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राष्ट्रपति की वियतनाम और आस्ट्रेलिया की आगामी यात्रा के बारे में सचिव (पूर्व) द्वारा मीडिया ब्रीफिंग

नवम्बर 17, 2018

अधिकारिक प्रवक्ता श्री रवीश कुमार: नमस्कार मित्रों! राष्ट्रपति की 18-24 नवम्बर तक वियतनाम और आस्ट्रेलिया की यात्रा के बारे में इस विशेष प्रेस ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। आपको इसके बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए मेरे साथ यहां श्रीमती विजय ठाकुर सिंह, सचिव (पूर्व) हैं। इसके अलावा, मेरे साथ राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अशोक मलिक तथा संयुक्त सचिव (दक्षिण) मनीष भी मौजूद हैं। सचिव (पूर्व) द्वारा प्रारंभिक टिप्पणियों के उपरांत मैं प्रेस सचिव से अनुरोध करूंगा कि वे राष्ट्रपति की इस यात्रा के बारे में मुख्य बातों का वर्णन करें। महोदया, हम आपसे अपनी ब्रीफिंग प्रारंभ करते हैं।

सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : नमस्कार! राष्ट्रपति जी 18-24 नवम्बर तक वियतनाम और आस्ट्रेलिया की यात्रा करेंगे। उनके साथ एक उच्च स्तरीय शिष्टमंडल भी जाएगा जिसमें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री अनंत कुमार हेगड़े, संसद सदस्य श्री कामाख्या प्रसाद तासा और डा. हीना विजय कुमार गावित भी शामिल हैं।

राष्ट्रपति की यात्रा एक ईस्ट नीति के सिद्धांतों के अंतर्गत भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थित देशों के साथ भारत के सतत् और निरंतर विकसित होते संबंधों का भाग है।

यात्रा के प्रथम चरण में, राष्ट्रपति वियतनाम जाएंगे। यह अपना राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने के बाद से राष्ट्रपति की किसी आसियान देश की प्रथम यात्रा होगी। इसके अलावा, यह अक्तूबर, 2018 में राष्ट्रपति चांग के निर्वाचन के उपरांत हमारे देशों के नेतृत्‍व के बीच प्रथम भेंट हैं।

भारत और वियतनाम के बीच पर्याप्त और रणनीतिक भागीदारी रही है तथा गहन सभ्यात्मक संबंध में रहे हैं और दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय दौरों का आदान-प्रदान भी होता रहा है। वियतनाम पिछले तीन वर्षों में 2018 के मध्य तक आसियान में भारत के लिए समन्वयक देश भी रहा है। इसने अनेक पहलुओं में भारत-आसियान संबंधों का निर्माण करने की दिशा में पर्याप्त योगदान दिया है जिसमें इसका उस समय समन्वयन रहना भी शामिल है, जब भारत-आसियान का स्मारक शिखर-सम्मेलन यहां जनवरी में आयोजित किया गया था।

यह वर्ष वियतनाम के साथ हमारे संबंधों के लिए एक उल्लेखनीय वर्ष रहा है क्योंकि राष्ट्रपति फू यहां स्मारक शिखर-सम्मेलन के लिए आए थे, उसके बाद वियतनाम के स्वर्गीय राष्ट्रपति तरान दई क्वांग भी मार्च, 2018 में भारत आए थे तथा अब हमारे राष्ट्रपति वियतनाम की यात्रा कर रहे हैं।

राष्ट्रपति अपनी यात्रा तनांग से प्रारंभ करेंगे। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसके साथ भारत के अत्यंत गहन ऐतिहासिक और सभ्यात्मक संबंध रहे हैं जो अत्यंत प्राचीन है और 2000 वर्षों से प्रगाढ़ बने हुए हैं। इसमें माई सन नामक विश्व विरासत स्थल है जिसमें हमारे बौद्ध संबंधों तथा प्राचीन हिंदू मंदिरों के रूप में हिंदू चाम सभ्यता के भग्नावेष मौजूद है और इनमें से कुछ मंदिरों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पुनरूद्धार का कार्य भी आरंभ किया है। यह भारत की ओर से तनांग की प्रथम उच्च स्तरीय यात्रा होगी तथा यह वियतनाम के साथ प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यात्मक संबंधों को परिलक्षित करती हैं।

इसके उपरांत राष्ट्रपति हनोई जाएंगे जहां वे हो ची मिन्ह मकबरे में राष्ट्रीय नायकों और शहीदों के स्मारक की आधारशिला रखेंगे। राष्ट्रपति के महल में राष्ट्रपतिजी का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। वे वियतनाम के राष्ट्रपति महामहिम श्री फू ट्रांग के साथ सीमित बैठक और शिष्टमंडल स्तरीय वार्ता करेंगे। राष्ट्रपतिजी प्रधानमंत्री फुक और अन्य नेताओं के साथ भी भेंट करेंगे। वे वियतनाम की राष्ट्रीय एसेम्बली को भी संबोधित करेंगे।

हमारे व्यापारिक संबंधों में वृद्धि हुई है तथा इन्होंने अत्यंत प्रभावशाली विकास हासिल किया है। भारतीय कंपनियां भी वहां मौजूद हैं जिनमें ओएनजीसी विदेश लिमिटेड का नाम उल्लेखनीय है जिसका प्रचालन वियतनाम में पिछले अनेक दशकों से किया जा रहा है तथा यह एक ऐसा उदाहरण है जिसका मैं उल्लेख इसलिए कर रही हूं कि वियतनाम के साथ हमारे संबंध कितने प्रगाढ़ हैं।

हमारे पास वार्ता के लिए सांस्थानिक तंत्र विद्यमान है। हमारा रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में भी सहयोग है तथा आपको हमारे प्रधानमंत्री की 2016 में वियतनाम यात्रा का स्मरण होगा जब वस्तुत: हमारे संबंध व्यापक रणनीति साझेदारी के रूप में स्थापित हुए थे और तब उन्होंने वियतनाम की रक्षा खरीद के लिए 500 मिलियन डॉलर के रिआयती ऋण की घोषणा की थी।

राष्ट्रपति की यात्रा वियतनाम के साथ हमारे मजबूत सहयोग तथा हमारे वर्तमान द्विपक्षीय संबंधों को और भी सुदृढ़ बनाने में योगदान देगी।

राष्ट्रपति जी की यात्रा का द्वितीय चरण 21-24 नवम्बर तक आस्ट्रेलिया की यात्रा के रूप में रहेगा। यह भारत के राष्ट्रपति की आस्ट्रेलिया की पहला यात्रा है। वस्तुत: जब प्रधानमंत्री ने 2014 में आस्ट्रेलिया की यात्रा की थी, तो यह 30 वर्षों के बाद किसी प्रधानमंत्री स्तर की पहली यात्रा थी और यह यात्रा भारत के राष्ट्रपति की आस्ट्रेलिया की प्रथम यात्रा है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में सिंगापुर में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन के साथ भेंट की थी और आप जानते हैं कि स्कॉट मॉरीसन हाल ही में अगस्त में वहां के प्रधानमंत्री बने हैं तथा अपनी वार्ता के दौरान स्कॉट मॉरीसन ने कहा था कि वे राष्ट्रपति की आस्ट्रेलिया यात्रा की उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा कर रहे हैं और वे उनका भव्य स्वागत और उत्कृष्ट आतिथ्य-सत्कार करने के लिए प्रतीक्षारत हैं।

आस्ट्रेलिया में राजनीतिक स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा जिसका आशय संबंधों को और आगे ले जाना होगा। भारत और आस्ट्रेलिया रणनीतिक भागीदार हैं तथा दोनों देशों के बीच सुरक्षा, रक्षा और आर्थिक मुद्दों पर भी सहयोग और विचारों की अभिसारिता में संवृद्धि हो रही है।

आस्ट्रेलिया में राष्ट्रपति जी सिडनी के साथ-साथ मेलबोर्न भी जाएंगे। वे गवर्नर जनरल महामहिम सर पीटर कास्ग्रोव से चर्चा करेंगे जिनके आमंत्रण पर यह दौरा आयोजित किया जा रहा है। आपको स्मरण होगा कि इस वर्ष के प्रारंभ में अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि के प्रारंभिक सम्मेन में गर्वनर जनरल भारत में थे तथा वे अपनी पूर्व की हैसियत में राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज में भी गए थे।

राष्ट्रपति जी प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन के साथ भेंट करेंगे तथा सिडनी में वे भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। आप जानते हैं कि आस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के व्यक्ति विद्यमान हैं जिनकी संख्या आधी मिलियन है तथा उन्होंने विभिन्न व्यवसायों में आस्ट्रेलिया के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है जैसे शिक्षण, लेखाकार, चिकित्सक और इंजीनियर तथा वे हम दो देशों के बीच संबंधों के निर्माण में सेतु का कार्य कर रहे हैं।

सिडनी में ही महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे समारोहों और कार्यक्रमों की श्रृंखला में, राष्ट्रपति कोविन्द और प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन न्यू साउथ वेल्स में परामट्टा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। अत: यह आस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाला एक उल्लेखनीय कार्यक्रम है।

हम दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में वृद्धि हो रही है तथा आज द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है तथा ऐसे अनेक क्षेत्र विद्यमान हैं जिनमें हमारे दोनों देश अपने आर्थिक सहयोग को और भी गहन बना सकते हैं जिसमें फिनटेक क्षेत्र भी शामिल हैं। आस्ट्रेलिया ने एक पत्र जारी किया है जिसे 'भारतीय आर्थिक कार्यनीति' कहा जा रहा है, जिसमें वर्ष 2035 तक भारत में आस्ट्रेलियाई निवेश के 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 100 बिलियन डॉलर तक होने की परिकल्पना की गई है। अत: हमें आशा है कि उनकी पेंशन निधि सहित अन्य निधियों के भारत में निवेश की संभावना है।

इसे ध्यान में रखते हुए तथा दोनों देशों के बीच मौजूदा अनेक व्यापार और आर्थिक अवसरों पर बल प्रदान करते हुए राष्ट्रपति आस्ट्रेलियाई वित्तीय समीक्षा व्यापार-समूह को संबोधित करेंगे और इसके उपरांत वे आस्ट्रेलिया-भारत व्यापार परिषद में वार्षिक रात्रिभोज में भी शामिल होंगे।

मेलबोर्न में, राष्ट्रपति जी विक्टोरिया की गवर्नर माननीय लिंडा डेसा से मुलाकात करेंगे। वे मेलबोर्न विश्वविद्यालय के छात्रों को भी संबोधित करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की एक विशाल संख्या है जो लगभग 70,000 है तथा आस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए पसंदीदा गंतव्य रहा है, अत: राष्ट्रपति जी इस विश्वविद्यालय में भी संबोधन करेंगे।

इस प्रकार, मैंने आपको कार्यक्रम तथा राष्ट्रपति की यात्रा का एक विस्तृत ब्योरा प्रदान कर दिया है। हमें विश्वास है कि दोनों देशों की उनकी यात्रा महत्वपूर्ण सिद्ध होगी तथा आस्ट्रेलिया के संदर्भ में यह अत्यंत उल्लेखनीय यात्रा है क्योंकि भारत के प्रथम राष्ट्रपति आस्ट्रेलिया की यात्रा कर रहे हैं। अब मैं अपनी बात यही समाप्त करती हूं।

अधिकारिक प्रवक्ता श्री रवीश कुमार:
धन्यवाद महोदया। अब मैं श्री अशोक मलिक को आमंत्रित करता हूं।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अशोक मलिक : धन्यवाद रवीश जी। सचिव महोदया द्वारा की गई व्यापक ब्रीफिंग के बाद मेरे लिए बहुत कम जानकारी प्रदान करना ही शेष रह गया है। मैं केवल यही कहूंगा कि आपके सम्मुख कुछ आंकड़े पेश करूंगा।

जुलाई में पदभार ग्रहण करने के उपरांत यह राष्ट्रपति कोविंद की सातवीं राजकीय यात्रा है। यह 2018 में उनकी छठी राजकीय यात्रा है। जैसा कि सचिव महोदया ने उल्लेख किया है, यह पहली बार है कि वे किसी आसियान देश का दौरा कर रहे हैं। यह भी पहली बार है कि वे पहली बार भारत के राष्ट्रपति के रूप में भारत के पूर्व की यात्रा कर रहे हैं।

अभी तक उनकी यात्राएं पश्चिम की ओर हो रही हैं जो पश्चिमी हिंद महासागर से अटलांटिक महासागर का क्षेत्र है। यह यात्रा उन्हें भारत-प्रशांत क्षेत्र के मध्य में ले जाएगी। अत: एक मायने में, यात्रा के उपरांत वे 16 देशों की यात्रा कर लेंगे तथा हिन्द महासागर की संपूर्ण चौड़ाई का भ्रमण करेंगे।

वे अपनी वियतनाम और आस्ट्रेलिया की यात्रा के प्रति अत्यंत उत्सुक हैं। जैसाकि सचिव महोदया ने बताया, वे उन्होंने इसी कैलेंडर वर्ष में इन दोनों देशों के नेताओं के साथ भेंट की है तथा एक मायने में वे उनकी यात्रा करके उस चक्र की पूर्ति कर रहे हैं। वे आस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल तथा प्रधानमंत्री और वियतनाम के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के साथ अपनी वार्ताओं की तथा जनसमूह को संबोधित करने की भी उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मैं यह उल्लेख करना चाहता हूं कि राष्ट्रपति के साथ जाने वाला सरकार और संसद का तीन-सदस्यीय शिष्टमंडल भारत के राष्ट्रपति के साथ ऐसे शिष्टमंडलों में जाने वाला सर्वाधिक युवा शिष्टमंडल है।

मंत्री हेगड़े 50 वर्षीय हैं तथा दो संसद सदस्यों में से एक चालीस और दूसरी तीस के दशक में हैं। अत: सभी मायनों से यह भारत के राष्ट्रपति के साथ जाने वाला अब तक का युवा शिष्टमंडल है जो निसंदेह ही युवा है। मैं अपनी बात यही समाप्त करूंगा तथा अब आपके प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करूंगा।

अधिकारिक प्रवक्ता श्री रवीश कुमार: धन्यवाद अशोक जी। मैं अब आपके प्रश्नों को आमंत्रित करता हूं।

प्रश्न : मैं इस बात को जानने के लिए उत्सुक हूं कि लगभग तीन दशकों तक हमारे राष्ट्रपति की वहां यात्रा नहीं की गई।

सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : देखिए कभी-कभी ऐसा होता है कि चीजें अपने समय पर ही घटित होती है तथा यह उल्लेखनीय है कि अब ऐसा हो रहा है। मैं यह समझती हूं कि यह एक महत्वपूर्ण पहलू है कि इस समय आस्ट्रेलिया की यात्रा की जा रही है।

प्रश्न : हम किस प्रकार के करारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि इस वर्ष के पूर्व में हमने वियतनाम के साथ तीन समझौते किए थे तथा भारत-वियतनाम के बीच व्यापक रक्षा सहयोग भी स्थापित किया गया था। अत: आकाश और ब्रह्मोस मिसाइलों के बारे में कोई समाचार है?

सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : मैं इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दूंगी परंतु जैसा आपने उल्लेख किया है, वे पहलू इस समय वियतनाम के साथ एजेंडा में शामिल नहीं हैं। हमारा वियतनाम के साथ रक्षा के क्षेत्र में सहयोग है। मैं इसके विवरणों में नहीं जाऊंगी तथा किसी बात का खंडन नहीं करूंगा परंतु मैं यह कहूंगी कि हमारे उनके साथ अनेक संयुक्त अभ्यास हैं और उनके यहां नौसना दौरे किए गए हैं। अत: मैं यही कहूंगी कि हम उनके साथ जो भी चर्चा करेंगे, उनके बारे में आपको करार होने के उपरांत सूचित किया जाएगा।

प्रश्न : क्या भारत-प्रशांत के भारतीय दृष्टिकोण पर भी वियतनाम के शीर्षस्थ नेतृत्व के साथ चर्चा की जाएगी क्योंकि ऐसी खबर है कि वियतनाम क्वाड को लेकर संतुष्ट नहीं है जो भारत ने आस्ट्रेलिया जापान और यूएस के साथ स्थापित किया है। अत: क्या इस मुद्दे की उस समय उठने की संभावना है जब राष्ट्रपति कोविंद वियतनाम के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात करेंगे?

सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : इसके विपरीत मैं यह उल्लेख करूंगी कि भारत और वियतनाम का भारत-प्रशांत क्षेत्र के बारे में व्यापक सिद्धांतों पर आधारित एक साझा दृष्टिकोण है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र मुक्त और खुला होना चाहिए तथा इसे ऐसी नियम आधारित प्रणाली द्वारा शासित किया जाना चाहिए जिसमें नौवहन, उड़ानों और व्यापार के लिए स्वतंत्रता हो। अत: उस मायने में, मैं यह कहूंगी कि इन मुद्दों पर दृष्टिकोणों की एक वृहद् अभिसारिता विद्यमान है।

प्रश्न :
ओएनजीसी की वियतनाम सागर में तेल अन्वेषण क्रियाकलापों में विस्तार करने की योजना है। क्या इस संबंध में आप किसी करार पर हस्ताक्षर करने के लिए किसी सुदृढ़ योजना पर विचार कर रहे हैं?

सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : देखिए, ओएनजीसी वहां पिछले 25 वर्षों से मौजूद है तथा इसके वहां दो तेल-क्षेत्र हैं और हम ऊर्जा क्षेत्र पर भी वियतनाम के साथ अपनी चर्चाओं को जारी रखेंगे। परंतु इस अवस्था में, मैं यह नहीं कहूंगी कि कोई विशेष घोषणा की जाएगी।

प्रश्न : भारत में आस्ट्रेलियाई यूरेनियम के आयात में भी भी अवरोध विद्यमान हैं, यह कब प्रारंभ होगा तथा क्या यह मुद्दा चर्चा के लिए उठेगा?

सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : जैसाकि आप जानते हैं कि आस्ट्रेलिया ने एमटीसीआर और वासेनार और आस्ट्रेलियाई ग्रुप में हमारे प्रवेश को समर्थन दिया है। यदि आप को स्मरण होगा कि 2014 में हमने सिविल परमाणु सहयोग करार पर हस्ताक्षर किए थे जो नवम्बर, 2015 से प्रवृत्त हुआ और आस्ट्रेलियाई संसद ने भी भारत में सिविल परमाणु अंतरण विधेयक, 2016 को पारित कर दिया है। इसमें एक ऐसा तंत्र विद्यमान है जिसके तहत आस्ट्रेलियाई भारत के लिए यूरेनियम की आपूर्ति करेंगे।

अत: मैं यह उल्लेख करूंगी कि एक ऐसा ढांचागत करार विद्यमान है जिसके अंतर्गत सिविल परमाणु क्षेत्र में अनवरत सहयोग जारी है।

प्रश्न (जारी) : यह बात तो है, परंतु अभी तक आपूर्ति प्रारंभ नहीं हुई है?

संयुक्त सचिव (दक्षिण) श्री मनीष :
मैं समझता हूं कि जी2जी ट्रैक विद्यमन है तथा सिविल परमाणु क्षेत्र में हमारे सहयोग के मार्ग में कोई रुकावट नहीं है।

अधिकारिक प्रवक्ता श्री रवीश कुमार: राष्ट्रपति की आस्ट्रेलिया और वियतनाम की यात्रा के किसी अन्य पहलू पर कोई प्रश्न है? लगता है अब कोई प्रश्न शेष नहीं हैं। महोदया आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। श्री अशोक और श्री मनीष का भी हमारे साथ यहां रहने के लिए बहुत धन्यवाद।

(समाप्त)



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