श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों। मुझे पता है कि दिन के समय में थोड़ी देर हो गई है या यूं कहूं कि शाम हो गई है। लेकिन प्रधानमंत्री की जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से जुड़े इस विशेष प्रेस वार्ता में हमारे बीच उपस्थित होने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
इस विशेष प्रेस वार्ता के लिए हमारे बीच विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध, सचिव श्री सुधाकर दलेला उपस्थित हैं, जो कि जी-20 मामलों की देखरेख करते हैं। साथ ही हमारे बीच दक्षिण अफ्रीका में हमारे उच्चायुक्त श्री प्रभात कुमार भी उपस्थित हैं और हमारे बीच विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री शंभू हक्की भी उपस्थित हैं, जो कि जी-20 मामलों की देखरेख करते हैं।
इसके साथ ही मैं सबसे पहले, मैं उच्चायुक्त को आमंत्रित करना चाहूंगा कि वे हमें द्विपक्षीय स्तर पर हुई प्रगति के बारे में अवगत करवाएं और इसके बाद मैं अनुरोध करूंगा कि सचिव (ईआर) अपनी प्रारंभिक टिप्पणी दें। मैं उच्चायुक्त महोदय को आमंत्रित करना चाहूंगा। मान्यवर, कृपया अपनी बात रखिए।
श्री प्रभात कुमार, दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त: धन्यवाद रणधीर। आप सभी से बात करना एक सुखद अनुभव रहा है। आप देख सकते हैं कि हमारे अपर सचिव एक्सपी जो कि दिल्ली और विदेश मंत्रालय में होने पर हमेशा मंच संभालते हैं, तो हमारा सौभाग्य है कि वे आज इस अवसर पर हमारे बीच उपस्थित हैं। तो रणधीर आपका स्वागत है। बेशक, आप जोहान्सबर्ग को बहुत ही अच्छी तरह से जानते हैं। वे कुछ समय पहले यहां महावाणिज्य दूत थे।
और मैं सुधाकर जी का स्वागत करता हूं, जो हमारे सचिव हैं, अफ्रीका में, और जी-20 तथा ब्रिक्स के साथ सचिव के तौर पर अन्य कई महत्त्वपूर्ण कार्यभार भी संभालते हैं। साथ ही स्वागत है शंभू हक्की जी का जो कि बहुपक्षीय संबंधों में हमारे संयुक्त सचिव हैं। तो, यहां एक बहुत ही उत्कृष्ट टीम मौजूद है।
तो पिछले कुछ दिनों में जो भी कुछ हुआ है इसके साथ शुरुआत करते हैं। आपने देखा होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के जोहान्सबर्ग पहुंचने पर किस गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया गया। निस्संदेह ही सरकार … जैसे ही वे वहां पहुंचें, राष्ट्रपति कार्यालय से मंत्री ने उनका स्वागत किया और वहां एक समारोह भी हुआ। उसके बाद वे सैंडटन सन पहुंचें, जहां बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
सबसे पहले, जैसे ही वे होटल में प्रवेश किए, वहां कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, नृत्य और गंगा मैया पर अनुबंधित श्रमिक समुदाय (गिरमिटिया मज़दूर) का एक गीत भी प्रस्तुत किया गया, जिसे प्रधानमंत्री ने अत्यधिक पसंद किया। जब भी प्रधानमंत्री दुनिया के किसी भी हिस्से में आते हैं, यह उनका दक्षिण अफ्रीका का चौथा दौरा था, लेकिन जब भी वे जोहान्सबर्ग आते हैं, उनका स्वागत वास्तव में अत्यंत गर्मजोशी से किया जाता है। तो इसके लिए धन्यवाद जोहान्सबर्ग।
हमारे पास लगभग 300 से 400 लोग थे, लेकिन और भी लोग आना चाहते थे। लेकिन जगह की कमी और सुरक्षा कारणों से हम केवल कम ही लोगों को समायोजित कर पाए। इसलिए, हम उन लोगों के लिए खेद प्रकट करते हैं जो शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्हें टीवी पर हमारे प्रधानमंत्री को ज़रूर देखा होगा। या शायद भविष्य में कोई और अवसर होगा जब प्रधानमंत्री यहां आएं। प्रधानमंत्री का स्वागत अत्यंत उत्साहपूर्ण था, और लोगों द्वारा दिखाई गई खुशी और प्रसन्नता देखकर हमें भी यहां आकर बहुत प्रसन्नता हुई।
कल, इस गर्मजोशी से भरे स्वागत के बाद, कुछ बैठकें हुईं। एक बैठक यहां मौजूद भारतीय मूल के तकनीकी उद्यमियों के साथ हुई। तो युवा तकनीकी उद्यमियों ने प्रधानमंत्री को उन क्षेत्रों के बारे में बताया जिनमें वे काम कर रहे हैं, और किस प्रकार उनकी तकनीक लोगों की मदद कर रही है। तो, हमारे प्रधानमंत्री ने कुछ सुझाव दिए।
इसके बाद उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के कुछ संगठनों के नेताओं के साथ बैठकें कीं और वह भी बहुत शानदार रहा, और इस प्रकार वे समुदाय से जुड़ने में सक्षम हुए, अन्यथा तो यह नेतृत्त्व के साथ ही सीमित रहता और उन्होंने उनके साथ बातचीत भी की।
इसके बाद, हमारी नैस्पर्स के साथ भी एक बैठक हुई है। नैस्पर्स के सीईओ यहां मौजूद थे, और उन्होंने, निस्संदेह, नैस्पर्स द्वारा भारत में किए गए निवेशों और आने वाले वर्षों में किए जाने वाले निवेशों के बारे में चर्चा की और प्रधानमंत्री ने कुछ सुझाव दिए कि वे किन क्षेत्रों पर ध्यान दे सकते हैं। तो वह बैठक भी बहुत अच्छी रही।
तो यह कल की गतिविधियां थी। बेशक जी-20 के संबंध में हमारे जो सचिव और संयुक्त सचिव हैं ,वे आपको जानकारी देंगे। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद रणधीर, आप सभी को नमस्कार।
जैसा कि मेरे सहयोगी रणधीर ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित जी-20 लीडर्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया। यह जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की 12वीं भागीदारी है। जैसा कि उच्चायुक्त प्रभात ने बताया कि प्रधानमंत्री इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर रहे हैं। वे 2016 में द्विपक्षीय दौरे पर आए थे, इसके बाद 2018 और 2023 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के लिए आए। यह उनकी चौथी यात्रा है।
लेकिन यह जी-20 शिखर सम्मेलन हम में से कई लोगों के लिए, विशेष रूप से भारत के लिए, खास था क्योंकि यह पहली बार था जब जी-20 शिखर सम्मेलन अफ्रीका में आयोजित हुआ और यह लगातार चौथी बार था, जब जी-20 की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ द्वारा की गई। जैसा कि आपको याद होगा कि 2022 में इंडोनेशिया ने जी-20 अध्यक्षता संभाली थी, इसके बाद भारत, ब्राज़ील और फिर दक्षिण अफ्रीका ने अध्यक्षता की।
प्रधानमंत्री ने आज शिखर सम्मेलन के उद्घाटन दिवस के दोनों सत्रों को संबोधित किया। उन्होंने माननीय राष्ट्रपति रामफोसा का गर्मजोशी से स्वागत और शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। समावेशी और सतत आर्थिक विकास पर आयोजित उद्घाटन सत्र में, जिसमें कोई वंचित न रहे, प्रधानमंत्री ने दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता के तहत समूह द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की, जैसे कि कौशल प्रवास, पर्यटन, खाद्य सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और महिला सशक्तिकरण।
प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए कुछ ऐतिहासिक निर्णयों को याद किया, जिन्हें दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता के तहत आगे बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अब विकास के नए मानकों पर विचार करने का समय है, जो वृद्धि के असंतुलन और प्रकृति के अति-दोहन को केंद्र में रखते हों। इस संदर्भ में, माननीय प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यतागत ज्ञान पर आधारित समग्र मानवतावाद के विचार का अन्वेषण किया जाना चाहिए, जो कि मानव समाज और प्रकृति के समग्र दृष्टिकोण को ध्यान में रखता हो, और इसी तरह प्रगति और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
भारत के विकास, प्रगति और सर्वजन कल्याण के दृष्टिकोण को विस्तार से बताते हुए, प्रधानमंत्री ने जी-20 के लिए कुछ कार्य-योजनाएं प्रस्तुत कीं। इनमें पहला था जी-20 वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार का निर्माण। यह भविष्य की पीढ़ियों के लाभ के लिए मानवता की सामूहिक बुद्धिमत्ता का उपयोग करेगा।
दूसरा, जी-20 अफ्रीका कौशल गुणक का निर्माण। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अफ्रीका में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए एक मिलियन प्रमाणित प्रशिक्षकों का समूह तैयार करना होगा।
तीसरा, जी-20 वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल प्रतिक्रिया टीम का निर्माण, जिसमें प्रत्येक जी-20 सदस्य देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होंगे और इसे दुनिया के किसी भी हिस्से में वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए तैनात किया जा सकेगा।
चौथा, जी-20 मुक्त उपग्रह डेटा साझेदारी स्थापित करना, एक ऐसा कार्यक्रम जिसमें जी-20 के अंतरिक्ष संस्थान विकासशील देशों को कृषि, मत्स्य पालन, आपदा प्रबंधन और अन्य गतिविधियों के लिए उपग्रह डेटा उपलब्ध कराएंगे।
पांचवां, उन्होंने जी-20 महत्त्वपूर्ण खनिज परिपत्र पहल के निर्माण की भी बात की, एक ऐसी पहल जो पुनर्चक्रण, शहरी खनन, सेकेंड-लाइफ बैटरी परियोजनाओं और विभिन्न प्रकार के नवाचार को बढ़ावा देगी, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा मज़बूत करेगी और विकास के साफ-सुथरे मार्ग विकसित करने में मदद करेगी।
और अंत में, माननीय प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थ और आतंकवाद संबंधी नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए जी-20 पहल के निर्माण का उल्लेख किया।
दोपहर में, माननीय प्रधानमंत्री ने एक लचीले विश्व पर, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण और खाद्य प्रणाली में जी-20 के योगदान के सत्र को संबोधित किया। उन्होंने सराहना की कि भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू किया गया आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता द्वारा आगे बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपदा प्रतिरोधक क्षमता के प्रति दृष्टिकोण केवल प्रतिक्रिया-केंद्रित नहीं, बल्कि विकास-केंद्रित होना चाहिए, जैसा कि भारत में आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन के उदाहरण से स्पष्ट है।
प्रधानमंत्री ने खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए जलवायु एजेंडे पर अधिक सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया। इसी संदर्भ में, उन्होंने पोषण सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने में बाजरे के महत्त्व का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने भारत की अध्यक्षता के दौरान अपनाए गए डेक्कन सिद्धांतों को भी याद किया और आशा व्यक्त की कि इस दृष्टिकोण को जी-20 खाद्य सुरक्षा रोडमैप बनाने के लिए आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विकसित देशों से यह भी कहा कि वे विकासशील देशों को किफायती वित्त और प्रौद्योगिकी प्रदान करने में अपने जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।
प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ को वैश्विक शासन संरचनाओं में अधिक भूमिका देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने दो वर्ष पूर्व भारत की अध्यक्षता के दौरान नई दिल्ली में अफ्रीकी संघ को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाए जाने को याद किया, जो कि आगे चलकर एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हुआ। उन्होंने महसूस किया कि यह समावेशी भावना जी-20 के बाहर भी जारी रहनी चाहिए।
अब, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता के परिणाम को देखते हुए, मुझे लगता है कि आप सभी मीडिया में विभिन्न माध्यमों के ज़रिए आने वाली रिपोर्टों का अनुसरण कर रहे हैं, जो कि एकता, समानता और स्थिरता के व्यापक विषय के तहत प्रस्तुत की गई हैं। इस वर्ष जी-20 ने दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता द्वारा निर्धारित चार मुख्य प्राथमिकताओं पर स्पष्ट संदेश दिया है, जिनमें आपदा प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करना; कम आय वाले देशों के लिए ऋण स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करना; सतत आर्थिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों का उपयोग करना; और न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्त जुटाना शामिल हैं।
अफ्रीका के मुद्दों और प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दिया गया, जो जी-20 दक्षिण अफ्रीका सम्मेलन के नेताओं के घोषणा- पत्र में परिलक्षित हैं, जिसे आज सम्मेलन में उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा अपनाया गया। मैं समापन से पहले यह भी कहना चाहूंगा कि यह देखना उत्साहवर्धक है कि हमारी अध्यक्षता के दौरान शुरू की गई पहलें और इनसे प्राप्त परिणाम लगातार विकसित हो रहे हैं, गति प्राप्त कर रहे हैं और जी-20 के भीतर ठोस प्रगति में रूपांतरित हो रहे हैं; तथा इन्हें दक्षिण अफ्रीकी मित्रों ने अपनी अध्यक्षता के दौरान आगे बढ़ाया है।
तो इन टिप्पणियों के साथ अब मैं विराम दूंगा। मैं केवल यह कहना चाहूंगा कि कल शिखर सम्मेलन का तीसरा सत्र है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री तीसरे सत्र के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और इसके साथ ही कल सुबह भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं की अन्य बैठकें भी होगी।
तो इसी के साथ, मुझे लगता है कि मुझे अब विराम देना चाहिए, मुझे आपके प्रश्नों का उत्तर देने में खुशी होगी। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: आपके सवालों की ओर आगे बढ़ने से पहले मैं आपको प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बैठकों के बारे में बताना चाहूंगा।
अपने आगमन के पहले दिन, प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के विविधीकरण और गहनता पर चर्चा की। जैसा कि आप में से कुछ लोग जानते होंगे, यह वह संबंध है जिसे 2020 में समग्र रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाया गया था। और पिछले पांच वर्षों में, यह संबंध अत्यंत सफल रहा है और हमने इसमें महत्त्वपूर्ण प्रगति की है।
प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दोनों नेताओं ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई को मज़बूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने यह भी चर्चा की कि इस संबंध को आगे कैसे बढ़ाया जाए और इसी संदर्भ में उन्होंने राजनीतिक संबंधों, रणनीतिक संबंधों, रक्षा और सुरक्षा मामलों, व्यापार और निवेश संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ महत्त्वपूर्ण खनिज, गतिशीलता, शिक्षा, ऊर्जा साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग और दोनों देशों के बीच जन-जन संबंधों को कैसे मज़बूत किया जाए, इस पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक महत्त्व के मुद्दों पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने कई द्विपक्षीय वार्ताएं भी कीं, और हमने इन सभी बैठकों का विवरण भी साझा किया है। आज जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर, प्रधानमंत्री की फ्रांस के राष्ट्रपति से मुलाकात हुई, भारत-फ्रांस संबंध, निश्चित ही, अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं और यह वैश्विक हित के लिए एक सकारात्मक शक्ति हैं।
उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। यह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ उनकी दूसरी बैठक थी, और यह एक ऐसा देश है जिसके साथ हमारे विशेष रणनीतिक साझेदारी संबंध हैं।
उन्होंने ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीथ स्टार्मर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, मलेशिया के प्रधानमंत्री, सिंगापुर के प्रधानमंत्री, इथियोपिया के प्रधानमंत्री, जर्मन चांसलर, वियतनाम के प्रधानमंत्री के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन के महासंचालक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक से भी मुलाकात की। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने अंगोला के राष्ट्रपति और सिएरा लियोन के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की।
हमने इन सभी बैठकों का विवरण प्रकाशित किया है, इसलिए मैं आपका ध्यान उन्हीं की ओर दिलाना चाहूंगा। इसी के साथ आपके सवालों की ओर बढ़ते हैं।
अमृत पाल सिंह, डीडी इंडिया: मेरा सवाल सचिव (ईआर) से है। मैं डीडी इंडिया से अमृत पाल सिंह हूं। महोदय, जोहान्सबर्ग नेताओं के घोषणा-पत्र को आज अपनाया गया। आप किस हद तक कहेंगे कि 2023 दिल्ली शिखर सम्मेलन के परिणाम जोहान्सबर्ग में आगे बढ़ाए गए?
सुधि रंजन सेन, ब्लूमबर्ग: धन्यवाद महोदय। ब्लूमबर्ग से सुधी रंजन हूं। महोदय, मेरे कुछ सवाल हैं और कुछ स्पष्टीकरण चाहता हूं। महोदय, सबसे पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लिए गए रुख के कारण कुछ असंतोष उभरता हुआ दिखाई दिया है। इस पर भारत की क्या स्थिति है?
दूसरा प्रश्न यह है कि आईबीएसए नेताओं का शिखर सम्मेलन इस समय क्यों आयोजित किया जा रहा है? मेरा मानना है कि यह लगभग 11 वर्षों बाद हो रहा है। क्या इसके पीछे कोई विशेष कारण है? क्या व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता इनमें से एक कारण है?
और अंत में, महोदय अगर आप अनुमति दें तो, क्या आप हमें उस त्रिपक्षीय बैठक के बारे में कुछ विवरण दे सकते हैं जो प्रधानमंत्री ने की थी? इस त्रिपक्षीय बैठक का मुख्य उद्देश्य या उपलब्धि क्या थी?
काया, एसएबीसी न्यूज़: नमस्कार महोदय, मैं एसएबीसी न्यूज़ से काया हूं। मेरा सवाल सचिव (ईआर) से है। महोदय, स्वाभाविक है कि यह जी-20 शिखर सम्मेलन भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और अन्य चुनौतियों के बीच एक महत्त्वपूर्ण समय पर हो रहा है। तो क्या आपको लगता है कि जी-20 नेताओं की उपस्थिति यह संकेत देती है कि इन परिस्थितियों के बावजूद बहुपक्षवाद अब भी सुरक्षित और मज़बूत है?
और शायद भारत अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के साथ इस पर चर्चा करे। ट्रम्प वहां उपस्थित नहीं हैं, जो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। धन्यवाद।
काल्डेन ओंगमु, विऑन न्यूज़: नमस्कार, मेरा नाम काल्डेन ओंगमु है। मैं विऑन न्यूज़ से हूं। मेरा सवाल आप में से किसी भी एक के लिए है। दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने आज शाम घोषणा की कि वे कल अमेरिका को औपचारिक रूप से जी-20 अध्यक्षता नहीं सौंपेंगे। पहले ऐसे कभी नहीं हुआ था। इस पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिये। धन्यवाद।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): इन प्रश्नों के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। पहला प्रश्न यह था कि दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने हमारी अध्यक्षता के दौरान दो साल पहले जी-20 सदस्यों द्वारा शुरू की गई कुछ प्रमुख पहलों को कितनी हद तक आगे बढ़ाया है।
जैसा कि मैंने आपको बताया, माननीय प्रधानमंत्री ने कुछ ऐतिहासिक निर्णयों को याद किया जो नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए थे और जिन्हें सबसे पहले ब्राज़ील और फिर दक्षिण अफ्रीका ने आगे बढ़ाया। शायद आपको इसका एक संक्षिप्त रूप दिखाने के लिए, मैं सभी का विवरण नहीं दे सकता, लेकिन निश्चित रूप से कुछ मुख्य बातें जो मेरे ध्यान में आती हैं, वे वित्तीय क्षेत्र से संबंधित हैं। इनमें बहुपक्षीय विकास बैंकों, ऋण जोखिम के मुद्दे, और तीसरा, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के संदर्भ में वित्तीय समावेशन शामिल हैं।
नई दिल्ली में जी-20 नेताओं द्वारा बहुपक्षीय विकास बैंकों को बेहतर, बड़ा और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुधार की प्रतिबद्धता को आधार बनाते हुए, ब्राज़ीलियाई अध्यक्षता के दौरान इस विषय पर एक रोडमैप तैयार किया गया था, और इस वर्ष दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता के दौरान, इस रोडमैप के कार्यान्वयन की प्रगति रिपोर्ट का जी-20 सदस्यों द्वारा स्वागत किया गया। तो इस दिशा में पिछले दो वर्षों में प्रगति हुई है, जो ग्लोबल साउथ के सदस्यों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
वित्तीय समावेशन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, डीपीआई जैसा कि हम भारत में कहते हैं, इसके उपयोग द्वारा उत्पादकता में वृद्धि के संदर्भ में, एक वित्तीय समावेशन कार्य योजना बनाई गई थी, जिसे ब्राज़ीलियाई अध्यक्षता ने आगे बढ़ाया और इसके बाद इस वर्ष दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता द्वारा आगे बढ़ाया गया। और इस वर्ष दक्षिण अफ्रीका की प्राथमिकता, वित्तीय समावेशन और डीपीआई के कार्यान्वयन के संदर्भ में केवल पहुंच से उपयोग की दिशा में बढ़ना, पूरी तरह से वित्तीय समावेशन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे व तकनीक के उपयोग के माध्यम से उत्पादकता वृद्धि की संपूर्ण रूपरेखा को मज़बूत करती है।
तीसरा मुद्दा, जो मैंने आपको बताया, वह ऋण जोखिम से संबंधित था और यहीं पर, नई दिल्ली घोषणा-पत्र और नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के दौरान यह घोषणा की गई थी कि हम निम्न और मध्यम आय वाले देशों की ऋण जोखिमों को कैसे संबोधित करेंगे। यह हमारी अध्यक्षता के दौरान एक प्राथमिकता का विषय रहा, और इसके बाद ब्राज़ीलियाई अध्यक्षता ने भी इसे आगे बढ़ाया गया और इसे और अधिक गति दी गई और इस वर्ष, मुझे वास्तव में दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता को बधाई देनी चाहिए कि उन्होंने जी-20 मंत्रिस्तरीय घोषणापत्र में ऋण स्थिरता को शामिल किया। तो, मुझे लगता है कि यह सब दर्शाता है कि जी-20 सदस्य इन मुद्दों को संबोधित करने में कितनी गंभीरता और महत्त्व देते हैं, जैसा कि मैंने उल्लेख किया।
वित्तीय क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए, मैं कहूंगा कि घोषणा-पत्र महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के लिए प्रतिबद्ध है, और सभी निर्णय-निर्धारण स्तरों पर महिलाओं की पूर्ण, समान और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने की बात करता है। यह कुछ ऐसा था जिसे हमारी अध्यक्षता के दौरान प्रमुख रूप से रेखांकित किया गया। इसे ब्राज़ीलियाई और दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षताओं दोनों ने आगे बढ़ाया।
दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता द्वारा महत्वाकांक्षी आपदा जोखिम न्यूनीकरण वित्तपोषण तंत्र को भी समर्थन दिया गया है और घोषणा-पत्र में उस आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना पहल का भी उल्लेख किया गया है, जिसे कुछ वर्ष पहले भारत ने शुरू किया था।
जलवायु के क्षेत्र में, जी-20 नेताओं ने वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और ऊर्जा दक्षता सुधार की वार्षिक दर को दोगुना करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह बिंदु माननीय प्रधानमंत्री ने आज सत्र 1 में अपने वक्तव्य में प्रस्तुत किया। नेताओं के घोषणा-पत्र में भारत की सतत विकास के लिए जीवनशैली पहल। जिसे हम भारत में लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) कहते हैं, इसे भी प्रमुखता से उल्लिखित किया गया है। तो यह आज के नेताओं के घोषणा-पत्र में भी संदर्भित है।
इसके अलावा, यह स्वीकार किया गया है कि विकासशील देशों की जलवायु ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जलवायु वित्त पोषण को अरबों डॉलर से खरबों डॉलर तक बढ़ाने की आवश्यकता है। इस बात को हमारी अध्यक्षता के दौरान जलवायु वित्त पोषण बढ़ाने के संदर्भ में उठाया गया था और हमें खुशी है कि इस पहल और इस पहलू को रेखांकित करने की आवश्यकता को दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने बहुत महत्त्वपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया है। नेताओं ने व्यापक एआई सिद्धांतों को भी स्वीकार किया और फिर से पुष्टि की, जिसमें मानव-केंद्रित, सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास पर ज़ोर दिया गया है।
तो मैं कहूंगा कि ये सभी बातें आज यहां एकत्रित सदस्यों द्वारा अपनाए गए घोषणा-पत्र का एक बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं और हमें बहुत खुशी है कि दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने वास्तव में इस वर्ष अपनी अध्यक्षता के दौरान गतिविधियों और सहभागिता को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया, जिससे ठोस परिणाम सामने आए, जैसा कि नेताओं के दस्तावेज़ में परिलक्षित है।
मेरे सहयोगियों ने मुझे याद दिलाया कि भारत की समग्र स्वास्थ्य देखभाल परंपरा को मान्यता देते हुए साक्ष्य-आधारित, पारंपरिक और पूरक चिकित्सा की भूमिका को भी स्वीकार किया गया है। यह भी नेताओं के घोषणा-पत्र में परिलक्षित होता है। तो कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि यह एक बहुत ही व्यापक दस्तावेज़ है जिसे आज सदस्यों द्वारा अपनाया गया है।
घोषणा-पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और तौर-तरीकों की स्पष्ट रूप से निंदा भी शामिल है। इसलिए हमें इस उल्लेख से बहुत खुशी है। यह हमारी दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, और हमें यह देखकर खुशी है कि जी-20 ने सामूहिक रूप से आतंकवाद के सभी रूपों और तौर-तरीकों की निंदा की है। कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि चार स्तंभों में बहुत ही लाभकारी परिणाम सामने आए हैं, जो ग्लोबल साउथ के देशों, विशेष रूप से भारत के विचारों को आगे बढ़ाते हैं। और मुझे विश्वास है कि हम सभी इन विषयों पर अगले जी-20 अध्यक्षता में भी काम करना जारी रखेंगे। यही प्रथम पहलू है।
दूसरा प्रश्न अमेरिका की स्थिति से संबंधित था। मैं अमेरिका की भागीदारी या गैर-भागीदारी पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। मैं केवल भारत की भागीदारी पर ही टिप्पणी करना और ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा और मैंने कुछ समय इस पर बताया कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने आज शिखर सम्मेलन में अपने वक्तव्य में किन प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला, और कैसे कुछ ऐसे विचार जो हमारे लिए महत्त्वपूर्ण थे और जिन्हें नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के दौरान उठाया गया था, उन्हें दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने आगे बढ़ाया।
आपने आईबीएसए, यानी भारत–ब्राज़ील–दक्षिण अफ्रीका त्रिपक्षीय मंच का उल्लेख किया। यह मंच कुछ समय से अस्तित्व में है। नेताओं की बैठक कुछ अंतराल के बाद हो रही है, लेकिन आईबीएसए नेतृत्त्व लगातार संपर्क में रहा है। केवल इस वर्ष सितम्बर में, यूएनजीए के अवसर पर आईबीएसए देशों के विदेश मंत्रियों की भी बैठक हुई थी और उन्होंने एक बयान भी जारी किया और हमारी आईबीएसए रूपरेखा में सहयोगात्मक गतिविधियां हैं। तीनों देशों द्वारा स्थापित आईबीएसए निधि के माध्यम से हम ग्लोबल साउथ के अन्य देशों में एक साथ काम करने का प्रयास करते हैं, जिसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और गरीबी उन्मूलन से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।
हम आईबीएसए सदस्यों के बीच रक्षा क्षेत्र में भी अभ्यास करते हैं। हमारी और भी पहलें हैं जो हमारे लोगों के बीच के संबंधों को मज़बूत करती हैं। इसलिए, आईबीएसए की संप्रभुता के तहत हम निकटता से काम कर रहे हैं और हमें बहुत खुशी है कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने कल जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर एक बैठक के आह्वान का निर्णय लिया है और मैं बैठक के परिणाम के बारे में पूर्वानुमान नहीं लगाना चाहूंगा, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि इसमें सभी तीन देशों के लिए महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
आपने त्रिपक्षीय संबंध, यानी भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बारे में पूछा, और मैं रणधीर से अनुरोध करूंगा कि वे इस प्रश्न का उत्तर दें।
सदस्यों की भागीदारी के संदर्भ में, मैं केवल यह कहना चाहूंगा कि हम जी-20 के मंत्रिस्तरीय कार्यसमूहों, विभिन्न सत्रों और शिखर सम्मेलन की तैयारियों में बहुत सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। हमने अपनी पूरी कोशिश की है कि हम रचनात्मक और सकारात्मक बने रहें, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता का समर्थन करें और यह सुनिश्चित करें कि ऐसे परिणाम सामने आएं जो विशेष रूप से ग्लोबल साउथ, भारत और दक्षिण अफ्रीका के लिए महत्त्वपूर्ण हों और हमें बहुत खुशी है कि आज एक नेताओं का घोषणा-पत्र अपनाया गया है।
अंतिम प्रश्न सौंपने के बारे में है। फिर से कहना चाहूंगा कि यह प्रश्न शायद जिसका आपको दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता की ओर से संदर्भ प्राप्त करना चाहिए। इस प्रश्न पर मेरे पास कोई टिप्पणी नहीं है। रणधीर अगर इसका जवाब देना चाहें?
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद। भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के प्रधानमंत्री आज जी-20 के मंच पर मिले। तीनों नेताओं ने एक त्रिपक्षीय सहयोग तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। यह ऑस्ट्रेलिया–कनाडा–भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी है।
महत्त्वपूर्ण यह है कि यहां तीन देश हैं, जो लोकतंत्र हैं और तीन अलग-अलग महाद्वीपों में स्थित हैं, और यह त्रिपक्षीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक साथ आए हैं। यह सहयोग उभरती प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण, स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी और कई अन्य ऐसे क्षेत्रों में किया जाएगा, जो कि आज 21वीं सदी में हमारे जीवन को संचालित करते हैं।
तीनों नेताओं ने अपनी टीमों को यह भी निर्देश दिया है कि उन्हें 2026 की पहली तिमाही में बैठक करनी चाहिए, ताकि उस दृष्टि को आकार दिया जा सके जो उन्होंने स्थापित की है। इसलिए जल्द ही हमारी टीमें तय करेंगी कि हम इस सहयोगी प्रयास को आगे कैसे बढ़ाएंगे और हम इसे ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ हमारे संबंधों में एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखते हैं। अब तीनों देश अपनी-अपनी क्षमताओं और संसाधनों को एकत्रित करेंगे और देखेंगे कि हम न केवल तकनीक, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित मुद्दों को अपने लिए कैसे हल कर सकते हैं, बल्कि इसे दूसरों के लिए भी कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है।
तो हमने एक विस्तृत संयुक्त बयान जारी किया है, एक सामान्य संयुक्त बयान जिसे तीनों देशों द्वारा अपनाया गया है। यह आपको जोहान्सबर्ग में शुरू किए गए इस बहुत महत्त्वपूर्ण सहयोग के बारे में और अधिक विवरण देगा। धन्यवाद।
अज्ञात वक्ता: हां, (अश्रव्य) मैं स्वतंत्र मीडिया से हूं। मैं पैनल से यह जानना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर कैसा महसूस करते हैं कि अफ्रीका के अधिकारों, विशेषकर उनके महत्त्वपूर्ण खनिज संसाधनों के संदर्भ में, अक्सर लाभ नहीं पहुंचता। अफ्रीका जी-20 के समर्थन का उपयोग कैसे कर सकता है, ताकि आर्थिक भागीदारी की पूरी क्षमता को साकार किया जा सके।
अखिलेश सुमन, डीडी न्यूज़: महोदय मैं डीडी न्यूज़ से अखिलेश सुमन हूं। ऋण पुनर्गठन एक बड़ी समस्या रही है और हमने देखा है कि हमारे पड़ोस में श्रीलंका में खासतौर पर ऋण एक बड़ी समस्या रही है। तो ऐसे में जी-20 में जो चर्चाएं हुई ऋण के बारे में, सतत ऋण के बारे में और वास्तविक रूप से क्या सुझाव रहे हैं इसके बारे में?
तांदो म्याको, द बिज़नेस डे: नमस्कार, मेरा नाम तांदो म्याको है और मैं द बिज़नेस डे से हूं। मेरा सवाल सचिव महोदय के लिए है। मेरा प्रश्न यह है कि स्पष्ट है कि जी-20 के एक सदस्य की इस शिखर सम्मेलन में अनुपस्थिति है और आप उस अनुपस्थिति पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। ऐसे में, सदस्य भविष्य में इस शिखर सम्मेलन के घोषणा-पत्र और 2024, 2023 के नई दिल्ली जैसी अन्य घोषणाओं को कैसे सुरक्षित और स्थिर बनाएंगे, जबकि जी-20 अध्यक्षता अब फिर से वैश्विक उत्तर की ओर लौट रही है?
लोमस, आईएएनएस: महोदय मैं आईएएनएस से लोमस हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले सत्र मे चार प्रस्ताव रखे थे क्या उसको लेकर दक्षिण अफ्रीका या अन्य देशों से कोई प्रतिक्रिया मिली?
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): इन प्रश्नों के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। महत्त्वपूर्ण खनिजों के मुद्दे पर, और यह कि इन संसाधनों का उपयोग इस तरह से कैसे किया जाना चाहिए जो टिकाऊ हो, प्रकृति का सम्मान करे और सतत विकास की ओर ले जाए।
जैसा कि मैंने आपको पहले बताया, माननीय प्रधानमंत्री ने आज के दूसरे सत्र में अपने वक्तव्य में एक स्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें महत्त्वपूर्ण खनिजों के परिपत्र उपयोग पर एक पहल शुरू करने या विचार करने का सुझाव दिया गया। पूरी अवधारणा यह है कि हम पुनर्चक्रण को कैसे बढ़ावा दें, संसाधनों का टिकाऊ उपयोग कैसे करें, शहरी खनन कैसे करें, और इस क्षेत्र में नवाचार का उपयोग कैसे करें। और ये गतिविधियां कैसे आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को मज़बूत कर सकती हैं और विकास के स्पष्ट मार्ग विकसित कर सकती हैं। इसलिए मैं उस प्रस्ताव की ओर संदर्भित करूंगा, जो कि माननीय प्रधानमंत्री ने जी-20 सदस्यों के विचारार्थ प्रस्तुत किया है।
एक प्रश्न यह भी था कि हमारे प्रधानमंत्री ने आज चार प्रस्तावों का ज़िक्र किया। वास्तव में, उन्होंने कुल मिलाकर दो सत्रों में छह प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, और मैंने यह सभी पहलें आप सभी को सूचीबद्ध करके दी हैं।
हम तुरंत किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं रखते। ये प्रस्ताव आज सत्रों में प्रस्तुत किए गए हैं। लेकिन हम भविष्य में जी-20 सदस्यों के साथ बातचीत करना चाहेंगे। और मुझे यकीन है कि जी-20 सदस्य भी उस पर विचार करेंगे जो हमारे प्रधानमंत्री ने प्रस्तुत किया है। ये बहुत महत्त्वपूर्ण और प्रासंगिक पहलें हैं, विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता के विषय के संदर्भ में। और जैसे ही हम अगले अध्यक्षता की ओर बढ़ेंगे, हम, जैसा कि मैंने कहा कि जी-20 सदस्यों के साथ और अधिक संवाद करना चाहेंगे और देखेंगे कि अन्य सदस्यों के समर्थन से इसे कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
आपने सवाल पूछा ऋण के बारे में। जैसा मैंने बताया कि यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण मुद्दा है जो हमारे निम्न आय और मध्यम आय के जो हमारे देश है और इसका जो है हमारी नई दिल्ली की अध्यक्षता में इस पर काफी ध्यान केंद्रित किया गया था, हम लोगों ने इस मुद्दे के बारे में। इससे हम किस तरह से निपटेंगे, ऋण का मुद्दा अभी काफी गंभीर है विकासशील देशों के लिए, अफ्रीका के लिए और जैसा मैंने बताया आपको कि वित्तीय कार्य-चरण में इस मुद्दे पर काफी विचार-विमर्श हुआ और इसके बाद इसके बारे में पूरा एक जी-20 मंत्रिस्तरीय वक्तव्य भी है कि किस तरह से ऋण सततता के लिए हम क्या कम कर सकते हैं। और इसमें हमें चाहिए कि हम इसके स्तर को असतत न बनाएं और दूसरे जो पूंजी की उच्च लागत है विकासशील देशों के लिए, उसे हम किस तरह से प्रबंधित करेंगे। मैं आपको यही कहूंगा कि इसके जो बयान हैं उसको आप ध्यान से पढ़िए और इसमें काफी विचार-विमर्श करने के बाद में इस बयान को तैयार किया गया है।
सदस्यों की भागीदारी के संदर्भ में, जैसा कि आपने पूछा और जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया, मैं केवल जी-20 विचार-विमर्श में भारत की भागीदारी के बारे में ही बात कर सकता हूं। हम इस मंच, जी-20 मंच को अत्यंत महत्त्व देते हैं और हम इस महत्त्वपूर्ण समूह में किए जाने वाले सभी कार्यों के सभी पहलुओं पर सक्रिय रूप से सहभागिता जारी रखना चाहेंगे। धन्यवाद।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं केवल यह जोड़ना चाहूंगा कि जी-20 के विचारार्थ प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत छह प्रस्तावों में से सभी प्रस्ताव यहां अफ्रीका में विशेष रूप से महत्त्व रखते हैं, क्योंकि ये सभी प्रस्ताव इस महाद्वीप की जनता की आकांक्षाओं और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं से संबंधित हैं। और असल में, यह उससे भी आगे बढ़कर पूरी दुनिया के कल्याण की बात करता है। इसलिए, हम जी-20 देशों के साथ इन छह प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।
श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ईआर): और शायद इस मामले में रणधीर, मैं बस यह जोड़ना चाहूंगा, जैसा कि मेरे सहयोगी रणधीर ने कहा, ये बहुत ही महत्त्वपूर्ण पहलें हैं जिन्हें हमारे प्रधानमंत्री ने प्रस्तुत किया है और एक विशेष पहल जो हमारे प्रधानमंत्री ने पहले सत्र में पेश की, वह जी-20 अफ्रीका कौशल गुणक के बारे में थी।
अफ्रीका की जनसंख्या बहुत बड़ी है। अफ्रीका में युवा जनसंख्या भी बहुत बड़ी है और यदि हमें स्थिर और तेज़ी से आर्थिक विकास चाहिए, तो कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इसी संदर्भ में हमारे प्रधानमंत्री ने यह प्रस्ताव पेश किया है, जिसका अत्यधिक महत्त्व है और मुझे कहना होगा कि अफ्रीका में इस पर गहरी रुचि होनी चाहिए। धन्यवाद।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: अगर कोई और सवाल नहीं हैं, तो देवियों और सज्जनों आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। और हम जी-20 के दौरान कल होने वाली अपनी चर्चाओं के प्रति अत्यधिक उत्सुक हैं। धन्यवाद।
श्री प्रभात कुमार, दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त: बहुत-बहुत धन्यवाद। देर शाम हमारे बीच उपस्थित होने के लिए आप सभी का धन्यवाद।
जोहान्सबर्ग
22 नवम्बर, 2025