श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): सभी को गुड इवनिंग। माननीया राष्ट्रपति जी की तिमोर-लेस्ते की चल रही यात्रा पर इस विशेष प्रेस वार्ता में, मैं आप सब का स्वागत करता हूं। मैं राजेश परिहार, विदेश मंत्रालय के विदेश प्रचार एवं लोक राजनयिक प्रभाग में निदेशक हूं। मुझे इस मंच पर मौजूद, श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व), विदेश मंत्रालय; श्री अजय सिंह, भारत के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव; श्री संदीप चक्रवर्ती, इंडोनेशिया एवं तिमोर-लेस्ते में भारत के राजदूत और श्री आशीष सिन्हा, विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (दक्षिणी विभाग) का परिचय देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस संक्षिप्त परिचय के साथ, मैं सचिव (पूर्व) से मीडिया को इस यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी देने का अनुरोध करता हूं।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद राजेश, और आप सब को गुड इवनिंग। जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति जी तीन देशों की यात्रा पर हैं। यह उनकी यात्रा का अंतिम चरण है। इससे पहले वे फिजी और फिर न्यूज़ीलैंड जा चुकी हैं। और अब यह तिमोर-लेस्ते की एक राजकीय यात्रा है। यह भारत की ओर से राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष स्तर की पहली तिमोर-लेस्ते यात्रा है। और इसलिए, इसका बहुत महत्व है।
राष्ट्रपति जी की यात्रा बहुत सामयिक है और जैसा कि मैंने कहा, बहुत महत्वपूर्ण है। तिमोर-लेस्ते को स्वतंत्रता मिलने पर मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक के रूप में, भारत और तिमोर-लेस्ते ने कई वर्षों से गर्मजोशी से भरे संबंध और विकासात्मक साझेदारी का आनंद लिया है, जिसे अब इस यात्रा के माध्यम से नई गति दी जाएगी। जैसा कि आप जानते हैं, भारत और तिमोर-लेस्ते के बीच द्विपक्षीय आदान-प्रदान हाल के दिनों में तेजी से बढ़े हैं। राष्ट्रपति होर्ता ने इस वर्ष की शुरुआत में भारत का दौरा किया था। वे जनवरी के माह में वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के लिए गुजरात में थे, जहां उन्होंने शिखर सम्मेलन के दौरान पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी। तिमोर-लेस्ते ने वॉयस ऑफ़ द ग्लोबल साउथ के अब तक आयोजित दोनों वर्चुअल शिखर सम्मेलनों में भाग लिया है। और हम एक हफ़्ते के भीतर आयोजित होने जा रहे इसके तीसरे शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सितंबर 2023 में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने तिमोर-लेस्ते में भारत के रेजिडेंट मिशन खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद, तिमोर-लेस्ते ने भी दिल्ली में एक रेज़िडेंट मिशन खोलने का फ़ैसला किया है। एक दूसरे के देशों में रेज़िडेंट मिशन की पारस्परिक स्थापना से दिल्ली-दिली संपर्क और भी मज़बूत होगा।
आसियान भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। और आसियान द्वारा तिमोर-लेस्ते को अपने 11वें सदस्य देश के रूप में स्वीकार करने के फ़ैसले के आलोक में, तिमोर-लेस्ते के साथ हमारे संबंध और अधिक महत्वपूर्ण होंगे। तिमोर-लेस्ते एक युवा और जीवंत लोकतंत्र है। हमारे दोनों देशों के बीच गर्मजोशी और सौहार्दपूर्ण संबंध लोकतंत्र, समावेशिता और बहुलता को बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धताओं पर आधारित हैं।
आज सुबह दिली हवाई अड्डा पहुंचने पर राष्ट्रपति जी का तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति महामहिम श्री जोस रामोस-होर्ता ने अपने उप-प्रधानमंत्री एवं आर्थिक मामलों के संयोजक मंत्री व पर्यटन एवं पर्यावरण मंत्री श्री फ़्रांसिस्को कलबुदी ले; उप-प्रधानमंत्री, ग्रामीण विकास एवं सामुदायिक आवास के संयोजक मंत्री श्री मारियानो सबिनो लोपेस; विदेश मामले एवं सहभागिता मंत्री श्री बेंडितो डॉस सैंटोस फ़्रीटास; और शिक्षा मंत्री सुश्री डुल्स डी जीसस सोरेस, के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने पूरे रास्ते भारत और तिमोर-लेस्ते के झंडे लहराकर राष्ट्रपति जी का स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति जी का राष्ट्रपति भवन में पूरे राजकीय सम्मान और 21 बंदूकों की सलामी के साथ औपचारिक स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति ने उनका एक बार फिर स्वागत किया।
राष्ट्रपति होर्ता के साथ द्विपक्षीय बैठक में, दोनों नेताओं ने डिज़िटल क्षेत्र, स्वास्थ्य एवं दवा, कृषि एवं मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत बनाने के तरीके पर चर्चा की। राष्ट्रपति होर्ता ने राष्ट्रपति जी को सर्वोच्च सम्मान ग्रैंड-कॉलर ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ तिमोर-लेस्ते से सम्मानित किया, यह इस ऑर्डर के तहत सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान विशेष रूप से राष्ट्राध्यक्षों के लिए आरक्षित है, जो महत्वपूर्ण एवं असाधारण योग्यता के लिए इस राष्ट्र द्वारा दी जाने वाली सर्वोच्च मान्यता को दर्शाता है। राष्ट्रपति होर्ता ने राष्ट्रपति जी के सम्मान में एक राजकीय भोज भी आयोजित किया, जिसमें प्रधानमंत्री के अलावा मंत्रिमंडल के सदस्य, तिमोर-लेस्ते के प्रतिष्ठित नागरिक और राजनयिक दल के सदस्य शामिल थे।
तिमोर के प्रधानमंत्री महामहिम श्री जानाना गुस्माओ के साथ अपनी बातचीत में राष्ट्रपति जी ने कहा कि दोनों देशों में रेज़िडेंट मिशन खोलने का पारस्परिक निर्णय से एक दूसरे के संबंध और भी क़रीब होंगे। राष्ट्रपति जी की मौजूदगी में तीन एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ, पहला सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर था, दूसरा भारत के प्रसार भारती और तिमोर-लेस्ते के रेडियो और टेलीविजन के बीच प्रसारण के क्षेत्र में सहयोग और सहभागिता पर, तो तीसरा राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा आवश्यकताओं से छूट पर आधारित था।
एक गर्मजोशी भरे मैत्रीपूर्ण संकेत में, राष्ट्रपति जी ने 'होर्ता शो' में राष्ट्रपति होर्ता के साथ सार्वजनिक बातचीत में भाग लिया। राष्ट्रपति होर्ता ने राष्ट्रपति जी से कई विषयों पर सवाल पूछे, जिनमें भारत के राष्ट्रपति बनने की उनकी यात्रा, जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में उनके द्वारा की गई पहल और नेतृत्व की भूमिका चाहने वाली महिलाओं को सलाह जैसे प्रश्न शामिल है। राष्ट्रपति जी ने सामुदायिक स्वागत समारोह में भारतीय समुदाय और भारत के मित्रों से भी बातचीत की। राष्ट्रपति जी ने एक छोटे लेकिन जोश से भरे भारतीय समुदाय की सराहना की और उनसे भारत तिमोर-लेस्ते संबंधों को मज़बूत करने में योगदान जारी रखने का आग्रह किया। राष्ट्रपति जी कल सुबह भारत वापस आएंगी।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत की ओर से तिमोर-लेस्ते की अब तक की इस सबसे उच्चस्तरीय यात्रा ने डिज़िटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि विकास और मानव क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के नए अवसरों के साथ ही हमारे संबंधों को काफ़ी हद तक ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। राष्ट्रपति जी तथा महामहिम राष्ट्रपति होर्ता और प्रधानमंत्री गुस्माओ के बीच हुई बातचीत से यह स्पष्ट हो गया कि भारत तिमोर-लेस्ते के लिए पसंदीदा साझेदार है।
अब अगर आपके कोई सवाल हैं तो मुझे उनके जवाब देने में प्रसन्नता होगी।
अभिषेकः मैं अभिषेक हूं सर डीडी न्यूज़ से। सर, राष्ट्रपति की ये पहली यात्रा है, या कहें कि पहली राजकीय यात्रा है इस देश के लिए, द्विपक्षीय संबंधों पर क्या प्रभाव देखते हैं सर इसका? क्या असर पड़ेगा?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): जैसा मैंने कहा जो वार्तालाप हुआ है, तो उसमें डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया है, स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स पर, कृषि पर, मानव संसाधन क्षमता निर्माण में, ये सारे प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं तिमोर-लेस्ते के लिए और इसलिए वो चाहते हैं भारत के साथ इन सारे क्षेत्रों में ज्यादा सहयोग और सहायता मिले।
अभिषेकः और सर एक चीज हमने और देखा, आज राष्ट्रपति के साथ यहां के राष्ट्रपति होर्ता जी का एक होर्ता शो जो था, एक अलग ही फॉर्मेट दिखा, इसके बारे में और कुछ बता सकते हैं सर?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): तो ये उनका अपना एक सोशल मीडिया प्रोग्राम है, जो बहुत लोकप्रिय है, मैंने सुना है, हमारे राजदूत ने बताया कि ये तिमोर-लेस्ते में काफी लोकप्रिय है, बहुत लोग इसको देखते हैं, तो ये अच्छा मौका था कि हमारे राष्ट्रपति जी उनके शो पर आए और बहुत अनौपचारिक बात की और इससे मेरे ख्याल से एक कूटनीतिक, एक फायदा भी है कि लोगों के पास जाएँ और दो राष्ट्रपतियों के बीच ऐसी अनौपचारिक बातचीत हुई। तो ये जरूर एक नई चीज है, और इससे लोग काफी प्रभावित हुए हैं।
अभिषेकः और सर आपने 3 एमओयू की बात की जो दो देशों के बीच में हुआ है, इसके बारे में और थोड़ी जानकारी बता सकते हैं सर?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): एक तो एमओयू सांस्कृतिक सहयोग है, जिसके अंदर आदान प्रदान होंगे सांस्कृतिक समूहों के, आदान-प्रदान होंगे। दूसरा है राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट, अब से दोनों देशों के राजनयिकों और अधिकारियों को वीजा नहीं लेना पड़ेगा एक-दूसरे के देश में जाने का। और तीसरा है प्रसार भारती और उनके रेडियो और टेलीविजन के प्रसारण कार्यक्रम आदान-प्रदान के ऊपर।
श्री साई: गुड इवनिंग, सर। मैं श्री साई हूं ऑल इंडिया रेडियो से। सर, मेरा प्रश्न है, तिमोर-लेस्ते भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत नीति में कैसे फिट बैठता है? मेरा दूसरा सवाल, तिमोर-लेस्ते की रणनीतिक स्थान को ध्यान में रखते हुए, क्या भारत-तिमोर-लेस्ते संबंधों का कोई रणनीतिक पहलू है और क्या रक्षा सहयोग पर कोई चर्चा हुई? और तीसरा सवाल यह है कि, आईटी और डिज़िटल क्षेत्र, डिज़िटलीकरण और डिज़िटल भुगतान के क्षेत्र में, क्या अगले एक साल में भारत की ओर से कोई ठोस डिलिवरेबल्स हैं? धन्यवाद सर।
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): धन्यवाद। तो सबसे पहले, जैसा कि मैंने बताया, तिमोर-लेस्ते आसियान का 11वां सदस्य देश बनने जा रहा है और जैसा कि आप जानते हैं, आसियान हमारी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का केंद्र है। हम आसियान के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देते हैं। इसलिए आसियान में आने वाले सदस्य के रूप में, तिमोर-लेस्ते के साथ हमारे संबंधों का महत्व और भी अधिक हो जाता है, द्विपक्षीय रूप से अत्यंत घनिष्ठ संबंधों के अलावा, जिनका हमने सदैव आनंद उठाया है। रक्षा से संबंधित आपके प्रश्न पर, हां, कुछ चर्चा हुई है। पिछले कई वर्षों से हमारे द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत तिमोर-लेस्ते के रक्षा कार्मिक भारत आते रहे हैं। हमने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि वो कोई ख़ास प्रशिक्षण कार्यक्रम चाहते हैं तो उनके लिए हम ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं। डोमेन जागरूकता के क्षेत्र में भी इस बात पर चर्चा हुई कि क्या उन्हें अपने जल क्षेत्र में अनियमित मछली पकड़ने, अवैध मछली पकड़ने को रोकने को लेकर किसी सहायता की आवश्यकता है, साथ ही, क्या उन्हें समुद्री प्रदूषण से निपटने में समुद्री प्रदूषण-रोधी सहायता की भी ज़रूरत है।
आईटी और डिज़िटल भुगतान के संबंध में, तिमोर-लेस्ते की ओर से हमारी यूपीआई और अन्य डिज़िटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में काफ़ी रुचि दिखाई गई है, और डिज़िटल पेमेंट सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट पर अगले वर्ष या उसके आसपास विचार किया जा सकता है।
वक्ता 1: सर, भारत क्वाड का भी सदस्य है, आसियान का भी है, अब तिमोर-लेस्ते आसियान का भी सदस्य बनने जा रहा है, ऐसे में तिमोर-लेस्ते के बनने से रणनीतिक रूप से भारत के लिए कितना महत्व है सर, आसियान का सदस्य बनने से?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): देखिए, ये यात्रा जो है द्विपक्षीय यात्रा है, जिसमें हम लोग द्विपक्षीय तौर पर क्या कर सकते हैं, तिमोर-लेस्ते की क्या जरूरतें हैं उसके ऊपर ज्यादातर फोकस हुआ है। रणनीतिक दृष्टि से, निश्चित रूप से, आसियान का प्रत्येक सदस्य देश क्षेत्र के साथ हमारे रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में हमारे लिए एक महत्वपूर्ण देश है, लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है कि क्वाड और आसियान का कोई विरोधाभास है, हम नहीं सोचते हैं ऐसा।
वक्ता 2: सर, राष्ट्रपति होर्ता ने प्रेस वक्तव्य में इस बात का ज़िक्र किया था कि तिमोर-लेस्ते और भारत वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार के साझा मूल्य या साझा विचार के साथ खड़े हैं। तो क्या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की तरफ़ से प्रस्तावित सुधारों पर भी कोई चर्चा हुई है?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): तिमोर-लेस्ते पारंपरिक रूप से, और आज फ़िर उन्होंने यह बात दोहराई कि वो विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अधिकारपूर्ण सदस्य बनने के भारत के दावे का समर्थन करते हैं। आज यह बात कई बार दोहराई गई और तिमोर-लेस्ते के नेतृत्व की ओर से इस बात पर बल दिया गया कि लगभग 1.5 अरब की आबादी वाला यह देश, जो आज दुनिया पर इतनी बड़ी छाप छोड़ता है, उसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता और भारत को विस्तारित सुरक्षा परिषद में निश्चित तौर पर शामिल किया जाना चाहिए। व्यापार एवं अन्य मामलों, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं और व्यापार संस्थाओं के संदर्भ में, दोनों बैठकों में इस बात पर चर्चा हुई कि विकासशील देशों की आवाज़ को प्रतिबिंबित किए जाने की ज़रूरत है, तथा वॉयस ऑफ़ ग्लोबल साउथ एक ऐसा तरीक़ा है जिसके माध्यम से भारत और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विकासशील देशों की आवाज़ को एकजुट करने का प्रयास किया है, ताकि जी20 के जो भी परिणाम निकलकर आए उसमें यह आवाज़ परिलक्षित हो। और अब यह हमारे लिए एक निरंतर प्रक्रिया है, और तिमोर-लेस्ते भी इसमें एक बहुत जोशीला भागीदार है। उन्होंने हमेशा इसमें भाग लिया है, साथ ही वादा भी किया है कि वो भविष्य में भी वॉयस ऑफ़ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
अभिषेकः एक आखिरी सवाल है, राष्ट्रपति महोदया को आज एक अवार्ड भी दिया गया। कितना बड़ा सम्मान मानते हैं इसे और इस अवार्ड के बारे में कुछ बता सकते हैं?
श्री जयदीप मजूमदार, सचिव (पूर्व): जी, तो यह सर्वोच्च स्तर का पुरस्कार है, जो तिमोर-लेस्ते दूसरे देश के राष्ट्र प्रमुख को देते हैं। ये एक बहुत ही बड़ा सम्मान है, और ये राष्ट्रपति जी के पूरे योगदान, उनकी प्रतिष्ठा और उनके कद और लोगों के सशक्तिकरण में उनके योगदान, और उन लोगों के लिए एक प्रतीक के रूप में उनकी भूमिका जो अपनी सीमाओं या अपनी पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर इस तरह से उच्च पद तक पहुंचने की आकांक्षा रखते हैं।
तो यह उनके जीवन और उनके करियर में उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों की मान्यता है। इसलिए इस विशेष पुरस्कार को दिया जाना बहुत गर्व और सम्मान की बात है और अतीत में यह अवार्ड केवल कुछ राष्ट्राध्यक्षों को ही दिया गया है, तो यह वास्तव में बहुत बड़ा सम्मान है।
बहुत-बहुत धन्यवाद। यहां आने के लिए धन्यवाद।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): धन्यवाद सर। आप सब लोगों को धन्यवाद। इसके साथ ही यह वार्ता समाप्त होती है।