महामहिम,
एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के साथ-साथ इस यात्रा के दौरान आपसे भेंट करना मेरे लिए अत्यंत ही खुशी की बात है। मैं गर्मजोशी भरे स्वागत और आवभगत के लिए आपकी सराहना करता हूं।
2. मैं चीनी पक्ष को एससीओ की सफल अध्यक्षता के लिए शुभकामनाएं देता हूं। हम कल बैठक करेंगे और भारत लाभकारी परिणाम व निर्णय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
3. हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने संबंधों के प्रति दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाएं। अक्तूबर 2024 में कज़ान में हमारे नेताओं की बैठक के बाद से, भारत-चीन के संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारी ज़िम्मेदारी उस गति को बनाए रखना है।
4. हाल के दिनों में, हम दोनों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में मिलने और रणनीतिक संचार को कार्यान्वित करने के लिए कई अवसर मिले हैं। हमें आशा है कि अब यह नियमित रूप से होगा और एक-दूसरे के देशों में भी होगा।
5. इस वर्ष हम अपने देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हम सराहना करते हैं कि पांच वर्षों के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा भी दोबारा शुरू हो गई है। मैं इस मामले में सहयोग के लिए चीनी पक्ष को धन्यवाद देता हूं।
6. महामहिम, हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए पिछले नौ महीनों में अच्छी प्रगति की है। यह सीमा पर तनाव के समाधान और वहां शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की हमारी क्षमता का परिणाम है। यह पारस्परिक रणनीतिक विश्वास और द्विपक्षीय संबंधों के सुचारू विकास का मूलभूत आधार है। अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम सीमा से संबंधित अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दें, जिसमें तनाव कम करना भी शामिल है।
7. आज पड़ोसी देशों और विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, हमारे संबंधों के विभिन्न पहलू और आयाम हैं। हमारे लोगों के बीच आदान-प्रदान को सामान्य बनाने की दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। इस संदर्भ में यह भी आवश्यक है कि प्रतिबंधात्मक व्यापार उपायों और बाधाओं से बचा जाए। मुझे उम्मीद है कि इन मुद्दों पर और विस्तार से चर्चा होगी।
8. भारत और चीन के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंध न केवल हमारे लिए, बल्कि विश्व के लिए भी लाभकारी हैं। यह सबसे लाभदायक हो सकता है जब आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों की देखरेख की जाए। हम पहले भी इस बात पर सहमत हुए हैं कि मतभेद विवाद नहीं होने चाहिए और न ही प्रतिस्पर्धा कभी संघर्ष में बदलनी चाहिए। इस आधार पर, अब हम अपने संबंधों को सकारात्मक दिशा में विकसित करना जारी रख सकते हैं।
9. महामहिम, आज की हमारी बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी शामिल होगा। कल हम एससीओ के प्रारूप में बैठक करेंगे, जिसका प्राथमिक कार्य आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करना है। यह एक साझा चिंता है और भारत को उम्मीद है कि आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता को दृढ़ता से बरकरार रखा जाएगा।
10. विदेश मंत्री के रूप में, आप लंबे समय से हमारे समग्र द्विपक्षीय संबंधों के लिए उत्तरदायी रहे हैं। मुझे इस गहन परिवर्तन के युग में हमारे संबंधों की स्थिति पर गहराई से चर्चा करने में खुशी हो रही है। मैं रचनात्मक और दूरदर्शी विचारों के आदान-प्रदान की उम्मीद करता हूं।
बीजिंग
14 जुलाई 2025