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सिडनी के परामट्टा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का लोकार्पण करते हुए राष्ट्रपति का भाषण

नवम्बर 22, 2018

महामहिम प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन
परामट्टा शहर के लार्ड मेयर एंड्रयू विल्सन

देवियों और सज्जनों,


  • परामट्टा आकर मैं बेहद खुश हूँ। इस खूबसूरत माहौल में, हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करना मेरे लिए गौरव की बात है। आपके देश में उन्हें सम्मान देने के लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ। और यहाँ उपस्थित रहने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोरिसन का भी आभारी हूँ।
  • इस पहल की बहुत खास पहचान है। समय से परे उनके संदेशों और विरासत को दुनिया भर में प्रचारित करने के लिए, भारत सरकार ने, अभी एक महीने पहले ही, उनकी 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में द्विवार्षिक कार्यक्रम की शुरुआत की है। इन आयोजनों में हमारे साथ शामिल होने के लिए मैं आप सबको हार्दिक आमन्त्रण देता हूँ।
  • महात्मा गांधी का संबंध केवल भारत से नहीं था बल्कि वे पूरी दुनिया के थे। उनकी सार्वभौमिक शिक्षाओं की गूंज हर कोने तक है। संघर्ष के इस समय में, अहिंसा और शांतिपूर्ण अस्तित्व के उनके सन्देश अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनका प्रिय भजन या गीत "वैष्णव जन तो तेने कहिये”, जिसमें दया, सहानुभूति और दूसरों के लिए प्रेम भरा है, किसी के भी मस्तिष्क पर छा जाता है। यह महात्मा की अंतरात्मा की आवाज को दर्शाता है। मैं आपकी सुरीली गायिका हीथर ली को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने हमारे राष्ट्रपिता को श्रधांजलि देते हुए अपनी मधुर आवाज में ये भजन गाया। पांच महाद्वीपों के कई अन्य लोगों ने भी महात्मा के विचारों और विरासत को ऐसी ही श्रधान्जलि दी है।

    देवियों और सज्जनों,

  • महात्मा गांधी के विचार और उनके मूल्य इस धरती पर पूरी शक्ति और गहराई से गूँज रहे हैं। गांधी की विचारधारा और ऑस्ट्रेलियाई लोगों के जीने के तरीके के बीच एक खास जुड़ाव है। महात्मा गांधी ने हमेशा ही पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा के लिए अगुआई की है। दया और सहानुभूति के उनके विचार आस-पास के लोगों से कहीं दूर तक प्रसारित थे। जंगलों, नदियों और हमारी विरासत के लिए उनके मन में गहरा सम्मान था। ये वो मूल्य हैं जिन्हें आप अपने दैनिक जीवन में पूरे उत्साह से अपनाते, साझा करते और अपने ह्रदय के करीब रखते हैं।
  • इसके अलावा, गांधी जी और ऑस्ट्रेलियाई समाज एक ही तार से जुड़े हैं। उनमें भी, आप ही की तरह, बहुसंस्कृति लोकाचार के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने कहा जिसे मैं बता रहा हूँ, "मैं नहीं चाहता कि मेरे घर में चारों ओर दीवारें हों और मेरी खिड़कियाँ बंद हों। मैं चाहता हूँ कि सभी जगहों की संस्कृतियाँ पूरी आजादी से मेरे घर से आएं-जाएँ।" एक ऐसे देश में, जो संसार की हर संस्कृति के लोगों का घर है, महात्मा गांधी की विरासत इसके मूल्यों और विचारधारा के बिना प्रासंगिक नहीं हो सकती है।
  • आज प्रतिमा का अनावरण परामट्टा सिटी काउंसिल की पहल से होने वाला है जो उस ऐतिहासिक गठजोड़ का प्रतीक है जिससे हमारे देश आपस में बंधे हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और एक ऐसे देश के तौर पर, जो अपनी विविधता और खुलेपन का उत्सव मनाता है, हम ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने संबंध को लेकर गहरी ख़ुशी जाहिर करते हैं। एक-एक व्यक्ति का एक-दूसरे से जुड़ाव इस संबंध को और अधिक ऊर्जा और जीवंतता प्रदान करता है।
  • आगे बढ़ते हुए, मैं आशावान हूँ कि हमारे ये दोनों देश, जिनमें इतनी सारी समानताएं हैं, साथ मिलकर और भी बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं। इस विशेष अवसर पर, इतनी बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों के यहाँ मौजूद होने पर मैं अभिभूत हूँ। अपने इस नए घर और अपनी पूर्वजों की धरती के बीच के वे ही वास्तविक जीवित सेतु हैं। वास्तव में, गांधी जी खुद एक प्रवासी थे। भारत लौटने से पहले 21 वर्षों तक वे दक्षिण अफ्रीका में रहते थे और फिर वहां से आने के बाद उन्होंने अपने देश की दिशा-दशा बदल डाली।
  • मुझे ये बताने में ख़ुशी हो रही है कि इस खूबसूरत देश को राष्ट्र बनाने में सैकड़ों-हजारों कुशल, मेहनतकश, सतर्क और अन्वेषक प्रवासी भारतीयों का अथक योगदान रहा है। मैं उन्हें और सम्पूर्ण ऑस्ट्रेलिया वासियों को भारत के लोगों कि ओर से प्यार और शुभकामना देता हूँ।
  • क्या हम सभी आज मानवता की सेवा के लिए महात्मा गांधी के जीवन संदेशों और उनकी शिक्षा से प्रेरणा ले सकते हैं? इस आयोजन को सफल बनाने के लिए मैं एक बार फिर से लार्ड मेयर और उन सभी को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने इस लाजवाब पहल में अपना योगदान दिया है।
धन्यवाद

सिडनी
नवम्बर 22, 2108

 



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