श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों। 05 से 10 अगस्त 2024 तक राष्ट्रपति महोदया जी की फिजी, न्यूज़ीलैंड और तिमोर-लेस्ते की आगामी राजकीय यात्राओं पर सचिव (पूर्व), श्री जयदीप मजूमदार द्वारा इस विशेष वार्ता में मैं आप सभी का स्वागत करता हूं। हमें हर्ष है कि इस मंच पर हमारे साथ राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अजय सिंह; ओशिनिया क्षेत्र की संयुक्त सचिव श्रीमती परमिता त्रिपाठी और उस क्षेत्र में दक्षिण देशों के मामलों को संभालने वाले संयुक्त सचिव श्री आशीष सिन्हा भी यहां मौजूद हैं। इसके साथ ही, मैं यह मंच सचिव महोदय को सौंपता हूं।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद रणधीर और आप सभी मीडिया के मित्रों को गुड आफ़्टरनून। राष्ट्रपति महोदया जी की तीन देशों की आगामी यात्रा पर इस विशेष वार्ता में आने के लिए धन्यवाद। जिन तीन देशों की यात्रा पर राष्ट्रपति जी जाने वाली हैं, उनकी जानकारी रणधीर ने अभी आपको दी है।
तो मैं इन यात्राओं का संदर्भ एक संक्षिप्त विवरण देकर शुरू करता हूं। तो राष्ट्रपति जी सबसे पहले फिजी, फ़िर न्यूज़ीलैंड और आख़िर में तिमोर-लेस्ते जाएंगी। फिजी और तिमोर-लेस्ते दोनों के लिए यह भारत के राष्ट्रपति की पहली यात्रा होगी, लिहाजा इसका विशेष महत्व है। जब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपनी 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी की घोषणा की है, तब से इस क्षेत्र में, दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र पर हमारा ख़ास ध्यान रहा है। तो ये तीनों देश हमारी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत आते हैं।
न्यूज़ीलैंड के साथ हमारी बहुत पुरानी और मज़बूत साझेदारी है, जिसे हम प्रशांत द्वीप देशों के साथ अपने संबंधों में आगे बढ़ा रहे हैं। तिमोर-लेस्ते को भी आसियान के सदस्य के रूप में स्वीकार किया गया है। इसमें शामिल होने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह आसियान का 11वां सदस्य बन जाएगा। और, जैसा कि आप सभी जानते हैं, फिजी के साथ हमारे बहुत पुराने और मजबूत संबंध हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत और प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए 2014 में फिजी से FIPIC फ़ोरम की शुरुआत की थी। इसलिए, यह प्रशांत द्वीप समूहों के साथ हमारे संबंधों का एक मज़बूत स्तंभ है। तो यह आपको इन तीन यात्राओं के महत्व का पूरा संदर्भ देता है।
तो सबसे पहले, राष्ट्रपति जी फिजी के राष्ट्रपति महामहिम रातू विलियमे कातोनिवेरे के निमंत्रण पर प्रशांत क्षेत्र के हमारे विशेष सहयोगी फिजी का दौरा करेंगी। राष्ट्रपति जी 5 से 7 अगस्त के बीच वहां रहेंगी। हमने फिजी में अपनी राजनयिक उपस्थिति के 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं; भारतीय आयोग, तब जैसा इसे कहा जाता था, की वहां 1948 में स्थापना की गई थी, ये फिजी को 1970 में आज़ादी मिलने से बहुत पहले की बात है।
इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति जी सुवा में राष्ट्रपति कातोनिवेरे और फिजी के प्रधानमंत्री महामहिम श्री सितिवेनी राबुका दोनों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। इसके अलावा, राष्ट्रपति जी फिजी की संसद को भी संबोधित करेंगी और सांसदों के साथ बातचीत करेंगी, जैसा कि आप जानते हैं कि वहां के सांसदों में कई भारतीय मूल के हैं। फिजी के लोगों के साथ हमारे बहुत मज़बूत संबंध हैं। वहां पहुंचने वाले शुरुआती भारतीय 1879 के आसपास अनुबंधित मज़दूर या जैसा कि उन्हें कहा जाता है 'गिरमिटिया' के रूप में आए थे। आज, फिजी की एक तिहाई से अधिक आबादी भारतीय मूल की है, और उन्होंने स्थानीय कलेवर को जोड़ते हुए भारत की अपनी भाषा, रीति-रिवाजों और परंपराओं को बरकरार रखा है। इसलिए, इस राजकीय यात्रा के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में राष्ट्रपति जी सुवा में वहां समुदाय से मुलाक़ात करेंगी।
यह यात्रा भारत और फिजी के लोगों की प्रगति और समृद्धि के लिए हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने की दोनों देशों की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराती है। भारत फिजी के विकास का एक मज़बूत भागीदार रहा है, इसने वहां कई परियोजनाएं शुरू की हैं और लाइन ऑफ़ क्रेडिट की पेशकश भी की है। हम सुवा में 100 बिस्तरों वाला एक तृतीयक स्तरीय अस्पताल भी स्थापित करेंगे और इसकी घोषणा हमारे प्रधानमंत्री ने कुछ वर्ष पहले की थी। हमें उम्मीद है कि इसे बहुत जल्द लागू किया जाएगा। इसलिए यह भी हमारी चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय होगा।
यात्रा के दूसरे चरण में राष्ट्रपति जी 8 और 9 अगस्त को गवर्नर-जनरल, महामहिम द राइट ऑनरेबल डेम सिंडी किरो के निमंत्रण पर न्यूजीलैंड की राजकीय यात्रा पर रहेंगी। यह भारत के राष्ट्रपति की आठ साल बाद न्यूज़ीलैंड की यात्रा होगी। गवर्नर-जनरल महामहिम डेम सिंडी किरो के साथ द्विपक्षीय बैठकों के अलावा, राष्ट्रपति जी प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफ़र लक्सन, उप-प्रधान मंत्री एवं विदेश मंत्री श्री विंस्टन पीटर्स से भी मुलाक़ात करेंगी। श्री विंस्टन पीटर्स इस वर्ष मार्च में भारत आए थे। वो राष्ट्रपति जी से शिष्टाचार मुलाक़ात करेंगे। उसी शाम शाम गवर्नर-जनरल राष्ट्रपति महोदया जी के सम्मान में भोज का आयोजन करेंगी।
जैसा कि आप जानते हैं, अपने द्विपक्षीय संबंधों के लिए न्यूज़ीलैंड सरकार ने भारत को एक विशेष फ़ोकस देश बनाया है। न्यूज़ीलैंड भारत को रक्षा और सुरक्षा तथा समग्र द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, लोगों से जुड़ाव आदि में एक प्रमुख साझेदार के रूप में मान्यता देता है। इसलिए, यह यात्रा अपने आप में बहुत अधिक महत्वपूर्ण होगी। शिक्षा हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ी भूमिका निभाती है। न्यूज़ीलैंड में पढ़ रहे छात्रों के मामले में हम दूसरे सबसे अधिक छात्रों वाले देश हैं, क़रीब 8,000 भारतीय छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं, और इसलिए राष्ट्रपति जी वेलिंगटन में एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करेंगी, जहां भारत गेस्ट ऑफ़ ऑनर है। यह शैक्षिक संबंध के महत्व को रेखांकित करता है, इस क्षेत्र में न्यूज़ीलैंड भारत के साथ काम करना चाहता है और वहां जाने वाले छात्रों के अलावा हमारी शिक्षा प्रणाली और हमारे शैक्षिक संस्थानों के साथ सहयोग करना चाहता है।
अगले दिन, राष्ट्रपति जी ऑकलैंड में एक सामुदायिक स्वागत समारोह में भारतीय प्रवासियों और भारत के मित्रों के साथ बातचीत करेंगी। जैसा कि आप जानते हैं, वहां की 5 मिलियन की आबादी में से लगभग 3,00,000 प्रवासी भारतीय हैं। वो न्यूज़ीलैंड समाज के साथ बहुत अच्छे से जुड़ गए हैं और वास्तव में दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल हैं। न्यूज़ीलैंड के साथ मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंधों को हाल के वर्षों में बढ़ते देखा गया है तथा इस यात्रा से कई क्षेत्रों में बढ़ते संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद है।
न्यूज़ीलैंड से, राष्ट्रपति जी तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति महामहिम जोस रामोस-होर्ता के निमंत्रण पर तिमोर-लेस्ते की यात्रा करेंगी और 10 अगस्त को मुख्य कार्यक्रमों का दिन होगा। जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि यह भारत से राष्ट्राध्यक्ष स्तर की पहली तिमोर-लेस्ते यात्रा की है। अपनी यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक के अलावा राष्ट्रपति जी प्रधानमंत्री महामहिम श्री सानाना गुसमाओ के साथ भी मुलाक़ात करेंगी, इसके अलावा तिमोर-लेस्ते में रहने वाले भारतीयों और भारत के मित्रों के साथ एक सामुदायिक स्वागत समारोह का आयोजन भी होगा। हमारे बीच द्विपक्षीय सहयोग के कई क्षेत्र हैं, जिन पर हम तिमोर-लेस्ते की सरकार के साथ काम करना चाहेंगे, जैसे- आईटी, डिज़िटलीकरण, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और क्षमता निर्माण।
जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति जी की यात्रा तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के सात महीने बाद हो रही है, जब राष्ट्रपति होर्ता ने इस साल जनवरी में वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत का दौरा किया था, उस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी।
हमने तिमोर-लेस्ते में अपना मिशन खोलने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने पिछले साल सितंबर में इसकी घोषणा की थी और हम अपना दूतावास स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जिसे बहुत जल्द ही स्थापित कर दिया जाएगा। इस बीच तिमोर-लेस्ते ने भी नई दिल्ली में अपना दूतावास खोलने की इच्छा जताई है, हमने इसका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया है, तो इस तरह से यह दिल्ली और दिली का जुड़ाव होगा जो दोनों दूतावासों के खुलने के उपरांत और भी मज़बूत बनेगा। इसके अलावा, तिमोर-लेस्ते एक युवा और जीवंत लोकतंत्र है जिसके साथ कई वर्षों से हमारे संबंध मधुर और सौहार्दपूर्ण रहे हैं, लिहाजा यह यात्रा बहुत ठीक समय पर हो रही है और तिमोर-लेस्ते और भारत के संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अब मैं यहीं रुकना चाहूंगा और यदि आप के कोई सवाल हैं तो उनका जवाब देना चाहूंगा।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो सवालों के लिए मंच को खोलने से पहले, मैं अनुरोध करता हूं कि कृपया अपने प्रश्न तीन राजकीय यात्राओं पर ही केंद्रित रखें।
सिद्धांत: सर, मेरा पहला सवाल भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति के संदर्भ में है कि ये यात्राएं कितनी महत्वपूर्ण हैं? और मेरा दूसरा सवाल ये है कि आपने दिली में भारतीय दूतावास खोलने की बात की, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने की थी। क्या हम इसके लिए कोई समयसीमा या किसी महीने पर विचार कर रहे हैं? मेरा तीसरा और अंतिम सवाल, क्या फिजी की संसद में राष्ट्रपति का संबोधन हिंदी में होगा?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद। मुझे उम्मीद है कि आपके पहले सवाल का जवाब मैं हमारी ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी के संदर्भ में इन तीन देशों की यात्रा का महत्व बताने के क्रम में समुचित रूप से दे सका हूं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन तीन देशों के साथ हमारा बहुत मज़बूत, गहरा और ऐतिहासिक संबंध है, और क्योंकि हमारे पास बहुत सी चीज़ें हैं जो हमें लगता है कि हम भविष्य के लिए उनके साथ कर सकते हैं, चाहे वह विकास का क्षेत्र हो, अलग-अलग क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का क्षेत्र हो या रक्षा एवं सुरक्षा का क्षेत्र हो। यही इस यात्रा का महत्व है। राष्ट्रपति महोदया हिंदी में बोलेंगी या अंग्रेज़ी में या किसी भाषा में, इंतज़ार कीजिए और देखिए। मैं आपको आश्चर्यचकित होने के लिए आमंत्रित करता हूं। अन्य सवाल क्या था?
सिद्धांत: सर, भारतीय दूतावास खोलने को लेकर, क्या कोई समयसीमा है?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): हां, तो हमने पहले ही एक टीम की पहचान कर ली है जो दूतावास खोलने के लिए जल्द ही दिली में होगी। हम एक राजदूत नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं। इसी तरह तिमोर-लेस्ते की ओर से, हम उनकी टीम के आने और उनके दूतावास स्थापित करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। और कम से कम हमारी ओर से यह अगले कुछ महीनों के भीतर हो जाना चाहिए।
हुमा: सर, मैं फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस से हुमा सिद्दीकी हूं। आपने न्यूज़ीलैंड के संदर्भ में रक्षा एवं सुरक्षा का उल्लेख किया। रक्षा एवं सुरक्षा को लेकर हम न्यूज़ीलैंड के साथ वास्तव में किस बारे में बात करने जा रहे हैं और आपने यह भी बताया कि राष्ट्रपति शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करने वाली हैं। यह सम्मेलन किस बारे में है?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): तो, पहले पार्ट पर, मैंने इस क्षेत्र में, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, न्यूज़ीलैंड के साथ हमारी बातचीत के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में रक्षा और सुरक्षा का उल्लेख किया है। जब न्यूज़ीलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मार्च में भारत आए थे, तब भी इस पर चर्चा हुई थी, और यह व्यक्त किया गया था कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें न्यूज़ीलैंड भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ जुड़ना चाहेगा और इसलिए हम इस पर बातचीत करेंगे।
जैसा कि मैंने बताया, एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में शिक्षा है और न्यूज़ीलैंड में भारत के कई छात्र पढ़ते हैं। न्यूज़ीलैंड के शैक्षणिक संस्थान भी भारतीय संस्थानों के साथ गठजोड़ की रुचि रखते हैं, संस्थानों की स्थापना के साथ ही संयुक्त डिग्री और इस तरह के अन्य कार्यों में सहयोग करना चाहते हैं। हमारे पास पहले से ही डेकिन यूनिवर्सिटी के रूप में एक मिसाल है, लेकिन इस पर अभी आगे बात होनी है कि इसे कैसे आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है और भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के संदर्भ में कौन से मॉडल मौजूद हैं?
सिद्धांत: हैलो सर। मेरा सवाल सचिव (पूर्व) से है। सर, मैं सीएनएन न्यूज़18 से सिद्धांत हूं। सर, हम देख रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद से भारत की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है। कई उच्च-स्तरीय यात्राएं हुई हैं, वियतनाम के प्रधानमंत्री भी यहां आए थे, फिर एनएसए डोभाल बिम्सटेक के लिए गए थे। पूर्व के मित्रों और भागीदारों पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया। अब आज आप राष्ट्रपति जी की तीन देशों की यात्रा की जानकारी देने के लिए यहां हैं। सर, मैं यह समझना चाहूंगा... क्या आप कनेक्टिविटी डोमेन पर कुछ नज़रिया साझा कर सकते हैं, तो जहां तक कनेक्टिविटी डोमेन का सवाल है, पूर्वी साझेदार और सहयोगी कितने महत्वपूर्ण हैं, और इस दिशा में हमने अब तक क्या प्रगति हासिल की है। धन्यवाद।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): ये एक ऐसा विषय है जिस पर हम विस्तार से चर्चा कर सकते हैं। लेकिन ये खेदजनक है कि आज की प्रेस वार्ता केवल राष्ट्रपति जी की यात्रा के बारे में है। तो इस तथ्य के सिवा कि हम कनेक्टिविटी को बहुत समग्र रूप से देखते हैं, ये केवल परिवहन एवं संचार को लेकर फ़िज़िकल कनेक्टिविटी नहीं है, बल्कि डिज़िटल कनेक्टिविटी, लोगों से कनेक्टिविटी, पंरपरागत और आध्यात्मिक कनेक्टिविटी भी है। तो ये सभी अलग-अलग पहलू हैं जो इस क्षेत्र को भारत से जोड़ते हैं। और हम इस पर सभी मोर्चे पर काम कर रहे हैं। तो इसके अलावा, मैं राष्ट्रपति जी की यात्रा के मुख्य विषय से हटना नहीं चाहूंगा। धन्यवाद।
सिद्धांत: सर, मेरा सवाल अजय सर से है। अजय सर, क्या आप राष्ट्रपति जी की अब तक की गई विदेश यात्राओं की संख्या बता सकते हैं, राष्ट्रपति मुर्मू की, क्या आपके पास ये संख्या है?
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: हम इस बारे में आपको अपडेट कर सकते हैं। सिद्धांत, हम इसे लेकर आपके पास वापस आएंगे। तो इसके साथ ही हम इस सत्र को समाप्त करते हैं। यहां आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। सर, हमारे मीडिया मित्रों से बात करने को लेकर अपना समय निकालने के लिए धन्यवाद।