है या यूरोप?"

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू): ये थोड़ा मेरे लिए जबाब देने के लिए कठिन सवाल है, लेकिन मैं तो चाहूँगा कि रुपे विश्‍व में नंबर 1 कार्ड हो, और जहाँ-जहाँ भारत के साथ अंतरक्रिया है, वहाँ रुपे लॉन्च होना चाहिए। लक्जमबर्ग इस तरीके से जनसंख्या के लिहाज से बहुत छोटा देश है, करीब सवा छह लाख लोग हैं तो मुझे नहीं लगता की है वो लक्षित देशों में से है, ये आपको रूपे वालों से पूछना पड़ेगा, लेकिन जहाँ पे आबादी ज्‍़यादा है, भारतीय मूल के लोग ज्‍़यादा है, या आदान-प्रदान, पर्यटन ज्‍़यादा है, वहाँ पे बिल्‍कुल टारगेट करना चाहिए, तो कई यूरोपीय देश हैं जो इसके लिए मुझे लगता है कि बेहतर उम्मीदवार होंगे जैसे कि यूके, नीदरलैंड, इटली, जहाँ पे भारतीय मूल के लोग ज्‍़यादा हैं, और भारत के बीच में लोगों का आना-जाना ज्‍़यादा रहेगा। (हिंदी में ज़वाब दिया)

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
मुझे कोई और सवाल नहीं दिख रहा है, संदीप। तो हमसे जुड़ने के लिए आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद और यह विशेष ब्रीफिंग समाप्त होती है। हम बहुत शीघ्र ही अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग के साथ फिर से शुरूआत करेंगे। आपसे कुछ ही मिनटों में मिलते हैं।

श्री संदीप चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (ईडब्ल्यू): धन्यवाद, अनुराग।

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