श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों। प्रधानमंत्री की जोहान्सबर्ग दक्षिण अफ्रीका में होने वाली जी-20 शिखर सम्मेलन की आगामी यात्रा के संबंध में सचिव (ईआर) श्री सुधाकर दलेला द्वारा रखी गई इस विशेष प्रेस वार्ता में मैं आप सभी का स्वागत करता हूं।
हमारे साथ श्री जनेश कैन भी हैं, जो कि विदेश मंत्रालय में दक्षिण अफ्रीका का कार्यभार देखते हैं। वे पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीकी देशों के प्रभारी संयुक्त सचिव हैं।
इसी के साथ मैं सचिव (ईआर) महोदय को प्रारंभिक वक्तव्य के लिए आमंत्रित करता हूं। महोदय वक्तव्य दीजिए।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद रणधीर, आप सभी को नमस्कार।
आपने कल मंत्रालय द्वारा जारी किए गए प्रेस घोषणा-पत्र को देखा होगा। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 21 से 23 नवम्बर तक दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग का दौरा करेंगे, जहां वे दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर आयोजित जी-20 लीडर्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
यह प्रधानमंत्री की दक्षिण अफ्रीका की चौथी आधिकारिक यात्रा होगी, इससे पहले वे 2016 में द्विपक्षीय यात्रा पर गए थे, और उसके बाद 2018 तथा 2023 में दो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए वहां गए थे। यह अफ्रीकी भूमि पर होने वाला पहला जी-20 शिखर सम्मेलन है, और इसी संदर्भ में यह अफ्रीका तथा समूचे ग्लोबल साउथ के विकास संबंधी मुद्दों पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा। यह भी स्मरणीय रहे कि 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ही अफ्रीकी संघ को जी-20 में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
जी-20 सदस्यों के अलावा, दक्षिण अफ्रीका ने कई अतिथि देशों, जो कि सदस्य नहीं हैं जैसा कि हम जानते हैं उन्हें और अनेक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को जोहान्सबर्ग में होने वाले नेताओं के शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है।
2023 में अत्यंत सफल जी-20 अध्यक्षता आयोजित करने के बाद, इस शिखर सम्मेलन का भारत के लिए महत्त्व इस बात को सुनिश्चित करने में है कि उसकी प्राथमिकताएं आगे भी निरंतर बनी रहें। जैसा कि आप जानते हैं कि जी-20 अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में उभरा है, साथ ही वैश्विक महत्त्व के मामलों पर चर्चा के लिए भी यह महत्त्वपूर्ण है। जी-20 इन बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के लिए एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है, जो कि विश्व जीडीपी के 85% से अधिक और विश्व जनसंख्या के लगभग तीन-चौथाई का प्रतिनिधित्व करते हैं, ताकि वे एक साथ मिलकर विश्व को प्रभावित करने वाले महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर सकें।
इनमें सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति में तेज़ी लाना, वैश्विक शासन संस्थाओं का सुधार करना, पर्यावरण और जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान, प्रौद्योगिकी की स्थिरता, डिजिटल विभाजन के अंतर को पाटना, ऊर्जा परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियां, और समकालीन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अंतर्राष्ट्रीय समन्वय और सहयोग के महत्त्व को रेखांकित करना जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
एकजुटता, समानता और स्थिरता के अपने समग्र अध्यक्षता विषय के तहत, दक्षिण अफ्रीका ने इस वर्ष अपनी जी-20 अध्यक्षता के लिए चार प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्रों की पहचान की है। ये हैं: पहला, आपदा सहनशीलता और प्रतिक्रिया को सुदृढ़ बनाना। दूसरा, कम आय वाले देशों के लिए कर्ज की स्थिरता सुनिश्चित करना। तीसरा, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्त जुटाना। चौथा, समावेशी विकास और सतत विकास के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों का प्रभावी उपयोग करना।
लीडर्स शिखर सम्मेलन के तीन पूर्ण सत्रों में 22 और 23 नवम्बर को नेताओं द्वारा इन प्राथमिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। हमने कल अपनी घोषणा में आपको इन पूर्ण सत्रों के विषय के बारे में भी जानकारी दी थी।
जोहान्सबर्ग जी-20 शिखर सम्मेलन 20 जी-20 अध्यक्षताओं के पहले चक्र की समाप्ति का प्रतीक होगा। दक्षिण अफ्रीका द्वारा पहचानी गई प्राथमिकताएं भारत की जी-20 अध्यक्षता और ब्राज़ील की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं, जिससे जी-20 चर्चाओं में ग्लोबल साउथ के लिए महत्त्वपूर्ण मुद्दों के दृष्टिकोण से निरंतरता सुनिश्चित होती है।
भारतीय जी-20 अध्यक्षता ने, जैसा कि आप में से कुछ को याद होगा, इस विषय को दिए गए भारत के महत्त्व को रेखांकित करते हुए एक आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यकारी समूह स्थापित किया था। दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने अपनी अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक के रूप में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सहनशीलता से संबंधित महत्त्वपूर्ण कार्य को आगे बढ़ाया है।
इसी तरह से, खाद्य सुरक्षा पर कार्यबल के माध्यम से, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने इस महत्त्वपूर्ण चुनौती पर संवाद को भी आगे बढ़ाया है। दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने, एक तरह से, ग्लोबल साउथ के लिए महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर अपना ध्यान बनाए रखा है।
नई दिल्ली लीडर्स समिट डिक्लेरेशन ने इस वर्ष विभिन्न मंत्रिस्तरीय ट्रैकों में अपनाए गए कई जी-20 परिणाम दस्तावेज़ों के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान किया है। भारतीय अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, महिलाओं के नेतृत्त्व में विकास, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की प्रगति को तेज़ करने की कार्ययोजना, साथ ही पिछले वर्ष के कार्य समूहों के प्रमुख निष्कर्ष, जिनमें भारत द्वारा प्रारंभ किया गया आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह और महिलाओं के सशक्तिकरण कार्य समूह शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता में इसने व्यापक सकारात्मक प्रतिध्वनि प्राप्त की है। इसके अलावा, इसने खाद्य सुरक्षा और पोषण पर उच्च स्तरीय सिद्धांतों, नवीनीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और ऊर्जा दक्षता को दोगुना करने की प्रतिबद्धता को मान्यता दी है। ये कुछ अन्य प्रमुख परिणाम हैं जिन्हें इस वर्ष दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता में विभिन्न चरणों पर चल रही चर्चा के दौरान मज़बूत किया गया है।
जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन जी-20 की अध्यक्षता सफलतापूर्वक निभाने वाले चार उभरते बाज़ार और जी-20 विकासशील अर्थव्यवस्थाएं यानी इंडोनेशिया, भारत, ब्राज़ील और अब, निश्चित रूप से, दक्षिण अफ्रीका के कार्य को आगे बढ़ाएगा और इसने हम सभी को सामूहिक रूप से ग्लोबल साउथ को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर अधिक तेज़ी से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाया गया है। हम पूरे वर्ष जी-20 के सभी चरणों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं और अब, निश्चित रूप से, जोहान्सबर्ग में भी, और हम जोहान्सबर्ग में एक सफल और लाभकारी जी-20 शिखर सम्मेलन की उम्मीद करते हैं।
समाप्त करने से पहले, मैं यह भी उल्लेख करना चाहूंगा कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री आईबीएसए (भारत–ब्राज़ील–दक्षिण अफ्रीका) नेताओं की बैठक में भाग लेंगे, साथ ही जोहान्सबर्ग में उपस्थित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इसी के साथ, अगर आपके कोई सवाल हैं तो मुझे उनका जवाब देने में बहुत ही खुशी होगी। धन्यवाद।
सिद्धांत सिब्बल, विऑन: नमस्ते महोदय। सिद्धांत हूं विऑन से। क्या इस दौरान हमें किसी द्विपक्षीय बैठक की उम्मीद है, अगर आप इस बारे में कुछ जानकारी दे पाएं?
येशी सेली, बिज़नेस इंडिया: मैं बिज़नेस इंडिया से येशी सेली हूं। क्या अमेरिका की अनुपस्थिति शिखर सम्मेलन पर किसी तरह का प्रभाव डालने वाली है? क्या प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने की संभावना है, क्योंकि आशा है कि वे भी वहां पर उपस्थित होंगे?
आयुषी अग्रवाल, एएनआई: महोदय मैं एएनआई से आयुषी अग्रवाल हूं। हाल की गतिविधियों को देखते हुए, भारतीय प्रधानमंत्री वैश्विक चिंताओं जैसे आतंकवाद को कितना संबोधित करेंगे? और क्या हम उम्मीद कर रहे हैं कि जी-20 नेताओं की घोषणा में आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक मज़बूत बयान परिलक्षित होगा?
श्री सुधाकर दलेला, सेक्रेटरी (ईआर): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। द्विपक्षीय बैठकों से संबंधित प्रश्नों पर, जैसा कि आप जानते हैं, इस स्तर और महत्त्व के शिखर सम्मेलन में नेताओं को अन्य विश्व नेताओं से मिलने और संवाद करने का एक अत्यंत मूल्यवान अवसर मिलता है। तो हां, जैसा कि मैंने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में उल्लेख किया था, जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी।
अब जब हमारी बातचीत चल ही रही है, इसी बीच द्विपक्षीय बैठक की जानकारी पर भी काम जारी है। लेकिन इनके अंतिम रूप में पहुंचने के बाद ही हम आपको आगे की जानकारी दे पाएंगे। द्विपक्षीय बैठक से जुड़ी जानकारी के लिए हम आपसे संपर्क बनाए रखेंगे।
आयुषी ने आतंकवाद के जिस मुद्दे का ज़िक्र किया है … निस्संदेह यह हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण विषय रहा है। लेकिन जी-20, जैसा कि आप जानती हैं कि यह एक ऐसा मंच है जहां आप मुख्य रूप से आर्थिक मुद्दों और उससे जुड़े मामलों पर चर्चा करते हैं। और इसी समय, हम शिखर सम्मेलन के लिए घोषणा-पत्र पर चर्चा कर रहे हैं। हमारे साथी और टीमें जोहान्सबर्ग में हैं, और ऐसे सभी मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसलिए, मैं घोषणा-पत्र में क्या आएगा, इस पर पूर्वानुमान नहीं लगाना चाहूंगा, लेकिन हमारे दृष्टिकोण से तथा ग्लोबल साउथ की दृष्टि से सभी महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे नेतृत्त्व द्वारा प्रकाश डाला जाएगा।
और जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया, इंडोनेशिया से शुरू होकर हमारे देश, फिर ब्राज़ील और अब दक्षिण अफ्रीका तक, ग्लोबल साउथ के देशों की लगातार जी-20 अध्यक्षता होने के कारण हमें यह अवसर मिला है कि सभी मुद्दों पर चर्चा करते हुए भी ग्लोबल साउथ के लिए महत्त्वपूर्ण विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें।
इसलिए, हम बहुत प्रसन्न हैं कि पूरे वर्ष मंत्रिस्तरीय कार्यक्षेत्रों में चल रही चर्चाओं के दौरान, हमारी अध्यक्षता में हमने जिन कई प्राथमिकताओं को रेखांकित किया था, चाहे वह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) हो, खाद्य सुरक्षा हो, या कर्ज की स्थिरता के मुद्दे, वे मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान अपनाए गए विभिन्न दस्तावेज़ों में शामिल किए गए हैं और मुझे विश्वास है कि जैसे ही हमारी टीम शिखर सम्मेलन के घोषणा-पत्र को अंतिम रूप देगी, इनमें से कुछ मुद्दों का उल्लेख वहां भी मिलेगा। धन्यवाद।
हुमा सिद्दीकी, स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल: महोदय, मैं हुमा सिद्दीक़ी, स्ट्रैटन्यूज़ ग्लोबल से हूं। आपने आईबीएसए बैठक का ज़िक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री भाग लेंगे। क्या आपको कोई जानकारी है कि इसका एजेंडा क्या होगा?
स्मिता शर्मा: नमस्ते मैं स्मिता शर्मा हूं। येशी के सवाल को आगे बढ़ाते हुए, मुझे लगता है कि जवाब देना बाकी है। और इसमें जोड़ते हुए, यह देखते हुए कि आप एक लाभकारी शिखर सम्मेलन की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अगर स्वयं अमेरिका बैठक में नहीं है और श्री मार्को रूबियो ने तो यहां तक कह दिया है कि सदस्य राष्ट्र घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर न करें, तो आप जानते हैं, पिछले कुछ वर्षों में कई विवाद ऐसे रहे हैं जो जी-20 पर प्रकाश डालते रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति भी वहां नहीं होंगे। चीन के प्रधानमंत्री संभवतः वहां उपस्थित होंगे। क्या यह सचमुच में लाभकारी बना रहेगा?
नयनिमा बसु, स्वतंत्र पत्रकार: धन्यवाद। मैं स्वतंत्र पत्रकार नयनिमा बसु हूं। मैं यह समझना चाहती हूं कि क्या आपकी अमेरिकी समकक्षों या दक्षिण अफ्रीकी समकक्षों से कोई बातचीत हुई है? क्योंकि यह पहले कभी नहीं हुआ, अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ हो। तो, आपके अनुसार संयुक्त घोषणा-पत्र या सर्वसम्मति पर कैसे पहुंचा जाएगा धन्यवाद।
नीरज: महोदय अफ्रीकी संघ का भारत में जो सम्मेलन हुआ था उसमें उनको पूरी सदस्यता दी गई थी और उसके पहले सम्मेलन प्रधानमंत्री के निर्देश पर हुए थे उस मुद्दे को बहुत मज़बूती से आपने सम्मेलन के दौरान उठाया था। दो साल बीत गए हैं, जिन मुद्दों को भारत ने उठाया था आपको कहां लगता है कि अफ्रीकी महाद्वीप में पहली बार हो रहा है। वहां तक हम लोग पहुंचें, कितना आगे बढ़े हैं ग्लोबल साउथ के मसले पर?
ब्रम्ह प्रकाश, ज़ी न्यूज़: महोदय मैं ज़ी न्यूज़ से ब्रह्म प्रकाश हूं। इस शिखर सम्मेलन में जो एजेंडा है आपने बताया, लेकिन भारत की तरफ से भी क्या कुछ अलग से इसमें मुद्दे उठाये जाएंगे खासतौर से आतंकवाद। आतंकवाद का मुद्दा भारत लगातार वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है, तो क्या इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री आतंकवाद को लेकर बातचीत करेंगे? द्विपक्षीय वार्ता में भी इसे उठाएंगे और इस मंच पर भी क्या उठाएंगे? धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): मुझे लगता है कि आईबीएसए बैठक के बारे में एक प्रश्न पूछा गया था, जो अब हो रही है। तो, जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत–ब्राज़ील–दक्षिण अफ्रीका तीन महाद्वीपों के तीन लोकतंत्र हैं, और सभी ग्लोबल साउथ से हैं और हमारे पास तीन सहयोग स्तंभों के चारों ओर आपस में समन्वय करने का एक बहुत ही विशिष्ट मंच है, मैं कहूंगा। पहला है राजनीतिक समन्वय। दूसरा है त्रिपक्षीय सहयोग, जिसमें हम लोगों के बीच संपर्क भी शामिल करते हैं और तीसरा, जो हम सामूहिक रूप से आईबीएसए के रूप में ग्लोबल साउथ के देशों के लिए करते हैं, विशेष रूप से खाद्य और भुखमरी के मुद्दे पर, वह आईबीएसए निधि के माध्यम से होता है।
तो, यह बैठक, भले ही यह शिखर सम्मेलन के दौरान हो रही हो और यह एक संक्षिप्त बैठक होगी, मुझे विश्वास है कि तीनों नेता हाल के समय में हम जिन तीन सहयोग स्तंभों के तहत काम कर रहे हैं, उनका पुनरावलोकन करेंगे। मैं यह भी बताना चाहूंगा कि इस वर्ष केवल सितंबर में, न्यूयॉर्क में यूएनजीए के दौरान, आईबीएसए के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी और उन्होंने उन कुछ विषयों पर भी एक बयान जारी किया था, जिन पर हम समान विचारधारा वाले देशों के रूप में आपस में लगातार चर्चा करते रहते हैं।
तो आईबीएसए बैठक से हमें इस तरह की उम्मीद है। लेकिन फिर भी, मैं यह अनुमान नहीं लगाऊंगा कि अंतिम चरण में नेता क्या चर्चा करेंगे और क्या निर्णय लेंगे। तो, मैं चाहूंगा कि आप इंतज़ार कीजिए, और जोहान्सबर्ग में आईबीएसए नेताओं की बैठक के बाद हम आपको ज़रूर ताज़ा जानकारी देंगे।
अमेरिकी भागीदारी से संबंधित प्रश्न के बारे में, मैं जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में हमारी अपनी भागीदारी पर टिप्पणी करना चाहूंगा। आप सभी मीडिया में चल रही बहस और सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध उस जानकारी से अवगत हैं, जो कि जी-20 के विभिन्न सदस्यों की भागीदारी से संबंधित है। इसलिए यह मेरे द्वारा टिप्पणी के लिए नहीं है। जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था, हमारे लिए जी-20 एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण मंच है। और जैसा कि मैंने आपसे उल्लेख किया, पिछले तीन–चार वर्षों में, इंडोनेशिया से शुरुआत करते हुए और उसके बाद हमारी अपनी सफल अध्यक्षता, हमने सर्वसम्मति से घोषणा पर सहमति बनाई … जिसने वास्तव में ग्लोबल साउथ को प्रभावित करने वाले कई विषयों पर नई पहलों का नेतृत्त्व किया और उन्हें आगे बढ़ाया। हमें बहुत खुशी है कि ये चर्चाएं ब्राज़ील की अध्यक्षता के तहत आगे बढ़ी हैं और निश्चित रूप से, दक्षिण अफ्रीका में भी, जैसा कि मैंने आपसे उल्लेख किया, उन चार मुख्य क्षेत्रों के अंतर्गत, जिन्हें दक्षिण अफ्रीका ने अपनी अध्यक्षता के लिए रेखांकित किया है। इन क्षेत्रों में विभिन्न चरणों के तहत वर्षभर में कई महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं।
इसलिए, हमें बहुत खुशी है कि ग्लोबल साउथ के लिए महत्त्व के मुद्दे चर्चाओं के केंद्र में हैं और उन्हें प्रमुखता दी जा रही है। इसलिए, मुझे लगता है कि जी-20 बहुत ही महत्त्वपूर्ण है और जैसा कि मैंने कहा, हमारी प्राथमिकता के मुद्दों को लगातार अध्यक्षताओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है।
आतंकवाद का मुद्दा, मुझे लगता है कि मैंने आपको पहले ही बता दिया था, हमारे लिए महत्त्वपूर्ण हर मुद्दे को उठाया जाएगा, इसे उठाया जाएगा और इसे उठाया भी गया है और जैसे ही ये द्विपक्षीय बैठकें होंगी, हम निश्चित रूप से आपको यह अपडेट देंगे कि नेताओं ने क्या निर्णय लिया है और मैं निश्चित रूप से नेताओं के स्तर पर इन वार्ताओं के निष्कर्ष का पूर्वानुमान नहीं लगाऊंगा।
आखिरकार, मुद्दा … जो आपने सवाल उठाया अफ्रीकी संघ के बारे में और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं के बारे में। जैसा कि मैंने बताया है कि यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण था कि हमारी अध्यक्षता में अफ्रीकी संघ को हमने जी-20 की रूपरेखा में लेकर आए उसको। और यह पहली बार जी-20 अफ्रीका की भूमि पर हो रही है दक्षिण अफ्रीका में, तो यह भी हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण बात है कि अफ्रीकी संघ जोहान्सबर्ग में शिखर सम्मेलन में शामिल होगा।
और जैसा मैंने बताया कि जितने भी मुद्दे हमारे ग्लोबल साउथ के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, उन पर प्रकाश डाला गया है और बहुत मज़बूती से पिछले तीन-चार सालों में। और हमें अपेक्षा है कि जो यह मुद्दे हैं जिनके ऊपर हमारी सहमति बनी है मंत्रिस्तरीय कार्यक्षेत्रों में भी उसकी किसी न किसी तरीके से घोषणा जो है, शिखर सम्मेलन में जिसके ऊपर बातचीत चल रही है जोहान्सबर्ग में उसको भी आकर्षित किया जाएगा। तो हमारे लिए, मेरी समझ से जैसा कि मैंने बताया कि ग्लोबल साउथ की दृष्टि से जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन महत्त्वपूर्ण है। धन्यवाद।
जैसा कि मैंने कहा, पिछले तीन से चार वर्षों में ग्लोबल साउथ के लिए सभी महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर मज़बूती के साथ प्रकाश डाला गया है और हमें उम्मीद है कि जिन मामलों पर हमने सर्वसम्मति बनाई है, यहां तक कि मंत्री स्तरीय कार्यक्षेत्रों में भी, वे किसी न किसी रूप में उस शिखर सम्मेलन घोषणा में प्रतिबिंबित होंगे, जो वर्तमान में जोहान्सबर्ग में बातचीत के दौर में है। तो, हमारे लिए, जैसा कि मैंने बताया, ग्लोबल साउथ की दृष्टि से यह जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन बहुत आवश्यक है। धन्यवाद।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: इसी के साथ, देवियों और सज्जनों हम आज की इस प्रेस वार्ता को समाप्त करते हैं.
हम आपको सभी द्विपक्षीय बैठकों और हमारे प्रधानमंत्री की जी-20 शिखर सम्मेलन से जुड़ी अन्य भागीदारी के बारे में हर ताज़ा जानकारी प्रदान करते रहेंगे। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
नई दिल्ली
20 नवम्बर, 2025