मैं 11-12 नवम्बर 2025 तक भूटान के दौरे पर रहूंगा।
भूटान के लोगों के साथ महामहिम चतुर्थ नरेश की 70वीं जयंती मनाना मेरे लिए सम्मान की बात होगी।
भूटान में वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के आयोजन के दौरान भारत से भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी हमारे दोनों देशों के गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाती है।
यह यात्रा पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना के उद्घाटन के साथ हमारी सफल ऊर्जा साझेदारी में एक और महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
मैं महामहिम भूटान नरेश, महामहिम चतुर्थ नरेश और प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मिलने के लिए उत्सुक हूं। मुझे विश्वास है कि मेरी यह यात्रा हमारी मित्रता के बंधन को और प्रगाढ़ करेगी और साझा प्रगति एवं समृद्धि की दिशा में हमारे प्रयासों को और सशक्त बनाएगी।
भारत और भूटान के बीच मैत्री और सहयोग के अनुकरणीय संबंध हैं, जो कि गहरे आपसी विश्वास, समझ और सद्भावना पर आधारित हैं। हमारी साझेदारी हमारी "पड़ोसी प्रथम” नीति का एक प्रमुख स्तंभ है और यह पड़ोसी देशों के बीच आदर्श मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
नई दिल्ली
11 नवम्बर, 2025