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साइप्रस विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति का व्क्तव्य (04 सितंबर, 2018)

सितम्बर 04, 2018

विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित रेक्टर, डॉ कॉन्स्टेंटिनो क्राइस्टोफाइदस,
अकादमिक समुदाय के विशिष्ट सदस्यगण,
छात्रों,
देवियों और सज्जनों,

आप सभी को कालीमेरा


  • मुझे साइप्रस विश्वविद्यालय में आपसे मिलने का अवसर पाकर प्रसन्नता हो रही है और यह प्रतिबिम्बित करता है कि पूरे राष्ट्र में युवाओं का भविष्य कैसा है। मैं पहली बार साइप्रस आया हूँ और साइप्रस के लोगों के उत्साह से प्रभावित हूँ। हमारे दोनों राष्ट्रों में विशेष संबंध हैं और हमें इस मित्रता पर खुशी और गर्व है।
  • आपके प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने अकादमिक उत्कृष्टता के प्रयास और एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में साइप्रस की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नोबेल पुरस्कार विजेता क्रिस्टोफर पिसाराइदस के काम और इस परिसर में किए जाने वाले अत्याधुनिक शोध वास्तव में प्रेरणादायक हैं।
  • हम तेजी से विकसित हो रही दुनिया में रहते हैं। हम एक दशक में परिवर्तन का जो स्तर देखने की आशा करते है, वह मानव इतिहास में अभूतपूर्व होगा। प्रौद्योगिकी की दुनिया, स्टार्ट-अप, नवाचारों, नए विचारों, डिजिटल सहायक, स्वच्छ ऊर्जा और पास्ता स्ट्रॉ, हमारे दैनिक जीवन को अविश्वसनीय तरीके से दोबारा व्यवस्थित करेंगे। इसका गहन अर्थ यह है कि शायद इतिहास में पहली बार, युवा सीधे और इतने बड़े पैमाने पर व्यापक परिवर्तन लाने में शामिल हैं। हाँ, हमारे युवा औद्योगिक क्रांति में भाग लेते थे, लेकिन आज हम उनकी जो ऊर्जा और भागीदारी देखते हैं उसकी तुलना नहीं की जा सकती।
  • क्या कोई सहसंबंध है या क्या यह केवल एक संयोग है कि आधी वैश्विक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है? हम युवाओं की अगुआई वाली डिजिटल क्रांति देख रहे हैं। यह प्रश्न समय पर छोड़ देते हैं। स्वभाव से युवा खुले विचार वाले होते हैं, और हमेशा नए प्रयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। दुनिया भर में, उन्होंने तकनीक अपनाई है और डिजिटल क्रांति के प्रमुख वाहक हैं। ये परिवर्तन हमारे युवाओं के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं लेकिन इनके साथ कई चुनौतियां भी आती हैं। चूंकि हम छात्रों के बीच हैं, इसलिए आइए हम सबसे पहले यह देखें कि शिक्षा के क्षेत्र को इन घटनाओं द्वारा कैसे प्रभावित किया जा रहा है।
  • आज, शिक्षा के लिए उपलब्ध उपकरणों में तेजी से वृद्धि हुई है। डिजिटल कक्षाओं ने शिक्षा को अधिक समावेशी और संवादात्मक बना दिया है। विभिन्न महाद्वीपों में बैठे छात्र कक्षाओं में जुड़ते हैं। शिक्षा में शामिल विचारों और संस्कृतियों का क्षेत्र कई गुना बढ़ गया है। स्पष्ट है, कि समस्याओं को हल करने में बहुत अधिक कल्पना, सोच और भागीदारी शामिल है। आज रसायन शास्त्रों को सिर्फ किताबों से नहीं बल्कि ध्वनि, दृश्य और डिजिटल प्रयोगों के साथ पढ़ाया जा रहा है। ई-किताबें और शिक्षण ऐप्स ने एक नया अनुभव प्राप्त किया है। मैं समझता हूँ कि आप इस विश्वविद्यालय में ऊर्जा और महासागरों पर उच्चस्तरीय शोध में लगे हैं। अपने सहयोगियों से बात करें और आपको पता चलेगा कि सहयोग की नई दुनिया ने उनके काम में क्या जोड़ा है।
  • वास्तव में, प्रौद्योगिकी ने शिक्षण की एक पूरी नई दुनिया को उन्मोचित किया है। और इसने हमारे कार्यों को पूरा करना भी आसान बना दिया है। आपको प्रौद्योगिकी की तत्कालिकता से दूर नहीं जाना चाहिए। आपको तत्काल परिणाम की आशा के बिना कड़ी मेहनत करनी चाहिए। उत्कृष्टता का अनुसरण करना महत्वपूर्ण कारक होना चाहिए, जो भविष्य की पीढ़ियों के दिमाग को प्रेरित करे।
  • जब हम डिजिटल प्रगति की बात करते हैं, तब हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि चौथी औद्योगिक क्रांति हमें क्या दे सकती है। मेरे लिए, यह विकास और प्रगति के बल का गुणक होगा। हाँ, यह पारंपरिक नौकरियों को बाधित करेगा - लेकिन कृत्रिम बुद्धि, जीवन विज्ञान और ऊर्जा प्रबंधन में प्रगति के साथ, रोजगार के अधिक अवसर बनाए जाएंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म, रोबोटिक्स और डेटा एनालिटिक्स व्यापार प्रक्रियाओं, मानव स्वास्थ्य, सार्वजनिक गतिशीलता के साथ डेयरी उत्पादन, कृषि उत्पादकता और वन संरक्षण पर असर डालने जा रहे हैं।
  • एक पूरा नया जीवन हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। ये परिवर्तन समाजों को भी प्रभावित करेंगे। हमें अपनी पारंपरिक सामाजिक संरचना और परिवार को इन तनावों के विरुद्ध ढालना होगा। एक तरफ, हमारे पास सकारात्मक अनुभव है। प्रौद्योगिकी विकास ने छात्रों को नए-युग का शिक्षक बनाया है। वे रजत पीढ़ी को ऐप्स डाउनलोड करना और नए युग के उत्पादों के आराम का आनंद लेना सिखा रहे हैं।

    प्रिय छात्रों,

  • जैसे-जैसे हम ज्ञान आधारित समाज की तरफ बढ़ते हैं, कौशल और पुनः प्रशिक्षण नीति निर्माण और व्यावसायिक विकास के केंद्र में आएंगे। भारत में, हमने अगले कुछ वर्षों में 150 मिलियन लोगों के कौशल निर्माण के लिए एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया है।
  • हम अपने शैक्षिक संस्थानों के वैश्विक मानकों को प्राप्त करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हाल ही में, विश्व स्तर के शिक्षण और शोध केंद्र बनने में मदद के लिए, 6 शैक्षणिक संस्थानों को, "प्रतिष्ठित संस्थान" की श्रेणी दी गई है। भारत में दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति है, जिसमें हर वर्ष 4000 लोगों को डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित किया जाता है। 2017 में भारतीय स्टार्ट-अप द्वारा दायर पेटेंट 15 गुना बढ़ गए हैं, इनकी संख्या 2016 के 61 से बढ़कर पिछले वर्ष 909 तक पहुँच गई है।
  • बदलती दुनिया वैश्विक समुदाय के बीच अधिक सहयोग चाहती है। इसके मूल्य के बावजूद, अगर भारत के पहाड़ी समुदाय, साइप्रस के ग्रामीण लोग या अफ्रीका के रेगिस्तानी कस्बों को डिजिटल राजमार्ग पर पीछे छोड़ दिया गया तो डिजिटल कक्षा शायद ही सभी को शिक्षा का अवसर प्रदान कर सकती है। हम जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी की दुनिया की तरफ बढ़ते हैं, हमें समुदायों और देशों के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के फल तक पहुंचने के लिए ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म बनाने होंगे। प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती के लिए पहुंच, समानता और समावेशन को महत्वपूर्ण होना चाहिए।

    देवियों और सज्जनों,

  • इस संदर्भ में भारतीय अनुभव प्रासंगिक है। भारत सरकार डिजिटल पहुंच के माध्यम से सशक्तिकरण के उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है। "डिजिटल इंडिया" दुनिया का सबसे बड़ा, प्रौद्योगिकी-नेतृत्व वाला परिवर्तनकारी कार्यक्रम है, जो हमारे नागरिकों के लिए सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाने के मार्ग को प्रशस्त कर रहा है। मैं कुछ उदाहरण साझा करना चाहता हूँ कि डिजिटल तकनीक भारत में "जीवन की आसानी" के लिए किस तरह से एक महान सुविधा बन रही है:
    • आज, एक किसान एक बटन दबा कर मौसम और वर्षा की जानकारी तक पहुंच सकता है और तदनुसार अपने फसल विकल्पों का चयन कर सकता है। इसलिए, डिजिटल तकनीक कृषि आय में वृद्धि करने में योगदान दे रही है।
    • एक छोटा उद्यमी सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर पंजीकरण करा सकता है और माल की आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बोली लगा सकता है। इससे सार्वजनिक धन की दक्षता और मूल्य बढ़ता है।
    • हमारे छात्र राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार की सेवाओं का लाभ उठाते हैं। इसने उनके प्रमाणपत्रों और पुरस्कारों तक आसान पहुंच की अनुमति दी है। स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेश लेने की प्रक्रिया सरल हो गई है।
  • और ऐसा नहीं है कि हमने इन प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों को केवल अपने लिए विकसित किया है।. हम इन्हें उन लोगों के साथ साझा करने के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं, जिन्हें उनकी आवश्यकता है। इस प्रयास में, हम अपने प्राचीन दर्शन - "वसुधैव कुटुमबकम", अर्थात्, पूरी दुनिया एक परिवार है, द्वारा निर्देशित हैं। हम अपनी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मेडागास्कर में ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध करा रहे हैं और दुनिया भर में बहुत से लोगों को टेली-मेडिसिन के लाभ प्रदान कर रहे हैं।
  • हमारे ऊपर की खुली जगह के साथ, हमारे महासागरों की गहराई में भी अत्यधिक संभावनाएं है। असीमित संभावनाएं जिनका हम सागर के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखते हुए, आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और कार्यों के लिए उपयोग कर सकते हैं। सदियों से साइप्रस एक समुद्र निर्भर राष्ट्र रहा है। विज्ञान, स्थायित्व और भोजन के लिए, हमारे महासागरों और इसकी गहराई का पता लगाने के लिए समय आ गया है।

    प्रिय छात्रों,

  • अब तक, मैंने हमारे सामने प्रस्तुत अवसरों की बात की है। अब हम कुछ चुनौतियों की चर्चा करते हैं। जैसा कि मैंने पहले कहा था, दुनिया की आधी आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है। भारत में, हमारे 65% लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। यह जनसांख्यिकीय प्रवृत्ति निरंतर विकास की मांग करती है ताकि हमारे युवा लोगों के पास पर्याप्त नौकरियां हों। इसलिए, वैश्विक विकास इंजन को दौड़ना जारी रखना चाहिए और गति के साथ चलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मार्ग को, अधिक व्यापार, वित्त और उद्देश्यपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग के स्वतंत्र प्रवाह द्वारा परिभाषित किया जाना चाहिए।
  • हालांकि, आपके लिए जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय तनाव का प्रबंधन करना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। वर्तमान पीढ़ी के सामने, मौसम के बदलाव, अचानक बाढ़ और जंगल की आग में परिवर्तनशीलता से निपटने की चुनौती है। हमारी भविष्य की पीढ़ियों के लिए यह कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। समस्या साधारण नहीं है। विकास को स्थिरता से जोड़कर, वनों को संरक्षित करके, पारिस्थितिकी का सम्मान करके और स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को अपनाने के द्वारा, हम जलवायु परिवर्तन का सामना कर सकते हैं। इस दिशा में, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से नेतृत्व किया है। दो प्राचीन संस्कृतियों के रूप में, भारत और साइप्रस सदियों से प्रकृति के समन्वय में रहते आए हैं। यह समय हमारे लिए अपनी स्थायी प्रथाओं को, हमारे आधुनिक जीवन में वापस लाने का समय है। अतीत के ज्ञान के साथ संयुक्त नए युग की प्रौद्योगिकी हमारी कई पारिस्थितिक समस्याओं को हल कर सकती है।
  • बिग डेटा की दुनिया के अपने निजी सुरक्षा जोखिम हैं। हम अपनी अर्थव्यवस्था, अपने स्वास्थ्य और अपनी शिक्षा को ऑनलाइन डालते समय, किसी भी प्रकार की भेद्यता का जोखिम नहीं उठा सकते। मैं, आने वाले समय में साइबर सुरक्षा से निपटने के लिए अधिक सक्रिय वैश्विक सहयोग और समन्वय की भविष्यवाणी करता हूँ।

    देवियों और सज्जनों,

  • हमारे दोनों देशों में एक दूसरे के नेताओं का बहुत सम्मान है। भारत में आर्कबिशप मैकारिऑस का सबसे अधिक सम्मान किया जाता है। उन्होंने आपको स्वतंत्रता और हमें गर्व दिया। एक महीने से भी कम समय में, 2 अक्टूबर को, हम महात्मा गांधी के 150वें जन्मदिन का उत्सव मनाएंगे। शांति, करुणा और न्याय का उनका संदेश, हमेशा हमारा मार्गदर्शन कर सकता है क्योंकि हम अपने लिए और दूसरों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाना चाहते हैं। मैं जल्द ही आपके परिसर में हमारे महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा का अनावरण करूँगा। मैं यह उद्धृत करके अपना वक्तव्य समाप्त करना चाहता हूँ कि उन्होंने कहा है - "वह शिक्षा, श्रेष्ठ शिक्षा है जो हमें केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को सभी अस्तित्वों के अनुरूप बना देती है"। जब हम प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय कार्रवाई की नई दुनिया में अपना संतुलन खोजने का प्रयास करते हैं तो ज्ञान के ये शब्द आज अधिक प्रासंगिक हैं।
  • मुझे अपने विचारों को आपके साथ साझा करने का अवसर देने के लिए मैं एक बार फिर साइप्रस विश्वविद्यालय को धन्यवाद देता हूँ। साइप्रस के युवा इस देश के भविष्य के नेता हैं। आप आगे बढ़ें और अपने देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएँ। मैं आप सभी के अपने व्यवसाय में सफल होने की कामना करता हूँ।
ऎफखरिस्तो ! धन्यवाद।


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