भारत और जापान, दो देश जो विधि के शासन पर आधारित एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और दबाव-मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण रखते हैं, दो अर्थव्यवस्थाएं जिनके पास पूरक संसाधन संपन्नता, तकनीकी क्षमताएं और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता है और दो देश जिनके पास मैत्री और पारस्परिक सद्भावना की लंबी परंपरा है, अगले दशक में अपने देशों और विश्व में होने वाले परिवर्तनों और अवसरों का संयुक्त रूप से लाभ उठाने, हमारे संबंधित घरेलू लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करने और हमारे देशों और अगली पीढ़ी के लोगों को पहले से कहीं अधिक नज़दीक लाने की अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं।
इस लक्ष्य को पाने के लिए भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए, अगले दशक के लिए कुल राष्ट्रीय प्रयासों की एक आठ-सूत्रीय योजना बना रहे हैं, जिसमें लक्ष्य और लक्ष्य के साथ-साथ उनकी प्राप्ति के लिए अहम उपाय भी शामिल होंगे।
(I) अगली पीढ़ी के लिए आर्थिक साझेदारी
विश्व की चौथी और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, हमारा लक्ष्य अपनी पारस्परिक आर्थिक और वित्तीय शक्तियों का लाभ उठाना तथा अपने पूरक संसाधनों और बाज़ारों की क्षमता को गतिशील बनाना है:
• वर्ष 2022-2026 में जापान से भारत को सार्वजनिक और निजी निवेश और वित्तीय सहायता में 5 ट्रिलियन जापानी येन के लक्ष्य की प्रगति पर निर्माण और निजी निवेश में 10 ट्रिलियन जापानी येन का नया लक्ष्य निर्धारित करना;
• भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के कार्यान्वयन की समीक्षा में तेज़ी लाकर द्विपक्षीय व्यापार और निवेश का विस्तार और विविधता लाना;
• भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता साझेदारी (आईजेआईसीपी) के माध्यम से "मेक इन इंडिया" पहल के लिए भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को मज़बूत करना, ताकि जापानी फर्मों द्वारा अपेक्षित उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का प्रयोग करते हुए भारत में उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सके;
• भारत-जापान कोष के अंतर्गत नई परियोजनाओं की खोज, भारत के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र गिफ्ट सिटी में जापानी निगमों को बढ़ावा देना, तथा जापान में प्रमुख भारतीय उद्योग संघ, व्यापार और निवेश प्रोत्साहन एजेंसियों की उपस्थिति को बढ़ाना;
• स्थानीय मुद्रा लेनदेन सहित जापान और भारत के बीच भुगतान प्रणालियों पर सहयोग का विस्तार करना;
• जापानी एसएमई की भारत यात्रा को बढ़ावा देकर, ज़मीनी स्तर के उद्योगों का विस्तार करके तथा भारत-जापान एसएमई फोरम की शुरुआत करके लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना;
• नीतिगत संवाद और व्यावसायिक आदान-प्रदान के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देना और कृषि व्यवसाय सहयोग को प्रोत्साहित करना, तथा मॉडल फार्मों में प्रदर्शन-आधारित निवेश और भारतीय और जापानी व्यंजनों के लिए पाककला पेशेवरों के विकास को बढ़ावा देना; और
• निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच आईसीटी सहयोग और व्यावसायिक अवसरों की खोज करना।
हमारा उद्देश्य ग्लोबल साउथ के साथ आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने और उसकी विकास क्षमता का लाभकारी रूप से प्रयोग करते हुए अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाना है। इस उद्देश्य से, हम अफ्रीका में सतत आर्थिक विकास के लिए भारत-जापान सहयोग पहल के शुभारंभ का स्वागत करते हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और विकास हेतु पारस्परिक और समग्र विकास हेतु भारत के दृष्टिकोण (महासागर) और जापान की हिंद महासागर-अफ्रीका आर्थिक क्षेत्र पहल की भावना के अनुरूप, हम भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्त्व वाले व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा देंगे और दक्षिण एशिया और अफ्रीका के अन्य देशों के साथ व्यापार सहयोग को मज़बूत करने हेतु एक केंद्र के रूप में भारत में जापान की कंपनियों को तेज़ निर्माण के लिए बढ़ावा देंगे।
(II) अगली पीढ़ी के लिए आर्थिक सुरक्षा साझेदारी
जैसे-जैसे हम अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं, हमारा लक्ष्य भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा पहल शुरू करना है, जो प्रमुख वस्तुओं और सामग्रियों की आपूर्ति शृंखलाओं को मज़बूत करने में पूरे देश के प्रयासों के माध्यम से रणनीतिक सहयोग को गति देगा, बाज़ार विविधीकरण को बढ़ावा देगा, तथा निजी क्षेत्र के नेतृत्त्व वाले सहयोग सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाएगा:
• सामरिक व्यापार और प्रौद्योगिकी सहित आर्थिक सुरक्षा पर बातचीत के सरकारी और व्यावसायिक चैनलों के माध्यम से सेमीकंडक्टर, प्रमुख खनिज, फार्मास्यूटिकल्स और जैव प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा और नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में ठोस परियोजनाओं की पहचान और कार्यान्वयन करना;
• उपरोक्त क्षेत्रों में नवीनतम विकास पर नीतिगत दृष्टिकोण, खुफिया जानकारी और सर्वोत्तम प्रथाओं पर जानकारी साझा करना;
• खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग ज्ञापन, भारत-जापान डिजिटल साझेदारी 2.0, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला साझेदारी पर सहयोग ज्ञापन और ऐसे अन्य तंत्रों के माध्यम से मज़बूत आपूर्ति शृंखला और बाज़ार विविधीकरण पर सहयोग को बढ़ावा देना;
• जेईटीआरओ, सीआईआई और जेसीसीआईआई के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त कार्य योजना का सहयोग करने सहित निजी क्षेत्र के नेतृत्त्व वाले सहयोग को बढ़ावा देना;
• भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा वार्ता के अंतर्गत भारत-जापान निजी क्षेत्र वार्ता, आर्थिक सुरक्षा पर व्यापार स्तंभ के शुभारंभ का स्वागत करते हुए, जिसमें संयुक्त कार्य योजना को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक व्यापार और प्रौद्योगिकी शामिल है;
• एआई पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और एक अभिनव और विश्वसनीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को बढ़ावा देने के लिए जापान-भारत एआई सहयोग पहल (जेएआई) को लागू करना; और
• स्वस्थ बैटरी बाज़ार और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करने के लिए भारत-जापान बैटरी आपूर्ति शृंखला सहयोग को बढ़ावा देना।
(III) नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी
जापान की उन्नत तकनीकों और भारतीय क्षमताओं का लाभ उठाते हुए, हम बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी में व्यापक सहयोग के ढांचे के रूप में नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप (एनजीएमपी) की स्थापना करेंगे। इस साझेदारी के माध्यम से, हमारा लक्ष्य ऐसे समाधान विकसित करना है जो भारत में मोबिलिटी क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान करें, जहां भारत में इनकी उच्च मांग है और एक मज़बूत नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी और संबंधित उद्योगों के विकास को गति प्रदान करेंगे जो दुनिया के लिए मेक इन इंडिया के दृष्टिकोण को पूरा करें। हम डिजिटल और स्मार्ट तकनीक का प्रयोग करेंगे, जिनमें सतत और पर्यावरण-अनुकूल प्रथा पर ध्यान केंद्रित करना, और सुरक्षा एवं आपदा-प्रतिरोधक क्षमता को प्राथमिकता देना, सहयोग के लिए क्षेत्रों की तलाश करना इत्यादि शामिल हैं, किंतु इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:
• हाई स्पीड रेल प्रणाली, जिसमें "मेक इन इंडिया" अगली पीढ़ी के रोलिंग स्टॉक, कार्यात्मक सिग्नलिंग और परिचालन नियंत्रण प्रणाली, भूकंप-रोधी, एआई आधारित रखरखाव और निगरानी, रेलवे क्षेत्र में ऊर्जा परिवर्तन, आधुनिक मेट्रो रेल प्रणाली और मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम शामिल हैं;
• एकीकृत स्टेशन क्षेत्र विकास, मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस प्लेटफॉर्म, इंटरसिटी रोड नेटवर्क और एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी के माध्यम से ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट, जिसमें पर्सनल रैपिड ट्रांज़िट (पीआरटी) जैसी लघु-स्तरीय स्वचालित शहरी परिवहन प्रणालियां शामिल हैं;
• स्मार्ट शहर और शहर के डीकार्बोनाइज़ेशन की योजना उन्नत मॉडलिंग के माध्यम से बनाई जाएगी, जिसमें यातायात भीड़ और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियों का समाधान किया जाएगा;
• सॉफ्टवेयर परिभाषित वाहन द्वारा संचालित कनेक्टेड टेक्नोलॉजी के माध्यम से मोबिलिटी फील्ड में डेटा का उपयोग, गतिशीलता क्षेत्र में सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है;
• ऑटोमोबाइल और विमान, शिपिंग जहाजों का विनिर्माण, टिकाऊ ईंधन और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन भंडारण का उपयोग, तथा परिवहन बुनियादी ढांचे का विस्तार;
• खाद्य एवं औषधि परिवहन के लिए कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक सेवाएं; और
• शहरी नियोजन और विकास में 3-डी शहर मॉडल का प्रयोग करना, जैसे कि आपदा सिमुलेशन, और आपदा की स्थिति में निकासी मार्गदर्शन योजनाओं का निर्माण।
हम भारत में उपरोक्त उत्पादों के निर्माण और वैश्विक बाज़ार में निर्यात के लिए भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच सहयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा देंगे। हम इन मोबिलिटी समाधानों के डिज़ाइन, संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल को तैयार करने तथा तकनीकी प्रशिक्षण और मानव संसाधन आदान-प्रदान के माध्यम से भारत में क्षमता निर्माण को भी प्राथमिकता देंगे।
इसके साथ ही हम लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने का लक्ष्य रखेंगे और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क जैसे बहुपक्षीय तंत्रों में सहयोग को मज़बूत करेंगे।
(IV) अगली पीढ़ी के लिए पर्यावरणीय विरासत
हमारा लक्ष्य अपनी भावी पीढ़ी के लिए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को बढ़ावा देकर और एक-दूसरे के जलवायु अनुकूलन, ऊर्जा परिवर्तन, अपशिष्ट न्यूनीकरण और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सहयोग करके "एक पृथ्वी, एक भविष्य" के अपने दृष्टिकोण को साकार करना है:
• मिशन लाइफ के ज़रिए ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास के लिए कम कार्बन उपयोग, सतत समुदाय और जीवन शैली सुनिश्चित करना;
• नेट-ज़ीरो अर्थव्यवस्था प्राप्त करने के लिए प्रत्येक देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करने वाले विभिन्न मार्ग;
• भारत-जापान ऊर्जा संवाद के माध्यम से भारत-जापान स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी के अंतर्गत ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना;
• अपशिष्ट से ऊर्जा प्रौद्योगिकी, अपशिष्ट को अलग करने और पुनर्चक्रण विधि पर सहयोग के माध्यम से एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना;
• कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए सतत कृषि पद्धतियों, जलवायु शमन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना, समुद्री और तटीय इकोसिस्टम प्रणालियों का संरक्षण, सतत वन प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण, कृषि वानिकी को बढ़ावा देना और बांस जैसे प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रयोग;
• संयुक्त ऋण तंत्र (जेसीएम), अगली पीढ़ी के लिए स्वच्छ ऊर्जा मोबिलिटी और अवसंरचना पहल (आईसीईएमएएन) हरित हाइड्रोजन मूल्य शृंखला और उत्सर्जन आकलन के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसी पहलों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा और उत्सर्जन एवं प्रदूषण में कमी के क्षेत्र में सहयोग; और
• उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्त्व समूह (लीडआईटी) जैसे बहुपक्षीय पर्यावरण संस्थानों में प्रयासों को बढ़ाना।
(V) अगली पीढ़ी के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी
हमारा लक्ष्य एक-दूसरे की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं का प्रयोग करना, संस्थानों और मानवशक्ति का लाभ उठाते हुए बुनियादी विज्ञानों में अग्रणी अनुसंधान को बढ़ावा देना और निम्नलिखित पहलों के माध्यम से नई प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करना है:
• केईके, त्सुकुबा में भारतीय बीमलाइन के माध्यम से मौलिक अनुसंधान में सहयोग, क्वांटम प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी के अनुसंधान उपकरणों के लिए उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग;
• जापान द्वारा शुरू की गई जापान-भारत स्टार्टअप सहायता पहल (जेआईएसएसआई) का उद्देश्य खुले नवाचार, सामाजिक समस्याओं के समाधान, उन्नत तकनीक, डेटा प्रयोग, इनक्यूबेशन और वित्त में स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करना, तथा नवाचार इकोसिस्टम को जोड़ना और दोनों देशों में स्टार्टअप्स को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में सक्षम बनाना है;
• "भारत-जापान निधि" के ज़रिए से एआई क्षेत्र सहित स्टार्टअप कंपनियों के लिए धन जुटाना;
• भारत-जापान आईसीटी सहयोग ढांचे के तहत एक संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से आईसीटी सहयोग को बढ़ावा देना;
• चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण (लूपेक्स) मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी वाणिज्यिक संस्थाओं और स्टार्टअप्स के बीच संबंधों को सुविधाजनक बनाना;
• छोटे मॉड्यूलर और उन्नत रिएक्टरों पर आईटीईआर और संयुक्त अनुसंधान सहित फिशन और फ्यूजन प्रौद्योगिकी पर संवाद; और
• जी-20 नई दिल्ली घोषणा और अगली पीढ़ी के कृषि को सशक्त बनाने के लिए नवाचारों को आगे बढ़ाना (एआई-एज) के अनुरूप, मिलेट्स सहित खाद्य प्रौद्योगिकी और कृषि विज्ञान में संयुक्त अनुसंधान।
(VI) अगली पीढ़ी के लिए स्वास्थ्य में निवेश
हमारा लक्ष्य संयुक्त रूप से नैदानिक और चिकित्सा अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना, महामारियों और उभरती स्वास्थ्य समस्याओं से निपटना, सस्ती जीवन रक्षक दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) को ध्यान में रखते हुए, निम्नलिखित पहलों के माध्यम से पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा की क्षमता का उपयोग करके अपने लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में निवेश करना है:
• भारत की आयुष्मान भारत पहल और जापान की एशिया स्वास्थ्य एवं कल्याण पहल सहित वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को मज़बूत करना;
• नियमित संयुक्त समिति बैठकें आयोजित करके सहयोग के आगे के क्षेत्रों की पहचान करना;
• वृद्ध चिकित्सा, स्टेम सेल थेरेपी, रिजनेरेटीव चिकित्सा, जीन थेरेपी, सिंथेटिक जीव विज्ञान, कैंसर उपचार, डिजिटल स्वास्थ्य और स्वचालित नैदानिक समाधान के उभरते क्षेत्रों पर संयुक्त अनुसंधान;
• यूएचसी के प्रचार में तेज़ी लाने के लिए "यूएचसी नॉलेज हब" के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशना;
• चिकित्सा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग के माध्यम से चिकित्सा पेशेवरों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और चिकित्सा पेशेवरों के लिए फेलोशिप शुरू करना;
• ज़रूरी दवाइयां, एपीआई और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति को सुविधाजनक बनाना और दोनों देशों में चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मज़बूत करना; और
• भारत के आयुष मंत्रालय के सहयोग से जापान में योग, ध्यान, आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले केंद्रों की स्थापना।
(VII) अगली पीढ़ी के लिए दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी साझेदारी
हमारे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों और सांस्कृतिक संबंधों को मान्यता देते हुए तथा अपनी-अपनी आर्थिक और जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने के लिए अपने मानव संसाधनों की क्षमता को समझते हुए, हमारा लक्ष्य निम्नलिखित के माध्यम से अपने लोगों के बीच संबंधों को और बढ़ाना है:
• भारत-जापान मानव संसाधन आदान-प्रदान एवं सहयोग के लिए एक कार्य योजना शुरू करना, जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दोनों देशों में 500,000 से अधिक कार्मिकों का आदान-प्रदान करना है, जिसमें भारत से जापान के लिए 50,000 कुशल कार्मिक एवं संभावित प्रतिभाएं शामिल होंगी;
• जापान-भारत विनिर्माण संस्थान (जेआईएम) और जापानी एंडोव्ड कोर्सेज (जेईसी) की उपलब्धियों और जापान में भारतीय कर्मियों के प्रशिक्षण के आधार पर भारत-निप्पॉन प्रोग्राम फॉर एप्लाइड कॉम्पिटेंसी ट्रेनिंग (आईएनपीएसीटी) के तहत भारत में एंडोव्ड पाठ्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार;
• एमईटीआई, जापान द्वारा भारत-जापान टैलेंट ब्रिज (आईजेटीबी) के तहत दोनों देशों के बीच प्रतिभा के आदान प्रदान को बढ़ावा देने पर एक समर्पित वेबसाइट के माध्यम से रोज़गार संवर्धन कार्यक्रम, इंटर्नशिप कार्यक्रम, रोज़गार सर्वेक्षण और सूचना प्रसार का शुभारंभ;
• सकुरा विज्ञान विनिमय कार्यक्रम, लोटस कार्यक्रम, होप मीटिंग्स और एमईएक्सटी (जापान की अंतर-विश्वविद्यालय विनिमय परियोजना) के माध्यम से शोधकर्ताओं और छात्रों के आदान-प्रदान को मज़बूत करना, तथा ईडीयू-पोर्ट जापान पहल के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग का समर्थन करना;
• ई-माइग्रेट पोर्टल, भारत में वैश्विक सक्षमता केंद्रों के माध्यम से संगठनात्मक सहयोग और कार्यस्थलों को बढ़ाना;
• एक-दूसरे की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करके दो-तरफ़ा पर्यटक प्रवाह को सुविधाजनक बनाना;
• जापानी भाषा शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार करना तथा जापानी भाषा शिक्षा विशेषज्ञों को भेजकर प्रभावी पाठ्यक्रम और सामग्री विकसित करने में सहायता करना; और
• भारतीय जापानी भाषा शिक्षकों और छात्रों की सहायता के लिए जापानी भाषा शिक्षण सहायकों "निहोंगो पार्टनर्स" को भारत भेजना।
(VIII) अगली पीढ़ी के लिए राज्य-प्रांतीय साझेदारी
उपरोक्त अनेक प्रयासों के कार्यान्वयन में भारतीय राज्यों और जापानी प्रांतों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, हमारा लक्ष्य भारत-जापान साझेदारी के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण हेतु उनकी ऊर्जा का उपयोग करने के लिए एक उपयुक्त मंच तैयार करना है:
• पूरक संसाधन निधियों और ऐतिहासिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए नए सहयोगी शहरों और राज्य-प्रांतों के बीच नई साझेदारियों को बढ़ावा देना;
• भारतीय और जापान के शहरों के बीच सीधी उड़ान कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना;
• लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित व्यापार एवं व्यवसाय साझेदारी को मज़बूत करना, स्थानीय उद्योगों को पुनर्जीवित करना तथा भारत-कंसाई व्यापार मंच के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना, साथ ही भारत और क्यूशू के बीच समान व्यवस्था की संभावना तलाशना;
• भारत और जापान के भीतर क्षेत्रीय अवसरों पर सूचना के अधिक आदान-प्रदान को सुगम बनाना तथा साझा चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए राज्यों और प्रांतों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना; और
• राज्य-प्रांतीय स्तर के प्रतिनिधिमंडलों की यात्राओं को बढ़ावा देना, जिसमें भारत का विदेश मंत्रालय और जापान का विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष 3 यात्राओं का आयोजन करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे;
उपरोक्त आठ प्रयासों के ज़रिए, हम अपने द्विपक्षीय संबंधों की स्थापना के आठवें दशक में भारत-जापान जन-आधारित साझेदारी के एक परिवर्तनकारी चरण की शुरुआत करने और हमारी भावी पीढ़ियों के लिए सहयोग के ठोस लाभ और अवसर लाने की आशा करते हैं।
हम आगामी दशक के लिए अपने साझा दृष्टिकोण को दर्शाते हुए इस दस्तावेज़ को अपनाते हैं, जो जापान के महामहिम प्रधानमंत्री श्री इशिबा शिगेरू के निमंत्रण पर 29-30 अगस्त, 2025 को टोक्यो में वार्षिक शिखर सम्मेलन 2025 के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान अपनाया गया है।
टोक्यो
29 अगस्त, 2025