श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों। मैं प्रधानमंत्री की यूके और मालदीव की आगामी यात्रा के संबंध में विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री द्वारा रखी गई इस विशेष प्रेस वार्ता में आपका स्वागत करता हूं। हमारे बीच विदेश मंत्रालय में अपर सचिव आईओआर क्षेत्र, श्री पुनीत अग्रवाल और विदेश मंत्रालय में यूरोप पश्चिम प्रभाग के अपर सचिव श्री पीयूष श्रीवास्तव भी उपस्थित हैं।
इसके साथ ही, मैं विदेश सचिव महोदय को इस यात्रा पर प्रारंभिक वक्तव्य देने के लिए आमंत्रित करता हूं। महोदय अपनी बात रखिये।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: धन्यवाद। आप सभी को नमस्कार। प्रधानमंत्री की यूनाइटेड किंगडम और मालदीव की आगामी यात्राओं के संबंध में कुछ दिन पहले जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति आपने देखी होगी। अब मैं आपको इससे जुड़ी आगे की जानकारी से अवगत कराना चाहूंगा।
प्रधानमंत्री कल, 23 जुलाई को यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे, जहां वे यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री माननीय कीर स्टार्मर के साथ विचार-विमर्श करेंगे। और इस यात्रा के दौरान, वे महामहिम राजा चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात करेंगे। इस यात्रा के दौरान भारत और यूनाइटेड किंगडम के व्यापार जगत के अग्रणियों के साथ भी बातचीत किए जाने की उम्मीद है।
पदभार ग्रहण करने के बाद से प्रधानमंत्री की यह यूनाइटेड किंगडम की चौथी यात्रा होगी। इससे पहले वे 2015 और 2018 में वहां जा चुके हैं, तथा 2021 में ग्लासगो में आयोजित सीओपी-26 शिखर सम्मेलन में भी वे वहां थे। पिछले वर्ष ही, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री स्टार्मर से दो बार मिल चुके हैं, पहली बार पिछले वर्ष रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान, और अभी हाल ही में, पिछले महीने जून में, कनाडा के कनानास्किस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान। और हां, वे कई बार फोन पर भी संपर्क में रहे हैं।
यह यात्रा हालांकि अल्पकालीन है, लेकिन दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा करने और इसे और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा करने का अवसर देगी। साथ ही, वे क्षेत्रीय और वैश्विक प्रासंगिकता वाले मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, भारत-यूके की साझेदारी को 2021 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया गया था, और तब से नियमित रूप से उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान हुए हैं, और दोनों पक्ष इस साझेदारी को और भी उच्च स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
शिखर-स्तरीय बैठकों के अलावा, विदेश मंत्री और उनके समकक्ष, ब्रिटिश विदेश मंत्री की नियमित बैठकें होती हैं, और मंत्रिस्तरीय स्तर पर कई अन्य संस्थागत तंत्र हैं, जो रणनीतिक मुद्दों, वित्तीय, आर्थिक, ऊर्जा-संबंधी मुद्दों के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित मुद्दों से निपटते हैं। मौजूदा समय में, व्यापार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार, ज्ञान अर्थव्यवस्था के क्षेत्र हमारे द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं।
उदाहरण के लिए, प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल, जिसकी पहली वर्षगांठ आने वाली है, उस पर पिछले वर्ष हस्ताक्षर किए गए थे और यह इस बात का प्रमुख संकेत है कि हम महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अपने संबंधों को किस दिशा में ले जा रहे हैं। आपमें से कुछ लोगों को पता होगा कि साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय ने हाल ही में, पिछले सप्ताह ही, गुरुग्राम में अपना परिसर खोला है, और यह नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने वाला पहला विदेशी विश्वविद्यालय है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूंगा कि अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के अलावा, कई अन्य ब्रिटिश विश्वविद्यालय भी हैं... कई अन्य ब्रिटिश विश्वविद्यालय भी इसी नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने पर विचार कर रहे हैं।
इस अत्यंत महत्त्वपूर्ण संबंध के बारे में कुछ अन्य तथ्य और आंकड़े हैं कि 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 55 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर जाएगा। यूके भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक भी है, जिसका कुल निवेश 36 बिलियन डॉलर का है। दिलचस्प बात यह है कि भारत स्वयं यूके में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक बड़ा स्रोत है, जिसका संचयी निवेश लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। यूके में करीब एक हज़ार भारतीय कंपनियां हैं जो लगभग 100,000 लोगों को रोज़गार प्रदान करती हैं और उनका संचयी राजस्व 91 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का है।
दूसरा महत्त्वपूर्ण पहलू जिसकी ओर मैं ध्यान दिलाना चाहता था, वह था यूके-भारत अवसंरचना वित्तपोषण सेतु, जिसका समन्वय हमारी ओर से नीति आयोग और यूके की ओर से लंदन शहर के बीच किया जाता है, और यह तंत्र भारत में हरित अवसंरचना परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए वित्त जुटाने में यूके की विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए काम करता है।
रक्षा क्षेत्र में, हम सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं के बीच नियमित बातचीत और अभ्यास होते हुए देख रहे हैं। हमने एक-दूसरे की सैन्य अकादमियों में सैन्य प्रशिक्षकों को नियुक्त किया है, और हाल के दिनों में हमने जिन महत्त्वपूर्ण साझेदारी परियोजनाओं को शुरू किया है, उनमें से एक दोनों देशों के बीच विद्युत प्रणोदन क्षमता पर विचार करने का समझौता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में, आप सभी हमारे दोनों देशों के बीच प्रमुख सहयोग से अवगत होंगे, जिसके तहत सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन विकसित करने के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी की है। हाल ही में, यही दोनों साझेदार मलेरिया के टीके को विकसित करने के लिए एक साथ आए हैं, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2023 में मंज़ूरी दी है। जैसा कि मैंने कहा, यूके भारत के लिए एक बहुत बड़ा अनुसंधान और नवाचार साझेदार बना हुआ है।
मैंने कुछ समय पहले प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल (टीएसआई) का ज़िक्र किया था, और कुछ प्रमुख क्षेत्र जिनमें टीएसआई काम करता है उनमें दूरसंचार, महत्त्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, उन्नत सामग्री और क्वांटम कंप्यूटिंग शामिल हैं।
इस संबंध का सबसे महत्त्वपूर्ण, संभवतः आधारभूत पहलू वह जीवंत सेतु है जो कि भारत और यूके को जोड़ता है, ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोग, लगभग 1.8 मिलियन प्रवासी भारतीय, जिन्होंने न केवल हमारे दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों को मज़बूत करने में सहयोग दिया है, बल्कि यूके की अर्थव्यवस्था और समाज में भी अत्यंत मूल्यवान योगदान दिया है।
अब मैं प्रधानमंत्री की मालदीव यात्रा की बात करना चाहूंगा, जो 25 और 26 जुलाई, 2025 को होगी। यह एक राजकीय यात्रा है जिसे वे मालदीव के महामहिम राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के निमंत्रण पर कर रहे हैं।
आपको याद होगा कि राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू अक्तूबर 2024 में भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। इससे पहले, वे नव निर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए भारत आए थे। और प्रधानमंत्री और डॉ. मुइज़्ज़ू पहले भी सीओपी बैठक के दौरान दुबई में मिले थे। प्रधानमंत्री मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि होंगे, जो कि 26 जुलाई, 2025 को है। संयोगवश, 2025 वह वर्ष भी होगा जब हमारे दोनों देश, भारत और मालदीव के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाएंगे।
प्रधानमंत्री की यह राजकीय यात्रा नवंबर 2023 में राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के पदभार ग्रहण करने के बाद किसी राष्ट्राध्यक्ष की पहली राजकीय यात्रा है। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री इससे पहले 2018 और 2019 में मालदीव आ चुके हैं और यह मालदीव की उनकी तीसरी यात्रा होगी।
मालदीव, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारा एक बहुत ही निकटवर्ती साझेदार है, भारत की पड़ोसी प्रथम नीति में भी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण साझेदार है, और भारत के महासागर दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में भी, जो सभी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति है।
जब भी मालदीव को प्राकृतिक या मानव निर्मित संकट का सामना करना पड़ा है, तब उसकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हम सबसे पहले आगे रहे हैं। दोनों देशों के बीच मज़बूत राजनीतिक संबंध हैं, जैसा कि चर्चा में ज़िक्र किया गया है और उच्च स्तर पर नियमित यात्राओं से इसे बल मिला है। मैंने अक्तूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू की यात्रा का यहां उल्लेख किया था, जब दोनों नेताओं ने भारत-मालदीव व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए एक संयुक्त दृष्टिकोण अंगीकृत किया था। यह संयुक्त दृष्टिकोण, हमारे संबंधों की दिशा में एक मार्गदर्शक-रूपरेखा की तरह काम करता है, और इस वर्ष, पहले छह महीनों में ही, हमने मालदीव से लगभग आधा दर्जन मंत्री-स्तरीय यात्राएं होते हुए देखी हैं। मालदीव संसद के अध्यक्ष ने भारत का दौरा किया है। असल में, इस वर्ष विदेश मंत्री की पहली मुलाकात मालदीव के विदेश मंत्री के साथ हुई थी।
आर्थिक मोर्चे पर, भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। द्विपक्षीय व्यापार लगभग 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है, और भारत लगातार... भारतीय निवेशक मालदीव में पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों जैसे क्षेत्रों का हिस्सा बने हुए हैं। आर्थिक मोर्चे पर, एक हालिया घटनाक्रम जो मैं आपके साथ साझा करना चाहूंगा, वह यह है कि दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते और निवेश संधि पर बातचीत करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं। और नवीकरणीय ऊर्जा, मत्स्य पालन आदि सहित सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी काम किया जा रहा है।
द्विपक्षीय सहयोग के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी। भारत मालदीव का पारंपरिक विकास साझेदार रहा है, जो रियायती दर पर ऋण, अनुदान, क्रेता ऋण सुविधा के माध्यम से विभिन्न पहलों को कार्यान्वित करता है, साथ ही कई क्षेत्रों में क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाता है।
वर्तमान में प्रमुख परियोजना ग्रेटर माले में चल रही एक कनेक्टिविटी परियोजना है, जो ग्रेटर माले क्षेत्र में बुनियादी ढांचे में एक अहम परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी, मालदीव में चार द्वीपों को जोड़ने का काम करेगी। सड़कों, हवाई अड्डों, मत्स्य प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य क्षेत्रों में भी परियोजनाएं चल रही हैं। हम मालदीव की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार सामाजिक आवास में मदद प्रदान करके उनके दबाव को कम कर रहे हैं।
और आप इस बात से अवगत होंगे कि हमने मालदीव सरकार को अत्यधिक मात्रा में आपातकालीन वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिसमें राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के यहां आने के दौरान की गई दोहरी मुद्रा विनिमय व्यवस्था जैसे उपाय भी शामिल हैं, जिसके तहत 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ 30 बिलियन भारतीय रुपए भी प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक ने मालदीव के ट्रेज़री बिलों में पुनः अंशदान जारी रखा है। मालदीव हमारे क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का सबसे बड़ा लाभार्थी है और छात्रवृत्तियों व प्रशिक्षणों के माध्यम से हम इसे आगे बढ़ाते हैं।
हमारे दोनों देशों के बीच मज़बूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी है। भारत मालदीव को उसकी क्षमता निर्माण में लगातार सहायता प्रदान करता रहा है, मालदीव के रक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित करता रहा है और इसे दोनों देशों के बीच नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा नौसैनिक अभ्यास के ज़रिए किया जाता है। हम जहाज और परिसंपत्तियों के प्रावधान से मालदीव की मदद कर रहे हैं, ताकि उसकी ईईजेड निगरानी और समुद्री डोमेन जागरूकता क्षमता बढ़ाई जा सके। और दोनों देश कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के अंतर्गत भी एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं।
मालदीव में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में मालदीव के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय आधिकारिक बैठकें भी शामिल होंगी। कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इसके विवरण को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है, और हम कुछ नई पहलों के संबंध में कुछ घोषणाएं भी करेंगे।
मालदीव के साथ हमारे संबंध व्यापक और बहुआयामी हैं। उच्चतम स्तर पर नेतृत्व द्वारा इस पर ध्यान दिया गया है, और हमारा मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा इन मज़बूत संबंधों को और मज़बूत करने में सहयोग देगी तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुरक्षा में योगदान देगी, जो हम दोनों के लिए अहम भौगोलिक क्षेत्र है।
अब मैं यहां विराम देना चाहूंगा। अगर आपके कोई सवाल हैं, तो मुझे उनका जवाब देने में खुशी होगी।
सुमिता: महोदय, क्या आप उन रिपोर्टों पर टिप्पणी कर सकते हैं जिनमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री एफटीए दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, और क्या इसकी तारीख की भी पुष्टि की जा सकती है? और आप किन संभावित परिणामों की अपेक्षा कर रहे हैं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री की यूनाइटेड किंगडम यात्रा के संबंध में? धन्यवाद।
ऋषभ, टाइम्स नाउ: नमस्कार महोदय। मैं टाइम्स नाउ से ऋषभ हूं। मेरे दो सवाल हैं, एक यूके पर और एक मालदीव पर। सबसे पहले, महोदय, क्या उन भगोड़ों के बारे में चर्चा होगी जो अभी यूनाइटेड किंगडम में हैं? मैं नीरव मोदी, ललित मोदी और विजय माल्या की बात कर रहा हूं।
और मालदीव में चर्चा के दौरान क्या हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और रक्षा साझेदारी पर भी बातचीत की जाएगी? क्या भारत द्वारा मालदीव को प्रदान किए गए प्लेटफार्मों के रखरखाव के लिए भारतीय सैनिकों की वापसी होगी?
सिद्धांत सिब्बल, विऑन: नमस्ते महोदय, मैं विऑन से सिद्धांत हूं। महोदय, यूके में खालिस्तानी मुद्दे पर कितनी बातचीत की जाएगी, जो अतीत में भारत के लिए चिंता का विषय रहा है? खालिस्तानी चरमपंथी भारतीय मिशन में तोड़फोड़ और अन्य घटनाओं में लिप्त रहे हैं।
मालदीव के बारे में मेरा सवाल बहुत ही साधारण है क्योंकि पिछले एक साल पहले संबंध बेहद ख़राब नज़र आ रहे थे। संबंधों में आखिर ऐसा क्या बड़ा बदलाव घटित हुआ कि आपको यह संबंध आज सकारात्मक दिशा की ओर रुख करते हुए दिख रहे हैं?
कृष्णमोहन शर्मा, भारत एक्सप्रेस: महोदय मैं भारत एक्सप्रेस से कृष्णमोहन शर्मा हूं। यूके और भारत के बीच में प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन बहुत सारी चुनौतियां इस बात को लेकर देखी जाती हैं कि हमारे यहां जो कैदियों की स्थिति है वो ठीक नहीं है और इस बहाने बहुत सारे भगोड़े वहां से यहां पर भेजे नहीं जाते हैं, इस पर कोई चर्चा होगी क्या?
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: धन्यवाद। मैं समझता हूं कि यूके के साथ एफटीए के संबंध में आपका जो प्रश्न है, तो आप जानते हैं कि 6 मई को प्रधानमंत्री और यूके के प्रधानमंत्री के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें घोषणा की गई थी कि दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते और अन्य मुद्दों पर बातचीत पूरी कर ली है। तब से, दोनों पक्ष एक-दूसरे के बहुत निकट संपर्क में हैं।
ऐसे किसी भी समझौते के लिए स्पष्ट रूप से कानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है। हम उन पर लगातार काम करना जारी रखे हुए हैं और अंतिम दौर का काम भी चल रहा है। और इस स्तर पर मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि हम उचित समय पर आपको इस बारे में अंतिम जानकारी से अवगत करवाएंगे।
यूके में भारतीय कानून और भारतीय न्याय के संदर्भ में भगोड़ों से संबंधित कुछ प्रश्न हैं। ये दोनों पक्षों के बीच चर्चा का विषय रहा है, और हम इन भगोड़ों को भारत को सौंपने का मामला लगातार उठाते रहे हैं। ज़ाहिर बात है कि दूसरे देश में ऐसे अनुरोध और ऐसे मुद्दों के लिए एक कानूनी प्रक्रिया होती है और हम इन मामलों पर यूके में अपने साझेदारों के साथ बहुत निकटता से संपर्क बनाए रखते हैं।
खालिस्तानी चरमपंथियों की मौजूदगी और इनके निकटवर्ती संगठन जो हैं, इस बारे में हमने यूके में अपने साझेदारों का ध्यान आकर्षित किया है। हम ऐसा करना जारी रखेंगे। यह न केवल हमारे लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह हमारे साझेदारों के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि यह इन अन्य देशों में सामाजिक एकजुटता और सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।
आपका जो सवाल था कैदियों की स्थिति को लेकर है, इसके बारे में बातचीत होती रही है और दोनों देशों के जो अंदरूनी मामलों के विभाग हैं जो मंत्रालय हैं हमारी तरफ से गृह मंत्रालय है उनकी तरफ से जो मंत्रालय है, उनके बीच में इन चीज़ों पर बातचीत चल रही है और आगे भी चलती रहेगी। और हमारी कोशिश यह रहेगी कि उनको दिखाने के लिए कि ये सभी चीज़ें, उनसे हमारी जो मांगें हैं, उनको पूरा किया जा सकता है और उनके जो कुछ विचार हैं उनको हम देख सकते हैं, ऐसी बात नहीं है कि भारत में लोग नहीं लाए गए हैं, आप जानते हैं कि हाल ही में तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण हुआ था, उसमें भी ऐसी चीज़ें थीं। ये काम हम कर सकते हैं, ये कोई बड़ी बात नहीं है।
आखिरी में, मुझे लगता है कि सिद्धांत का मालदीव के प्रति बदलाव के संबंध में एक प्रश्न था। यह एक संबंध में कड़ी मेहनत से जुड़ा प्रश्न है। हमेशा ऐसी घटनाएं घटित होंगी जो असर डालेंगी या संबंधों में हस्तक्षेप की कोशिश कर सकती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह इस बात का प्रमाण है कि इस संबंध पर कितना ध्यान दिया गया है, और इसमें उच्चतम स्तर पर भी ध्यान दिया गया है। हमने इस पर काम करना जारी रखा है, और मुझे लगता है कि नतीजा आपके सामने है। मेरे विचार से हम मालदीव में अपने साझेदारों के साथ भी बहुत करीबी चर्चा कर रहे हैं, ताकि इस बारे में स्पष्टता और आश्वासन मिल सके कि हम द्विपक्षीय रूप से क्या करना चाहते हैं, और मैं समझता हूं कि नतीजा सबके सामने हैं।
हमने उन्हें जो परिसंपत्तियां उपलब्ध कराई हैं, उनके प्रबंधन के लिए वे उपयुक्त कार्मिकों के साथ वहां काम करना जारी रखेंगे और मालदीव के अधिकारियों को उनके प्रयोग में मदद करेंगे, ताकि सर्वोत्तम परिणाम पाए जा सकें।
केशव पद्मनाभन, द प्रिंट: धन्यवाद विदेश सचिव। मैं द प्रिंट से केशव पद्मनाभन हूं। अगर आपकी अनुमति हो, तो मैं आपसे दो सवाल पूछना चाहता हूं। एक सवाल यूके पर है और एक सवाल मालदीव पर।
महोदय यूके के संबंध में, नाटो देशों के साथ काफी बातचीत चल रही है, जिसका यूके एक संस्थापक सदस्य है, तो रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण भारत पर द्वितीयक प्रतिबंध के संबंध में अत्यधिक चर्चा हुई है, यूरोपीय संघ ने नवीनतम प्रतिबंध पैकेज प्रस्तुत किया है। तो आप दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बैठक के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा को किस तरह से देखते हैं और क्या इस संबंध में यूके भारत के रुख को लेकर किसी तरह का विरोध दिखा सकता है?
मालदीव के संबंध में, महोदय, जैसा कि आपने बताया कि वहां एक बड़ी विकास साझेदारी हुई है, जिसमें 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर के दोहरे समझौते तथा पिछले वर्ष के मुद्रा विनिमय समझौते के रूप में 3,000 करोड़ रुपये, तथा 100 मिलियन डॉलर की सहायता शामिल है। तो क्या आप प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान विकास सहायता बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं?
और क्या आप हमें यह समझा सकते हैं कि उदाहरण के लिए, मुद्रा विनिमय समझौतों में से कितने कार्यान्वित किए गए हैं और उनका कितना प्रयोग हो रहा है, ताकि हमें उस साझेदारी की बेहतर तरीके से समझ सकें, धन्यवाद महोदय।
आयुषी अग्रवाल, एएनआई: महोदय, मैं एएनआई से आयुषी अग्रवाल हूं। महोदय, क्या बैंगलोर में मालदीव का वाणिज्य दूतावास और अड्डू में भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने की समय-सीमा में कोई प्रगति हुई है, जिसकी घोषणा पिछले साल अक्तूबर में राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा के दौरान की गई थी?
सिद्धांत मिश्र, सीएनएन-न्यूज़18: नमस्ते विदेश सचिव, मैं सीएनएन न्यूज़18 से सिद्धांत हूं। महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि क्या हम अपने सहयोगियों ... यूके को पहलगाम आतंकी हमले में टीआरएफ की भूमिका के बारे में बताएंगे? क्या हम इस अवसर को इस्तेमाल करेंगे धन्यवाद।
नीरज कुमार, न्यूज़ 18 इंडिया: महोदय नमस्ते, मैं न्यूज़ 18 इंडिया से नीरज हूं। मालदीव के साथ दो साल पहले संबंध जब बिगड़े थे, तो भारतीय पर्यटकों की संख्या मालदीव जाने वाले जो थे उनकी संख्या में बहुत गिरावट आई थी। उसके बाद मालदीव सरकार ने बहुत कोशिश भी की थी कि भारत से पर्यटक जाएं। भारत की मालदीव से क्या उम्मीद है कि ज्यादा पर्यटक वहां पहुंचें? भारत की मालदीव से क्या उम्मीद है?
ऋषिकेश, पीटीआई: महोदय मैं पीटीआई से ऋषिकेश हूं। क्या मालदीव में नेता प्रतिपक्ष के साथ भी के साथ बैठक होगी? और दूसरा सवाल यह है कि मालदीव का सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 135% तक पहुंच गया है और मालदीव को अगले वर्ष तक लगभग 1.6 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा। तो, क्या इस संबंध में मालदीव की सहायता करने का कोई प्रस्ताव है ताकि वे डिफॉल्ट से बच सकें?
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: यूके के साथ उन घटनाक्रमों पर चर्चा के संबंध में, जिनमें उनकी रुचि है, हम इन मुद्दों पर विचार और मतों का आदान-प्रदान भी करना चाहेंगे। जहां तक द्वितीयक प्रतिबंध आदि से संबंधित मामलों का सवाल है, तो हमने अभी तक यूके की ओर से कोई कार्रवाई नहीं देखी है।
किसी भी तरह के मामले में, हमने द्वितीयक प्रतिबंधों के संबंध में अपना रुख बहुत ही स्पष्ट कर दिया है। मुझे लगता है कि आप यूरोपीय संघ की हाल की घोषणा के संदर्भ में संकेत कर रहे हैं, तो जहां तक ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है तो इसके प्रति हमारा रुख बेहद स्पष्ट है, भारत के लोगों को ऊर्जा प्रदान करना भारत सरकार की सर्वोच्च ज़िम्मेदारी है और हम इस विषय में आवश्यक कदम उठाएंगे।
ऊर्जा संबंधित मुद्दों पर भी, जैसा कि हमने पहले भी कहा है कि दोहरे मापदंड न अपनाना और इस बारे में स्पष्ट रुख रखना महत्त्वपूर्ण है, जैसे कि व्यापक ऊर्जा बाज़ार में वैश्विक स्थिति का सवाल है और जहां ऊर्जा प्रदाता स्थित हैं और वे कहां से आते हैं तथा किसे कब ऊर्जा की आवश्यकता है।
मुझे लगता है कि इन मामलों को पूरी तरह से सराहा नहीं गया है। हम समझते हैं कि यूरोप के सामने एक महत्त्वपूर्ण और गंभीर सुरक्षा मुद्दा है, लेकिन बाकी विश्व भी इस समस्या से जूझ रहा है और उन मुद्दों से निपट रहा है जो शेष विश्व के लिए अस्तित्वगत हैं। और मुझे लगता है कि इन मुद्दों का ज़िक्र करते समय संतुलन और परिप्रेक्ष्य बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है।
जहां तक मालदीव के साथ विकास साझेदारी के विस्तार का सवाल है, तो जैसा कि मैंने कहा कि कई पहल पर विचार किया जा रहा है और यात्रा के दौरान, कृपया देखते रहिए, विकास साझेदारी से संबंधित और भी घोषणाएं होने की संभावना है।
एक-दूसरे के देशों में वाणिज्य दूतावासों के संबंध में दोनों पक्षों के बीच इन मुद्दों पर चर्चा जारी है। हम एक-दूसरे के साथ नज़दीकी संपर्क बनाए हुए हैं। हम आपको इस घटनाक्रम से जुड़ी हर नई जानकारी प्रदान करते रहेंगे।
पहलगाम में टीआरएफ की भूमिका के बारे में, आप उस संबंध में हाल के घटनाक्रमों से भी अवगत हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग ने हाल ही में टीआरएफ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का छद्मरूप (प्रॉक्सी) घोषित किया है। मुझे विश्वास है कि यूके में मौजूद हमारे सहयोगी इस घटनाक्रम से अवगत हैं, लेकिन इससे हमें सीमापार आतंकवाद जैसे मुद्दों पर और विचार साझा करने तथा ऐसी चुनौतियों का दृढ़तापूर्वक जवाब देने की आवश्यकता पर विचार करने का अवसर मिलेगा।
नीरज, आपका प्रश्न था कि जो मालदीव में पर्यटकों की संख्या है उनको बढ़ाने के विषय में हमारी क्या अपेक्षा है मालदीव से। आपको शायद जानकारी होगी इसके बारे में कि दोनों देशों के बीच कुछ समय से बातचीत चल रही है कि कैसे ऐसे विषयों पर, जो इसमें सहूलियत प्रदान कर सकते हैं, जैसे हमने जहां तक व्यापार का सवाल है वहां, तो स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली की बातचीत दोनों देशों के बीच में चल रही है, जहां तक पर्यटन का सवाल है वहां पर यूपीआई जो कई और देशों के साथ हमारा समझौता हुआ है, मालदीव के साथ भी इसके बारे में एक समझौता करने पर बातचीत चल रही है इससे पर्यटकों को काफी सहूलियत पहुंच सकती है और जैसा हम हमेशा कहते आ रहे हैं इससे पर्यटकों कि जो संख्या है उसको बढ़ावा मिल सकता है, तो इन चीज़ों पर आगे बातचीत होगी और इस यात्रा के दौरान भी इस पर हम बातचीत करना चाहेंगे।
प्रतिपक्ष के नेताओं साथ बैठक के दौरान कई बैठकों की योजनाएं बनाई जा रही हैं। जैसे-जैसे यात्रा की तारीख नज़दीक आएगी हम आपको इसकी सटीक जानकारी प्रदान करते रहेंगे।
और जहां तक मालदीव की वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दे का सवाल है, तो तथ्य यह है कि मालदीव को तनावपूर्ण वित्तीय माहौल का सामना करना पड़ा है और इसीलिए हम वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए मालदीव को मदद प्रदान कर रहे हैं। हमारी हालिया मदद से मालदीव की विदेशी मुद्रा स्थिति में बढ़त हुई है, और वास्तव में, इसी वृद्धि को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संगठनों द्वारा एक सकारात्मक कारक के रूप में दर्शाया गया है, जिससे मालदीव को उन परिणामों से बचने में मदद मिली है जो उसके लिए कठिनाइयां उत्पन्न कर सकती थीं।
यह एक गतिशील स्थिति है। हम मालदीव में अपने मित्र और साझेदारों के साथ निकट संपर्क में हैं ताकि देख सकें कि हम और क्या कर सकते हैं। किसी भी स्थिति में, जहां तक विनिमय का सवाल है, तो मेरी समझ यह है कि 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विनिमय रेखा लगभग पूरी तरह खींची जा चुकी है। अब, संभवतः 30 बिलियन भारतीय रुपये की भारतीय विनिमय रेखा भी तैयार की जाएगी। हम आपको इन घटनाक्रमों से जुड़ी हर नई जानकारी प्रदान करते रहेंगे।
प्रणय उपाध्याय, टीवी टुडे: महोदय मैं टीवी टुडे से प्रणय उपाध्याय हूं। दो स्पष्टीकरण चाहिए। भारत-यूके एफटीए मुद्दे पर। क्या आप हमें इस एफटीए के दायरे के बारे में बता सकते हैं और बता सकते हैं कि इसमें टैरिफ लाइनें क्या हैं तथा कौन से क्षेत्र इससे बाहर रखे गए हैं?
हाल के दिनों में भारत-मालदीव के बीच तनाव के कारण कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाएं रुकी हुई हैं। इन परियोजनाओं की स्थिति क्या है? और हमें क्या उम्मीद है? हम मालदीव में अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और भारत के निवेश को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?
नीरज कुमार दुबे, प्रभासाक्षी: महोदय नमस्कार, मैं प्रभासाक्षी से नीरज दुबे हूं। महोदय भारत के सहयोग से मालदीव में कई सारी विकास परियोजनाएं चल रही हैं, तो प्रधानमंत्री अपने दौरे में क्या किसी विकास परियोजना का शिलान्यास उद्घाटन करने वाले हैं, खास तौर पर भारत के सहयोग से जो मालदीव का रक्षा मंत्रालय का नया भवन बना है, उसके बारे में।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: तो प्रणय, जहां तक एफटीए बहिष्करण का सवाल है, मुझे लगता है कि यह सवाल आप वाणिज्य मंत्रालय से पूछ सकते हैं। वे आपको इस पर अधिक विस्तारपूर्वक उत्तर दे सकते हैं। मैं बस इतना ही कहूंगा कि जब वार्ता चल रही थी, तब की मेरी जानकारी के अनुसार, यह एक महत्त्वपूर्ण समझौता है। और इसलिए, जब आप अंतिम विवरण देखेंगे तो टैरिफ लाइनों का समावेश भी उतना ही महत्त्वपूर्ण होने की संभावना है। तो अनुमान यह है कि मेरे विचार से अधिक बहिष्करण नहीं होगा।
मालदीव की परियोजनाओं के सवाल पर, मेरा मानना है कि इस समय सभी परियोजनाएं चल रही हैं। और मुझे ऐसी कोई परियोजनाएं नहीं दिख रही हैं, जो बड़ी मुश्किलों का सामना कर रही हैं। सभी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
और जहां तक यह सवाल है कि यात्रा के दौरान कोई उद्घाटन होंगे किसी परियोजना की, जैसा कि मैंने कहा कि कई परियोजनाएं हैं जो एक तरह से संपन्न होने के निकट हैं और अगर सारी जानकारी तब तक मिल जाती हैं तो हो सकता है कि उद्घाटन हो क्या कोई घोषणा उनके बारे में। आपने एमएनडीएफ का ज़िक्र किया, आप सही हैं, एक भवन है जिस पर काफी काम हुआ है, हो सकता है कि काफी सारी चीज़ें जो औपचारिकताएं हैं वो तब तक पूरी हो जाएं और इसके बारे में भी कोई घोषणा की जा सकती है, लेकिन अंतिम जानकारी है कि हम उसके बारे में आपको अवगत करवाते रहेंगे।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो इसके साथ ही, देवियों और सज्जनों, हम इस प्रेस वार्ता को समाप्त करते हैं। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इन दोनों यात्राओं से जुड़ी हर नई जानकारी से आपको अवगत करवाते रहेंगे।
धन्यवाद।
नई दिल्ली
22 जुलाई 2025