श्री राजेश परिहार, निदेशक (XPD): नमस्कार देवियों और सज्जनों। माननीय राष्ट्रपति जी की स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा के संबंध में इस विशेष प्रेस वार्ता में आपका स्वागत है। इस विशेष प्रेस वार्ता के लिए मेरे साथ मंच पर विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) श्री तन्मय लाल; विदेश मंत्रालय में अपर सचिव (मध्य यूरोप) सुश्री पूजा कपूर; स्लोवाकिया में भारत की राजदूत सुश्री अपूर्वा श्रीवास्तव; और भारत के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव श्री अजय सिंह उपस्थित हैं। इसी के साथ मैं अनुरोध करता हूं कि सचिव (पश्चिम) मीडिया को इस यात्रा से जुड़ी जानकारी प्रदान करें।
श्री तन्मय लाल, सचिव (पश्चिम): धन्यवाद। नमस्कार। यह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एक ऐतिहासिक राजकीय यात्रा रही है।
यह एक ऐतिहासिक राजकीय यात्रा है, क्योंकि यह लगभग 30 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है, और इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों की दृढ़ प्रतिबद्धता के कारण ही यह संभव हो पाया है। सबसे पहले मैं आपको इस यात्रा से जुड़े मूल तत्वों के बारे में बताना चाहूंगा।
माननीय राष्ट्रपति के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन बांभणिया और दो माननीय संसद सदस्य श्री धवल पटेल और श्रीमती संध्या रे भी इसमें शामिल हैं।
माननीय राष्ट्रपति के साथ लगभग 35 सदस्यों का एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। राष्ट्रपति ने स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम पीटर पेलेग्रिनी, प्रधानमंत्री श्री रॉबर्ट फिको, संसद के अध्यक्ष और विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों से भेंट की।
इस यात्रा के दौरान दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। एक व्यापारिक मंच की मेज़बानी भी की गई। कार्यक्रम में नित्रा शहर में टाटा-जगुआर लैंड रोवर विनिर्माण संयंत्र का दौरा भी शामिल था।
राष्ट्रपति को कॉन्स्टेंटाइन द फिलॉसफर यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। वे शीघ्र ही भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मिलेंगी।
कार्यक्रम के विवरण के संदर्भ में, कल सुबह राष्ट्रपति मुर्मू का औपचारिक रूप से स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद दोनों राष्ट्रपतियों के बीच एकांत बैठक हुई और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की गई।
दोनों नेताओं की उपस्थिति में दो समझौता ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान किया गया। इनमें से एक समझौता ज्ञापन भारत के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और स्लोवाकिया के विदेश मंत्रालय के बीच हुआ है। दूसरा समझौता एनएसआईसी और बिज़नेस स्लोवाकिया के बीच लघु एवं मध्यम उद्यम के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित है।
दोनों नेताओं ने कल प्रेस वक्तव्य भी जारी किए। शाम में, यह... स्लोवाकिया के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति मुर्मू के सम्मान में एक राजकीय भोज की मेज़बानी की।
आज सबसे पहले, स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति ने... उन्होंने और हमारे राष्ट्रपति ने संयुक्त रूप से व्यापारिक मंच को संबोधित किया, जो विदेश मंत्रालय में आयोजित किया गया था, जहां स्लोवाक व्यापारियों के साथ-साथ फिक्की (FICCI) का व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित था।
दोपहर बाद, प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक शहर नित्रा की यात्रा की, जो कि ब्रातिस्लावा से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां कॉन्स्टेंटाइन विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति मुर्मू को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह एक बहुत ही आकर्षक समारोह था, जिसमें राष्ट्रपति पेलेग्रिनी भी उपस्थित थे।
इसके बाद, दोनों नेताओं ने टाटा-जगुआर लैंड रोवर विनिर्माण संयंत्र का दौरा किया, जो पास में ही स्थित है। इसके पश्चात दोनों राष्ट्रपतियों ने विनिर्माण संयंत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रबंधन तथा श्रमिकों और वहां के कर्मचारियों से भी मुलाकात की, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक और पेशेवर भी शामिल हैं।
इसके बाद वृक्षारोपण के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जहां दोनों राष्ट्रपतियों ने एक सार्वजनिक उद्यान में लिंडेन का पेड़ लगाया, जो कि स्लोवाक गणराज्य का राष्ट्रीय वृक्ष है, इस अवसर पर नित्रा शहर के मेयर श्री मारेक हट्टास भी उपस्थित थे। वृक्षारोपण के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रधानमंत्री मोदी की पहल "एक पेड़ मां के नाम" के बारे में बात की।
उन्होंने स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति को इस पहल के बारे में विस्तार से बताया, इस पर स्लोवाकिया के राष्ट्रपति ने कहा ... उन्हें यह बहुत दिलचस्प लगा है, और टिप्पणी की कि स्लोवाकिया भी ऐसी पहल शुरू करने पर विचार कर सकता है। इससे पहले, डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित करने के अवसर पर स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम पेलेग्रिनी ने अपने भाषण में उल्लेख किया कि भारत किस तरह से एक आधुनिक राष्ट्र की दिशा में अग्रसर हो रहा है, जो कि उसकी समृद्ध और सहस्राब्दी पुरानी परंपरा के प्रति सम्मान भी रखता है और यह सभ्यतागत उन्नति का प्रतिनिधित्व करता है।
जैसा कि मैंने ज़िक्र किया कि इस यात्रा में मज़बूत व्यवसायिक तत्व देखने मिले। अगर हम भारत और स्लोवाक गणराज्य के बीच आर्थिक संबंधों पर नज़र डालें, तो व्यापार में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले पांच वर्षों में व्यापार तीन गुना बढ़ गया है और अब यह 1.3 बिलियन यूरो के आसपास पहुंच गया है। दोनों तरफ से निवेश हो रहे हैं।
स्लोवाकिया के ऑटोमोटिव क्षेत्र में टाटा ग्रुप का निवेश एक बहुत बड़ा निवेश है, यह लगभग 1.3 से 1.4 बिलियन यूरो के बीच का निवेश है। इस्पात जैसे अन्य क्षेत्रों में भी निवेश किया जा रहा है। इसी तरह से, स्लोवाकिया के कारोबारियों ने भारत में रेलवे, रक्षा, जैव ईंधन इत्यादि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी निवेश किया है।
उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र जैसे कि अंतरिक्ष, एआई, डिजिटल में भी हमारा आपसी सहयोग है और साइबर सुरक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में हम किस तरह से और भी अवसर तलाश कर सकते हैं इस पर भी चर्चा की गई। साझेदारी में प्रतिभा और प्रतिभा की गतिशीलता भी एक मज़बूत तत्व है। वर्तमान में, स्लोवाकिया में लगभग 6,000 भारतीय रहते और काम करते हैं, जिसमें छात्र, पेशेवर और अन्य श्रमिक शामिल हैं।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग एक मज़बूत और बढ़ता हुआ तत्व है। स्वास्थ्य एवं कल्याण सहयोग के ऐसे क्षेत्र रहे जिस पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों देशों के बीच पर्यटन में बढ़त हो रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र रहा जिस पर दोनों नेताओं ने और सहयोग की चर्चा की।
अगर हम पिछले दो से तीन वर्षों को देखें, तो विदेश मंत्रियों के बीच … लगभग पांच मंत्रिस्तरीय वार्ताएं हुई हैं और स्लोवाक के वित्त मंत्री ने एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा किया था। हाल के समय में स्लोवाक गणराज्य से दो बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आए हैं और वर्तमान में एक बड़ा भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल स्लोवाकिया का दौरा कर रहा है।
चर्चा के दौरान, राष्ट्रपति ने कुछ वर्ष पहले ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के लिए जिस तरह से स्लोवाक सरकार और वहां के लोगों ने भारत की मदद की, इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
भारत-स्लोवाकिया की साझेदारी भी प्रासंगिक है और यह भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को मज़बूती प्रदान करती है। हमारे देश संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर कई वैश्विक मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं।
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के समर्थन को दोहराया और राष्ट्रपति मुर्मू ने स्लोवाकिया के इस रुख के लिए अपनी गहरी सराहना व्यक्त की।
हमारे दोनों देशों के बीच मज़बूत सांस्कृतिक संबंध हैं। हाल के घटनाक्रमों में से एक स्लोवाकियाई विद्वान रॉबर्ट गैफ्रिक द्वारा उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद है।
सिनेमा के क्षेत्र में भी संभावित सहयोग पर चर्चा की गई। संसद का दौरा करते समय इस बात पर चर्चा की गई कि संसदीय आदान-प्रदान को किस तरह से आगे बढ़ाया जा सकता है और गहरी आपसी समझ विकसित करने में यह कैसे मददगार हो सकता है।
आज एक दिलचस्प और अनोखा कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था, जिसमें स्लोवाक बच्चों द्वारा भारतीय विषय-वस्तुओं पर बनाई गई पेंटिंग्स की कला प्रदर्शनी थी और इसे अत्यधिक सराहा गया।
वहां स्लोवाक समूह द्वारा रामायण कठपुतली प्रदर्शनी भी आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में स्लोवाक बच्चों ने स्लोवाक भाषा में कठपुतली कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया और कुछ समय के लिए राष्ट्रपति मुर्मू भी इस प्रदर्शनी में शामिल रहीं।
अगर हम भारत-स्लोवाकिया की साझेदारी पर नज़र डालें, तो न केवल राजनीतिक नेताओं बल्कि दोनों देशों के लोगों के स्तर पर भी इसकी अत्यधिक साख है। उच्च स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान जारी हैं, मंत्रिस्तरीय और अन्य बैठकों की संख्या में भी इज़ाफा हो रहा है।
हाल के वर्षों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच आदान-प्रदान हो रहा है। व्यापार और निवेश में बढ़ोत्तरी हो रही है। सहयोग के लिए अन्य नए क्षेत्र भी तलाशे जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और इसी तरह के अन्य क्षेत्र।
दरअसल, कुछ वर्ष पहले ही स्लोवाकिया द्वारा निर्मित पहला उपग्रह भारतीय रॉकेट पीएसएलवी के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया था। दोनों पक्षों की ओर से पर्यटन क्षेत्र में भी वृद्धि हो रही है।
तो, वास्तव में यह एक ऐतिहासिक यात्रा रही है। इससे दोनों देशों की साझेदारी को और गति मिलती है, जो कि पहले से मौजूद पारंपरिक सद्भावना पर आधारित है। चर्चा के दौरान, यह स्पष्ट हुआ कि दोनों देशों के बीच वैश्विक हितों के संबंध में विभिन्न मुद्दों पर विचारों में कितनी अधिक समानता है, दोनों देश लोकतंत्र, विविधता और कई अन्य वैश्विक मूल्यों को किस तरह से आपस में साझा करते हैं।
राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ व्यापार को भी दृढ़तापूर्वक प्रोत्साहित किया गया, जहां व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा के क्षेत्रों पर चर्चा की गई कि किस तरह से इस सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है। कई क्षेत्र जैसे कि ऑटोमोटिव से लेकर इस्पात, रेलवे, जैव ईंधन और रक्षा इत्यादि में सहयोग जारी है। जैसा कि मैंने ज़िक्र किया कि कुछ नए क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई, न केवल उभरती हुई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र पर, बल्कि स्वास्थ्य एवं पर्यटन और रचनात्मक कला जैसे क्षेत्रों पर भी।
साझेदारी के व्यापक संदर्भ में, भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी, जहां हम एफटीए को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं, और एक मंत्रिस्तरीय व्यापार तथा प्रौद्योगिकी परिषद कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य कर रही है और बहुत सारे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र पर चर्चा भी कर रही है; लेकिन व्यापक बहुपक्षीय संयुक्त राष्ट्र के संदर्भ में भी इन मुद्दों पर बहुत ही अच्छी तरह से चर्चा की गई।
विभिन्न बैठकों के दौरान नेताओं, विशेष रूप से दोनों राष्ट्रपतियों, के बीच बहुत ही अच्छा सामंजस्य और व्यक्तिगत रूप से जुड़ाव देखने मिला।
हमें आशा है कि इस यात्रा के परिणामस्वरूप भारत और स्लोवाकिया के संबंध और भी प्रगाढ़ होंगे। धन्यवाद।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (XPD): धन्यवाद, महोदय। प्रश्नों के लिए मंच खोलते हैं। जयंती?
जयंती, DD न्यूज़: नमस्कार महोदय, मैं DD न्यूज़ से जयंती हूं। महोदय, पूरी यात्रा के दौरान दोनों राष्ट्रपतियों द्वारा आर्थिक सहयोग पर अत्यधिक बल दिया गया। आगे चलकर दोनों देशों के बीच इस मोर्चे पर हमें किस तरह का सहयोग देखने मिलेगा, भारत-स्लोवाकिया के संबंधों के संदर्भ में, व्यापार और निवेश के संदर्भ में?
अभिषेक शुक्ला, PTI: महोदय, मैं PTI से अभिषेक हूं। राष्ट्रपति ने व्यापार में विविधता लाने की बात कही। आप हमें विस्तारपूर्वक यह बता सकते हैं कि हम किन नए क्षेत्रों में व्यापार आदान-प्रदान की तलाश कर रहे हैं?
वक्ता: द्विपक्षीय व्यापार के संबंध में, यह स्पष्ट है कि कुछ वर्ष पहले जो भी लक्ष्य निर्धारित किया गया था हम उसे हासिल कर चुके हैं। लेकिन उस स्तर पर भी, कई कारोबारियों का कहना है कि इसमें अब भी अत्यधिक संभावनाएं हैं। इसलिए, 1.3 बिलियन ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, जिस पर हमें संतोष कर लेना चाहिए। तो अब क्या हम अपने लक्ष्यों में संशोधन करेंगे? और हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?
और दूसरा प्रश्न यह है कि टाटा वैश्विक स्तर पर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है। लेकिन ब्रातिस्लावा स्थित कई भारतीय कारोबारी समूहों का मत है कि मध्यम आकार की कंपनियों के लिए यहां पर्याप्त अवसर हैं, जो फिलहाल इतनी सक्रिय नहीं हैं, क्योंकि स्लोवाकिया के बारे में अभी और भी जागरूकता लाने की ज़रूरत महसूस हो रही है। तो यह उनका सुझाव था।
एलेक्स पैटकाश, न्यूज़ एजेंसी ऑफ स्लोवाक रिपब्लिक: मैं न्यूज़ एजेंसी ऑफ स्लोवाक रिपब्लिक से एलेक्स पैटकाश हूं। मेरा प्रश्न संयुक्त राष्ट्र के बारे में है। राष्ट्रपति श्री पेलेग्रिनी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। क्या भविष्य में, स्लोवाकिया को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन मिल सकता है? धन्यवाद।
श्री तन्मय लाल, सचिव (पश्चिम): मुझे लगता है कि तीन प्रश्न मूल रूप से आर्थिक क्षेत्र से संबंधित हैं, और खासतौर से एसएमई और व्यापार क्षेत्र में निवेश को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका से जुड़े हुए हैं। हां, इस पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। एक समझौता ज्ञापन जिस पर हस्ताक्षर किए गए वह यह था कि किस तरह से ज़्यादा से ज़्यादा कारोबारी जुड़ाव (B2B), व्यापार प्रदर्शनी, प्रतिनिधिमंडल, यात्राओं इत्यादि को आगे बढ़ाया जाए … किस तरह से प्रदर्शनी, क्षेत्र-विशिष्ट प्रदर्शनी इत्यादि में भागीदारी को बढ़ावा मिले।
यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां हमें काम करने की ज़रूरत है और ज़ाहिर तौर पर इसमें अपार संभावनाएं हैं। हमें आशा है कि एनएसआईसी और स्लोवाक बिज़नेस के बीच जिस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है वह इन आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने में भी योगदान देगा।
कारोबारी आंकड़ों में बढ़ोत्तरी हुई है। यह एक बहुत ही मज़बूत उत्साहवर्धक रुझान हैं। जैसा कि मैंने बताया है कि व्यापक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, और जैसा कि आपको याद होगा, कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स ने ईसी अध्यक्ष सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व में भारत का दौरा किया जिसमें दोनों नेताओं ने निर्णय लिया … इस वर्ष की समाप्ति से पहले उन्होंने टीमों को मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। इसका भी स्लोवाकिया सहित विभिन्न यूरोपीय साझेदारों के साथ हमारे व्यक्तिगत द्विपक्षीय व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
भारतीय व्यवसायिक प्रतिनिधिमंडल जो आया है वह असल में कई विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन, आयुष, पारंपरिक चिकित्सा, आईटी, एआई, ऑटोमोटिव, फिनटेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। तो इस तरह से कई क्षेत्रों में दिलचस्पी दिखाई जा रही है। स्लोवाकिया में अभियांत्रिकी और विनिर्माण की एक दीर्घकालीन परंपरा है, तो इन क्षेत्रों पर चर्चा जारी रहेगी।
जैसा कि मैंने उल्लेख किया कि स्लोवाक कंपनियों की भारत में कई क्षेत्रों में उपस्थिति है जिनमें अभियांत्रिकी, रेलवे इत्यादि शामिल हैं। इसलिए, हमें पूरी आशा है कि व्यवसाय के संपूर्ण क्षेत्रों में निरंतर विस्तार होते रहेगा और कई नई उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी सहयोग देखने मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विषय में, अस्थायी पद के लिए स्लोवाक उम्मीदवारी, अगर मेरी समझ से सही है तो, हां, इसका ज़िक्र किया गया था और मुझे विश्वास है कि इस प्रस्ताव के अनुसार इस पर उचित रूप से विचार किया जाएगा। और इस बात पर चर्चा हुई कि बहुपक्षीय संदर्भ में कई क्षेत्रों में किस तरह से सहयोग जारी है और विभिन्न उम्मीदवारी का निर्वाचन भी इसका भाग है। तो यह चर्चा जारी रहेगी।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (XPD): धन्यवाद, महोदय। तो अब हम इस प्रेस वार्ता के समापन पर आते हैं। धन्यवाद महोदय। आप सभी का धन्यवाद। प्रेस वार्ता समाप्त की जाती है।
ब्रातिस्लावा
10 अप्रैल, 2025