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साइप्रस के हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स में राष्ट्रपति का वक्तव्य

सितम्बर 03, 2018

साइप्रस के राष्ट्रपति, महामहिम श्री निकोस अनास्तासियादेस
हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स के अध्यक्ष, महामहिम श्री सैलोरिस डिमेट्रिस
हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स के सदस्य गण
देवियों और सज्जनों

कालीमेरा, शुभ प्रभात


  • मित्रों के बीच होने की खुशी का अनुभव कर रहा हूँ। हम भारतीय, हम साइप्रस गणराज्य को केवल एक मित्र ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हमारे सबसे दृढ़ भागीदारों में से एक मानते हैं। इसलिए आपके राष्ट्र के विधायी मंच को संबोधित करना मेरे लिए गर्व का विषय है। यह निमंत्रण भारत के लिए एक सम्मान और मेरे लिए व्यक्तिगत सौभाग्य है।
  • इस भव्य इमारत में प्रवेश करते समय आपके उत्साहपूर्ण स्वागत ने मेरे हृदय का स्पर्श किया है। मैं इस भाव के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स के सदस्यों और अध्यक्ष को धन्यवाद देता हूँ। कल दोपहर यहाँ पहुँचने पर जिस असाधारण उत्साह के साथ मेरा और मेरे प्रतिनिधिमंडल का सत्कार किया गया उसके लिए मैं साइप्रस के राष्ट्रपति के नेतृत्व में साइप्रस सरकार और यहाँ के लोगों को धन्यवाद देता हूँ।
  • यह साइप्रस की मेरी पहली यात्रा है। आपके देश के परिदृश्यों और अनूठी सुंदरता ने मुझे अभिभूत कर दिया है। भूमध्यसागरीय जल में कुछ है और स्पष्ट रूप से यहाँ की हवा में कुछ है, जिसके कारण यहाँ इतनी शांति और आकर्षण है। केवल यहाँ की गर्म धूप ही नहीं, हमारे साझा मूल्य भी मुझे घर की याद दिलाते हैं। जो इस सदन में हर स्थान पर व्याप्त हैं।
  • ये मूल्य और प्रतीक हमारे दोनों देशों द्वारा अपनाये गए लोकतंत्र की विरासत के रूप में मौजूद हैं। वे एक दूसरे के संस्थापकों के परस्पर सम्मान में मौजूद हैं। नई दिल्ली में, एक प्रमुख सड़क का नाम माननीय आर्कबिशप मैकारिऑस के नाम पर रखा गया है। यहां आने से कुछ समय पहले, मैंने पास के पार्क में महात्मा गांधी की एक मूर्ति को श्रद्धांजलि अर्पित की। महात्मा गांधी केवल हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के नेता थे। वे उपनिवेश-विरोधी संघर्षों और हर स्थान पर मानव गरिमा और स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए एक प्रेरणा थे।
  • लगभग 50 वर्ष पहले साइप्रस ने महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी मनाने के लिए दो डाक टिकट जारी किए थे, जिसे हम भारत में अत्यंत प्रेम से स्मरण करते हैं। टिकट संग्राहक अब भी इन टिकट की अभिलाषा करते हैं। यह एक अच्छा संयोग है कि मेरी वर्तमान यात्रा 2 अक्टूबर से कुछ सप्ताह पहले हो रही है, जब हम महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का दो वर्षीय उत्सव मनाने जा रहे हैं। गांधी और आर्कबिशप मैकारिऑस जैसे व्यक्तित्व किसी एक देश से संबंधित नहीं हैं। वे मानवता की विरासत का हिस्सा हैं।

    मित्रों,

  • साइप्रस और भारत के बीच पुराने, गहरे और बहुपक्षीय संबंध हैं। प्राचीन सभ्यताओं के रूप में, हमारे लोग हमारी पहली प्राथमिकता हैं। साइप्रस और भारत के नागरिकों के परस्पर मजबूत संबंध हमारी द्विपक्षीय ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। लोगों के आपसी संपर्कों से, हम आर्थिक और व्यापारिक कड़ियां, शैक्षिक और बौद्धिक जुड़ाव और एक उपयोगी द्विपक्षीय भागीदारी बनाते हैं। निश्चित रूप से, इसके बाद साझा चिंता और शांति, सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति हमारी पारस्परिक प्रतिबद्धता के मुद्दे आते हैं। यह हमें बहु-पार्श्विक क्षेत्र और वैश्विक मामलों में ले जाता है, जहाँ अनिवार्य रूप से हम अपने को एक पक्ष में पाते हैं। वास्तव में, किसी बड़े मुद्दे पर साइप्रस और भारत में शायद ही असहमति है।
  • आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण भारत के अध्यारोही मिशन हे, विकास के फल हमारे लोगों के सभी वर्गों तक पहुंचते हैं। इस प्रक्रिया के लिए, साइप्रस एक विश्वसनीय भागीदार और भारत में सबसे बड़े निवेशकों में से एक के रूप में महत्वपूर्ण है। भारत एक रोमांचक मोड़ पर है और आकर्षक व्यावसायिक अवसर प्रदान करता है। मेरे नई दिल्ली छोड़ने से ठीक पहले जारी आंकड़े बताते हैं कि पिछली तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद 8.2 प्रतिशत बढ़ा है। यह पिछले कुछ वर्षों से जारी उच्च वृद्धि की प्रवृत्ति का हिस्सा है। इसने भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती, बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया है।
  • यह सरकार द्वारा किए गए दृढ़ प्रयासों और नीतिगत पहलों के कारण हुआ है ताकि भारत निवेश के लिए दुनिया के सबसे खुले गंतव्यों में से एक बन सके, यह प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप का अग्रणी केंद्र और व्यापार करने के लिए एक सुविधाजनक स्थान हो। विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 में, भारत की श्रेणी में एक वर्ष में 30 स्थानों का सुधार हुआ है। यह किसी भी देश के लिए सबसे तेज वृद्धि है। पिछले तीन वर्षों में, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में, भारत 24 स्थान ऊपर आया है - 2015 में यह 81वें स्थान पर था और 2018 में यह 57वें स्थान पर है।
  • कर सुधारों ने, भारत की अत्यधिक विस्तृत विनिर्माण और व्यापार क्षमताओं और बड़े घरेलू बाजारों को प्रेरित करने में सहायता की है। माल और सेवा कर के कार्यान्वयन के कारण हमारे सभी अर्थात् 29 राज्यों में समान, सरल और डिजिटल रूप से सक्षम कराधान लागू हुआ है। इसने देश को एक व्यापार प्रणाली में एकीकृत किया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसकी यूरोपीय संघ को एक आम वित्तीय ढांचे में लाने से तुलना की जा सकती है। अन्य उपाय भी किए गए हैं। दिवालियापन और शोध-अक्षमता संहिता के अधिनियमन ने गैर-निष्पादित व्यवसायों से बाहर निकलना आसान बना दिया है। भारत एक स्वच्छतर अर्थव्यवस्था बनाने का भी प्रयास कर रहा है। यह घरेलू और वैश्विक दोनों प्रकार की समस्या है। इस संदर्भ में, आज भारत की वित्तीय खुफिया इकाई और साइप्रस की धन शोधन का सामना करने वाली इकाई के बीच समझौते पर किए गए हस्ताक्षर दोनों देशों के लिए उपयोगी होगा।
  • डिजिटल इंडिया मिशन में बड़े पैमाने पर व्यय और स्पष्ट आकर्षक और व्यावहारिक परियोजनाएं हैं - जो ग्रामीण भारत में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी; स्मार्ट सिटी मिशन, शहरी पुनरुद्धार और बिजली एवं ऊर्जा, राजमार्गों तथा बंदरगाहों और नौवहन जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे रही हैं। भारत वीजा प्रावधानों को सरल बनाने और पर्यटन के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बढ़ाने के तरीकों सहित पर्यटन को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रहा है।
  • इन सभी क्षेत्रों में, हम साइप्रस की साझेदारी की आशा करते हैं। आप निवेशकों के रूप में आ सकते हैं, आप अंशधारकों के रूप में आ सकते हैं, आप खरीदने या बेचने के लिए आ सकते हैं, आप अपनी विशेषज्ञता के साथ आ सकते हैं और आप अपने ब्रांड और अपने कौशल के साथ आ सकते हैं। भारत व्यवसाय के लिए खुला है - और भारत साइप्रस के लिए खुला है। आइए और शीघ्र आइए।

    देवियों और सज्जनों

  • महात्मा गांधी अक्सर एक संगठित, एकीकृत इकाई के रूप में भारतीय गांव की बात करते थे, जहाँ हर व्यक्ति, प्रत्येक परिवार एक परस्पर-जुड़ी श्रृंखला का हिस्सा हो और एक दूसरे की समृद्धि के साथ-साथ समुदाय की समृद्धि में योगदान देता हो। यह सोच भारत की प्राचीन परंपराओं में निहित है। विगत वर्षों और हमारे सभी प्रयासों में, इसने भारत को प्रेरित करना जारी रखा है। जब हम भारत के बारे में सोचते हैं और भारत के लिए कार्य करते हैं, तब हम विश्व के बारे में सोचने और कार्य करने की कोशिश करते हैं। हमारा विश्वास है कि वैश्विक गांव भी एक संगठित, एकीकृत इकाई है, जहाँ हर व्यक्ति, प्रत्येक देश एक परस्परर-जुड़ी श्रृंखला का हिस्सा है और एक-दूसरे की समृद्धि में योगदान देता है।
  • मैं आपको दो उदाहरण दूँगा। सबसे पहले, भारतीय शोध प्रयोगशालाओं और कंपनियों ने औषध निर्माण में प्रभावशाली क्षमता विकसित की है। फिर भी, हम इसे व्यापार के रूप में नहीं देखते। व्यवहार्य उद्योग होने के साथ-साथ, यह वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल में हमारा योगदान है। भारत के उच्च गुणवत्ता वाले भेषजों और टीकों ने कीमतों को कम किया है, स्वास्थ्य देखभाल की लागत में कमी की है और दुनिया भर के समुदायों की सहायता की है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें साइप्रस के साथ अपने अनुभवों और क्षमताओं को साझा करने में हमें प्रसन्नता होगी।
  • दूसरा, इस वर्ष की शुरुआत में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के उद्घाटन सम्मेलन की सह-अध्यक्षता और मेजबानी की। आईएसए का सचिवालय भारत में स्थित है और यह संस्थान, भारत के जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संसाधनों और प्रौद्योगिकियों को संगठित करने के प्रयासों के केंद्र में है। अक्षय ऊर्जा का क्षेत्र बहुत विस्तृत है और यह बढ़ते तापमान और फैलते समुद्रों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण होगा। लंबी तट रेखाओं के साथ-साथ सूरज की धूप से संपन्न भौगोलिक क्षेत्रों के रूप में, साइप्रस और भारत साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। हम आपको आईएसए परिवार का सदस्य बनने के लिए आमंत्रित करते हैं।
  • जिम्मेदार राष्ट्रों के रूप में, साइप्रस और भारत दोनों अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की चुनौतियों के प्रति सचेत हैं। सभ्यताओं के रूप में, हम सहस्राब्दी के खुले समाज और व्यापारिक अर्थव्यवस्था रहे हैं। नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, हमारे व्यापार, हमारे समुद्री मार्ग और वैश्विक समुद्री साझेदारी की निरंतर प्रासंगिकता और अन्य क्षेत्रों में हमारे लिए विश्वास का एक आलेख है। राष्ट्रीय संप्रभुता की नमनीयता और कट्टरतावाद और आतंकवाद को हराने की आवश्यकता हमें एकजुट करती है। इस संबंध में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को अंतिम रूप देने के लिए कहा है और हमें आपके समर्थन पर भरोसा है। मैं विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए साइप्रस को धन्यवाद देता हूँ।

    सदन के सदस्यगण,

  • हमारे देशों के बीच यात्राओं और बातचीत का आदान-प्रदान अक्सर होता है और आगे भी ऐसा होने की आशा है। मैं, साइप्रस आने वाला भारत का चौथा राष्ट्रपति हूँ और केवल एक वर्ष पहले साइप्रस के राष्ट्रपति ने अपनी उपस्थिति से हमें सम्मानित किया था। दो देशों के राष्ट्रपतियों का वर्षों से इन यात्राओं को लगातार जारी रखना कूटनीति में आम बात नहीं है। यह संकेतित करता है कि हमारा संबंध कितना विशेष है। हमारे संसद सदस्यों में भी एक दूसरे से मिलने और लोकतंत्र और विकास की गहराई पर विचार साझा करने की परंपरा है। मैं इसकी सराहना करता हूँ और आप में से प्रत्येक को भारत आने के लिए आमंत्रित करता हूँ। हमें कम से कम उस प्रकार के आतिथ्य का अवसर दें, जो आपने मुझे और मेरे प्रतिनिधिमंडल को और हमारे माध्यम से भारत के लोगों को दिया है।
  • मैं इस सदन को संबोधित करने का मौका देने के लिए आपको एक बार फिर धन्यवाद देता हूँ। मैं आप सभी, और साइप्रस के लोगों के भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।
धन्यवाद!


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