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रूस के राष्‍ट्रपति की भारत यात्रा पर मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन (5 दिसंबर, 2014)

दिसम्बर 05, 2014

सरकारी प्रवक्‍ता : दोस्‍तो नमस्‍कार तथा आज अपराह्न यहां इस वार्ता के लिए आने के लिए आप सभी का बहुत - बहुत धन्‍यवाद, जो स्‍वाभाविक प्रारूप में है। मेरे साथ यहां मेरे सहयोगी श्री अजय बिसारिया मौजूद हैं जो संयुक्‍त सचिव (यूरेशिया) हैं। मुझे दो घोषणाएं करनी हैं, जिसके पश्‍चात मैं संयुक्‍त सचिव (यूरेशिया) से उद्घाटन टिप्‍पणी करने के लिए निवेदन करूंगा; और मुझे जो घोषणाएं करनी हैं उस पर या किसी अन्‍य विषय पर मैं किसी भी प्रश्‍न के उत्‍तर दूंगा; और फिर हम वार्ता के इस भाग को समाप्‍त करेंगे।

मुझे जो पहली घोषणा करनी है वह इस समय मालदीव को प्रदान की जा रही भारतीय सहायता से संबंधित है। आप में से जो लोग मालदीव में स्थिति को फॉलोअप कर रहे हैं वे संभवत: जानते हैं कि पिछली शाम मालदीव में जो एक मात्र डीसेलिनेशन प्‍लान है,उसमें आग लग गई थी, जिसके पश्‍चात माले में पानी की उपलब्‍धता की दृष्टि से भारी संकट उत्‍पन्‍न हो गया है। मैं समझता हूं कि इस समस्‍या के दूर होने में कुछ समय, लगभग एक सप्‍ताह का समय लग जाएगा। इसलिए पिछली रात मालदीव की सरकार ने भारत सरकार से संपर्क किया। विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज ने देर रात को मालदीव के अपने समकक्ष से एक फोन काल रिसीव किया जब आप में से अधिकांश लोग संभवत: सो रहे होंगे। उन्‍होंने जल्‍दी से कार्रवाई की तथा प्रधानमंत्री महोदय तथा अन्‍य प्राधिकारियों से क्लियरेंस प्राप्‍त की ताकि सुनिश्चित हो कि आज सबेरे 07:30 बजे तक, जब आप सोकर उठे हैं, पेयजल की दृष्टि से मालदीव को सहायता प्रदान करने के लिए पहली भारतीय फ्लाइट उड़ान भर चुकी थी। हम चाहते हैं कि आज पांच फ्लाइट भेजें। पहली उड़ान आई एल 76 थी। कुल पांच फ्लाइट के माध्‍यम से आज 200 टन पेयजल भेजा जाएगा। पहली फ्लाइट पहुंच चुकी है तथा मैं समझता हूं कि दूसरी फ्लाइट शीघ्र ही पहुंचने वाली होनी चाहिए; और हम तीन और फ्लाइटें भेजेंगे। इसी तरह कल भी हम पांच फ्लाइटें भेजेंगे। इस प्रकार पेयजल से लदी 10 फ्लाइटें भेजी जाएंगी। हमें मालदीव भेजने के लिए दो जलयानों की भी व्‍यवस्‍था की है। आई एन एस सुकन्‍या जो कोलंबो में था, मालदीव के लिए प्रस्‍थान कर चुका है तथा आज देर रात यह वहां पहुंच जाएगा। इसमें दो रिवर्स ऑस्‍मोसिस प्‍लांट हैं जो एक दिन में लगभग 20 टन पानी के लिए काम कर सकते हैं। इसके अलावा हमने एक अन्‍य भारतीय पोत से अनुरोध किया है जो आई एन एस दीपक है, जो कल प्रस्‍थान करेगा तथा परसों माले पहुंचेगा। जैसा कि आप देख सकते हैं, संकट की इस घड़ी में सार्क के सदस्‍य तथा भारत के घनिष्‍ठ साथी को अपनी सहायता प्रदान करने के लिए हमने बहुत बड़ा प्रयास शुरू किया है। यदि आप में से कोई और जानकारी चाहता है तो मैं उसे प्रदान करने के लिए तैयार हूं। यह घोषणा नंबर एक है। मुझे जो दूसरी घोषणा करनी है वह 10 एवं 11 दिसंबर को रूसी परिसंघ के राष्‍ट्रपति ब्‍लादिमीर पुतीन की भारत की आगामी यात्रा से संबंधित है। वह भारत और रूस के बीच 15वीं वार्षिक शिखर बैठक के लिए आ रहे हैं। मैं जो करूंगा वह यह है कि मैं अपने सहयोगी श्री अजय बिसारिया से निवेदन करूंगा कि वह आप सभी को इस यात्रा की विस्‍तृत रूपरेखा के बारे में बताएं तथा इस बारे में भी बताएं कि हम इससे परिणाम की दृष्टि से क्‍या उम्‍मीद रखते हैं। इसके पश्‍चात यह मंच उन घोषणाओं पर प्रश्‍न पूछने के लिए खुला होगा जो हमने की है। अजय बिसारिया, संयुक्‍त सचिव (यूरेशिया) : अकबर, आपका धन्‍यवाद। रूसी परिसंघ के राष्‍ट्रपति महामहिम श्री व्‍लादिमीर पुतीन 15वीं भारत - रूस वार्षिक शिखर बैठक के लिए 10 और 11 दिसंबर को भारत का आधिकारिक दौरा करेंगे। उनके साथ एक उच्‍च स्‍तरीय आधिकारिक एवं कारोबारी शिष्‍टमंडल आ रहा है। यात्रा के दौरान राष्‍ट्रपति पुतीन प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के साथ प्रतिबंधित एवं शिष्‍टमंडल दोनों प्रारूप में विस्‍तृत बातचीत करेंगे। वह भारत के राष्‍ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी से मुलाकात करेंगे, जो डिग्‍नीटरी के सम्‍मान में दावत देंगे। उम्‍मीद है कि दोनों नेता दोनों देशों की प्रमुख कंपनियों के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारियों से संयुक्‍त रूप से बातचीत भी करेंगे।

भारत - रूस वार्षिक शिखर बैठक की प्रक्रिया राष्‍ट्रपति पुतीन के नेतृत्‍व में उस समय शुरू हुई थी जब वह अक्‍टूबर 2000 में भारत के दौरे पर आए थे। यह भारत - रूस संबंधों का उच्‍च स्‍तर पर जायजा लेने तथा उनको दिशा एवं गति प्रदान करने के लिए दोनों देशों के लिए बहुत ही कारगर तंत्र साबित हुआ है। पिछली शिखर बैठक मास्‍को में उस समय हुई थी जब पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह अक्‍टूबर, 2013 में रूस के दौरे पर गए थे।

दोनों देशों के बीच आज ऐसी साझेदारी है जिसे हम विशेष एवं सामरिक साझेदारी कहते हैं। राष्‍ट्रपति पुतीन को भारत के एक करीबी दोस्‍त तथा इस सामरिक साझेदारी के शिल्‍पकार के रूप में जाना जाता है। पिछले 14 वर्षों में महत्‍वपूर्ण एवं विविध क्षेत्रों में काफी मात्रा में यह सुदृढ़ हुई है। वास्‍तव में द्विपक्षीय बातचीत के लिए वार्षिक शिखर बैठक विस्‍तृत बहुस्‍तरीय तंत्र या मशीनरी की शीर्ष संस्‍था है, सबसे बड़े तंत्रों में से एक है, जिसे हमने दुनिया के किसी देश के साथ स्‍थापित किया है। दोनों देशों के बीच उच्‍च स्‍तरीय वार्ता के लिए अन्‍य प्रमुख संस्‍थानिक तंत्र इस प्रकार हैं - दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की सह अध्‍यक्षता में सैन्‍य, तकनीकी सहयोग पर एक अंतर-सरकारी आयोग; तथा व्‍यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय एवं सांस्‍कृतिक सहयोग पर एक अंतर सरकारी आयोग जिसकी सह अध्‍यक्षता हमारी विदेश मंत्री उप प्रधानमंत्री रोगोजीन के साथ करती हैं। हमारा भारत - रूस व्‍यापार एवं निवेश फोरम भी है, जिसकी सह अध्‍यक्षता हमारे वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री तथा रूस के आर्थिक विकास मंत्री द्वारा की जाती है।

यह बहुत महत्‍वपूर्ण यात्रा है। यह राष्‍ट्रपति पुतीन एवं प्रधानमंत्री मोदी के बीच पहली वार्षिक शिखर बैठक होगी। दोनों नेता इस साल पहले भी दो बार मिल चुके हैं। पहली मुलाकात जुलाई में ब्राजील में ब्रिक्‍स शिखर बैठक के दौरान अतिरिक्‍त समय में हुई थी, जिसमें बहुत गर्मजोशी पूर्ण एवं मैत्री पूर्ण बातचीत हुई थी।

प्रधानमंत्री ने उस बैठक में बताया था कि भारत का हर बच्‍चा जानता है कि हमारा सबसे करीबी दोस्‍त रूस है। उनकी दूसरी बार मुलाकात 15 - 16 नवंबर को जी 20 शिखर बैठक के लिए आस्‍ट्रेलिया में हुई थी। प्रधानमंत्री जी ने 13 नवंबर को को म्‍यांमार में पूर्वी एशिया शिखर बैठक के दौरान अतिरिक्‍त समय में रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव से भी मुलाकात की थी। रूस भारत का चिरकालिक एवं पक्‍का साथी है। हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को सबसे अधिक महत्‍व देते हैं। हमारे प्रधानमंत्री महोदय रूस के साथ हमारे संबंध को देश के लिए विदेश नीति की एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में मानते हैं। गुजरात के मुख्‍य मंत्री के रूप में रूस की अपनी तीन यात्राओं के संबंध में उनके गर्मजोशी पूर्ण संस्‍मरण हैं तथा राष्‍ट्रपति पुतीन के साथ अपनी बातचीत से वह बहुत प्रसन्‍न होते हैं।

भारत में जब से नई सरकार सत्‍ता में आई है तब से हमने इस प्रमुख साझेदारी के साथ गहन आदान प्रदान किया है। रूस के उप प्रधानमंत्री रोगोजिन जून एवं नवंबर में नई दिल्‍ली आए थे। अपनी पिछली यात्रा के दौरान उप प्रधानमंत्री रोगोजिन ने हमारी विदेश मंत्री महोदया के साथ अंतर सरकारी आयोग के 20वें सत्र की सह अध्‍यक्षता की थी। हमारी विदेश मंत्री महोदया भी संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा तथा दुशांबे में संघाई सहयोग संगठन (एस सी ओ) की शिखर बैठक के दौरान अतिरिक्‍त समय में रूस के अपने समकक्ष विदेश मंत्री लावरो से भी मिल चुकी हैं। रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पत्रुशेव पिछले सप्‍ताह हमारे राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ बैठक के लिए नई दिल्‍ली आए थे।

रक्षा, परमाणु सुरक्षा तथा अंतरिक्ष सहित विज्ञान जैसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में भारत के लिए एक रूस एक महत्‍वपूर्ण साथी है। रूस हमारा प्राथमिक रक्षा साझेदार भी है तथा दशकों तक ऐसा बना रहेगा।

भारत एवं रूस के बीच द्विपक्षीय आर्थिक, वाणिज्यिक एवं निवेश संबंध बढ़ रहे हैं परंतु क्षमता से काफी कम हैं। 2013 में हमारा द्विपक्षीय व्‍यापार 10 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास था तथा अनुमान है कि 2014 में भी यह इतना ही रहेगा। हम व्‍यापार एवं निवेश के माध्‍यम से अपने आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए अनुकूल स्थितियों का सृजन करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। हम रूस में हाइड्रोकार्बन की और अधिक परियोजनाओं में हिस्‍सा लेने के बहुत ही इच्‍छुक हैं।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही में भी काफी वृद्धि हुई है। हाल ही में घोषित ई - वीजा सुविधा रूस के नागरिकों को भी प्रदान की गई है तथा उम्‍मीद है कि इससे भारत आने वाले पर्यटकों की संख्‍या में और वृद्धि होगी। सांस्‍कृतिक आदान प्रदान भारत - रूस संबंधों का एक महत्‍वपूर्ण घटक है। इस साल भारत में ''रूसी संस्‍कृति महोत्‍सव'' मनाया जा रहा है तथा अगले साल रूस में ''भारतीय संस्‍कृति महोत्‍सव'' मनाया जाएगा।

रूस क्षेत्रीय, अंतर्राष्‍ट्रीय एवं बहुपक्षीय मुद्दों पर हमारे सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण वार्ताकारों मे से भी एक है। हमारे दोनों देश अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों में, संयुक्‍त राष्‍ट्र में तथा अन्‍य समूहों जैसे कि जी 20, ब्रिक्‍स, ई ए एस तथा भारत - रूस - चीन (रिक) में बहुत निकटता से काम करते हैं। उम्‍मीद है कि दोनों नेता क्षेत्रों की घटनाओं पर तथा ऐसे मंचों में सहयोग का विकास करने पर विचारों का आदान प्रदान करेंगे, जिनके हम सदस्‍य हैं। आतंकवाद से खतरा समेत महत्‍वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर रूस के साथ हमारे विचारों में एकरूपता या समानता है, विशेष रूप से हमारी साझे पड़ोस में बहु - ध्रुवीयता पर वैश्विक वास्‍तुशिल्‍प में एक महत्‍वपूर्ण घटक के रूप में तथा शीत युद्ध जैसे तनाव को दूर करने की आवश्‍यकता पर, जो वैश्विक संबंधों में अपने आप अधिकाधिक अभिव्‍यक्‍त हो रहा है। भारत ने स्‍पष्‍ट रूप से कहा है कि यह रूस के खिलाफ किसी प्रतिबंध का समर्थन नहीं कर सकता है।

राष्‍ट्रपति पुतीन की यात्रा एक उल्‍लेखनीय घटना है तथा उम्‍मीद है कि हमारे दोनों देशों के बीच मौजूद उत्‍कृष्‍ट द्विपक्षीय संबंधों को इससे एक नई गति प्राप्‍त होगी। इस शिखर बैठक का एक प्रमुख विषय अगले दशक के लिए हमारे संबंध के संयुक्‍त विजन के बारे में दोनों नेताओं द्वारा वर्णन होगा। यह गुणात्‍मक दृष्टि से नए स्‍तरों पर ले जाने के लिए हमारे दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने के लिए रोडमैप प्रदान करेगा। यह हमारे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को फिर से परिभाषित करने पर बहुत जोर देगा। रक्षा,परमाणु ऊर्जा, सीमा शुल्‍क, बैंकिंग एवं ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में शिखर बैठक में हस्‍ताक्षर के लिए अनेक दस्‍तावेज तैयार किए जा रहे हैं।

सरकारी प्रवक्‍ता : अजय, आपका धन्‍यवाद। शुरू करने से पूर्व मैं एक सुधार करना चाहता हूं। मुझे ज्ञात नहीं है कि मैंने 200 टन या20 टन कहा। और यदि मैंने 20 टन कहा है तो यह गलत है। पांच फ्लाइटों में 200 टन पानी भेजा जा रहा है। मालदीव के संबंध में मैंने जो घोषणा की है उस पर प्रश्‍न के लिए अब यह मंच खुला है तथा इसके बाद आप किसी भी मुद्दे पर प्रश्‍न पूछ सकते हैं।

प्रश्‍न : ... (अश्रव्‍य) ...

सरकारी प्रवक्‍ता : मैं एक बार पुन: स्‍पष्‍ट करने का प्रयास करूंगा। हो सकता है कि मैंने ठीक से न बताया हो। आज जो पांच फ्लाइटें भेजी जा रही हैं उनमें 200 टन पानी भेजा जा रहा है। कल भेजी जाने वाली पांच फ्लाइटों में और 200 टन पानी भेजा जाएगा। कल से यात्रा आरंभ करने वाले जलयान जब पहुंच जाएंगे तो आर ओ प्‍लांट से हर रोज 20 टन पानी उपलब्‍ध होगा। दो आर ओ प्‍लांट हैं,इसलिए पहले दिन 40 टन पानी उपलब्‍ध होगा तथा जब वहां दूसरा जलयान पहुंच जाएगा तो इसमें वृद्धि हो जाएगी।

प्रश्‍न : क्‍या हम अकेले पानी दे रहे हैं या कोई दूसरा देश भी ऐसा कर रहा है?

सरकारी प्रवक्‍ता : मुझे जानकारी नहीं है। निश्चित रूप से हम पहला देश हैं। मुझे जानकारी नहीं है कि दूसरे देश भी हैं या नहीं। जहां तक मुझे जानकारी है, अब तक हम एक मात्र देश हैं; और पानी एक मात्र ऐसी चीज है, जिसकी उनको इस समय जरूरत है। यदि मालदीव से संबंधित कोई और प्रश्‍न न हो तो हम किसी अन्‍य विषय पर आते हैं। हमें अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

प्रश्‍न : आज जम्‍मू एवं कश्‍मीर में कई आतंकी हमले हुए हैं। इसके अलावा हमने देखा है कि कल इसके साथ ही हाफिज सईद ने लाहौर में बहुत बड़ी रैली की थी। वह आज फिर बोला। पाकिस्‍तान में जो हुआ है तथा आज जो आतंकी हमले हुए हैं उस पर क्‍या भारत सरकार ने कोई प्रतिक्रिया की है?

सरकारी प्रवक्‍ता : मैं जिन क्षेत्रों में फोकस करता हूं उनमें आपको जानकारी प्रदान करने का प्रयास करूंगा तथा जो भारत के अंदर घटित नहीं हुआ है परंतु जो भारत के बाहर घटित हुआ है तथा जिसका देश के अंदर हमारे ऊपर प्रभाव हो सकता है। इस प्रकार मैं केवल आपके प्रश्‍न के उस भाग का उत्‍तर दूंगा। अब यदि आप यह चाहते हैं कि मैं यह कहूं कि इस तथाकथित जमात उद दावा में जो घट रहा है उसे हमें किस रूप में देखते हैं, तो मेरी समझ से मुझे इसे आतंकवाद के मुख्‍य धारा में शामिल होने के अलावा और कुछ नहीं कहना चाहिए। अब मुझे यह बताने का प्रयास करने की इजाजत दें कि मैंने 'आतंकवाद को मुख्‍य धारा में शामिल करना'क्‍यों कहा। यह घटना वहां घटी है जो पाकिस्‍तान में एक राष्‍ट्रीय स्‍मारक है। यह घटना वहां हुई है जहां भारी संख्‍या में पुलिसकर्मी तैनात थे। यह घटना वहां हुई है जिसका विज्ञापन पूरे पाकिस्‍तान में दिया गया था; तथा यह घटना ऐसे संगठन द्वारा हुई है जो न केवल भारत द्वारा अपितु संयुक्‍त राज्‍य, यूनाइटेड किंगडम तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा यू एन संकल्‍प 1267 के तहत प्रतिबंधित है। इसके अलावा इसे ऐसे व्‍यक्ति द्वारा संबोधित किया गया, जिसे उसी संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद संकल्‍प अर्थात यू एन संकल्‍प 1267के तहत आतंकवादी के रूप में नामित किया गया है। यदि किसी नामोदिष्‍ट आतंकी संगठन या किसी नामोदिष्‍ट आतंकी संस्‍था को इस तरह की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, इस आशय की खबरें आई हैं कि इस संगठन एवं संस्‍था के लिए ट्रेन सेवाएं भी प्रदान की गई हैं। यह ऐसी आतंकी संस्‍था एवं आतंकवादी को मुख्‍यधारा में शामिल करने के अलावा कुछ भी नहीं है जो पूरी दुनिया में आतंकी के रूप में नामित है। स्‍पष्‍ट रूप से इसका अभिप्राय यह है कि यह वैश्विक मानदंडों की घोर अवहेलना है जो आतंकवाद के खिलाफ तैयार किए जा रहे हैं।

आप सभी का बहुत - बहुत धन्‍यवाद। इसी के साथ अब यह चर्चा समाप्‍त होती है।

(समाप्‍त)

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