श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार मित्रों। मैं प्रधानमंत्री की जापान शिखर सम्मेलन के साथ-साथ एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन की आगामी यात्रा के संबंध में, विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री और सचिव (पश्चिम) श्री तन्मय लाल द्वारा रखी गई इस विशेष प्रेस वार्ता में आप सभी का स्वागत करता हूं। इसी के साथ, मैं विदेश सचिव महोदय को प्रारंभिक वक्तव्य के लिए आमंत्रित करता हूं।
किंतु इससे पहले मैं श्रोताओं को याद दिलाना चाहूंगा कि यह विशेष प्रेस वार्ता जापान और चीन एससीओ शिखर सम्मेलन पर आयोजित है। तो कृपया अपने सवालों को यात्रा के इन दो पहलुओं पर केंद्रित कीजिए। धन्यवाद। महोदय वक्तव्य दीजिये।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: धन्यवाद रणधीर, नमस्कार। हमारे साथ जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद।
जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 28 अगस्त की शाम को जापान की आधिकारिक यात्रा के लिए रवाना होंगे। वे जापान के प्रधानमंत्री महामहिम शिगेरू इशिबा के साथ 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए 29 और 30 अगस्त को जापान में रहेंगे।
कई वजहों से भी यह एक महत्त्वपूर्ण यात्रा है। यह प्रधानमंत्री मोदी की प्रधानमंत्री इशिबा के साथ पहली वार्षिक शिखर बैठक है। यह लगभग सात वर्षों में उनकी पहली एकल जापान यात्रा है। उन्होंने पिछली बार वर्ष 2018 में वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए यहां का दौरा किया था। तब से निस्संदेह उन्होंने जापान का दौरा किया है, लेकिन यह यात्रा बहुपक्षीय कार्यक्रम और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों के लिए की जा रही है। इसलिए, यह एक ऐसी यात्रा होगी जो पूरी तरह से भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय एजेंडे को समर्पित होगी। वर्ष 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से यह प्रधानमंत्री की आठवीं जापान यात्रा है, जो हमारे विदेश संबंध में इस विशेष रिश्ते की उच्च प्राथमिकता को परिलक्षित करती है।
जैसा कि आप जानते होंगे कि भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच उच्चतम स्तरीय वार्ता तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है और यह भारत-जापान विशेष रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी के एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
प्रधानमंत्री ने पहले भी अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान जापान के प्रधानमंत्री इशिबा से मुलाकात की है। मुझे लगता है कि उनकी पहली मुलाकात आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान वियनतियाने में हुई थी और हाल ही में इस वर्ष जून में कनाडा के कनानास्किस में जी-7 शिखर सम्मेलन में भी उन्होंने भेंट की। इन आयोजनों के दौरान होने वाली चर्चाओं को 29 अगस्त को टोक्यो में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान आगे बढ़ाया जाएगा।
भारत और जापान दो ऐसे देश हैं जो कई मुद्दों पर एकसमान मूल्य, विश्वास और रणनीतिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं। वे एशिया के दो अग्रणी लोकतंत्र हैं और दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। पिछले दशक में हमारे द्विपक्षीय संबंधों का दायरा और महत्वाकांक्षा लगातार बढ़ी है तथा आज इसमें व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और गतिशीलता, दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध और दोनों पक्षों के बीच जीवंत सांस्कृतिक जुड़ाव शामिल हैं।
तो 15वीं शिखर बैठक दोनों प्रधानमंत्रियों को इन संबंधों की गहन समीक्षा करने, विभिन्न क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में हुई प्रगति का जायजा लेने और निश्चित रूप से, जैसा कि आमतौर पर होता है, महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगी।
इससे कई पहलों की शुरुआत करने के अवसर भी प्राप्त होंगे, ताकि संबंधों को अत्यधिक स्थिर और मज़बूत बनाया जा सके और उभरते अवसरों व चुनौतियों का भी समाना किया जा सके। भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की एक विशेषता यह है कि दोनों नेता राजधानी के बाहर भी मिलेंगे और इस अवसर पर भी कार्यक्रम में टोक्यो के बाहर की यात्रा शामिल है, जिसके प्रति दोनों नेता अत्यधिक उत्साहित हैं।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जापान के कई अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ उन लोगों से भी मुलाकात करेंगे जो भारत को समर्थन प्रदान करते हैं। जापान में प्रधानमंत्री जापानी और भारतीय उद्योग जगत के अग्रणियों के साथ-साथ बिज़नेस लीडर्स फोरम में भी भाग लेंगे। इन बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी संबंधों को महत्त्वपूर्ण रूप से गहरा करना है।
हमने हाल के वर्षों में भारतीय राज्यों व जापानी प्रांतों के बीच संबंधों में भी गहनता देखी है और इस यात्रा के दौरान इस विशेष पहलू पर केंद्रित एक संबंध की भी योजना बनाई गई है। कुल मिलाकर, यह यात्रा हमारी दीर्घकालिक मित्रता को और मज़बूती प्रदान करेगी। इससे सहयोग के लिए नई राहें खुलेंगी और दोनों देशों के साथ-साथ हमारे साझा हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे भी शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि होगी।
मैं अब यहां स्वयं को विश्राम दूंगा और माइक्रोफोन अपने सहयोगी सचिव (पश्चिम) को सौंपता हूं, वे आपको प्रधानमंत्री की तियानजिन यात्रा के बारे में जानकारी देंगे।
श्री तन्मय लाल, सचिव (पश्चिम): धन्यवाद। नमस्कार। अब मैं आपके साथ आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन की जानकारी साझा करूंगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी चीन के राष्ट्रपति महामहिमश्री शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 31 अगस्त और 1 सितंबर 2025 को शंघाई सहयोग परिषद (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों की 25वीं बैठक के लिए तियानजिन, चीन की यात्रा करेंगे।
एससीओ की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी तीन बुराइयों का मुकाबला करने के प्राथमिक लक्ष्य के साथ की गई थी, क्योंकि आज ये एक चुनौती बने हुए हैं। आज, एक क्षेत्रीय मंच के रूप में, एससीओ सदस्यों के बीच सहयोग के क्षेत्रों की एक व्यापक शृंखला मौजूद है। एससीओ में 10 सदस्य हैं। भारत के अलावा, इनमें बेलारूस, चीन, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं। कई वार्ता साझेदार और पर्यवेक्षक भी हैं।
भारत वर्ष 2017 से एससीओ का सदस्य है और इससे पहले 2005 से वह पर्यवेक्षक था। अपनी सदस्यता अवधि के दौरान, भारत ने वर्ष 2020 में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद और वर्ष 2022-2023 के दौरान एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की अध्यक्षता की है। भारत एससीओ की विभिन्न संस्थागत प्रक्रिया और तंत्र में सक्रिय रूप से शामिल होते रहता है तथा मंत्रिस्तरीय बैठक और अन्य वार्ता प्रारूपों में भी भाग लेता है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विभिन्न एससीओ शिखर सम्मेलनों में भाग लिया है - वर्ष 2018 में किंगदाओ में; वर्ष 2019 में बिश्केक में; वर्ष 2020 में मास्को में वर्चुअल प्रारूप में; वर्ष 2021 में दुशांबे में वर्चुअल प्रारूप में; वर्ष 2022 में ताशकंद में; वर्ष 2023 में नई दिल्ली में वर्चुअल प्रारूप में; और वर्ष 2024 में अस्ताना शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व किया था।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आयोजित 23वें एससीओ शिखर सम्मेलन का विषय 'सिक्योर (एससीईयूआरई)' एससीओ था और यहां सिक्योर का अर्थ है सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार, संपर्क (कनेक्टिविटी), एकता, संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान और पर्यावरण, जो यह दर्शाता है कि एससीओ में भारत किन महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।
वर्ष 2023 में भारत की अध्यक्षता में एससीओ ने अलगाववाद, उग्रवाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कट्टरपंथ का मुकाबला करने में सहयोग करने के लिए एक संयुक्त वक्तव्य अंगीकृत किया था। अध्यक्षता के दौरान भारत ने सहयोग के बहुत ही व्यापक और विविध क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया था जो कि एससीओ सदस्यों के हित के लिए है। सहयोग के इन व्यावहारिक क्षेत्रों में, उदाहरण के लिए, स्टार्टअप और नवाचार, पारंपरिक चिकित्सा, युवा सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और साझा बौद्ध विरासत शामिल हैं।
इससे पहले वर्ष 2020 में भारत ने स्टार्टअप फोरम की मेज़बानी की थी और इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र पर एक कार्य समूह की स्थापना की थी। यह युवा वैज्ञानिकों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जो कि अब एक नियमित व्यवस्था बन गया है। आर्थिक प्रबुद्ध मंडल के संघ की पहली बैठक और एससीओ व्यापार सम्मेलन की मेज़बानी भी भारत ने की थी। पारंपरिक चिकित्सा एक अन्य विषय था, जहां भारतीय पहल पर एक विशेषज्ञ समूह की स्थापना की गई और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
भारत ने वर्ष 2023 में शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता के दौरान हमारी साझा बौद्ध विरासत पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की और भारतीय क्षेत्रीय साहित्य की 10 उत्कृष्ट कृतियों का रूसी और चीनी भाषाओं में अनुवाद किया गया। इसके अलावा, उस अध्यक्षता के दौरान वाराणसी शहर को वर्ष 2022-2023 के दौरान एससीओ की पहली सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी के रूप में नामित किया गया था और शहर ने दोनों देशों के लोगों के संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेज़बानी की थी।
इन सभी पहल और आयोजन को एससीओ सदस्य देशों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। जैसा कि आप जानते होंगे, एससीओ का सचिवालय बीजिंग में स्थित है; और उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना आरएटीएस स्थित है।
भारत के लिए सुरक्षा सहयोग ध्यान केंद्रित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बना हुआ है और भारत ने 2021-2022 के दौरान एससीओ आरएटीएस परिषद की अध्यक्षता की थी। इस वर्ष की शुरुआत में, फरवरी में, एससीओ आरएटीएस के महासचिव श्री नूरलान येरमेकबायेव, जो कि कज़ाख़स्तान के पूर्व मंत्री हैं, उन्होंने भारत का दौरा किया था और सार्थक चर्चा की थी।
इस वर्ष मई में, आईसीडब्ल्यूए ने नई दिल्ली में सिक्योर एससीओ विषय पर 20वें एससीओ फोरम की मेज़बानी की थी। हाल के महीनों में, भारत ने एससीओ की कई चल रही प्रक्रियाओं में मंत्री स्तर और वरिष्ठ स्तर पर भाग लिया है। इसमें वे बैठकें शामिल हैं जिनमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्त्व एनएसए, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री ने अपने-अपने प्रासंगिक एससीओ प्रारूप में किया।..
तियानजिन में आगामी 25वें एससीओ शिखर सम्मेलन के कार्यक्रम तत्त्वों में 31 अगस्त की शाम को स्वागत भोज शामिल है और मुख्य शिखर सम्मेलन अगले दिन, सोमवार 1 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री द्वारा एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान कुछ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है।
धन्यवाद। अब मैं यहां विश्राम दूंगा।
केइता उएकी, जापानी समाचार एजेंसी जेइजी प्रेस: धन्यवाद, मैं जापानी समाचार एजेंसी जेइजी प्रेस से संवाददाता केइता उएकी हूं। द्विपक्षीय बैठक के संबंध में, भारत और जापान... भारत और जापान भी क्वाड के सदस्य हैं। तो क्या प्रधानमंत्री मोदी जी श्री इशिबा को क्वाड शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करेंगे, जो कि इस वर्ष के अंत में भारत में आयोजित किया जाएगा? धन्यवाद।
आयुषी अग्रवाल, एएनआई: महोदय, मैं एएनआई से आयुषी अग्रवाल हूं। चीन यात्रा के दौरान, रूसी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की क्या संभावना है? और दूसरा, क्या चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी टैरिफ पर कोई चर्चा होगी, क्योंकि चीन ने हाल ही में कहा है कि वह भारत के साथ खड़ा है और अमेरिका पर धौंस दिखाने का आरोप लगाया है। तो क्या टैरिफ पर कोई चर्चा होगी?
मधुरेंद्र, न्यूज़ नेशन: महोदय मैं न्यूज़ नेशन से मधुरेंद्र हूं। मेरा सवाल एससीओ को लेकर है। जैसा कि आपने खुद बताया कि आतंकवाद एक बड़े एजेंडे के तौर पर एससीओ मंच पर रहा है। और पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद एससीओ की पहली बैठक है जिसमें पाकिस्तान भी सदस्य के तौर पर है। क्या हम उम्मीद करते हैं कि आतंकवाद को लेकर यह मंच एक बेहतर संदेश दे पाएगा, जो भारत का रुख है कि बातचीत और आतंकवाद एक-साथ नहीं हो सकते हैं और आतंकवाद के रहने की स्थिति में किसी भी तरह के संबंध नहीं पाकिस्तान के साथ स्थापित हो सकते हैं। उसको लेकर कोई संदेश होगा? चूंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने भी पाकिस्तान की मदद की थी तो क्या इस बाबत भी कोई बात उस मंच से हमको लगता है कि भारत अपने एजेंडे में शामिल करेगा और क्या यह संयुक्त घोषणा में हो पाएगा।
हुमा सिद्दीकी, स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल: महोदय मैं स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल से हुमा सिद्दीकी हूं। मेरा सवाल जापान यात्रा से संबंधित है। आपने एजेंडे के हिस्से के रूप में रक्षा के बारे में बात की। तो क्या रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में कोई महत्त्वपूर्ण घोषणा होने की उम्मीद है? और अंतरिक्ष क्षेत्र में, जापान इसरो के साथ भागीदारी कर रहा है। क्या इस बारे में कोई एजेंडा है?
केशव पद्मनाभन, द प्रिंट: धन्यवाद महोदय, मैं द प्रिंट से केशव पद्मनाभन हूं। मेरा सवाल जापान शिखर सम्मेलन के बारे में है। पिछले प्रश्न के संबंध में, क्या हम जापान के साथ रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन के किसी परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं? क्या यह एजेंडा में शामिल है?
और एससीओ के संबंध में, अगर मैं पूछ सकता हूं, तो हम जानते हैं कि पाकिस्तान शिखर सम्मेलन में भाग लेगा, इसमें भारत है। हमने देखा है कि अतीत में रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान आतंकवाद पर आम सहमति का अभाव था, जो एससीओ का एक प्रमुख लक्ष्य है। तो, आप नेताओं के शिखर सम्मेलन में किसी प्रकार की घोषणा या संयुक्त... बात की कैसे उम्मीद करते हैं? आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के संबंध में किन बातों पर समझौता नहीं करेगा और इसके विचार से किसे दस्तावेज़ में आवश्यक रूप से शामिल करना चाहिए? क्या इस बारे में कुछ समझा सकते हैं? धन्यवाद।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: ठीक है, मैं पहले कुछ प्रश्नों को संबोधित करूंगा। मुझे लगता है कि किसी मित्र ने क्वाड पर सवाल किया था। आप जानते हैं कि क्वाड वास्तव में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, समृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच है।
हाल के वर्षों में, इसका एजेंडा व्यावहारिक सहयोग, अगर मैं इसे ऐसा कह सकता हूं, तो स्वास्थ्य सुरक्षा के मुद्दों तक विस्तारित हो गया है। इसमें महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है। महत्त्वपूर्ण खनिज के संबंध में एक पहल है जिस पर हाल ही में चर्चा हुई है। कुल मिलाकर, आपूर्ति शृंखला को और अधिक लचीला बनाने तथा बुनियादी ढांचे के विकास के संबंध में। इसलिए, ये सभी मुद्दे भारत और जापान दोनों के लिए प्राथमिकता वाले हैं। हमारे दोनों देश इस मंच और इस साझेदारी को बहुत महत्त्व देते हैं। और हम अपने सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सभी क्वाड साझेदारों के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं। मुझे यकीन है कि जब दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात होगी, तो क्वाड एक ऐसा विषय होगा जिस पर दोनों के बीच चर्चा होगी।
द्विपक्षीय बैठकों के बारे में आयुषी के सवाल पर। देखिए, जैसा कि ऐसे आयोजन के संबंध में हमेशा होता है, इस अवसर पर कई द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। हम अभी भी उन बैठकों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं और आपको उन बैठकों की कार्यवाही के बारे में नई जानकारी देते रहेंगे। मैं समझता हूं कि बैठकों से पहले यह अनुमान लगाना और कहना कि बैठकों में क्या चर्चा होगी और क्या नहीं, यह जल्दबाजी होगी।
हुमा, आपका प्रश्न और मुझे लगता है कि केशव का प्रश्न एक ही तर्ज पर है, भारत और जापान के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधी सहयोग के संबंध में। यह वास्तव में हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। इस वर्ष मई में ही दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच एक बैठक हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने अनेक मुद्दों और दोनों पक्षों के बीच परिचालन संबंधों की समीक्षा की थी। लेकिन इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग, जो दोनों पक्षों के बीच समग्र रक्षा और सुरक्षा संबंधों का एक अहम हिस्सा है।
मुझे लगता है कि विशिष्ट प्लेटफार्मों आदि में कुछ हित की बात थी। और आप इस बात से अवगत होंगे कि दोनों देश पहले से ही एकीकृत जटिल रेडियो एंटीना, यूनिकॉर्न परियोजना के सह-विकास पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय नौसेना प्लेटफार्मों द्वारा उपयोग के लिए एक सामान्य रडार प्रणाली है। इस विशेष परियोजना के कार्यान्वयन हेतु एक ज्ञापन पर नवंबर 2024 में हस्ताक्षर किए गए। भारतीय नौसेना और जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल भी भारत में जहाज रखरखाव के क्षेत्र में संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। और दोनों पक्षों की नामित एजेंसियों, भारत में डीआरडीओ और जापान में एटीएलए के बीच कई अन्य मुद्दों पर चर्चा चल रही है। और, ये चर्चाएं नियमित होती हैं तथा एजेंडा लगातार नया बनाए रखा जाता है और वे इसमें संलग्न रहते हैं।
मुझे लगता है कि अंतरिक्ष का भी ज़िक्र किया गया था। इसरो और जापानी अंतरिक्ष एजेंसी मिलकर लूपेक्स नामक एक परियोजना पर काम कर रहे हैं, जो कि लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन है। और यह कार्य भारत के चंद्रयान-5 मिशन के साथ मिलकर किया जा रहा है। यह कुछ हद तक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि यह भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी क्षमता और सामर्थ्य को वास्तव में नियोजित करने के अवसर प्रदान करता है।
श्री तन्मय लाल, सचिव (पश्चिम): आपका प्रश्न आतंकवाद में था। तो जैसा कि मैंने कहा कि एससीओ जब स्थापित हुआ था, तब उसका मुख्य उद्देश्य था कि कैसे शांति और सुरक्षा की जो चुनौती है आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद से ... उसका उन्मूलन किस तरह से किया जाए।
और यह चुनौती बनी रहती है। एससीओ सदस्यों के लिए सुरक्षा एक प्राथमिकता का क्षेत्र बना हुआ है। अतीत में, जिन वक्तव्यों को अंतिम रूप दिया गया है, उनमें सीमापार आतंकवाद सहित आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई है, जिनमें संयुक्त वक्तव्य भी शामिल है, जिसका मैंने उल्लेख किया है, जिसे शिखर सम्मेलन, 23वें शिखर सम्मेलन की हमारी अध्यक्षता के दौरान अंतिम रूप दिया गया था।
जहां तक इस शिखर सम्मेलन में घोषणा का प्रश्न है, उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है... विषय। हम अन्य सदस्य और साझेदारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि सीमापार आतंकवाद सहित आतंकवाद की कड़ी निंदा की बात दोहराई जाए। लेकिन विषय को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो इसके साथ ही, देवियों और सज्जनों, हम इस प्रेस वार्ता को समाप्त करते हैं। हम आपको नई जानकारी से अवगत करवाते रहेंगे।
नई दिल्ली
26 अगस्त, 2025