श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): भारत की राष्ट्रपति की न्यूजीलैंड यात्रा पर सचिव (पूर्व) द्वारा इस विशेष मीडिया वार्ता में आपका स्वागत है। मैं राजेश परिहार, विदेश मंत्रालय के विदेश प्रचार एवं लोक राजनय प्रभाग में निदेशक हूं। मेरे साथ मंच पर हैं, श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व), विदेश मंत्रालय, भारत सरकार; श्री अजय कुमार सिंह, भारत के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव; श्रीमती नीता भूषण, न्यूज़ीलैंड में भारत की उच्चायुक्त; और श्रीमती परमिता त्रिपाठी, संयुक्त सचिव (ओशिनिया), विदेश मंत्रालय। इस संक्षिप्त परिचय के साथ, अब मैं सचिव (पूर्व) से अनुरोध करता हूं कि वे मीडिया को इस यात्रा के बारे में संबोधित करें।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद, राजेश, और आप सभी को गुड आफ़्टरनून। मीडिया के सभी मित्रों को कीआ ओरा , नमस्कार। चूंकि आज दिन में हमारे पास समुचित रूप से प्रेस वार्ता करने के लिए अधिक समय नहीं होगा, इसलिए हम राष्ट्रपति जी के कार्यक्रम के बीच में कुछ अंतराल का फासला होने का उपयोग करके आप सभी को यह जानकारी देना चाहते हैं कि अब तक क्या हुआ है, और आगे क्या होने की उम्मीद है।
जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति जी प्रशांत क्षेत्र की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में हैं। और हम कल फिजी से न्यूज़ीलैंड पहुंचे, और आज सुबह ऑकलैंड से वेलिंगटन पहुंचे। भारत-न्यूज़ीलैंड के बीच मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जो लोकतंत्र, क़ानून के शासन और निश्चित तौर पर खेलों के प्रति हमारे आपसी प्रेम पर आधारित साझा मूल्यों से जुड़े हैं। हाल के वर्षों के दौरान दोनों देश लगातार उच्च-स्तरीय संपर्क में बने रहे हैं और व्यापार और वाणिज्य, शिक्षा, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय सहयोग में लगातार प्रगति हुई है।
राष्ट्रपति जी की यात्रा महत्वपूर्ण है। यह भारत के राष्ट्रपति की पिछले आठ वर्षों में न्यूज़ीलैंड की दूसरी यात्रा है, जो दर्शाता है कि हम न्यूजीलैंड और प्रशांत क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को कितनी प्राथमिकता देते हैं। यह निश्चित रूप से न्यूज़ीलैंड की उनकी पहली यात्रा है और उनके साथ अल्पसंख्यक, पशुपालन एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री और दो सांसद भी हैं। मंत्री श्री कुरियन हैं, जबकि सांसद श्री सौमित्र ख़ान और श्री जुगल किशोर हैं।
माननीय राष्ट्रपति जी का उनके आगमन पर माओरी परंपरा से पूरी गर्मजोशी के साथ औपचारिक स्वागत किया गया और न्यूज़ीलैंड की गवर्नर जनरल माननीय डेम सिंडी किरो ने उनका अभिनंदन किया। उन्हें शाही सलामी और गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। उन्होंने गवर्नर जनरल के साथ विभिन्न विषयों पर द्विपक्षीय चर्चा की। दोनों नेताओं ने बहुत गर्मजोशी से मुलाक़ात की और राष्ट्रपति महोदया के लिए महामहिम गवर्नर जनरल द्वारा आयोजित दोपहर के भोजन पर अपनी बातचीत आगे बढ़ाई। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि में समानता और शिक्षा तथा वंचितों के सामाजिक उत्थान के प्रति अपने एकसमान जुनून पर विचार किया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों परिपक्व लोकतंत्रों के बीच बहुत सारी समानताएं हैं जो क़ानून के शासन और अनेकवाद में विश्वास करते हैं, और प्रशांत क्षेत्र के देशों के विकास और जलवायु संकट से निपटने की क्षमता में हमारा एक समान हित है। राष्ट्रपति जी ने गवर्नर जनरल किरो को शीघ्र ही भारत आने का निमंत्रण भी दिया।
आज सुबह की दूसरी बैठक में न्यूज़ीलैंड के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री महामहिम श्री विंस्टन पीटर्स ने राष्ट्रपति जी से शिष्टाचार भेंट की। माननीय मंत्री इसी वर्ष मार्च में भारत आए थे। चर्चा के दौरान उन्होंने व्यापार, संस्कृति, खेल, रक्षा और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग की संभावनाओं से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की।
आज न्यूज़ीलैंड अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन पर अनुमोदन पत्र सौंपेगा, और हम सीमा शुल्क सहयोग की व्यवस्था पर एक समझौता ज्ञापन के हस्तांतरण की उम्मीद भी कर रहे हैं। इससे हमारे व्यापार को मज़बूत करने और सीमा शुल्क की औपचारिकताओं को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति जी ने न्यूज़ीलैंड अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने शैक्षिक सहयोग के लिए अपने दृष्टिकोण को रेखांकित किया था और शिक्षा में क्रॉस-बॉर्डर साझेदारियों को विकसित करने के महत्व पर ज़ोर दिया था। भारत इस वर्ष के न्यूज़ीलैंड शिक्षा सम्मेलन में गेस्ट ऑफ़ ऑनर है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों में शिक्षा से जुड़े महत्व को दर्शाता है।
माननीय राष्ट्रपति जी ने वेलिंगटन रेलवे स्टेशन के सामने वाले लॉन में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर राष्ट्रपिता को पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद, राष्ट्रपति जी ने एक भावपूर्ण समारोह में पुकेहू राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जैसा कि मैंने कहा, अभी दिन के कुछ और कार्यक्रम बाकी है। इनमें, राष्ट्रपति जी के साथ महामहिम प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन की मुलाक़ात और उसके बाद शाम को महामहिम डेम सिंडी किरो द्वारा आयोजित राजकीय भोज शामिल हैं।
कल माननीय राष्ट्रपति जी ऑकलैंड में प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगी, यह विशाल प्रवासी भारतीय समुदाय हमारे दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु है जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की नींव को और मज़बूत बनाता है। हम जल्द ही ऑकलैंड में भारत का एक महावाणिज्य दूतावास खोलेंगे और इससे हमारे संबंध और मज़बूत बनेंगे और इससे प्रवासी भारतीयों को सहायता मिलेगी।
मैं यह कहना चाहूँगा कि कुल मिलाकर यह बहुत ही गर्मजोशी से भरी, बहुत सफल, जिन विषयों को लेकर यह यात्रा की गई उसकी दृष्टि से बहुत समृद्ध यात्रा रही है और यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में नई उपलब्धियों को चिह्नित करती है। और आपके कोई और सवाल हों, तो मैं उनके जवाब देने की कोशिश करूंगा।
वक्ताः सर, आपने व्यापार, संस्कृति और रक्षा जैसे क्षेत्र में सहयोग की बात की है। इनमें सबसे दिलचस्प विषयों में से एक पारंपरिक चिकित्सा है। हम सभी ने आज सुबह अद्भुत माओरी संस्कृति समारोह देखा। तो एक चीज़ जो भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच समान है वह स्वदेशी संस्कृतियां और उनसे जुड़ा पारंपरिक ज्ञान हैं। इस सहयोग को हम किस रूप में आगे बढ़ा सकते हैं?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): तो राष्ट्रपति जी ने आज अपनी विभिन्न बैठकों में पारंपरिक चिकित्सा के महत्व पर ज़ोर दिया और यह भी बताया कि कैसे विशेष तौर पर भारत में, कोविड महामारी के दौरान और कोविड के बाद की रिकवरी में भी, पारंपरिक चिकित्सा ने मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूज़ीलैंड में भी पारंपरिक चिकित्सा की समृद्ध परंपरा है और कैसे दोनों देश पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग कर सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र स्थापित किया है और यह इस क्षेत्र में ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने के लिए एक अच्छा मंच होगा।
सैम: किआ ओरा, सर। आपने व्यापार और आर्थिक सहयोग के बारे में चर्चा का ज़िक्र किया। ज़ाहिर है, न्यूज़ीलैंड सरकार ने भारत के साथ व्यापार समझौते में अपनी रुचि व्यक्त की है और मुझे पता है कि हमारे व्यापार मंत्री और अधिकारी कई बार वहां के दौरे पर गए हैं। न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौते की संभावना को लेकर भारत में इस समय क्या सोच या विचार हैं, इसके बारे में आप हमें क्या बता सकते हैं और इनमें कुछ कठिन क्षेत्र कौन से हो सकते हैं?
श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): क्या आप अपना परिचय दे सकते हैं?
सैम: न्यूज़ रूम से सैम सचदेवा।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): आपके सवाल के जवाब में, मैं कहूंगा कि मुक्त व्यापार समझौता हमेशा से एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य रहा है; और केवल न्यूज़ीलैंड के साथ नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए मुक्त व्यापार समझौता करना एक परम उद्देश्य होता है। हालांकि, इस बीच बहुत सी चीज़ें हैं जो की जा सकती हैं। उदाहरण के लिए, इस समय हम न्यूज़ीलैंड के उनके कुछ फलों और सब्जियों के निर्यात और हम अपनी कुछ फलों और सब्जियों का न्यूजीलैंड को निर्यात कैसे कर सकते हैं इस पर बात कर रहे हैं। तो इसके कई पहलू हैं। सीमा-शुल्क उनमें से केवल एक है, शर्तें, फाइटोसैनिटरी शर्तें, मानक, आदि भी तस्वीर में आते हैं, और कस्टम प्रक्रियाएं भी हैं। लिहाजा, इस यात्रा के दौरान, हम कस्टम प्रक्रियाओं को लेकर एक विशेष समझौते पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जिससे निश्चित रूप से दोनों देशों के बीच व्यापार करने में आसानी होगी। हम आगे और क्या कर सकते हैं, यह देखने के लिए हम चरण-दर-चरण आगे बढ़ना चाहते हैं। तो निश्चित रूप से दोनों देश अपने-अपने किसानों को फल और सब्जियों का निर्यात करने में मदद करने में रुचि रखते हैं, लेकिन आगे चल कर और बड़ी महत्वाकांक्षा हो सकती है।
वक्ता 2: नमस्ते, सर। बीते कुछ वर्षों के दौरान भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हवाई यातायात से होकर यात्रियों की बहुत अधिक आवाजाही रही है, लेकिन समस्या यह है कि नई दिल्ली और वेलिंगटन या ऑकलैंड के बीच सीधी उड़ानें नहीं हैं। तो क्या इस पर कोई बातचीत चल रही है ताकि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू की जा सकें?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): मार्च में जब न्यूज़ीलैंड के उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री, श्री विंस्टन पीटर्स भारत आए थे, तो हमने एक संशोधित हवाई सेवा समझौता किया, जिससे इसमें मदद मिलनी चाहिए। बेशक, दोनों पक्षों की एयरलाइंस निजी कंपनियां हैं, और इसलिए उनकी निर्णय प्रक्रिया उन मानदंडों पर आधारित होगी जो निजी कंपनियां ऐसे निर्णय लेने के लिए उपयोग करती हैं। सरकारें केवल उन्हें प्रोत्साहित कर सकती हैं और एयर सर्विसेज एग्रीमेंट्स और अन्य सुविधाओं के माध्यम से सीधी उड़ानों के क्षेत्र में उनकी प्रवेश को सुविधाजनक बना सकती हैं। इसलिए, हम ऐसा ही कर रहे हैं। दोनों सरकारें इसे लेकर उत्सुक हैं। मुझे लगता है कि पिछले साल न्यूज़ीलैंड से क़रीब 40,000 पर्यटक भारत आए थे, जबकि यहां से वहां लगभग 2,00,000 पर्यटक गए थे। मुझे लगता है कि सीधी उड़ानें शुरू करने के लिए यह एक अच्छी संख्या है। तो चलिए निजी एयरलाइनों पर कुछ दबाव डालते हैं।
वक्ता 3: सर, क्या आप द्विपक्षीय वार्ता के दौरान राष्ट्रपति जी और गवर्नर जनरल के बीच हुई चर्चाओं के बारे में विस्तार से बता सकते हैं? आपने हमें उप-प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जी के बारे में बताया।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): नहीं, दरअसल मैंने बातचीत के पूरे पहलू को कवर किया है। लिहाजा, जब मैंने कहा कि उन्होंने व्यापार एवं वाणिज्य से लेकर शिक्षा सहयोग, सांस्कृतिक सहयोग, लोगों तक पहुंच, हर चीज़ की चर्चा की, तो ये गवर्नर जनरल के साथ ही उप-प्रधानमंत्री के साथ भी था। और इसमें कोई संशय नहीं है कि प्रधानमंत्री के साथ भी हमारे पास चर्चा के लिए समान विषय होंगे।
वेनू: इंडियन न्यूज़लिंक से वेनू मेनन। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की सदस्यता की क्या प्रगति है, ख़ास कर इसलिए क्योंकि न्यूजीलैंड इसका कड़ा विरोध कर रहा है।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): यहां, मैं उसकी बात नहीं करना चाहूंगा क्योंकि हम अपने द्विपक्षीय संबंधों और राष्ट्रपति की यात्रा पर चर्चा कर रहे हैं। हमने कभी भी इस विषय पर चर्चा नहीं की, न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप का विषय नहीं उठा, इसलिए मैं उसके बारे में बात नहीं करूंगा।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): कोई और प्रश्न? मुझे कोई प्रश्न नहीं दिख रहा है। तो, सर, आपकी अनुमति से, मैं इस विशेष मीडिया वार्ता को समाप्त करना चाहूंगा और आपका धन्यवाद करना चाहूंगा। आप सभी का धन्यवाद और इसके साथ ही यह वार्ता समाप्त होती है।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद।