यात्रायें यात्रायें

राष्ट्रपति की वियतनाम की राजकीय यात्रा के दौरान सचिव (पूर्व) द्वारा मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेखन

नवम्बर 21, 2018

निदेशक (एक्सपीडी): नमस्कार! राष्ट्रपति की वियतनाम यात्रा के बारे में इस विशेष ब्रीफिंग में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। आपको विवरण प्रदान करने के लिए हमारे साथ सुश्री विजय ठाकुर सिंह, सचिव (पूर्व), विदेश मंत्रालय, श्री अशोक मलिक, राष्ट्रपति के प्रेस सचिव, राजदूत श्री पी. हरीश, जो वियतनाम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और श्री मनीष, संयुक्त सचिव (दक्षिण), विदेश मंत्रालय मौजूद हैं। ब्रीफिंग प्रारंभ होने से पूर्व मैं आपको नियमों से अवगत करा दूं, कृपया एक व्यक्ति केवल एक ही प्रश्न पूछे और उसके प्रश्न के संबंध में कृपया अनुपूरक प्रश्न न पूछे जाएं। यदि हमारे पास समय होगा, तभी हम प्रश्नों के अगले चक्र पर जाएंगे।

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह: सभी को मेरा नमस्कार! हमारी यह बैठक राष्ट्रपति जी की यात्रा अत्यंत सफल और अत्यंत लाभप्रद होने के अवसर पर आयोजित हो रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि वियतनाम में पहला ठहराव मध्य वियतनाम में डा नांग में था। उनका स्वागत पार्टी सेक्रेटरी और शहर की लो समिति के अध्यक्ष द्वारा किया गया जिन्होंने शाम को उनके सम्मान में रात्रि-भोज का आयोजन भी किया।

उन्होंने डा नांग में 100 वर्ष पुराने चाम संग्रहालय का दौरा किया जिसमें वियतनाम में चम्पा सभ्यता के हिंदू और बौद्ध शिल्पतथ्य मौजूद हैं। वे यूनेस्को विश्व विरासत स्थल माई सन का दौरा करने वाले प्रथम भारतीय नेता भी हैं जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंदिरों के तीन समूहों के संरक्षण परिरक्षण और पुनरुद्धार पर कार्य कर रहा है।

राष्ट्रपतिजी की डा नांग और माई सन की यात्रा हमारे दोनों देशों के बीच संयुक्त सभ्यात्मक विरासत और संबंधों का उजागर करती है। कल हनोई पहुंचने पर राष्ट्रपति जी का हवाई अड्डे पर सम्मान गारद द्वारा भव्य स्वागत किया गया और उसके बाद राष्ट्रपतिजी ने दोनों देशों के चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वियतनाम-भारत व्यापार फोरम की बैठक में उपस्थित 350 प्रतिभागियों को संबोधित किया जिसमें वियतनाम के उप-प्रधानमंत्री भी उपस्थित थे।

अपने उद्बोधन में राष्ट्रपति जी ने दोनों देशों के व्यापारिक उद्योग समूहों के सहयोग की अनेक संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से कृषि, भेषजी, वस्त्र, नवीकरणीय ऊर्जा और आईटी सेवाओं का उल्लेख किया। बाद में उन्होंने भारतीय समुदाय तथा भारत के वियतनामी मित्रों को संबोधित किया और प्रवासी भारतीय समुदाय तक पहुंचने की सरकार की प्राथमिकता के बारे में बताया क्योंकि वे न केवल दो देशों के बीच मैत्री का सेतु हैं बल्कि वे जिस भी देश में रहते हैं, उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण योगदान भी देते हैं। उन्होंने भारत और वियतनाम को एक-दूसरे के साथ आने तथा मेकांग और गंगा की विद्धता से मार्गदर्शन लेकर उन्नति और प्रगति करने के लिए एक-दूसरे की मदद करने का आह्वान किया।

आज उनका स्वागत राष्ट्रीय एसेम्बली के चेयरपर्सन द्वारा किया गया जिन्होंने राष्ट्रपति जी के साथ बैठक में 2016 में प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक वियतनाम यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियों का स्मरण किया कि जबकि अन्य देश वियतनाम के पास युद्ध का संदेश लेकर आते हैं, वहीं भारत वियतनाम के पास शांति और प्रेम का संदेश लेकर आया है, ठीक वैसे ही जैसे 2000 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध का संदेश आया था।

राष्ट्रपतिजी का प्रधानमंत्री फुक द्वारा राष्ट्रीय एसेम्बली हॉल में गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया और उसके उपरांत भारत को दिए गए इस अत्यंत विशिष्ट सम्मान से अभिभूत होकर राष्ट्रपति ने वियतनाम की राष्ट्रीय एसेम्बली में संबोधन किया जिसमें राष्ट्रीय एसेम्बली, प्रांतों के प्रतिनिधि, अन्य मंत्री तथा उच्च स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। अत: राष्ट्रीय एसेम्बली के समक्ष दिया गया यह अत्यंत महत्वपूर्ण संबोधन था तथा राष्ट्रपति जी राष्ट्रीय एसेम्बली को संबोधित करने वाले प्रथम भारतीय नेता बने।

एसेम्बली में बोलते हुए. जैसा कि आपने भी नोट किया होगा, उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने वियतनाम को प्रथम देश इसलिए चुना कि वे दक्षिण पूर्व एशिया का दौरा करना चाहते थे और वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा वियतनाम एक ऐसा व्यापक रणनीतिक भागीदार है जिसके साथ हमें अपने दृष्टिकोणों की अभिसारिता रखते है और वैश्विक एवं प्रादेशिक मुद्दों पर हित रखते हैं। उन्होंने उन साझी चुनौतियों का भी उल्लेख किया जो हम भी झेल रहे हें तथा वियतनाम को अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

इसके उपरांत, राष्ट्रपति जी ने राष्ट्रीय नायकों और शहीदों के स्मारक का दौरा किया और हो ची मिन्ह मकबरे में स्मृति सुमन अर्पित किए। इसके पश्चात् राष्ट्रपतिजी और उनकी पत्नी का राष्ट्रपति फु ट्रोंग और उनकी पत्नी द्वारा राष्ट्रपति महल में औपचारिक स्वागत किया गय। दोनों नेताओं ने सीमित वार्ता तथा पूर्ण शिष्टमंडल स्तरीय वार्ता की। इसमें हुई चर्चा व्यापक लाभप्रद और विशिष्टत: सौहार्दपूर्ण थी। हमने पारस्परिक चिंता के द्विपक्षीय क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। राष्ट्रपति जी ने राष्ट्रपति फू ट्रोंग को व्यापक बहुमत से राष्ट्रीय एसेम्बली द्वारा वियतनाम के राष्ट्रपति निर्वाचित करने पर बधाई दी।

दोनों नेताओं ने उच्च स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान जारी रखने तथा व्यापक रणनीतिक भागीदारी के विभिन्न अवयवों विशेष रूप से रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक संबंध, विकास भागीदारी और लोगों-के-लोगों के साथ संबंधों में सहयोग को और गहन करने पर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच सक्रिय रक्षा और सुरक्षा सहयोग की भी चर्चा की जिसमें प्रशिक्षण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना और सामुद्रिक सुरक्षा भी शामिल हैं। उन्होंने 100 मिलियन डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट के क्रियान्वयन पर भी संतोष व्यक्त किया जिसका प्रयोग उच्च गति के ऑफ-शोर जलयानों के लिए किया जा रहा है। वियतनामी पक्ष ने 500 मिलियन डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट के लिए भारत को धन्यवाद दिया तथा भारत से आग्रह किया कि वह रक्षा क्षेत्र में उसकी अपेक्षाओं के लिए वियतनाम को सहयोग देना जारी रखे।

उन्होंने प्रथम सामुद्रिक वार्ता शीघ्र प्रारंभ करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया तथा साइबर सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की समीक्षा की तथा विश्वास जताया कि 15 बिलियन डॉलर का वह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा जो 2020 के लिए निर्धारित किया गया है। नेताओं ने वियतनाम में तेल और गैस क्षेत्र में वीओएल द्वारा पेट्रो वियतनाम के साथ सहयोग और निवेश का स्वागत भी किया तथा इस संबंध में त्रिपक्षीय करार की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच संयोजनता को सुकर बनाना व्यापार और व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

विकास सहयोग पर वियतनाम पक्ष ने आईटीईसी और आईसीसीआर छात्रवृत्तियों के अंतर्गत पिछले अनेक वर्षों से उसे प्रदान की जा रही मानव संसाधन विकास सहायता के लिए भारत की सराहना की। राष्ट्रपति फु ट्रोंग ने त्वरित प्रभाव परियोजनाओं, जिन्हें भारत द्वारा पिछले कुछ वर्षों से वियतनाम में चालू किया गया है तथा जयपुर फुट शिविरों के लिए आयोजित किए जा रहे शिविरों का उल्लेख किया।

राष्ट्रपति फु ट्रोंग ने वियतनाम में चाम समुदाय के साथ किए गए कार्य के लिए भारत का धन्यवाद किया। दोनों नेताओं ने एशिया प्रशांत क्षेत्र के संदर्भ में प्रादेशिक शांति और सुरक्षा की समीक्षा की। राष्ट्रपति जी ने एक मुक्त, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और अंतर्वेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र के भारत के दृष्टिकोण को दोहराया जो अंतर्राष्ट्रीय विधि तथा प्रादेशिक एकता और संप्रभुत्ता के लिए सम्मान पर आधारित हो जिसमें आसियान केन्द्रीयता और एकता उसके केन्द्र में स्थित हो।

दक्षिण चीन सागर पर अंतर्राष्ट्रीय विधि विशेष रूप से 1982 के यूएनसीएलओएस के अनुसार एक शांतिपूर्ण तरीके से विवादों के निपटान तथा नौवहन और उड़ानों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। दोनां नेताओं ने प्रादेशिक और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग देने तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सदस्यता सीट के निर्वाचन में एक-दूसरे की उम्मीदवारी के समर्थन देने पर भी सहम‍ति व्यक्त की।

वे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन को शीघ्र अंगीकृत करने के लिए आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करने पर भी सहमत हुए। राष्ट्रपति जी ने 2015-2018 के दौरान आसियान में समन्वयक देश के रूप में भूमिका निभाने के लिए वियतनाम की सराहना की जब आसियान और भारत के बीच सुदृढ़ और सतत् भागीदारी के 25 वर्ष के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। आप जानते ही हैं कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने के लिए संचार, उच्चतर शिक्षा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में चार समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

राष्ट्रपति जी प्रधानमंत्री फुक से भेंट करेंगे जो उन्हें आज निमंत्रण देंगे तथा उसके बाद उनके सम्मान में राष्ट्रपति फु ट्रोंग द्वारा रात्रि-भोज दिया जाएगा। एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया जाएगा जिसे आप वेबसाइट पर देखेंगे तथा यह ऐसा विस्तृत संयुक्त वक्तव्य होगा जिसे दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से स्वीकार किया जाएगा। रात्रि में राष्ट्रपति यात्रा के दूसरे चरण के लिए रवाना होंगे जो आस्ट्रेलिया है।

मैं केवल यही कर सकती हूं कि राष्ट्रपति जी की भारत के पूर्व की पहली यात्रा होने तथा इस वर्ष अक्तूबर में राष्ट्रपति फू ट्रोंग का निर्वाचन होने के बाद से दोनों देशों के नेताओं के बीच प्रथम संपर्क होने के नाते अत्यंत उल्लेखनीय और ऐतिहासिक यात्रा रही है। वियतनाम की राष्ट्रीय एसेम्बली को अपने संबोधन इस यात्रा को एक उल्लेखनीय यात्रा के रूप में उल्लेख किया गया है। अब मैं अपनी बात समाप्त करती हूं, धन्यवाद।

निदेशक (एक्सपीडी) : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद महोदया। अब मैं श्री अशोक मलिक से अनुरोध करूंगा कि वे कुछ टिप्पणियां करें।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अशोक मलिक : धन्यवाद वेंकट, सचिव महोदया द्वारा दी गई अत्यंत विस्तृत ब्रीफिंग के उपरांत मेरे पास कहने के लिए बहुत कम ही बचा है। मैं यही कहूंगा कि राष्ट्रपतिजी जिस भी देश की यात्रा करते हैं, उस यात्रा के चार पहलू होते हैं। सामान्यत: राजनीतिक और राजनयिक अवयव हैं, आर्थिक, व्यापार और व्यापार के अवयव भी हैं। प्रवासी भारतीयों से संपर्क का अवयव है और अंत में सांस्कृतिक राजनयिकता की शक्ति को जोड़ने का अवयव भी विद्यमान है।

यह अत्यंत दुर्लभ बात है कि किसी यात्रा में सभी चार अवयवों को शामिल किया जा सके। सामान्यत: हम दो या तीन को ही शामिल कर पाते हैं। वियतनाम की यात्रा इस मायने में असाधारण रूप से सफल रही है कि हमने सभी चार पहलुओं को कवर कर लिया है। जैसा कि सचिव महोदया ने बताया, राजनीतिक, राजनयिक और संबंधित मुद्दों पर पर्याप्त वार्ता की गई है। दोनों देशों और व्यापार फोरमों के बीच बढ़ते हुए व्यापार को प्रोत्साहित किया गया है। कल प्रवासी भारतीयों के साथ संपर्क किया गया जिसे सोशल मीडिया द्वारा पर्याप्त महत्व दिया गया।

अंतत: डा नांग की यात्रा ने यह दर्शाया कि भारत और वियतनाम के बीच बेहतर संयोजनता और दीर्घकालिक सभ्यात्मक संबंधी विद्यमान है तथा राष्ट्रपति ने माई सन मंदिर परिसर में पुनरुद्धार परियोजनाओं के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग की समीक्षा की। जैसा कि राष्ट्रपतिजी ने हमें बताया तथा वियतनाम के राष्ट्रपति ने भी इस तथ्य का उल्लेख किया कि 2018 राजनयिक संबंधों के संदर्भ असाधारण रूप से बेहतर वर्ष रहा है। ऐसा प्राय: नहीं होता कि दो देशों के बीच तीन उच्च स्तरीय दौरे आयोजित किए जाएं। जैसा कि सचिव महोदया ने बताया, वियतनामी प्रधानमंत्री और स्व. राष्ट्रपति इस वर्ष भारत में थे तथा इसके बाद भारत राष्ट्रपति यहां की यात्रा कर रहे हैं। यह बात हमें संकेत देती है कि संबंध अत्यंत बेहतर हैं तथा राष्ट्रपति को प्रसन्नता है कि वे इन संबंधों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। धन्यवाद।

निदेशक (एक्सपीडी) : धन्यवाद महोदय। अब आप अपने प्रश्न पूछ सकते हैं।

प्रश्न : राष्ट्रीय एसेम्बली में राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा था कि भारत अपने मित्रों को विकल्प लेने के लिए नहीं कहता है। वे किन विकल्पों की बात कर रहे थे, विशेष रूप से चीन या पाकिस्तान?

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह : देखिए, राष्ट्रपति जी का वक्तव्य स्वत: स्पष्ट है, मैं इसकी व्याख्या नहीं कर रही हूं बल्कि मैं उन चर्चाओं पर आती हूं जो हम तब करते हैं, जब हम विदेशों में जाते हैं तथा जो भी कुछ द्विपक्षीय संबंधों के बारे में चर्चा के दौरान होता है, प्रादेशिक मुद्दे तथा साझे और पारस्परिक हितों के मुद्दे।

जहां तक चीन सागर का संबंध है, यह सही है कि इस पर चर्चा हुई क्योंकि आप जानते हैं कि जहां तक भारत का संबंध है, हम जानते हैं कि हमारे व्यापार का एक बड़ा भाग दक्षिण चीन सागर से जाता है, अत: हमारा उस क्षेत्र में हित विद्यमान है। हम यह भी समझते हैं कि सभी विद्यमान मुद्दों का समाधान ताकत का प्रयोग किए बिना किया जाना चाहिए तथा उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस के अनुसार निपटाया जाना चाहिए। हम यह भी कहते हैं कि दोनों देश अर्थात् वियमनाम और भारत एक साझी स्थिति में है और वहां नौवहन की स्वतंत्रता उड़ानों की स्वतंत्रता तथा अबाधित आर्थिक संपर्क विद्यमान होना चाहिए। अत: हमने इस मुद्दे पर चर्चा की। इस पर विचारों की समानता थी और इस मुद्दे पर भारत और वियतनाम, दोनों के मध्य सकारात्मक अभिसारिता थी।

प्रश्न : आपके द्वारा दिए गए विवरण में, मामला भारत-प्रशांत प्रादेशिक सुरक्षा से संबंधित है, हमने स्थितियों की अभिसारिता की बात कही थी परंतु आप जानती हैं कि इसमें सूक्ष्म अर्थभेद है। वियतनाम के राष्ट्रपति ने भारत-एशिया-प्रशांत की बात कही थी। यह अभिव्यक्ति वियतनाम के प्रधानमंत्री द्वारा पहले भी प्रयोग में लाई गई है। क्या आप कहेंगी कि भारत-प्रशांत पर भारत और वियतनाम के बीच स्थिति की पूरी अभिसारिता है?

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह :
मैं यह कहूंगी कि जब आप संयुक्त घोषणा-पत्र को देखेंगे, तो आप जान पाएंगे कि उन सिद्धांतों पर सहमति है जिन पर भारत-प्रशांत क्षेत्र होना चाहिए। यह एक ऐसी सहमति है जो मुक्त होनी चाहिए। यह एक ऐसी सहमति है जो मुक्त होनी चाहिए, स्वतंत्र होनी चाहिए, शांतिपूर्ण होनी चाहिए, प्रगतिशील होनी चाहिए तथा यह अंतर्वेशी होनी चाहिए। अत: इस भावना में, दृष्टिकोणों में अभिसारिता विद्यमान है। अत: जैसा कि मैंने पहले कहा, भारत-प्रशांत सिद्धांतों पर दृष्टिकोण में अभिसारित है।

प्रश्न (जारी): .........अस्पष्ट........

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह : भारत-प्रशांत एक अवधारणा है, जो यहां लाई गई है, भारत-प्रशांत पर चर्चा की गई है, विचारों का आदान-प्रदान हुआ है तथा पिछले पूर्व एशिया शिखर-सम्मेलन में इस पर चर्चा की गई थी। ये विचार यहां विद्यमान हैं, तथा मैं यह कहूंगी कि जहां तक भारत का संबंध है, आसियान की केन्द्रीयता है। अत: मुझे लगता है कि आपको इसमें अधिक प्राप्त नहीं होगा। आपको इसके सिद्धांतों और करार को देखना चाहिए कि हमने सिद्धांत बनाए हैं और किस प्रकार क्षेत्र आगे बढ़ा है। यह बात सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रश्न : भारत वियतनाम को किन क्षेत्रों में मदद कर रहा है और जैसा आपने कहा, हमने वियतनाम को 2020 तक वित्तीय सहायता उपलब्ध करानी है, तो वियतनाम द्वारा अब तक कितना कार्य कर लिया गया है तथा किन-किन क्षेत्रों में?

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह : मैं भारत और वियतनाम के बीच संबंधों के आर्थिक पहलू के विवरण उपलब्ध कराउंगी। भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक पहलुओं में, व्यापार की स्थिति बहुत अच्छी है। यदि आप देखेंगे कि किस प्रकार व्यापार में वृद्धि हुई है, यह 2010 में केवल 3.8 बिलियन डॉलर था, आज यह 12.8 बिलियन डॉलर हो गया है तथा हमारे पास 2020 तक व्यापार का 15 बिलियन डॉलर का लक्ष्य है। अत: द्विपक्षीय व्यापार के लिए हमारे लिए यह लक्ष्य निर्धारित है।

जहां तक निवेश का संबंध है, आपने राष्ट्रपतिजी को सुना होगा, उन्होंने उन क्षेत्रों का काफी विस्तृत संकेत दिया जिसमें दोनों देश रुचि ले रहे हैं तथा साथ कार्य करने के इच्छुक हैं। तेल और गैस, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र भी इनमें शामिल हैं। उन्होंने इन सभी का उल्लेख किया तथा भेषजी का भी जिक्र किया अत: ये क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें हम एक सहयोगी तरीके से साथ मिलकर कार्य करने का प्रयास कर सकते हैं। हम क्षमता निर्माण के मुद्दे को भी देख रहे हैं। जैसा मैंने कहा, लगभग 200 आईटीईसी स्थान ऐसे हैं जो हम क्षमता निर्माण के लिए वियतनाम को दे रहे हैं। इसके अलावा, हमारे पास 48 छात्रवृत्तियां भी हैं।

अत: आर्थिक क्षेत्र में वियतनाम के साथ कार्य करने वाले सम्पूर्ण क्षेत्रों के भीतर क्षमता निर्माण में हमारा सहयोग अत्यंत गहन है तथा हम इसे आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रश्न : दोनों देशों के बीच चार समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत और वियतनाम के बीच सुदृढ़ संबंध हैं। ऐसे कौन से अन्य क्षेत्र हैं जहां हम आगे प्रगति कर सकते हैं?

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह : राष्ट्रपतिजी की यात्रा के दौरान, ये कुछ बातें हैं जिन पर चर्चा की गई है जिन समस्त क्षेत्रों में हम सहयोग कर सकते हैं, उन क्षेत्रों में हमारे करार नहीं है। जो कार्य प्रगति पर है, वहां हम उन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। जो भी आगामी क्षेत्र होगा, जहां सहयोग और सहायता की संभावना होगी, दोनों देश निरंतर संपर्क में रहेंगे, अत: चर्चाएं निरंतर जीवंत बनी हुई हैं। संबंधों में प्रगति हो रही है तथा प्रगतिशील संबंधों में नए क्षेत्र और नए आयाम खुलते ही रहते हैं। अत: मैं यही कहूंगी कि संबंधों में संवृद्धि हो रही है।

प्रश्न : राष्ट्रपतिजी द्वारा विकल्पों की बात किए जाने के बारे में, कि हम अपने मित्रों और सहयोगियों को चुनने का विकल्प नहीं देते, उनका क्या अर्थ था, वे किस प्रकार के विकल्प हैं?

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह : मैं यही कहूंगी कि उनका वक्तव्य स्वत: स्पष्ट है। मैं समझती हूं कि जब राष्ट्रपतिजी राष्ट्रीय एसेम्बली में बोले तथा वे पूरे वियतनाम राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे, तो उन्होंने उस नीति के बारे में कहा था जो वहां निर्मित हुई है। मैं समझती हूं कि हमें राष्ट्रपतिजी की व्याख्या नहीं करनी चाहिए, यह एकदम स्पष्ट है तथा इसका अर्थ भी स्वत: स्पष्ट है।

प्रश्न : हाइड्रोकार्बन पर, वियतनाम ने पहले भी भारतीय कंपनियों को तेल क्षेत्रों के लिए बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया था, वहां क्या स्थिति है? क्या हमने किसी क्षेत्र के लिए बोली लगाई है, आपने अभी त्रिपक्षीय करार का उल्लेख किया, हाइड्राकार्बन की क्या प्रगति है।

सचिव (पूर्व) सुश्री विजय ठाकुर सिंह : देखिए, हाइड्राकार्बन ऐसा क्षेत्र है, जिस पर हम वियतनाम के साथ पिछले 25 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। अत: हम पुराने साझेदार है, हम इसके लिए यहां हैं तथा जो प्रश्न पूछा गया है कि वे कौन से क्षेत्र हैं जिनको हम आगे शामिल करने का इरादा रखते हैं, हम अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जब कभी ऐसा अवसर आएगा, हमारी कंपनियां वहां होंगी तथा यह ऐसा क्षेत्र है जिस पर हम कार्य करते रहेंगे और यह बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र भी है और हम इसमें अवसरों की तलाश करते रहेंगे।

निदेशक (एक्सपीडी) : चूंकि अब और प्रश्न नहीं रह गए हैं, हम इस प्रेस ब्रीफिंग को समाप्त करते हैं। हमारे साथ यहां रहने के लिए आपका धन्यवाद।

(समाप्त)



टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code