श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: देवियो और सज्जनो, नमस्कार। मैं राष्ट्रपति जी की आगामी अंगोला और बोत्सवाना यात्रा पर सचिव (ईआर) श्री सुधाकर दलेला द्वारा रखी गई इस विशेष प्रेस वार्ता में आप सभी का स्वागत करता हूं। यह यात्रा 8 से 13 नवम्बर तक होगी।
मैं आपको यह भी बताना चाहता हूं कि यह सचिव (ईआर) की पहली प्रेस वार्ता है। इसलिए यह यात्रा महत्त्वपूर्ण है और ऐसे में यह और भी खास बन जाती है। हमारे साथ राष्ट्रपति जी की प्रेस सचिव श्रीमती मनीषा वर्मा भी हैं; साथ ही अपर सचिव श्री सेवला नाइक मुडे भी हैं, जो मध्य और पश्चिमी अफ्रीका की देखरेख करते हैं; और संयुक्त सचिव श्री जनेश कैन भी हैं, जो कि पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका का कामकाज संभालते हैं।
इसके साथ ही, मैं सचिव (ईआर) को आगामी राजकीय यात्रा पर उनके प्रारंभिक वक्तव्य के लिए आमंत्रित करता हूं। महोदय अपनी बात रखिए।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): बहुत-बहुत धन्यवाद रणधीर, और मीडिया के सभी साथियों को नमस्कार। जैसा कि रणधीर ने बताया, माननीय राष्ट्रपति 8 से 13 नवम्बर तक अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा पर रहेंगी। यह किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की अंगोला और बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा होगी।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, अफ्रीका के साथ भारत का जुड़ाव सभी प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ रहा है, राजनीति से लेकर व्यापार और आर्थिक से लेकर विकास साझेदारी और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क तक। राष्ट्राध्यक्ष, शासनाध्यक्ष, उपराष्ट्रपति, विदेश मंत्री के स्तर पर अनेक उच्च-स्तरीय राजनीतिक बैठकें हुई हैं... इन बैठकों ने हमें अफ्रीकी क्षेत्र के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को गहरा करने में मदद की है।
अफ्रीका के साथ भारत का जुड़ाव माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 2018 में युगांडा की संसद को संबोधित करते हुए बताए गए 10 सिद्धांतों द्वारा निर्देशित है। अफ्रीका के साथ हमारे बढ़ते संबंध अफ्रीकी महाद्वीप के विकास एजेंडे के अनुरूप हैं, जो कि उनके एजेंडा 2063 दस्तावेज़ में प्रतिबिंबित होता है। भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन अफ्रीकी क्षेत्र के साथ संवाद और सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है।
आप जानते हैं कि हाल के वर्षों में अफ्रीका में 17 नए मिशन खुलने के साथ भारत की राजनयिक उपस्थिति में काफी विस्तार हुआ है। आप यह भी जानते हैं कि 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ही हमने अफ्रीकी संघ का जी-20 के नए स्थायी सदस्य के रूप में स्वागत किया था।
अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी, ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझेदारी को मज़बूत करने की सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप भी है। अफ्रीकी क्षेत्र के साथ हमारा व्यापार लगभग 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच रहा है। अफ्रीकी क्षेत्र के साथ हमारी मज़बूत विकास साझेदारी है। अफ्रीकी क्षेत्र में तीन मिलियन से अधिक प्रवासी भारतीय सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक सेतु के रूप में काम कर रहे हैं।
माननीय राष्ट्रपति जी की यात्रा को अफ्रीकी क्षेत्र के साथ साझेदारी बढ़ाने में भारत सरकार द्वारा दी गई उच्च प्राथमिकता के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
माननीय राष्ट्रपति जी अपने अंगोला समकक्ष के निमंत्रण पर 8 से 11 नवम्बर तक अंगोला की यात्रा पर रहेंगी। आपको यह भी याद होगा कि इस वर्ष मई में अंगोला के राष्ट्रपति ने भारत की सफल यात्रा की थी। उन्होंने माननीय राष्ट्रपति को अंगोला आने तथा अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ समारोह में भाग लेने का निमंत्रण दिया। जैसा कि आप में से कई लोग जानते होंगे, भारत ने अंगोला के स्वतंत्रता संग्राम का लगातार समर्थन किया था। इसके अलावा, भारत और अंगोला इस वर्ष राजनयिक संबंध की स्थापना की 40वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। अंगोला के राष्ट्रपति वर्तमान में अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष हैं। अतः इन सभी कारणों से माननीय राष्ट्रपति जी की यात्रा महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
अपनी यात्रा के दौरान, माननीय राष्ट्रपति अंगोला के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। वे 11 नवम्बर को अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल होंगी। माननीय राष्ट्रपति का अंगोला की संसद को संबोधित करने और अंगोला के भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है। भारत और अंगोला के बीच मैत्री और सहयोग के बहुत घनिष्ठ संबंध हैं, जो कि विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं। अंगोला के साथ हमारी ऊर्जा साझेदारी जीवंत है।
इस वर्ष अंगोला के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से प्राप्त गति को आगे बढ़ाते हुए, माननीय राष्ट्रपति जी की राजकीय यात्रा द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा करने तथा कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना विकास, रक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का विस्तार करने का अवसर प्रदान करेगी।
यात्रा के दूसरे चरण में, माननीय राष्ट्रपति जी बोत्सवाना के राष्ट्रपति महामहिम श्री ड्यूमा गिदोन बोको के निमंत्रण पर 11 से 13 नवम्बर तक बोत्सवाना की यात्रा पर रहेंगी।
यह राजकीय यात्रा बोत्सवाना के साथ भारत के दीर्घकालिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। इस यात्रा के दौरान, माननीय राष्ट्रपति जी अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। दोनों नेता व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए नए अवसरों पर चर्चा करेंगे और उन्हें तलाशेंगे।
बोत्सवाना में भी, माननीय राष्ट्रपति का बोत्सवाना की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करने और सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्त्व के स्थलों का दौरा करने का कार्यक्रम है। माननीय राष्ट्रपति जी की यात्रा के दौरान बोत्सवाना के कई गणमान्य व्यक्ति उनसे मुलाकात करेंगे।
मैं यह भी कहना चाहूंगा कि भारत और बोत्सवाना अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे। बोत्सवाना के विज़न 2036 दस्तावेज़ में इसकी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और उच्च आय वाला समाज बनने के प्रयासों की रूपरेखा दी गई है। इस संदर्भ में यह यात्रा हमें उनकी प्राथमिकताओं को समझने का अवसर प्रदान करेगी, तथा इस बात पर चर्चा करेगी कि भारतीय व्यापार समुदाय किस प्रकार चिन्हित क्षेत्रों में अपने बोत्सवाना समकक्ष के साथ साझेदारी कर सकता है। हम प्रोजेक्ट चीता के भाग के रूप में भारत में चीतों के स्थानांतरण के लिए बोत्सवाना के साथ भी बातचीत कर रहे हैं, और इस संबंध में अच्छी प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं।
अंगोला और बोत्सवाना दोनों में हमारा एक जीवंत भारतीय समुदाय है। माननीय राष्ट्रपति जी लुआंडा और गबोरोन में उनसे बातचीत करेंगी। इसलिए माननीय राष्ट्रपति जी की आगामी यात्रा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और हम समझौता ज्ञापनों या अन्य घोषणाओं के रूप में महत्त्वपूर्ण परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं।
हमें विश्वास है कि माननीय राष्ट्रपति जी की यात्रा से अंगोला और बोत्सवाना के साथ भारत के दीर्घकालिक सहयोगात्मक संबंध और मज़बूत होंगे तथा सहयोग और हमारी साझेदारी के विस्तार के लिए नए रास्ते खुलेंगे। जैसा कि मैंने पहले कहा, यह अफ्रीकी महाद्वीप के साथ अपनी बहुमुखी साझेदारी को और मज़बूत करने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
इसी के साथ, अगर आपके कोई प्रश्न हैं, तो मुझे उनका उत्तर में खुशी होगी। धन्यवाद।
श्री रणधीर जयसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद। इसी के साथ, हम आपके प्रश्नों की ओर बढ़ते हैं।
हुमा सिद्दीकी, स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल: महोदय मैं स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल से हुमा सिद्दीकी हूं। महोदय, मेरे दो प्रश्न हैं। अंगोला अगले वर्ष अफ्रीकी संघ की अध्यक्षता ग्रहण करने जा रहा है। तो, जब आप अंगोला में होंगे तो ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा कितनी महत्त्वपूर्ण होगी? और क्या ऊर्जा क्षेत्र में किसी समझौते पर हस्ताक्षर होंगे?
और मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि क्या रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में चर्चा के लिए कोई योजना है?
साहिल पांडे, एएनआई: महोदय, मैं एएनआई न्यूज़ एजेंसी से साहिल पांडे हूं। महोदय, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा या डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों में कौन से द्विपक्षीय समझौतों, समझौता ज्ञापनों या संयुक्त घोषणाओं पर हस्ताक्षर करने की योजना है?
केशव पद्मनाभन, द प्रिंट: नमस्कार महोदय, मैं द प्रिंट से केशव पद्मनाभन हूं। मेरा पहला प्रश्न अंगोला के संबंध में है। जब इस वर्ष के प्रारम्भ में अंगोला के राष्ट्रपति आए थे, तो मुझे लगता है कि रक्षा आधुनिकीकरण के लिए 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता दी गई थी। तो, मैं बस यह जानना चाहता था कि वह कहां है और क्या इस पर कोई चर्चा होगी और बोत्सवाना के संबंध में, आपने रक्षा के क्षेत्र में सहयोग के नए क्षेत्रों का भी उल्लेख किया।
तो, मैं बस यह जानना चाहता था कि क्या चर्चा की जाएगी या विशेष रूप से बोत्सवाना के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग के संबंध में एजेंडे में क्या है। धन्यवाद।
ऋषभ, टाइम्स नाउ: नमस्ते महोदय, मैं टाइम्स नाउ से ऋषभ हूं। महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि जब हम भारत और अंगोला, या भारत और बोत्सवाना के बीच रक्षा की बात करते हैं, तो क्या हम उनके रक्षा बलों के लिए उनके रंगरूटों को प्रशिक्षित करने पर भी विचार कर रहे हैं? क्योंकि ऐसी चर्चा थी कि कुछ अफ्रीकी देश अपने रंगरूटों को भारतीय अकादमियों में प्रशिक्षण देने में रुचि रखते हैं।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): इन सभी गहन प्रश्नों के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं अंगोला और अफ्रीकी संघ के लिए अंगोला के राष्ट्रपति की अध्यक्षता से संबंधित प्रश्न से शुरुआत करना चाहूंगा।
इसलिए, उन्होंने इस वर्ष फरवरी में अध्यक्ष पद ग्रहण किया और वे अगले फरवरी तक अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे और जैसा कि मैंने आपको बताया, हम भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के ढांचे में अफ्रीकी संघ के साथ बहुत निकटता से काम करते हैं। और हम एयू के अध्यक्ष के साथ सहयोग पर चर्चा करना चाहेंगे और देखना चाहेंगे कि हम भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन की अगली बैठक को कैसे सफल बना सकते हैं। हम अफ्रीकी संघ के सहयोगियों के संपर्क में हैं और उनके साथ चर्चा कर रहे हैं। हम पहले से ही योजना बना रहे हैं कि हम कैसे इसकी संरचना तैयार करेंगे, तारीखें क्या होंगी। हमें निश्चित रूप से अफ्रीकी संघ से परामर्श करना होगा, क्योंकि अनेक नेता भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के लिए यात्रा करेंगे।
आपने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा का उल्लेख किया। मुझे लगता है कि दोनों ही क्षेत्र सहयोग की दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण हैं। इस वर्ष जब अंगोला के माननीय राष्ट्रपति भारत आए, तो उन्होंने हमारे नेतृत्त्व के साथ इन दोनों पहलुओं पर चर्चा की। बेशक, अंगोला के साथ हमारी पहले से ही काफी जीवंत ऊर्जा साझेदारी है। और अंगोला के साथ हमारा लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार है, जिसमें से मैं कहूंगा कि 80% ऊर्जा क्षेत्र का है। इसलिए, ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अंगोला के साथ हमारी साझेदारी बहुत महत्त्वपूर्ण है। और हम ऊर्जा क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और अधिक गति और गहराई प्रदान करने की संभावना तलाशना चाहेंगे।
अंगोला में कृषि योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा है और वे इस बात के लिए बहुत उत्सुक हैं कि कृषि के क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञता और भारतीय प्रौद्योगिकी का उपयोग अंगोला द्वारा किया जा सके। इसलिए, हम अंगोला पक्ष के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। और यह यात्रा हमें उन पहलुओं पर भी चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी।
अंगोला के साथ ऋण सुविधा/रक्षा सहयोग पर दो प्रश्न थे। आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि हमने अंगोला के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए 200 मिलियन की ऋण सहायता देने की अपनी तत्परता की घोषणा की है। हम अब ऋण सीमा समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अंगोला के साथ बातचीत कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि हम रक्षा के इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में, उनकी आवश्यकताओं के अनुसार, अंगोला के साथ साझेदारी कर पाएंगे।
रक्षा प्रशिक्षण के संबंध में, मैं यह बताना चाहूंगा कि हम अंगोला और बोत्सवाना सहित ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों के अनेक अधिकारियों को प्रशिक्षण देते हैं। दरअसल, बोत्सवाना के साथ हमारी रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी रही है। हमारी भारतीय प्रशिक्षण टीम तीन दशकों तक बोत्सवाना में रही और बोत्सवाना रक्षा बलों के साथ मिलकर काम करती रही। और, जैसा कि हम बात कर रहे हैं, हमारे पास हर साल आईटीईसी कार्यक्रम के भाग के रूप में बोत्सवाना से बड़ी संख्या में अधिकारी आते हैं, नागरिक और रक्षा दोनों के लिए। इसलिए हम अंगोला और बोत्सवाना दोनों के साथ रक्षा क्षेत्र में अपना सहयोग जारी रखना चाहेंगे।
आपने अंतरिक्ष सहयोग का भी ज़िक्र किया और मुझे बहुत ख़ुशी है कि आपने यह मुद्दा उठाया। दरअसल, अंगोला के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान भी इस पहलू पर चर्चा हुई थी। और उन्होंने विभिन्न विकास कार्यक्रमों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग में रुचि दिखाई थी। हम माननीय राष्ट्रपति जी की अंगोला यात्रा के दौरान इस बातचीत को आगे बढ़ाना चाहेंगे।
एक प्रश्न यह था कि हम द्विपक्षीय समझौता ज्ञापनों के संदर्भ में क्या हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। जैसा कि मैंने बताया, हम स्वास्थ्य, मत्स्य पालन और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में समझौता ज्ञापनों पर चर्चा कर रहे हैं। और हमें आशा है कि माननीय राष्ट्रपति जी की यात्रा से पहले हम इन समझौता ज्ञापनों को मूर्त रूप दे सकेंगे। कुछ घोषणाएं भी होंगी। जैसा कि आप जानते हैं, हम अपने साझेदार देशों से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन या सीडीआरआई या वैश्विक जैव ईंधन अलायंस या अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस जैसे क्षेत्रीय ढांचे में शामिल होने का अनुरोध करते रहे हैं। और हमें पूरी उम्मीद है कि माननीय राष्ट्रपति जी की यात्रा के दौरान अंगोला और बोत्सवाना इन क्षेत्रीय संदर्भों में हमारे साथ जुड़ने और साझेदारी करने के हमारे अनुरोध पर कुछ सकारात्मक प्रगति का संकेत देंगे।
मुझे लगता है कि मैंने अधिकांश प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास कर लिया है। अगर मुझसे कुछ छूट गया हो, तो मुझे दोबारा उसका उत्तर देने में खुशी होगी। धन्यवाद।
सृंजॉय: महोदय आपने चीता की बात है। कितने चीते आने की उम्मीद है और कब तक? इसने भारत में बहुत रुचि और आशावाद पैदा किया है।
ऋषिकेश, पीटीआई: मैं पीटीआई से ऋषिकेश हूं। तो क्या भारत अंगोला से अपने तेल आयात को बढ़ाने की संभावना तलाश रहा है? और जैसा कि हमने अतीत में देखा है, चीन ने तेल आयात के बदले अंगोला को भारी मात्रा में ऋण देने की पेशकश की है। क्या भारत भी इसी रास्ते पर चलेगा, या क्या भारत अंगोला में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किसी प्रकार का ऋण देने की पेशकश कर रहा है?
येशी सेली, बिज़नेस इंडिया: मैं बिज़नेस इंडिया से येशी सेली हूं। मेरा सवाल भी ऋषि की तरह ही है। आपने अभी बताया कि अंगोला का 80% निर्यात ऊर्जा निर्यात है, ठीक है? तो क्या यह मुख्य रूप से कच्चा तेल या एलएनजी है, क्योंकि वे दोनों का निर्यात करते हैं और साथ ही आप परिष्कृत उत्पाद भी वापस भेज रहे हैं।
अब रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंधों के मद्देनज़र, क्या हम अंगोला से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने जा रहे हैं? क्या आपको पता है कि हम अभी अंगोला से कितने प्रतिशत कच्चा तेल आयात करते हैं?
विजय लक्ष्मी: मान्यवर, आपने एक बताया कि रक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर इसके अलावा किन क्षेत्रों में साझेदारी इस पूरे शिखर सम्मेलन से आ सकती है और डिजिटल नवाचार एक क्षेत्र है उसको लेकर भी क्या किसी तरह की कोई घोषणा या कुछ यात्रा के बाद हमारे सामने आ सकते हैं?
अखिलेश सुमन, दूरदर्शन: महोदय, मैं दूरदर्शन से अखिलेश सुमन हूं। क्या आप हमें बता सकते हैं कि राष्ट्रपति के साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल हैं? और कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बोत्सवाना और अंगोला में बहुत सारे दुर्लभ खनिज मौजूद हैं। तो क्या आप इसके बारे में भी बात करेंगे?
केशव पद्मनाभन, द प्रिंट: धन्यवाद महोदय, मैं द प्रिंट से केशव हूं। मैं बस यह जानना चाहता था कि अंगोला लोबिटो कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसकी घोषणा आईएमईसी के अलावा जी-20 में की गई थी और मुझे पता है कि यह मुख्य रूप से यूरोपीय संघ और अमेरिका है। लेकिन मैं यह जानना चाहता था कि क्या भारत के अफ्रीका में, विशेष रूप से अंगोला के साथ, इस प्रकार की परिवहन संपर्क परियोजनाओं में शामिल होने या भाग लेने पर कोई चर्चा हुई है? धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): इन प्रश्नों के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं उन सभी प्रश्नों का उत्तर उसी क्रम में देने का प्रयास करूंगा जिस क्रम में वे उठाए गए थे।
सबसे पहले चीते के बारे में। जैसा कि मैंने बताया, हम संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के साथ पहले से ही काम कर रहे है। इसलिए, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के अलावा, हम कुछ समय से बोत्सवाना से बात कर रहे हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में हमारे साथ काम करने की अपनी तत्परता का संकेत दिया है। इसलिए, मैं आपको कोई संख्या नहीं बताना चाहूंगा, लेकिन निश्चित रूप से यह एक अच्छी संख्या होगी जिसकी हम आशा कर रहे हैं, और मुझे यह भी लगता है कि वे बहुत जल्द भारत आएंगे।
अब अगला प्रश्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सामान्यतः ऋण-सूची के बारे में था। आप सही कह रहे हैं कि हमारे पास... हमारी विकास साझेदारी के एक हिस्से के रूप में, हम साझेदार देशों को ऋण सहायता या कभी-कभी अनुदान सहायता के माध्यम से भी सहायता प्रदान करते हैं। और, यदि बुनियादी ढांचे के विकास और ऋण सहायता के क्षेत्र में अंगोला या बोत्सवाना से कोई अनुरोध आता है, तो हमें उन अनुरोधों पर विचार करने में बहुत खुशी होगी। फिलहाल, इस क्षेत्र में उनकी ओर से कोई अनुरोध नहीं आया है, सिवाय रक्षा ऋण सहायता के, जिसकी घोषणा हम पहले ही कर चुके हैं।
अंगोला से आयात के संदर्भ में, हम अभी कच्चा तेल आयात करते हैं और एलएनजी भी आयात करते हैं, आप बिल्कुल सही हैं। जैसा कि मैंने आपको बताया, पिछले वर्ष हमारा आयात 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। और हम अंगोला के साथ इस बात पर चर्चा करना चाहेंगे कि हम आगे चलकर अपनी साझेदारी को किस प्रकार मज़बूत कर सकते हैं, क्योंकि अंगोला अफ्रीका से ऊर्जा का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। इसलिए यह हमारे लिए सहयोग का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। जैसा कि आपने बताया, हम अंगोला को परिष्कृत उत्पादों का निर्यात भी करते हैं।
डीपीआई और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में, हां, हम डिजिटल नवाचार, डिजिटल स्टैक, डिजिटल प्रौद्योगिकी, डीपीआई के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। अंगोला और बोत्सवाना दोनों में ही इसमें काफी रुचि है, और मुझे लगता है कि इस यात्रा से हमें इन दोनों साझेदार देशों की आवश्यकताओं का स्पष्ट अंदाज़ा हो जाएगा, और हमें इन दोनों क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को मज़बूत करने में बहुत खुशी होगी।
रेल नेटवर्क के संदर्भ में... रेल संपर्क और आपके द्वारा उल्लिखित गलियारे के बारे में एक प्रश्न था। बेशक, अंगोला में एक बड़ा रेल गलियारा है, और मुझे लगता है कि वे नामीबिया और डीआरसी की ओर अधिक संपर्क विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। और वे रेल अवसंरचना के क्षेत्र में साझेदारी की संभावना पर विचार करने का प्रयास कर रहे हैं।
अतः, पुनः, हमें अंगोला से कोई स्पष्ट ठोस प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन, हो सकता है कि इस यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हो और हमें इस दिशा में संभावनाओं पर बातचीत करके बहुत खुशी होगी। हमारे पास रेल क्षेत्र में निश्चित रूप से ज़बरदस्त क्षमता है, और हम अफ्रीका में मोज़ाम्बिक और अन्य देशों के साथ रेल क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
खनिज संसाधन, कुछ सहयोगियों ने उल्लेख किया, निश्चित रूप से हां। हम निश्चित रूप से, अपने व्यापक व्यापार और आर्थिक सहयोग के हिस्से के रूप में... महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अफ्रीका के साझेदार देशों के साथ काम कर रहे हैं। भारत में हमारा एक राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन है और हम उनके साथ मिल-जुलकर काम करना चाहेंगे तथा यह देखना चाहेंगे कि हम इस क्षेत्र में संयुक्त उद्यमों के माध्यम से, कुछ खनिजों का एक साथ प्रसंस्करण करके तथा विद्युत वाहनों और सहयोग के अन्य क्षेत्रों सहित स्थायित्व के लिए अपनी आवश्यकताओं को पूरा करके किस प्रकार काम कर सकते हैं। धन्यवाद।
हुमा सिद्दीकी, स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल: महोदय मैं स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल से हुमा सिद्दीकी, हूं। तो क्या भारत से साइबर अपराधों से निपटने में अपना समर्थन या किसी प्रकार का सहयोग देने की उम्मीद है?
कलोल भट्टाचार्य, द हिन्दू: महोदय मैं द हिन्दू से कलोल भट्टाचार्य हूं। महोदय, राष्ट्रपति ऐसे समय में अफ्रीका की यात्रा कर रही हैं जब पास के सूडान में बहुत बड़ा गृहयुद्ध और संघर्ष चल रहा है। तो क्या अफ्रीका में व्याप्त इन संघर्षों के बारे में कोई संदेश है?
हाल ही में, नाइजीरिया ने वहां ईसाई समुदाय पर हमलों के बारे में राष्ट्रपति ट्रम्प की टिप्पणियों के कारण बहुत ध्यान आकर्षित किया है। तो, चूंकि राष्ट्रपति जा रही हैं, तो क्या महाद्वीप में आम सहमति बनाने और इन संघर्षों को समाप्त करने का भी कोई संदेश होगा, महोदय?
संतोष, नव भारत: नमस्कार महोदय, मैं नव भारत से संतोष हूं। महोदय मुझे यह जानना था कि आईटीईसी में उनका क्या अभी कोटा है दोनों देशों का और पिछली बार उनका यह था कि वे कोटा बढ़ाने की भी बात कर रहे थे। तो क्या उस पर भी कोई बात होगी? धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): इन अत्यंत रोचक प्रश्नों के लिए एक बार फिर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आईटीईसी से जुड़े अंतिम प्रश्न के संबंध में। जैसा कि मैंने आपको बताया, क्षमता निर्माण के लिए बोत्सवाना के साथ हमारी एक बहुत ही मज़बूत साझेदारी है। मैंने आपको बताया कि पिछले 10 वर्षों में लगभग 750 पेशेवर, छात्र और सिविल सेवक रक्षा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए भारत आए हैं।
और, यदि कुछ क्षेत्रों में अधिक स्लॉट की आवश्यकता होगी, तो हमें ग्लोबल साउथ के अपने साझेदार देशों के लिए भी एक अनुकूलित कार्यक्रम तैयार करने में बहुत खुशी होगी। इसलिए, क्षमता निर्माण में आईटीईसी, मुझे लगता है कि हम बढ़ी हुई साझेदारी के किसी भी अनुरोध का बहुत समर्थन करेंगे।
साइबर सुरक्षा क्षेत्र के संबंध में, जैसा कि मैंने कहा, ग्लोबल साउथ के साथ संबंध और साझेदारी बनाने और उसे बढ़ावा देने के कार्यक्रम के भाग के रूप में, हमें साइबर सुरक्षा के इस क्षेत्र में भी काम करने में बहुत खुशी होगी। इस क्षेत्र पर अंगोला और बोत्सवाना के साथ हमारी अभी तक बहुत विस्तृत चर्चा नहीं हुई है, लेकिन आगे चलकर, हम अपने अफ्रीकी साझेदारों के साथ भी इन क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए तैयार रहेंगे।
मैं समझता हूं कि इस यात्रा का संदेश बहुत स्पष्ट है कि अफ्रीका के साथ हमारी बहुत मज़बूत, बहुत बहुआयामी साझेदारी है। हम अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ मिल-जुलकर काम करना और अपनी साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं। हम अपने विकास अनुभव को अफ्रीकी मित्रों, अफ्रीकी साझेदारों के साथ साझा करना चाहेंगे, और हम विकास यात्रा में भागीदार बनना चाहेंगे।
इसलिए, मैं समझता हूं कि हमारा संदेश बहुत स्पष्ट है कि हम उस गति से आगे बढ़ना चाहते हैं जिससे हम अपनी साझेदारी को मज़बूत कर सकें तथा हम अपने व्यापार और आर्थिक संबंधों को मज़बूत कर सकें। हम अपनी राजनीतिक भागीदारी को बेहतर बना सकते हैं, और आईएएफएस के ढांचे के भीतर, सभी क्षेत्रों में, हम अफ्रीकी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे। इसलिए हमारा संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि हम अफ्रीकी क्षेत्र के साथ साझेदारी करना और अपनी साझेदारी को गहरा करना चाहते हैं।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद। इसी के साथ, देवियों और सज्जनों हम आज की इस प्रेस वार्ता को समाप्त करते हैं।
यात्रा के दौरान कई एक प्रेस वार्ताएं होंगी और उस प्रेस वार्ता के माध्यम से आप लोगों को अवगत करवाया जाएगा कि क्या-क्या चीज़ें हो रही है, तो साथ जुड़े रहिए हमारे, बहुत-बहुत धन्यवाद।
नई दिल्ली
06 नवम्बर, 2025