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राष्ट्रपति की वियतनाम की राजकीय यात्रा के दौरान भारत-वियतनाम संयुक्त वक्तव्य

नवम्बर 21, 2018

  • वियतनाम समाजवादी गणतंत्र के राष्ट्रपति महामहिम श्री न्गुएन फू ट्रोंग के निमंत्रण पर भारत गणराज्य के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द और उनकी पत्नी ने 18-20 नवम्बर, 2018 तक वियतनाम की राजकीय यात्रा की। भारत के राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय अधिकारिक शिष्टमंडल भी गया था जिसमें राज्यमंत्री श्री अनंत कुमार हेगड़े, संसद सदस्य और एक बड़ा व्यापार शिष्टमंडल शामिल था।.
  • भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द का अधिकारिक स्वागत समारोह 20 नवम्बर, 2018 को राष्ट्रपति महल, हा नोई में आयोजित किया गया। राष्ट्रपति न्गुएन फू ट्रोंग ने शिष्टमंडल स्तरीय वार्ता की तथा भारत के राष्ट्रपति के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन किया। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने प्रधानमंत्री न्गुएन जुआन फुक, राष्ट्रीय एसेम्बली के प्रेजीडेंट न्गुएन थी किम न्गाह से भी भेंट की तथा वियतनाम की राष्ट्रीय एसेम्बली को संबोधित किया। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति हो ची मिन्ह के मकबरे पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा अज्ञान शहीदों और नायकों के स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने वियतनाम-भारत व्यापार फोरम को भी संबंधित किया और वियतनाम में भारतीय समुदाय और मित्रों से भेंट की। हा नाई की उनकी यात्रा से पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने डा नांग शहर तथा क्वांग नाम प्रांत में माई सन के यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल का दौरान किया।
  • अधिकारिक वार्ताएं गर्मजोशी, सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण परिवेश में आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की तथा पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति न्गुएन फू ट्रोंग को वियतनाम की राष्ट्रीय एसेम्बली द्वारा पर्याप्त समर्थन से स्टेट प्रेजीडेंट के रूप में निर्वाचित करने के लिए बधाई दी। राष्ट्रपति न्गुएन फू ट्रोंग ने राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने जुलाई, 2017 में अपना पदभार संभालने के बाद से दक्षिण पूर्व एशिया में प्रथम गंतव्य के रूप में वियतनाम का चयन किया। वार्ताओं के उपरांत दोनों नेताओं की उपस्थिति में अनेक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए, जैसे (i) वियतनाम समाजवादी गणराज्य के सूचना और संचार मंत्रालय तथा भारत गणराज्य के संचार मंत्रालय के बीच संचार के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन; (ii) वियतनाम के विदेश मंत्रालय के प्रांतीय विदेश विभाग तथा वियतनाम में भारतीय व्यापार चैम्बर (आईएनसीएचएएम) के बीच सहयोग पर समझौता-ज्ञापन; (iii) होची मिन्ह राष्ट्रीय राजनीति अकादमी, हा नाई, वियतनाम तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के बीच समझौता-ज्ञापन; (iv) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) तथा वियतनाम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (वीसीसीआई) के बीच सहयोग करार।
  • दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों की पुन: पुष्टि की जिसकी आधारशिला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और हो ची मिन्ह द्वारा रखी गई थी तथा जिसे दोनों देशों के नेताओं और लोगों की आने वाली पीढ़ियों द्वारा संपोषित किया गया है। दोनों नेताओं ने इस विचारधारा को साझा किया कि वियतनाम-भारत के संबंध 2007 में रणनीतिक भागीदारी की स्थापना तथा 2016 में इसके व्यापक रणनीति भागीदारी में उन्नयित होने के बाद से ही सभी क्षेत्रों में पूर्णत: विकसित हुए हैं।

    व्यापक रणनीतिक भागीदारी का पुन: प्रवर्तन

  • द्विपक्षीय संबंधों के उत्कृष्ट विकास तथा पारस्परिक भरोसे और समझ के आधार पर दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में व्यापक रणनीतिक भागीदारी को और भी गहन बनाने के लिए एक सामान्य दृष्टिकोण को साझा किया।
  • दोनों पक्षों ने उच्च स्तरीय दौरों के नियमित आदान-प्रदान पर अपना संतोष व्यक्त किया, जिसमें भारतीय के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वियतनाम की राजकीय यात्रा (सितम्बर, 2016), वियतनामी राष्ट्रीय एसेम्बली के प्रेजीडेंट न्गुइन थी किम न्गान द्वारा भारत की राजकीय यात्रा (दिसम्बर, 2016) तथा उप प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री फाम विन्ह मिन्ह की भारत यात्रा (जुलाई, 2017) शामिल है। दोनों पक्षों ने 2018 को एक असाधारण वर्ष के रूप में माना जिसके दौरान प्रधानमंत्री न्गुएन जुआन फुक ने नई दिल्ली में आसियान-भारत स्मारक शिखर-सम्मेलन में भाग लिया (जनवरी, 2018) और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा (जून, 2018) तथा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा (अगस्त, 2018) वियतनाम की यात्रा की गई।
  • विद्यमान उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंधों के आधार पर दोनों नेता सभी अन्य स्तरों पर नियमित उच्च स्तरीय यात्राओं को बनाए रखने के लिए सहमत हुए जिसमें सरकारी, राजनीतिक दलों, विधायी संस्थाओं, प्रांतों/राज्यों और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं।
  • दोनों नेताओं ने राजनयिक संबंधों की 45वीं वर्षगांठ तथा रणनीतिक भागीदारी की 10वीं वर्षगांठ के दौरान विभिन्न अर्थपूर्ण क्रियाकलापों के आयोजन का स्वागत किया। उन्होंने दोनों पक्षों को 2017-2020 की अवधि के लिए व्यापक रणनीतिक भागीदारी के क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वन को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • दोनों पक्ष द्विपक्षीय सहयोग तंत्र को नियमित और समय पर आयोजन करने तथा उच्चस्तरीय दौरों और हस्ताक्षरित करारों के परिणामों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के‍ लिए सहमत हुए।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग

  • दोनों नेताओं ने इस मत का साझा किया कि सुरक्षा और संरक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है, तथा हाल के वर्षों में बढ़ते हुए रक्षा संबंधी आदान-प्रदान पर अपना संतोष व्यक्त किया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा (अप्रैल, 2015) और रक्षा मंत्री द्वारा (6 मई, 2015 और दिसम्बर, 2016) वियतनाम की यात्राएं तथा वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री द्वारा भारत की यात्राएं (मई, 2015 और दिसम्बर, 2016) शामिल हैं। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा सहयोग तंत्र, विशेष रूप से वार्षिक मंत्रालयी रक्षानीति वार्ता के सफल आयोजन को मान्यता प्रदान की। दोनों पक्षों ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा वियतनाम की लोक सुरक्षा मंत्रालय के बीच बैठक (नवम्बर, 2016) के परिणाम तथा प्रथम सुरक्षा वार्ता (जुलाई, 2018) के सफल आयोजन को मान्यता प्रदान की। उन्होंने एक-दूसरे के नौसेना/तटरक्षक सुरक्षा जलयानों द्वारा विशेष रूप से 2018 में और आने वाले वर्षों में, सतत् पारस्परिक दौरों का स्वागत किया।
  • दोनों नेता 2015-2020 की अवधि के लिए वियतनाम भारत रक्षा सहयोग पर संयुक्त विज़न वक्तव्य के प्रभावी क्रियान्वयन पर सहमत हुए। उन्होंने मानव संसाधन प्रशिक्षण में सहयोग को बढ़ाने तथा दोनों देशों की थल सेना, वायु सेना, नौसेना और तटरक्षकों के बीच सहयोग को संवर्धित करने तथा साइबर सुरक्षा और सूचना साझेदारी में सहयोग करने पर भी सहमति व्यक्त की।
  • दोनों नेताओं ने वियतनामी सीमा रक्षकों के लिए उच्चगति के गश्ती जलयानों के निर्माण के लिए 100 मिलियन यूएस डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट के क्रियान्वयन की प्रगति पर भी संतोष व्यक्त किया। वियतनामी पक्ष ने रक्षा उद्योगों को 500 मिलियन यूएस डॉलर का लाइन ऑफ क्रेडिट प्रदान करने के भारत के प्रस्ताव की सराहना की तथा इस अनुमोदन के लिए प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।
  • दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र शांति-स्थापना प्रचालनों में भाग लेने, वियतनाम में युद्ध की स्थिति का निवारण करने तथा आपराधिक सूचना के आदान-प्रदान को सुदृढ़ बनाने के लिए कार्मिकों के प्रशिक्षण में सूचना के परस्पर विनिमय को संवर्धित करने और विधि प्रवर्तन अनुभव को साझा करने पर सहमत हुए। वे एक-दूसरे को सक्रिय रूप से सहायता करने तथा बहुपक्षीय रक्षा और सुरक्षा सहयोग ढांचों, विशेष रूप से एआरएफ और एडीएमएस+ पर सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमत हुए।
  • दोनों पक्षों ने सहमति प्रदान की कि सामुद्रिक क्षेत्र, जिसमें सागर-दस्युता निवारण, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, श्वेत पोत परिवहन का आदान-प्रदान भी शामिल है, में सहयोग को सुदृढ़ बनाना अनिवार्य है। नई दिल्ली में जनवरी, 2018 में आयोजित स्मारक शिखर-सम्मेलन में सामुद्रिक सहयोग पर आसियान-भारत रण्नीतिक वार्ता के लिए प्रस्ताव की भावना में, दोनों पक्ष सामुद्रिक क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर प्रथम सामुद्रिक सुरक्षा वार्ता का आयोजन करने तथा एक-दूसरे के नौसेना और तटरक्षक पोतों की पोर्ट कॉलों को आगे और प्रोत्साहित करने पर सहमत हुए।

    आर्थिक, व्यापार और निवेश सहयोग

  • दोनों पक्ष संबंधों को व्यापक रणनीतिक भागीदारी तक उन्नयित किए जाने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार में हुए त्वरित विकास से संतुष्ट थे तथा उन्होंने विश्वास जताया कि 15 बिलियन यूएस डॉलर की व्यापार मात्रा का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।
  • दोनों नेताओं ने वियतनाम उद्योग और व्यापार मंत्रालय तथा भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के बीच आर्थिक और व्यापार सहयोग पर समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर जाने (मई, 2018) का स्वागत किया। उन्होंने दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे व्यापार संवर्धन के लिए उपायों सहित द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हस्ताक्षरित करारों को प्रभावशाली रूप से क्रियान्वित करने के लिए तत्काल ही ठोस योजनाएं तैयार करें।
  • दोनों पक्षों ने गैर-टैरिफ और तकनीकी बाधाओं सहित व्यापार बाधाओं में कटौती का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों का निवारण करने के लिए आवधिक परामर्शों सहित घनिष्ठ सहयोग स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
  • दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय निवेश को प्रोत्साहित करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की जिसमें वियतनाम की भूमि महाद्वीपीय क्षेत्र और अनन्य आर्थिक जोन (ईईजैड), तेल और गैस अन्वेषण क्षेत्र में पीवीएन और ओएनजीसी के बीच सहयोग परियोजनाएं शामिल हैं तथा दोनों पक्षों को प्रोत्साहित किया कि वे तृतीय देशों को शामिल करते हुए सहयोग के मॉडलों की पहचान में अधिक सक्रियता से कार्य करें। वियतनामी पक्ष ने वियतनाम में नई तापीय ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करने के लिए भारतीय कंपनियों के लिए सुविधाजनक शर्तों का सृजन करने का स्वागत किया तथा उस पर सहमति व्यक्त की।
  • भारतीय पक्ष ने भारत में विशेष रूप से कृषि, कृषि-प्रसंस्करण, सामुद्रिक उत्पादों और वन उत्पादों में निवेश करने वाले वियतनामी व्यवसायों के लिए सुविधाजनक शर्तों को तैयार करने का स्वागत किया और उसके लिए सहमति प्रदान की। दोनों कृषि मंत्रालयों के बीच कार्य योजना 2018-2020 का उल्लेख करते हुए दोनों पक्षकार शीघ्र ही कृषि संबंधी संयुक्त कार्यकारी समूह की बैठक आयोजित करने के लिए सहमत हुए। उन्होंने यह भी सहमति व्यक्त की कि यह बैठक दोनों पक्षों के कृषि, फल और खाद्य उत्पादों के लिए बाजार की पहुंच के अनुरोधों पर त्वरित विचार कर सकती है।

    विकास सहयोग

  • वियतनाम के राष्ट्रपति ने विभिन्न स्वरूपों में विकास परियोजनाओं के लिए भारत के दीर्घकालिक और सतत् सहयोग की अत्यंत सराहना की जैसे अनुदान, अधिमानिक क्रेडिट लाइनें तथा वियतनाम के हित के क्षेत्रों में मानव संसाधन प्रशिक्षण।
  • दोनों पक्षकारों ने उन सहायतानुदानों तथा अधिमानिक क्रेडिट लाइनों के समय पर क्रियान्वयन पर ध्यान केन्द्रित करने पर सहमति व्यक्त की जिनका भारतीय पक्ष ने वियतनाम को वचन दिया है जिसमें सीएलएमवी त्वरित प्रभाव परियोजना (क्यूआईपी) के अंतर्गत वार्षिक परियोजनाएं भी शामिल हैं।
  • भारत के राष्ट्रपति ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (आईटीईसी) के माध्यम से वियतनाम को लगभग 200 वार्षिक छात्रवृत्तियां तथा केन्द्रीय विनियम कार्यक्रम/सामान्य सांस्कृतिक छात्रवृत्ति स्कीम (सीईपी/जीसीएसएस) कार्यक्रम के माध्यम से 30 छात्रवृत्तियां प्रदान करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की। वियतनाम के राष्ट्रपति ने जनवरी, 2018 में आसियान-भारत स्मारक शिखर-सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की इस घोषणा की सराहना की कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में एकीकृत पीएच.डी. कार्यक्रमों में अध्ययन के लिए आसियान सदस्य राज्यों से छात्रों और शोधकर्ताओं क लिए 1000 फेलोशिप प्रदान की जाएंगी तथा डिजिटल ग्रामों का सृजन करने के लिए सीएलएमवी देशों में ग्रामीण संयोजनता पर प्रायोगिक परियोजना संचालित की जाएगी।

    वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी सहयोग

  • दोनों नेताओं ने आण्विक ऊर्जा के शांतिप्रिय उपयोग में सहयोग पर ढांचागत करार हस्ताक्षरित किए जाने (दिसम्बर, 2016) तथा वियतनाम के परमाणु ऊर्जा संस्थान और भारत के ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लीयर एनर्जी पार्टनशिप (मार्च, 2018) के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने हस्ताक्षरित करारों के क्रियान्वयन के लिए संयुक्त समिति का गठन करने तथा उस समिति की प्रथम बैठक यथाशीघ्र आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की।
  • दोनों पक्षों ने भारत-वियतनाम संयुक्त समिति की आगामी बैठक शीघ्र आयोजित करने, संयुक्त अनुसंधान क्रियाकलापों के लिए उपयुक्त तंत्र स्थापित करने, चल रही परियोजनाओं के लिए क्रियान्वयन प्रक्रिया में तेजी लाने, शिष्टमंडलों का आदान-प्रदान जारी रखने तथा दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास में अनुभव की साझेदारी करने पर सहमति व्यक्त की।
  • दोनों पक्षों ने वियतनाम और भारत के बीच सुदृढ़ संयोजनता के महत्व पर सहमति व्यक्त की तथा भारत-आसियान सहयोग ढांचे के अंतर्गत भौतिक और डिजिटल संयोजनता परियोजनाओं के लिए 1 बिलियन यूएस डॉलर के क्रेडिट लाइन के शीघ्र उपयोग का आग्रह किया तथा वियतनाम में परियोजनाओं के लिए लाइन ऑफ क्रेडिट के उपयोग को समर्थ बनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच शीघ्र तंत्र स्थापित करने का आह्वान किया।

    सांस्कृतिक, पर्यटन सहयोग तथा लोगों का लोगों के साथ संपर्क

  • दोनों नेताओं ने हा नोई में स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति केन्द्र (अप्रैल, 2017) तथा भारतीय अध्ययन केन्द्र (सितम्बर, 2014) और नई दिल्ली में वियतनामी अध्ययन केन्द्र खोले जाने का स्वागत किया। भारत के राष्ट्रपति ने 2018 में महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए समारोहों के आयोजन में सहयोग के लिए तथा वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में सहायता प्रदान करने के लिए वियतनाम के प्रति आभार व्यक्त किया। क्वांग नामक प्रांत में माई सन यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल के अपने दौरे में, भारत के राष्ट्रपति ने दोनों पक्षों के बीच उस घनिष्ठ सहयोग की सराहना की जिसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को विरासत स्थल पर तीन मंदिर समूहों के परिरक्षण और पुनरूद्धार के लिए परियोजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने में सहायता प्रदान की है। वियतनाम के राष्ट्रपति ने चाम समुदाय के लिए भारत के सहयोग का स्वागत किया जिसमें निन्ह थुआन प्रांत में चाम समुदाय के लिए घरों और विद्यालयों का निर्माण तथा चाम संस्कृति शोध कार्यक्रम भी शामिल है।
  • दोनों नेताओं ने यह पुन: पुष्टि की कि वे मैत्रीपूर्ण संबंधों और शैक्षिक क्षेत्र को सहयोग देना जारी रखेंगे तथा उन्होंने प्रेस और मीडिया एजेंसियों की उपस्थिति और प्रचालनों को बढ़ाने के लिए उन्हें सुविधाएं प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की।
  • दोनों पक्षों ने हो ची मिन्ह कम्युनिस्ट युवा संघ तथा भारत के युवा और खेल मंत्रालय के बीच करार के क्रियान्वयन तथा वियतनाम के युवा संघ और भारत के राष्ट्रीय कैडेट कोर के बीच करार को संतोष के साथ नोट किया। दोनों पक्षों ने युवाओं के मध्य ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को सुकर बनाने के लिए वार्षिक आधार पर युवा शिष्टमंडलों के नियमित आदान-प्रदान को बनाए रखने पर सहमति जताई।
  • दोनों पक्षों ने अनुभव और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान में संवृद्धि करने तथा मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए दोनों देशों के महत्वपूर्ण शहरों के बीच ट्विनिंग अथवा सिस्टर सिटी व्यवस्थाएं स्थापित करने की संभावना पर कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
  • दोनों पक्षों ने फिल्म समारोह आयोजित करके तथा पर्यटन सहयोग को आगे बढ़ाते हुए लोगों के लोगों के साथ संबंधों को पुन:स्फूर्ति बनाने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इस संबंध में, दोनों पक्षों ने नोट किया कि 2019 में भारत-आसियान पर्यटन वर्ष दोनों देशों में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के अवसर उपलब्ध कराएगा। दोनों नेताओं ने संयोजनता की बढ़ती हुई भूमिका पर बल प्रदान किया तथा वर्ष 2019 में हो ची मिन्ह शहर तथा नई दिल्ली के बीच वियतजेट एयर की सीधी उड़ान को सुकर बनाने का संकल्प लिया।
  • वियतनाम के राष्ट्रपति ने फू त्हो और विन्ह फुक प्रांतों में लगभ 500 वियतनामियों को पुनर्वास सेवाओं और कृत्रिम अंग फिटमेंट जयपुर फुट का प्रावधान करने के लिए भारत सरकार और भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की जिसके अंतर्गत इस वर्ष के अंत में अन्य 500 वियतनामी नागरिकों के लिए हनोई में नया अंग फिटमेंट शिविर स्थापित किया जाएगा।

    अन्य क्षेत्र

  • दोनों पक्षों ने अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ स्वास्थ्य-देखरेख, आईटी और रिमोट सेंसिंग में संयुक्त कार्यकारी समूहों की बैठक आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की ताकि हस्ताक्षरित करारों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा सके।
  • दोनों पक्षों ने वियतनाम में आसियान-भारत सहयोग ढांचे के अंतर्गत उपग्रह ट्रैकिंग एवं डाटा रिसेप्शन केन्द्र तथा डाटा प्रसंस्करण सुविधा के निर्माण के लिए परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और यथाशीघ्र प्रचालन के प्रयोजनार्थ सतत् और घनिष्ठ सहयोग सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।
  • दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच नागरिक और वाणिज्यिक मामलों में पारस्परिक न्यायिक सहायता पर शीघ्र वार्ताएं करने तथा करार के हस्ताक्षर के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्ष वियतनाम के न्याय मंत्रालय तथा भारत के विधि और न्याय मंत्रालय के बीच विधिक और न्यायिक मामलों पर सहयोग पर समझौता-ज्ञापन पर बातचीत में तेजी लाने पर भी सहमत हुए।

    क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

  • दोनों नेताओं ने पारस्परिक हित के विभिन्न क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों की अभिसारिता को साझा किया। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय संप्रभुत्ता और अंतर्राष्ट्रीय विधि के लिए सम्मान तथा नौवहन, उड़ानों और निर्बाधित आर्थिक क्रियाकलापों की स्वतंत्रता के आधार पर एक शांतिपूर्ण और समृद्ध एशिया और भारत-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के महत्व को दोहराया। भारत के राष्ट्रपति ने तीसरे भारतीय महासागर सम्मेलन को सफलतापूर्वक आयोजित करने (अगस्त, 2018) में वियतनाम के सहयोग की सराहना की तथा एक खुले, पारदर्शी, अंतर्वेशी और नियम-आधारित प्रादेशिक ढांचे के अनुरक्षण और पुन: प्रवर्तन में भारत और वियतनाम, दोनों की भूमिका पर बल प्रदान किया।
  • भारत के राष्ट्रपति ने 2015-2018 की अवधि के लिए आसियान-भारत संबंधों के लिए समन्वयक देश के रूप में वियतनाम के योगदान को उच्च महत्व प्रदान किया तथा यह सुझाव दिया कि दोनों पक्ष वार्ता भागीदारी की 25वीं वर्षगांठ (जनवरी, 2018) के उपलक्ष्य में आसियान-भारत शिखर-सम्मेलन की दिल्ली घोषणा के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर कार्य करेंगे। वियतनाम के राष्ट्रपति ने भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के लिए वियतनाम के सहयोग की पुन:पुष्टि की तथा प्रादेशिक संरचना तैयार करने में आसियान की एकता और केन्द्रीयता के लिए भारत के सहयोग की अत्यंत सराहना की।
  • दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के भीतर अपने घनिष्ठ समन्वय और पारस्परिक सहयोग को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों के रूप में उनकी संबंधित उम्मीदवारी - वर्ष 2020-2021 की अवधि के लिए वियतनाम तथा वर्ष 2021-2022 की अवधि के लिए भारत, को पारस्परिक समर्थन देने की पुन: पुष्टि की। वियतनाम पक्ष ने गैर-विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने निरंतर सहयोग को दोहराया तथा भारतीय पक्ष ने इसके लिए उसका आभार व्यक्त किया।
  • दोनों नेताओं ने दक्षिण चीन सागर में वर्तमान घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा दक्षिण चीन सागर में शांति, स्थायितव, सुरक्षा और नौवहन एवं उड़ानों तथा निर्बाध आर्थिक क्रियाकलापों की स्वतंत्रता अनुरक्षित करने के महत्व को दोहराया। दोनों पक्षों ने दक्षिण चीन सागर (डीओसी) में पक्षकारों के आचरण पर घोषणा के पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन तथा दक्षिण चीन सागर (सीओसी) में एक विस्तृत प्रभावी और बाध्यकारी पक्षकार आचरण संहिता को शीघ्र अंतिम रूप प्रदान करने की आवश्यकता पर बल प्रदान किया। उन्होंने राजनयिक और विधिक प्रक्रियाओं के लिए पूर्ण सम्मान सहित विवादों के शांतिपूर्ण निपटान के महत्व तथा अंतर्राष्ट्रीय विधि, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्र विधि कन्वेंशन 1982 (यूएनसीएलओएस) के पूर्ण अनुपालन पर बल प्रदान किया। दोनों पक्षों ने यह दोहराया कि संबंधित पक्षकारों को बल के प्रयोग अथवा बल का प्रयोग करने की धमकी से स्वत: दूर रहने अथवा इसका प्रयोग न करने की प्रक्रिया जारी रखने की आवश्यकता है।
  • दोनों पक्षों ने एक स्वर में आतंकवाद की इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में निंदा की जिसमें सीमापार से होने वाला आतंकवाद भी शामिल है। वियतनामी पक्ष ने भारत की इस चिंता को साझा किया कि आतंकवाद वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती है। उन्होंने रेखांकित किया कि आतंकवाद के किसी भी कृत्य के लिए कोई औचित्य नहीं दिया जा सकता है तथा यह मान्यता दी कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता अथवा नृजातीय समूहों से सहयोजित नहीं किया जा सकता है और किया भी नहीं जाना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद से संघर्ष करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने हेतु सभी राष्ट्रों को आह्वान किया, जिसमें कट्टरवाद का सामना करना, विदेशी आतंकवादी संघर्षकर्ताओं सहित आतंकवादियों की भर्ती, प्रशिक्षण और आवाजाही को रोकना, आतंकवाद के वित्त पोषण के स्रोतों को रोकना जिसमें संगठित अपराधों, धन-शोधन का माध्यम भी शामिल है, व्यापक संहार के हथियारों (डब्ल्यूएमडी) की तस्करी, नशीले पदार्थों का अवैध व्यापार तथा अन्य आपराधिक क्रियाकलापों के प्रयोग को प्रतिबंधित करना, आतंकवादियों के ठिकानों और अभ्यारण्यों को नष्ट करना, तथा आतंकवादी संगठनों और उनके सहयोगियों द्वारा अपनाई जा रही संचार तकनीकों को रोकना शामिल है। दोनों पक्षों ने यह सहमति भी व्यक्त की कि वे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन (जीसीआईटी) को यथाशीघ्र अंगीकृत करने के लिए सुदृढ़ सर्वसम्मति का निर्माण करने में सहयोग करेंगे।
  • भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति न्गुएन फू ट्रोंग तथा वियतनाम के मैत्रीपूर्ण लोगों द्वारा किए गए उत्साहपूर्ण स्वागत और उत्कृष्ट आतिथ्य-सत्कार के लिए उनका हार्दिक धन्यवाद किया और भविष्य में भारत आने के लिए राष्ट्रपति न्गुएन फू ट्रोंग को विनम्र आमंत्रण दिया। राष्ट्रपति न्गुएन फू ट्रोंग ने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया तथा सहमति व्यक्त की कि दौरे के समय का निर्धारण राजनयिक चैनलों के माध्यम से किया जाएगा।
हनोई,
20 नवम्बर, 2018




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