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राष्ट्रपति की साइप्रस, बुल्गारिया और चेक गणराज्य की राजकीय यात्रा पर सचिव (पश्चिम) की मीडिया वार्ता का प्रतिलेख (08 सितंबर, 2018)

सितम्बर 10, 2018

संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप), डॉ. अंजू कुमार: नमस्कार मित्रों, राष्ट्रपति की 02 सितंबर को साइप्रस से आरंभ होकर बुल्गारिया तथा चेक गणराज्य की यात्रा के बाद समाप्त होने वाली, तीन राष्ट्रों की यात्रा पर प्रेस वार्ता में आपका स्वागत है। इस संक्षिप्त विवरण के लिए आज विदेश मंत्रालय से सचिव (पश्चिम) श्रीमती रुचि घनश्याम और राष्ट्रपति सचिवालय के प्रेस सचिव श्री अशोक मलिक हमारे साथ हैं। वे आपको कार्यक्रम के विभिन्न विशेष घटकों और परिणामों, मूर्त और अमूर्त परिणामों और यात्रा के लाभों के बारे में बताएंगे। तो अब मैं सचिव (पश्चिम) को आमंत्रित करती हूँ।

सचिव (पश्चिम), श्रीमती रुचि घनश्याम: धन्यवाद डॉ. अंजू, जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है कि माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने 2 सितंबर, 2018 से साइप्रस, बुल्गारिया और चेक गणराज्य के तीन राष्ट्रों की यात्रा की।

राष्ट्रपति के साथ कृषि और किसान कल्याण एवं पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री पुरुषोत्तम रुपल जी और संसद के माननीय सदस्य श्री सुनील कुमार सिंह और श्री राम शाकल तथा अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी इस यात्रा पर गये थे।

दैनिक प्रेस रिपोर्ट पहले ही दी जा चुकी है, इसलिए मुझे लगता है कि आप लोग इन यात्राओं में राष्ट्रपति के कार्यक्रम के विभिन्न महत्वपूर्ण तत्वों से पहले ही परिचित हो चुके हैं। तो हम अभी इसे छोड़ देंगे।

हम साइप्रस के साथ आरंभ करते हैं जो राष्ट्रपति की यात्रा का पहला चरण था। यह यात्रा बहुत सफल रही, इससे हमारे दोनों देशों के बीच समय परीक्षित संबंधों को मजबूत करने में सहायता मिली। पिछले वर्ष साइप्रस के राष्ट्रपति ने भारत की राजकीय यात्रा थी और यह हमारे राष्ट्रपति द्वारा वहाँ की राजकीय यात्रा थी।

यह यात्रा विशेष रूप से दो परिणामों के लिए महत्वपूर्ण थी। उनमें से एक भारत की वित्तीय खुफिया इकाई और साइप्रस की धन शोधन का मुकाबला करने वाली इकाई के बीच एक समझौता ज्ञापन है। आशा है कि यह निवेश के पार-प्रवाह की सुविधा के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करेगा। आशा की जाती है कि भारत और साइप्रस के बीच एक बहुत ही उत्पादक संबंध, निवेश संबंधों को और तेज करेगा। जैसा कि आप अच्छी तरह से जानते हैं साइप्रस भारत में आठवां सबसे बड़ा निवेशक है।

पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन एक अन्य रोचक समझौता ज्ञापन है और हमें आशा है कि इससे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी अन्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग गहरा होगा, जिनका सामना पूरी दुनिया और हमारे दोनों देश करते हैं।

वित्तीय सेवाओं और निवेश बैंकिंग में साइप्रस की विशिष्ट विशेषज्ञता को देखते हुए, दोनों राष्ट्रपतियों का मानना था कि हमारी निवेश साझेदारी को सुदृढ़ करने से दोनों देशों को पारस्परिक लाभ होगा। साइप्रस की यात्रा का एक विशेष तत्व है, साइप्रस की संसद का असाधारण सत्र आयोजित किया गया जिसे हमारे राष्ट्रपति ने संबोधित किया था, यह साइप्रस द्वारा माननीय राष्ट्रपति जी के लिए एक विशेष भाव का संकेत था। मुझे लगता है कि, साइप्रस विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए व्याख्यान के साथ राष्ट्रपति के कार्यक्रम में एक और आयाम जोड़ा गया।

बुल्गारिया में एक विशेष संकेत के रूप में बुल्गारिया के राष्ट्रपति और प्रथम महिला ने सोफिया में होटल में पहुँचने पर हमारे राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का हार्दिक स्वागत किया और यह एक बहुत ही अच्छा संकेत था जो हमारे दोनों राष्ट्रपतियों के बीच के विशिष्ट संबंधों को दर्शाता था। दोनों नेताओं के बीच हुए विचार विनिमय में दोनों नेताओं के बीच के अच्छे संबंधों को समझा जा सकता था और यह पूरी यात्रा में दिखाई दे रहा था।

इस यात्रा से कई परिणाम प्राप्त हुए है, वास्तव में एक बहुत ही उत्पादक और सफल यात्रा रही। हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों में से एक 2018 - 2021 के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और बुल्गारिया के बीच सहयोग के कार्यक्रम पर था। यह इस अवधि में दोनों पक्षों द्वारा की जाने वाली संयुक्त परियोजना पहलों और शोध की रूपरेखा निर्दिष्ट करता है।

परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर सहयोग, एक अन्य लाभकारी समझौता ज्ञापन है। यह भारत के परमाणु ऊर्जा के वैश्विक केंद्र और बल्गेरियाई एकेडमी ऑफ साइंसेज के परमाणु अनुसंधान और परमाणु ऊर्जा संस्थान के बीच सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन था। दोनों पक्ष ज्ञान का आदान-प्रदान करेंगे, संयुक्त अनुसंधान करेंगे और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए पारस्परिक क्षमताओं का निर्माण करेंगे।

पर्यटन में सहयोग पर एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं और इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने और भारत और बुल्गारिया के लोगों के बीच के समृद्ध संबंधों को मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी।

इस यात्रा का एक और दिलचस्प परिणाम सांस्कृतिक अनुसंधान की भारतीय परिषद (आईसीसीआर) और सोफिया विश्वविद्यालय के बीच हिंदी भाषा के लिए आईसीसीआर चेयर की स्थापना पर एक समझौता ज्ञापन था। यह इंडोलॉजी की परंपरा को जारी रखने में सहायता करेगा, जिसे पिछले 35 वर्षों से सोफिया विश्वविद्यालय द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। हाशिये पर निवेश भारत और निवेश बुल्गारिया के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और इससे दोनों पक्षों के निवेश की संभावनाओं का पता लगाने में सहायता मिलेगी।

दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध को विकसित करने के लिए आयोजित एक व्यापार मंच को संबोधित किया गया था जो इस कार्यक्रम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस व्यापार मंच में भारतीय व्यावसाय जगत के 60 लोगों का एक मजबूत व्यापार प्रतिनिधिमंडल और लगभग 250 बल्गेरियाई व्यापार प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम को दोनों पक्षों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना गया था। हमारे राष्ट्रपति और बल्गेरियाई राष्ट्रपति दोनों ने इस व्यापार मंच में भाग लिया था। मुझे लगता है कि यह हमारे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने में सहायता करेगा।

बुल्गारिया की यात्रा की एक दिलचस्प विशेषता यह थी कि शिक्षक दिवस को माननीय राष्ट्रपति सोफिया विश्वविद्यालय में थे, जहां उन्होंने 5 सितंबर को छात्रों को संबोधित किया और शिक्षा और साझा समृद्धि के साधन के रूप में शिक्षा पर बात की। छात्रों ने इस महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रपति के दृष्टिकोण के प्रति बहुत उत्साह दिखाया। इंडोलॉजी विभाग और विश्वविद्यालय के छात्रों ने माननीय राष्ट्रपति का चार भाषाओं अर्थात् हिंदी, संस्कृत, बल्गेरियाई और अंग्रेजी में स्वागत किया। इससे बुल्गारिया के लोगों में भारत और भारतीय संस्कृति तथा भारतीय भाषाओं में रुचि का स्तर दिखाई दिया।

अगले दिन, बल्गेरियाई प्रधान मंत्री ने भी हमारे राष्ट्रपति से मुलाकात की। इस यात्रा की एक अन्य बात ने यात्रा को लगभग अनौपचारिक बना दिया था। दोनों राष्ट्रपति बुल्गारिया के एक स्टूडियो में चल रही एक बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग के सेट पर गए थे। यह फिल्म उद्योग के लिए एक सकारात्मक संदेश था। इसने कलाकारों और दल के अन्य सदस्यों को नेताओं से बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया और लोगों के बीच पर्यटन की प्रक्रिया को बढ़ावा और समर्थन देने में फिल्मों की भूमिका को उजागर किया।

इस यात्रा के अंत में एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया था और वह विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

चेक गणराज्य राष्ट्रपति की यात्रा का अंतिम चरण था। अन्य दो यात्राओं की तरह, राष्ट्रपति ने, निश्चित रूप से, एक स्वागत समारोह में भारतीय समुदाय से भेंट की और इस स्वागत समारोह में देवाशीश चौधरी द्वारा संचालित चेक फिलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा द्वारा बजाया गया संगीत और दो आश्चर्यजनक आइटम, बोहेमियन क्वार्टेट के गाए लोकप्रिय हिंदी फिल्मों के गाने, दो बहुत ही रोचक और नई विशेषताएं थी। मुझे लगता है कि उन्होंने सभी को आश्चर्यचकित कर लिया और कमरे में मौजूद सभी लोगों के, कम से कम मेरे हृदय को जीत लिया।

राष्ट्रपति की अपने समकक्ष राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमान के साथ आधिकारिक बैठक हुई, उन्होंने उनका औपचारिक स्वागत किया। मुझे लगता है कि इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण परिणाम चेक गणराज्य सरकार का उच्च कुशल भारतीय श्रमिकों और व्यापार अधिकारियों की गतिशीलता के लिए, विशेष रूप से एक लंबी अवधि के आधार पर चेक गणराज्य में काम करने और रहने के लिए, एक वर्ष में 500 वीजा तक सीमित करने का प्रस्ताव था। हम आशा करते हैं, अक्टूबर 2018 में नई प्रक्रिया प्रभावी होगी। इसलिए यह इस यात्रा का एक बहुत ही खास परिणाम था।

यात्रा के दौरान और यात्रा के हाशिये पर कई समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए थे, उनमें से एक भारत की वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और चेक अकादमी ऑफ साइंसेज के बीच सहयोग है, जो दोनों संस्थानों को संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान उपक्रमों की संभावनाओं का पता लगाने में सक्षम करेगा। भारतीय पक्ष से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में इंडो-चेक परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए एक कार्य योजना और राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा छूट का समझौता शामिल है।

ईएलआई बीमलाइन और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के बीच लेजर प्रौद्योगिकी में सहयोग के लिए एसमझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। ईएलआई बीमलाइन एक अत्याधुनिक लेजर शोध संस्थान है जो नैनो-विज्ञान, भौतिकी और जीवन विज्ञान में नई खोज कर सकता है।

इस यात्रा के हाशिये पर हस्ताक्षरित एक अन्य समझौता ज्ञापन हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और चेक जीवन विज्ञान विश्वविद्यालय के बीच सहयोग है। राष्ट्रपति ने चार्ल्स विश्वविद्यालय का दौरा किया और चेक इंडोलॉजिस्टों से भेंट की। यह एक बहुत ही खास यात्रा थी क्योंकि चार्ल्स विश्वविद्यालय 1850 के बाद से इंडोलॉजी के सबसे पुराने केंद्रों में से एक है और इसके द्वारा संस्कृत अध्ययन आयोजित किए गए हैं। चार छात्रों ने भारतीय भाषाओं- हिंदी, बंगाली, तमिल और संस्कृत में राष्ट्रपति का स्वागत किया, इसलिए यह विश्वविद्यालय द्वारा हमारे राष्ट्रपति का एक विशेष स्वागत था ।

तीनों यात्राएं अत्यधिक उत्पादक, बहुत ही मौलिक थीं और और इनसे अच्छे परिणाम हुए। मध्य यूरोप में ये तीनों देश हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण देश हैं। इन तीनों देशों के साथ हमारे केवल राजनीतिक स्तर पर ही नहीं बल्कि लोगों तथा सांस्कृतिक स्तर पर भी, बहुत ही मित्रतापूर्ण, घनिष्ठ संबंध रहे हैं और माननीय राष्ट्रपति की इन देशों की यात्रा ने इन संबंधों को मजबूत करने और आने वाले वर्षों में आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा, नई दृष्टि और नए नतीजे उपलब्ध कराने में सहायता की है। इसके साथ ही मैं अशोक जी से आपको अधिक जानकारी देने के लिए अनुरोध करती हूँ।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अशोक मलिक: बहुत-बहुत धन्यवाद महोदया। सचिव द्वारा तीन देशों की यात्रा के बारे में बहुत व्यापक ब्रीफिंग के बाद इसमें जोड़ने के लिए बहुत कम बाकी बचा है।

जैसा कि आप जानते हैं, यह माननीय राष्ट्रपति जी के दूसरे वर्ष में उनकी पहली यात्रा है। इस यात्रा के बाद वे 13 देशों की यात्रा पूरी कर लेंगे। मैं कहूँगा कि यह शायद सबसे फलप्रसु यात्राओं में से एक रही है, जबकि पिछली सभी यात्राओं से ठोस परिणाम हुए हैं, पर यह यात्रा वास्तव में समृद्ध रही है।

पिछले वर्ष, राष्ट्रपति जी ने अपना पद संभालने के बाद निर्देश दिया था कि वे चाहते हैं कि उनकी राजकीय यात्राएँ वास्तविक परिणाम और समझौते और लाभ पैदा करने के लिए हों, वे केवल औपचारिक नहीं होनी चाहिए। मुझे कहना होगा कि यह निश्चित रूप से विदेश मंत्रालय के मेरे सहयोगियों के सहयोग और कड़ी मेहनत से संभव हुआ है और हम राष्ट्रपति जी के निर्देशों को पूरा करने में सक्षम हुए हैं।

जैसा कि सचिव महोदया ने बताया कि यदि आप तीनों देशों की यात्राओ को देखते हैं तो लगभग 12 समझौते हुए हैं। राष्ट्रपति जी ने इन समझौतों में और नेताओं के साथ बातचीत में भाग लिया, जिन विषयों पर चर्चा की गई थी उनकी पांच व्यापक श्रेणियां थीं। एक निश्चित रूप से पहले से ही मजबूत है जो तीन देशों और भारत यानी द्विपक्षीय स्तर पर और बहुपक्षीय रूप से राजनीतिक संबंध से जुड़ा है।

आतंकवाद से संबंधित मुद्दे, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार और उसमें भारत का स्थान तथा एनएसजी की भारत की सदस्यता पर चर्चा हुई और हम व्यापक रूप से उसी पृष्ठ पर थे। जैसा कि सचिव महोदया ने बताया, दूसरा, लोगों के अपसी संपर्क, सांस्कृतिक जुड़ाव के बारे में था, इन तथ्यों पर जोर दिया गया था कि राष्ट्रपति ने तीनों देशों में विश्वविद्यालयों को संबोधित किया या उनका दौरा किया था, हम आपको हमारे संबंध के उस पक्ष के बारे में कुछ बताएंगे।

तीसरा, व्यापार और निवेश, जो तीनों यात्राओं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा था। निवेश प्रवाह को तर्कसंगत बनाने और साफ करने तथा साइप्रस के साथ धन शोधन की जांच करने से संबंधित एक समझौता हुआ था। बुल्गारिया और चेक गणराज्य में दो व्यावसायिक मंच थे जिन्हें राष्ट्रपति ने व्यापार समझौते के लिए संबोधित किया और व्यापार से व्यापार के बीच मूर्त समझौते हुए है।

विशेष रूप से रक्षा जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों और प्रौद्योगिकी सहयोग पर एक वार्तालाप और विचार-विमर्श किया गया था। लेजर प्रौद्योगिकी जहां राष्ट्रपति ने आज सुबह, ईएलआई बीमलाइन केंद्र में और निश्चित रूप से बुल्गारिया के मामले में असैनिक परमाणु में एक बहुत ही अच्छी ब्रीफिंग प्राप्त की और चेक गणराज्य के साथ बातचीत शुरू हो गई है।

अंत में स्थायित्व का मुद्दा, जो राष्ट्रपति के हृदय के बहुत करीब है, यह कुछ ऐसा है जिसके द्वारा भारत सरकार भी संचालित होती है। साइप्रस के साथ पर्यावरण से संबंधित एक समझौता हुआ है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और चेक गणराज्य के एक विश्वविद्यालय के बीच अपशिष्ट से ऊर्जा समझौता हुआ और राष्ट्रपति जी ने अपनी सभी वर्ताओं में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में लचीलेपन की बात कही। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन एक ऐसी संस्था है जिसे भारत ने दुनिया में बढ़ावा दिया है और इसमें राष्ट्रपति जी की व्यक्तिगत रुचि है।

कुल मिलाकर यह माननीय राष्ट्रपति जी और हम सभी के लिए एक लंबी और थकाऊ यात्रा रही है, लेकिन हम सभी बहुत खुश हैं कि हमें बहुत अच्छे परिणाम मिले हैं। धन्यवाद।

संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप), डॉ अंजू कुमार:
इसके साथ ही हमारी ब्रीफिंग समाप्त होती है। यदि आप कोई प्रश्न करना चाहें तो कर सकते हैं।

प्रश्न: क्या आप चेक गणराज्य के साथ भारत के असैनिक परमाणु समझौते के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं, यह वास्तव में कैसे काम करेगा?

संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप), डॉ. अंजू कुमार: हम परमाणु ऊर्जा भागीदारी के वैश्विक केंद्र के साथ हैं, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा के लिए परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और हमारी क्षमता बढ़ाने के संबंध में विचार किया गया है।

बुल्गारिया के साथ हमने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और चेक गणराज्य के साथ हम आगे बढ़ने की प्रक्रिया में हैं और हम उनसे फिर बातचीत कर रहे हैं।

जानकारी के आदान-प्रदान, ज्ञान के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान के माध्यम से पारस्परिक क्षमता का निर्माण करने के लिए, संयुक्त सेमिनार और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करने का विचार है ताकि हम परमाणु ऊर्जा के अंतिम उपयोग को समझने की अपनी क्षमता को और बढ़ा सकें। हम यह समझ सकें कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम किन सर्वोत्तम तकनीकों को अधिगृहित कर सकते हैं।

प्रश्न: आम तौर पर जब हम संयुक्त वक्तव्य और अन्य चीजों पर आते हैं, तो पाकिस्तान और अन्य स्थानों के आतंकवादी समूहों को नामित नहीं किया गया है, जबकि हमें आशा थी कि इन्हें नामित किया जाएगा, तो इसका कारण क्या है?

सचिव (पश्चिम), श्रीमती रुचि घनश्याम: यदि आप आशा कर रहे थे तो आपको हमें पहले बताना चाहिए था। तीनों देश आतंकवाद पर भारत के दृष्टिकोण के बहुत दृढ़ता से समर्थक हैं। असल में मुझे नहीं पता कि कि वे भारत की स्थिति का समर्थन करते हैं या यह उनका अपना भी विचार है। वे बहुत दृढ़ता से उस शिविर में हैं, जो आतंकवाद का विरोध करते हैं और आतंकवाद की निंदा करते हैं।

तीनों देश यूरोपीय संघ के सदस्य हैं और यूरोपीय संघ के पास संगठित आतंकवादी संगठनों की एक सूची है। जब भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन हुआ था तब संयुक्त वक्तव्य में इसे जोड़ा गया था और कुछ समूहों को उस संयुक्त वक्तव्य में सूचीबद्ध किया गया था।

इसलिए जब यूरोपीय संघ को आतंकवादी संगठनों की सूची मिली है तो यूरोपीय संघ के सभी सदस्य स्वचालित रूप से उसमें शामिल हैं। तो ये विशेष संयुक्त बयान अन्य यात्राओं के संयुक्त वक्तव्यों की तरह व्यापक या विस्तारित नहीं थे। इसलिए मुझे नहीं लगता कि आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी देश द्वारा किसी भी विशेष आतंकवादी संगठन को नामित न करने को किसी भी देश द्वारा समर्थन की कमी के संकेत के रूप में लिया जाना चाहिए।

आतंकवाद के मुद्दे पर तीनों देशों ने स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए हैं और मुझे नहीं लगता कि उस पर उनके दृष्टिकोण पर कोई संदेह किया जाना चाहिए।

संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप), डॉ. अंजू कुमार: उन्होंने, उन तीनों ने हमारे सीसीआईटी सम्मेलन का समर्थन किया है।

प्रश्न: मेक इन इंडिया भारत सरकार का बहुत एम्बिसियस स्कीम है। तीनों देश की विजिट में निवेश की कितनी संभावनाएँ तलाशी गईं?

(मेक इन इंडिया भारत की एक बहुत ही महत्वाकांक्षी परियोजना है। इन तीन यात्राओं के दौरान इसमें निवेश के लिए किन मार्गों का पता लगाया गया?)

सचिव (पश्चिम), श्रीमती रुचि घनश्याम: देखिए भारत और साइप्रस के बीच निवेश का एक बहत महत्वपूर्ण रुझान तो है जो कि मैंने आपको पहले ही बताया कि साइप्रस निवेश की दृष्टि से देखें तो आठवें नंबर पर आता है।

बाकि दोनों जो देश हैं उनके यहाँ भी तकनीक उपलब्ध है, जैसे अगर चेक रिपब्लिक को देखा जाय से राष्ट्रपति जी ने भी अपन भाषण में कहा कि बाटा कंपनी एक ऐसी कंपनी है जिसको भारत के आम आदमी शायद भारत की ही कंपनी मानते हैं क्योंकि शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने स्कूल जाते वक्त बाटा के जूते ना पहने हों। और आज तो उन्होंने कहा कि उन्होंने भी स्कूल जाते वक्त उन्होंने भी बाटा के जूते पहने थे। तो वो भी एक चेक कंपनी थी जिसने भारत में निवेश किया था।

तो अभी हम देखें तो निवेश की संभावनायें तो बहुत हैं लेकिन उनको हाइलाइट कैसे किया जाए, उनको मैटिरियलाइज कैसे किया जाए, विज़िट के दौरान इस तरह की बातें होती हैं और इस तरह की संभावनायें खुलती हैं। जब बिजनेस डेलीगेशन आते हैं और आपस में लोगों के साथ मिलते हैं, तो वो नई संभावनायें खोजते हैं और उन्हें वापस ले जाते हैं और उन्हें फिर फ्रुटीफाई करने की कोशिश करते हैं।

उसको क्वांटिफाई करना तो ऐसी संभावना ही है क्योंकि मैं हवा में कोई भी फिगर छोड़ना चाहूँगी नहीं इसके लिए लेकिन जब ऐसी पॉजिटिव विज़िट्स होती हैं जिसमें एटमॉस्फेयर इतना पॉजिटिव होता है, इतने अच्छे बिजनेस डिस्कशन्स हुए हैं, बिजनेस कंपनीज बड़ी संख्या में दोनों तरफ से भाग ली हैं और संभावनायें असीमित हैं।

भारत में एक नए किस्म का विस्तार हो रहा है, केवल मेक इन इंडिया ही स्कीम नहीं है, भारत में कई किस्म के कानून बन रहे हैं, पुराने कानून को निकाला जा रहा है, मार्केट खोलने की जो स्कीम्स है सरकार की उनके बारे में राष्ट्रपति जी ने अपने विज़िट्स में बखान किया। इन सब चीजों से भारत का एक नया परिचय देने का हमें मौका मिला और हमारी बिजनेस कंपनी को उनकी बिजनेस कंपनीज के साथ बात करने का मौका मिला जिससे फ्यूचर में काफी पॉजिटिव रिजल्ट्स आएंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

(देखें, जैसा कि आप जानते हैं कि भारत और साइप्रस के निवेश के बारे में बहुत सकारात्मक झुकाव है, जिसे मैंने पहले बताया था कि साइप्रस भारत का आठवां सबसे बड़ा निवेशक है।

अन्य दो देशों के बारे में बात करते हुए, उनके पास प्रौद्योगिकियां भी हैं। यदि हम चेक गणराज्य के बारे में बात करते हैं तो माननीय राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भी उल्लेख किया कि बाटा कंपनी ऐसी कंपनी है जिसे सामान्य भारतीय केवल एक भारतीय कंपनी मानते हैं क्योंकि शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने अपने स्कूल के समय बाटा जूते नहीं पहने थे। उन्होंने खुद कहा कि वे स्कूल में बाटा जूते पहनते थे। तो यह भी एक चेक कंपनी है जिसने भारत में निवेश किया है।

इसलिए हम देखते हैं कि निवेश के बहुत सारे अवसर हैं लेकिन उन्हें कैसे उजागर करें और उन्हें मूर्त रूप कैसे दें। इन यात्राओं के दौरान की जाने वाली चर्चा इस तरह के अवसरों को खोलती है। जब व्यापार प्रतिनिधिमंडल जाते हैं और वे लोगों के साथ चर्चा करते हैं और नए अवसरों की पहचान करते हैं, तो वे उन्हें अपने साथ ले जाते हैं और उन्हें साकार करने की कोशिश करते हैं।

उन्हें मापना संभव नहीं है और मैं आपके लिए किसी भी आंकड़े को उद्धृत नहीं करना चाहती हूँ, लेकिन जब ऐसी सकारात्मक यात्राओं का आयोजन किया जाता है, तो वातावरण इतना सकारात्मक रहा है और इस तरह की अच्छी व्यापारिक चर्चाएं हुई हैं, दोनों तरफ से, बहुत से व्यवसायिक लोगों ने भाग लिया है तो संभावनाएं असीमित हैं।

भारत में एक नए प्रकार का विस्तार हो रहा है। केवल मेक इन इंडिया ही नहीं है। बहुत से नए कानून लागू किए जा रहे हैं और पुरानी और पुरातन चीजों को हटाया जा रहा है।माननीय राष्ट्रपति ने अपने विचार-विमर्श में भारत में खोले जा रहे नए बाजारों के बारे में बात की है। इन सभी ने एक नया भारत शुरू करने की इजाजत दी है और इसने भारतीय व्यापार समुदाय को इन देशों के व्यापार समुदाय से मिलने का अवसर प्रदान किया है और हम मानते हैं कि आने वाले भविष्य में बहुत सारे सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।)

प्रश्न: भारत लंबे समय से न्यूक्लीयर सप्लायर ग्रुप का मेम्बरशिप चाहता है। इन तीनों मुल्क ने क्या कमिटमेंट किया और बाकी के जो कंट्री हैं, क्या उनके लिए भी कुछ टास्क आप लोगों ने दिया।

(भारत लंबे समय से परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता मांग रहा है। इन देशों द्वारा क्या प्रतिबद्धताएं की गई हैं और क्या आपने उन्हें इसके बारे में कोई कार्य दिया है?)

सचिव (पश्चिम), श्रीमती रुचि घनश्याम: देखिए ऐसा है कि ये तीनों ही देश भारत को सपोर्ट करते हैं और उन्होंने स्ट्रांगली भारत को, इस विज़िट के दौरान भी अपना सपोर्ट दिया है।

किसी को कोई टास्क देना डिप्लोमेसी में एप्रोप्रियेट नहीं होता है पर जो मित्र हैं आपके, जो किसी इश्यू पर आपको सपोर्ट कर रहे हैं और ओपेनली अपना सपोर्ट जाहिर कर रहे हैं, वो तो एक बहुत बड़ी चीज अपने आप में ही है।

(आप देखते हैं कि ये देश एनएसजी सदस्यता पर भारत का समर्थन करते हैं और उन्होंने इस यात्रा में भी अपना समर्थन दोहराया है।

कूटनीति में कार्य सौंपना उचित नहीं है, लेकिन यदि आपके मित्र किसी भी मुद्दे पर आपका समर्थन कर रहे हैं और वे इसे खुले तौर पर कर रहे हैं तो यह अपन आप एक बड़ी बात है।)

प्रश्न: रक्षाक्षेत्र में समझौतों पर राष्ट्रपति जी ने क्या बात की और उसके लिए विशेष कर चेक गणराज्य से क्या प्रयास हुए हैं, क्या संभावना आपको लग रही है?

(विशेष रूप से चेक गणराज्य के साथ रक्षा समझौतों पर क्या चर्चा हुई थी, आपके अनुसार इस क्षेत्र में क्या संभावनाएं हैं?)

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अशोक मलिक: देखिए इंडियन डिफेंस रिक्वायरमेंट्स के बारे में आपको पता ही है, मेक इन इंडिया का ये कार्यक्रम है।

राष्ट्रपति जी ने बुल्गारिया में भी और चेक गणराज्य में जो टेकनोलॉजी व्यावसायीकरण और स्केल अप हो सकती है, फॉर म्युचुअल बेनिफिट, उसकी बात की। बिजनेस फोरम में इन्हें डिटेल में बात की पर ये कहना कि इमिडियेटली क्या रिजल्ट होने वाला है, ये कहना मुश्किल है पर कई टेकनोलॉजीज हैं, इन दोनों देशों में जो इंडिया में कामर्शियलाइज हो सकती है, जो स्केल अप हो सकती हैं।

चेक रिपब्लिक की इकोनॉमी इज इन वेरी गुड शेप बट यहाँ लिमिटेशन्स हैं, स्पेस की और पापुलेशन की और इंडिया एक नेचुरल फिट है, ये वो भी मानते हैं और यहाँ के डिफेन्स प्रोडक्ट्स हम खरीद चुके हैं पर अब बेचने और खरीदने से आगे जाकर हम को-प्रोडक्शन की बात कर रहे हैं। वो बातचीत चल रही है उन्होंने भी पॉजिटिव रवैया एडाप्ट किया है और कहा है कि वी आर विलिंग टू इन्वेस्ट एंड कोप्रोड्यूज इन इंडिया। हम भारत में इनवेस्ट और कोप्रोड्यूस करने के इच्छुक हैं। सो लेट अस सी ह्वेयर इट मटीरिअलाइज़ेज।

(जैसा कि आप भारतीय रक्षा आवश्यकताओं के बारे में जानते हैं और यह भी कि यह भारत में मेक इन इंडिया के अंतर्गत एक कार्यक्रम है।

बुल्गारिया और चेक गणराज्य दोनों में राष्ट्रपति ने उन तकनीकों के बारे में बात की जिन्हें पारस्परिक लाभ के लिए व्यवसायीकृत किया और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने व्यापार मंचों में भी विस्तार से बात की लेकिन यह इंगित करना बहुत मुश्किल है कि परिणाम क्या होने वाले हैं। उन्होंने उन प्रौद्योगिकियों के बारे में बात की जिसे बढ़ाया जा सकता है और व्यवसायीकृत किया जा सकता है।

चेक अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति में है लेकिन यहां स्थान और आबादी की सीमाएं हैं और वे भी यह मानते हैं कि भारत प्राकृतिक रूप से उपयुक्त है। हमने उनके रक्षा उत्पादों को खरीदा है पर अब हम इन उत्पादों की बिक्री और खरीद से आगे बढ़ रहे हैं और हम सहउत्पादन के बारे में बात कर रहे हैं। ये चर्चाएं चल रही हैं और वे इसके बारे में बहुत सकारात्मक हैं और उन्होंने कहा है कि वे भारत में निवेश और सहउत्पादन करने के इच्छुक हैं। तो देखते हैं कि क्या और कैसे साकार हो पाता है।)

संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप), डॉ. अंजू कुमार: आप सभी को धन्यवाद।

(समापन)



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