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30 नवंबर 2020 को एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की 19वीं बैठक के बाद सचिव (पश्चिम) द्वारा विशेष मीडिया ब्रीफिंग की प्रतिलिपि

दिसम्बर 01, 2020

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार और शुभ संध्या। इस विशेष ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। हमने अभी-अभी एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद् की 19वीं बैठक संपन्न की है जिसकी अध्यक्षता माननीय उपराष्ट्रपति ने की। इस बैठक में मेरे साथ, मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) श्री विकास स्वरूप हैं, जो हमें संक्षिप्त जानकारी देंगे। उनके साथ यहाँ मंत्रालय में संयुक्त सचिव (एससीओ) सुश्री योजना पटेल भी उपस्थित हैं। सर, शुरुआती टिप्पणियों के लिए हम आपके पास चलते हैं, जिसके बाद हम सवाल लेंगे।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम):
धन्यवाद अनुराग। प्रिय साथियों,

मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमने आज एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद् की 19वीं बैठक का सफलतापूर्वक समापन किया है जिसकी अध्यक्षता माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने दोपहर 2:30 बजे से आभासी प्रारूप में की। बैठक संयुक्त विज्ञप्ति को स्वीकार करने के साथ समाप्त हुई।

यह शिखर सम्मेलन हर वर्ष एससीओ के प्रधानमंत्रियों के स्तर पर आयोजित किया जाता है और मुख्य रूप से संगठन के व्यापार और आर्थिक एजेंडे से संबंधित होता है। 2017 में संगठन की पूर्ण सदस्यता प्राप्त करने के बाद से यह पहली बार है जब शिखर सम्मेलन की बैठक भारत की अध्यक्षता में आयोजित की गई। भारत ने रोटेशन के नियमों के मुताबिक, 2 नवंबर 2019 को एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद् की अध्यक्षता को पूर्ववर्ती अध्यक्ष उज्बेकिस्तान से प्राप्त किया और अपना साल भर का कार्यकाल 30 नवंबर 2020 को शिखर सम्मेलन स्तरीय बैठक के साथ पूरा किया।

एससीओ आठ सदस्य देशों- भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान का एक क्षेत्रीय समूह है। एससीओ के चार पर्यवेक्षक राज्य भी हैं- ईरान, अफगानिस्तान, बेलारूस और मंगोलिया।

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों में से रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्रियों के स्तर पर आज की बैठक में भाग लिया। पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व उनके विदेश मामलों के संसदीय सचिव ने किया।

एससीओ के सदस्य राज्यों के अलावा, एससीओ के चार पर्यवेक्षक राज्यों ने भी उच्च स्तर पर भाग लिया- इनमें अफगानिस्तान के राष्ट्रपति, ईरान के पहले उपराष्ट्रपति, बेलारूस के प्रधानमंत्री और मंगोलिया के उप प्रधानमंत्री शामिल थे। तुर्कमेनिस्तान को पूर्व के चलन के अनुसार मेजबान के विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था और उनकी ओर से मंत्रिमंडल के उपाध्यक्ष ने प्रतिनिधित्व किया था।

एससीओ के दो निकायों का प्रतिनिधित्व एससीओ महासचिव और एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी संरचना (RATS) के कार्यकारी निदेशक द्वारा किया गया था। एससीओ व्यापार परिषद के अध्यक्ष तथा एससीओ इंटरबैंक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी उपस्थित थे।

2020 में एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की हमारी अध्यक्षता के दौरान, भारत ने विशेष रूप से सहयोग के तीन नए स्तंभ बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है: स्टार्टअप और नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पारंपरिक चिकित्सा, और साथ ही कई अन्य ठोस पहल का भी प्रस्ताव रखा। भारत ने स्टार्टअप और नवाचार पर एक नया स्पेशल वर्किंग ग्रुप बनाने और उसकी अध्यक्षता करने तथा पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग पर एक नया एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप गठित करने की पेशकश की है। भारत ने आभासी प्रारूप में भी कई आयोजन किये हैं, पहला एससीओ युवा वैज्ञानिक कॉन्क्लेव (24-28 नवंबर) आयोजित किया गया, जिसमें 200 से अधिक युवा वैज्ञानिकों ने भाग लिया, एससीओ आर्थिक थिंक टैंक (20-21 अगस्त) का पहला कंसोर्टियम तथा पहली बार एससीओ स्टार्टअप फोरम (27 अक्टूबर) का आयोजन किया गया। बी2बी प्रारूप में, फिक्की ने पहला एससीओ बिजनेस कॉन्क्लेव (23 नवंबर) आहूत किया, जिसमें एससीओ बिजनेस काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यायों के माध्यम से एमएसएमई में सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। सभी सदस्य राज्यों ने भारत की पहल की सराहना की है और गतिविधियों में भाग लिया है और जो आज जारी की गई संयुक्त विज्ञप्ति में भी परिलक्षित होता है।

सांस्कृतिक-मानवीय पक्ष पर, भारत ने 2019 में हुए एससीओ शासनाध्यक्षों के बिश्केक शिखर सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं को लागू किया है, जिनका उद्देश्य हमारी सहस्राब्दी पुरानी साझा सभ्यतागत विरासत पर ध्यान केंद्रित करना था। उनमें शामिल हैं: राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा साझी बौद्ध विरासत पर पहली बार एससीओ डिजिटल प्रदर्शनी की मेजबानी करना, जिसका आज उद्घाटन किया गया है तथा भारत के 10 उत्कृष्ट क्षेत्रीय साहित्य का रूसी एवं चीनी भाषाओं में अनुवाद। भारत ने 2021 में एससीओ फूड फेस्टिवल की मेजबानी करने का भी प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों में अंतर्निहित विचार एससीओ क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना था और एससीओ सदस्य राज्यों से इसमें पूर्ण समर्थन मिला है।

भारत शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) को शांति, सुरक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन मानता है। हम संगठन में एक सक्रिय, सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाते हुए एससीओ के साथ हमारे सहयोग को प्रगाढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की अपनी अध्यक्षता के सफल समापन के साथ, भारत एससीओ गतिविधियों के केंद्र में मनुष्यों को रखकर और क्षेत्र में अधिक शांति और समृद्धि को बढ़ावा देकर एससीओ के भीतर अधिक से अधिक व्यापार, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की उम्मीद करता है। हम आशा करते हैं कि भारत की पहल न केवल एससीओ के सदस्य देशों के लिए कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से उबरने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि यह संगठन को मजबूत करने के लिए हमारी निरंतर प्रतिबद्धता का संकेत भी देगी।

हम 2021 में एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद के अगले अध्यक्ष के रूप में कजाकिस्तान को शुभकामनाएं देते हैं और उन्हें अपना पूर्ण समर्थन भी देते हैं।

इसके साथ ही मैं अपनी टिप्पणियों को यहीं समाप्त करता हूं। मुझे सुनने के लिए धन्यवाद और अब आपके पास जितने भी प्रश्न हैं, उन्हें लेने में मुझे और ज्यादा खुशी होगी।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: उद्घाटन टिप्पणियों के लिए धन्यवाद सर। अब सवालों की ओर चलते हैं। पहला सवाल बिजनेस वर्ल्ड के मनीष झा का है- "भारत इस वर्ष एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है, आर्थिक परिणाम क्या हैं? स्टार्टअप की पहल क्या है और यह समूह के भीतर कैसे लागू होगा? क्या पाकिस्तान इस तरह की पहल का अपवाद होगा या यह सभी सदस्यों और पर्यवेक्षकों को शामिल करता है? "

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): धन्यवाद मनीष। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है क्योंकि हम भी यह मानते हैं कि आठ देशों को एक साथ लाकर एससीओ आर्थिक पक्ष में बहुत योगदान कर सकता है, आप जानते हैं कि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक संपर्कों तथा पहल को मजबूत बनाने के लिए साझा प्रयास बड़े पैमाने पर होता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं और जैसा कि मेरी शुरुआती टिप्पणियों में पहले ही उल्लेख किया गया है, हमने एससीओ के तीन स्तंभों को सुदृढ़ किया है, स्टार्टअप और नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पारंपरिक चिकित्सा। इस वर्ष एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की हमारी अध्यक्षता के दौरान, हमने स्टार्टअप्स और नवाचार पर एक विशेष कार्य समूह बनाने का प्रस्ताव रखा है। जैसा कि आप जानते हैं, हमारे पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, और हमने स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को पनपने के लिए एक मजबूत और गतिशील माहौल बनाया है। स्टार्टअप्स और इनोवेशन पर विशेष वर्किंग ग्रुप का निर्माण एससीओ के सदस्य राज्यों के बीच बहुपक्षीय सहयोग और जुड़ाव की नींव रखेगा, तथा ज्ञान साझा करने वाली कार्यशालाओं, युवा उद्यमियों के प्रशिक्षण, निवेशकों तक पहुंच को सक्षम बनाने और सर्वोत्तम व्यवहारों के आदान-प्रदान के द्वारा उनके स्वयं के स्टार्टअप इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए धार प्रदान करेगा। इसे अब एससीओ की स्थापित प्रथा के अनुसार विकसित किया जाएगा। हम सभी एससीओ सदस्य देशों को 27 अक्टूबर को आभासी प्रारूप में आयोजित पहले स्टार्टअप फोरम में सफलतापूर्वक भाग लेने के लिए बधाई देना चाहते हैं, जिसकी मेजबानी भारत ने की थी और जिसमें 2500 से अधिक प्रतिनिधियों, 49 वक्ताओं और एससीओ देशों के 102 स्टार्टअप ने भाग लिया था। भारत ने अब स्टार्टअप और इनोवेशन के विशेष वर्किंग ग्रुप तथा एससीओ स्टार्टअप फोरम की वार्षिक तौर पर मेजबानी करने की पेशकश की है। हमारा दूसरा प्रस्ताव एससीओ स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के तहत पारंपरिक चिकित्सा पर एक विशेषज्ञ समूह बनाने का है। हमने आधुनिक चिकित्सा प्रणाली की सीमाओं को देखा है जो कोविड-19 महामारी के अभूतपूर्व वैश्विक प्रसार के कारण काफी दबाव में है। ऐसे परिदृश्य में, पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों ने इस क्षेत्र में लाखों लोगों के जीवन को बचाने के लिए प्रभावी और कम लागत का विकल्प प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभाई है। पारंपरिक चिकित्सा में एक विशेषज्ञ वर्किंग ग्रुप का निर्माण यूरेशियन क्षेत्र में स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक समग्र दृष्टिकोण बनाने के हमारे प्रयासों को प्रभावी ढंग से समन्वित करने में मदद करेगा। भारत का आयुष मंत्रालय एससीओ के स्वास्थ्य मंत्रियों की हर वर्ष होने वाली बैठक के तहत भारत में पारंपरिक चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह की सालाना मेजबानी करने के लिए तैयार है। हम इस क्षेत्र में सभी एससीओ सदस्य देशों के साथ सहयोग के लिए तत्पर हैं। मैं इस वर्ष अगस्त में भारत की मेजबानी में आयोजित एससीओ आर्थिक थिंक-टैंक के पहले कंसोर्टियम में भाग लेने के लिए एससीओ के सदस्य राज्यों को बधाई देना चाहता हूं, कंसोर्टियम द्वारा विकसित दिल्ली एक्शन प्लान भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए एक उत्कृष्ट रोड मैप प्रदान करता है। हम मानते हैं कि हमें अपने युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि वे आजीविका और सतत विकास की समस्याओं के कल्पनाशील समाधान के साथ आगे आएं, और इसलिए पहली बार आयोजित एससीओ युवा वैज्ञानिक कॉन्क्लेव को देखना अद्भुत था, जिसकी मेजबानी भारत ने 24 से 28 नवंबर तक की थी और जिसमें 200 से अधिक युवा वैज्ञानिकों की उत्साही भागीदारी देखी गई। इस क्षेत्र में अपने सहयोग को जारी रखने के लिए भारतीय पक्ष इस फोरम की मेजबानी अर्द्धमासिक आधार पर करना चाहेगा। हम राष्ट्रीय सेवा योजना के साथ इसके राष्ट्रीय अध्याय के रूप में एससीओ युवा परिषद में औपचारिक रूप से शामिल हो चुके हैं। इसलिए यदि आप देखें, हमने हमेशा एससीओ के साथ आर्थिक क्षेत्र में साझेदारी पर बहुत जोर दिया है, जैसा कि आप जानते हैं, एससीओ ने 2019 में एमटीईसी नामक एक बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक रणनीति को अपनाया है, और हमने अब उस पर अमल करने के लिए एक कार्य योजना विकसित की है। और यदि आप उस पर गौर करें, तो आपको हरेक क्षेत्र में पहल दिखाई देगी, जैसे कि कृषि और कृषि-प्रसंस्करण, ऊर्जा, माल और सेवाओं की मुफ्त आवाजाही, स्वास्थ्य, फार्मा, एमएसएमई, शिक्षा, वैकल्पिक ऊर्जा और पारंपरिक चिकित्सा। तो, इससे आपको अंतर-एससीओ सहयोग के इस विशेष स्तंभ को बढ़ाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता के बारे में स्पष्ट रूप से पता चल जाता है। जहां तक सवाल है कि पाकिस्तान इन पहल में शामिल होने जा रहा है या नहीं, तो यह पूरी तरह से पाकिस्तान पर निर्भर है, लेकिन एससीओ चार्टर में प्रावधान है कि कोई एक देश इन सभी क्षेत्रों में सहयोग को रोक नहीं सकता है और यह अन्य सदस्य देशों को अनुमति देता है कि वे किसी विशिष्ट क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ा सकते हैं, उस देश को अलग करके जो इसका विरोध कर रहा है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
महोदय, मैं आपूर्ति श्रृंखला को लेकर एक प्रश्न की ओर बढूंगा। यह प्रश्न हिंदुस्तान के पंकज पांडेय का है- "एससीओ में क्या कोई वैकल्पिक सप्लाई चेन को लेकर बात हुई? कोविड के दौरान भारत लगातार नई सप्लाई चेन की पैरवी करता रहा है। क्या मध्य एशिया के देश भारत के इस विचार के साथ हैं और चीन इसे लेकर असहज तो नहीं है?” (हिंदी में प्रश्न; अनुमानित अनुवाद) "किसी भी वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला के संबंध में एससीओ में कोई चर्चा हुई या नहीं। कोविड के दौरान, भारत लगातार आपूर्ति श्रृंखला मुद्दे की वकालत करता रहा है। क्या मध्य एशिया के देश भारत के इस विचार का समर्थन कर रहे हैं और क्या चीन इससे असहज नहीं है? ”

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): देखिए पंकज जी, जैसा कि आज मैंने अभी आपको बताया कि आज जो हमारी एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक हुई थी, उसमें कई मुद्दों पर बहुत अच्छी और रचनात्मक चर्चा हुई, कोविड-19 महामारी पर चर्चा हुई, आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई, कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई, एनर्जी पर चर्चा हुई, लेकिन वैकल्पिक सप्लाई चेन पर कोई चर्चा नहीं हुई। तो इसलिए मैं इस बारे में आपको और कुछ नहीं बता सकता हूँ। ¼हिंदी में दिया गया उत्तर: अनुमानित अनुवाद½ देखिये पंकज जी, जैसा कि मैंने आज आपको बताया, आज एससीओ काउंसिल ऑफ हेड ऑफ गवर्नमेंट की बैठक हुई और कई मुद्दों पर बहुत अच्छी और रचनात्मक चर्चा हुई। हमने कोविड-19 महामारी पर चर्चा की, हमने आर्थिक सहयोग पर चर्चा की, हमने कनेक्टिविटी पर चर्चा की, हमने ऊर्जा पर चर्चा की लेकिन वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला पर कोई चर्चा नहीं हुई, इसलिए इसके अलावा मैं आपको और कुछ नहीं बता सकता।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: अगला सवाल रक्षक न्यूज़ के रंजीत कुमार का है- "चूंकि एससीओ के 3 प्रमुख सदस्य भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंध हैं, तो क्या आपको लगता है कि एससीओ कुशलता से कार्य कर सकता है और अपने उद्देश्य की पूर्ति कर सकता है?" मैं इसी से सम्बंधित एक और सवाल न्यूज नेशन के मधुरेंद्र का भी लूंगा- "भारत-चीन और भारत-पाक के बीच जारी तनाव का असर क्या एससीओ पर दिखाई देता है?" ¼हिंदी में प्रश्न; अनुमानित अनुवाद) "भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव का असर एससीओ पर भी है?"

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): देखिए, एससीओ का गठन मुख्य रूप से एक क्षेत्रीय संगठन के तौर पर किया गया था, जो शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए, आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद की चुनौतियों से निपटने के लिए तथा व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देने और निश्चित रूप से एससीओ सदस्यों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए था। इसलिए यदि एससीओ सदस्य देशों में इच्छाशक्ति होगी, तो मुझे यकीन है कि हम सभी को एक समान आधार मिल सकता है और यही कारण है कि एससीओ चार्टर, एससीओ चार्टर के अनुच्छेद 2 में विशेष रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को एससीओ मंचों पर उठाए जाने पर रोक लगाई गई है, क्योंकि हम सभी ने हमारे पिछले अनुभव में पाया है, कि द्विपक्षीय मुद्दों को उठाने से केवल माहौल दूषित होता है जो बड़े पैमाने पर पूरे क्षेत्र में ठोस सहयोग को बाधित कर देता है। हम, जहां तक हमारा सवाल है, हमने एससीओ चार्टर के इस प्रावधान का पूरी नैतिकता से पालन किया है, हम एससीओ मंचों में द्विपक्षीय मुद्दों को नहीं उठाते हैं, और हम अन्य देशों से भी यही उम्मीद करते हैं। यदि देश इस मानसिकता के साथ आते हैं, तो मुझे पूरा यकीन है कि हम सभी आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए साझा आधार पा सकते हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: तो अगला सवाल भी मधुरेन्द्र का ही है, "एससीओ में प्रधानमंत्री इमरान खान की गैरहाजिरी के क्या मायने हैं? (हिंदी में प्रश्न; अनुमानित अनुवाद) एससीओ की बैठक में प्रधानमंत्री इमरान खान की अनुपस्थिति का क्या अर्थ है?”

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): देखिए, मधुरेन्द्र जी, इसका उत्तर तो पाकिस्तान ही दे सकता है, क्योंकि हर देश को स्वयं निर्धारित करना होता है कि वो एससीओ की जो मीटिंग है उसमें किस स्तर पर भाग लेगा। जहाँ तक हमारा प्रश्न है, हम चेयर कर रहे थे आज के सम्मेलन को, और हमने अपने लेवल को अपग्रेड किया है, प्रधानमंत्री से हम उपराष्ट्रपति के लेवल पर गए हैं और पाकिस्तान ने किस लेवल पर भाग लिया है, वो पाकिस्तान ही जानता है और उसका कारण क्या है, पाकिस्तान की प्रतिबद्धता एससीओ के प्रति कितनी है, ये आप पाकिस्तान से ही पूछें। (हिंदी में उत्तर; अनुमानित अनुवाद): देखिए, मधुरेंद्रजी, केवल पाकिस्तान ही इसका उत्तर दे सकता है, क्योंकि प्रत्येक देश व्यक्तिगत रूप से निर्णय लेता है कि वह एससीओ की बैठक में किस स्तर पर भाग लेगा। जहां तक हमारा संबंध है, हमने शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की और हमने अपने स्तर को प्रधानमंत्री से उपराष्ट्रपति तक उन्नत किया और पाकिस्तान ने किस स्तर पर भाग लिया, और इसके पीछे का कारण, वही बेहतर जानता है। बेहतर है कि आप पाकिस्तान से एससीओ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के बारे में पूछें?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: द ट्रिब्यून से संदीप दीक्षित का सवाल है- "क्या वैक्सीन और महामारी से जुड़े अन्य कार्यों की बाधाओं को कम करने के लिए, आईपीआर कानूनों में छूट को लेकर भारत और पाकिस्तान सहित छह देशों के प्रस्ताव पर कोई साझा एससीओ स्टैंड है।" मैं इसी से जुड़ा एक सवाल और लूँगा जिसे सिद्धांत ने पूछा है और वो जानना चाहते हैं, "कोविड टीका सहयोग को लेकर, क्या कोई योजना है?"

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम):
आज, सदस्य राज्यों द्वारा किए गए लगभग सभी हस्तक्षेपों में कोविड-19 महामारी शामिल है। क्योंकि यह एक ऐसी महामारी है जिसने किसी भी राष्ट्र की सीमा का सम्मान नहीं किया, यह एक वैश्विक घटना है और हर देश को प्रभावित कर रही है। इसलिए कोविड-19 महामारी के प्रभाव पर एक अच्छी चर्चा हुई, कि महामारी के आर्थिक प्रभाव को कम करने में देश कैसे सबसे अच्छे तरीके से सहयोग कर सकते हैं और साथ मिलकर काम कर सकते हैं। जहां तक वैक्सीन के विकास का संबंध है, मुझे लगता है, सार्वजनिक डोमेन में रहकर आप अच्छी तरह से जानते हैं कि एससीओ के भीतर वे कौन से देश हैं, जिनके पास सक्रिय टीका विकास कार्यक्रम हैं, और निश्चित रूप से इसमें भारत शामिल है। आपने प्रधानमंत्री की देश के तीन प्रमुख वैक्सीन उत्पादकों की हालिया यात्रा को देखा होगा और प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा है कि हम चाहते हैं कि हमारे वैक्सीन का इस्तेमाल वैश्विक कल्याण के लिए किया जाए, पूरी मानवता की मदद करने के लिए हम अपनी वैक्सीन का प्रयोग करेंगे। (हिंदी में उत्तर; अनुमानित अनुवाद) "हम अपने टीकों से पूरी मानवता की मदद करेंगे।" मैं समझता हूँ कि मुझे इसे यहीं खत्म करना चाहिए। जहाँ तक वैक्सीन पर सहयोग की बात है, तो हम सभी विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य हैं और हमारा मानना है कि वही उपयुक्त मंच है जहाँ इस सहयोग को आगे ले जाना चाहिए।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: डब्ल्यूआईओएन से सिद्धांत का एक सवाल है, "क्या साझी बौद्ध विरासत पर भारत द्वारा कोई बड़ा कदम उठाया जा रहा है?"

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): हां, जैसा कि मैंने पहले ही बताया है कि हमने एससीओ सदस्य राज्यों के बीच एक साझा सांस्कृतिक पहचान विकसित करने को बहुत महत्व दिया है और यही वजह रही कि 2019 में बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान माननीय प्रधानमंत्री ने एक प्रस्ताव दिया था कि हमें मूल रूप से साझी बौद्ध विरासत को दिखाने के लिए एक साथ सहयोग करना चाहिए, जो प्रत्येक एससीओ सदस्य राज्य के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। और माननीय प्रधानमंत्री की दृष्टि को मूर्त रूप देते हुए, आज, हमारे राष्ट्रीय संग्रहालय ने सभी एससीओ सदस्य राज्यों, जिन्होंने इसमें भाग लिया है, की बौद्ध कलाकृतियों को प्रदर्शित करने वाली एक डिजिटल प्रदर्शनी शुरू की है। मूल रूप से योजना एक भौतिक प्रदर्शनी आयोजित करने की थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण, हमें इसे एक आभासी प्रदर्शनी में बदलना पड़ा, लेकिन मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि कृपया इसे जरूर देखें। यह आपको बताएगा कि साझी बौद्ध विरासत के माध्यम से एससीओ के सदस्य देश कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: तो अगला सवाल यह है कि "कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव के मामले में मध्य एशिया के साथ जुड़ाव बढ़ाने के लिए एससीओ भारत के लिए एक लॉन्च पैड कैसे हो सकता है?" यह सिद्धांत का सवाल है।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): एक बार फिर से, जैसा कि हमने पहले ही व्यापार, वाणिज्य, सांस्कृतिक एवं मानवीय सहयोग के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई विभिन्न पहलों को रेखांकित किया है, ताकि एक-दूसरे की संस्कृति के बारे में हमारी समझ विकसित हो सके तथा इसे और बढाया जा सके। इनमें से मुझे लगता है कि 10 पुस्तकों के अनुवाद के प्रस्ताव को लागू किया गया है। चीनी और रूसी भाषाओँ में क्षेत्रीय भारतीय साहित्य की 10 बहुत ही प्रमुख पुस्तकों का अनुवाद निश्चित रूप से एससीओ क्षेत्र में लोगों को भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत से परिचित कराने में मदद करेंगी। हमने भी प्रस्ताव दिया है, हम एससीओ यूथ काउंसिल में शामिल हो गए हैं, और मुझे लगता है कि यह हमारे युवाओं को एक-दूसरे के करीब लाने में मदद करेगा और तीसरा बहुत महत्वपूर्ण प्रस्ताव एससीओ फूड फेस्टिवल का आयोजन था। हम 2020 में भारत में भौतिक रूप से इसकी मेजबानी करना चाहते थे, लेकिन महामारी के कारण हमने इसे अब 2021 तक स्थगित कर दिया है और हमें उम्मीद है कि जब यह वास्तव में आयोजित होगा तो हम इसे भौतिक प्रारूप में कर पाएंगे। इसलिए मुझे लगता है कि ये सभी प्रस्ताव निश्चित रूप से भारत और अन्य एससीओ सदस्य देशों के बीच संपर्क और लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
"क्या एससीओ में अंग्रेजी या हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की कोई योजना है?" यह फिर से सिद्धांत की ओर से है।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम 2017 में एससीओ के एक पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुए थे। हम 2005 से पर्यवेक्षक थे और 2017 में हम पूर्ण सदस्य बन गए। वर्तमान में एससीओ में केवल दो आधिकारिक भाषाएं हैं- चीनी और रूसी- और यही कारण है कि एससीओ के साथ काम करने वाले हमारे सभी अधिकारी धाराप्रवाह रूसी बोलने वाले हैं, जैसा कि योजना हैं। आप जानते हैं कि, रूसी उनकी विदेशी भाषा है। लेकिन, हमने 2017 से एक प्रस्ताव रखा हुआ है कि अंग्रेजी को एससीओ में तीसरी कामकाजी भाषा के रूप में अपनाया जाना चाहिए, यह प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
महोदय, अब और कोई प्रश्न नहीं है। तो हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद। धन्यवाद योजना और यहाँ यह विशेष ब्रीफिंग समाप्त होती है।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम):
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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