श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों, मैं प्रधानमंत्री मोदी की 15वें शिखर सम्मेलन के लिए जापान यात्रा के संबंध में विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री द्वारा रखी गई इस प्रेस वार्ता में आप सभी का स्वागत करता हूं। हमारे साथ जापान में हमारे राजदूत श्री सिबी जॉर्ज और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) श्री गौरांगलाल दास भी उपस्थित हैं।
इससे पहले कि मैं आज के घटनाक्रम के बारे में जानकारी देने के लिए विदेश सचिव को माइक दूं, तो जब आप अपने प्रश्न पूछिए, तब कृपया खुद का और अपने संगठन का परिचय दीजिए। और इसके बाद आप अपना सवाल पूछ सकते हैं।
इसी के साथ मैं विदेश सचिव को प्रारंभिक वक्तव्य के लिए आमंत्रित करता हूं। मान्यवर कृपया वक्तव्य दीजिये।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: धन्यवाद रणधीर। आप सभी को नमस्कार। टोक्यो में वार्ता के लिए अभी अपेक्षाकृत देर हो चुकी है, लेकिन खुशी है कि आप सभी उपस्थित हो सके।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
प्रधानमंत्री आज सुबह टोक्यो पहुंचे और जापान सरकार और जनता तथा टोक्यो में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने उनका बहुत ही गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया। उनके आगमन के बाद पहला कार्यक्रम दोपहर में हुआ, जो कि भारत-जापान आर्थिक मंच था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इशिबा ने संयुक्त रूप से भाग लिया। दोनों ने भारतीय और जापानी उद्योग जगत के दिग्गजों को संबोधित किया।
इसके बाद प्रधानमंत्री और जापान के वरिष्ठ एवं अग्रणी राजनीतिक हस्तियों के बीच कुछ बैठकें हुईं। पूर्व प्रधानमंत्री सुगा और किशिदा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक विकास से संबंधित पारस्परिक हितों के मुद्दों पर चर्चा की।
आज शाम, प्रधानमंत्री मोदी का कांतेई में प्रधानमंत्री इशिबा ने स्वागत किया और दोनों नेताओं ने लगभग ढाई घंटे साथ बिताए, जिसके दौरान उन्होंने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की और दोनों पक्षों के बीच समझौतों और समझ के आदान-प्रदान के साक्षी बने, प्रेस को संबोधित किया और फिर प्रधानमंत्री इशिबा ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया।
कुल मिलाकर, मैं यही कहूंगा कि इस यात्रा से जो संदेश निकला है और दोनों पक्षों के बीच जो सहमति बनी है, वह बहुत स्पष्ट है। जापान आज भारत के सबसे मूल्यवान और विश्वसनीय मित्रों में से एक है। यह विकसित और आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारी यात्रा में हमारा सहयोगी है। हमारी साझेदारी के मूल तत्त्व मज़बूत बने हुए हैं।
वर्ष 2014 में हमारे संबंधों को विशेष, रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाए जाने के बाद से दोनों देशों ने बड़ी प्रगति की है। द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा, दोनों प्रधानमंत्रियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिति पर भी चर्चा की। और, यह स्पष्ट था कि व्यापक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, भारत और जापान के बीच संबंध अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में स्थिरता का एक स्तंभ बने हुए हैं।
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण निश्चित रूप से परिणामों की व्यापक श्रृंखला है, जिनसे आप अभी तक शायद अवगत हो चुके होंगे। लेकिन, ये ऐसे परिणाम हैं जिन्हें मैं अगले दशक में संबंधों को दिशा देने वाला तथा कई मायनों में भारत और जापान दोनों देशों के लोगों की अगली पीढ़ी की प्रगति और समृद्धि की नींव रखने वाला कहूंगा।
तो, मुझे आज के सबसे महत्त्वपूर्ण परिणामों से आपको अवगत कराने की अनुमति दीजिए। दोनों नेताओं ने आज अगले दशक के लिए संयुक्त दृष्टिकोण का आदान-प्रदान किया। यह दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और कार्यात्मक सहयोग का 10 वर्षीय रणनीतिक रोडमैप है। यह हमारे राजनयिक संबंधों का आठवां दशक है, और संबंधों को नई ऊर्जा देने के लिए, दोनों सरकारों ने आठ स्तंभों पर सहयोग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, और ये स्तंभ हैं आर्थिक संबंध, आर्थिक सुरक्षा, गतिशीलता, पारिस्थितिक स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, स्वास्थ्य, दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान, और भारतीय राज्यों और जापानी प्रांतों के बीच साझेदारी।
अन्य दस्तावेज़ जिस पर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा, वह है सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणापत्र। यह भारत और जापान के लिए समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने हेतु एक सक्षमकारी ढांचा है। जैसा कि आप जानते हैं, पिछले कुछ वर्षों में हमारे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त घोषणापत्र अब इस सहयोग के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
इस विशेष दस्तावेज़ की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता सुरक्षा की व्यापक अवधारणा है, जो कि इसमें सन्निहित है, जिसमें साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-निरोध, रक्षा उद्योग, अनुसंधान और विकास पर सहयोग, तथा बहुपक्षीय समूहों में सुरक्षा मुद्दों पर घनिष्ठ सहयोग शामिल है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों की नई विशेषताओं में से एक दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच पहली बार संस्थागत वार्ता होगी, साथ ही दोनों देशों के संयुक्त स्टाफ के बीच अधिक से अधिक सहभागिता होगी।
तीसरे पहलू पर, जापान में भारतीय प्रवासी हैं, लेकिन इसका बेहतर लाभ कैसे उठाया जाए, यह दोनों सरकारों के बीच चर्चा का विषय रहा है। हमें लगता है कि इन चर्चाओं के परिणामों में से एक यह है कि दोनों पक्षों के बीच स्वाभाविक अनुपूरकता की खोज हुई है कि भारत इस समय क्या प्रदान कर सकता है और जापानी समाज, जापानी अर्थव्यवस्था, जापानी व्यवसायियों को इस समय क्या चाहिए।
जापान की अर्थव्यवस्था गतिशील है, लेकिन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में उसे श्रम की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। भारत में कुशल और अर्ध-कुशल कार्मिकों का एक बड़ा समूह है, जो जापान में इनमें से कुछ क्षेत्रों की आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं। और इसलिए, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों पक्षों ने आज मानव संसाधन आदान-प्रदान पर एक महत्त्वपूर्ण कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है, जो अगले पांच वर्षों में 500,000 लोगों के दो-तरफा आदान-प्रदान की मुख्य योजना निर्धारित करती है, जिसमें भारत से जापान के लिए 50,000 कुशल और अर्ध-कुशल कार्मिक शामिल हैं।
हमने अपनी अगली पीढ़ी की सुरक्षा और समृद्धि के लिए साझेदारी शीर्षक से एक संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया है जिसे आप इसे विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर देख सकते हैं। दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई जो शांतिपूर्ण, समृद्ध और लचीला हो। प्रधानमंत्री इशिबा ने दोहराया कि जापान सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ खड़ा है।
व्यापारिक संबंध हमारी साझेदारी के केंद्र में हैं। कई जापानी कंपनियों को भारत में ज़बरदस्त सफलता मिली है और प्रधानमंत्री ने आज दोपहर भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए इसे याद किया, और उन्होंने दोनों देशों के पारस्परिक लाभ तथा समृद्धि के लिए दोनों देशों को करीब लाने में निजी क्षेत्र व उद्योग की भूमिका की गहराई से सराहना की।
आप जापान द्वारा भारत के लिए कुछ समय पहले निर्धारित 5 ट्रिलियन येन के निवेश लक्ष्य से पहले से अवगत हैं। आज भारत में 10 ट्रिलियन जापानी येन निवेश या 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निजी निवेश का नया लक्ष्य निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।
कल आयोजित व्यापार मंच में निजी क्षेत्र ने भी कई समझौता ज्ञापनों और समझौतों की घोषणा की। मेरा मानना है कि पिछले शिखर सम्मेलन के बाद से पिछले दो वर्षों में ऑटोमोटिव, ऊर्जा, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में लगभग 150 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौता ज्ञापनों और व्यावसायिक साझेदारियों का संचयी मूल्य 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जो एक बार फिर हमारे संबंधों में व्यावसायिक स्तंभ के विश्वास को दर्शाता है।
आज के परिणामों के कुछ अन्य पहलुओं की बात करें, तो आपूर्ति शृंखला में लचीलापन एक ऐसा विषय है जिस पर दोनों देश कुछ समय से चर्चा कर रहे हैं। हम दोनों देशों के बीच यह समझ है कि हमें और अधिक सहयोग करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से हमारी अर्थव्यवस्था के रणनीतिक क्षेत्रों में। इसे ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों ने एक आर्थिक सुरक्षा पहल की शुरुआत की, जिसमें पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिन पर दोनों पक्ष मिल-जुलकर ध्यान केंद्रित करेंगे। ये क्षेत्र हैं सेमी कंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से दूरसंचार, और स्वच्छ ऊर्जा।
हमने एक आर्थिक सुरक्षा तथ्य पत्रक जारी किया है जिसे हमारी वेबसाइट पर भी देख सकते हैं, जिसमें जारी सहयोग के साथ-साथ नियोजित सहयोगों का भी विवरण है, जो कि हमारे दोनों देशों के लिए लचीली और विविध आपूर्ति शृंखला में योगदान देगा।
हम कृत्रिम मेधा के युग में जी रहे हैं, और इसलिए दोनों नेताओं ने माना कि एआई एक क्रांतिकारी तकनीक है जो हमारे समाज और अर्थव्यवस्थाओं को बदलने के लिए तैयार है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान-भारत कृत्रिम मेधा पहल का शुभारंभ किया, जो एआई पर सहयोग को मजबूत करेगा, विशेष रूप से बड़े भाषा मॉडल, डेटा केंद्र और एआई शासन जैसी चीज़ों पर। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री इशिबा को एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के लिए भी आमंत्रित किया, जिसकी मेज़बानी भारत फरवरी 2026 में कर रहा है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने आज स्वीकार किया कि हमें अपने राज्य और प्रांतों के बीच पनप रही साझेदारी का जश्न मनाने और उसे और प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता है, और उन्होंने ज़मीनी स्तर पर हमारे व्यापारिक संबंधों में और अधिक ऊर्जा भरने के लिए भारत-कंसाई व्यापार मंच और भारत-क्यूशू व्यापार मंच शुरू करने का निर्णय लिया। कल सुबह एक विशेष वार्ता के तहत प्रधानमंत्री मोदी टोक्यो में कई जापानी प्रांत के गवर्नरों को संबोधित करेंगे और उन्हें भारत के साथ साझेदारी विकसित करने के लिए आमंत्रित करेंगे।
दोनों पक्षों ने आज स्वच्छ ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिज, डिजिटल प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यावरण और राजनयिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। और यहां, समापन से पहले, मैं इनमें से चार समझौतों का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा। मुझे लगता है कि कुल संख्या एक दर्जन से अधिक है, लेकिन मैं चार समझौतों पर प्रकाश डालना चाहूंगा।
पहला, चंद्रयान-5 मिशन पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और जैक्सा (जेएएक्सए) के बीच ऐतिहासिक सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था है। आज हमारे नेताओं के सामने इस पर चर्चा हुई।
जैसा कि मैंने कहा कि महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र एक बड़ी प्राथमिकता है। जापान के पास उन्नत तकनीकें हैं और भारत के पास संसाधन। खनिज संसाधनों पर सहयोग ज्ञापन, जो आज संपन्न हुआ, इस रणनीतिक क्षेत्र में और अधिक सार्थक सहयोग को बढ़ावा देगा।
तीसरे, संयुक्त ऋण तंत्र भारत में जापानी निवेश को बढ़ावा देगा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने में योगदान देगा, साथ ही भारत के ऊर्जा परिवर्तन में भी मदद करेगा।
और अंत में, भारत-जापान डिजिटल साझेदारी 2.0 डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डिजिटल प्रतिभा और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास में हमारे सहयोग को मज़बूत करेगी। आप विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर इन समझौता ज्ञापनों की पूरी सूची देख सकते हैं।
दोनों नेताओं ने प्रमुख मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर हो रही प्रगति की भी सकारात्मक समीक्षा की और परियोजना की सफलता के लिए सहयोग जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप का भी शुभारंभ किया, जो बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी क्षेत्र, विशेष रूप से रेलवे, विमानन, बंदरगाह और शिपिंग में भारतीय प्रतिभा और जापानी प्रौद्योगिकी की ताकत का लाभ उठाएगी।
कल, जैसा कि वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान परंपरा है, दोनों प्रधानमंत्री एक साथ टोक्यो से बाहर यात्रा करेंगे। कल, वे मियागी प्रांत में सेंडाई का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री का भी दौरा करेंगे, जो दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माण कंपनियों में से एक है और प्रधानमंत्री इशिबा प्रधानमंत्री मोदी के लिए सेंडाई में ही दोपहर के भोज का आयोजन करेंगे, इससे पहले कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के अगले चरण के लिए रवाना हों।
अतः एक बार फिर से संक्षेप में, मैं समझता हूं कि इस यात्रा का उद्देश्य और महत्वाकांक्षा हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में उच्च स्तर की आकांक्षा और गति का संचार करना है। और सचमुच में यह यात्रा, यह शिखर सम्मेलन अधिक महत्वाकांक्षा, मज़बूत व स्पष्ट दृष्टिकोण और अत्यंत महत्त्वपूर्ण भारत-जापान साझेदारी की मज़बूती की पुनः पुष्टि के बारे में रहा है।
अब मैं यहां विश्राम दूंगा, तो चलिए आपके प्रश्नों की ओर बढ़ते हैं। धन्यवाद।
शुभेंदु घोष, डीडी न्यूज़: नमस्कार महोदय। मैं डीडी इंडिया से शुभेंदु घोष हूं। इसमें संयुक्त ऋण व्यवस्था का ज़िक्र किया गया है। क्या आप सरल शब्दों में बता सकते हैं कि इसका क्या अर्थ है? धन्यवाद।
अज्ञात वक्ता: नमस्ते महोदय। क्या आप कृपया बता सकते हैं कि 10 ट्रिलियन येन का जापानी निवेश किन क्षेत्रों में किया जाना है? और दूसरी बात, क्या चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता पर कोई चर्चा हुई, यह देखते हुए कि भारत इस वर्ष के अंत में शिखर सम्मेलन आयोजित करने वाला है और भारत और जापान दोनों ही इस समूह में प्रमुख भागीदार हैं। धन्यवाद।
सर्जना शर्मा, सन्मार्ग: नमस्कार महोदय। मैं सन्मार्ग समाचारपत्र से सर्जना शर्मा हूं। मेरा सवाल विदेश सचिव महोदय से है। महोदय, जलवायु परिवर्तन पर एक समझौता हुआ है और यह आज पूरी दुनिया के लिए बहुत चिंता का विषय है, तरह-तरह के बाढ़, गर्मी, तो इसके लिए भारत और जापान किस तरह के तंत्र विकसित करेंगे, ताकि इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटा जा सके।
इतागाकी, एएनआई: मेरा नाम इतागाकी है और मैं एएनआई संवाददाता हूं। मेरा एक सवाल है। बैठक की शुरुआत में और प्रेस वार्ता में भी श्री मोदी ने भारतीय राज्य और जापानी नगरपालिका सरकार के बीच मज़बूत संबंधों का उल्लेख किया। तो, यह अधिकांश जापानी मीडिया के लिए एक बड़ा आश्चर्य है और अब कल के बारे में बताइए... इस संबंध को श्री मोदी द्वारा मज़बूती दी जाएगी।
तो मुझे इस तरह के संबंध के बारे में जानकारी चाहिए, जो सरकार, जापानी नगरपालिका सरकार और भारतीय राज्य से शुरू होते हैं। संबंधों को मज़बूती प्रदान की जाएगी। और साथ ही, इसे मज़बूत करने के लिए कल के विवरण के बारे में जानकारी चाहिए । क्या आप इस पर कुछ बता सकते हैं, महोदय? बहुत बहुत धन्यवाद।
ओम अवस्थी, आकाशवाणी समाचार: नमस्कार महोदय। मैं आकाशवाणी समाचार से ओम अवस्थी हूं। महोदय, आपने जापान डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 की बात की। उसके तहत किस तरह के कदम उठाए जाएंगे, उस पर थोड़ी जानकारी दीजिए।
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: तो यह, संयुक्त ऋण व्यवस्था पर शुभेंदु का सवाल है।
मेरे विचार में शायद सर्जना आपका सवाल भी इसी को लेकर है क्योंकि जलवायु परिवर्तन को लेकर जो समझौता हुआ है वो यही संयुक्त ऋण व्यवस्था तंत्र का समझौता हुआ है।
इसलिए संयुक्त ऋण व्यवस्था अनिवार्य रूप से डीकार्बोनाइजिंग प्रौद्योगिकियों, उत्पादों, प्रणालियों और बुनियादी ढांचे के प्रसार को सुविधाजनक बनाने का एक साधन है, जो अनिवार्य रूप से उन जापानी कंपनियों को अनुमति देता है जो भारत में इन क्षेत्रों में निवेश करती हैं... यह निश्चित रूप से भारत में हमारे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को पूरा करने में हमारी मदद करेगा, और भारत में जापानी निवेश को भी बढ़ावा देगा। ऋण व्यवस्था तंत्र दोनों सरकारों को कार्बन कम करने के उपायों के लिए संयुक्त रूप से लेखांकन की अनुमति देता है। और यह जापानी संस्थाओं द्वारा भारत में हरित निवेश को बढ़ावा देता है, इसके लिए एक और अवसर उत्पन्न करता है।
जहां तक 10 ट्रिलियन येन के निवेश का सवाल है, देखिए, हमने इस निवेश के लिए कोई विशेष क्षेत्र निर्धारित या संबद्ध नहीं किया है। जैसा कि आप जानते हैं, निवेश आखिरकार निजी कंपनियों द्वारा किया जाएगा और निजी कंपनियां क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त स्थान तय करेंगी।
लेकिन यदि आप इस यात्रा के दौरान हमने जो काम किये हैं उस पर नज़र डालेंगे, जैसे कि मैंने जिन क्षेत्रों पर प्रकाश डाला है, जहां तक आर्थिक सुरक्षा पहल का संबंध है या संयुक्त दृष्टिकोण दस्तावेज़ के आठ स्तंभों पर, तो मुझे लगता है कि आपको इस बात का अच्छी तरह से अंदाज़ा लग गया होगा कि निवेश किस ओर निर्देशित होने की संभावना है।
क्वाड के मुद्दे पर, हां, दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि यह चर्चा के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच है और इस विशेष मुद्दे पर निकटता से संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
राज्य और प्रांत के बीच सहभागिता के प्रश्न के संबंध में... यह कुछ ऐसा है कि... हमारे पास अन्य देशों के साथ समान तंत्र हैं जहां संबंधों को या तो शहरों या प्रांतों के बीच समझौते के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाता है, निश्चित रूप से, राष्ट्रीय सरकारों के बीच। यह पर्यटन को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में मदद करता है और, सबसे बढ़कर, यह दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है। तो इसका मकसद यह है।
हमारे राजदूत भारत के राज्यों और जापान के प्रांतों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। अगर मैं गलत नहीं हूं, तो आप जापान के हर प्रांत के बारे में जानते ही होंगे। इसलिए वे इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
लेकिन, हां, कल का कार्यक्रम बहुत ही अनूठा कार्यक्रम होगा, जब प्रधानमंत्री को इन प्रांत के गवर्नरों के एक समूह को संबोधित करने का अवसर प्राप्त होगा। और मुझे यकीन है कि इस बातचीत से बहुत अच्छे विचार सामने आएंगे।
डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 अनिवार्य रूप से इस क्षेत्र में हमारी मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए है। इसमें डिजिटल क्षेत्र की प्रतिभाओं को शामिल किया जाएगा, साथ ही दोनों पक्षों के उन व्यावसायिक उद्यमों के बीच सहभागिता को बढ़ावा दिया जाएगा जो विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र पर केंद्रित हैं। हमने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है, जैसे कि आगे चलकर, एआई पर भारत-जापान संयुक्त दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में दोनों पक्षों के बीच एआई पर काफी सहयोग होने जा रहा है।
इसलिए, मैं कल्पना करता हूं कि डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 इनमें से बहुत सारे क्षेत्रों को भी कवर करेगी।
केंजी, जापान फॉरवर्ड: नमस्कार, मेरा नाम केंजी है और मैं जापान फॉरवर्ड से हूं। मेरा सवाल विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री से है। तो आज दोपहर संयुक्त सुरक्षा घोषणापत्र में क्वाड गठबंधन को और मज़बूत करने का उल्लेख किया गया है। और आपने यह भी बताया कि किस प्रकार दोनों देशों ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की पुष्टि की। आपके विचार में वॉशिंगटन और भारत के साथ बढ़ते व्यापार तनाव का पूर्वी एशिया में इस प्रकार की सुरक्षा संरचना पर क्या प्रभाव पड़ेगा? और, भारत बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच अपने संबंधों को किस प्रकार संतुलित करना चाहता है?
अरुण, डीडी न्यूज़: नमस्ते महोदय, मैं डीडी न्यूज़ से अरुण हूं। सवाल मेरा यह है … क्या जब दोनों नेता मिले थे, तो अमेरिकी टैरिफ को लेकर कोई ज़िक्र हुआ था, क्योंकि जब आपूर्ति शृंखला में व्यवधान की बात करते हैं। और एक तरह से पूरी दुनिया इससे प्रभावित है, जो टैरिफ लगाए गए हैं। तो क्या इसका ज़िक्र हुआ दोनों नेताओं के बीच में महोदय?
इवाता, संकेई शिंबुन: मैं जापानी अखबार संकेई शिंबुन से इवाता हूं। क्या प्रधानमंत्रियों ने अमेरिकी टैरिफ मुद्दे पर चर्चा की?
पूनम, आईएनएस मीडिया: महोदय, मेरा नाम पूनम है और मैं आईएनएस मीडिया से हूं। महोदय मेरा सवाल भी टैरिफ को लेकर है कि क्या कोई बातचीत हुई है? क्योंकि जापानी वार्ताकार की यात्रा भी रद्द कर दी गई थी तो क्या वह भारत के साथ है?
रजनीश, एएनआई: महोदय, मैं एएनआई से रजनीश हूं। तो फिर जापान से किस प्रकार की न्यायोचित तकनीकी सहायता की अपेक्षा की जा सकती है? क्या आप इस बारे में विस्तार से बता सकते हैं?
श्री विक्रम मिस्री, विदेश सचिव: तो, मुझे लगता है कि पहला सवाल मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा पर था और, फिर मुझे लगता है कि आपने उस प्रश्न में कई अन्य मुद्दे भी उठाए थे। जहां तक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा का सवाल है, स्पष्ट रूप से इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संबंधों को आगे बढ़ाना है, ताकि दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संपर्क चैनलों के माध्यम से एक-दूसरे की रक्षा तत्परता और क्षमताओं में योगदान दिया जा सके।
समुद्री सुरक्षा में भी हमारे साझा लक्ष्य हैं। दोनों पक्षों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग का एक बहुत मज़बूत कार्यक्रम है। हम पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए भी मिल-जुलकर काम करना चाहते हैं और दोनों क्षेत्रों में विकसित हो रहे सुरक्षा खतरों पर विचारों के आदान-प्रदान में अधिक निकटता से शामिल होना चाहते हैं।
अब, संयुक्त घोषणा स्पष्ट रूप से इन सभी चर्चाओं के की दिशा में एक संस्थागत ढांचा तैयार करने में मदद करेगी और हम जापान के साथ इस विशेष जुड़ाव की आशा करते हैं।
आपने तनाव और अन्य संघर्षों का उल्लेख किया है। मुझे लगता है कि इस समय जापान के साथ हमारी चर्चा हमारे द्विपक्षीय मुद्दों पर हो रही है। हम किसी तीसरे देश में आपस में किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं कर रहे थे और इसलिए, मैं दो अन्य राजधानियों के बीच के मुद्दों के प्रभाव के बारे में बात करने की स्थिति में नहीं हूं क्योंकि इस मुद्दे पर बात करने के लिए प्रतिनिधि यहां उपस्थित नहीं हैं। जैसा कि मैंने कहा कि आज की चर्चा मुख्यतः भारत-जापान संबंधों के व्यापक दृष्टिकोण तथा हम साथ मिलकर क्या कर रहे हैं, इस पर केंद्रित थी। स्वाभाविक रूप से, दुनिया के बाकी हिस्सों में जो कुछ हो रहा है, उस पर चर्चा होती है। लेकिन आज पूरी तरह से हमारे द्विपक्षीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मुझे लगता है कि अन्य सभी प्रश्न वास्तव में टैरिफ के मुद्दे से संबंधित हैं, और क्या हम पर लगाए गए टैरिफ पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा की गई। मैं आपके साथ साझा कर सकता हूं कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने वैश्विक स्थिति पर अपने दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान किया, इन कदमों का प्रभाव जो इस पर हुआ था और यह कि किस तरह से ये भारत और जापान के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए आधार और तर्क तैयार करते हैं, विशेष रूप से व्यापार, अर्थव्यवस्था, आपूर्ति शृंखला के क्षेत्र में, उन्हें अधिक लचीला बनाने, हमारे संसाधन आधारों और आपूर्ति शृंखला में विविधता लाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। तो, आज की बातचीत का मुख्य विषय यही था।
जहां तक चंद्रयान-5 का सवाल है, चंद्रयान-5 को लूपेक्स मिशन, यानी चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण के नाम से भी जाना जाता है, यह एक बहुत ही खास मिशन है। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की सफल लैंडिंग पर आधारित होगा और, विचार यह है कि उन संकेतों की एक साथ खोज की जाए जो चंद्रमा पर मानव निवास का समर्थन कर सकते हैं। लेकिन, हमारा अंतरिक्ष सहयोग केवल इस एक अभियान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हमारी शक्तियों का समन्वय करके अन्य ग्रहों का भी एक साथ अन्वेषण करने की योजना भी शामिल है और चंद्रयान-5 लूपेक्स मिशन भारत के चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण में एक प्रमुख अल्पकालिक मील का पत्थर साबित होगा, जिसमें संयोगवश, वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के चंद्रमा पर उतरने की परिकल्पना भी की गई है।
तो, आज कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर से आने वाले समय में इस विशेष मुद्दे पर तेज़ प्रगति होगी। धन्यवाद।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो इसके साथ ही देवियों और सज्जनों, हम इस प्रेस वार्ता को समाप्त करते हैं। आपकी उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
अरिगातो।
टोक्यो
29 अगस्त, 2025