श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार देवियों और सज्जनों। प्रधानमंत्री की आगामी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा के उपलक्ष्य में सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा और सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्री अरुण चटर्जी द्वारा रखी गई इस विशेष प्रेस वार्ता में उपस्थित होने के लिए आप सभी का धन्यवाद। इस प्रेस वार्ता में हमारे साथ अपर सचिव (खाड़ी) श्री असीम महाजन, संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएएनए) श्री सुरेश कुमार और संयुक्त सचिव (पूरी और दक्षिणी अफ्रीकी विभाग) श्री जनेश जैन भी उपस्थित हैं।
इसी के साथ मैं सचिव (दक्षिण) को आमंत्रित करूंगा कि वे प्रधानमंत्री की जॉर्डन, इथियोपिया की आगामी यात्रा पर आप सभी को समग्र विवरण प्रदान करें।
डॉ. नीना मल्होत्रा, सचिव (दक्षिण): धन्यवाद रणधीर। नमस्कार, हमारे बीच उपस्थित होने के लिए आप सभी का धन्यवाद।
आइये यात्रा के पहले चरण जॉर्डन से शुरू करें। महामहिम राजा अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 से 16 दिसम्बर, 2025 तक जॉर्डन के हैशमाइट साम्राज्य की द्विपक्षीय यात्रा पर रहेंगे। यह प्रधानमंत्री की जॉर्डन की पहली पूरी तरह से द्विपक्षीय यात्रा होगी, जो कि भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75वें वर्ष के साथ हो रही है।
आप में से कुछ लोगों को याद होगा कि पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी फरवरी 2018 में फिलिस्तीन जाते समय जॉर्डन से गुज़रे थे। हालांकि यह एक पारगमन यात्रा थी, फिर भी महामहिम किंग ने उन्हें असाधारण सम्मान दिया और यह यात्रा पारगमन यात्रा से कहीं बढ़कर साबित हुई। यह मौजूदा पूरी द्विपक्षीय यात्रा 37 साल के अंतराल के बाद हो रही है।
भारत और जॉर्डन गर्मजोशी भरे और मैत्रीपूर्ण संबंध साझा करते हैं, जो कि आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित हैं। यह संबंध राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा सहित कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं और इसमें दोनों देशों के लोगों के बीच मज़बूत संबंध भी शामिल हैं।
हमारे द्विपक्षीय संबंध मज़बूत नेतृत्त्व पर आधारित हैं। 2018 में महामहिम की पिछली यात्रा के बाद से, दोनों नेता चार बार मिल चुके हैं, जिसमें सबसे हाल की मुलाकात जून 2024 में इटली में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। दोनों नेता फोन पर भी एक-दूसरे के संपर्क में है और दोनों नेताओं ने हाल ही में अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमलों के बाद भी बात की थी, इस दौरान महामहिम ने आतंकी हमलों की निंदा की और कहा कि आतंकवाद को उसके सभी रूपों और तौर-तरीकों को ख़ारिज किया जाना चाहिए। महामहिम ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत की लड़ाई के लिए अपने समर्थन की बात दोहराई और दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में सहयोग किया है, जिसमें महामहिम द्वारा शुरू की गई पहलों जैसे कि अकाबा प्रक्रिया में भारत की भागीदारी शामिल है।
भारत और जॉर्डन के बीच मज़बूत आर्थिक संबंध भी हैं, भारत जॉर्डन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। जॉर्डन हमारे लिए उर्वरक का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है, विशेष रूप से फॉस्फेट और पोटाश के क्षेत्र में। भारत की इफको (आईएफएफसीओ) और जॉर्डन की जॉर्डन फॉस्फेट माइंस कंपनी (जेपीएमसी) के बीच 860 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से जॉर्डन इंडिया फर्टिलाइज़र कंपनी (जेआईएफसीओ) नाम का एक संयुक्त उद्यम भी है।
निवेश के क्षेत्र में, जॉर्डन के योग्य औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश वाली करीब 15 परिधान कंपनियां स्थित हैं।
जॉर्डन में 17,500 से अधिक भारतीयों का एक जीवंत प्रवासी समुदाय रहता है, जो कि वस्त्र, निर्माण, विनिर्माण तथा अन्य विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है। कनेक्टिविटी के संदर्भ में, रॉयल जॉर्डनियन ने हाल ही में अम्मान और मुंबई के बीच सीधी उड़ानें शुरू की हैं और अपनी सेवाओं का विस्तार नई दिल्ली तक करने की योजना बना रही है। जॉर्डन भारतीय पर्यटकों को आगमन पर पर्यटक वीज़ा प्रदान करता है और हाल ही में उसने इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा भी शुरू किया है।
जहां तक दौरे के कार्यक्रम की बात है, प्रधानमंत्री 15 दिसम्बर को अम्मान पहुंचेंगे। उसी दिन, वह महामहिम किंग अब्दुल्ला द्वितीय से आमने-सामने बातचीत करेंगे, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी। अगले दिन, प्रधानमंत्री और किंग द्वारा भारत–जॉर्डन व्यापार कार्यक्रम को संबोधित करने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख व्यवसायी भाग लेंगे।
प्रधानमंत्री जॉर्डन में जीवंत भारतीय समुदाय के साथ बातचीत भी करेंगे और क्राउन प्रिंस के साथ, प्रधानमंत्री ऐतिहासिक शहर पेट्रा का दौरा करेंगे, यह एक ऐसा शहर है जिसके भारत के साथ प्राचीन व्यापारिक संबंध हैं, बेशक अगर मौसम ठीक रहा तो। वहां से, वह यात्रा के दूसरे चरण के लिए प्रस्थान करेंगे, जो कि इथियोपिया है। जहां तक इथियोपिया की बात है, तो उसकी तारीखें 16 और 17 दिसम्बर 2025 हैं। यह इथियोपिया की एक राजकीय यात्रा है, यह इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद के निमंत्रण पर है और यह 2011 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है।
इथियोपिया ग्लोबल साउथ और अफ्रीकी परिप्रेक्ष्य में एक महत्त्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार है। इथियोपियाई प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ के पिछले संस्करणों में एक प्रमुख प्रतिभागी और मुख्य वक्ता रहे हैं। यह मौजूदा दौरा दक्षिण-दक्षिण सहयोग को गहरा करने और अफ्रीका के साथ साझेदारी को मज़बूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
यह दौरा अर्थव्यवस्था, व्यापार, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करने में भी मदद करेगा। आर्थिक मोर्चे पर, चर्चाओं में व्यापार के विविधीकरण, कनेक्टिविटी को मज़बूत करने तथा अवसंरचना, आईटी, खनन, कृषि और विनिर्माण में निवेश के नए अवसरों की पहचान पर ध्यान केंद्रित रहने की उम्मीद है।
भारत और इथियोपिया शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में साझेदारी का एक लंबा इतिहास साझा करते हैं। भारत आईटीईसी और आईसीसीआर छात्रवृत्तियों के माध्यम से इथियोपियाई छात्रों और पेशेवरों को छात्रवृत्ति तथा प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करता रहा है। यहां उल्लेखनीय बात यह है कि इथियोपिया में कई राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति, जो भारतीय विश्वविद्यालयों के उपकुलपति या पंजीयक के समकक्ष हैं, उन्होंने आईसीसीआर और अन्य सरकारी प्रायोजित छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भारत में अध्ययन किया है। इसलिए, आईटीईसी इथियोपिया में मानव संसाधन विकास के लिए कौशल उन्नयन और पुनः-कौशल प्रशिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण मंच बना हुआ है।
जलवायु कार्रवाई सहयोग का एक और महत्त्वपूर्ण स्तंभ होगा। भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से इथियोपिया की नवीकरणीय ऊर्जा पहलों का समर्थन करता रहा है और इथियोपिया में इसके योगदान कई पहलों के साथ महत्त्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ा है, जैसे कि अदीस अबाबा विश्वविद्यालय में सौर प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संसाधन केंद्र (एसटीएआरसी)। साथ ही, इथियोपिया की पहली ग्रिड से जुड़ी सौर रूफटॉप परियोजना की सफलता और कई अन्य इसी तरह की गतिविधियां भी उल्लेखनीय हैं।
इथियोपिया में कार्यक्रम के संबंध में, प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद के साथ आमने-सामने और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। हमारे प्रधानमंत्री संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। भारतीय समुदाय के साथ बातचीत और कुछ अन्य कार्यकलाप भी हैं। इस यात्रा से इथियोपिया में भारतीय प्रवासी समुदाय की महत्त्वपूर्ण भूमिका भी और मज़बूत होगी, जो दोनों देशों के बीच एक प्राकृतिक सेतु के रूप में कार्य करता है।
माननीय प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान कई समझौता ज्ञापन और अन्य समझौते हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है। ये हमारे बहुआयामी साझेदारी को मज़बूत करेंगे, विकास सहयोग का विस्तार करेंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खोलेंगे।
यह यात्रा भारत की इथियोपिया के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में भूमिका को पुनः पुष्टि करती है। भारत एक स्थिर, सुरक्षित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था बनाने और एजेंडा 2063 और सामान्य वैश्विक उद्देश्यों के अनुरूप अफ्रीका की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए इथियोपिया के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें लगता है कि आगामी यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने और आने वाले वर्षों में सहयोग के नए मार्ग निर्धारित करने की संभावना रखती है।
यहां अब मैं विराम देना चाहूंगी और आपके सवालों की ओर बढ़ते हैं।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद महोदया। अब, मैं सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) को प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा के बारे में जानकारी देने के लिए आमंत्रित करता हूं।
श्री अरुण चटर्जी, सचिव (सीपीवी एवं ओआईए): धन्यवाद रणधीर। आप सभी को नमस्कार। आप सभी से मिलकर और आपको ओमान में माननीय प्रधानमंत्री के आने वाले दौरे के बारे में जानकारी देते हुए मुझे बहुत ही खुशी हो रही है।
सचिव दक्षिण ने जहां पर विवरण को समाप्त किया है वहीं से मैं शुरू करता हूं। ओमान सल्तनत के राष्ट्राध्यक्ष, महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 17 और 18 दिसम्बर 2025 को ओमान का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल होगा। फरवरी 2018 में अपनी पिछली यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री की ओमान सल्तनत की यह दूसरी यात्रा है। यह दिसम्बर 2023 में ओमान के सुल्तान की भारत की राजकीय यात्रा के बाद हो रही है। यह दौरा बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय हो रहा है जब भारत और ओमान मिलकर राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
जैसा कि पहले बताया गया है, महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक ने दिसम्बर 2023 में भारत का राजकीय दौरा किया था। प्रधानमंत्री और महामहिम सुल्तान ने मिलकर दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने के लिए भविष्य के रोडमैप पर सहमति जताई थी। मैं आपको बता सकता हूं कि इसके तहत पहले ही कई पहल की जा चुकी हैं, और कुछ पर काम चल रहा है।
साथियों, भारत का ओमान सल्तनत के साथ एक विशेष साझेदारी है, जो सदियों पुराने संपर्कों पर आधारित है और जिसे व्यापारिक संबंधों तथा लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों ने मज़बूती प्रदान की है। आधुनिक काल में, हमारा संबंध एक रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुआ है, जो विविध क्षेत्रों में मज़बूत सहयोग की विशेषता रखता है।
भारत और ओमान के बीच उत्कृष्ट राजनीतिक संबंध हैं। उच्चतम स्तर पर होने वाले लगातार दौरे, जिनके बाद मंत्रिस्तरीय और अधिकारियों के स्तर पर बातचीत होती है, हमारे द्विपक्षीय साझेदारी की गहराई को दर्शाती हैं। खाड़ी क्षेत्र में हमारे सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक, ओमान के साथ भारत के संबंध व्यापक हैं और इसमें व्यापार और निवेश, समुद्री सहयोग और कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा, कृषि और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं। मैं द्विपक्षीय सहयोग के इनमें से कुछ क्षेत्रों पर संक्षेप में बात करूंगा।
व्यापार और निवेश संबंध ओमान के साथ हमारे संबंधों के मुख्य स्तंभ हैं। वित्त वर्ष 2024-2025 में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 10.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा है। द्विपक्षीय निवेश प्रवाह भी मज़बूत रहे हैं, जैसा कि भारत और ओमान दोनों में स्थापित कई संयुक्त उद्यमों से स्पष्ट होता है। ओमान में कई भारत-ओमान संयुक्त उद्यम मौजूद हैं, जो देश की आर्थिक वृद्धि और विकास में योगदान दे रहे हैं।
भारत और ओमान के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग है जिसमें संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और एक-दूसरे के यहां दौरे शामिल हैं। हाल के सालों में, दोनों देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग किया है।
ओमान में 675,000 से ज़्यादा लोगों का एक जीवंत भारतीय समुदाय है, जो ओमान को अपना दूसरा घर मानते हैं और उन्होंने ओमान की अर्थव्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। वे हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले एक जीवंत सेतु का काम करते हैं और हमारे रिश्तों को मज़बूत बनाते हैं।
यात्रा के अलग-अलग पहलुओं की बात करें तो, माननीय प्रधानमंत्री ओमान के महामहिम सुल्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की व्यापक समीक्षा करेंगे और आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपने दौरे के दौरान व्यापार मंच पर दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं को संबोधित करेंगे और ओमान में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।
इस चरण में मैं आपको सूचित कर सकता हूँ कि दौरे के दौरान हस्ताक्षर किए जाने वाले कई दस्तावेज़ अपनी अंतिम चरणों में हैं। इन विभिन्न दस्तावेज़ों के क्षेत्रों और अन्य विवरण, जिनके हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है, यात्रा के बाद साझा किए जाएंगे।
आखिर में, मैं यह कह सकता हूं कि 2023 में ओमान के महामहिम सुल्तान की भारत की ऐतिहासिक यात्रा के बाद, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ओमान की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में मिली गति को और आगे बढ़ाएगी, और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के इस महत्त्वपूर्ण 70वें वर्ष में ओमान के साथ हमारे रणनीतिक संबंधों को और मज़बूत करेगी। इससे हमारी रणनीतिक साझेदारी मज़बूत होगी, सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और मज़बूत होंगे।
धन्यवाद। और यदि कोई प्रश्न हों, तो मुझे उनका उत्तर देने में खुशी होगी।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। इसी के साथ आपके सवालों की ओर बढ़ते हैं।
मेघा शर्मा, न्यूजएक्स: नमस्कार महोदय। ओमान और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बारे में जानकारी चाहती हूं। क्या प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान उस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे? और क्या वाणिज्य मंत्री भी उस व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ यात्रा कर रहे हैं जिसके बारे में आप बात कर रहे थे?
अखिलेश सुमन, डीडी न्यूज़: महोदय मैं डीडी न्यूज़ से अखिलेश सुमन हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जॉर्डन जा रहे हैं। जॉर्डन इज़राइल के ठीक बगल में है और गाज़ा शांति की बात हो रही है, किस तरीके से वहां सुरक्षा दी जाएगी, किस तरीके से पुनर्निर्माण होगा, इस पर भी बातचीत रही है। डोनाल्ड ट्रम्प का भी प्रस्ताव आया है। तो क्या प्रधानमंत्री जॉर्डन में जब बात करेंगे, तो इन मुद्दों पर भी बात करेंगे अपनी तरफ से भी कोई प्रस्ताव देंगे या उसमें शामिल होने की बात करेंगे?
ऋषभ, टाइम्स नाउ: नमस्कार महोदय, मैं टाइम्स नाउ से ऋषभ हूं। प्रधानमंत्री ओमान के दौरे पर हैं, और ऐसी रिपोर्टें हैं कि ओमान ने अपनी निवृत्त जगुआर विमानों की फ्लीट भारत को सौंपने पर सहमति जताई है, जिसका उपयोग भारत अपनी मौजूदा जगुआर फ़्लीट के स्पेयर पार्ट्स के लिए कर सकता है। अगर आप इस पर अधिक जानकारी दे सकें?
सिद्धांत सिब्बल, विऑन: नमस्ते महोदया। मेरा सवाल यह है कि ओमान और जॉर्डन दोनों ओआईसी यानी इस्लामिक देशों के संगठन का हिस्सा हैं। इस समूह का उपयोग पाकिस्तान ने अपनी भारत-विरोधी प्रचार गतिविधियों के लिए किया है। भारतीय पक्ष ओआईसी के गलत इस्तेमाल और पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के मुद्दे पर दोनों देशों को कितना जागरूक करेगा?
आयुषी अग्रवाल, एएनआई: नमस्ते, मैं एनएनआई से आयुषी अग्रवाल हूं। प्रधानमंत्री की इथियोपिया यात्रा के दौरान, क्या अगले भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन पर कोई चर्चा होगी?
श्री अरुण चटर्जी, सचिव (सीपीवी एवं ओआईए): देखिए, भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर हम सभी बहुत ही आशावादी हैं। दोनों पक्षों की टीमें इसके शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, इनमें से कई दस्तावेज़ अभी अंतिम रूप दिए जाने के विभिन्न चरणों में हैं और दोनों पक्षों की मंज़ूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि अगर इस दौरे के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो इससे भारत और ओमान के बीच आर्थिक संबंध और मज़बूत होंगे और यह भारत-ओमान व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों के इतिहास में एक नया शुरू करेगा।
अब, स्पेयर पार्ट्स के हस्तांतरण को लेकर आई हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में। हम आपको सूचित कर सकते हैं कि रिपोर्ट के कुछ तत्त्व पूरी तरह सही नहीं थे। ओमान की रॉयल एयर फोर्स पहले जगुआर जेट विमानों का संचालन करती थी, लेकिन उन्हें कुछ समय पहले सेवा से निवृत्त कर दिया गया था। अब, इनके पास इन विमानों के कई स्पेयर पार्ट्स मौजूद हैं, जिन्हें वे निकट भविष्य में हमें हस्तांतरित करने के लिए तैयार हैं। और हमें उम्मीद है कि उन स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति आने वाले दिनों में होने की संभावना है।
जहां तक, सिद्धांत, आपका सवाल है। देखिए, ओमान और जॉर्डन दोनों के साथ हमारा संबंध अलग महत्त्व रखता है। जैसा कि मैंने अपनी बातों में उल्लेख किया, नेता क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी रुचि के आधार पर चर्चा करेंगे। इस समय मैं यह नहीं बता सकता कि किन-किन मुद्दों पर चर्चा होगी। शायद, यात्रा के बाद हम आपको बता पाएंगे कि दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान कौन-कौन से क्षेत्रीय मुद्दे सामने आए हो सकते हैं।
डॉ. नीना मल्होत्रा, सचिव (दक्षिण): धन्यवाद। आपने प्रश्न किया कि क्या दोनों आपस में फिलिस्तीन या गाज़ा पर बात करेंगे। मैं यह तो नहीं जानती जब वो मिलेंगे तो क्या बातचीत करेंगे, लेकिन ऐसा माना जाता है कि जब दो देशों के नेता मिलते हैं, तो सभी मुद्दों पर चर्चा होती है। द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा होती है, क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होती है। तो हम... हो सकता है कि दोनों नेता इन.. इन मामलों पर चर्चा करें।
गाज़ा शांति योजना के बारे में, हमने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर का स्वागत किया है। और आप हमारी स्थिति से वाकिफ हैं। हमने शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। हमारे केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री ने भाग लिया था और हम आम तौर पर स्थायी और न्यायपूर्ण शांति बनाने की दिशा में किसी भी प्रयास का समर्थन करते हैं। धन्यवाद।
इथियोपिया के बारे में, बेशक इथियोपिया अफ्रीका का एक अहम देश है। यह अफ्रीकी संघ का हिस्सा है, और वास्तव में यही अफ्रीकी संघ का मुख्यालय है। बंजुल फॉर्मूला के दौरान भारत–अफ्रीका फ़ोरम शिखर सम्मेलन के कुछ संस्करण इथियोपिया में आयोजित किए गए थे। मुझे नहीं पता कि आगामी शिखर सम्मेलन के संबंध में क्या-क्या चर्चाएं होंगी। हां, लेकिन मुझे यह पता है कि हम भारत–अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के अगले संस्करण के आयोजन के लिए अपने अफ्रीकी साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। तो जैसे ही कोई बात ठोस रूप लेगी, हम निश्चित रूप से आपसे फिर संपर्क करेंगे। धन्यवाद।
येशी सेली, बिज़नेस इंडिया: मैं बिज़नेस इंडिया से येशी सेली हूं। मेरा सवाल यह है कि एफटीए (मुक्त व्यापार समझौते) के संदर्भ में एक बड़ी बाधा यह है कि ओमान 'ओमानाइज़ेशन' की बात करता है, जिसके तहत वे काम के लिए केवल अपने नागरिकों को ही प्राथमिकता देना चाहते हैं, जबकि वहां एक बड़ा भारतीय समुदाय भी मौजूद है। तो क्या वहां भारतीय श्रमिकों के हितों की रक्षा को लेकर भी बातचीत होगी? साथ ही, तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनज़र, क्या हम ओमान से भारत के लिए ऊर्जा आयात बढ़ाने जा रहे हैं?
नीरज, न्यूज़18 इंडिया: महोदया, मेरा सवाल यह है कि इथियोपिया में भारत तीन बड़े निवेशक में से एक है, एफडीआई की अगर बातचीत करें, विदेशी निवेशक... निवेशक की बात करें, तो क्या भारत इसको और बढ़ाने को लेकर भी आगे देख रहा है इस दौरे के दौरान? एफडीआई?
नीरज दुबे, प्रभासाक्षी: नमस्कार महोदय, मैं प्रभासाक्षी से नीरज दुबे हूं। महोदय, जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान तीनों ही में चीन का अच्छा वहां पर प्रभाव है, वहां पर तीनों ही चीन के बीआरआई के सदस्य भी हैं। तो प्रधानमंत्री की इस यात्रा के ऐसे कौन से महत्त्वपूर्ण पहलू हैं जो कि इन तीनों देशों की चीन पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगे?
और दूसरे इथियोपिया के साथ महोदय, व्यापार असंतुलन बना हुआ है, तो इस यात्रा में क्या उस पर भी कुछ बातचीत होनी है?
डॉ. नीना मल्होत्रा, सचिव (दक्षिण): धन्यवाद। जहां तक इथियोपिया का संबंध है, मेरा मानना है कि यह यात्रा ऐसे महत्त्वपूर्ण समय पर हो रही है जब इथियोपिया ने व्यापक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की है। वे सभी प्रमुख क्षेत्रों को खोल रहे हैं, जिसमें बैंकिंग क्षेत्र, पूंजी बाज़ार और अन्य शामिल हैं। तो भारत अपने विकास सहयोग और आर्थिक सहभागिता को इथियोपिया की प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है, और हम निश्चित रूप से ऐसे नए सहयोग के अवसर तलाशना चाहेंगे जो दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी हों।
आप बिल्कुल सही कह रहे हैं हमारे निवेशों के बारे में। मुझे लगता है कि वस्त्र क्षेत्र में हमारे बड़े निवेश हैं, और अन्य क्षेत्रों में भी हमारे निवेश मौजूद हैं। भारत से इथियोपिया में 175 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं। तो इसमें निश्चित रूप से अवसर की संभावना है।
इथियोपिया के साथ व्यापार के संबंध में, हम आमतौर पर अपनी ओर से फार्मास्युटिकल का निर्यात करते हैं। वास्तव में, उस देश को हमारे कुल निर्यात का लगभग 40% फार्मास्युटिकल ही हैं। और वहीं से हम दालें और फलियां खरीदते हैं। इस समय, व्यापार का आकार लगभग 550 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। तो दोनों पक्ष निश्चित रूप से द्विपक्षीय व्यापार, यानी उस देश को निर्यात और वहां से आयात दोनों को बढ़ाने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद।
श्री अरुण चटर्जी, सचिव (सीपीवी और ओआईए): तो, जैसा कि आप जानते हैं, मैंने बताया था कि ओमान में 675,000 से ज़्यादा भारतीय हैं, जिनमें से 5 लाख से थोड़े ज़्यादा भारतीय श्रमिक ओमान में काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या निजी क्षेत्रों में काम कर रही है। अब, वे क्षेत्र जहां हमारे कामगार मौजूद हैं, उनमें निर्माण, विनिर्माण, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह और शिपिंग, तथा पर्यटन शामिल हैं। तो अगर मैं इसे लगातार बताता रहूं तो यह एक बहुत लंबी सूची बन जाएगी।
हां, ओमानाइज़ेशन मौजूद है, लेकिन हमारा मानना है कि ओमान सरकार द्वारा अपनाई गई इस नीति के बावजूद, यह उम्मीद की जा रही है कि ओमान अपनी बड़ी बुनियादी ढांचा योजनाओं और सतत आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए कुशल व्यक्तियों को रोज़गार देना जारी रखेगा। इसलिए, हमारा दृष्टिकोण और अपेक्षा यह है कि इन सभी क्षेत्रों में मांग बनी रहेगी, और ओमान सरकार इन विशेष क्षेत्रों में और आने वाले वर्षों में नए उभरते क्षेत्रों में भी भारतीयों को रोज़गार देती रहेगी।
ऊर्जा सहयोग के सवाल पर आते हैं। अब, ओमान के साथ पारंपरिक हाइड्रोकार्बन व्यापार हमारे द्विपक्षीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण घटकों में से एक है। हम हरित ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में नए सहयोग के अवसरों की भी तलाश कर रहे हैं। हम ओमान से कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आयात करते हैं, और ये निर्यात काफी मात्रा में होते हैं, और हम ओमान को पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात भी करते हैं। इसलिए, हमें उम्मीद है कि भारत और ओमान के बीच यह हाइड्रोकार्बन सहयोग आने वाले सालों में भी जारी रहेगा।
भारत के किसी भी देश के साथ संबंधों को किसी तीसरे देश के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत अपने संबंधों को स्वयं बनाता है, चाहे वह जॉर्डन हो या ओमान, और यह किसी तीसरे देश के साथ उस देश के संबंधों में जो कुछ भी हो रहा है, उससे स्वतंत्र होता है। तो इसी सिद्धांत पर, मेरा यह सुझाव रहेगा कि हम ओमान और जॉर्डन दोनों के साथ अपने द्विपक्षीय सहयोग को जारी रखेंगे।
श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो इसके साथ ही, देवियों और सज्जनों, हम इस प्रेस वार्ता को समाप्त करते हैं। यह यात्रा 15 तारीख से शुरू हो रही है, हम यात्रा के प्रत्येक चरण और सभी विकास के बारे में आपको सूचित करते रहेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।
नई दिल्ली
12 दिसम्बर 2025