श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों। प्रधानमंत्री की मालदीव की राजकीय यात्रा के संबंध में विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री द्वारा आयोजित इस विशेष प्रेस वार्ता में आपका स्वागत है। हमारे साथ मालदीव में हमारे उच्चायुक्त श्री जी. बालासुब्रमण्यम भी उपस्थित हैं। इसके अलावा, हमारे बीच विदेश मंत्रालय में अपर सचिव आईओआर क्षेत्र, श्री पुनीत अग्रवाल भी मौजूद हैं। इसी के साथ, मैं आज के घटनाक्रमों के संबंध में विदेश सचिव को प्रारंभिक वक्तव्य के लिए आमंत्रित करता हूं।
मान्यवर, कृपया अपनी बात रखिये।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: धन्यवाद रणधीर। नमस्कार, हमारे साथ इस विशेष वार्ता में शामिल होने के लिए आप सभी का धन्यवाद।
जैसा कि आप जानते होंगे कि प्रधानमंत्री मालदीव की दो-दिवसीय राजकीय यात्रा पर रहेंगे। आप सभी इस तथ्य से अवगत हैं कि यह उनकी मालदीव की तीसरी यात्रा है। वे राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के प्रशासन में मालदीव का दौरा करने वाले पहले शासनाध्यक्ष भी हैं।
आज सुबह हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राष्ट्रपति डॉ. मुइज़्ज़ू और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। राष्ट्रपति की यह एक खास भावना थी। प्रधानमंत्री को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ उनकी अगवानी की गई।
आज दोपहर, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति डॉ. मुइज़्ज़ू ने एकांतिक और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इससे दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर समीक्षा करने का अवसर मिला। उन्होंने भारत-मालदीव संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और विशेष रूप से अक्तूबर 2024 के बाद से हुई प्रगति पर विचार-विमर्श किया, जब राष्ट्रपति डॉ. मुइज़्ज़ू भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे और जब दोनों देशों ने भारत-मालदीव व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टिकोण को अंगीकृत किया गया था।
आप पहले से इन बातों से परिचित होंगे; आपने दोनों पक्षों के बीच समझौता ज्ञापनों और समझौतों के आदान-प्रदान का समारोह देखा होगा। मैं उन प्रमुख समझौतों और समझौता ज्ञापनों की समीक्षा करना चाहूंगा जिन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हमने मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की नई ऋण सहायता प्रदान करने से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह मालदीव को दिया गया पहला ऐसा ऋण-अनुबंध है जो भारतीय रुपये में प्रदान किया गया है। यह ऋण-सहायता मालदीव की विकास आवश्यकताओं के लिए सहायता की परंपरा को जारी रखने का प्रतिनिधित्व करती है और हम आशा करते हैं कि इस ऋण-सहायता समझौते के परिणामस्वरूप अनेक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी, जिनसे मालदीव में नागरिकों के जीवन को लाभ होगा।
इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने एक संशोधन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिससे भारत और मालदीव के बीच मौजूदा डॉलर ऋण व्यवस्था में संशोधन हुआ। मैं विशेष रूप से इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि इस संशोधनात्मक समझौते पर हस्ताक्षर के साथ, मालदीव की वार्षिक ऋण चुकौती बाध्यता लगभग 51 मिलियन अमेरिकी डॉलर से 40% की तीव्र कमी के साथ लगभग 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगी।
आज हस्ताक्षरित अन्य समझौतों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान और पर्यटन और पर्यावरण मंत्रालय में मालदीव मौसम विज्ञान सेवाओं के बीच एक समझौता ज्ञापन शामिल है; भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय तथा मालदीव के गृह सुरक्षा और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच डिजिटल परिवर्तन के लिए जनसंख्या स्तर पर कार्यान्वित सफल डिजिटल समाधानों को साझा करने के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन।
मालदीव में भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने पर भी एक समझौता ज्ञापन हुआ, जो मालदीव में उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता और सोर्सिंग को मज़बूत करेगा; और भारत के एनपीसीआई, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच एक नेटवर्क-टू-नेटवर्क समझौता हुआ। इसका उद्देश्य एकीकृत भुगतान इंटरफेस के कार्यान्वयन पर काम को आगे बढ़ाना है, जिससे दोनों देशों के बीच पर्यटन को अत्यधिक लाभ होगा।
इसके अलावा, दिन भर में कई कार्यक्रम और घोषणाएं की गईं। दोनों देश भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने पर सहमति व्यक्त की। राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर दोनों पक्षों ने स्मारक डाक टिकट जारी किए।
प्रधानमंत्री ने हुलहुमाले में 3,300 सामाजिक आवास इकाइयां भी सौंपीं, जो भारतीय क्रेता ऋण योजना के तहत बनाई गई थीं। दोनों नेताओं ने अड्डू शहर में सड़क और जल निकासी प्रणाली परियोजना, छह उच्च-प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया, और अभी कुछ समय पहले, माले में रक्षा मंत्रालय की इमारत। प्रधानमंत्री ने 72 वाहन और अन्य उपकरण भी सौंपे, जिनका प्रयोग एमएनडीएफ अपने विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
इसी जगह, प्रधानमंत्री ने दो भीष्म हेल्थ क्यूब भी सौंपे, जो चिकित्सा आपात स्थिति में, विशेष रूप से देश के दूरदराज़ के इलाकों में अत्यधिक उपयोगी साबित होंगे। इसी जगह, प्रधानमंत्री ने दो भीष्म हेल्थ क्यूब भी सौंपे, जो चिकित्सा आपात स्थिति में, विशेष रूप से देश के दूरदराज़ के इलाकों में अत्यधिक उपयोगी साबित होंगे।
जैसा कि आप जानते होंगे कि कल प्रधानमंत्री रिपब्लिक स्क्वायर पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। वे देश के कुछ राजनीतिक नेताओं से भी मिलेंगे और मालदीव में रहने वाले भारतीय प्रवासियों से भी बातचीत करेंगे, जिनमें मालदीव के आईटीईसी के पूर्व छात्र भी शामिल होंगे।
इस अत्यंत सामयिक और लाभकारी यात्रा ने दोनों देशों और दोनों नेताओं को हमारे घनिष्ठ सहयोग की समीक्षा करने और इसे और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया है। जैसा कि मैंने शुरू में कहा था कि दोनों पक्षों ने भारत-मालदीव व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टिकोण की समीक्षा की। और आज की चर्चाओं के परिणामस्वरूप, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि हमें इस दृष्टिकोण के विभिन्न तत्वों को लागू करना जारी रखना चाहिए, और दोनों पक्षों के बीच आगे सहयोग करने के लिए नए रास्ते तलाशने चाहिए।
अब मैं यहां विराम देना चाहूंगा। अगर आपके कोई सवाल हैं, तो मुझे उनका जवाब देने में खुशी होगी।
आयुषी अग्रवाल, एनएनआई: नमस्कार महोदय, मैं एएनआई से आयुषी अग्रवाल हूं। महोदय, क्या हिंद महासागर में सुरक्षा के संबंध में हुई बातचीत के दौरान चीन का मुद्दा शामिल किया गया और पहलगाम आतंकी हमले या ऑपरेशन सिंदूर पर किसी तरह की चर्चा की गई?
सिद्धांत सिब्बल, विऑन: नमस्कार महोदय, मैं विऑन से सिद्धांत हूं। आप संबंधों में कितने महत्त्वपूर्ण बदलाव देखते हैं? पिछले वर्ष आपके संबंध बहुत अच्छे नहीं थे, लेकिन आज दोनों नेताओं की टिप्पणियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह बहुत सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर है।
मीरा श्रीनिवासन, द हिंदू: धन्यवाद, मैं द हिंदू से मीरा श्रीनिवासन हूं। सचिव महोदय, आपने ज़िक्र किया कि आज के समझौते के परिणामस्वरूप वार्षिक ऋण चुकौती दायित्व में 40% की कमी आई है। तो, क्या आप हमें बता सकते हैं कि यह ऋण की किस अवधि से संबंधित है? कब से कब तक ऋण लिया गया, और यदि संभव हो तो, यह ऋण की कुल राशि कितनी है? और दूसरा सवाल यह है कि क्या यह मालदीव की ओर से संभावित ऋण रद्दकरण या स्थगन के अनुरोध के प्रत्युत्तर में है? धन्यवाद।
सिद्धांत मिश्र, सीएनएन न्यूज़18: नमस्ते विदेश सचिव, महोदय मैं सीएनएन-न्यूज़ 18 से सिद्धांत हूं। विदेश सचिव महोदय, क्या आप मालदीव में भारत द्वारा दिए जा रहे चिकित्सा सुविधाओं पर कुछ प्रकाश डाल सकते हैं? क्या मालदीव की ओर से चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के लिए अनुरोध किया गया है? और क्या आप मालदीव से भारत में चिकित्सा पर्यटन पर भी कुछ प्रकाश डाल सकते हैं? धन्यवाद।
दीपक रंजन, पीटीआई: मैं पीटीआई से दीपक रंजन हूं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि हम मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, क्या कोई समय-सीमा है जिसके भीतर यह समझौता पूरा हो जाएगा?
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: ठीक है। आयुषी, आपके सवाल पर मैं यह कहूंगा कि आपने महामहिम का वक्तव्य सुना होगा, राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री जी के साथ शीर्ष प्रतिनिधिमंडल-स्तर की वार्ता के दौरान अपनी टिप्पणी में इसका उल्लेख किया। और निस्संदेह हम इस धारणा पर आगे बढ़ते हैं कि सुरक्षा आपसी हित का मुद्दा है। राष्ट्रपति ने मालदीव की सुरक्षा संबंधित मुद्दों के प्रति अपनी महत्त्वपूर्ण रूप से प्रतिबद्धता को व्यक्त किया और इस बात को भी व्यक्त किया कि दोनों पक्ष निरंतर मिल-जुलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं। मेरे विचार से तथ्य यह है कि दोनों देशों के सुरक्षा प्राधिकारियों के बीच संपर्क की अत्यधिक बारंबारता है और विभिन्न स्तरों पर सहभागिता है, चाहे सुरक्षा बलों के बीच प्रत्यक्ष व्यावसायिक स्तर के आदान-प्रदान की बात हो या प्रशिक्षण संबंधित क्रियाकलाप हों, या फिर विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच होने वाला नियमित अभ्यास हो। इन सभी मुद्दों पर अत्यंत ही निकटवर्ती संपर्क है। यह एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है। और हम मालदीव के साथ ऐसे किसी भी मुद्दे पर अत्यंत ही निकटता से काम करना जारी रखेंगे, क्योंकि यह न केवल हमारी सुरक्षा पर, बल्कि इस क्षेत्र में हमारी साझा सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है।
पहलगाम पर भी, एक बार फिर से राष्ट्रपति ने मालदीव की ओर से निंदा की बात दोहराई और भारत पर हुए इस हमले के प्रति मालदीव के लोगों की ओर से एकजुटता और समर्थन की बात दोहराई गई।
सिद्धांत आपके संबंधों में सकारात्मक बदलाव के सवाल पर, मैं यह नहीं कहूंगा कि यह रातोंरात या अचानक घटने वाली घटनाएं हैं। हमारा … यह अत्यंत नज़दीकी संबंध है। इसका एक आधार है और एक बुनियाद है जो कि बहुत ही पुराने हैं। समय-समय पर कुछ घटनाएं या घटनाक्रम घटित हो सकते हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मूलरूप से समझ है और दोनों देश इसे महत्त्व देते हैं और सार्थक बनाते रहते हैं।
जैसा कि मुझे पहले भी यह बताने का अवसर मिला है। दोनों पक्षों ने रिश्तों में मुद्दों को सुलझाने के लिए खुद को रिश्तों पर लागू किया है। और दोनों पक्षों ने उच्चतम स्तर पर उन चिंताओं को दूर करने पर ध्यान दिया है जो वहां हो सकती हैं। और मुझे लगता है कि आप दोनों तरफ से किए गए प्रयासों का परिणाम देख रहे हैं। और यह तथ्य कि 10 महीनों के भीतर पारस्परिक रूप से उच्च-स्तरीय यात्राएं की गई हैं… इससे एक बार फिर से हमारे संबंधों की मज़बूती और प्रमाणिकता परिलक्षित होती है।
ऋण दायित्व में करने से संबंधित मीरा के सवाल पर, आप अवगत होंगी कि हमने कुछ समय पहले मालदीव को लगभग 800 मिलियन डॉलर की ऋण सहायता प्रदान की थी। इसके अंतर्गत कई परियोजनाएं क्रियान्वित की गई थीं और ऋण-सहायता में से एक निश्चित राशि प्रयोग में लायी गई और इसकी निकासी की गई। लेकिन विभिन्न कारणों से मालदीव परियोजनाओं को अंतिम रूप देने और उस ऋण सहायता के अंतर्गत उपलब्ध शेष धनराशि को इस्तेमाल करने में आगे नहीं बढ़ सका। लेकिन ऋण-सहायता (एलओसी) के काम करने के तरीके और एलओसी की शर्तों और नियमों को देखते हुए, पुनर्भुगतान दायित्व लागू हो गए थे, और इसलिए मालदीव की समग्र वित्तीय स्थिति को भी ध्यान में रखा गया था, दोनों पक्ष इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इसकी समीक्षा और समायोजन आवश्यक है, ताकि यह अधिक प्रबंधन-योग्य बन जाए।
सामान्य स्थिति में, यह अधिक पेचीदा और जटिल होगा, लेकिन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हम एक समझौते पर पहुंचे हैं, जो आज हस्ताक्षरित संशोधन समझौते में परिलक्षित हुआ है, जो इस विशेष ऋण-सीमा को समाप्त करके मालदीव के ऋण-भुगतान के दायित्वों को कम करता है। लेकिन चूंकि मालदीव की विकास संबंधी ज़रूरतें अभी बरकरार हैं, इसलिए उन्हें अन्य परियोजनाओं पर भी काम करने की ज़रूरत होगी। इसका स्थान एलओसी समझौते ने ले लिया है, जिस पर हमने आज हस्ताक्षर किए हैं, जो कि भारतीय रुपये में है। और मैं कहूंगा कि यह मालदीव की वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों के अनुरूप होगा। इसके साथ ही, कार्यान्वयन के ऐसे तरीके में भी योगदान देगा जिससे दोनों पक्षों को अधिक लाभ मिलेगा। यह ऐसा काम है जो दोनों पक्षों के बीच सहयोगात्मक तरीके से पूरा किया गया।
सिद्धांत के चिकित्सा सुविधाओं के प्रश्न पर, मुझे लगता है कि मालदीव में संसाधन उपलब्ध हैं, और जब भी कोई आवश्यकता होती है या अनुरोध किया जाता है तो निकासी या सुविधा उसी प्रक्रिया के अनुसार की जाती है। चिकित्सा पर्यटन के संबंध में, जैसा कि आप जानते हैं, भारत मालदीव के लोगों के लिए चिकित्सा सेवा और चिकित्सा देखभाल के लिए एक अत्यंत ही लोकप्रिय गंतव्य-स्थल बना हुआ है और कुछ समझौतों पर काम शुरू हो गया है, जैसे कि यूपीआई पर। तो, यह सिर्फ सामान्य पर्यटन के लिए नहीं है, बल्कि हर तरह के अन्य प्रकार की सेवा के लिए भी है जिसे मालदीव के नागरिक भारत से प्राप्त करना चाहते हैं, जिसमें चिकित्सा पर्यटन भी शामिल है।
एफटीए पर बातचीत के संबंध में, मैं कोई सटीक समय-सीमा नहीं बता सकता, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय के अपने सहयोगियों के साथ चर्चा के आधार पर मेरी समझ यह है कि इस एफटीए को यथाशीघ्र पूरा किए जाने में सक्षम होना चाहिए। आज का समझौता इस समझ को दर्शाता है कि यह मूलतः संदर्भ की शर्तों पर समझौते को दर्शाता है, जो आमतौर पर ऐसा कुछ होता है जिसमें अधिक समय लगता है। लेकिन इन पर सहमति हो चुकी है और अब प्रस्तावों का आदान-प्रदान और चर्चा होना बाकी है। और यह अगला चरण है जब यह पूरा होगा। मुझे उम्मीद है कि इसे यथाशीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।
श्यामा, दूरदर्शन न्यूज़: नमस्ते महोदय। मैं दूरदर्शन न्यूज़ से श्यामा हूं। महोदय, एमएमए के साथ इस एनपीसीआई समझौते पर। आपके विचार से भारतीय पर्यटक कितनी जल्दी रुपे कार्ड के माध्यम से यूपीआई में लेन-देन कर सकेंगे?
उमाशंकर, स्वतंत्र पत्रकार: स्वतंत्र पत्रकार। मेरा प्रश्न यह है कि क्या हाइड्रोग्राफिक समझौते पर कोई नई जानकारी है, क्योंकि मालदीव की ओर से इसे नवीकृत नहीं किया गया है; और क्या दोनों नेताओं के बीच चर्चा के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया?
अरोशा, मालदीव गणराज्य: धन्यवाद। मैं मालदीव गणराज्य से अरोशा हूं। सचिव महोदय, मुझे यह जानना है कि क्या आप अब्दुल्ला बिन मोहम्मद इब्राहिम द्वारा अब हटाई सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में जानते हैं? वे राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के साले हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में आलोचनात्मक टिप्पणी की। यदि हां, तो क्या आप बता सकते हैं कि भारत सरकार ऐसी घटना को किस तरह से देखती है, विशेष रूप से भारत-मालदीव संबंधों को मज़बूत करने के प्रयास के संदर्भ में? धन्यवाद।
नाज़हथ राज्जे टीवी: धन्यवाद। मैं राज्जे टीवी से नाज़हथ हूं। राष्ट्रपति और कुछ राज्य मंत्रियों द्वारा कुछ ऐसी टिप्पणियां की गईं जो भारतीयों और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपमानजनक थीं। यह बात समझ में आती है कि भारतीय नागरिकों ने इसे बहुत अच्छी तरह से स्वीकार नहीं किया। अब जैसा कि कुछ पत्रकारों ने इस बात का ज़िक्र किया है, इसे एक महत्त्वपूर्ण मोड़ बताया गया है, विशेष रूप से इस यात्रा को, क्या भारत सरकार मालदीव सरकार से माफी मांगने की उम्मीद करती है, क्योंकि निश्चित रूप से उसकी भावनाएं आहत हुई हैं?
अज्ञात वक्ता, अधाधु: धन्यवाद। मैं अधाधु हूं। विदेश सचिव ने पहले भी यहां भारतीय प्लेटफार्मों द्वारा चिकित्सा उपचार का उल्लेख किया है। मेरी जानकारी के अनुसार, पहले हुए कुछ समझौते इस वर्ष फरवरी में खत्म हो चुके हैं। तो, क्या उन समझौतों में कोई विस्तार किया गया है या मालदीव की ओर से उन तीन प्लेटफार्मों के विस्तार का कोई अनुरोध किया गया है जो अभी हैं?
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: ठीक है। मुझे लगता है कि एनपीसीआई पर, कार्यान्वयन समझौते पर आज हस्ताक्षर हो गए हैं। अब तकनीकी कार्य की आवश्यकता है, और इसे तेज़ी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। और हमारा मानना है कि तकनीकी कार्य और समझौता ज्ञापन के कार्यान्वयन के पूरा होते ही लोग यूपीआई का इस्तेमाल करने में सक्षम हो जाएंगे। परिचालन के संबंध में यह एक महत्त्वपूर्ण समझौता था। अब तकनीकी लोग इसे मिल-जुलकर आगे बढ़ाएंगे।
रुपे पर, मेरे विचार से यह पहले से परिचालन में है। तो, असल में, अगर आपको याद हो, तो जब राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू भारत में थे, तो उन्होंने मालदीव में रुपे कार्ड का इस्तेमाल करके रुपे के पहले लाइव लेन-देन को पूरा होते हुए देखा था।
हाइड्रोग्राफी के संबंध में, हम मालदीव में अपने सहयोगियों से संपर्क बनाए हुए हैं। और हम मालदीव में क्षमता निर्माण पर भी काम कर रहे हैं। हम मालदीव में प्रशिक्षण पर काम कर रहे हैं, ताकि मालदीव के कार्मिक इस क्षेत्र में अपनी क्षमताएं विकसित कर सकें। यह ऐसा कुछ नहीं है जो अनिवार्य रूप से विशिष्ट समझौतों या चर्चाओं द्वारा प्रतिबंधित या निर्धारित हो। यह ऐसा विषय है जिस पर दोनों पक्ष लगातार बातचीत की जा रही है। और जैसा कि मैंने कहा, मालदीव में क्षमता निर्माण पर अधिक बल दिया जा रहा है।
मालदीव से हमारे सहयोगियों ने हमसे दो सवाल किए थे। मुझे लगता है कि दोनों की विषयवस्तु बहुत ही एकसमान थी। जहां तक आपने जिस सोशल मीडिया पोस्ट का ज़िक्र किया है, मुझे उस पोस्ट की जानकारी नहीं है, मैंने वह पोस्ट नहीं देखी है। लेकिन दूसरा सवाल है जो कि पहले की गई कुछ टिप्पणियों से संबंधित है, मैं बस इतना कहना चाहूंगा, और मुझे लगता है कि यह यात्रा और साथ ही पिछले वर्ष अक्तूबर में डॉ. मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा, दोनों पक्षों के बीच अत्यंत मज़बूत और घनिष्ठ संबंध को दर्शाती है। इसके अलावा, मैं यह भी कहूंगा कि हमारे संबंध इतने मज़बूत हैं कि इनमें से कुछ नकारात्मक टिप्पणियां हमारे संबंधों को प्रभावित नहीं कर सकती हैं, हमारे संबंध समय की कसौटी पर हमेशा खरे उतरे हैं। इसलिए मैं पीछे मुड़कर देखने के बजाय, आगे और भविष्य की ओर देखना पसंद करूंगा और आज जो कुछ भी हुआ है और विशेष रूप से राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा के बाद पिछले 9 या 10 महीनों में जो कुछ भी हुआ है, उसे देखते हुए, भविष्य निस्संदेह और निर्विवाद रूप से उज्ज्वल है।
मेडेवैक (एमईडीईवीएसी) प्लेटफॉर्म पर, वे यहां हैं, और मुझे लगता है कि जैसा कि मैंने कहा, परिसंपत्तियां यहां बनी रहेंगी, उनकी अवधि यहां बढ़ा दी गई है और मालदीव के अधिकारियों के अनुरोध के अनुसार उनका इस्तेमाल जारी है।
बृजमोहन सिंह रघुवंशी, साधना समूह: महोदय, नमस्कार। मैं बृजमोहन सिंह रघुवंशी हूं, साधना समूह से। जैसा कि हमारे एक सहयोगी ने एक सवाल किया, उसमें मैं जोड़ना चाहूंगा कि पिछले कुछ समय पूर्व जो मालदीव की सरकार ने कुछ टिप्पणी की थी। और उस टिप्पणी के बाद से आज हमारे लिए बड़ा गौरवान्वित वाला यह दिन है। हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री को यहां पर इस रूप में देखा जा रहा है। निश्चित रूप से ये विदेश नीति और प्रधानमंत्री जी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा नतीजा है। लेकिन मैं एक चीज़ ज़रूर पूछना चाहूंगा कि सऊदी अरब के बाद मैंने देखा कि यह दूसरा इस्लामी देश है जहां पर हमारे प्रधानमंत्री का जो सम्मान हो रहा है, जो हमारा व्यापार होने जा रहा है, वो बहुत मज़बूत हो रहा है। तो विपक्ष इस बात का आरोप लगाता है कि वर्ग विशेष के लिए खासतौर से प्रधानमंत्री करते हैं, ऐसा विपक्ष आरोप लगाता है। और तो मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या इस्लामी देशों पर खासतौर से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय पटल पर प्रधानमंत्री जी की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए, और खासतौर से विश्व स्तर पर भी क्या यह माना जाए कि इस्लामी देशों से अब हमारा जो रिश्ता है वो और मज़बूत होगा।
जीवन भावसार, आकाशवाणी: नमस्ते महोदय, मैं आकाशवाणी से जीवन भावसार हूं। महोदय, दोनों देशों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी आज बहुत बातचीत हुई है। तो ये पर्यटन बढ़ाने के लिए आगे क्या हो सकता है?
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: तो देखिए, बृजमोहन जी, आपका सवाल मैं अपने आप को, जो एक, इसको मैं एक राजनीतिक समीकरण में ही देखूंगा, और सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि, जो हमारी राजनयिक रणनीति है, और जिस तरह से हम दूसरे देश के साथ रिश्ते बनाने पर सोचते हैं या काम करते हैं, उसकी जो एक, जो हमसे जो काम किया जा रहा है, उसमें जो काम होता है, हमें जिस तरह की चीजें जिनके बारे में आप बात कर रहे थे, उनका हम पर असर नहीं पड़ता। हम देखते हैं कि हमारी मूलभूत रुचियां क्या हैं? किस देश के साथ चीज़ों पर बात करनी है, जो हमारे अंतर्राष्ट्रीय हित हैं, हमें क्या बचाव करना है और हमें क्या दूसरे देश से चाहिए, ये उस पर निर्भर रहता है। तो किसी देश की धार्मिक प्रवृत्ति क्या है, मुझे नहीं लगता कि उसमें एक बड़ा कारक बनता है। प्रधानमंत्री जी और उनके नेतृत्त्व में जो देश की एक राजनयिक राजनीति तैयारी की गई है, ये इसी चीज़ पर निर्भर है।
और आपने जो सवाल पूछा, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, तो जैसा कि मैंने पहले भी कहा है और आज भी इन चीज़ों पर बातचीत हुई है। यूपीआई पर मान लीजिए, जैसे इस पर अगर एक समझौता आगे आने वाले समय में होता है, तो यह काफी सहूलियत प्रदान करेगा भारतीय नागरिकों और मालदीव के नागरिकों को, भुगतान में सहूलियत है उसमें करने के लिए। उसके लिए जो बैंकिंग चैनलों में काफी कभी-कभार कठिनाइयां मुश्किल आती हैं, उनसे एक तरह से छुटकारा मिलेगा और एक सहूलियत इससे प्रदान होगी, इससे पर्यटन को काफी बढ़ावा मिल सकता है।
और जहां तक पर्यटन को बढ़ावा देने से संबंधित आपका जो सवाल है, तो जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया था और जैसा कि आज भी चर्चा हुई है - उदाहरण के लिए, यदि निकट भविष्य में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर कोई समझौता होता है, तो यह डिजिटल भुगतान के मामले में भारतीय और मालदीव दोनों नागरिकों के लिए महत्त्वपूर्ण रूप से सुलभ सुविधाएं प्रदान करेगा। अभी बैंकिंग चैनलों को कभी-कभी चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है - यह प्रणाली उनसे निपटने में मदद करेगी और लोगों को सुविधाएं प्रदान करेगी। इससे पर्यावरण को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिल सकता है।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद मान्यवर। इसके साथ ही, देवियों और सज्जनों, हम इस प्रेस वार्ता का समापन करते हैं। कल के घटनाक्रमों से जुड़ी हर नई जानकारी से हम आपको अवगत करवाते रहेंगे। इस प्रेस वार्ता में उपस्थित होने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत आभार। धन्यवाद।
माले
25 जुलाई 2025