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प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा के दौरान भारत-इजरायल संयुक्त वक्तव्य (5 जुलाई, 2017)

जुलाई 05, 2017

  • दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर 4-6 जुलाई 2017 के बीच इजराइल की यात्रा की। एक भारतीय प्रधानमंत्री की इजराइल की इस अब तक की पहली ऐतिहासिक यात्रा ने उनके लोगों के बीच की स्थायी मित्रता को मजबूती प्रदान की और द्विपक्षीय संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी के उच्च स्तर पर स्थापित कर दिया।
  • यह ध्यान में रखते हुए कि वे सदियों से अपने संबंधित विरासतों का पोषण करने वाले दो सभ्यताओं के जन्मस्थली का प्रतिनिधित्व करते हैं, दोनों नेताओं ने अपनी सहभागिता की पूर्ण क्षमता को साकार करने के लिए एक व्यापक संबंध स्थापित करने के अपने इरादे की पुष्टि की। ऐसा करने में, उन्होंने स्वीकार किया कि पूरे इतिहासकाल में, यहूदी समुदायों का हमेशा भारत में निवास रहा है और उनसे सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से व्यवहार किया गया है।
  • राजनयिक संबंधों की एक चौथाई सदी के बाद रिश्ते के विकास की समीक्षा करते हुए, दोनों नेताओं ने उन पहल और नीतियों पर सहमति व्यक्त की जो दोनों देशों के लक्ष्यों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है और व्यापक क्षेत्रों में उनके सहयोगी प्रयासों को बढाता है। उन्होंने अनुमान किया कि दोनों देश विकास, प्रौद्योगिकी, नवाचार, उद्यमिता, रक्षा और सुरक्षा में करीबी सहयोगी बनेंगे।
  • विकास के लिए इनकी केन्द्रीयता को स्वीकार करते हुए, भारत और इज़राइल "जल और कृषि में सामरिक साझेदारी" स्थापित करने पर सहमत हुए। यह जल संरक्षण, अपशिष्ट जल प्रशोधन एवं इसका कृषि में पुन: उपयोग, अलवणीकरण, जल उपयोगिता सुधारों तथा उन्नत जल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए गंगा और अन्य नदियों की सफाई पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगा। इसमें कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़े व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक व्यापार प्रतिरूप को बढ़ावा देने के लिए इजरायल के विदेश मंत्रालय (मशाव) और भारत के कृषि मंत्रालय के नेतृत्व के तहत मौजूदा उत्कृष्टता के केंद्र (सीओई) का सुदृढ़ीकरण और विस्तार; गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री का प्रावधान; और पीपीपी, बी2बी और अन्य प्रतिरूपों के माध्यम से निजी क्षेत्र को शामिल करके फसल कटनी पश्चात् तकनीकी ज्ञान और बाजार संबंधों का स्थानांतरण भी शामिल होगा। दोनों नेताओं ने इस भागीदारी को संचालित करने के लिए एक संयुक्त कार्यदल की स्थापना पर भी सहमति व्यक्त की।
  • दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की पूर्ण क्षमता को साकार करने के महत्व पर ध्यान दिया। उन्होंने इस संबंध में शुरुआती सिफारिशें देने के लिए भारत-इजरायल सीईओ मंच को कार्यभार सौंपा। दोनों नेताओं ने नवाचार और उद्यमशीलता में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता को रेखांकित किया और स्टार्ट-अप्स के क्षेत्र में अधिक से अधिक सहयोग का आह्वान किया।
  • व्यापार से जुड़े पुरुष एवं महिलाओं के संचलन को सुगम बनाने के महत्व को स्वीकार करते हुए, भारत और इजराइल ने अपनी उम्मीदों को रेखांकित किया कि व्यापार से जुड़े लोगों को पांच साल तक एकाधिक प्रवेश वीजा प्रदान करने से अधिक आर्थिक और वाणिज्यिक आदान-प्रदानों को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • दोनों प्रधानमंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों से द्विपक्षीय निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए निवेशों के संरक्षण के लिए एक समझौते पर बातचीत की जाएगी।
  • दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा इजराइल के राष्ट्रीय तकनीकी अभिनव प्राधिकरण द्वारा भारत-इजरायल औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास और नवाचार निधि (आई4एफ) की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन के संपन्न होने का स्वागत किया, जिसमें प्रत्येक पक्ष का योगदान 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर होगा| यह समझौता ज्ञापन भारतीय और इज़राइली उद्यमों को संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं करने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जिससे अभिनव प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का विकास होगा जिनके संभावित व्यावसायिक इस्तेमाल होंगे।
  • दोनों देशों के उद्योगों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सरकारी संस्थानों के लिए व्यापक ज्ञान-व्यवसाय साझेदारी को बढ़ावा देने के महत्व को स्वीकार करते हुए, इजराइल ने वर्ष 2018 में भारत में होने वाले वार्षिक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन के लिए "भागीदार देश" बनने की पेशकश का स्वागत किया।
  • दोनों नेताओं ने इजरायल अंतरिक्ष संस्थान (आईएसए) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच चल रहे सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने परमाणु घड़ियों में सहयोग;जीईओ-एलईओ प्रकाशीय कड़ी; छोटे उपग्रहों के लिए अकादमिक सहयोग और विद्युत् प्रणोदन के क्षेत्रों में तीन समझोते ज्ञापनों और सहयोग की योजना पर हस्ताक्षर करने पर संतोष व्यक्त किया, जो दोनों देशों के बीच सहयोग की और वृद्धि करेगा। उन्होंने पारस्परिक लाभ के लिए बढ़ते रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों को भी प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि इसरो द्वारा हाल ही में इजरायली नैनो उपग्रह का प्रक्षेपण इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
  • प्रधानमंत्रियों ने संतोष के साथ गौर किया कि 'स्वास्थ्य देखभाल में बड़े आंकडें वैश्लेषिकी’ सहित अत्याधुनिक क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं का समर्थन करके दोनों पक्ष अपने वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को उन्नत करने के लिए सहमत हुए हैं। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर भारत-इजरायल संयुक्त समिति को वैज्ञानिक सहयोग की बेहतर प्रगति की संभावना का पता लगाने के लिए निर्देश दिया, जिसमें पारस्परिक शक्ति और दिलचस्पी के अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान उत्कृष्टता के संजाल केंद्र स्थापित करना शामिल है।
  • पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के महत्व की पुनः पुष्टि करते हुए, इस बात पर सहमति हुई कि इस क्षेत्र में भविष्य के विकास में रक्षा उत्पाद के संयुक्त विकास पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें 'भारत में बनाओ' पहल पर विशेष जोर देते हुए, इजरायल से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है|
  • भारत और इज़राइल सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर साइबर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्रियों ने अपने राष्ट्रीय साइबर अधिकारियों के बीच ज्यादा संवाद के महत्व पर जोर दिया और इस क्षेत्र में इसके कार्यान्वयन के लिए आपसी दिशानिर्देश के निर्माण सहित, उनके सहयोग को बढ़ाने और गति देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों पक्ष साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक रूपरेखा के माध्यम से साइबर मुद्दों पर अपने व्यापक-आधारित सहयोग को बढ़ाने और ज्यादा संस्थागत करने के मूल्य को भी पहचानते हैं।
  • यह स्वीकारते हुए कि आतंकवाद वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा है, दोनों प्रधानमंत्रियों ने इसे अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में सामना करने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी आधार पर आतंक के कृत्यों के लिए कोई औचित्य नहीं हो सकती है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि आतंकवादियों, आतंकवादी संगठनों, उनके संजाल और आतंकवाद को प्रोत्साहित करने, समर्थन और वित्तपोषण तथा उनके लिए अभयारण्य प्रदान करने वाले सभी लोगों के खिलाफ मजबूत कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया कि आतंकवादी संगठनों को किसी भी डब्ल्यूएमडी (सामूहिक नरसंहार के हथियारों) या प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्राप्त नहीं हो सके। दोनों नेतागण अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) को शीघ्र अपनाने के लिए सहयोग करने के लिए भी प्रतिबद्ध हुए।
  • दोनों नेताओं मातृभूमि और सार्वजनिक सुरक्षा पर सहयोग पर समझौते में परिकल्पित अपनी प्रतिबद्धताओं की पुनः पुष्टि की और विभिन्न कार्य समूहों को एक कुशल और प्रभावी तरीके से समझौते को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उन्नत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया और प्रासंगिक समझौतों और संयुक्त अनुसंधान अनुदान कार्यक्रम के माध्यम से इसे बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
  • भारत और इज़राइल के बीच लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ाने के महत्व को ध्यान में रखते हुए, दोनों नेताओं ने दोनों दिशाओं में यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा देने की सुविधा प्रदान करने पर सहमति जताई, जिसमें भारत और इजराइल के बीच वायुमार्ग संपर्कों में और वृद्धि का माध्यम भी शामिल है।
  • भारत में यहूदी समुदाय के योगदान और इजरायल में भारतीय मूल के यहूदियों के योगदान की सराहना करते हुए दोनों समाजों को करीब लाने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल में एक भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के खोले जाने की घोषणा की। इस बात का प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्होंने भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में नामित करने के माध्यम से योगाभ्यास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की पहल के इजरायल के मजबूत समर्थन और प्रायोजन को याद किया।
  • दोनों प्रधानमंत्रियों ने इजराइल में भारतीय देखभालकर्ताओं के योगदान को स्वीकार किया और उनके नियमित तरीके से निरंतर आगमन के लिए एक परस्पर सहमति वाली व्यवस्था तक पहुँचने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
  • दोनों प्रधानमंत्रियों ने इजरायल-फिलीस्तीन शांति प्रक्रिया से संबंधित घटनाक्रम पर चर्चा की। उन्होंने इस क्षेत्र में एक स्थायी और टिकाऊ शांति स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने पारस्परिक मान्यता और सुरक्षा व्यवस्था के आधार पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत से शीघ्र हल के लिए अपने समर्थन की पुनः पुष्टि की|
  • यात्रा के दौरान, निम्नलिखित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए:

    i. भारत-इजरायल औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी नवाचार निधि (आई4एफ) की स्थापना के लिए भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, और इजराइल के राष्ट्रीय तकनीकी नवाचार प्राधिकरण, के बीच समझौता ज्ञापन

    ii. भारत में जल संरक्षण के लिए राष्‍ट्रीय अभियान पर भारत गणराज्य के पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय तथा इजराइल के राष्ट्रीय अवसंरचना, ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन

    iii. भारत में राज्य जल उपयोगिता सुधार पर भारत गणराज्य के उत्तर प्रदेश सरकार की उत्तर प्रदेश जल निगम और इजराइल के राष्ट्रीय अवसंरचना, ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन

    iv. भारत-इजरायल विकास सहयोग - कृषि के क्षेत्र में तीन वर्षीय कार्ययोजना 2018-2020

    v. परमाणु घड़ियों में सहयोग के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और इजरायल अंतरिक्ष संस्था (आईएसए) के बीच सहयोग की योजना

    vi. जीईओ-एलईओ प्रकाशीय संपर्क में सहयोग के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और इजरायल अंतरिक्ष संस्था (आईएसए) के बीच समझौता ज्ञापन

    vii. लघु उपग्रहों के लिए विद्युत प्रणोदन में सहयोग के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और इजरायल अंतरिक्ष एजेंसी (आईएसए) के बीच समझौता ज्ञापन

  • प्रधानमंत्री मोदी ने उनके अनुग्रहपूर्ण आतिथ्य के लिए लोगों और इजरायल की सरकार का धन्यवाद किया और प्रधानमंत्री नेतन्याहू को एक पारस्परिक तरीके से सुविधाजनक समय पर भारत आने के लिए एक गर्मजोशी भरा निमंत्रण पेश किया। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया|


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