आज इस सम्मानित सदन को संबोधित करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। मैं आपकी आभारी हूं कि आपने मुझे यह सम्मान प्रदान किया। बोत्सवाना गणराज्य की नेशनल असेंबली आपके गौरवशाली राष्ट्र के लोकतंत्र का मंदिर है। मैं आपके लिए भारत सरकार और 1.4 बिलियन भारतीयों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं लेकर आई हूं।
आज गैबरोन के जीवंत शहर में उपस्थित होकर मैं अत्यंत प्रसन्न हूं। बोत्सवाना की जनता और सरकार द्वारा मुझे और मेरे प्रतिनिधिमंडल को दिए गए आतिथ्य और गर्मजोशी से मैं सचमुच में अभिभूत हूं।
मैं इस अवसर पर बोत्सवाना की राजकीय यात्रा के लिए मुझे आमंत्रित करने हेतु बोत्सवाना के महामहिम राष्ट्रपति को धन्यवाद देती हूं। इस यात्रा में मेरे साथ हमारे राज्य मंत्री श्री वी सोमन्ना, तथा हमारे संसद के दो माननीय सदस्य, श्री पी वसावा और श्रीमती डी के अरुणा भी हैं।
स्वतंत्रता के बाद से, बोत्सवाना की मेहनती जनता और बोत्सवाना के दूरदर्शी नेताओं ने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया है जो कि शांति, स्थिरता और समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए विश्व में ऊंचा स्थान रखता है। आपकी अद्वितीय प्रगति, साधारण शुरुआत से लेकर एक आधुनिक, आत्मविश्वासी और समृद्ध समाज तक, सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
बोत्सवाना लोकतंत्र, योग्य प्रशासन और प्रभावी नेतृत्त्व का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह इस बात का प्रमाण है कि क्या संभव है, जब लोकतंत्र को आम जनता के कल्याण के लिए काम करने की अनुमति दी जाती है, तो राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग देश के समग्र विकास और वंचित तथा कम-सुविधायुक्त लोगों के उत्थान के लिए किया जाता है।
माननीय अध्यक्ष महोदय एवं सदस्यगण,
भारत और बोत्सवाना के बीच एक स्वाभाविक मित्रता है, जो आपसी विश्वास और सम्मान, साझा मूल्यों, और लोकतंत्र तथा मानव गरिमा में समान विश्वास पर आधारित है। यह एक ऐसी मित्रता है जो शब्दों और वचनों से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, समर्पण और जनता-उन्मुख परिणामों को ध्यान में रखते हुए इसकी नींव रखी गई है। इन दशकों में, हमारी साझेदारी केवल हमारे अतीत के सहयोग से ही मज़बूत नहीं हुई है, बल्कि इसके उज्ज्वल भविष्य के वादे से भी यह और प्रगाढ़ हुई है।
मुझे खुशी है कि मेरी यह यात्रा हमारे बढ़ते सहयोग की पृष्ठभूमि में हो रही है, और साथ ही अगले वर्ष हमारे कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के पहले भी। यह भारत की ओर से बोत्सवाना की पहली राष्ट्रपति यात्रा है, और मुझे यह अनोखा सम्मान प्राप्त है कि मैं आपके सुंदर देश का दौरा करने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति हूं।
बोत्सवाना के राष्ट्र निर्माण की यात्रा में प्रारंभिक साझेदार होने के नाते भारत के लिए यह एक सम्मान की बात रही है। हमारा सहयोग कई क्षेत्रों में विस्तारित हुआ है — शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, कृषि, रक्षा, व्यापार और निवेश। हालांकि, हमारे सहयोग के सभी क्षेत्रों में, हम भारत में अपनी क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में जारी साझेदारी पर सबसे अधिक गर्व महसूस करते हैं।
केवल पिछले दशक में ही, बोत्सवाना के हज़ार से अधिक युवा मित्र भारत में पढ़ाई और प्रशिक्षण कर चुके हैं, और नए कौशल, व्यापक ज्ञान तथा सबसे महत्त्वपूर्ण, स्थायी मित्रता लेकर अपने देश लौटे हैं। महामहिम, दोनों देशों के लोगों के आपसी संबंध वास्तव में हमारी स्थायी मित्रता और सहयोग के रिश्तों की असली ताकत और प्रेरक शक्ति हैं।
महामहिम,
हमें, लोकतांत्रिक देशों के रूप में, अपनी जनता के सपनों और आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, विशेष रूप से अपने युवाओं की अपेक्षाओं के प्रति। वे वास्तव में हमारा भविष्य हैं, और वही यह निर्धारित करेंगे कि हमारे देश अंततः किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। आज के युवाओं को केवल शिक्षा और कौशल की ही नहीं, बल्कि अपने पेशेवर जीवन को गढ़ने और अपनी सृजनात्मक ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में लगाने के अवसरों की भी आवश्यकता है। इसके लिए यह आवश्यक है कि हम ऐसी मज़बूत और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करें, जो पर्यावरणीय रूप से भी स्थायी हो।
आज जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्थाएं आधुनिक और विविधीकृत हो रही हैं, नए अवसर उभर रहे हैं। हमें इन नए अवसरों का लाभ अपनी जनता के कल्याण के लिए उठाना चाहिए। भारतीय कंपनियां बोत्सवाना के हीरे, ऊर्जा और अवसंरचना क्षेत्रों में सक्रिय हैं। हमें नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल नवाचार, औषधि और खनन क्षेत्रों में सहयोग के अपार अवसर नज़र आ रहे हैं। मैं हमारे दोनों देशों की व्यावसायिक समुदायों को आमंत्रित करती हूं कि वे सहयोग के माध्यम से काम करें और हमारी आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता का उपयोग करें। यह बोत्सवाना सरकार के विज़न 2036 पहल के अनुरूप भी होगा।
आज भारत दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यस्था है। हम एक मज़बूत विकास पथ पर हैं, जिसे संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और युवा कार्यबल द्वारा संचालित किया जा रहा है। निरंतर 7-8% वार्षिक औसत जीडीपी वृद्धि के साथ, भारत अगले दशक के भीतर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थायी विकास इंजन बन सकता है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के साथ भारत सरकार देश को पूर्ण विकसित, समावेशी और लचीला बनाने का लक्ष्य रखती है, जो कि स्वतंत्रता की शताब्दी पर नवाचार-आधारित औद्योगिकीकरण, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और न्यायसंगत समृद्धि पर बल देते हैं।
माननीय अध्यक्ष महोदय एवं सदस्यगण,
हमारे दोनों देश इस विश्वास के साथ एकजुट हैं कि वैश्विक विकास सभी के लिए समावेशी होना चाहिए। प्रौद्योगिकी और प्रगति का लाभ केवल कुछ हिस्सों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समस्त मानवता के लिए होना चाहिए। भारत और बोत्सवाना मिलकर एक अधिक न्यायसंगत और स्थायी विश्व व्यवस्था में सार्थक योगदान दे सकते हैं। ऐसी व्यवस्था जो न केवल समर्थन करे, बल्कि ग्लोबल साउथ के सहयोग को मज़बूत करने और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार में मदद भी करे। हम भारत के सुधारित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रयासों में बोत्सवाना सरकार के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हैं।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग के व्यापक संदर्भ में, अफ्रीका की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता। अफ्रीका भविष्य का महाद्वीप है। अपनी युवा जनसांख्यिकी और विशाल प्राकृतिक संसाधनों के साथ, यह महाद्वीप वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि को गति प्रदान कर सकता है। हमारे प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2018 में प्रतिपादित दस सिद्धांतों के मार्गदर्शन में, भारत अफ्रीकी क्षेत्र के साथ अपने साझेदारी संबंधों का विस्तार करने के लिए दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध है, जो भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के ढांचे में हो रहा है। भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग हमारे 2.8 बिलियन लोगों को ऊर्जा प्राप्त करने में मदद कर सकता है, जो विश्व की कुल जनसंख्या का 40% है।
हमारे लिए अत्यंत संतोष का विषय है कि 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान, हमने अफ्रीकी संघ का जी-20 में स्थायी सदस्य के रूप में स्वागत किया।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि वर्ष 2047 तक के "विकसित भारत” के हमारे दृष्टिकोण और अफ्रीका के "एजेंडा 2063” से हमारे देशों के बीच सक्रिय सहयोग के लिए एक उत्कृष्ट अवसर प्राप्त होते हैं। यदि हम अपने विकास पथ को एक आत्मनिर्भर और सकारात्मक तरीके से जोड़ सकें, तो हम अपनी वास्तविक आर्थिक क्षमता को उजागर कर सकते हैं, जिससे लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जा सकेगा और सभी को अपने सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने का अवसर मिलेगा।
माननीय अध्यक्ष महोदय एवं सदस्यगण,
हमारे दोनों देशों की यह मित्रता केवल सरकारों के बीच की मित्रता भर नहीं है। यह दोनों देशों के लोगों के बीच की मित्रता है, जो एक-दूसरे का सम्मान करती हैं और शांतिपूर्ण तथा समृद्ध भविष्य की समान उम्मीदें साझा करती हैं। बोत्सवाना में रहने वाला जीवंत भारतीय समुदाय पिछले एक शताब्दी से इस प्रेरणादायक द्विपक्षीय साझेदारी का हिस्सा रहा है। जब हम आपके देश में उनकी सफलताओं का जश्न मनाते हैं, तब हम इस महान देश की सरकार और जनता के प्रति अपना आभार भी व्यक्त करते हैं, जिन्होंने भारतीय मूल के अपने भाइयों-बहनों का खुले दिल से स्वागत किया और उन्हें बोत्सवाना के आर्थिक विकास तथा हमारे दोनों देशों के बीच लोगों के संबंधों को मज़बूत बनाने में योगदान करने के लिए अवसर प्रदान किया।
माननीय अध्यक्ष महोदय एवं सदस्यगण,
भारत बोत्सवाना के साथ अपने साझेदारी संबंधों को विभिन्न क्षेत्रों में और गहरा करने तथा अपने विकास अनुभव को बोत्सवाना के साथ साझा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। आइए हम मिलकर ऐसी साझेदारी का निर्माण करें, जो कि हमारे दोनों देशों को समृद्ध बनाए और विश्व के व्यापक हित में योगदान दे।
मैं माननीय अध्यक्ष एवं संसद सदस्यों के प्रति आभार प्रकट करती हूं कि उन्होंने मुझे और मेरे प्रतिनिधिमंडल का बहुत ही शानदार स्वागत किया और मुझे यह सम्मान प्रदान किया।
भारत और बोत्सवाना के बीच मित्रता निरंतर बढ़ती रहे।
पुला! जय हिंद!
गैबरोन
12 नवम्बर, 2025