श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): आप सभी को नमस्कार। मैं माननीय राष्ट्रपति की बोत्सवाना यात्रा पर आयोजित इस विशेष प्रेस वार्ता में आप सभी का स्वागत करता हूं।
और इस विशेष प्रेस वार्ता में मेरे साथ मंच पर उपस्थित हैं, विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) श्री सुधाकर दलेला, माननीय राष्ट्रपति की प्रेस सचिव सुश्री मनीषा वर्मा, विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका) श्री जनेश कैन और बोत्सवाना में भारत के उच्चायुक्त श्री भरत कुमार कुठाती। अब, मैं सचिव महोदय से अनुरोध करता हूं कि वे माननीय राष्ट्रपति की बोत्सवाना यात्रा के बारे में मीडिया को जानकारी प्रदान करें।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): बहुत-बहुत धन्यवाद राजेश। मीडिया के साथियों को नमस्कार।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, माननीय राष्ट्रपति 11 नवम्बर की शाम को बोत्सवाना पहुंचीं। यह भारत के किसी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा थी। आगमन पर, एक विशेष सम्मान के रूप में, माननीय राष्ट्रपति का हवाई अड्डे पर बोत्सवाना के आदरणीय राष्ट्रपति द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। माननीय राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
कल, माननीय राष्ट्रपति का स्वागत राष्ट्रपति कार्यालय में माननीय राष्ट्रपति बोको द्वारा किया गया, दोनों नेताओं के बीच एकांतिक वार्ता हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। बोत्सवाना की ओर से कई कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी वार्ता में उपस्थित थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से, रेल और जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, और दो संसद सदस्य, श्री वसावा और श्रीमती डी. के. अरुणा जी, और वरिष्ठ अधिकारियों ने वार्ता में भाग लिया।
व्यापक चर्चा के दौरान, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने व्यापार और निवेश, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी, कौशल विकास, कृषि, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और पूरे डिजिटल क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे आपसी हित के क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को और मज़बूत और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने पारस्परिक महत्त्व के क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
बोत्सवाना नेतृत्त्व ने माननीय राष्ट्रपति को अपने आर्थिक परिवर्तन कार्यक्रम तथा अपने विज़न 2036 के बारे में बताया, जिसमें अर्थव्यवस्था में विविधता लाने तथा 2036 तक उच्च आय वाला देश बनने के उनके प्रयासों की रूपरेखा दी गई है। इस संदर्भ में, इस यात्रा ने उनकी आर्थिक और विकास प्राथमिकताओं की सराहना करने और इस बात पर चर्चा करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया कि कैसे दोनों सरकारें एक साथ काम कर सकती हैं, और यह भी कि कैसे हमारे दोनों देशों के निजी क्षेत्र विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को गहरा करने के लिए एक साथ काम कर सकते हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो बोत्सवाना सरकार के लिए प्राथमिकता वाले हैं।
बोत्सवाना के नेतृत्त्व ने भारत में डीपीआई (डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना) के नियोजन के बारे में जानने में अपनी गहरी रुचि व्यक्त की, और बताया कि किस प्रकार हम नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बेहतर तरीके से कार्यान्वित करके ई-शासन प्रणाली (ई-गवर्नेंस) की तैनाती और संपूर्ण सरकार में बेहतर आर्थिक दक्षता के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं। माननीय राष्ट्रपति ने इस क्षेत्र में अपने विकास अनुभव साझा करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की।
चर्चा के बाद एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। आपने शायद देखा होगा कि हमने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन भारत से बोत्सवाना तक गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाओं की पहुंच को सुगम बनाएगा। माननीय राष्ट्रपति ने बोत्सवाना सरकार के अनुरोध पर आवश्यक एआरवी दवाएं भेजने के लिए भारत सरकार की तत्परता और निर्णय से भी अवगत कराया।
बाद में, माननीय राष्ट्रपति ने कल आयोजित एक विशेष सत्र में बोत्सवाना की नेशनल असेंबली को संबोधित किया। संसद में राष्ट्रीय सभा के माननीय अध्यक्ष ने उनका स्वागत किया और फिर उन्होंने कल उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। इसके बाद माननीय राष्ट्रपति ने थ्री डिकगोसी स्मारक का दौरा किया, जो कि बोत्सवाना की एकता, नेतृत्त्व और स्वतंत्रता की खोज का प्रतीक है। उन्होंने उन दूरदर्शी नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की जिनकी विरासत बोत्सवाना और इस क्षेत्र में पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
जैसा कि आपने कल वार्ता के बाद दोनों राष्ट्रपतियों के प्रेस वक्तव्यों से देखा होगा, बोत्सवाना ने परियोजना चीता के तहत भारत में चीता को पुनः स्थापित करने के हमारे प्रयासों में भारत के साथ साझेदारी करने पर सहमति व्यक्त की है। यह भारत सरकार की एक अनूठी संरक्षण पहल है जिसका उद्देश्य भारत के पारिस्थितिकी तंत्र और भारत में मौजूद ऐतिहासिक क्षेत्र में चीतों को पुनर्स्थापित करना है। आज सुबह राष्ट्रपति मुर्मू ने गैबोरोन के मोकोलोडी रिजर्व का दौरा किया, जहां राष्ट्रपति ड्यूमा ने औपचारिक रूप से भारत को आठ चीते सौंपे, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहरी मित्रता और साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। माननीय राष्ट्रपति ने इस विशेष कार्य के लिए राष्ट्रपति बोको और बोत्सवाना सरकार के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
आज सुबह, बोत्सवाना के माननीय उपराष्ट्रपति और अंतर्राष्ट्रीय संबंध मंत्री ने माननीय राष्ट्रपति से मुलाकात की। और कुछ समय पहले माननीय राष्ट्रपति ने बोत्सवाना में एक विशेष स्वागत समारोह में जीवंत भारतीय समुदाय के साथ बातचीत की। उन्होंने बोत्सवाना के आर्थिक विकास में उनके योगदान और दोनों देशों के बीच मैत्री और सहयोग के बंधन को मज़बूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की।
माननीय राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा बोत्सवाना के साथ भारत के दीर्घकालिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह यात्रा भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के ढांचे के भीतर अफ्रीकी क्षेत्र के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
भारत से बोत्सवाना की पहली राष्ट्रपति यात्रा होने के नाते, यह भारत-बोत्सवाना संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत और बोत्सवाना अगले वर्ष अपने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे। माननीय राष्ट्रपति बोको ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया, क्योंकि यह भारत के किसी राष्ट्राध्यक्ष की पहली राजकीय यात्रा है। उन्होंने बताया कि पिछले अक्तूबर में उनकी सरकार के कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली राजकीय यात्रा भी है।
इन सभी कारणों से यह यात्रा बहुत महत्त्वपूर्ण थी। हमारे दृष्टिकोण से, माननीय राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा ने बोत्सवाना के साथ हमारी मैत्री और सहयोग के घनिष्ठ संबंधों को एक नई गति प्रदान की है। बोत्सवाना के साथ अपनी साझेदारी को बढ़ाने के लिए हमारे पास एक स्पष्ट रोडमैप है और अब हमारे सामने इस सकारात्मक गति को और आगे बढ़ाने का कार्य है।
इन सभी जानकारियों के बाद अब मुझे आपके प्रश्नों का उत्तर देने में खुशी होगी।
लेकिन मैं एक आखिरी बात भी कहना चाहता हूं, राजेश, अंतिम बात यह है कि बोत्सवाना की जनता और सरकार ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा भारतीय प्रतिनिधिमंडल को जो आतिथ्य प्रदान किया, वह अद्भुत है। यह सचमुच बहुत ही उत्साहवर्धक है और हम बोत्सवाना की जनता और सरकार के प्रति बहुत आभारी हैं, जिस तरह से उन्होंने माननीय राष्ट्रपति और भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
धन्यवाद।
अज्ञात वक्ता: (अश्रव्य ऑडियो)। मेरा प्रश्न यह है कि इस यात्रा में बोत्सवाना के साथ भारतीय निवेश और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए क्या पहल की गई, विशेष रूप से खनन क्षेत्र, कृषि क्षेत्र और डिजिटल सेवाओं में।
अज्ञात वक्ता: (अश्रव्य)। महोदय, निश्चित रूप से हमने चीतों को नए परिवेश में स्थानांतरित होते हुए देखा है। यह ऐतिहासिक है। महोदय, क्या आप बोत्सवाना से भारत तक चीतों के परिवहन, समय-सीमा और अन्य विवरणों के बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं?
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): इन महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। एएनआई के सहयोगी के प्रश्न पर, आर्थिक सहयोग और हम अपनी आर्थिक साझेदारी को कैसे मज़बूत कर सकते हैं, यह मुद्दा दोनों नेताओं के बीच चर्चा का केंद्र बिंदु था।
जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया है, हमारे बीच एक मज़बूत आर्थिक साझेदारी है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार लगभग आधा अरब डॉलर का है और बोत्सवाना में विभिन्न क्षेत्रों में कई भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं। हमारा एक भारतीय बैंक भी बोत्सवाना में स्थित है। हमारी कई भारतीय कंपनियों के बोत्सवाना में कार्यालय हैं। इसलिए यह एक काफ़ी मज़बूत साझेदारी है।
लेकिन हम महसूस करते हैं कि आर्थिक परिवर्तन की रूपरेखा की पृष्ठभूमि में तथा बोत्सवाना सरकार और बोत्सवाना नेतृत्त्व द्वारा अपने लिए निर्धारित कार्यक्रम; तथा हीरा उद्योग से परे अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की उनकी इच्छा, जो कि बोत्सवाना की अर्थव्यवस्था का केंद्रीय क्षेत्र बना हुआ है; हम महसूस करते हैं कि भारत और बोत्सवाना दोनों के लिए साथ मिलकर काम करने के अपार अवसर हैं।
और इस संदर्भ में, दोनों नेताओं के बीच जिन क्षेत्रों पर चर्चा हुई, उनमें निश्चित रूप से डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का संपूर्ण क्षेत्र, कृषि-प्रौद्योगिकी का क्षेत्र, किस प्रकार हम बोत्सवाना में कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनरी के संदर्भ में भारतीय अनुभव का उपयोग कर सकते हैं, साथ ही स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में, बुनियादी ढांचे के विकास में भी, किस प्रकार भारतीय कंपनियां आर्थिक परिवर्तन के अपने व्यापक दृष्टिकोण में बोत्सवाना के साथ फिर से साझेदारी कर सकती हैं, और साथ ही हम अपने दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी को कैसे मज़बूत कर सकते हैं, ये भी शामिल थे।
तो मुझे लगता है कि संदेश, इसका अर्थ हमें नेतृत्त्व से मिलने वाली चर्चा और दिशा से मिलता है, वह यह है कि व्यापार, निवेश और आर्थिक क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा देने की एक बड़ी संभावना है और हम बोत्सवाना में अपने साझेदारों के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि हम दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता पर चर्चा करना जारी रखें, शामिल हों और उपयोग करने की कोशिश करें।
चीते के मामले में, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मुझे लगता है कि आप में से कुछ लोग जानते होंगे कि सात बड़ी बिल्लियों की प्रजातियों में से, चीते 50 के दशक के बीच में भारत से विलुप्त हो गए थे, और सरकार ने कुछ साल पहले इस प्रजाति को भारत वापस लाने और उन्हें भारत में उन जगहों पर फिर से बसाने का फैसला किया जहां वे बहुत समय पहले स्वाभाविक रूप से रहते थे।
तो यह भारत सरकार के लिए एक बहुत ही अहम परियोजना है, और हमें बहुत खुशी है कि बोत्सवाना सरकार इस बहुत ज़रूरी वन्यजीव संरक्षण पहल में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आगे आई है। आठ चीतों का स्थानांतरण, बेशक, वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता दिखाता है। इससे और भी मज़बूती मिलेगी... कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि यह बड़ा वन्यजीव संरक्षण समुदाय है, मैं यह कहूंगा कि यह साझेदारी बहुत-बहुत प्रासंगिक साबित होगी और हमें पूरी उम्मीद है कि ये चीते बहुत जल्द भारत आ जाएंगे। और, जैसा कि माननीय राष्ट्रपति ने कल बोत्सवाना के माननीय राष्ट्रपति के साथ बातचीत के बाद कहा था, कि यहां के परिवेश में उनकी अच्छी तरह से देखभाल की जाएगी, उनकी देखरेख की जाएगी और उन्हें उस स्थान पर भेजा जाएगा जहां उन्हें रहना है और उनकी देखभाल की जाएगी।
इसलिए हम बोत्सवाना के साथ इस साझेदारी को लेकर बहुत उत्साहित हैं, और इस ज़रूरी पहल में हमारे साथ हाथ मिलाने के लिए हम बोत्सवाना सरकार के बहुत आभारी हैं। धन्यवाद।
अज्ञात वक्ता: (अश्रव्य ऑडियो) 1950 के दशक में जो चीते विलुप्त हो गए थे, क्या यह उसी की तरह है, पहले की तरह ही?
(अश्रव्य ऑडियो) क्या यह केवल तृतीय क्षेत्र में है और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी? और फिर, शायद सहयोग और निवेश भी। जैसे कि आप कह रहे हैं कि भारतीय कंपनियां जो कि वस्त्र क्षेत्र में हैं, तो मेरा मानना है कि वे भी इस आर्थिक मंदी से काफ़ी प्रभावित हुई हैं। तो, सवाल यह है कि भारत सरकार उन्हें दोबारा ठीक करने के लिए किस तरह से मदद या सहयोग प्रदान करेगी? आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। बोत्सवाना, अफ्रीका और भारत में पाई जाने वाली चीते की प्रजाति के बारे में, आपके सवाल के बारे में, सच कहूं तो मेरे लिए इसका जवाब देना मुश्किल है।
लेकिन मेरा मानना है कि ऐतिहासिक रूप से अफ्रीका में चीता की बड़ी आबादी रही है। आज बोत्सवाना नेतृत्त्व के साथ हुई चर्चा में हमें बताया गया कि बोत्सवाना में लगभग 1700 चीते हैं। उच्चायुक्त संभवतः इस पर और जानकारी दे सकते हैं। इसलिए, मैं कहूंगा कि यह कुछ इसी तरह का होना चाहिए। लेकिन मैं आपको कोई गलत उत्तर नहीं देना चाहूंगा।
दूसरा प्रश्न उस समझौता ज्ञापन के बारे में है जिस पर हमने कल हस्ताक्षर किए थे, वह फार्माकोपिया और स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित था। और जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया था, इससे हमें बोत्सवाना के लोगों को किफ़ायती लागत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं और औषधियां उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसलिए, यह समझौता ज्ञापन हमारे दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अन्य कोई समझौता ज्ञापन नहीं थे। यह समझौता ज्ञापन किसी अन्य क्षेत्र को शामिल नहीं करता। लेकिन हम बोत्सवाना की सरकार के साथ यह चर्चा कर रहे हैं कि कृषि हो या खुदरा क्षेत्र, हम विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के ढांचे को कैसे और मज़बूत कर सकते हैं। जैसे-जैसे हमारी चर्चाएं आगे बढ़ेंगी, मुझे उम्मीद है कि हम बोत्सवाना सरकार के साथ और अधिक समझौता ज्ञापन तथा सहयोग रूपरेखा में प्रवेश करेंगे।
अज्ञात वक्ता: शायद उसी विषय पर एक और सवाल, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के बारे में बात की थी कि ब्रिक्स देशों को स्वदेशी दवाओं के लिए एक भंडार स्थापित करने की आवश्यकता है। और मैं यह जानना चाहता हूं कि आपने जो समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, क्या वह वैकल्पिक चिकित्सा क्षेत्र को भी शामिल करता है?
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): हां, धन्यवाद। यह यात्रा के दायरे से बाहर है, लेकिन मैं आपके ब्रिक्स से जुड़े सवाल का जवाब देना चाहूंगा।
हां, हम ब्रिक्स के ढांचें के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में, पारंपरिक चिकित्सा सहित, सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। और जैसा कि आप जानते हैं, भारत अगले वर्ष 1 जनवरी से ब्रिक्स की अध्यक्षता करने जा रहा है। और हम यह देखना चाहेंगे कि भविष्य में हम पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के ढांचें में भी अधिक व्यापक और अधिक सक्रिय रूप से सहयोग कर सकें।
मैं हीरे के बारे में आपके प्रश्न का उत्तर देना भूल गया। और मैं यह कहना चाहूंगा कि जबकि भारत और बोत्सवाना के बीच हीरे के क्षेत्र में उत्कृष्ट सहयोग है, चाहे वह तराशने और पॉलिशिंग की प्रक्रिया हो, हमारे देश की कंपनियों की बोत्सवाना में इस क्षेत्र में उपस्थिति भी है।
और बोत्सवाना नेतृत्त्व इस बात से बहुत प्रसन्न है कि वे न केवल कच्चे हीरे को भारत में निर्यात कर रहे हैं और वहां इसे तराशने व पॉलिशिंग का काम भी कर रहे हैं, और तो और बोत्सवाना में क्षमता निर्माण भी कर रहे हैं। और जो छवि मुझे बोत्सवाना के नेतृत्त्व और वरिष्ठ अधिकारियों से मिली है, उसके अनुसार, यही वह मॉडल है जिसे वे भविष्य में हीरा क्षेत्र में हमारे सहयोग के संदर्भ में अपनाना चाहेंगे।
आप सही हैं, हीरा क्षेत्र वर्तमान में कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। तो हम देखेंगे कि आने वाले समय में यह किस दिशा में जाता है। लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा, हम हीरा क्षेत्र के अलावा सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि यही वह रोडमैप है जिसे बोत्सवाना सरकार ने अपने लिए विज़न 2036 दस्तावेज़ और आपके पास मौजूद आर्थिक परिवर्तन रोडमैप के माध्यम से तैयार किया है।
इसलिए हम बोत्सवाना सरकार के साथ यह विचार-विमर्श करेंगे कि इस संदर्भ में उनके पास कौन-कौन से ठोस प्रस्ताव हैं, और किस प्रकार भारतीय विकास के अनुभव को बोत्सवाना के लोगों के साथ साझा किया जा सकता है, साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि बोत्सवाना और भारत के व्यावसायिक समुदाय इन क्षेत्रों में कैसे मिल-जुलकर काम कर सकते हैं। धन्यवाद।
नीलाभ, पीटीआई: नमस्ते, मेरा नाम नीलाभ है। मैं प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ काम करता हूं। महोदय, मेरे पहले सवाल का जवाब लगभग दे दिया गया है … (अश्रव्य ऑडियो) … भारत और बोत्सवाना के मेरे साथियों ने, दोनों ने हीरा क्षेत्र के बारे में सवाल पूछा है।
तो महोदय दूसरा प्रश्न है कि यह राष्ट्रपति की अंगोला और बोत्सवाना की छह दिवसीय राजकीय यात्रा के समापन की ओर ले जाता है। यदि आप राष्ट्रपति की पूरी यात्रा का सारांश दे सकें कि इस दौरान क्या महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं और जैसा कि आपने दिल्ली में प्रेस वार्ता में कहा, यह भी वह बड़ा अफ्रीकी संपर्क है जिसे हम आगे बढ़ाना चाहते हैं। तो कृपया पूरे छह दिन की यात्रा को संक्षेप में बताएं। धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): तो, बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने माननीय राष्ट्रपति की अफ्रीका की पूरी यात्रा के विभिन्न पहलुओं को सामने लाया।
मैं यह कहना चाहूंगा कि सबसे पहले, माननीय राष्ट्रपति की अफ्रीका, विशेष रूप से अंगोला और बोत्सवाना की यात्रा यह दर्शाती है कि अफ्रीकी महाद्वीप के साथ संबंध बनाने में भारत सरकार कितनी प्राथमिकता देती है। जैसा कि मैंने आपको बताया, हमारे पास भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन का यह मंच है, जिसके माध्यम से हम अफ्रीकी संघ और अफ्रीका के सभी नेताओं के साथ वार्ता और सहयोग करते हैं।
और, माननीय प्रधानमंत्री ने वर्ष 2018 में युगांडा की संसद को संबोधित करते समय अफ्रीकी क्षेत्र के साथ हमारी साझेदारी के दस मौलिक सिद्धांत प्रस्तुत किए थे और, अगर मैं संक्षेप में नहीं बल्कि यह देखने की कोशिश करूं कि अंगोला और भारत तथा बोत्सवाना और भारत के बीच सहयोग की संरचना कैसी है… कुछ सामान्य विषय सामने आते हैं, तो मुझे लगता है कि हमें यह देखना होगा कि हम आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को कैसे मज़बूत कर सकते हैं। इसे पहला प्रमुख स्तंभ कहूंगा, यानी व्यापार और आर्थिक।
दूसरा प्रमुख स्तंभ, जिसे मैं कहूंगा, वह है विकास साझेदारी का पूरा क्षेत्र। हम कैसे अपने अनुभव को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा कर सकते हैं। अंगोला और बोत्सवाना इस साझेदारी में बहुत ही केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, क्षमता निर्माण का पूरा क्षेत्र भी है, जिस पहलू को मैंने विस्तार से नहीं छुआ। लेकिन जब हम बोत्सवाना नेतृत्त्व के साथ हर बैठक में संवाद करते हैं, चाहे वह माननीय राष्ट्रपति की राष्ट्रपति बोको और उपराष्ट्रपति के साथ की बैठक हो, उन्होंने हमें हमेशा यह बताया कि वे भारत सरकार की क्षमता निर्माण पहल, आईटीईसी कार्यक्रम, आईसीसीआर छात्रवृत्तियों और अन्य विभिन्न पहलों को कितना महत्त्व देते हैं।
बोत्सवाना के माननीय राष्ट्रपति और बोत्सवाना के माननीय उपराष्ट्रपति और कई अन्य नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्टेम (एसटीईएम) के क्षेत्र में भारतीय शिक्षकों के योगदान के बारे में बात की, जो कि शायद 60, 70 और 80 के दशक में आए थे और बोत्सवाना में शिक्षा क्षेत्र के विकास में योगदान दिया था।
तो, मैं कहूंगा कि ये भारत-बोत्सवाना संबंधों के बहुत ही हृदयस्पर्शी पहलू हैं, और हम इन क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और आगे बढ़ाना चाहेंगे। पिछले 10 वर्षों में, बोत्सवाना से 1,500 से अधिक मित्रों ने, चाहे वे सरकार के हों, निजी क्षेत्र के हों या छात्र हों , भारत में कौशल विकास कार्यक्रम, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और शैक्षिक पाठ्यक्रमों में भाग लिया है। यह एक बड़ी संख्या है और हम आगे भी बोत्सवाना सरकार की किसी भी विशिष्ट आवश्यकता को पूरा करने के लिए खुशी-खुशी तैयार रहेंगे। अगर वे चाहें कि, उदाहरण के लिए, किसी आईटी पेशेवरों के समूह के लिए कोई क्षमता निर्माण कार्यक्रम हो या कोई व्यक्ति यह सीखना चाहता हो कि हम भारत में आधार, डिजीलॉकर या पूरे डीपीआई को कैसे लागू कर रहे हैं, तो बोत्सवाना के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार करने में हमें बहुत ही खुशी होगी, यह देखते हुए कि हमने वर्षों से बोत्सवाना के साथ मित्रता और क्षमता निर्माण साझेदारी का लाभ प्राप्त किया है। तो, मैं कहूंगा कि यह दूसरा स्तंभ है, जो मुझे अंगोला और बोत्सवाना दोनों में बहुत प्रासंगिक दिखाई देता है।
और तीसरा पहलू, जो बहुत ही महत्त्वपूर्ण रूप से सामने आया है, वह है प्रौद्योगिकी का पूरा क्षेत्र और प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन। साथ ही, यह इच्छा और रुचि भी दिखाई देती है कि हमारे अनुभव से सीखें कि कैसे हमने सार्वजनिक प्रशासन, ई-गवर्नेंस और बेहतर नागरिक-केंद्रित सेवा प्रणाली के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया। इसलिए, हम यह अनुभव अपने ग्लोबल साउथ के मित्रों के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं।
और अंत में, मैं कहूंगा कि दोनों देशों के लोगों के आपसी संबंधों की दिशा बहुत महत्त्वपूर्ण है, जिसमें संपर्क, हवाई संपर्क शामिल हैं, कैसे हम लोगों के लिए बोत्सवाना से भारत और भारत से बोत्सवाना यात्रा करना आसान बना सकते हैं। यह मुद्दा कल की चर्चा में भी सामने आया और मुझे लगता है कि बोत्सवाना के माननीय राष्ट्रपति ने मीडिया के सामने अपने भाषण में भी यह उल्लेख किया कि हमें लोगों के लिए हमारे देशों की यात्रा को आसान बनाना चाहिए।
और इसमें निश्चित रूप से भारतीय प्रवासी समुदाय का योगदान भी शामिल है। हमें यह जानकर खुशी है कि बोत्सवाना में भारतीय प्रवासी समुदाय बहुत ही सक्रिय है और बोत्सवाना के आर्थिक विकास में ठोस योगदान दे रहा है। साथ ही, वे भारत और बोत्सवाना के मैत्रीपूर्ण संबंधों में एक सेतु के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
तो, ये वे चार या पांच मुख्य स्तंभ हैं जिन्हें मैं देखता हूं। मेरा तात्पर्य यह है कि इस अल्प समय में मैं सब कुछ सूचीबद्ध नहीं कर सकता। लेकिन हम इस गति और उत्साह को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ही उत्साहित हैं, जो अंगोला और बोत्सवाना के साथ हमारी साझेदारी को माननीय राष्ट्रपति की पहली राजकीय यात्रा के परिणामस्वरूप प्राप्त हुआ है।
धन्यवाद।
अज्ञात स्पीकर: (अश्रव्य ऑडियो) भारत से बोत्सवाना आने वाले एआरवी का उल्लेख हुआ था। आप कल्पना कर सकते हैं कि ये दवाएं अब देश में दवाओं की कीमतों और दवाओं की कमी के मामले में कितनी महत्त्वपूर्ण है। बस यह जानना है कि ये दवाएं कब आने वाली हैं और अगर आप (अश्रव्य ऑडियो)।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आप बिल्कुल सही हैं कि हमें कुछ सप्ताह पहले बोत्सवाना सरकार की ओर से एआरवी दवाओं की आपूर्ति के लिए यह अनुरोध मिला था, ताकि इस दवा की अस्थायी कमी को पूरा किया जा सके।
तो, हम इस दवा की आपूर्ति यथाशीघ्र करने के लिए काम कर रहे हैं। मैं आपको सटीक समय-सीमा नहीं दे सकता, लेकिन निश्चित रूप से अगले महीने तक, जनेश, हम बोत्सवाना सरकार को इस दवा की आपूर्ति करने की स्थिति में होंगे। धन्यवाद।
अज्ञात वक्ता: क्या मैं बस यह कह सकता हूं, सचिव महोदय कि यह यात्रा कब नियोजित की गई थी? और अंतिम बात, कृपया अगले 10 वर्षों तक भारत के उच्चायुक्त को बनाए रखें।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): ठीक है, धन्यवाद। इस प्रेस वार्ता में उपस्थित होने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री राजेश परिहार, निदेशक (एक्सपीडी): धन्यवाद। समय की कमी के कारण, हम और सवाल नहीं ले पाएंगे। धन्यवाद।
महोदय, आपकी अनुमति के साथ, मैं आज की इस प्रेस वार्ता को समाप्त करना चाहूंगा। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
गैबोरोन
13 नवम्बर, 2025