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जी-7 शिखिर वार्ता के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने दो सत्रों में शिरकत की

जून 13, 2021

जी-7 शिखिर वार्ता के ‘आऊटरीच सत्रों’ के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दो सत्रों में हिस्सा लिया। ये दोनों सत्र ‘बिल्डिंग बैक टूगैदर–ओपन सोसइटीज एंड इकोनॉमिक्स’ (संयुक्त पुनर्निर्माण – मुक्त समाज और अर्थव्यवस्थायें) और ‘बिल्डिंग बैक ग्रीनरः क्लाईमेट एंड नेचर’ (संयुक्त हरित पुनर्निर्माणः जलवायु परिवर्तन और प्रकृति) विषयों पर आयोजित किए गए थे।

‘ओपन सोसाइटीज’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में आमंत्रित प्रधानमंत्री ने स्मरण किया कि किस तरह लोकतंत्र और स्वतंत्रता, भारत की सभ्यता का एक हिस्सा थे। उन्होंने कई नेताओं द्वारा व्यक्त की गई चिंता को साझा किया कि खुले समाज विशेष रूप से दुष्प्रचार और साइबर हमलों की चपेट में हैं, और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया कि साइबर स्पेस लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक अवसर बना रहे हैं न कि इसे विकृत करने के लिए । वैश्विक शासन संस्थानों की गैर-लोकतांत्रिक और असमान प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए, प्रधान मंत्री ने बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार का आह्वान किया, जो खुले समाजों के लिए प्रतिबद्धता का सबसे अच्छा संकेत है। बैठक के अंत में नेताओं ने 'ओपन सोसाइटीज स्टेटमेंट' को अपनाया।

जलवायु परिवर्तन के सत्र में, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पृथ्वी के वातावरण, जैव-विविधता और महासागरों की सुरक्षा वे देश नहीं कर सकते, जो अलग-अलग इकाइयों के रूप में प्रयास करते हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की अटल प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुये प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय रेल विभाग ने तय किया है कि 2030 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत पेरिस की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने वाला एकमात्र जी-20 देश है। उन्होंने भारत द्वारा पोषित दो प्रमुख वैश्विक पहलों यानी सीडीआरआई और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की बढ़ती प्रभावशीलता का भी हवाला दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विकासशील देशों को जलवायु वित्त तक बेहतर पहुंच की आवश्यकता है, और जलवायु परिवर्तन के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया जिसमें समस्या के सभी आयाम शामिल हों- शमन, अनुकूलन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु वित्तपोषण, इक्विटी, जलवायु न्याय और जीवन शैली में परिवर्तन।

वैश्विक एकजुटता तथा एकता, खासतौर से मुक्त और लोकतांत्रिक समाजों व अर्थव्यवस्थाओं के लिये स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक बहाली की चुनौतियों से निपटने के लिये प्रधानमंत्री के संदेश का सभी नेताओं ने स्वागत किया।

नई दिल्ली
जून 13, 2021
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