राजदूत हरीश,
महामहिम,
विशिष्ट प्रतिनिधिगण,
देवियों और सज्जनों,
हम सभी अत्यंत गंभीरता के साथ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' विषय पर इस प्रदर्शनी में एकत्रित हुए हैं।
जो लोग अब बोल नहीं सकते, उन लोगों को आवाज़ देने का यह प्रदर्शनी एक विनम्र, लेकिन दृढ़ प्रयास है। जो हमसे दूर हो गए हैं, उन लोगों को श्रद्धांजलि। और आतंकवाद के कहर से तबाह हुए जीवन की स्मृति।
इस सभा के माध्यम से, हम आतंकवाद पीड़ितों के परिवारों और प्रियजनों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं। उनका दर्द, आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने के लिए हमारी साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता को स्पष्ट याद दिलाता है।
महामहिम, दोस्तो,
आज की प्रदर्शनी केवल फोटो, वीडियो और साक्ष्यों की प्रस्तुति ही नहीं है,। यह हमारी साझा मानवता का बयान है; यह मानवीय साहस का एक गलियारा है। हर क्षण, हर स्मृति, प्रत्येक कलाकृति और हर शब्द जीवन में बाधा, बदलाव या खो जाने की कहानी कहता है। ये दुनियाभर के आम पुरुषों और महिलाओं की कहानियां हैं।
यहां संयुक्त राष्ट्र में, हमें न केवल स्मरण और सम्मान करना चाहिए, बल्कि अपने आप को नए सिरे से प्रतिबद्ध करना चाहिए- उन मूल्य और मानवाधिकारों के लिए कार्य करने, उनकी रक्षा करने और उन्हे कायम रखने के लिए. जिन्हें आतंकवाद खत्म करना चाहता है।
महामहिम, दोस्तो,
आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। यह उन सभी बातों के विपरीत है, जिनके लिए संयुक्त राष्ट्र खड़ा है - मानवाधिकार, नियम और मानक, तथा राष्ट्रों को एक-दूसरे के साथ किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए। जब किसी देश द्वारा अपने पड़ोसी के खिलाफ आतंकवाद का समर्थन किया जाता है, जब चरमपंथ की कठोरता से प्रेरित होता है, जब वह गैरकानूनी गतिविधियों के बढ़ावा देता है, तो इसे सार्वजनिक रूप से उजागर करना ज़रूरी हो जाता है। और ऐसा करने का एक तरीका यह है कि वैश्विक समाज पर इसके द्वारा ढाए गए कहर को प्रदर्शित किया जाए।
पांच सप्ताह पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम में आतंकवाद के विशेष भयावह कृत्य की कड़ी निंदा की थी। उसने मांग की कि इस कृत्य के अपराधियों को जवाबदेह ठहराया जाए और उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए। हमने तब ऐसा होते हुए देखा हुआ है।
इस प्रतिक्रिया से आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता का एक बड़ा संदेश रेखांकित होता है। विश्व को कुछ बुनियादी अवधारणाओं पर एक साथ आना चाहिए: आतंकवादियों के लिए कोई माफी नहीं है, उन्हें छद्म रूप में न मानें और परमाणु ब्लैकमेल के लिए कोई लचीला रुख नहीं अपनाना चाहिए। इस बारे में किसी भी देश के प्रायोजन को उजागर करना चाहिए और उसका प्रतिकार किया जाना चाहिए। अब तक हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि आतंकवाद कहीं भी हो हर जगह शांति के लिए खतरा है। आइए, इस समझ को हमारी सामूहिक सोच और प्रतिक्रिया का मार्गदर्शन करने दें। यह प्रदर्शनी हमारे सामने मौजूद चुनौती का एक उपयुक्त अनुस्मारक है।
आज सुबह मुझसे जुड़ने के लिए एक बार फिर मैं आपको धन्यवाद देता हूं।
धन्यवाद।
न्यू यॉर्क
जून 30, 2025