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राष्ट्रपति की क्रोशिया, बोलीविया और चिली की आगामी यात्रा पर सचिव (पूर्व) द्वारा मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेखन

मार्च 23, 2019

अधिकारिक प्रवक्ता : एक बार पुन: नमस्कार!राष्ट्रपतिजी की अगले सप्ताह तीन देशों अर्थात् क्रोशिया, बोलीविया और चिली की प्रारंभ होने वाली यात्रा पर हम विशेष ब्रीफिंग का आयोजन कर रहे हैं। मेरे साथ यहां सचिव(पूर्व) हैं, राष्ट्रपति के प्रेस सचिव हैं तथा दो संयुक्त सचिव है जो क्षेत्र का कार्यभार संभालते हैं। डा.अंजू कुमार, संयुक्त सचिव(मध्य यूरोप) और श्री जी.वी. श्रीनिवास जो लातिन अमेरिकी देशों का कार्य देखते हैं। सचिव(पूर्व) की प्रारंभिक टिप्पणियों के उपरांत मैं प्रेस सचिव से उनकी टिप्पणियां आमंत्रित करूंगा और फिर हम प्रश्नोत्तर सत्र प्रारंभ करेंगे।

सचिव (पूर्व): नमस्कार! राष्ट्रपतिजी 25 से 28 मार्च तक क्रोशिया, 28 से 30 मार्च तक बोलीविया और 30 मार्च से 2 अप्रैल तक चिली की यात्रा करेंगे। जैसा कि मैंने कहा, राष्ट्रपति जी 25 से 28 मार्च तक क्रोशिया में होंगे तथा यह भारत के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा की जाने वाली पहली यात्रा होगी। क्रोशियाई पक्ष द्वारा भारत की एक बार यात्रा की गई थी। क्रोशिया के राष्ट्रपति मेसिक ने 2002 में भारत की यात्रा की थी। अत: यह 17 वर्ष के बाद दोनों देशों के बीच आयोजित की जाने वाली उच्च स्तरीय यात्रा है।

क्रोशिया इसकी भू-रणनीतिक अवस्थिति, यूरोपीय संघ और नाटो की इसकी सदस्यता को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण मध्य यूरोपीय देश है तथा यह एड्रिएटिक समुद्रतट के माध्यम से यूरोप जाने का उल्लेखनीय द्वार भी है।

2018 फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंचने की उनकी उपलब्धि ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका मान बढ़ाया है तथा मैं समझता हूं कि भारत में अनेक लोगों ने उस मैच को देखा होगा।

भारत-क्रोशिया संबंध भारत और क्रोशिया के बीच सोलहवीं शताब्दी से स्थापित ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित है। क्रोशियाई लोग भारत में गहन रुचि लेते हैं। जागरेब विश्वविद्यालय में भारतविद्या विभाग की स्थापना छह दशक पूर्व की गई थी जो क्रोशिया में अत्यंत प्राचीन विश्वविद्यालय है तथा वहां आईसीसीआर हिन्दी पीठ की स्थापना एक दशक पूर्व की गई थी।

1991 में क्रोशिया की आजादी के उपरांत, नाटो देशों के बीच मंत्रालयी स्तर के दौरों का आदान-प्रदान किया गया था। क्रोशिया के राष्ट्रपति ने 2002 में दौरा किया तथा हमारी ओर से उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने जून, 2010 में यात्रा की। हमारे वाणिज्य मंत्री ने फरवरी, 2018 में क्रोशिया की यात्रा की जब वहां एक द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग करार पर हस्ताक्षर किए गएथे। एक द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग करार पर हस्ताक्षर किए गए थे। उनके विदेश मंत्री अक्तूबर, 2018 में भारत आए। भारत और क्रोशिया के बीच 2017 में लगभग 200 मिलियन यूएस डॉलर का द्विपक्षीय संबंध है। परंतु अन्य के साथ-साथ वस्त्र, भेषजिक पदार्थों, रसायनों, इंजीनियरी सामान, खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी बेहतर गुंजाइश है। क्रोशिया के पास प्रमुख क्षेत्रों जैसे पोत-निर्माण, टीकाकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा में ठोस वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी आधार है। भारतीय कंपनियां भेषजी, नवीकरणीय ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में क्रोशिया में विद्यमान हैं। पत्तन अवसंरचना के विकास में भी निवेश के लिए गुंजाइश है। विभिन्न क्षेत्रों से एक व्यापार शिष्टमंडल भारत-क्रोशिया व्यापार फोरम के लिए क्रोशिया जाएगा ताकि वह दोनों देशों के बीच व्यापार सहयोग को प्रोत्साहित करने में सहायता प्रदान कर सके और वह फोरम राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान ही संचालित किया जाएगा।

राष्ट्रपति जी 25 मार्च, 2019 को दोपहर क्रोशिया पहुंचेंगे। अगले दिन, वे क्रोशिया के राष्ट्रपति और क्रोशिया के प्रधानमंत्री के साथ भेंट करेंगे। वे उनसे आमने-सामने तथा शिष्टमंडल स्तरीय वार्ताएं करेंगे। वे भारतीय समुदाय तथा भारत के क्रोशियाई मित्रों को संबोधित करेंगे। अगले दिन दोनों राष्ट्रपति, भारत के राष्ट्रपति और क्रोशिया के राष्ट्रपति भारत-क्रोशिया व्यापार फोरम बैठक को संबोधित करेंगे। इसके बाद, राष्ट्रपति जी जागरेब विश्वविद्यालय में व्याख्यान देंगे। कार्यक्रम के अन्य अवयवों में वॉयस ऑफ दि क्रोशियन विक्टिम्स - दि वॉल ऑफ पेन मैमोरियल के सामने मीरोगोज सीमेंट्री में पुष्पांजलि अर्पित करना भी शामिल है।

इसके बाद राष्ट्रपति जी लातिन अमेरिकी देशों की यात्रा पर निकलेंगे तथा क्षेत्र में उनकी यात्रा लातिन अमेरिका के देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंधों का एक भाग है। राष्ट्रपति जी 28 से 30 मार्च, 2019 तक बोलीविया की यात्रा करेंगे। राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से दोनों देशों के बीच यह पहली राज्य-स्तरीय यात्रा है।

भारत और बोलीविया प्राचीन सभ्यताएं हैं जिसकी समृद्ध और विविध संस्कृतियां हैं। हमारे द्विपक्षीय संबंध गर्मजोशी भरे और मित्रतापूर्ण रहे हैं। जिनमें पर्याप्त सद्भावना और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग स्थापित करने की इच्छा भरी है। दोनों देशों के बीच संबंध अभी तक मंत्रालयी स्तरों पर रहे हैं अथवा प्रादेशिक और बहुपक्षीय बैठकों के दौरान ही आयोजित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने 2014 में ब्राजील में ब्रिक्स शिखर-सम्मेलन के दौरान बोलीविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस से मुलाकात की। विदेश मंत्री ने पिछले सितम्बर में यूएनजीए के दौरान बोलीवियाई विदेश मंत्री से भेंट की।

बोलीविया स्थलरुद्ध देश है। यह खनिज संसाधनों में समृद्ध है। इसके पास लीथियम, स्वर्ण, रजत के पर्याप्त भंडार हैं और गैस रिजर्व है। बोलीविया का लीथियम तथा हमारीई-मोबिलिटी और ई-भण्डारण की आवश्यकताएं स्वाभाविक सहक्रियाएं उत्पन्न करती है। कंपनियों के एक शिष्टमंडल ने दौरा किया था तथा ब्रोलीवियाई कंपनियों के साथ चर्चा की थी और हमने यह भी देखा कि यदि बोलीविया अपने संसाधनों के औद्योगिकीकरण का विचार बनाता है, तो भारत उसका भागीदार हो सकता है, जो आधुनिक प्रौद्योगिकी और कौशल प्रदान कर सकता है। हमारी कुछ कंपनियां बोलीविया में मुख्यत: सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में है तथा कुछ कंपनियां वाहनों में भी हैं, जैसे टाटा मोटर्स, बजाज ऑटो, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा और उनके बोलीविया के साथ संपर्क हैं।

हमारे व्यापार ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है, यदि आप पिछले वित्तीय वर्ष 2017-2018 पर नज़र दौड़ाते हैं, तो हमारा व्यापार 205 प्रतिशत तक बढ़कर 772 मिलियन यूएस डॉलर हो गया है। भारत बोलीविया के लिए एक प्रमुख निर्यात गंतव्य बनकर उभरा है और बोलीविया लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में भारत का नौवां विशालतम व्यापार भागीदार है। भारत का आयात 667 मिलियन डॉलर तथा हमारा निर्यात 105 मिलियन डॉलर का है। हमारा मुख्य निर्यात वाहन तथा भेषजिक उत्पाद हैं। हम बोलीविया को तैयार करने के लिए क्षमता निर्माण सहयोग भी प्रदान करते हैं और राजनयिकों के प्रशिक्षण तथा आईटी में स्थान भी प्रदान करते हैं।

बोलीविया में राष्ट्रपति जी का कार्यक्रम बोलीविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस के साथ व्यक्तिगत और शिष्टमंडल स्तरीय वार्ताओं के साथ प्रारंभ होगा। वे भारत-बोलीविया व्यापार फोरम की बैठक में भाग लेंगे। वे यूनीवर्सिडाड आटोनोमा गैब्रियल रेनेमोरेनो के छात्रों के साथ भेंट करेंगे तथा उन्हें संबोधित करेंगे जो बोलीविया का विशालतम विश्वविद्यालय है तथा शिक्षण का एक महत्वपवूर्ण केन्द्र है जिसकी स्थापना 1880 में हुई थी।

राष्ट्रपति जी वहां भारतीय समुदाय से भी भेंट करेंगे जिनकी संख्या तो कम है फिर भी यह राष्ट्रपतिजी के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क होगा।

बोलीविया से राष्ट्रपति 30 मार्च को चिली जाएंगे। चिली की यात्रा दोनों देशों द्वारा हमारे राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को मनाने के रूप में की जा रही है। हमारे संबंध अत्यंत गर्मजोशी भरे हैं जिनमें अनेक मुद्दों पर समानता है। दोनों देश एक-दूसरे के साथ द्विपक्षीय आधार पर भेंट करते हैं तथा अनेक बहुपक्षीय मंचों पर भी मिलते हैं। हमारे अनेक मुद्दों पर समान दृष्टिकोण है, चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो, नवीकरण ऊर्जा हो या फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार या उसके सुधार का मामला हो।

पूर्व में हमारे चिली के साथ नियमित संपर्क रहे हैं। राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60वें वर्ष में चिली के राष्ट्रपति भारत में थे तथा हाल ही में, पिछले वर्ष दिसम्बर में चिली के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन पिनेर ने ब्यूनस आयर्स में जी-20 बैठक के दौरान भेंट की थी। बोलीविया ही की भांति, चिली के पास भी प्राकृतिक संसाधनों का पर्याप्त भंडार है जिसमें कॉपर, टिन और वन संसाधन शामिल हैं। इसका अंटार्टिका के विशाल भाग पर नियंत्रण है तथा एक विशाल सामुद्रिक सीमा भी है।

यह एक ऐसा देश है जो बाहरी विश्व के साथ पर्याप्त रूप से संबंध बनाता रहा है। इसके बड़ी संख्या में देशों और क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार करार हैं और चिली के साथ हमारा व्यापार बढ़ रहा है। यह आज एलएसी क्षेत्र में भारत का छठा विशालतम व्यापार भागीदार है और यह भागीदारी बढ़ रही है। हम चिली का अपने संबंधों के बारे में अन्य लातिन-अमेरिकी देशों के साथ चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में भी प्रयोग करते हैं। हमारे देश के राज्य मंत्री डा. वी.के. सिंह पिछले अक्तूबर को भारत-एलएसी व्यापार फोरम में भाग लेने के लिए चिली में थे।

हमारा आयात लगभग 2 बिलियन है जो मुख्यत: कॉपर, आयोडीन, वुड पल्प औरमॉलीब्डेनम में है। हमारा निर्यात 764 मिलियन डॉलर है तथा यह मुख्यत: वाहनों और भेषजिक पदार्थों में है।

दोनों देशों के बीच विभिन्न निवेशों में, हमारा लगभग 216 मिलियन डॉलर का भारतीय निवेश है जबकि चिली ने लगभग 105 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। अत: हम यह देख रहे हैं कि किस प्रकार व्यापार और आर्थिक संबंधों में वृद्धि की जाए तथा यह राष्ट्रपतिजी की इस यात्रा का महत्वपूर्ण बिंदु है। चिली अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि में शामिल हुआ है तथा इसने नवीकरणीय ऊर्जा में अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है अत: नवीकरणीय ऊर्जा भी हमारे दो देशों के बीच चर्चा का एक भाग रहेगा।

राष्ट्रपतिजी चिली की अपनी यात्रा के दौरान शैक्षणिक समुदाय और छात्रों से भी भेंट करेंगे। वर्तमान में, वे वहां भारतीय समुदाय के साथ भी भेंट करेंगे, जो लगभग तीन हजार है जिनमें भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्ति शामिल हैं।

यदि आप राष्ट्रपति जी के कार्यक्रम को देखेंगे, तो उनकी चिली के राष्ट्रपति सेबस्टीन पिनेरा के साथ सीमित और शिष्टमंडल स्तर की भेंट है वे छात्रों से भेंट करेंगे तथा यूनीवर्सिटी ऑफ चिली में एक भाषण भी देंगे। यूनीवर्सिटी ऑफ चिली ने एक नैनो-सैटेलाइन बनाया था तथा 2017 में उस उपग्रह को भारतीय अंतरिक्ष वाहन द्वारा प्रक्षिप्त किया गया था। राष्ट्रपति जी भारत-चिली व्यापार बैठक में भाग लेंगे तथा भारतीय समुदाय से भी भेंट करेंगे। चिली के साथ हमारी चर्चाएं संबंधों को सुदृढ़ बनाने तथा विशेष रूप से आर्थिक चर्चाएं संबंधों को सुदृढ़ बनाने तथा विशेष रूप से आर्थिक संबधों, व्यापार और निवेश संबंधों पर आधारित होंगी।

अत: आप देख सकते हैं कि इन देशों की राष्ट्रपति जी की यात्रा में एक पूर्ण एजेंडा शामिल किया गया है। हमारी राजनीतिक चर्चाएं होंगी तथा व्यापार और आर्थिक संबंधों पर भी बात होगी। भारतीय समुदाय के साथ भी भेंट की जाएगी तथा युवा छात्रों और युवाओं के साथ भी मुलाकात होगी। हमें आशा है कि राष्ट्रपति जी की यह यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को पुन: स्फूर्त बनाएगी तथा इन तीन देशों के साथ हमारे संबंधों को ए‍क नई दिशा प्रदान करेगी। इससे पूर्व मैं अपनी बात समाप्त करूं, मैं बताना चाहूंगा कि राष्ट्रपति यात्रा से वापस आते समय दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में विश्राम के लिए रुकेंगे तथा वह इस अवसर का प्रयोग नेल्सन मंडेला को श्रंद्धाजलि प्रदान करते हुए करेंगे तथा वे वहां भारतीय समुदाय से भी भेंट करेंगे। अब मैं अपनी बात यहीं समाप्त करता हूं।

अधिकारिक प्रवक्ता : अब मैं राष्ट्रपति के प्रेस सचिव की अशोक मलिक से आग्रह करता हूं कि वे अपनी बात रहें।

प्रेस सचिव : धन्यवाद, नमस्कार, मित्रों। सचिव(पूर्व) द्वारा की गई अत्यंत विस्तृत ब्रीफिंग के बाद मेरे कहने के लिए काफी कम ही बचता है। मैं आपको राष्ट्रपतिजी की यात्रा के बारे में कुछ आंकड़े बताऊंगा। यह राष्ट्रपति कोविंद की नौवी राजकीय यात्रा है तथा कैलेंडर वर्ष 2019 की पहली यात्रा है। यह उनके राष्ट्रपति पद के दूसरे वर्ष की पांचवीं यात्रा है, जो पिछले वर्ष जुलाई में प्रारंभ हुआ था। अत: कुल मिलाकर यह नौवीं, दूसरे वर्ष में पांचवीं तथा कैलेंडर वर्ष 2019 में पहली यात्रा है। अब तक उनहोंने 17 देशों की यात्रा की है और इसके साथ वे 20 देशों की यात्रा कर लेंगे। जैसा कि सचिव महोदय ने बताया, यह भारत के राष्ट्रपति की क्रोशिया और बोलीविया की पहली यात्रा है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा चिली की यह तीसरी यात्रा है।

राष्ट्रपति कोविंद दूसरी बार दक्षिण अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं। पिछले वर्ष जून में, उन्होंने सूरीनाम की यात्रा की थी। इस वर्ष वे चिली और बोलीविया की यात्रा कर रहे हैं। बोलीविया में सांताक्रूज और बाद में चिली में सांतियागो राष्ट्रपति कोविंद के लिए सर्वाधिक दूरस्थ स्थानों का प्रतिनिधित्व करेंगे जिनकी उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के रूप में यात्रा की है। सांतियागों नई दिल्ली से लगभग 17000 किमी की दूरी पर है। जैसा कि सचिव महोदय ने बताया, तीनों देशों में राष्ट्रपति व्यापारिक समारोहों को तथा विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करेंगे। व्यापारिक शिष्टमंडल और व्यापर संवर्धन उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह यात्रा राजनयिक दृष्टि से रोमांचक तथा अवसरों से भरी है। यह एक संभार-तंत्र संबधी चुनौती भी है तथा इसमें दो ऐसी उड़ानें शामिल हैं, जो 13 घंटे की हैं, एक उड़ान 11 घंटे की है तथा एक उड़ान 10 घंटे की है। यदि आप राष्ट्रपति जी का संपूर्ण उड़ान समय देखेंगे, तो वे 50 घंटे 40 मिनट की उड़ान भरेंगे जो आपको उनकी यात्रा के बारे में बताता है। इसके साथ ही, मैं यहां समाप्त करूंगा और प्रश्नों का उत्तर देने की प्रतीक्षा करूंगा।

अधिकारिक प्रवक्ता : धन्यवाद, अशोक जी। अब मैं आपके प्रश्नों को आमंत्रित करता हूं।

प्रश्न : मेरा प्रश्न चिली पर है। पिछले दशक के प्रारंभ में भारत ने चिली को हैलीकॉप्टरों की आपूर्ति की थी। क्या अब आप उस सहयोग को पुनर्जीवित करने के लिए किसी नए रक्षा सहयोग करार पर विचार कर रहे हैं?

उत्तर : हमारा चिली के साथ रक्षा करार है। वस्तुत: एक शिष्टमंडल ने हाल ही में चिली का दौरा किया है। वह अभी वापस लौटा है। अत: राष्ट्रपतिजी के चिली में रहने के दौरान रक्षा संबंध भी वार्ता का भाग होगा।

प्रश्न : महोदया, क्या आप हमें बता सकती है कि भारत और बोलीविया के बीच कितने समझौता-ज्ञापनों के हस्ताक्षर होने की संभावना है तथा क्या सरकार बोलीविया में दूतावास खोलने की योजना बना रही है क्योंकि वहां अभी तक कोई दूतावास नहीं है?

उत्तर : इस पर वार्ताएं चल रही हैं, अत: जब दोनों राष्ट्रपतियों के बीच बातचीत प्रारंभ होगी तो हम आपको बता पाएंगे कि कौन से करारों पर हस्ताक्षर हुए हैं। जहां तक दूतावास खोले जाने का संबंध है, यह हमारे एजेंडा पर शामिल है तथा हम इस मुद्दे को उठाएंगे।

अधिकारिक प्रवक्ता : यात्रा के किसी अन्य पहलू पर कोई अन्य प्रश्न है?

प्रश्न : राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान, क्या सीआईआई, एफआईसीसीआई तथा अन्य व्यापारिक शिष्टमंडल साथ जाएगा?

उत्तर : जी हां, शिष्टमंडल भी साथ जाएंगे, जो राष्ट्रपतिजी यात्रा के दौरान तीनों देशों के साथ रहेंगे। इसमें 20 से अधिक सदस्य होंगे। क्रोशिया में 35 तथा अन्य दो देशों में क्रमश: 20 और 30 सदस्य होंगे।

प्रश्न : चिली में क्या कतिपय मदों पर शुल्क की कटौती पर भी बात होंगी। क्या वार्ताओं के दौरान उस पर भी चर्चा होगी?

उत्तर : जी हां, जैसा मैंने कहा कि हमारा चिली के साथ एक प्रधान व्यापार करार है। ऐसे भी मुद्दे हैं जो बाजार की पहुंच और टैरिफों से जुड़े हैं तथा जब आप इन संबंधों का मूल्यांकन करेंगे तो ये सामने आएंगे और हमारे देश के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं का भाग बनेंगे।

प्रश्न : वे यूरोपीय देशों को जा रहे हैं तथा वे अन्य यूरोपीय देशों तथा कुछ दक्षिणी यूरोप और मध्य यूरोप के देशों को भी जाएंगे। इसका क्या अर्थ है, मैं समझता हूं कि राष्ट्रपति द्वारा इन देशों के साथ संबंधों में वृद्धि हो रही है, विशेष रूप से दक्षिण यूरोप भारत के साथ।

उत्तर : देखिए, विश्व के साथ भारत के संबंध बढ़ रहे हैं तथा बढ़ते हुए संबंधों के भाग के रूप में, हम यह महसूस करते हैं कि राष्ट्रपतिजी की यात्रा इस संबंध को मजबूत बनाएगी तथा राष्ट्रपतिजी की ये यात्राएं रिश्तों का निर्माण करेंगी और इन देशों के साथ हमारे संबंधों के आयामों को और अधिक गहराई प्रदान करेंगी।

प्रश्न : चिली ने पहले ही भारत से एक लघु उपग्रह छोड़ा है, अत: क्रोशिया कोई अन्य योजना बना रहा है और क्या बोलीविया अंतरिक्ष के किसी अन्य कार्यक्रम की योजना बना रहा है?

उत्तर : चिली के साथ हमारे अंतरिक्ष सहयोग है तथा उन पर चर्चा की जाएगी। बोलीविया के साथ, हम संभावनाओं को तलाशेंगे,लेकिन फिलहाल हमारे साथ बोलीविया के साथ हमारा अंतरिक्ष में कोई सहयोग नहीं है। परंतु हम संभावनाओं और अवसरों को तलाशेंगे और मुझे आशा है कि क्रोशिया के साथ भी हम निरंतर संभावनाओं को देखेंगे, परंतु अभी की स्थिति के अनुसार हमारे पास दोनों देशों के साथ कोई संबंध नहीं है, परंतु हम वहां भी संभावनाएं तलाशेंगे।

प्रश्न : चिली के अलावा, क्रोशिया और बोलीविया भी क्या रक्षा संबंधों के बारे में चर्चा करेंगे?

उत्तर : देखिए, उच्च स्तरीय दौरे समस्त क्षेत्रों को परखने के लिए अवसर प्रदान करते हैं और यह भी देखा जाता है कि संभावनाएं कहा हैं। मैं उन विवरणों में नहीं जाऊंगा कि चर्चा में क्या शामिल किया जाएगा परंतु जब आप संपूर्ण संबंधों की समीक्षा करेंगे तो ऐसे मुद्दे होंगे जो सामने आएंगे और हम उन्हें चर्चा के दौरान उठाएंगे।

अधिकारिक प्रवक्ता : इसके साथ ही आदरणीय राष्ट्रपति की तीन देशों की यात्रा पर हमारी यह विशेष ब्रीफिंग समाप्त होती है।

महोदया आपका और अन्य सभी का हमारे साथ यहां रहने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।



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