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भारत-अमेरिका मंत्री स्तरीय बैठक के बाद जारी प्रेस वक्तव्य/मीडिया से बातचीत में विदेश मंत्री की टिप्पणी

जुलाई 28, 2021

मीडिया से आए मेरे मित्रों,

सेक्रेटरी ब्लिंकेन और मैंने अभी -अभी अपनी चर्चा समाप्त की है मैं। इस वार्ता की जानकारी देने के अवसर पर आप सभी का स्वागत करता हूं। मैं सबसे पहले यह कहना चाहूंगा कि मुझे श्री ब्लिंकेन का दिल्ली में फिर से स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। हमारी बैठक एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुई है जब प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की आवश्यकता है। हमारी द्विपक्षीय साझेदारी एक ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जो हमें काफी महत्व वाले मुद्दों से पूरे सहयोग के साथ निपटने में सक्षम बनाती है। यह बड़े संतोष की बात है। आप सभी हाल के वर्षों में हमारे संबंधों में जिस स्तर पर बड़े बदलाव आए हैं उससे भलिभांति अवगत हैं। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन की कई बार आपस में बातचीत हुई है और दोनों ने इस साल क्वाड, जी 7 और जलवायु नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लिया है। मेरे ख्याल से सेक्रेटरी ब्लिंकेन और मैं भी इस साल चौथी बार मिल रहे हैं। विदेश मंत्रियों के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नियमित रूप से समीक्षा करें और अपने शीर्ष नेतृत्व को संबंधों में हुई प्रगति से अवगत कराते रहें। ठीक यही आज हमने किया है। अब चाहे वह कोविड चुनौती से निबटने के तरीके हों, रक्षा और सुरक्षा पर सहयोग करना हो, व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करना हो, जलवायु परिवर्तन को संबोधित करना या शिक्षा और नवाचार का विस्तार करना हो, इन सभी के संदर्भ में मैं पूरी सच्चाई के साथ यह कह सकता हूं कि 2021 में बहुत कुछ हुआ है।

कोविड का मसला स्वाभाविक रूप से विशेष प्राथमिकता थी, इसलिए मैं सबसे पहले भारत में टीके बनाने के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला जारी रखने के लिए बाइडेन प्रशासन का आभार व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही कोविड की दूसरी लहर के समय अमेरिका से जिस तरह का सहयोग मिला वह सच में असाधारण था। आज हमने टीका उत्पादन बढ़ाने पर मुख्य रूप से चर्चा की जिससे इसे पूरी दुनिया में कम कीमत पर और आसानी से हर कहीं उपलब्ध कराया जा सके। हमने कोविड के कारण उत्पन्न हुई यात्रा चुनौतियों पर भी चर्चा की। छात्रों के मामले में भी अमेरिका ने बहुत आगे बढ़ कर काम किया है। अमरीकी विदेश विभाग और अमरीकी दूतावास ने इस संबंध में जिस तरह से परेशानिशां झेलीं हैं मैं उसकी भी सराहना करता हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अन्य यात्रियों के बारे में भी उनका रवैया ऐसे ही सहानुभूतिपूर्ण रहेगा।

हमने क्षेत्रीय चिंताओं, बहुप्रतिनिधित्व वाली संस्थानों के साथ ही अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, कैरिबियाई और दक्षिण-प्रशांत क्षेत्र में भारत के प्रभाव के विस्तार पर भी लंबी चर्चा की जिसने स्वाभाविक रूप से साझा एजेंडा को व्यापक बनाया है।मैं बताना चाहूंगा कि हमने जिन मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान दिया उनमें अफगानिस्तान, हिंद-प्रशांत और खाड़ी क्षेत्र प्रमुख थे। अफगानिस्तान के संबंध में यह आवश्यक है कि सभी पक्षों द्वारा शांति वार्ता को गंभीरता से लिया जाए। दुनिया एक स्वतंत्र, संप्रभु,लोकतांत्रिक और स्थिर अफगानिस्तान देखना चाहती है जो खुद शांत हो और पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्वक रहे लेकिन उसकी स्वतंत्रता व संप्रभुता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब वह दुर्भावनापूर्ण प्रभावों से मुक्त होगा। इसी तरह किसी भी पक्ष की ओर से अपनी एकतरफा इच्छा का थोपा जाना स्पष्ट रूप से लोकतांत्रिक नहीं होगा और इससे कभी स्थिरता नहीं आ सकती और न ही ऐसे प्रयास कभी सही ठहराए जा सकते हैं। पिछले दो दशकों में विशेष रूप से महिलाओं, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता के रूप में अफगान नागरिक समाज को मिले लाभ स्वयं में स्पष्ट हैं। हमें उन्हें संरक्षित रखने के लिए सामूहिक रूप से काम करना चाहिए। अफगानिस्तान को न तो आतंकवाद का पनाहगाह बनने देना है और न ही शरणार्थियों का घर। भारत के दूसरी ओर हिंद प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, विकास और समृद्धि चुनौतियों का एक अलग सेट प्रस्तुत करता है। क्वाड फ्रेमवर्क के तत्वावधान में, हम समुद्री सुरक्षा, एचएडीआर आतंकवाद का मुकाबला करने, संपर्क और बुनियादी ढांचे, साइबर और डिजिटल चिंताओं, कोविड 19 प्रतिक्रिया, जलवायु कार्रवाई, शिक्षा तथा लचीली और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के विषयों को सुलझाने में लगे हुए हैं।

सेक्रेटरी ब्लिंकेन और मैंने इन सभी मुद्दों पर न केवल आगे सहयोग के अवसरों पर चर्चा की बल्कि यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का पालन करने के महत्व पर भी चर्चा की। क्वाड और अन्य जगहों पर अधिक सहयोग के साथ द्विपक्षीय रूप से काम करने की हमारी क्षमता समग्र रूप से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को लाभान्वित करती है। भारत के विस्तृत पड़ोसी क्षेत्र का विकास भी स्वाभाविक रूप से हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता, जहां हमारे राजनीतिक, आर्थिक और सामुदायिक हित स्पष्ट दिखाई देते हैं हमारी साझा चिंता थी। म्यांमार के संबंध में मैंने वहां लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ आसियान पहलों के समर्थन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता से अवगत कराया। भारत और अमेरिका दोनों ही वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं। यूएनएससी के समक्ष रखे गए कुछ एजेंडे और साथ ही बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार के बारे में हमारे दृष्टिकोण भी हमारी चर्चाओं में शामिल थे। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए हम संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क के दायरे में, द्विपक्षीय रूप से और अन्य निकायों में साझा प्रयास करते रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि दुनिया कभी भी सीमा पार आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेगी।

जहां तक ​​जलवायु परिवर्तन का संबंध है, प्रधान मंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन की ओर से अप्रैल में शुरू की गई एजेंडा-2030 साझेदारी पेरिस लक्ष्यों को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है इसलिए इसके स्वच्छ ऊर्जा और वित्त जुटाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

हमारी रणनीतिक साझेदारी की व्यापक और वैश्विक प्रकृति को देखते हुए यह उम्मीद की जानी चाहिए कि हमारे दोनों देश प्रमुख समकालीन मुद्दों पर बातचीत करते रहेंगे। इस तरह की बातचीत न केवल एक लोकतांत्रिक, विविध और बहु-ध्रुवीय विश्व में आवश्यक है बल्कि इस बात की पुष्टि भी करती है कि हम एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं। हम इस बहुलवाद को अपने स्वयं के संदर्भों, विश्वासों और संस्कृतियों के नजरिए से देखते हैं।

सेक्रेटरी ब्लिंकेन और मैं उस यात्रा का हिस्सा रहे हैं जिसने आज हमारे दोनों देशों को इतना करीब ला दिया है। हमारे संबंध, स्पष्ट रूप से हमारे राष्ट्रीय और पारस्परिक हितों की अच्छी तरह से पूर्ति करते हैं। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सहयोग दुनिया और हमारे समय के बड़े मुद्दों के नजरिए से भी काफी मायने रखते हैं। यह कहने के साथ ही मैं आपसे एंटनी, आज की हमारी वार्ता पर अपनी राय देने के लिए कहता हूं और मैं सचिव से उनकी टिप्पणी के लिए अनुरोध करता हूं।

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