श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): सभी को नमस्कार। "नी सा बुला विनाका"। जैसा कि आप सभी जानते हैं, माननीया राष्ट्रपति जी इस क्षेत्र की तीन देशों की यात्रा पर हैं और फिजी उनका पहला पड़ाव है। हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि यह अब तक की यात्रा गर्मजोशी से भरी हुई और ऐतिहासिक यात्रा रही है। यह राष्ट्रपति जी की फिजी की पहली यात्रा है, और हम फिजी सरकार और लोगों द्वारा माननीय राष्ट्रपति जी और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल को दिए गए भव्य आतिथ्य के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता और सराहना व्यक्त करना चाहते हैं।
जैसा कि आप जानते हैं, भारत और फिजी एक बहुत ही विशेष और स्थायी बंधन और संबंध साझा करते हैं। यह संबंध लगभग डेढ़ शताब्दी पुराना है, और भारत और फिजी एक-दूसरे के साथ अपने संबंधों को लगातार मज़बूत कर रहे हैं। यह भारत का प्रयास रहा है कि हम प्रशांत क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करें। समग्र रूप से इस पूरे क्षेत्र, क्षेत्र के देशों के साथ द्विपक्षीय रूप से, और भारत और प्रशांत द्वीप समूह सहयोग के लिए हमारे कार्य-उन्मुख फोरम के तहत, जिसे हम एफआईपीआईसी- फिपिक कहते हैं। फिजी हिंद-प्रशांत में हमेशा से हमारा बहुत खास साझेदार बना रहा है। यदि आपको याद हो, भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने यहां फिजी के सुवा में पहले फिपिक शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया था। इसलिए इस संदर्भ में राष्ट्रपति जी की यात्रा बहुत महत्व रखती है। यह निश्चित रूप से एक नए अध्याय को चिह्नित करता है क्योंकि हम उस गति को और शक्ति दे रहे हैं जो पिछले कई वर्षों के दौरान हमारे दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संपर्कों के बढ़ते स्तर से उत्पन्न हुई है, और जिसे फिजी में भारत की राजनयिक उपस्थिति के 75 साल पूरे होने से भी चिह्नित किया गया है।
और अब कार्यक्रम पर आते हैं। जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति जी आज सुबह नाडी से सुवा पहुंचीं, और उनके आगमन पर, उन्हें फिजी सैन्य पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उनका पारंपरिक स्वागत किया गया जिसमें फिजी के प्रधानमंत्री ने भी भाग लिया। हवाईअड्डे से रास्ते में, सैकड़ों स्कूली बच्चों द्वारा सड़कों पर खड़े होकर राष्ट्रपति जी का स्वागत किया गया। और उनके प्रति दिखाए गए बच्चों के उत्साह और बच्चों द्वारा उन्हें अभिवादन करते हुए देखना दिल को छू लेने वाली घटना रही। यह एक बहुत ही मार्मिक अनुभव था।
स्टेट हाउस में राष्ट्रपति जी ने फिजी के राष्ट्रपति महामहिम रातू विलियमे मैवलीली काटोनिवेरे से मुलाक़ात की। साथ में, उन्होंने स्टेट हाउस की सोलराइजेशन परियोजना को देखा, जिसे भारत ने हमारी विकास साझेदारी के हिस्से के रूप में पूरा किया है, और यह परियोजना जलवायु संवेदनशीलता और जलवायु न्याय के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। प्रधानमंत्री, महामहिम सितिवनी राबुका ने भी अपने कई मंत्रिस्तरीय सहयोगियों के साथ राष्ट्रपति जी से मुलाक़ात की, और उन्होंने कई विषयों पर व्यापक चर्चा की जिसमें उन्होंने प्रगति और समृद्धि के लिए हमारे द्विपक्षीय संबंधों को बढाने के साथ ही दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी विश्वास और मज़बूत प्रतिबद्धता की पुष्टि की। फिजी के राष्ट्रपति ने माननीया राष्ट्रपति को ऑर्डर ऑफ फिजी से भी सम्मानित किया था, जिसकी राष्ट्रपति जी और उनके प्रतिनिधिमंडल ने बहुत सराहना की।
इसके बाद राष्ट्रपति जी ने ऐतिहासिक संबोधन में फिजी संसद को संबोधित किया और संसद सदस्यों के साथ बातचीत की जिससे हमारे दोनों देशों के बीच मज़बूत लोकतांत्रिक संबंधों की पुष्टि होती है। उन्होंने इससे कुछ देर पहले ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और सुवा में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।
दोपहर की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने अतिथि हमारी राष्ट्रपति जी और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए लंच की मेजबानी की। आज यहां एक सामुदायिक संवाद भी आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति जी ने फिजी में भारतीय मूल के समुदाय को संबोधित किया और फिजी के विकास और दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में उनके विशाल योगदान को मान्यता देते हुए गिरमिटिया के योगदान की सराहना की। मुझे लगता है कि हमारे घनिष्ठ और लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों का एक बड़ा हिस्सा लोगों के बीच संबंधों पर आधारित है और फ़िजी की लगभग एक तिहाई आबादी की जड़ें भारत में हैं। उन्होंने विशिष्ट फिजी शैली में अपनी संस्कृति, परंपराओं और भाषा को भी बरकरार रखा है।
भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में उपप्रधानमंत्री डॉ. बिमान प्रसाद की भी गरीमामयी उपस्थिति रही। राष्ट्रपति जी ने हर साल गिरमिट दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की सराहना की और इस तथ्य की भी सराहना की कि हिंदी अब फिजी की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। आज शाम को, राष्ट्रपति काटोनिवेरे राष्ट्रपति जी के सम्मान में एक स्वागत समारोह की मेजबानी करेंगे।
यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर भारत सरकार की अनुदान सहायता परियोजनाओं के रूप में सुवा में स्थापित होने वाले 100 शैय्या वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2023 में यानी पिछले साल तीसरी फिपिक शिखर सम्मेलन के दौरान की थी, के लिए परियोजना स्थल का औपचारिक आवंटन किया गया। हमें विश्वास है कि जनता की भलाई के लिए यह महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा, न केवल फिजी, बल्कि पूरे प्रशांत क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य देखभाल की डिलीवरी में एक आदर्श बदलाव लाएगा। इस यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण परिणाम हमारे उच्चायोग परिसर और सुवा में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण के लिए फिजी सरकार द्वारा भूमि के आवंटन के तौर पर देखने को मिला।
मैं यहां यह कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं कि राष्ट्रपति जी की यात्रा न केवल भारत और फिजी के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को मज़बूत करती है, बल्कि फिजी के साथ हमारी बहुआयामी साझेदारी को अगले चरण तक ले जाने के लिए मंच भी तैयार करती है। धन्यवाद और यदि आपका कोई प्रश्न हो तो मुझे उत्तर देने में खुशी होगी।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): धन्यवाद सर। अब, मैं प्रश्नों के लिए आप सभी को आमंत्रित करता हूं। प्रश्न पूछने से पहले आप अपना परिचय दें।
वंदना: सर, मैं डीडी न्यूज़ से वंदना (अश्रव्य) हूं। मैं जानना चाहती हूं कि प्रशांत क्षेत्र और विभिन्न क्षेत्रों में एक भागीदार के रूप में भारत-फिजी संबंधों का भविष्य कहां दिखता है।
श्री साईं: सर, मेरा नाम श्री साईं है, मैं ऑल इंडिया रेडियो से हूं। मेरा प्रश्न यह है कि सर, फिजी में भारतीयों के पास निवेश के क्या अवसर हैं? और मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि हम यहां लोगों से लोगों के जुड़ाव का उल्लेख कर रहे हैं, तो भारतीय उच्चायुक्त कार्यालय इन संबंधों को लगातार बढ़ावा देने और उन्हें अगले चरण तक ले जाने के लिए क्या काम कर रहा है? धन्यवाद।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद। पहले प्रश्न के उत्तर में, जैसा कि मैंने कहा, हम इस क्षेत्र में हमारे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक के रूप में फिजी पर भरोसा करते हैं। इसके विस्तार के रूप में इन संबंधों का हम एक उज्ज्वल भविष्य देखते हैं। हम कई विविध क्षेत्रों में अपने संबंधों को गति दे रहे हैं, उदाहरण के लिए, उनमें से एक है- स्वास्थ्य। डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में, सेवाओं की डिलीवरी के लिए फिजी में सार्वजनिक प्रशासन में उपयोग किया जा सके इसके लिए भारत के डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोगी और शानदार तत्वों को फिजी में लाकर उपयोग करने का काम किया जा रहा है, जो मुझे लगता है कि एक वास्तविक गेम चेंजर होगा। यह दूसरा क्षेत्र है। पर्यटन भी एक ऐसा सेक्टर है जिसमें अच्छी संभावनाएं हैं, मैं किसी से बात कर रहा था कि भले यहां से सीधी उड़ानें ना हों पर भारत में हमारे पास ऑस्ट्रेलिया के लिए सीधी उड़ानें हैं, और बाली के लिए भी, इसलिए यहां के लोगों के लिए भारत की यात्रा करना आसान है। तो ये कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनके बारे में मुझे लगता है कि ये ऐसी चीजें हैं जो वास्तव में रिश्ते को तुरंत लाभ पहुंचा सकती हैं। एक अन्य क्षेत्र शिक्षा है, जिस पर भी हम विचार कर सकते हैं। निवेश के अवसरों के संदर्भ में, मुझे यकीन है कि भारत द्वारा निवेश के लिए पर्यटन एक बहुत बड़ा सेक्टर है। इसमें बहुत अवसर हैं। आपमें से जो लोग भारत आए हैं, वे जानते होंगे कि हमारे पास दुनिया की कुछ बेहतरीन होटल श्रृंखलाएं हैं, पर यह अफ़सोस की बात है कि ये होटल यहां फिजी में नहीं हैं। हमारी होटल श्रृंखलाओँ के पास दुनिया के कई स्थानों पर होटल हैं, न केवल हमारे पड़ोसी देशों में स्थित हैं, बल्कि मिस्र और यूरोप और अन्य जगहों पर भी ये स्थित हैं। यदि वे होते, तो मुझे लगता है कि आपके पास और भी अधिक भारतीय पर्यटक होते। इसलिए मुझे यकीन है कि यह निवेश का एक बेहतरीन अवसर है।
निश्चित रूप से हमारे उच्चायुक्त यहां हैं। उनके पास भारत से हो सकने वाले निवेश के अवसरों के बारे में और भी कई विचार होंगे। और जहां तक दोनों देशों के बीच के लोगों में परस्पर संबंध और संवाद का सवाल है, तो इन सवालों के बारे में सटीक जानकारी देने के लिए हमारे उच्चायुक्त ही सबसे सही व्यक्ति हैं। लेकिन मंत्रालय में सचिव (पूर्व) होने के नाते, जहां तक मुझे पता है, ये छात्रवृत्ति के मामले में बहुत काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए यहां के छात्रों और लोगों को यदि भारत में विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अध्ययन या प्रशिक्षण देना, पारंपरिक चिकित्सा में, योग को बढ़ावा देना है तो वो बहुत काम कर रहे हैं, इस बात से आप भलीभांति परिचित हैं। बाकी, मैं अब उन पर ही छोड़ रहा हूं कि वो बताएं कि वे क्या कर रहे हैं।
श्री पी.एस. कार्तिगेयन, फिजी में भारत के उच्चायुक्त: धन्यवाद सर। सचिव (पूर्व) ने जो उल्लेख किया है, उसको विस्तार देते हुए में सबसे पहले, व्यापार के अवसरों, बल्कि निवेश के अवसरों, और फिर मैं प्रवासी क्षेत्र की पहल पर जाऊंगा। निवेश के अवसरों के संदर्भ में, यह बहुत स्पष्ट है, क्योंकि जैसा कि सचिव ने उल्लेख किया है, देश की सकल घरेलू उत्पाद का 40% से अधिक अकेले पर्यटन क्षेत्र से आता है। मेरा मतलब है, इसमें भारत से निवेश आकर्षित करने की जबरदस्त क्षमता है। और हम पर्यटन क्षेत्र की क्षमता के संदर्भ में आवश्यकता से अवगत हैं। और मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि, अभी कुछ महीने पहले, माननीय उप प्रधानमंत्री, श्री विलीम गावोका, जो नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्री भी हैं, की यात्रा के दौरान हमने शीर्ष भारतीय आतिथ्य समूहों जैसे ताज और ओबेरॉय ग्रुप के साथ हमने विशेष रूप से कुछ बैठकें आयोजित की थीं। मैं समझता हूं कि चर्चाएं अभी चल रही हैं, इसलिए हम यहां कुछ भारतीय समूहों की निवेश की रुचि को फलीभूत होते देखने की उम्मीद कर रहे हैं।
अन्य अवसरों के संबंध में, मैं फिर से डिजिटल क्षेत्र में बहुत सारे अवसर देखता हूं। मेरा मतलब है, हम केवल प्रवासी पक्ष के साथ जुड़ाव तक ही सीमित नहीं रहेंगे। हम अन्य सेक्टर्स की तरह ही इसे अगले चरण तक ले जाना चाहते हैं। हम विशेष रूप से नालेज पार्टनरशिप के संबंध में, डिजिटल साझेदारी एक ऐसी चीज है जिस पर हम उत्सुकता से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। और फिर, यह एक सुखद संयोग है कि हमारी विशेषज्ञता और जिस तरह से हम भारत में डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं, उसे देखते हुए फिजी की ओर से भी इसमें काफी रुचि है। यह सेक्टर दोनों देशों के दो क्षेत्रों यानी जीवन में सुगमता लाने के साथ ही व्यापार करने में सुविधा में भी सुधार लाने में सक्षम है। फिजी की ओर से भी इसमें बहुत रुचि है, मेरा मतलब, डिजिटल सहयोग की दिशा में, इसलिए चर्चा चल रही है, और शायद हम जल्द ही कुछ घोषणा करने में सक्षम होंगे।
प्रवासी केंद्रित पहलों के संबंध में, जैसा कि सर, सचिव (पूर्व) द्वारा उल्लेख किया गया था कि जहां तक हमारी बहुआयामी साझेदारियों का सवाल है, हाल के वर्षों में, हमने अभूतपूर्व, उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान देखे हैं, जिसने हमें ठोस रूप से बहुत मज़बूत दिशा और पथ पर खड़ा किया है। लेकिन समानांतर रूप से, हम यह भी जानते हैं कि, जैसे फिजी एक ऐसा देश है जहां पर प्रवासी बड़ी संख्या में रहते हैं तो, ऐसे में हमारे आपसी वर्तमान अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव को और अधिक पोषित और मज़बूत करने के लिए, हमारा फिजी सरकार और प्रवासी संगठनों, यहां के सामुदायिक संगठनों सहित सभी हितधारकों के साथ जुड़ना महत्वपूर्ण है। तो चाहे वह 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन का जश्न मनाने के संदर्भ में हो, एक ऐतिहासिक वैश्विक कार्यक्रम, जो हमने पिछले साल फिजी सरकार के साथ संयुक्त रूप से किया था, या यहां तमिल भाषा के शिक्षण को पुनर्जीवित करने और फिर से शुरू करने के लिए चल रहे प्रयास हों। फिजी में, शिक्षा मंत्रालय, फिजी सरकार और एक अग्रणी प्रवासी समुदाय संगठन, संगम के साथ साझेदारी हो; या गिरमिट विरासत का जश्न मनाना या स्मरण करना, या यहां तक कि प्रवासी युवाओं को उनके पूर्वजों की भूमि से फिर से जोड़ना हो, हम उस पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
वास्तव में, इस कार्यक्रम के बारे में, जिसे नो इंडिया प्रोग्राम कहा जाता है और जो दुनिया भर के भारतीय प्रवासी युवाओं के लिए है, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि फिजी वह देश है जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक संख्या में इस स्लॉट का उपयोग करता है। और इसका श्रेय यहां के प्रवासी समुदाय द्वारा अपनी जड़ों से वापस जुड़ने में दिखाई गई गहरी दिलचस्पी को जाता है। इसके अलावा, हमें कई अन्य प्रवासी समुदाय संगठनों के साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, और ऐसे कई अवसर हैं जिनके माध्यम से हमें उनके साथ जुड़ना होगा और इस संबंध को मज़बूत करना होगा। उदाहरण के लिए, हम यहां समबुला गुरुद्वारा साहिब के ऐतिहासिक शताब्दी समारोह का हिस्सा बने, जो पूरे प्रशांत क्षेत्र का सबसे पुराना गुरुद्वारा है। और हम जल्द ही हॉवेल्स रोड, संगम मंदिर में भी शताब्दी समारोह में भी ऐसा कुछ करने वाले हैं।
तो ये ऐसी पहलें हैं जो साल भर चल रही हैं। वास्तव में, अयोध्या में ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भी, शायद फिजी एकमात्र देश है जहां हमारे सांस्कृतिक केंद्र को सीधे अयोध्या से आया एक सांस्कृतिक समूह मिला था, और हमने यहां पूरे देश में अपनी तरह से राम लला उत्सव मनाया था। यह कार्यक्रम ये सुनिश्चित करने के लिए था कि भारतीय मूल के लोग उस ऐतिहासिक अवसर से चूक ना जाएं।
तो यह ऐसी चीज़ है जिसके बारे में हम गहराई से जानते हैं, और हम इस पर बहुत ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, और ये प्रयास जारी रहेगें। मुझे विश्वास है कि, जैसा कि मैं कुछ दिन पहले अपने दोस्तों को बता रहा था, जहां तक फिजी के साथ संबंधों का सवाल है, अभी भी सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है। धन्यवाद।
विवेक: गुड इवनिंग सर. मैं विवेक पाठक हूं, मैं डीडी न्यूज़ से हूं। सर, दो दिन पहले हमें फिजी के उप प्रधानमंत्री श्री बिमान प्रसाद जी से मिलने का मौका मिला। उन्होंने दो सेक्टर्स का जिक्र किया जिसमें वे भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। पहला है पर्यटन, और पर्यटन क्षेत्र में, उन्होंने फिजी को विवाह स्थल के रूप में बढ़ावा देने पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह चाहते हैं कि भारत इस सेक्टर में विशेष रूप से फिजी के साथ जुड़े। और दूसरा, उन्होंने कहा कि वह यह भी चाहते हैं कि भारत कृषि क्षेत्र में फिजी के साथ जुड़े। वे अधिक कृषि सहयोग चाहते हैं। सर, क्या निकट भविष्य में कोई योजना है?
श्री पी.एस. कार्तिगेयन, फिजी में भारत के उच्चायुक्त: देखिए, मुझे लगता है कि पर्यटन, हम पहले ही चर्चा कर चुके हैं कि क्या संभावनाएं हैं और क्या किया जा सकता है। खेदजनक है कि, एक पर्यटन स्थल के रूप में फिजी में आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या बहुत कम है। मेरा मानना है कि पिछले साल इस देश में आने वाले पर्यटकों की कुल संख्या लगभग 929,000 थी। लेकिन मैं समझता हूं, भारत से, यह संख्या मुश्किल से कुछ हजारों में ही थी। तो निःसंदेह... इस सेक्टर में भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार और सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार है। इसलिए इस सेक्टर के हितधारकों के लिए यह निश्चित रूप से तर्कसंगत होगा कि, चाहे वह पर्यटन कंपनियां हों या फिजी एयरवेज और अन्य हितधारक हों, उन्हें बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए, उन्हें सुनिश्चित और नियमित कनेक्टिविटी देने के लिए भारतीय बाजार पर ध्यान दें। क्योंकि यह एक बड़ी बाधा है जो हमें भारतीय पर्यटकों को भारत से यहां लाने में दिखती है। इसलिए, मुझे लगता है कि एक बार जब कनेक्टिविटी समेत वे मुद्दे ठीक हो जाएं तब आप इस समस्या का हल स्वतः देखेंगे। क्योंकि भारतीय सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक हैं और दुनिया भर में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले पर्यटकों में से एक हैं। इसलिए यह फ़िजी के हितधारकों पर निर्भर है कि वे सबसे तेज़ बाज़ार के साथ कैसे जुड़ेंगे।
दूसरी बात कृषि के बारे में, हम दृढ़ता से कृषि क्षेत्र में लगे हुए हैं। यह हमारे मुख्य क्षेत्रों में से एक है जहां हम कई दशकों से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अब भी जब मैं बोल रहा हूं, तो एक भारतीय विशेषज्ञ हैं, शायद पूरे दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में एकमात्र प्लांट पैथोलॉजिस्ट हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त किया गया है। ऐसी वो एकमात्र अधिकारी है और वह फिजी के गन्ना अनुसंधान संस्थान के साथ काम कर रही हैं। यह एक भारतीय विशेषज्ञ हैं, जो भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं। तो ऐसे लोगों की संख्या काफी है। हमने, अभी एक या दो महीने पहले, फिजी के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को भारत भेजा था जिससे वो कृषि से जुड़े सबसे अच्छे तरीके सीखें, अनुसंधान स्टेशनों का दौरा करें और यह देखें कि वे यहां कृषि क्षेत्र को और विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी को कैसे अपना सकते हैं। हम ये कार्य और अधिक करने के लिए तैयार हैं। फिजी में कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जहां मुझे काफी संभावनाएं नजर आती हैं। और हमें फिजी पक्ष की आवश्यकताओं को पूरा करने में खुशी होगी। जैसा कि पहले टिप्पणियों के दौरान उल्लेख किया गया था, हमारी विकास साझेदारी बहुत अनूठी है क्योंकि यह पूरी तरह से मांग पर आधारित है। आपकी प्राथमिकता क्या है? और आप किस गति में सहज हैं? हम उसी गति औऱ प्राथमिकता पर चलते हैं। इसलिए हम यहां अपने दोस्तों से यह जानने के लिए तैयार होंगे कि प्राथमिकता वाला क्षेत्र क्या है। और फिर हम एक मज़बूत और लचीला रिश्ता बनाने के लिए इसी के हिसाब से उनके साथ साझेदारी करेंगे।
वक्ता: सर, क्या भारत और फिजी के बीच सीधी उड़ान कनेक्टिविटी की कोई योजना है?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): निस्संदेह, यह एक ऐसा विषय है जो बातचीत में बार-बार सामने आया है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में अब सभी विमान सेवाएँ निजी तौर पर संचालित होती हैं। ये वास्तव में व्यावसायिक निर्णय होंगे जो वे लेंगे। लेकिन निश्चित रूप से जहां तक अवसरों को इंगित करने का सवाल है, हम एयरलाइंस को इंगित करेंगे कि फिजी के साथ पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण अवसर हैं।
मानसी: सर, मानसी (अश्रव्य) न्यूज से। मैं बस यह जानना चाहती हूं, जैसा कि आप लोगों ने पर्यटन के बारे में अधिक बात की है, और जैसा कि उन्होंने पर्यटन के मामले में भारत से फिजी आने वाले लोगों की कम संख्या के बारे में भी बात की है, भारत सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि यह स्थिति सुधरे, और फिजी में आने वाले भारतीय पर्यटक बढ़ सकें?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): हमें पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में आपके उच्चायोग के साथ काम करने में खुशी होगी। मैं आपके उच्चायुक्त से बात कर रहा था जो यहां दौरे पर आए थे, और वह बता रहे थे कि बड़े शहरों के बाहर फिजी के बारे में इतनी कम जागरूकता क्यों है। दिल्ली में, बेशक, लोग जानते हैं, लेकिन अगर आप दूसरे शहरों में जाते हैं, तो शायद उन्हें यह पता नहीं होता कि फिजी कैसे जाएं, वहां क्या ऑफर है। वे जानते हैं कि फिजी प्रशांत क्षेत्र में भारत का करीबी साझेदार देश है। वे जानते हैं कि यहां भारतीय मूल की बड़ी आबादी रहती है. इसके अलावा, वे उस स्थान की सुंदरता या सुविधाओं, आपके पास मौजूद सुंदर होटलों के बारे में नहीं जानते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि हम भारत में फिजी पर्यटन को बढ़ावा देने में निश्चित रूप से आपके उच्चायुक्त के साथ साझेदारी कर सकते हैं।
मानसी: मेरा एक और सवाल है सर. जैसा कि आपने उल्लेख किया है... फिजी में भारतीय राष्ट्रपति का फोकस समझौते पर हस्ताक्षर रहा, क्या भारत और फिजी के बीच भविष्य की विकास योजनाओं के संदर्भ में कोई अन्य चर्चा हुई है?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): हमने उन व्यापक क्षेत्रों पर चर्चा की जिनका मैंने उल्लेख किया है, जैसे स्वास्थ्य क्षेत्र है, जो न केवल उस अस्पताल तक सीमित है जिसे हम बना रहे हैं, बल्कि भारतीय फार्माकोपिया के कार्यान्वयन के संदर्भ में भी है। भारतीय फार्माकोपिया की मान्यता, भारत से सस्ती लेकिन विश्व स्तरीय जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता को लेकर है यह यहां पर वास्तव में बहुत अधिक मदद करने वाली है। यह आयाम तो पहले से ही फ़िजी स्वास्थ्य क्षेत्र की मदद कर रहा है, लेकिन यह अब और भी अधिक प्रभावी ढंग से कर सकता है। तो यह एक संपूर्ण क्षेत्र है। और दूसरा क्षेत्र, जैसा कि मैंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में उल्लेख किया है, जो दो सेक्टर्स में गेम चेंजर भी साबित हो सकता है पहला फिजी में स्टार्ट-अप तंत्र बनाने, उदाहरण के लिए, पूरे डिजिटल स्पेस को विकसित करने और दूसरा, लोगों को सार्वजनिक वस्तुओं की डिलिवरी करने में। तो ये कुछ बड़े क्षेत्र हैं जिन पर हमने चर्चा की।
वक्ता 2: मेरा नाम (अश्रव्य) है, और मैं फिजी टाइम्स का रिपोर्टर हूं। मेरा प्रश्न यह है कि, जबकि फिजी नशीली दवाओं के संकट से जूझ रहा है, और इस यात्रा के साथ, क्या कोई रास्ता है, या क्या भारत फिजी में नशीली दवाओं के इस मुद्दे से लड़ने में फिजी की सहायता करेगा? और यदि भारत ऐसा कर रहा है तो, कैसे?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): आप जानते हैं, जैसा कि उच्चायुक्त ने उल्लेख किया है, हमारी विकास साझेदारी अधिकांश मांग आधारित होती है, और फिजी सरकार और फिजी के लोग जो भी चाहते हैं, हमें उन मुद्दों पर विचार करके और उसमें सहयोग करने में बहुत खुशी होगी कि हम उसमें कैसे योगदान दे सकते हैं। फिलहाल, मैं यह नहीं कह सकता कि नशीली दवाओं के मुद्दे, नशीली दवाओं की समस्या में हमारा कोई सीधा सहयोग है, लेकिन यह समस्या हमारे देश में भी है तो इससे निपटने के लिए हमारे पास कुछ तरीके और टूल हैं। इसलिए यदि फिजी को लगता है कि उन्हें इसमें कुछ सहायता की आवश्यकता हो सकती है, तो हमें इस पर विचार करने में बहुत खुशी होगी।
वक्ता 3: गुड इवनिंग, सर। फिजी में आपका स्वागत है, मैं फिजी लाइव से (अश्रव्य) हूं। मेरे पास आपके लिए दो प्रश्न हैं, सर। अभी आपने आदान-प्रदान के मांग आधारित होने का उल्लेख किया है, मेरा पहला प्रश्न चिकित्सा पर्यटन के आसपास होगा, यह देखते हुए कि बड़ी संख्या में फ़िजीवासी उपचार के लिए भारत की यात्रा कर रहे हैं, इसे और कैसे मज़बूत किया जा सकता है? फिर मेरा दूसरा प्रश्न दोनों देशों के बीच खेल और सांस्कृतिक कूटनीति के संबंध में है। इसके लिए मैं दो उदाहरण देता हूं विशेष रूप से, खेल कूटनीति, हमारे सबसे महान टेनिस खिलाड़ी अब (अश्रव्य) के लिए आपके राष्ट्रीय कोच है, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कूटनीति के संदर्भ में, हाल ही में रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी जैसे बॉलीवुड सितारों ने हमारे देश का दौरा किया है, और फिर इससे पहले भी इलियाना डिक्रूज़ जो एक एंबेसेडर के रूप में यहां आई थीं। तो इस पर आपके क्या विचार हैं?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): जहां तक चिकित्सा पर्यटन का सवाल है, हमने पर्यटकों के लिए चीजों को आसान बनाने की कोशिश की है। हमने ई-मेडिकल वीज़ा की व्यवस्था की है, यानी हम चिकित्सा के लिए इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल वीज़ा उपलब्ध करा रहे हैं। इससे यह प्रक्रिया बहुत आसान और सहज हो जाती है। इसमें आपको व्यक्तिगत रूप से कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है। आप जब भारत पहुंचते हैं और आपके पासपोर्ट पर आपके वीज़ा की मुहर लग जाती है। निश्चित रूप से यह सुगमता लाता है। और फिर भारत के बड़े अस्पताल समूह भी फिजी आए हैं जो लोगों को यह बताने के लिए यहां आए कि वहां पर क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं। वास्तव में मेरे यहां आने से ठीक पहले एक बड़े समूह ने भी मुझसे संपर्क किया और मुझे बताया कि वे फिजी के चिकित्सा पर्यटकों के लिए अपनी सेवाएं देने के लिए क्या कर रहे हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां बहुत अधिक संभावनाएं हैं क्योंकि हमारे पास फिलीपींस जैसे दूर-दूर से लोग हैं जो आपसे बहुत दूर नहीं है, कुछ प्रशांत द्वीप देशों से भी भारत की यात्रा करते हैं। उदाहरण के लिए, पलाऊ। वे इलाज के लिए भारत जाते हैं इसलिए ही नहीं कि यह बहुत सस्ता है, बल्कि मुख्य रूप से इसलिए जाते हैं क्योंकि यह बहुत अच्छा है और कम लागत का भी है। इसलिए भले ही उन्हें हवाई यात्रा करनी पड़े, भले ही उन्हें वहां जाकर रहना पड़े, फिर भी उनके पास मौजूद विकल्पों की तुलना में उन्हें यह एक बेहतर पैकेज लगता है।
जहां तक खेल कूटनीति का सवाल है, हां मुझे लगता है कि हमने इसके बारे में बात की। राष्ट्रपति ने हमारे राष्ट्रीय कोच के बारे में उल्लेख किया था और मैं एक रहस्य बता सकता हूँ कि उनके दामाद भी खुद एक रग्बी खिलाड़ी है, इसलिए, वो रग्बी और इस खेल के बारे में जानती है और उन्हें इस विषय में रुचि है। इसलिए मुझे लगता है कि यह एक और चीज है जो इस समय भारत और फिजी को एक संबंध में एक साथ बांध रही है। तो उन्होंने बताया कि शायद एक दिन, हम अभी भी आपके जितने अच्छे नहीं हैं, लेकिन हो सकता है कि एक दिन हम दोनों के बीच मैच हो सके। हां, हम इसका इंतजार कर रहे हैं। यह फिजी से भारत के लिए कुछ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसा होगा। हम इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
वक्ता 4: सर, इसी बात को विस्तार देते हुए, हमारे राष्ट्रीय फुटबाल कप्तान रॉय कृष्णा भी हैं, जो ओडिशा एफसी के लिए काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या भारतीय फुटबॉल क्लबों के लिए कोई अवसर हैं (अश्रव्य)?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): हाँ, निश्चित रूप से। क्यों नहीं? यह एक अच्छा विचार हो सकता है।
वक्ता 5: मैं फ़िजी ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन से (अश्रव्य) हूं। मुझे उम्मीद है कि भारत फिजी के पर्यटन क्षेत्र में सुधार करना चाहता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह कहना सही होगा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण प्रशांत अर्थव्यवस्था डूब रही है। मैंने यह भी नोट किया कि पिछले वर्ष तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे प्रदूषित देश था। उसके पहले साल भारत 8वें स्थान पर था। भारत अपने उत्सर्जन में सुधार के लिए क्या कर रहा है और क्या योजनाएं हैं, प्रशांत और इसके लोगों पर इसके प्रभाव के लिए सब्सिडी देने के लिए क्या विचार हैं?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): दो तरह की चीजें हैं जिन पर मैं बात करना चाहूंगा। सबसे पहले, मैं बिना किसी हिचकिचाहट के कहूंगा कि मुझे लगता है कि आज भारत में, हम दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को चला रहे हैं। हमारा लक्ष्य 500 गीगावाट से अधिक का है और यह वास्तव में सौर्य ऊर्जा और पवन और अन्य रूपों का एक संयोजन है, बायोडीजल भी एक आयम है, जो ऊर्जा और प्रदूषण के संबंध में सचमुच और आकंडों के हिसाब से भारत के वातावरण को बदल देगा।
दूसरी बात यह है कि हम आपके साथ काम कर रहे हैं, हम आप जैसे देशों के साथ काम कर रहे हैं कि आपकी आवश्यकताओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कैसे किया जाए। उदाहरण के लिए, आज राष्ट्रपति ने सरकारी आवास का दौरा किया जहां सौर सुविधाएं, सौर पैनल स्थापित किए गए हैं और अब यह अब पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होता है। इसी तरह, हमने जिन्हें हम सोलर मामा कहते हैं, उन्हें पूरे प्रशांत द्वीप समूह में प्रशिक्षित किया है, न केवल प्रशांत द्वीप समूह में, कैरेबियन में, लैटिन अमेरिका में। ये मूल रूप से अपने संबंधित गांवों में सबसे बुजुर्ग एक तरह से गांव की दादी नानी हैं जिन्हें सोलर किट स्थापित करने का प्रशिक्षण दिया जाता है और वो सोलर किट स्थापित करती हैं। उन्हें अपने व्यक्तिगत गांवों के लिए उन सौर किटों की देखभाल करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे ऊर्जा का उपयोग कर सकें जहां उनके पास ऊर्जा तक पहुंच नहीं है।
तो ये सिर्फ दो उदाहरण हैं कि हम क्या कर रहे हैं। और मुझे कहना होगा कि मैंने अपनी आँखों से देखा है कि पिछले लगभग एक दशक में, जलवायु परिवर्तन के प्रति सरकार के पूरे रवैये और जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने की आवश्यकता में एक तरह से पूरी क्रांति आ गई है।
आज, हमारे प्रधानमंत्री ने LiFE नामक एक कार्यक्रम की घोषणा की है, मूल रूप से, यह पर्यावरण के इर्दगिर्द चलने वाली जीवन शैली है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति, अपने स्वयं के कार्यों से, अपने स्वयं के दृष्टिकोण से कैसे ऊर्जा का उपयोग कर इस बात को प्रभावित कर सकता है कि हमारा ये ग्रह यानी पृथ्वी उस संकट पर कैसे प्रतिक्रिया करता है जिसका हम सामना कर रहे हैं। इसलिए मुझे लगता है कि आप जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को कैसे संबोधित करते हैं, जो वास्तव में प्रशांत द्वीप देशों को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहे हैं, इस मामले में आपको भारत के रूप में एक बहुत ही सहानुभूतिपूर्ण और साथ ही बहुत सक्रिय भागीदार मिलेगा।
श्री पी.एस. कार्तिगेयन, फिजी में भारत के उच्चायुक्त: मैं बस एक और परियोजना जोड़ना चाहूंगा जो हम इस विशिष्ट क्षेत्र में कर रहे हैं। हम जानते हैं कि प्रशांत क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन एक अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है, लेकिन मुझे यकीन है कि बहुत से लोग इस बात से अवगत नहीं हैं कि फिजी में सबसे नवीन परियोजनाओं में से एक जो अभी हो रही है, उसे भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है। यह पैरामीट्रिक माइक्रो इंश्योरेंस प्रोडक्ट है जिसे पहली बार फिजी में लॉन्च किया गया था। इसे 2021 में बहुत सफलतापूर्वक संचालित किया गया था और अब इसे बढ़ाया गया है और जब यह पूरी तरह से पूरा हो जाएगा तो यह लगभग 5,000 घरों को कवर करेगा। फ़िजी परिवारों का सबसे हाशिए पर रहने वाला वर्ग, उनमें से 5,000, इसके अंतर्गत कवर किए जाएंगे। और इसके लॉन्च के बाद, इसका स्केल अप वर्जन पिछले अक्टूबर में लॉन्च किया गया था। सर, इसके तहत बीमा क्लेम प्राप्त करने का ट्रिगर, मेरा मतलब है, क्लेम प्राप्त करना और भी आसान हो जाता है। उन्हें पारंपरिक तरीके से इसके लिए व्यक्तिगत रूप से बीमा कंपनी जाने की ज़रूरत नहीं है। इसलिए यदि किसी विशेष क्षेत्र में कोई जलवायु घटना हो रही है, तो उन्हें किसी औपचारिकता करने की जरुरत नहीं होगी। जो लोग इस माइक्रो इंश्योरेंस सुविधा के अंतर्गत आते हैं, उन्हें, मुझे लगता है, प्रति दिन मुश्किल से एक डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन उन्हें न्यूनतम कवरेज और ट्रिगर के भुगतान की सुनिश्चितता होती है वो भी, जैसा मैने कहा, बहुत कम प्रीमियम के साथ और बहुत सस्ती दरों पर। और यह संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में यहां पर यूएनडीपी भागीदार है। हमने इसे बाउ के पास तवा क्षेत्र में पश्चिमी डिवीजन में लॉन्च किया था और यह अनवरत जारी है। और जब हम यहां पर बात कर रहे हैं तब भी यहा जमीनी स्तर पर इस समय भी लागू किया जा रहा है।
अन्य कार्यक्रम भी हैं, सबके बारे में बताना तो बहुत कठिन होगा। सचिव राज्य प्रमुखों के आवास के सौर्य उर्जाकरण के बारे में बात कर रहे थे, इनमें से एक को माननीया राष्ट्रपति ने आज भी राज्य भवन में दौरा करके देखा। वास्तव में, यह प्रशांत क्षेत्र के आसपास के प्रत्येक राष्ट्र प्रमुख के आवास में किया जाना है। लेकिन फिजी में, हम राष्ट्रपति भवन के लिए यह काम पहले ही पूरा कर चुके हैं। हमने ऐसे ही बाउ द्वीप में कुबुना प्रेसीडेंसी के प्रमुख के निवास में भी यही व्यवस्था की है, और हमने ग्रेट काउंसिल ऑफ चीफ हॉल के लिए भी यही काम किया है। और बहुत जल्द, हम प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के लिए भी एक प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। ये सारे काम केवल एकाकी प्रदर्शन करने के उद्देश्य के लिए नहीं किए जा रहे हैं। हम ज़मीनी काम करने पर विश्वास रखते हैं। हम पहले ही सोलराइजेशन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण इलाकों में लगभग 350 फिजी घरों का सौर्य उर्जाकरण कर चुके हैं।
और जैसा कि सचिव महोदय बता रहे थे, सोलर मामा कार्यक्रम के तहत लोगों को प्रशिक्षित भी किया गया है ताकि ये कार्यक्रम, लोग और पूरा प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर हो सके। किसी अन्य साथी पर निर्भर रहने की कोई आवश्यकता ना हो। यह अब भी पूरी तरह सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। इस सेक्टर में और भी कई प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा जारी है। धन्यवाद।
वक्ता 6: प्रशांत क्षेत्र में बहुत कुछ होने का खतरा रहा है... मेरा मतलब है कि महाशक्तियाँ प्रशांत क्षेत्र में (अश्रव्य) शोषण करने की कोशिश कर रही हैं, रिपोर्ट यही कह रही हैं। यदि आप हमें बता सकें कि प्रशांत क्षेत्र में भारत के विचार और स्थिति क्या हैं?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): मैं इस बातचीत को भारत और फिजी और भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बारे में रखना पसंद करूंगा, लेकिन चूंकि आपने पूछा है, तो मैं बस इतना कहना चाहता हूं और राष्ट्रपति ने भी जो बताया है, राष्ट्रपति जी ने फिजी नेतृत्व को यह भी बताया कि भारत हमेशा शांतिपूर्ण, स्थिर, समृद्ध प्रशांत क्षेत्र का पक्षधर है। हमारे विचार में, यह एक ऐसा क्षेत्र होना चाहिए जहां कोई भी अपनी इच्छा दूसरे देश पर नहीं थोपता, जहां क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान किया जाता है, और जहां हर देश बराबर है। तो यही हमारी नीति है।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): धन्यवाद सर। चूँकि मुझे प्रश्नों के लिए कोई और अनुरोध नहीं दिख रहा है, इसलिए महोदय, आपकी अनुमति से, अब मैं यह विशेष मीडिया वार्ता समाप्त करता हूँ। आप सभी को धन्यवाद और इसके साथ ही वार्ता समाप्त होती है।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): आपकी रुचि और आपके सभी प्रश्नों के लिए धन्यवाद।