प्रथम उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव,
सहयोगियों, प्रिय मित्रों,
2. आज शाम इस मंच पर आप सभी के साथ उपस्थित होकर मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। मैं आयोजकों को उनकी शानदार व्यवस्था और बारीकी से की गई तैयारियों के लिए धन्यवाद देता हूं। आप सभी के विभिन्न नीतिगत दृष्टिकोण और क्षेत्रीय दृष्टिकोणों को सुनना एक दिलचस्प अनुभव रहा। मैं सभी प्रस्तुतकर्ताओं को धन्यवाद देता हूं और इस अवसर पर भारत-रूस आर्थिक सहयोग पर अपने विचार साझा करना चाहता हूं।
3. आज हम ऐसे दौर में हैं जहां हमारी साझेदारी एक साथ सुदृढ़ीकरण का अनुभव कर रही है और साथ ही नए क्षेत्रों और अवसरों की खोज भी कर रही है। एक स्तर पर, समय की कसौटी पर खरे उतरे संबंधों की एक ठोस नींव है जिस पर अब हम अधिक समकालीन सहयोग का निर्माण करना चाहते हैं। लेकिन दूसरी ओर, हमारी अपनी अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हो रहे हैं, साथ ही वैश्विक परिवेश के कारण अनिश्चितताएं भी उत्पन्न हो रही हैं। व्यापार कैसे बढ़ाया जाए और सहयोग कैसे बढ़ाया जाए, ये अब सरल प्रस्ताव नहीं रहे।
4. मैं एक बड़ी तस्वीर के साथ इसकी शुरुआत करता हूं। पिछले कुछ वर्षों में, हमने कोविड महामारी, संघर्ष, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव, नई तकनीक और व्यापार अस्थिरता के प्रभावों का अनुभव किया है। प्रत्येक अपने आप में अलग प्रकृति के हैं, लेकिन एक साथ, इनमें एक सामान्य सबक है। पहला है भरोसेमंद और स्थिर साझेदारों का महत्त्व। दूसरा है लघु और अधिक सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं का महत्त्व। तीसरी है चिंता सीमित संख्या में बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भरता की। चौथा, केवल कुछ आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना अत्यधिक जोखिम है। पांचवां है, संकीर्ण संपर्क और सीमित लॉजिस्टिक्स पर निर्भरता। और शायद सबसे ज़्यादा, नए अवसर, साझेदारी और डोमेन के लिए अपर्याप्त शोध की लागत। हमारी यह सभा इन्हीं चिंताओं और चुनौतियों को संबोधित करने के लिए रखी गई है।
5. मित्रों, यह बात अब सर्वविदित है कि भारत और रूस ने वर्तमान समय में प्रमुख राष्ट्रों के बीच अपने संबंधों को सबसे स्थिरता के साथ विकसित किया है। हालांकि, यह स्वचालित रूप से महत्त्वपूर्ण आर्थिक सहयोग में रूपांतरित नहीं हुआ है। हमारा वस्तु व्यापार सीमित रहा, और हाल तक ऐसा ही व्यापार में भी देखने मिला। हाल के वर्षों में इसमें वृद्धि हुई होगी, लेकिन व्यापार घाटा भी बढ़ा है। व्यापार में विविधिकरण करना और संतुलन बनाए रखना और अब हम इस ओर निरंतर कठोर प्रयास कर रहे हैं। आखिरकार, ये न केवल उच्च व्यापार लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए, बल्कि मौजूदा स्तरों को बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी हैं।
6. इसका उत्तर मूलतः हमारी अर्थव्यवस्थाओं की पूरक प्रकृति में निहित है। निकट भविष्य में 7% की दर से बढ़ने वाले 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के सकल घरेलू उत्पाद वाले भारत को भरोसेमंद स्रोतों से बड़े संसाधनों की स्पष्ट आवश्यकता है। कुछ मामलों में, आवश्यक उत्पाद, उर्वरक, रसायन, मशीनरी आदि की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। इसका तेज़ी से बढ़ता बुनियादी ढांचा अपने देश में स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड वाले उद्यमों को व्यवसाय के अवसर प्रदान करता है। 'मेक इन इंडिया' और ऐसी अन्य पहलों ने विदेशी व्यवसायों के लिए नए द्वार खोल दिए हैं। भारत का आधुनिकीकरण और शहरीकरण अपने लिए मांगें उत्पन्न करता है, जो उपभोग और जीवनशैली में बदलाव से उत्पन्न होती हैं। इनमें से प्रत्येक आयाम रूसी कंपनियों को अपने भारतीय समकक्षों के साथ अधिक गहनता से जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं। हमारा प्रयास उन्हें उस चुनौती का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
7. आइये अब दूसरी ओर देखते हैं। भारत बड़े पैमाने पर वस्तुओं का गुणवत्तापूर्ण उत्पादक बन रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सामर्थ्य और पहुंच सुनिश्चित हो सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता आज कई अन्य क्षेत्रों में भी प्रदर्शित हो रही है। यह इंजीनियरिंग और निर्माण सामग्री से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो घटक और फैशन उत्पादों तक फैला हुआ है। जहां तक खाद्य और कृषि की बात है, तो हम दोनों की अपनी-अपनी विशेष ताकतें हैं। एक अन्य क्षेत्र जिसमें काफी संभावनाएं हैं, वह है कुशल जनशक्ति की गतिशीलता। आज, हमें वैश्विक कार्यस्थल और प्रतिभा के अनुकूलन के संदर्भ में विचार करना चाहिए।
8. जैसा कि स्पष्ट है कि भारत और रूस विकास को बढ़ावा देने और गति प्रदान करने के लिए एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। सरकार के रूप में हम जो करना चाहते हैं, वह है आर्थिक गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना और परिस्थितियां बनाना। स्पष्टतः, अधिकांश बातें व्यापार पर केंद्रित हैं, लेकिन अधिक निवेश, संयुक्त उद्यम और अन्य प्रकार के सहयोग पर विचार करने की इच्छा भी बढ़ रही है। प्रथम उप प्रधानमंत्री मंटुरोव और मैं उन प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने के लिए आप सभी के बीच मौजूद हैं। हम यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि एक स्थायी रणनीतिक साझेदारी में मज़बूत और टिकाऊ आर्थिक घटक होने चाहिए।
9. इस बात को समझने का अर्थ है कई मोर्चों पर आगे बढ़ना। हमने आज भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए विचारार्थ विषयों पर सहमति व्यक्त की है। निष्कर्ष आने पर यह निश्चित रूप से प्रभाव डालेगा। हमने उन प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त उद्यम को प्रोत्साहित करने के बारे में बात की, जहां मांग पहले से ही स्थापित है। महत्त्वपूर्ण निवेश स्तर की कुछ पहलों पर भी बात की गई। हमारे कौशल और गतिशीलता के प्रयासों को गति मिलने लगी है। कनेक्टिविटी में सुधार की इच्छा भी कई विकल्पों के माध्यम से व्यक्त की गई है। यह सुनिश्चित करना कि व्यापार समझौते और अन्य वित्तीय भुगतान अधिक सुचारू हो जाएं, इसकी पहचान की गई है और इस पर महत्त्वपूर्ण रूप से काम किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों और साझेदारों की अधिक सक्रियता से खोज हो रही है।
10. लेकिन अंतिम विश्लेषण यह है कि हमें इसकी आवश्यकता है कि व्यवसायी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। इतना ही नहीं, साथ ही यह भी सुनिश्चित हो कि सरकारें जो चर्चा कर रही हैं और व्यवसायी जो योजना बना रहे हैं, उनके बीच घनिष्ठ सहयोग हो। दरअसल, इस तालमेल को सुनिश्चित करना आज शाम आईआरआईजीसी की आधिकारिक बैठक में हमारे एजेंडा बिंदुओं में से एक था।
11. इसलिए मित्रों मुझे पता है कि आप सभी की यही आकांक्षाएं और भावनाएं हैं। आपके सुझाव और अनुभव हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि हम अपने आर्थिक सहयोग को उन्नत करना चाहते हैं। मैं अपनी बात समाप्त करते हुए आशा व्यक्त करना चाहता हूं कि हमारे प्रयास व्यावहारिक गतिविधियों और परियोजनाओं में परिणत होंगे, ताकि इस दीर्घकालिक संबंध की वास्तविक क्षमता का पूर्णतः उपयोग हो सके और इसी परिप्रेक्ष्य में इस वर्ष के अंत में हमारे नेताओं के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हो।
एक बार फिर से आप सभी का धन्यवाद, नमस्कार, डॉबरी वेचर।
नई दिल्ली
20 अगस्त 2025