श्री राजेश परिहार, निदेशक (XPD): नमस्कार, देवियों और सज्जनों। माननीय राष्ट्रपति जी की पुर्तगाल में चल रही राजकीय यात्रा से संबंधित इस विशेष प्रेस वार्ता में आपका स्वागत है। इस वार्ता के लिए, मेरे साथ मंच पर विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) श्री तन्मय लाल, पुर्तगाल में भारत के राजदूत श्री पुनीत कुंडल, अपर सचिव (यूरोप पश्चिम) श्री पीयूष श्रीवास्तव और भारत के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अजय सिंह उपस्थित हैं।
अब मैं सचिव (पश्चिम) से अनुरोध करता हूं कि वे मीडिया को इस यात्रा से जुड़ी जानकारी प्रदान करें। महोदय।
श्री तन्मय लाल, सचिव (पश्चिम): धन्यवाद। नमस्कार। माननीय राष्ट्रपति जी की पुर्तगाल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी होने वाली है।
यह यात्रा ऐसे वर्ष हो रही है जब हम अपने राजनयिक संबंधों की पुनः स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। 27 वर्षों के अंतराल के बाद भारत की ओर से पुर्तगाल की यह पहली राजकीय यात्रा भी है। इसलिए यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक यात्रा है।
राष्ट्रपति जी पुर्तगाल के राष्ट्रपति महामहिम मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के निमंत्रण पर पुर्तगाल की यात्रा कर रही हैं। मुझे याद है कि 2020 में राष्ट्रपति डी सूसा ने भारत का दौरा किया था। राष्ट्रपति जी की राजकीय यात्रा एक औपचारिक स्वागत के साथ शुरू हुई, जहां उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया और स्वागत में दी गई तोपों की सलामी को स्वीकार किया।
यह समारोह शहर के चौक, प्राका डू इम्पेरियो में आयोजित किया गया था। उसके बाद, भारत के राष्ट्रपति ने जेरोनिमोस मठ का दौरा किया और पुर्तगाल के राष्ट्रीय कवि लुइस वाज़ डी कैमोस को श्रद्धांजलि अर्पित की।
दोनों राष्ट्रपतियों के बीच बातचीत बेलेम पैलेस में एकांत वार्ता से शुरू हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर पर चर्चा की गई।
दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से डाक टिकट भी जारी किए, जो दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने की याद दिलाता है।
और अंत में, दोनों नेताओं ने प्रेस वक्तव्य भी दिए।
शाम में पुर्तगाल के राष्ट्रपति ने हमारे राष्ट्रपति के सम्मान में अजुदा पैलेस में एक राजकीय भोज का आयोजन किया। राजकीय भोज का एक विशेष तत्व पुर्तगाली कलाकार राओ क्याओ जो बांसुरी भी बजाते हैं, का संगीत गायन प्रस्तुति था, और उन्होंने राजकीय भोज के दौरान में 'वैष्णव जन तो' भी प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति जी ने पुर्तगाल के प्रधानमंत्री महामहिम लुइस मोंटेनेग्रो से भी मुलाकात की। पिछले वर्ष ब्राज़ील में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोंटेनेग्रो और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी।
पैलेस साओ बेंटो में राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोंटेनेग्रो के बीच बैठक हुई।
उस बैठक के पश्चात... आज सबसे पहले, राष्ट्रपति ने पुर्तगाल की असेंबली का भी दौरा किया, जो कि संसद है, जहां उन्होंने संसद के अध्यक्ष महामहिम जोस पेड्रो अगुइर-ब्रैंको के साथ विचार-विमर्श किया। नेताओं के बीच एकांत बैठक हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर पर व्यापक चर्चा भी की गई।
और राष्ट्रपति ने असेंबली हॉल का भी दौरा किया। कल, लिस्बन शहर के मेयर, महामहिम कार्लोस मोएदास ने सिटी काउंसिल में एक विशेष कार्यक्रम की मेज़बानी की, जहां मेयर ने हमारे राष्ट्रपति को 'की ऑफ लिस्बन' भेंट की। उपस्थित लोगों में सिटी काउंसिलर और भारतीय समुदाय के कुछ सदस्य भी शामिल थे।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में मेयर को धन्यवाद दिया, लेकिन यह भी कहा था कि वह लिस्बोएटा यानी लिस्बन की निवासी बनकर अत्यधिक खुश हैं।
आज राष्ट्रपति ने चंपालिमॉड फाउंडेशन का दौरा किया, जो कि एक कैंसर देखभाल एवं अनुसंधान तथा तंत्रिका विज्ञान अनुसंधान इकाई है। यह एक प्रतिष्ठित इकाई है और यहां भारतीय शोधकर्ता भी काम कर रहे हैं। उन्होंने इन इकाईओं का भी दौरा किया। राष्ट्रपति ने चंपालिमॉड फाउंडेशन के परिसर में वृक्षारोपण किया। उन्होंने कैमेलिया का वृक्षारोपण किया।
इसके बाद उन्होंने वहां काम कर रहे भारतीय शोधकर्ताओं से बातचीत की। और इस यात्रा में हमारे राष्ट्रपति के साथ पुर्तगाल के राष्ट्रपति भी शामिल हुए। इसकी एक आकर्षक विशेषता यह रही कि चंपालिमॉड फाउंडेशन की इमारत का नक्शा भारतीय वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने तैयार किया था।
चंपालिमॉड फाउंडेशन के दौरे के पश्चात दोनों राष्ट्रपति उस स्थान पर गए जहां महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी जी की प्रतिमाएं हैं। दोनों राष्ट्रपतियों ने वहां पुष्पांजलि अर्पित की।
इसके बाद उन्होंने राधाकृष्ण मंदिर का दौरा किया गया, जिसमें राष्ट्रपति डी सूसा भी हमारी राष्ट्रपति के साथ शामिल हुए। दोनों राष्ट्रपतियों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की।
अब कुछ ही समय के पश्चात, राष्ट्रपति अपनी राजकीय यात्रा पूरी करने से पहले भारतीय समुदाय के लोगों से मिलकर उन्हें संबोधित करेंगी।
यह राजकीय यात्रा अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण रही है क्योंकि यह भारत और पुर्तगाल के बीच उच्च स्तरीय संबंधों को अत्यधिक मज़बूत गति प्रदान करती है। जैसा कि मैंने बताया कि यह एक ऐतिहासिक वर्ष है, हमारे राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। पुर्तगाल के राष्ट्रपति ने हमारी राष्ट्रपति जी के साथ कई बार मुलाकात या बातचीत की, वे कई क्रियाकलापों में शामिल हुए और विभिन्न महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी उनके साथ भाग लिया।
अगर मैं याद कर सकता हूं, तो न केवल औपचारिक स्वागत, एकांत बैठक, प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता, संयुक्त रूप से डाक टिकट जारी करना और प्रेस वक्तव्य, बल्कि राजकीय भोज, चंपालिमॉड फाउंडेशन, गांधी प्रतिमा और मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में भी वे हमारी राष्ट्रपति के साथ-साथ रहे।
दोनों राष्ट्रपतियों ने चंपालिमॉड फाउंडेशन में लगभग 60 भारतीय शोधकर्ताओं के साथ बातचीत की, जहां हमारी राष्ट्रपति ने कुछ शोधकर्ताओं के सवालों का जवाब दिया और इसके बाद पुर्तगाल के राष्ट्रपति ने सभा को भी संबोधित किया। दोनों राष्ट्रपतियों की एक साथ हुई कई बैठकें दर्शाती हैं कि दोनों देश एक-दूसरे को सर्वोच्च महत्त्व देते हैं और इस साझेदारी का नेतृत्व उनके लिए अहम है।
हमारी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री, स्पीकर और मेयर से भी मुलाकात की, और ऐसे कई अवसर आए जब वे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मिलीं, जैसा कि मैंने बताया, उदाहरण के लिए, सिटी काउंसिल में आयोजित विशेष कार्यक्रम, चंपालिमॉड फाउंडेशन, मंदिर की यात्रा और राजकीय भोज में भारतीय समुदाय के कई अतिथि शामिल हुए। इस प्रेस वार्ता के ठीक बाद, राष्ट्रपति भारतीय समुदाय के सदस्यों से भेंट कर उन्हें संबोधित करेंगी।
इस यात्रा ने हमारी मज़बूत साझेदारी को और भी सुदृढ़ किया है, जिसकी बुनियाद हमारे ऐतिहासिक संबंध, सांस्कृतिक समानता और प्रवासी संपर्क पर आधारित है। आज यह साझेदारी व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और गतिशीलता सहित कई क्षेत्रों में मज़बूती से आगे बढ़ रही है।
कुछ क्षेत्र, उदाहरण के लिए, हमारे सहयोग क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा शामिल हैं। भारत-पुर्तगाल साझेदारी भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी में भी ज़बरदस्त तरीके से योगदान करती है। साथ ही, पुर्तगाली-भाषा बोलने वालों के साथ भारत के संबंध, लुसोफोन देशों का समूह, जहां भारत अब सीपीएलपी का एक सहयोगी सदस्य है, जो पुर्तगाली भाषी देशों का समूह है, में भी ज़बरदस्त सहयोग है। भारत और पुर्तगाल के बीच विभिन्न बहुपक्षीय मंच, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में भी मज़बूती से सहयोग जारी है।
यात्रा के दौरान, पुर्तगाली नेतृत्व ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया और राष्ट्रपति ने इस समर्थन के लिए पुर्तगाली नेतृत्व की अत्यधिक सराहना की और आभार प्रकट किया।
अपने भाषण में, राष्ट्रपति ने न केवल पुर्तगाल के राष्ट्रपति को, बल्कि पुर्तगाल के अन्य नेतृत्व तथा पुर्तगाल लोगों को इस मैत्री के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत की, और इस यात्रा से भारत और पुर्तगाल के बीच मज़बूत ऐतिहासिक संबंधों को और भी सुदृढ़ करने में मदद मिली है, जो कि भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी और बहुपक्षीय स्तर पर हमारे सहयोग में भी योगदान प्रदान करता है।
धन्यवाद।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (XPD): आपके वक्तव्य के लिए धन्यवाद, महोदय। आप सभी के प्रश्नों का स्वागत है, और आपसे मेरा अनुरोध है कि प्रश्न पूछने से पहले अपना नाम व अपनी संस्था का परिचय दीजिये।
जयंती, DD न्यूज़: नमस्कार महोदय। मैं DD न्यूज़ से जयंती हूं। मेरे दो सवाल हैं। सबसे पहले, इस राजकीय यात्रा के मुख्य परिणाम क्या हैं? और दूसरा है, भारत-यूरोपीय संघ के व्यापक संबंधों के मद्देनज़र आप इस यात्रा की सफलता का आकलन किस तरह से करते हैं?
अभिषेक शुक्ला, PTI: महोदय, मैं PTI से अभिषेक हूं। दोनों देशों के बीच संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर इस वर्ष में हम किस तरह की और गतिविधियां देख सकते हैं?
श्री तन्मय लाल, सचिव (पश्चिम): ठीक है। पहले मैं भारत-यूरोपीय संघ के प्रश्न पर उत्तर दूंगा। भारत-पुर्तगाल के संबंध और हमारे घनिष्ठ सहयोग ने यूरोपीय संघ के साथ भारत की साझेदारी में वास्तव में योगदान दिया है। यह कोई नई बात नहीं है। हमारे संबंध दीर्घकाल से चले आ रहे हैं। असल में, वर्ष 2000 में पुर्तगाल ने यूरोपीय संघ की अपनी अध्यक्षता के दौरान पहले भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की थी। इसके बाद, वर्ष 2021 में, दोबारा, पुर्तगाल की अध्यक्षता में, पुर्तगाल ने भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं के प्रथम शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की, जो कि एक अद्वितीय व्यवस्था है।
तो, सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के नेता और हमारे प्रधानमंत्री इस शिखर सम्मेलन में एक साथ उपस्थित थे। इसलिए, भारत और यूरोपीय संघ के बीच मज़बूत रणनीतिक साझेदारी में योगदान करने के मामले में पुर्तगाल बहुत ही उपयुक्त साझेदार साबित हुआ है। हमारे संबंध, निस्संदेह, बहुत ही लाभकारी हैं, क्योंकि भारत और यूरोपीय संघ वर्तमान में एफटीए समझौते के विषय में बातचीत कर रहे हैं। और हमारा एक मंत्रिस्तरीय व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद भी है। इस तरह से, पिछले कुछ वर्षों में हमारी रणनीतिक साझेदारी में वास्तव में वृद्धि हुई है और विस्तार भी हुआ है। भारत-पुर्तगाल के घनिष्ठ संबंध इस साझेदारी में ज़बरदस्त तरीके से योगदान करते हैं।
आप इस बात से भी अवगत होंगे कि पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री महामहिम एंटोनियो कोस्टा जो अब यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं। जब वे प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने 2017 और 2019 में भारत का दौरा किया था। जैसा कि आप जानते होंगे कि महामहिम कोस्टा भारतीय मूल के हैं। इस तरह से, भारत और पुर्तगाल के बीच हमारी साझेदारी के कई पहलू हैं। यह वास्तव में भारत-यूरोपीय संघ की मज़बूत रणनीतिक साझेदारी में योगदान देता है।
जैसा कि मैंने ज़िक्र किया कि इसके परिणामों को देखें तो यह एक ऐतिहासिक यात्रा रही है, क्योंकि यह यात्रा तब की जा रही है जब हम अपने राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। लेकिन केवल यही नहीं, यह आपके लिए इस यात्रा के विभिन्न तत्वों को भी दर्शाता है, केवल औपचारिक वार्ता के संदर्भ में नहीं, बल्कि अनुसंधान फाउंडेशन की यात्रा, भारतीय समुदाय के साथ बातचीत, विभिन्न स्तरों पर की गई अन्य महत्त्वपूर्ण वार्ताओं की दृष्टि से भी। इसने वास्तव में हमारे मज़बूत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रवासी संबंधों को और सुदृढ़ बनाने में मदद की है, और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा, गतिशीलता, तथा और भी कई क्षेत्र जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल में भी हमारी आधुनिक साझेदारी पर बल दिया है।
गतिविधियों के मामले में, मुझे लगता है कि दोनों पक्ष पहले से ही ... उन्होंने भारत और पुर्तगाल में कई क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन किया है और आयोजन करने की योजना भी बना रहे हैं। इनमें से कई कार्यक्रम हमारे मज़बूत, दीर्घकालिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, संयुक्त रूप से जारी किया गया डाक टिकट दोनों देशों की मित्रता और संबंधों का प्रतीक है। असल में ये डाक टिकट दर्शाते हैं ... भारतीय पक्ष और पुर्तगाली पक्ष, दोनों पक्षों द्वारा जारी किए गए डाक टिकट दोनों देशों में पहने जाने वाले पारंपरिक पोशाक को दर्शाते हैं, यह सांस्कृतिक समानताओं का प्रतीक है। कला, सिनेमा, संगीत, शिल्प, व्यंजन इत्यादि के संदर्भ में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं... इनमें से कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां हम... फिल्म। मुझे लगता है कि हमारे राजदूत पहले ही इस संबंध में कुछ कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके हैं। शायद मैं उन्हें कुछ अन्य कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए आमंत्रित करूंगा, जिन्हें हम यहां आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। हम इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि हम युवा, नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी इत्यादि के स्तर पर हमारे संबंधों को किस तरह से आगे बढ़ा सकते हैं।
तो हो सकता है कि आप भी इसमें कोई कार्यक्रम जोड़ना चाहें।
श्री पुनीत रॉय कुंडल, पुर्तगाल में भारत के राजदूत: बहुत-बहुत धन्यवाद। पिछले वर्ष ब्राज़ील में जी20 की बैठक के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मनाने के निर्णय की बात दोहराई थी। इसके बाद दिल्ली स्थित पुर्तगाली दूतावास और हमने अपने यहां क्रियाकलापों का आयोजन किया। मैं आपके साथ यह जानकारी साझा कर सकता हूं कि जनवरी माह में हमने एक फिल्म महोत्सव के साथ अपने क्रियाकलापों की शुरुआत की, जिसका उद्घाटन स्वयं विदेश मंत्री पाउलो रंगेल ने किया था। हम नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन भी कर रहे हैं, विशेष रूप से भारतीय सांस्कृतिक... भारतीय पारंपरिक नृत्य। हम संगीत कार्यक्रम का भी आयोजन कर रहे हैं। हम पुर्तगाल भर में फिल्म समारोह आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें मदीरा और संभवतः अज़ोरेस के द्वीप भी शामिल हैं। हमने जो काम किया उसमें से एक यह था कि हमने फर्नांदो पेसोआ की पुस्तक मेन्सेजम का हिन्दी में अनुवाद किया। 21 मार्च, जो कि अंतर्राष्ट्रीय लेखक दिवस है, हमने भारत से लेखक को आमंत्रित कर यहां पुस्तक का विमोचन किया। यह पुर्तगाल सरकार के सहयोग से कैमोस संस्थान में किया गया।
उस पुस्तक ने वास्तव में लोगों ने अत्यधिक दिलचस्पी दिखाई और कल शाम पुर्तगाल के माननीय राष्ट्रपति ने भी अपने भाषण में इस पुस्तक का ज़िक्र किया। फर्नांदो पेसोआ, और पुस्तक का नाम मेन्सेजम है, जिसका हिन्दी में अर्थ है संदेश। तो, उस पुस्तक ने वास्तव में ... इसने सभी का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि राष्ट्रपति ने भी कल शाम राजकीय भोज के दौरान अपने भाषण में इसका उल्लेख किया था। जैसा कि मैंने कहा, हम कई शहरों में इंडिया डेज़ भी आयोजित करने की इच्छा रखते हैं। इस महीने के अंत में, हम कोयम्बरा विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जिसमें भारत, भारतीय नृत्य, व्यंजन और फिल्म शो पर चर्चा होगी। इस तरह से, हम न केवल शहरों और नगर पालिकाओं तक, बल्कि विश्वविद्यालयों तक भी पहुंच स्थापित कर रहे हैं। साथ ही, सोने पर सुहागा वाली बात यह है कि 50 वर्ष के उत्सव पर राष्ट्रपति जी स्वयं यात्रा कर रही हैं, जिससे कि हमें इस समारोह को सफल बनाने में मदद मिलेगी … और इस वर्ष यह जश्न मनाना इसलिए और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। धन्यवाद।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (XPD) : चूंकि और प्रश्न नहीं हैं, इसलिए महोदय आपकी अनुमति से मैं इस विशेष प्रेस वार्ता को समाप्त करना चाहूंगा। धन्यवाद, महोदय। आप सभी का धन्यवाद। यह प्रेस वार्ता समाप्त की जाती है।
लिस्बन
08 अप्रैल 2025