विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता करने के लिए 19-21 अगस्त, 2025 तक रूस का दौरा किया।
2. यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री ने रूसी संघ के राष्ट्रपति महामहिम श्री व्लादिमीर पुतिन से भेंट की और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री महामहिम श्री डेनिस मंटुरोव तथा विदेश मंत्री महामहिम श्री सर्गेई लावरोव के साथ बैठकें कीं। विदेश मंत्री ने प्रमुख विद्वानों और प्रबुद्ध मंडल के साथ भी बातचीत की।
3. महामहिम राष्ट्रपति पुतिन से भेंट करते समय विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री की ओर से व्यक्तिगत शुभकामनाएं दीं और द्विपक्षीय एजेंडे के प्रमुख मुद्दों तथा यूक्रेन से संबंधित घटनाक्रमों सहित आपसी हित के समकालीन वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।
4. 20 अगस्त को विदेश मंत्री ने प्रथम उप प्रधानमंत्री श्री डेनिस मंटुरोव के साथ आईआरआईजीसी-टीईसी के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाएं दूर की जाएं, लॉजिस्टिक्स में व्यवधान समाप्त किए जाएं, कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिले, भुगतान तंत्र को सुचारू रूप से लागू हो, 2030 तक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को समय पर अंतिम रूप दिया जाए और उसका क्रियान्वयन हो, भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ एफटीए को शीघ्र पूरा करे, जिसके संदर्भ की शर्तों को अंतिम रूप दिया गया है, और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच नियमित बातचीत, 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के संशोधित द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को समय पर प्राप्त करना बैठक के कुछ प्रमुख तत्त्व रहे।
5. व्यापार और निवेश के माध्यम से ऊर्जा सहयोग को बनाए रखने के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया। भारतीय कुशल श्रमिकों की गतिशीलता के मुद्दे पर भी चर्चा की गई, विशेष रूप से आईटी, निर्माण और इंजीनियरिंग में। पूर्ण अधिवेशन के समापन के बाद, सह-अध्यक्षों ने आईआरआईजीसी-टीईसी के 26वें सत्र के लिए एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए।
6. विदेश मंत्री एवं महामहिम श्री मंटुरोव ने आईआरआईजीसी-टीईसी बैठकों के बाद आयोजित भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित किया। इस मंच में दोनों पक्षों के अधिकारियों के साथ-साथ व्यवसाय और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। इसमें बिज़नेस फोरम और आईआरआईजीसी के विभिन्न कार्य समूहों के बीच समन्वय तंत्र बनाने पर विचार किया गया।
7. 21 अगस्त को विदेश मंत्री ने विदेश मंत्री महामहिम श्री सर्गेई लावरोव से भेंट की और भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलुओं की व्यापक समीक्षा की, जिसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग, विभिन्न संपर्क पहल, राजनीतिक, रक्षा और सैन्य-तकनीकी सहयोग, कज़ान और येकातेरिनबर्ग में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावासों के उद्घाटन में तेज़ी लाना आदि शामिल थे। वैश्विक और बहुपक्षीय सहयोग पर, दोनों पक्षों ने वैश्विक शासन में सुधार और जी-20, ब्रिक्स और एससीओ में सहयोग के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार और सक्रियीकरण करने की अनिवार्यता को रेखांकित किया।
8. यूक्रेन, मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया और अफ़ग़ानिस्तान जैसे क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की गई। विदेश मंत्री ने मतभेद को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति को आवश्यक बताते हुए भारत के दृष्टिकोण को दोहराया। विदेश मंत्री ने रूसी सेना में कार्यरत भारतीयों का मुद्दा भी उठाया और लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की आशा व्यक्त की।
9. आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूप और तौर-तरीकों के ख़िलाफ़ संयुक्त रूप से लड़ने का संकल्प लिया। विदेश मंत्री ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाने के भारत के दृढ़ संकल्प तथा सीमापार आतंकवाद से भारतीय नागरिकों की रक्षा करने के अपने संप्रभु अधिकार से अवगत कराया।
10. दोनों पक्षों ने नेताओं के बीच आगामी वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा की, जिसमें इसके प्रमुख परिणाम और उपलब्धियां शामिल थीं। विदेश मंत्री ने महामहिम श्री लावरोव को अपनी वार्ता जारी रखने के लिए आपसी सुविधा और समयानुसार भारत आने के लिए निमंत्रण दिया।
मॉस्को
22 अगस्त 2025